Dost ki mom chudai sex story: मेरा नाम राजेंद्र है और मेरी उम्र २५ साल है। आज जो कहानी बताने जा रहा हूं वो मेरी दोस्त राजू की मम्मी के साथ चुदाई की कहानी है।
दोस्तों, राजू मेरा बहुत पुराना दोस्त है। मैं हमेशा उसके साथ अपनी हर एक बात शेयर करता हूं और साथ में बहुत मौज मस्ती भी करता हूं। राजू मेरी उम्र का ही है और हम दोनों में इतनी अच्छी बनती है कि घंटों बातें करके भी मन नहीं भरता। बीना जैन, जो राजू की माँ हैं, वो एक बेहद सेक्सी और आकर्षक महिला हैं। उनकी उम्र करीब ४२ साल है। वो बेहद सुंदर हैं, थोड़ी पुरानी सोच वाली लेकिन बहुत अच्छे व्यवहार और विचारों वाली औरत हैं। उनका फिगर ३६-३२-३४ का है। वो दूध जैसी सफेद रंगत वाली हैं और आज भी इतनी जवान और ताजा दिखती हैं कि कोई भी उन्हें देखकर मुग्ध हो जाए।
दोस्तों, मुझे चुदाई का बहुत शौक है। यह घटना मेरे साथ करीब एक साल पहले हुई थी। वैसे तो मैं एक चुड़क्कड़ किस्म का इंसान हूं, इसलिए हमेशा कोई न कोई चूत ढूंढता रहता हूं। राजू के घर मेरा रोज का आना जाना लगा रहता था। उसकी माँ को देखते ही मेरा लंड हमेशा खड़ा हो जाता था और उसे चोदने की तीव्र इच्छा होती थी। लेकिन मुझे कभी ऐसा मौका नहीं मिला था जिसका मैं पूरा फायदा उठा पाता। फिर भी हम दोनों के बीच थोड़ी बहुत हंसी मजाक और हल्की फुल्की बातें होती रहती थीं जो धीरे धीरे आकर्षण बढ़ाती जा रही थीं।
दोस्तों, अब राजू का जन्मदिन बहुत नजदीक आ रहा था। उसके पापा किसी जरूरी काम से कुछ दिनों के लिए बाहर चले गए थे। मैंने एक दिन उसे फोन किया और राजू ने मुझे अपने घर बुला लिया। जब मैं राजू के कमरे में पहुंचा और हम दोनों फिल्म देखने लगे तो करीब एक घंटे बाद आंटी उठकर उस कमरे में आ गईं जहां हम बैठे हुए थे।
आंटी ने पूछा, “क्यों, क्या देख रहे हो तुम दोनों?”
मैंने तुरंत कहा, “नमस्ते आंटी।”
राजू ने जवाब दिया, “फिल्म देख रहे हैं माँ।”
आंटी मुस्कुराते हुए बोलीं, “ठीक है, मैं तुम लोगों के लिए कुछ खाने को लेकर आती हूं।”
फिर इतना कहकर आंटी किचन की ओर जाने लगीं। उनकी साड़ी में मटकती हुई गोल और मोटी गांड को देखते ही मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा। वो कितनी मस्त और आकर्षक लग रही थीं। फिर हम दोनों फिर से फिल्म देखने लगे। बीस मिनट बाद आंटी चाय और स्नेक्स लेकर वापस आईं। वो हमारे साथ ही बैठ गईं और मुझसे बोलीं, “लो बेटा, चाय पियो।”
अब हम दोनों ने अपनी अपनी चाय हाथ में ले ली और स्नेक्स खाने लगे। फिर आंटी ने मुझसे पूछा, “राजेंद्र, तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?”
मैंने कहा, “जी आंटी, बहुत अच्छी चल रही है।”
आंटी ने फिर पूछा, “क्यों आजकल तुम घर पर आते नहीं हो?”
मैंने जवाब दिया, “आंटी, पेपर हैं तो ज्यादा समय नहीं निकल पाता इसलिए।”
आंटी ने सलाह देते हुए कहा, “हां बेटा, अच्छी बात है। अपनी पढ़ाई में ज्यादा से ज्यादा मन लगाकर पढ़ाई करो।”
मैंने राजू की तरफ देखते हुए कहा, “अरे यार राजू, तेरा जन्मदिन भी तीन दिन बाद है। क्यों, मनाएगा ना?”
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राजू ने थोड़ा उदास स्वर में कहा, “यार तू तो अच्छी तरह जानता है कि इस समय पापा घर पर नहीं हैं तो बहुत मुश्किल है।”
मैंने जिद करते हुए कहा, “देख, मैं कुछ नहीं जानता। मुझे तो पार्टी चाहिए।”
राजू ने कहा, “यार लेकिन…”
मैंने बीच में ही टोक दिया, “मैं लेकिन वेकिन कुछ नहीं जानता। मैं तेरे घर आ जाऊंगा और फिर मैं, आंटी और तू मजे करेंगे। क्यों आंटी, मैंने ठीक कहा ना?”
आंटी हंसते हुए बोलीं, “हां ठीक है, मैं खाना बना लूंगी।”
मैंने राजू से पूछा, “क्यों राजू, ठीक रहा ना?”
राजू ने सहमति में सिर हिलाते हुए कहा, “हां ठीक है यार।”
मैंने कहा, “अब यार मैं चलता हूं। जन्मदिन पर आ जाऊंगा। ठीक है आंटी, नमस्ते।”
आंटी ने जवाब दिया, “ठीक है बेटा, नमस्ते।”
अब मैं अपने घर के लिए निकल लिया। बाहर जाते हुए मैंने राजू को कहा, “यार तू बिल्कुल भी फिक्र मत कर। मैं अपने साथ विस्की ले आऊंगा।”
राजू ने घबराते हुए कहा, “यार माँ के सामने तू क्या मुझे मरवाएगा?”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “यार उसकी फिक्र तू मत कर। आंटी को मैं मना लूंगा। ठीक है, बाय।”
राजू ने कहा, “ठीक है, बाय।”
फिर मैं अपने घर पर चला आया और घर पहुंचकर बस उसकी माँ को चोदने के बारे में सोच रहा था कि मैं उसे कैसे चोदूं। बहुत सोचने के बाद मुझे उसके जन्मदिन पर वो मौका मिल रहा था। वो सब सोचते सोचते मैं ना जाने कब सो गया। फिर उसके जन्मदिन के दिन मैंने राजू को फोन करके जन्मदिन की बधाईयां दे दी और मैंने उससे पार्टी का समय पूछा तो वो मुझसे बोला कि तुम शाम को ७ बजे आ जाना। फिर मैं बोला कि ठीक है और मैंने फोन कट कर दिया।
दोस्तों उसकी माँ को सोचकर ही सारा दिन लंड खड़ा होता रहा।
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मैं तीन बजे घर से बाजार चला गया। वहां पहुंचकर मैंने राजू के लिए एक अच्छी शर्ट चुनकर खरीद ली। उसके बाद मैं एक वाइन शॉप में गया और वहां से उसकी पसंद की ब्रांड वाली विस्की की फुल बोतल ले ली। फिर मैंने मेडिकल स्टोर से एक पैकेट कंडोम भी खरीद लिया। अब घर लौटकर मैं तैयार होने लगा। मैं आज बहुत ज्यादा खुश था। अच्छी डियो लगाई, बाल ठीक किए और कपड़े पहनकर मैं राजू के घर के लिए निकल गया। ठीक तय समय पर मैं उनके घर पहुंच गया।
फिर उसकी माँ ने दरवाजा खोल दिया। मैंने मुस्कुराते हुए उनसे कहा, “हैलो आंटी।”
आंटी ने प्यार से जवाब दिया, “हैलो बेटा, चलो अंदर आ जाओ।”
मैंने उन्हें देखते हुए कहा, “क्या आंटी आप अभी तक तैयार नहीं हुई?”
आंटी ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “तैयार क्या होना बेटा, तुम लोग जन्मदिन मना लेना।”
मैंने जिद करते हुए कहा, “आंटी जन्मदिन तो जन्मदिन है ना और अब आपको भी हमारे साथ मनाना होगा। प्लीज आप अब तैयार हो लीजिए।”
आंटी ने थोड़ा सोचते हुए कहा, “ठीक है बेटा तुम बैठो, राजू अपने रूम में है और कहते हो तो मैं भी अभी तैयार होकर आती हूं।”
दोस्तों अब आंटी अपने रूम में चली गईं और मैं राजू के रूम में चला गया।
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “जन्मदिन मुबारक हो राजू।”
राजू मेरे गले लग गया और उसने मुझे धन्यवाद बोला।
मैंने उसे गिफ्ट वाली शर्ट दे दी और उससे तैयार होने को कहा। अब वो भी तैयार होने लगा। फिर मैंने उससे कहा, “राजू देख मैं तेरी पसंद की ब्रांड विस्की लेकर आया हूं।” वो उसे देखकर बहुत खुश हुआ। अब हम दोनों तैयार होकर हॉल में पहुंच गए और आंटी का इंतजार करने लगे।
मैंने राजू से कहा, “यार राजू जन्मदिन पर तो गाना जरूर होना चाहिए ना?”
राजू ने कहा, “हां यार रुक मैं अभी लगाता हूं।”
तभी मेरी नजर आंटी पर पड़ी। वो नीले कलर की जालीदार साड़ी में क्या लग रही थीं। बहुत हॉट और सेक्सी दिख रही थीं। उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए उनके बड़े और गोल बूब्स हिलते हुए बेहद आकर्षक लग रहे थे। उन्हें देखकर मेरा मन कर रहा था कि उनसे चिपककर एक गहरा किस कर लूं। लेकिन मैंने खुद को कंट्रोल किया और उनसे कहा, “वाह आंटी आप तो बहुत सुंदर दिख रही हो।”
आंटी थोड़ा शरमाते हुए बोलीं, “धन्यवाद बेटा। तुम लोग क्या कर रहे हो?”
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मैंने कहा, “आंटी गाने लगा रहा हूं।”
आंटी ने कहा, “ठीक है तो मैं तुम दोनों के लिए कोल्डड्रिंक्स लेकर आती हूं।” और आंटी जाने लगीं।
दोस्तों उनका ब्लाउज काफी खुला हुआ था और उसमें से उनकी पतली और गोरी कमर बहुत सेक्सी लग रही थी। उनकी वो मटकती हुई गोल गांड को देखकर मैं और भी पागल हो रहा था। मैं बस यही सोच रहा था कि अगर आज रात उसे चोद लूं तो कितना मजा आ जाएगा। फिर अचानक गाना शुरू हुआ तो मैं अपनी उस सोच से बाहर आया और हम बातें करने लगे। फिर आंटी कोल्ड ड्रिंक्स लेकर आईं और फिर से जाने लगीं तो मैं उन्हें रोकते हुए बोला, “आंटी आप कहां जा रही हैं? प्लीज कुछ देर हमारे पास भी बैठिए ना?”
आंटी ने कहा, “बेटा तुम दोनों अपना काम करो और मैं खाना तैयार करती हूं।”
मैंने कहा, “आंटी आप भी हमारे साथ पार्टी में शामिल हो तो इसलिए आपको भी बैठना पड़ेगा। क्यों राजू?”
राजू ने कहा, “हां माँ बैठो ना।”
आंटी ने कहा, “ठीक है बेटा तुम कहते हो तो मैं भी बैठ जाती हूं।”
दोस्तों अब आंटी हमारे सामने बैठ गईं और मैंने सबको कोल्ड ड्रिंक दे दी। फिर हम तीनों ने चियर्स किया और कोल्ड ड्रिंक पीकर बातें करने लगे। तभी राजू मुझसे बहुत धीरे से बोला कि यार अब माँ को ड्रिंक के लिए कैसे मनाएंगे। दोस्तों वो मुझसे बिल्कुल चिपककर बैठा हुआ था और गाने चलने की वजह से सिर्फ मैं उसकी वो सभी बातें सुन रहा था।
मैं: रुक मैं अभी उनसे बात करता हूं।
फिर मैं आंटी की तरफ मुड़कर बोला, “आंटी आज जन्मदिन है और आज के दिन अगर हम आपसे कुछ भी मांगें तो आप हमें मना नहीं करोगी।”
आंटी ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा, “हां बेटा बोलो, तुम्हें ऐसा क्या चाहिए?”
मैंने थोड़ा हिचकते हुए लेकिन उम्मीद भरी नजरों से कहा, “आंटी क्या हम ड्रिंक कर सकते हैं?”
आंटी थोड़ा गुस्सा होते हुए बोलीं, “ऐसा बिल्कुल नहीं। कुछ हो जाएगा तो? और वैसे भी पीना शरीर के लिए बहुत खराब होता है।”
मैंने प्लीज कहते हुए आग्रह किया, “हां आंटी हमें पता है लेकिन सिर्फ आज के दिन। प्लीज आंटी, ऐसा कुछ नहीं होगा। बस आज के लिए प्लीज आंटी।” मेरी आवाज में इतनी मिन्नत थी कि आंटी का गुस्सा थोड़ा कम हो गया।
आंटी ने नाखुशी से सिर हिलाते हुए कहा, “ठीक है लेकिन ज्यादा नहीं पीना।” फिर उन्होंने थोड़ा रुककर जोड़ा, “और अब मैं खाना बनाने जा रही हूं।”
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अब आंटी किचन में चली गईं और इधर हम दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं था। राजू मेरे कान में फुसफुसाकर बोला, “यार तूने तो कर दिखाया!” मैंने मुस्कुराते हुए बोतल बाहर निकाली। मैंने दो गिलास में अच्छे खासे पेग बनाए, विस्की की तेज और नशीली खुशबू पूरे हॉल में फैल गई। हमने गिलास टकराए, “चियर्स!” कहकर पहला घूंट लिया। राजू को विस्की से जल्दी नशा चढ़ जाता था और यह बात मुझे पहले से पता थी। इसलिए मैंने उसे जानबूझकर पहला भारी पेग दे दिया जबकि खुद भी भरपूर ले रहा था।
हम लोग पीते हुए करीब ४५ मिनट हो चुके थे। शराब का असर अब दोनों पर दिखने लगा था। सिर हल्का चकराने लगा था, शरीर में गर्माहट फैल रही थी और हमने बोतल की आधी से ज्यादा मात्रा खत्म कर ली थी। नशे की वजह से बातें ज्यादा खुलने लगी थीं और हंसी भी अनियंत्रित हो रही थी।
फिर मैंने राजू से बोला, “चल यार अब थोड़ा डांस करते हैं।” मैंने एक अच्छा सा रोमांटिक और तेज गाना लगा दिया। संगीत की धुन के साथ हम दोनों डांस करने लगे। हाथ हिलाते, कदम बढ़ाते, नशे में झूमते हुए हम मस्ती कर रहे थे। तभी आंटी आईं और उन्होंने मुझसे कहा कि बेटा खाना बन गया है मैं लगा देती हूं और तुम आकर खा लो।
मैं: आंटी अभी तो हम नाचने लगे हैं प्लीज आप भी आ जाइए।
आंटी: नहीं बेटा मैं अब अपने कमरे में जा रही हूं।
मैं: प्लीज आंटी आइए ना।
अब आंटी मेरे बहुत बार कहने पर मान गईं और सोफे पर बैठ गईं। राजू को अब ज्यादा नशा हो रहा था इसलिए वो थोड़ी देर डांस करने के बाद सोफे पर बैठ गया और अपनी आंखें बंद कर लीं। फिर मैं आंटी के पास गया और उन्हें डांस करने के लिए कहा। आंटी बोलीं कि नहीं बेटा तुम करो मैं यह सब नहीं करूंगी। मैंने बार बार आग्रह किया, “प्लीज आंटी करिए ना।” थोड़ी देर मना करने के बाद वो आखिरकार मान गईं।
फिर मैंने उनका नरम और गर्म हाथ पकड़कर उन्हें खड़ा किया। अब हम दोनों डांस करने लगे। मैंने देखा कि राजू को भारी नशा होने की वजह से वो अपनी दोनों आंखें बंद करके सोफे पर बैठा रहा था और हिल भी नहीं रहा था। मैंने तुरंत एक रोमांटिक और धीमी धुन वाला गाना चला दिया। आंटी को फिर से डांस के लिए कहा। पहले तो वो शरमाकर मना करने लगीं लेकिन मेरी जिद के आगे आखिरकार वो मान गईं।
मैंने एक हाथ से उनका मुलायम हाथ थामा और दूसरे हाथ को उनकी पतली, गरम और नरम कमर पर रख दिया। अब हम दोनों बहुत करीब आकर डांस कर रहे थे। संगीत की लय के साथ उनका शरीर हल्का हिल रहा था। मैंने महसूस किया कि आंटी थोड़ा शरमा रही थीं, उनका चेहरा हल्का लाल हो गया था और सांसें भी थोड़ी तेज हो रही थीं।
फिर मैंने धीरे से पूछा, “आंटी आप ऐसे घबरा क्यों रही हो?”
आंटी ने शरमाते हुए कहा, “बेटा मैंने कभी ऐसे डांस नहीं किया।”
उनकी बात सुनकर मुझे समझ आ गया कि यह चुदाई जरूर होगी लेकिन आसानी से नहीं। मुझे थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “आंटी शरमाना कैसा? वैसे भी आप आज इस साड़ी में बहुत हॉट और सेक्सी लग रही हो।” मैंने उन्हें देखकर मुस्कुरा दिया।
आंटी शरमाते हुए बोलीं, “धत बदमाश।”
मैं अब खुद को आंटी से और भी ज्यादा सटाने लगा। हमारा शरीर एक दूसरे से लगभग चिपक गया था। उनके बड़े और नरम बूब्स मेरी छाती के बिल्कुल पास दब रहे थे। उनकी नरमाई और गर्माहट मेरे शरीर में करंट की तरह दौड़ रही थी। मेरा लंड भी अब पूरी तरह जाग चुका था और पैंट के अंदर तनाव महसूस हो रहा था।
फिर मैंने धीरे से कहा, “आंटी आप सही में बहुत सुंदर और सेक्सी हो। मैं आपको बहुत पसंद करता हूं लेकिन मैं आपसे यह बात कहने से डरता हूं।”
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दोस्तों आंटी मेरे मुंह से यह बात सुनकर एकदम से चुप हो गईं और मेरी आंखों में देखने लगीं। उनकी आंखों में हैरानी और थोड़ा सा संशय था। मैंने धीरे से उन्हें और पास खींचकर बोला, “आंटी मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं।”
साथ ही मैंने अपना एक हाथ उनकी मोटी और गोल चूतड़ पर रखकर हल्का सहलाने लगा। आंटी मुझसे छूटने की कोशिश करने लगीं। उनका शरीर तन गया था। वो फुसफुसाकर बोलीं, “तुम अभी अपने पूरे होश में नहीं हो राजा। प्लीज छोड़ दो मुझे वरना राजू देख लेगा।”
लेकिन मैं अब रुकने वाला नहीं था। मैंने अपने होंठ उनके नरम और गर्म होंठों पर रख दिए। पहले हल्का चूमना शुरू किया फिर धीरे धीरे चूसने लगा। उम्म्म अह्ह्ह्हह्ह्ह… उम्म्म अह्ह्ह्ह। दोस्तों वाह क्या होंठ थे उनके, मुलायम, गर्म और मीठे। वो मुझसे लगातार छूटने की कोशिश करती रहीं लेकिन मैं उन्हें मजबूती से पकड़े हुए था। मैं लगातार उनके होंठ चूसता रहा और अपनी जीभ उनके मुंह में डालने की कोशिश करता रहा। साथ ही मेरा हाथ उनकी गांड को सहलाता और दबाता रहा।
अब उनकी सांसें बहुत तेज हो गई थीं। उनकी छाती ऊपर नीचे तेजी से हिल रही थी। उन्होंने किसी तरह खुद को मुझसे छुड़ाया और पीछे हट गईं। गुस्से से बोलीं, “क्यों तुम अपने होश में हो?”
मैंने प्यार भरी नजरों से कहा, “आंटी प्लीज मुझे माफ करना लेकिन आपको देखकर मैं कंट्रोल नहीं कर पाया।”
तभी राजू भी उठ गया और उसने पूछा कि क्या हुआ? आंटी ने कहा कि कुछ नहीं चलो खाना खा लो। फिर राजू ने कहा कि उसे इस समय भूख नहीं बहुत नींद आ रही है। फिर आंटी और मैं उसे पकड़कर कमरे तक ले गए और लेटा दिया। कमरे से बाहर आकर आंटी ने कहा कि तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए खाना लेकर आती हूं।
दोस्तों आंटी उस समय बहुत गुस्से में थी और अब मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था।
फिर भी मैं किचन में चला गया और उनके पीछे जाकर खड़ा हो गया। मैंने नरम स्वर में कहा, “प्लीज आंटी मुझे माफ कर दो लेकिन मैं आपको दिल से बहुत पसंद करता हूं और आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो।” आंटी कुछ नहीं बोलीं, बस आश्चर्यचकित होकर मेरी तरफ देखती रहीं। उनकी आंखों में गुस्सा और हैरानी दोनों थे। मैंने इस मौके का फायदा उठाया और पीछे से उनकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया। फिर मैंने झुककर उनकी गरम और नरम कमर पर गहरे किस करने शुरू कर दिए। उम्म्म अह्ह्ह्ह… उम्म्म… उनकी त्वचा का स्वाद मीठा और गर्म था।
तो आंटी मेरा विरोध करने लगीं। उन्होंने अपने शरीर को twist करते हुए कहा, “नहीं प्लीज राजा छोड़ो मुझे। तुम यह क्या कर रहे हो?” लेकिन मैंने उनकी एक भी बात नहीं सुनी। मैंने अपना दायां हाथ आगे बढ़ाकर उनके बड़े और भरे हुए बूब्स पर रख दिया। ब्लाउज के ऊपर से ही मैंने उन्हें जोर जोर से दबाना शुरू किया। साथ ही उनकी गर्दन पर लगातार किस करता रहा। उम्म्म… उम्म… अह्ह्ह्ह… “मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं आंटी… उम्म्म… मैं आपको चोदना चाहता हूं।”
दोस्तों बूब्स दबाने से आंटी तेजी से सिसकियां ले रही थीं। अह्ह्ह्ह… उह्ह्ह… “प्लीज राजा छोड़ो मुझे… थोड़ा होश में आओ… एम्म्म… आह राजा…” उनके बूब्स मेरे हाथों में निचुड़ रहे थे, निप्पल्स सख्त होकर ब्लाउज में उभर आए थे। अब मैंने उन्हें बिल्कुल सीधा किया और अपने होंठ उनके होंठों पर रखकर जोर से चूसने लगा। उम्म्म… एम्म्म… उम्म्म आंटी… उम्म्म उम्म्म… उनकी सांसें बहुत तेज हो गई थीं। उनकी धड़कन मेरी छाती पर महसूस हो रही थी। उनका विरोध अब धीरे धीरे कम होने लगा था।
मैंने उनके बूब्स के ऊपर किस करते हुए उनका पल्लू खींचकर नीचे गिरा दिया। “इसस्सस्स… राजा प्लीज छोड़ो… उम्म्म्म… अह्ह्ह्हह राजा… राजू देख लेगा… उह्ह्ह्ह…” अब वो भी धीरे धीरे गरम होने लगी थीं। उनका शरीर मेरे स्पर्श से कांप रहा था। फिर मैंने किस करते हुए उनके ब्लाउज के हुक खोल दिए और उसे पूरी तरह उतारकर फेंक दिया। अब उनके बड़े, गोल और दूध जैसे सफेद बूब्स पूरी तरह नंगे हो गए थे। मैंने उन्हें दोनों हाथों से दबाते हुए किस करना जारी रखा। अह्ह्ह्ह… राजा प्लीज ऐसा मत करो… अह्ह्ह्हह… उईईइ… प्लीज राजा छोड़ दो… आअहहअया…
मैं अब उन्हें चोदने के लिए बेताब था। मैंने बिना देर किए उनकी साड़ी और पेटीकोट को नीचे सरका दिया। अब उनकी मोटी गांड और भारी बूब्स दोनों मेरे हाथों में थे। मैं उन्हें दबाता हुआ लगातार किस कर रहा था। आह्ह… राजा बस करो… उम्म्म… उईईइ… अह्ह्ह्ह… राजा प्लीज छोड़ो मुझे… अह्ह्ह्ह राजा…
अब मैंने अपने होंठ उनके बूब्स पर रखकर एक निप्पल को मुंह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगा। साथ ही दूसरे बूब को हाथ से निचोड़ रहा था। उम्म्म… उम्म्म… उहहहह… उहह… वो पागल होने लगी थीं। मैं तेजी से बूब्स को दबा और चूस रहा था। दोस्तों वाह क्या मस्त बूब्स थे। उस साली को अब मजा आने लगा था। वो मस्ती में आकर खुद अपने बूब्स चुसवा रही थी और सिसकियां ले रही थी। आह्ह्ह्हह… आईईईई… राजा दर्द हो रहा है… प्लीज अउईईइ… बस करो… लेकिन मैं नहीं रुका।
मैंने एक हाथ नीचे सरकाकर उनकी कम बालों वाली गीली चूत पर रख दिया। जैसे ही मेरी उंगलियां उनकी गर्म और चिपचिपी चूत को छुईं, वो तेज से चिल्लाईं, “उफ्फ्फ्… राजा प्लीज अब बस छोड़ दो मुझे… अह्ह्ह्ह…” फिर मैंने तुरंत अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए और गहरी फ्रेंच किस करते हुए उनकी चूत को उंगलियों से सहलाने लगा। वो अब बहुत ज्यादा गरम और गीली हो चुकी थीं।
फिर बस मैं आंटी से पूरी तरह लिपट गया। उन्हें लगातार किस करता गया, एक दीवाने मजनू और प्यासे आशिक की तरह। उनके बूब्स को दबाता, मसलता और चूसता रहा। फ्रेंच किस करते करते बूब्स दबाते दबाते हमें पता नहीं चला कि कैसे हमने एक दूसरे के सारे कपड़े उतार दिए। हम दोनों पूरी तरह नंगे होकर किस करने में मदहोश हो गए थे। जब मेरी उंगली आंटी की चूत तक पहुंची तो वो जोर जोर से सिसकियां भरने लगीं। मैंने आहिस्ता आहिस्ता उनके गाल, कंधे, कान, बूब्स और पेट पर किस करते हुए नीचे चूत के बिल्कुल करीब पहुंच गया।
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फिर जब मैंने आंटी की चूत के उस गुलाबी दाने पर जैसे ही किस किया तो आंटी अपने पूरे होश गंवा बैठीं। वो मेरे बालों को जोर जोर से नोचने लगीं। मैं और जोर से उनके क्लिटोरिस को चूसता गया। आंटी जोर जोर से सिसकियां भरने लगीं और चिल्लाने लगीं, “उफफफफफ्फ… आह्ह्ह्हह्हह्ह्ह… माँ… आईईईइ… मार दिया तुमने… मुझे इतना मजा… उफफफफफ्फ… और जोर से… प्लीज स्स्सीईईईईइ… और जोर से चूसो… तुम आज अपनी सारी हदें पार कर जाओ… मुझे जितना मजा दे सकते हो देते जाओ… तुम मुझमें समा जाओ… आईईईई… आआआहहउूुउउंम्… मैं अब झड़ने वाली हूं… उह्ह्ह्ह… मेरा जूस अब निकलने वाला है।” आंटी अब मेरे पूरा कंट्रोल में आ गई थीं।
दोस्तों आंटी अब और भी बेकाबू हो गईं। उन्होंने एकदम जोर से प्रेशर के साथ अपना पूरा गर्म और मीठा जूस बाहर निकाल दिया। मैंने मुंह लगा कर सारा जूस पी लिया। वो क्या मजेदार स्वाद था। फिर आंटी ने कुछ देर बाद हांफते हुए मुझसे कहा कि अब मेरी बारी है। मैं आज तुम्हारे इस छोटू उस्ताद को जरूर सबक सिखाऊंगी जो तुम्हें मेरे लिए इतना तंग करता है। और फिर आंटी ने तुरंत मेरा ६.५ इंच का खड़ा और मोटा लंड पकड़कर चूसना शुरू कर दिया। उफफफ्फ्… मैं तो उसकी वजह से बिल्कुल पागल हो रहा था। आंटी मेरा लंड ऐसे चूस रही थीं जैसे कोई अनुभवी रंडी के हाथ बहुत दिनों बाद मेरा लंड लगा हो। वो मेरे लंड को जीभ से चाटती, मुंह में ले कर चूसती और गले तक ले जाती थीं। जैसे भाभी आइसक्रीम चाट रही हो। वो बस लगातार चूसती गई, चूसती गई।
फिर कुछ देर बाद वो अपने मुंह में लंड लेकर जोर जोर से हिलाने लगीं। जिसकी वजह से मैं आंटी के मुंह में झड़ गया। वो मेरा पूरा वीर्य चूसकर चाटने लगीं। अब आंटी मेरे जिस्म पर किस करती हुई अपनी जीभ को मेरे पेट, छाती पर फेरती हुई मेरे होंठों तक आईं। हम एक बार फिर से जोरदार फ्रेंच किस करने लगे। अब आंटी की चूत मेरे लंड से बिल्कुल चिपकी हुई थी। आंटी अब आहिस्ता आहिस्ता अपने कूल्हों को हिला रही थीं। जिसकी वजह से कुछ देर बाद मेरे लंड में एक बार फिर से जोश आना शुरू हो गया और मेरा लंड अब कड़क हो चुका था।
मैं अब आंटी को पकड़ कर बेड पर लेट कर उसके ऊपर आ गया।
मैंने उनके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। उनकी मुलायम जांघें मेरे गालों को छू रही थीं। मैंने अपना ६.५ इंच का मोटा और कड़ा लंड उनकी गीली चूत के मुंह पर रखकर धीरे से दबाना शुरू किया। आंटी की चूत पहले ही बहुत गीली और गर्म हो चुकी थी। जैसे ही लंड का सिरा उनकी चूत में घुसा, भाभी की सिसकियां निकल गईं। सस्स्सस्स… आहहहह… ऊऊऊहह… उूउउम्म्म्म…
फिर मैंने अचानक एकदम से जोरदार धक्का लगाया। मेरा पूरा लंड एक झटके में उनकी चूत के अंदर चला गया। आंटी की चीख निकल गई। “प्लीज थोड़ा आराम से… आअहह… उूुउउम्म्म्मम…” उनकी आंखें बंद हो गईं और मुंह से लंबी सिसकारी निकली। “हां आज तुम अपनी भड़ास निकाल दो… तुम आज मुझे दिखाओ कि तुम कितना अपनी आंटी को चाहते हो।”
मैंने अपने धक्के शुरू किए। पहले धीरे धीरे, फिर तेजी से। हमारे नंगे जिस्म आहिस्ता आहिस्ता टकरा रहे थे। हर धक्के के साथ उनकी बड़ी गांड और मेरी जांघें टकरातीं तो ठप ठप ठप ठप ठप… की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। आंटी की सिसकियां मुझे और भी दीवाना और मस्ताना कर रही थीं। “आह्ह्ह… राजा… उफ्फ… और जोर से…” उनकी चूत मेरे लंड को जकड़े हुए थी। हर धक्के पर उनकी दीवारें सिकुड़ रही थीं और गर्म रस मेरे लंड पर बह रहा था। मैंने अपने धक्कों की स्पीड को तेज किया और आंटी को पूरी ताकत से चोदता गया।
कुछ देर बाद मैंने उन्हें अपनी गोद में उठा लिया और अपनी पोजिशन चेंज कर ली। अब मैं अपने पैरों को घुमाकर आंटी के ऊपर बैठ गया। उनके दोनों पैर मेरी कमर के चारों ओर लिपट गए। मैंने उनके बड़े बूब्स को दोनों हाथों से जोर जोर से पकड़ लिया और उन्हें दबाते हुए बहुत तेज और गहरे धक्के लगाने लगा। हर धक्के पर उनका पूरा शरीर हिल रहा था। उनके बूब्स मेरे हाथों में निचुड़ रहे थे और निप्पल्स सख्त होकर चिपक गए थे।
मैं लगातार जोरदार चोदाई कर रहा था। आंटी की चूत अब पूरी तरह मेरे लंड से भर चुकी थी। उनकी सिसकियां और चीखें कमरे में गूंज रही थीं। और अब मैंने महसूस किया कि आंटी झड़ चुकी थी।
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