Interview me chut chudai sex story: बात सर्दियों के दिनों की है। मैं अपनी जॉब बदलने की कोशिश कर रहा था। मैं गुड़गाँव की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में साक्षात्कार देने के लिए गया था। साक्षात्कार के समय मेरी मुलाकात जन संपर्क अधिकारी निहारिका से हुई। उसकी शॉर्ट स्कर्ट देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो रहा था। उसकी शॉर्ट स्कर्ट इतनी छोटी और टाइट थी कि उसके मोटे गोरे जांघों का बड़ा हिस्सा खुला हुआ दिख रहा था। स्कर्ट का किनारा जांघों की ऊपरी नरम त्वचा पर चढ़ा हुआ था और हर छोटे कदम के साथ उसकी जांघें हिल रही थीं जिससे चिकनी चमड़ी चमक उठती थी। निहारिका की कमर पतली थी लेकिन गांड भारी और गोल थी जो स्कर्ट के नीचे से साफ उभरकर नजर आ रही थी। मैं पागलों की तरह बस उसकी चूचियों और गांड को देख रहा था। उसकी गांड और चूचियों को देखकर मेरा लंड एकदम तन गया था। मेरा लंड पैंट के अंदर अचानक फूलने लगा। रक्त का तेज बहाव महसूस हो रहा था। शाफ्ट सख्त होकर ऊपर की ओर उठ गया। सिर फूल गया और हल्का गर्म प्री कम निकलकर अंडरवियर को गीला कर रहा था। मैंने टांग के ऊपर टांग रखकर उसे दबाने की कोशिश की पर लंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था। तभी मेरा नाम पुकारा गया। मैंने सामान्य होने की कोशिश करते हुए अंदर प्रवेश किया पर मेरा खड़ा हुआ लंड साफ दिखाई दे रहा था और निहारिका की निगाह अब मेरे लंड पर लग चुकी थी। उसकी आंखें मेरे उभरे हुए लंड पर टिक गई थीं। उसके होंठ हल्के से खुले थे। सांस थोड़ी तेज चल रही थी।
गुड मॉर्निंग मैडम कहकर मैं लंड को छुपाते हुए कुर्सी पर बैठ गया। मैं निहारिका से निगाह नहीं मिला पा रहा था। निगाह न मिलाने का एक कारण उसकी चूचियां थीं जिसकी वजह से मेरा लंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था। उसकी चूचियां ब्लाउज के अंदर भरी हुई थीं। कपड़ा तना हुआ था। हर सांस के साथ वे ऊपर नीचे हिल रहे थे।
पर निहारिका शायद लंड की प्यासी थी। उसने मुझसे कहा, “आपको बैठने के लिए किसने बोला था?” मैंने कहा, “माफ करें मैडम। मैं मजबूर हूं।” उसने मुझे खड़े होने के लिए कहा और खुद भी अपनी सीट से खड़ी हो गई। लेकिन मैं खड़ा नहीं हुआ। अब वह खड़ी होकर मेरे लंड को निहार रही थी। ऐसा लग रहा था कि वो लंड से खेलना चाहती थी। उसकी नजर मेरे लंड के उभरे हुए आकार पर अटकी हुई थी। चेहरे पर कामुक मुस्कान फैल गई थी। आंखों में वासना साफ झलक रही थी। मैंने हाथ से लंड को नीचे कर दोनों टांगों के बीच में लंड को दबा लिया। अब मैं अपने आप को सुरक्षित महसूस कर रहा था और उसी दशा में मैं सीधा खड़ा भी हो गया। उसने मेरा नाम पूछा और कहा, “तुम क्या छिपाने की कोशिश कर रहे हो? भगवान ने इसे छुपाने के लिए नहीं बनाया है।”
मैं उसकी बात सुनकर सकपका गया और मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया। मैंने कहा, “कुछ नहीं मैडम।” उसके बाद मैं सामान्य हो गया पर निहारिका के मन में कुछ और था और वह खुलकर बोलने लगी, “तुम लंड क्यों छुपा रहे हो?”
मैं ऐसा सुनकर मन ही मन सोचने लगा कि आज तो भगवान मुझ पर मेहरबान हैं। मैंने कहा, “मैडम, आपकी चूचियों और गांड को देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया है और अब यह बैठने का नाम नहीं ले रहा है। और आप इंटरव्यू लेने की बजाय मुझे छेड़ रही हैं। बस इसी वजह से मैं ना तो आपसे निगाह मिला पा रहा हूं और ना ही लंड को छुपा रहा हूं। असल में मैंने आपको जब टेस्ट के समय देखा था तभी से भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि आपकी चूत मारने का मौका दिलवा दे।”
निहारिका ने कहा, “मुझे तुम्हारी निडरता अच्छी लगी।” तब मैंने कहा, “और मेरा लंड?” उसने कहा, “तुम उतने शरीफ नहीं हो जैसा मैं सोच रही थी। तुम काफी शरारती हो। तुम इस नौकरी के लिए चुन लिए गए हो। आज शाम 11 बजे मुझे इस पते पर मिलो।”
मैं फूला नहीं समा रहा था और मुझे वो कहावत याद आ रही थी कि जब भगवान देता है तो छप्पर फाड़कर देता है। मैंने “धन्यवाद मैडम” कहकर निहारिका से हाथ मिलाने के बहाने उसकी चूची पर चुटकी भर दी और वह चौंक उठी।
वो कौन सी पीछे रहने वाली थी, उसने आगे बढ़कर सीधा लंड को पकड़कर सहला दिया। उसकी नरम उंगलियां मेरे पैंट के ऊपर से लंड के पूरे शाफ्ट को जकड़ लीं। हथेली की गर्मी कपड़े के ऊपर से महसूस हो रही थी। उसने धीरे से ऊपर नीचे सहलाना शुरू किया। अंगूठे से लंड के सिरे को हल्का दबाती हुई वो मुझे आंखों ही आंखों में देख रही थी। मैं सावधानी बरतते हुए जल्दी से वहां से निकल लिया और बस रात का इंतजार करने लगा।
आखिर रात भी आ गई और मैं उसके बताए स्थान पर पहुंच गया। उसने नाईटी पहन रखी थी और वह घर पर अकेली थी। वो अपनी सहेली के साथ कमरे में रहती थी। उसकी सहेली बाहर पार्टी में गई थी। उसकी नाईटी में से सब कुछ साफ दिख रहा था। सफेद पतली नाईटी उसके शरीर से चिपकी हुई थी। उसके भारी चूचे नाईटी के नीचे से उभरकर दिख रहे थे। गुलाबी निप्पल कपड़े के पार से साफ नजर आ रहे थे। उसकी चूत की लकीर भी हल्की सी उभरी हुई थी। गांड के गोलाकार आकार ने नाईटी को पीछे से तान रखा था। दरवाजे पर ही उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया। मैंने भी उसका पूरा साथ दिया और जमकर उसके होंठों को चूसा और एक हाथ से दरवाजा बंद कर दिया। उसके होंठ गर्म और नरम थे। जीभ मेरी जीभ से लिपटकर घूम रही थी। वो मेरे बालों में उंगलियां फेर रही थी। मैं उसके निचले होंठ को हल्का सा काट रहा था।
और अब धीरे-धीरे उसके चूचे दबाने लगा। इतनी ठंड होने के बावजूद हम दोनों गरमाने लगे थे। धीरे-धीरे दोनों नंगे हो गए। निहारिका पहले से खेली-खाई लग रही थी और वह सीधा लंड को पकड़कर चूसने लगी। उसने घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को मुंह में ले लिया। उसके गर्म और गीले मुंह ने लंड को पूरी तरह घेर लिया। जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से पर घुम रही थी। वो गहरी सांस लेकर लंड को गले तक ले जा रही थी। मैं भी उसके बालों को पकड़कर उसके मुंह को अपने लंड से चोदने लगा। हर झटके में लंड उसके गले तक पहुंच रहा था। तीस-पैंतीस झटकों के बाद मैं उसके मुंह में झड़ गया। गाढ़ा गर्म वीर्य उसके मुंह में फूटा। वो सारा वीर्य निगल गई और लंड को चूसती रही। मुझे अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था कि सुबह मैं जिसकी चूत मारना चाह रहा था, वो अब मेरे लंड को चूस रही है।
थोड़ी देर बाद ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और इस बार मैं उसके स्तनों को मुंह में लेकर चूस रहा था। मैंने एक चूची को मुंह में भर लिया। निप्पल को जीभ से चाटा और हल्का सा काटा। दूसरी चूची को हाथ से मसल रहा था। साथ ही हाथ नीचे ले जाकर उसकी चूत के दाने को रगड़ रहा था। उंगली चूत की फांकों के बीच घुम रही थी। निहारिका एकदम गरम हो चुकी थी और कह रही थी, “अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है, मेरी चूत को चोद दो।” उसकी आवाज भारी और वासना भरी थी। उसकी सांस तेज चल रही थी। चेहरे पर पसीना चमक रहा था।
मैंने भी उसकी गांड के नीचे तकिया लगाया। मैंने एक नरम और मोटा तकिया उठाया और उसे निहारिका की भारी गोलाकार गांड के ठीक नीचे धीरे से सरकाकर रख दिया। इससे उसकी कमर थोड़ी ऊपर उठ गई और उसकी चूत मेरे सामने पूरी तरह खुलकर उभर आई। उसकी चूत की गीली लाल फांके अब ऊंचाई पर थीं और हल्की सी हिल रही थीं। मैंने अपने सख्त लंड को दायें हाथ से पकड़ा और उसकी चूत के छेद पर गर्म सुपारे को रगड़ते हुए सीधा जोर लगाया और आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। लंड का मोटा सिरा पहले उसके बाहरी होंठों को अलग करता हुआ अंदर दाखिल हुआ। फिर अंदर की तंग दीवारें लंड को जोर से जकड़ने लगीं। उसकी चूत बहुत कसी हुई थी। गर्म और गीला रस लंड को चिकना कर रहा था। उस झटके से उसके मुंह से चीख निकल गई। उसकी आंखें बंद हो गईं। भौंहें सिकुड़ गईं। मैंने उसके मुंह पर हाथ रखकर उसे रोका।
थोड़ी देर में ही उसे मजा आने लगा और गांड हिलाकर-हिलाकर खुद चुदने लगी। वो अपनी कमर ऊपर नीचे कर रही थी। हर बार वह अपनी गांड ऊपर उठाती तो लंड और गहराई तक उतर जाता। उसकी चूत की दीवारें लंड को बार-बार दबा रही थीं और छोड़ रही थीं। धीरे-धीरे मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी। हर झटके में पूरा लंड चूत के अंदर तक धंस रहा था। मेरे अंडकोश उसके गांड से जोर-जोर से टकरा रहे थे। हर धक्के के साथ चूत से चिकचिक की गीली आवाज निकल रही थी। उसके मुंह से आह ऊह आह उफ्फ सी की आवाजें निकल रही थीं। उसकी चूत की दीवारें लंड को जकड़ रही थीं। लंड पर उसकी गर्म मांसपेशियां बार-बार सिकुड़ रही थीं। मुझे अब अनुभव हो रहा था कि धरती पर कहीं स्वर्ग है तो चूत मारने में ही है।
करीब पच्चीस-तीस झटकों में वो और मैं दोनों एक साथ झड़ गए। उसकी चूत अचानक सिकुड़ गई और फिर पूरी ताकत से ढीली पड़ गई। उसकी चूत से गर्म रस फूटा और मेरे लंड को पूरी तरह नहला दिया। गाढ़ा गर्म रस लंड के चारों ओर बह रहा था। काफी देर तक एक दूसरे से लिपटे रहे। उसके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे। हमारी सांसें एक साथ चल रही थीं। कुछ देर बाद फिर से हम दोनों एक दूसरे को वासना भरी नजरों से देख रहे थे।
इस बार मेरी निगाह उसकी गांड पर थी पर वो इससे अनजान थी। मैंने ढेर सारी क्रीम लेकर उसकी गांड के छेद पर लगाई। उंगली से छेद के चारों ओर घुमाकर क्रीम फैलाई। वो बोली, “यह क्या कर रहे हो?” तो मैंने कहा, “तुम्हारी गांड देखकर ही मेरा लंड सुबह तन गया था।” उसकी आंखों में थोड़ा डर और उत्सुकता थी।
अब वह समझ चुकी थी कि गांड चुदने का समय आ गया है। उसने कहा, “मैंने अभी तक गांड नहीं मरवाई है।” मैंने कहा, “अब मरवाओ ना।” इतना कहकर मैंने लंड का सुपारा उसकी गांड के छेद पर लगाया और हल्का सा धक्का लगाया। सुपारा छेद में चला गया। गांड बहुत ज्यादा तंग थी। लंड को दबाव महसूस हो रहा था। दर्द के साथ-साथ बहुत मजा आ रहा था। वह भी दर्द के मारे आह उफ्फ रहने दो चिल्ला रही थी। उसकी गांड की मांसपेशियां सिकुड़ गईं। चेहरा लाल हो गया। आंखों से आंसू निकल आए।
मैंने रुककर उसे सहलाया। उसके कंधों को थपथपाया और कान में धीरे से बोला कि आराम से सांस लो। उसकी गांड की अंदरूनी दीवारें मेरे लंड के सुपारे को इतनी जोर से दबा रही थीं कि लग रहा था जैसे कोई गर्म मांस का छल्ला लंड को कुचल देगा। फिर धीरे-धीरे उसकी सांसें सामान्य होने लगीं। उसकी कमर थोड़ी ढीली पड़ी। मैंने फिर से हल्का सा आगे धकेला। लंड का आधा हिस्सा अंदर चला गया। उसकी गांड अब थोड़ी आराम से खुलने लगी थी। गर्म क्रीम के साथ लंड आसानी से फिसल रहा था लेकिन तंगी अभी भी बरकरार थी।
थोड़ी देर में ही वह सामान्य हो गई और उसे भी मजा आने लगा। अब मैं भी पूरा लंड उसकी गांड में बार-बार अंदर-बाहर कर रहा था। हर बार लंड पूरा घुस जाता और बाहर निकलता। गांड की अंदरूनी दीवारें लंड को जकड़ रही थीं। हर धक्के के साथ चिकचिक की आवाज निकल रही थी। उसकी गांड अब पूरी तरह खुल चुकी थी और लंड बिना रुके अंदर बाहर हो रहा था। निहारिका की सांसें फिर से तेज हो गईं लेकिन अब दर्द की जगह वासना की आहें निकल रही थीं। काफी देर तक चुदाई करने के बाद मैं उसकी गांड में झड़ गया।
इस तरह उसकी गांड और चूत की चुदाई पूरी रात चलती रही।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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