रात के गहरे अंधेरे में मोबाइल की चमकती स्क्रीन के सामने घंटों बैठा रहता, हर पेज को ध्यान से पढ़ता हुआ, हर शब्द को मन में उतारता हुआ, कभी-कभी शरीर में एक अनोखी गर्मी और उत्तेजना महसूस करता।
इन कहानियों को पढ़ते हुए मेरे मन में उत्सुकता, संदेह और आकर्षण का मिला-जुला भाव रहता था।
इनमें लोग कुछ तो पूरी तरह काल्पनिक कहानियाँ लिखते हैं जो सिर्फ पाठकों को उत्तेजित करने और मनोरंजन के लिए बनाई गई लगती हैं, जबकि कुछ कुछ ही सच्ची होती हैं जिनमें वास्तविक जीवन की गहराई और विश्वसनीयता साफ महसूस होती है।
कभी-कभी तो पढ़ते हुए लगता कि ये घटनाएं सचमुच किसी के साथ घटी होंगी, लेकिन फिर भी मन में सवाल उठते रहते।
किसी का आज तक तीन इंच चौड़ा लंड देखा है?
यह पढ़कर मैं अक्सर हैरान रह जाता, आंखें फैलाकर सोचने लगता कि ऐसा संभव भी है या नहीं।
गधे का भी दो इंच चौड़ा होता है।
वो फिर क्या गधे का बाप है।
इस बात पर मन में हंसी छूट जाती लेकिन फिर भी ये सब विचार बार-बार घूमते रहते।
कोई बात नहीं मैं अपनी कहानी पर आता हूँ।
यह सच्ची है, आप लोग इसे सच माने या झूठ।
मैं राजवीर बीस साल का हूँ।
मैं यहां फरीदाबाद में रहता हूँ जहां तेज रफ्तार वाले इस शहर की भागदौड़ और शोर-शराबे के बीच मेरा पूरा परिवार एक साथ रहता है।
हमारे घर में दो कमरे लंबे समय से खाली पड़े रहते थे जिनमें धूल जमा हो रही थी और वे अनुपयोगी लगते थे।
हमने वो किराये पर देने का सोच लिया था ताकि घर की आर्थिक स्थिति थोड़ी मजबूत हो सके और कुछ अतिरिक्त आमदनी भी हो।
बात तीन साल पहले की ही है।
हमारे घर एक परिवार आया।
उस परिवार में एक बुड्ढा आदमी था जो उम्र के बोझ से झुका हुआ दिखता था और उसकी एक 19-20 साल की बेटी थी जो युवा, ताज़ा और आकर्षक लगती थी।
उसका बाप दो हफ्ते भर रहा और फिर गाँव चला गया।
उसके जाने के बाद उसकी बेटी अकेली ही रहती थी।
उसकी पढ़ाई पूरी हो गई थी और नौकरी भी नहीं करती थी।
सारा दिन घर पर ही रहती थी, कभी अपने कमरे में समय बिताती, कभी छत पर टहलती हुई दिन गुजारती।
उन दिनों मेरी डांस की प्रैक्टिस चल रही थी।
मैं रोजाना संगीत की तेज ताल पर स्टेप्स का अभ्यास करता, पसीने से तर-बतर होकर अपनी बॉडी को चुस्त और फुर्तीला रखने की कोशिश करता, हर मूवमेंट को बार-बार दोहराता।
एक दिन उसने कहा- मुझ को भी डांस सिखा दो।
मैंने उससे कहा- अभी नहीं, बाद में।
वो मान गई।
शाम को घर में कोई नहीं था।
सिर्फ वो और मैं।
मैं टीवी देख रहा था और पूरी तरह से स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित किए हुए आराम से लेटा हुआ कार्यक्रम का आनंद ले रहा था।
वो आई और कहने लगी- अब डांस सिखा दो।
तो मैंने पूछा- तुम डांस सीख कर क्या करोगी?
वो कहने लगी- कुछ नहीं।
बस ऐसे ही।
मैंने मना कर दिया तो वो मेरी मिन्नत करने लगी।
सो मैं भी मान गया।
मैंने गाना लगा दिया और उसे डांस का एक स्टेप कर के दिखाया।
कमरे में तेज़ संगीत की धुन गूंज उठी थी जिसकी लयदार बीट्स हर कोने को भर रही थीं और हवा में एक उत्तेजक माहौल बना रही थीं।
मैंने अपना शरीर हल्का सा झुकाकर एक स्मूथ स्टेप दिखाया जिसमें कंधे घुमाते हुए पैरों को तेज़ी से आगे-पीछे सरकाया और हाथों को लय के साथ ऊपर-नीचे किया।
वो मेरे स्टेप्स की कॉपी करने लगी।
उसने सूट पहन रखा था जो उसके युवा शरीर पर तंग बैठता था और नाचते समय कपड़े उसके कूल्हों और जांघों पर खिंच रहे थे।
उसको नाचने में दिक्कत हो रही थी क्योंकि सूट की जिप और सिलाई उसके स्तनों को दबा रही थी पर उसकी चूची को देख कर जो तेज़ी से हिल रही थी मेरा लंड भी हिल रहा था।
उसकी गोल और भरी हुई चूचियाँ हर स्टेप पर ऊपर-नीचे उछल रही थीं जिससे सूट का कपड़ा खिंच रहा था और उनकी नरम गोलाई साफ नजर आ रही थी।
मेरा लंड पैंट के अंदर धीरे-धीरे सख्त होता जा रहा था और उसकी गर्मी मेरी जांघों तक महसूस हो रही थी।
वो डांस करते करते रुक गई।
मैंने उससे पूछा क्या हुआ?
मेरा स्वर थोड़ा हैरान और उत्सुक था जबकि मेरी नजरें अभी भी उसके हिलते हुए स्तनों पर अटकी हुई थीं।
उसने कहा परेशानी हो रही है इन कपड़ों में।
उसकी आवाज़ में शर्म और थोड़ी सी बेचैनी थी और उसके गाल हल्के से लाल हो गए थे।
मैंने मजाक में कह दिया कपड़े उतार कर डांस कर लो।
मेरे शब्दों में हल्की सी मुस्कान थी लेकिन मेरी आँखों में छिपी हुई इच्छा साफ झलक रही थी।
वो शरमा गई और चली गई।
उसके कदम तेज़ थे और उसके पीछे हिलते हुए कूल्हे मुझे और भी उत्तेजित कर रहे थे।
मैं भी उसके पीछे गया।
वो मुँह छुपा कर लेट गई।
उसका चेहरा तकिये में दबा हुआ था और उसके कंधे थोड़े से काँप रहे थे।
मैंने कहा मैं तो मजाक कर रहा था।
तुम बुरा तो नहीं मानी।
मेरा स्वर नरम और माफी मांगता हुआ था जबकि मेरा दिल तेज़ धड़क रहा था।
उसने कहा इसमें बुरा मानने वाली कौन सी बात है?
मजाक ही तो किया था।
उसकी आवाज़ अब सामान्य हो गई थी लेकिन उसके गालों की लाली अभी भी बनी हुई थी।
हम वहीं बैठ कर बातें करने लगे।
कमरे की हल्की रोशनी में उसका चेहरा और भी आकर्षक लग रहा था।
उसने मुझसे अचानक पूछ लिया तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?
उसकी आँखें मेरी आँखों में गहरी उतर गई थीं और उसकी उंगलियाँ बेचैनी से अपने बालों से खेल रही थीं।
मैंने कहा हाँ।
हैं तो कई।
पर क्यों।
मेरा जवाब थोड़ा घमंड भरा था लेकिन अंदर से मैं उसकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहा था।
उसने कहा किसी के साथ सेक्स सम्बन्ध बनाये हैं या नहीं?
उसके शब्दों में एक सीधा और निडर सवाल था जो हवा को और भी गर्म बना गया।
मैंने कहा तुम्हें क्यों बताऊँ।
मेरा दिल और तेज़ धड़कने लगा था।
उसने कहा मैं तुम्हारी दोस्त नहीं हूँ क्या?
मुझे बता नहीं सकते?
उसकी आवाज़ में दोस्ती का दावा था लेकिन उसकी आँखों में कुछ और ही चमक थी।
मैंने उससे कहा हमने दोस्ती कब की?
उसने कहा अब कर लो।
उसके होंठों पर एक छोटी सी मुस्कान खेल गई।
मैंने कहा तुम बड़ी वो हो।
उसने कहा वो मतलब क्या?
उसकी भौंहें उठी हुई थीं और वह मेरे और करीब सरक आई थी।
मैंने कहा वो मतलब सेक्सी।
मेरे शब्द उसके कानों तक पहुँचते ही उसका शरीर हल्का सा सिहर गया।
उसने अपना हाथ मुँह पर रख लिया।
मैंने उसका चुम्बन ले लिया।
मेरे होंठ उसके नरम और गर्म होंठों पर रुक गए थे जो थोड़े से खुले हुए थे और उसकी साँस मेरे चेहरे पर गर्म महसूस हो रही थी।
वो गुस्सा हो गई और कहने लगी अभी तुम्हारी मम्मी को बताउँगी।
उसकी आँखें आग की तरह जल रही थीं और उसका चेहरा पूरी तरह लाल हो गया था।
मैं डर गया और वहाँ से चला आया।
रात को मैं छत पर ही सोता हूँ।
ठंडी हवा मेरे शरीर पर लहराती हुई मेरी त्वचा को चूम रही थी और आसमान में चमकते सितारों के नीचे मैं आराम से लेटा हुआ था।
मैं छत पर सोया था जहां रात की खामोशी चारों तरफ फैली हुई थी।
मेरे सामने रीमा की चूची थी जो मेरी कल्पना में बार-बार उभर रही थी।
मैं उसके बारे में सोच कर मुठ मार रहा था।
मेरा हाथ अपनी पैंट के अंदर था और उंगलियाँ लंड को जकड़कर ऊपर-नीचे हिला रही थीं।
हर स्ट्रोक के साथ गर्मी बढ़ रही थी और मेरी सांसें तेज हो गई थीं।
रीमा की भरी-भरी चूचियों की याद में मेरी आँखें बंद थीं और मन में उसके नरम स्पर्श की कल्पना कर रहा था।
तभी वहाँ रीमा आ गई।
उस समय रात के बारह बजे थे जब पूरा घर सो चुका था और सिर्फ चाँदनी की हल्की रोशनी छत पर फैली हुई थी।
मैं उसे देख कर घबरा गया।
मेरा हाथ तुरंत रुक गया और पूरा शरीर सिहर उठा।
वो मुझे घूर कर देखने लगी।
उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जो शर्म और उत्सुकता का मिश्रण लग रही थी।
मैं घबराया हुआ था।
मेरा चेहरा लाल हो गया था और दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
उसने कहा तुम मेरे बारे में सोच कर ही मुठ मार रहे हो न?
उसकी आवाज़ धीमी लेकिन साफ थी और उसमें एक हल्की सी मुस्कान छुपी हुई लग रही थी।
मैंने कहा नहीं।
मेरा स्वर काँप रहा था और मैं उसकी नजरों से बचने की कोशिश कर रहा था।
तो उसने कहा सच बताओ नहीं तो आंटी को बता दूंगी।
उसके शब्दों में हल्का सा धमकी भरा स्वर था जो मुझे और भी घबराने पर मजबूर कर रहा था।
मैंने हाँ कह दिया।
मेरा गला सूख गया था और मैं बस सिर हिला कर मान गया।
उसने पूछा क्या सोच रहे थे?
उसकी आँखें अब मेरे चेहरे पर टिकी हुई थीं और वह मेरे पास और करीब सरक आई थी।
मैंने कहा तुम्हारी चूची के बारे में।
मेरे शब्द निकलते ही मेरी सांस अटक गई।
मेरा लंड सिकुड़ गया था।
उसने अपना हाथ मेरे लंड पर रखा और हिलाने लगी।
उसकी नरम उंगलियाँ मेरे सिकुड़े हुए लंड को धीरे-धीरे सहला रही थीं और गर्मी फैला रही थीं।
मेरा लंड फिर खड़ा हो गया।
उसके स्पर्श से खून तेजी से बहने लगा और लंड पूरी तरह तन गया।
उसने मेरी निक्कर उतार दी और जोर जोर से लंड हिलाने लगी।
उसकी मुट्ठी ऊपर-नीचे तेज गति से चल रही थी जिससे मेरे लंड की नसें फूल गई थीं और सिर पर से सफेद द्रव रिसने लगा था।
थोड़ी देर बाद उसने मेरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
उसके गर्म और नम होंठ मेरे लंड के सिरे को घेर रहे थे और जीभ नीचे से ऊपर की तरफ लपेट रही थी।
उसकी लार मेरे लंड पर चमक रही थी और हर चूसने के साथ चुटकी जैसी आवाज निकल रही थी।
थोड़ी देर बाद उसने अपनी सलवार और कुर्ती उतार दी और कहने लगी अब ठीक है।
अब डांस सिखा दो।
उसकी आवाज़ में अब शर्म कम और इच्छा ज्यादा थी।
मैंने उससे कहा सिखा तो दूँ … पर …?
मेरा स्वर रुका हुआ था और आँखें उसके आधे नंगे शरीर पर घूम रही थीं।
पर पर क्या? उसने कहा अगर कोई परेशानी है तो बाकी भी उतार देती हूँ।
यह बोलते ही उसने अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार दी।
क्या चूची थी उसकी।
वे गोल और भारी चूचियाँ अब पूरी तरह आजाद थीं जिनके गुलाबी निप्पल हवा में खड़े हो गए थे।
चूत अभी कुंवारी लग रही थी।
उसकी चिकनी और गुलाबी चूत की पलकें थोड़ी सी बंद थीं और बीच में हल्का सा गीलापन चमक रहा था।
चूत की खुशबू तो अलग ही आ रही थी।
मीठी और उत्तेजक महक हवा में फैल रही थी जो मेरे नथुनों को भर रही थी।
मेरा लंड वो देख कर और भी मोटा हो गया।
उसकी मोटाई बढ़ गई थी और सिर लाल होकर फटा जा रहा था।
मैंने कहा डांस तो सिखा दूँगा पर क्या तुम फीस दे दोगी।
मेरा स्वर अब भारी और इच्छा से भरा हुआ था।
उसने कहा फीस अभी ले लो।
Enhanced Scene:
उसने मेरा मुँह अपनी चूची पर लगा दिया।
उसने दोनों हाथों से मेरे सिर के बालों को जकड़ लिया और मेरे चेहरे को अपनी भारी भरी हुई नरम चूची की ओर जोर से दबा दिया।
उसका गुलाबी निप्पल मेरे होंठों से टकराया और मैंने तुरंत मुंह खोलकर उसे पूरी तरह अपने होंठों में ले लिया।
मैंने भी अपना काम शुरू किया और उसकी चूची चूसने लगा।
मेरी जीभ उसके निप्पल के चारों ओर घूम रही थी कभी हल्का सा चबाती कभी जोर से चूसती और कभी तेजी से लपेटती हुई।
उसकी चूची का मीठा नमकीन स्वाद मेरे मुंह में भर गया था और उसकी नरम त्वचा मेरे होंठों पर दब रही थी।
पाँच मिनट तक लगातार उसकी दोनों चूचियों को बारी बारी से चूसता रहा।
जब मैं जोर से चूसता तो वो सिहर जाती और जब हल्का काटता तो उसकी छाती ऊपर नीचे तेजी से हिलने लगती।
उसकी सांसें भारी हो गई थीं और छोटी छोटी कराह निकल रही थी।
पाँच मिनट उसकी चूची चूसने के बाद मैंने अपना एक हाथ नीचे सरकाया और उसकी चूत पर रख दिया।
मेरी हथेली उसकी गर्म और अब काफी गीली चूत की पलकों पर फिसल रही थी।
मैंने धीरे धीरे उसे रगड़ने लगा जहां मेरी उंगलियां उसके क्लिटोरिस को हल्का दबाती और गोल गोल घुमाती जा रही थीं।
वो मेरा लंड मुँह में लेकर रगड़ने लगी और मुठ मारने लगी।
उसके गर्म नम मुंह ने मेरे लंड को पूरी तरह घेर लिया था।
उसकी जीभ लंड के सिरे को चाट रही थी जबकि उसकी उंगलियां तेज गति से ऊपर नीचे हिल रही थीं और हर स्ट्रोक पर मेरी नसें फूल जाती थीं।
मैंने उसकी चूत में उंगली दे दी।
जैसे ही मेरी मोटी उंगली उसके टाइट गीले छेद में घुसी वो चिंहुक उठी।
उसका पूरा शरीर एक झटके के साथ काँप उठा और उसकी चूत की दीवारें मेरी उंगली को जोर से जकड़ने लगीं।
मैंने उसकी चूत चूसनी शुरू की और साथ साथ उंगली भी दे रहा था।
मेरी जीभ उसकी चूत की पलकों के बीच घुसकर क्लिटोरिस को तेजी से चाटने लगी।
उसका मीठा रस मेरी जीभ पर फैल रहा था और उसकी चूत की उत्तेजक खुशबू मेरे नथुनों को भर रही थी।
मैंने उससे कहा यहाँ हमें कोई देख लेगा।
हम नीचे चलते हैं तुम्हारे कमरे में।
मेरा स्वर उत्तेजना से भरा हुआ और भारी था।
वो मान गई।
मैंने जाते ही अपना मोबाइल ऑन किया और वीडियो रिकॉर्डर चालू कर दिया।
और 69 की अवस्था में आ गए।
उसको मालूम नहीं था कि मैं उसकी और अपनी वीडियो बना रहा हूँ।
उसकी चूत मेरे मुंह के ठीक ऊपर थी और मेरा लंड उसके मुंह में पूरी तरह दबा हुआ था।
15 मिनट बाद मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा और धक्का दिया।
मेरा मोटा लंड का सिरा उसके टाइट गीले छेद पर दबा और धीरे धीरे अंदर घुसने लगा।
मेरा आधा लंड अंदर चला गया।
उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को बहुत जोर से जकड़ रही थीं और उसका गर्म रस मेरे लंड पर चिपक रहा था।
बिना रुके हुए दूसरा धक्का दिया और मेरा पूरा लंड अंदर चला गया।
एक जोरदार धक्के के साथ मेरा पूरा मोटा लंड उसकी चूत के सबसे गहरे हिस्से तक पहुँच गया।
वो जोर से चीख पड़ी लेकिन उसकी आँखों में दर्द के साथ तेज मजा भी झलक रहा था।
दस मिनट चोदने के बाद उसके चूत में ही झड़ गया।
मेरे लंड ने जोर जोर से स्पंदन किया और गर्म वीर्य की मोटी धार उसकी चूत के अंदर छूटने लगी।
थोड़ी देर बाद वो भी झड़ गई।
उसका पूरा शरीर तन गया चूत सिकुड़ सिकुड़ कर मेरे लंड को दबाने लगी और वो जोर जोर से कराहते हुए झड़ गई।
हम लेट गए।
मेरा लंड फिर खड़ा हो गया।
इस बार मैंने उसको घोड़ी बना कर चोदना शुरू किया।
रीमा को चारों पैरों के बल घुटनों और हाथों पर टिका दिया और उसके कूल्हों को ऊपर उठाकर अपनी जांघों के बीच में ले लिया।
मेरा लंड उसकी अब तक चोदी गई चूत से बाहर निकाला और उसके गांड के टाइट छेद पर रख दिया।
चोदते-चोदते मैंने अपना लंड निकाला और उसकी गांड में दे दिया।
आधा लंड उसकी गांड में चला गया।
उसकी गांड की संकरी दीवारें मेरे मोटे लंड को बहुत जोर से जकड़ रही थीं और अंदर का गर्म और सिकुड़ा हुआ मांस मेरे लंड के सिरे को दबा रहा था।
वो रोने लगी और कहने लगी छोड़ दो।
निकाल दो बाहर।
दर्द हो रहा है।
उसकी आवाज़ में तेज़ दर्द था और उसकी आँखों से आंसू निकल आए थे जबकि उसका पूरा शरीर काँप रहा था।
मैंने कहा बस थोड़ी देर दर्द होगा फिर मजा आएगा।
मेरा स्वर नरम था लेकिन मेरे हाथ उसके कूल्हों को मजबूती से पकड़े हुए थे।
मैं रुक गया और उसकी चूची दबाने लगा।
मेरी उंगलियाँ उसकी भारी चूचियों को मसल रही थीं और निप्पलों को हल्का-हल्का खींच रही थीं जिससे उसकी सांसें थोड़ी स्थिर हुईं।
उसको थोड़ा आराम मिला तो मैंने फिर धक्का दिया और उसकी गांड में अपना पूरा लंड डाल दिया।
एक जोरदार धक्के के साथ मेरा पूरा मोटा लंड उसकी गांड के सबसे गहरे हिस्से तक घुस गया।
वो छटपटा रही थी।
पर लंड निकालने में नाकामयाब रही।
मैंने धक्के लगाने शुरू किए।
हर धक्के के साथ उसकी गांड की दीवारें मेरे लंड को रगड़ रही थीं और उसका गर्म मांस मेरी नसों को दबा रहा था।
वो आ आ ई ई की आवाजें निकाल रही थी।
उसकी कराहें तेज़ होती जा रही थीं और धीरे-धीरे दर्द की जगह गहरी उत्तेजना लेने लगी थी।
मैंने उसे 15 मिनट तक चोदा।
हर मिनट में मेरे धक्के तेज़ और गहरे होते गए और उसकी गांड से हल्का सा गीलापन निकलने लगा जो मेरे लंड को और फिसलने में मदद कर रहा था।
फिर मैंने अपना लंड निकाला तो उसने कहा निकाल क्यों किया।
उसकी आवाज़ अब दर्द कम और इच्छा ज्यादा थी।
तो मैंने कहा मेरा झरने वाला है।
तो उसने कहा गांड में ही झार दो।
उसकी आँखों में अब पूरी तरह सहमति और भूख थी।
मैं अभी डालने ही वाला था तब तक मेरा पानी निकल गया और उसके गांड के ऊपर ही गिर गया।
गर्म वीर्य की मोटी धार उसके गांड की दरार पर फैल गई और नीचे की ओर बहने लगी।
वो जल्दी से पलटी और बाकी का सारा पानी अपने मुँह में ले लिया और मेरा लंड साफ कर दिया।
उसके गर्म और नम मुंह ने मेरे लंड को पूरी तरह चाट लिया और उसकी जीभ हर बूंद को चूसकर साफ करती रही।
हम थोड़ी देर लेटे रहे और फिर उठ कर कपड़े पहनने लगे।
बिस्तर पर थोड़ा सा खून गिरा हुआ था।
तभी मुझे ध्यान आया कि मेरा वीडियो रिकॉर्डर चालू था।
मैंने रीमा के नजरों से बचाकर अपना मोबाइल उठाया और वीडियो सेव करके मोबाइल ऑफ कर दिया।
हम ऊपर ही जाकर सो गए।
सुबह नींद खुली तो रीमा मेरे बगल में सो रही थी।
मेरा लंड बाहर था और उसकी चूची बाहर थी।
शायद मेरे सोने के बाद उसने मेरा लंड चूसा था।
मैंने भी उसकी चूची दबाई और चूसने लगा और सुबह मैंने उसे फिर दुबारा चोदा सिर्फ उसकी गांड मारी।
मैंने उसे फिर घोड़ी बनाया और बिना किसी तैयारी के अपना लंड उसके गांड में धीरे-धीरे पूरा डाला।
उसकी गांड अब पहले से ज्यादा ढीली और गीली हो चुकी थी इसलिए पूरा लंड आसानी से अंदर चला गया।
मैंने सुबह भी उसे 10 मिनट तक जोर-जोर से चोदा और अंत में उसके गांड के अंदर ही झड़ गया।
तो दोस्तो बताओ आपको मेरी कहानी कैसी लगी।
एक और कहानी है आपके किये मेरे पास पर पहले इस पर अपने विचार जरूर लिखना कि मैंने रीमा को चोदने में कहाँ कसर छोड़ दी यह बताना।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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