Fufri behan chudai sex story, Football jaise bade boobs sex story, Bhai ki shadi me chudai sex story: मेरा नाम अनुपम है। मैं रीवा जिले का रहने वाला हूं। मैं अपनी रिश्तेदारी में जाकर लच्छेदार बातें करके लड़कियों और भाभियों को पटा लेता हूं और उनको चोद भी लेता हूं। मेरे अंदर बात करने का बहुत टैलेंट है।
मेरे फुफेरे भाई की शादी होने वाली थी। जैसे ही शादी का कार्ड देखा मुझे दामिनी की याद आ गई। वो ही पहली लड़की थी जिसे मैंने अपने मोटे लंड से चोदा था। ये बात तीन साल पहले की है। उस दिन वो मेरे घर आई थी। हम दोनों अकेले में काफी देर बातें करते रहे। धीरे-धीरे बातें गर्म होती गईं। एक-दूसरे की आंखों में देखते हुए हम करीब आए। फिर मैंने उसे पकड़कर होंठों पर किस किया। उसने भी जवाब दिया। कपड़े उतरे। मैंने उसके शरीर को छुआ। उसकी सांसें तेज हो गईं। आखिरकार मैंने अपना मोटा लंड उसकी चूत में डाला और पहली बार उसे चोदा। वो दर्द और मजा दोनों महसूस कर रही थी। उस दिन से हमारा ये राज बना रहा।
मैंने सोच लिया कि अपने फुफेरे भाई राजीव की शादी में जरूर जाऊंगा। दामिनी को एक बार फिर से चोदूंगा। उसकी वो रसीली चूत, वो बड़े-बड़े बूब, वो मादक सिसकारियां… सब कुछ फिर से महसूस करना था। मैंने अपनी मां के साथ टिकट्स बुक करवा दिए। शादी गोरखपुर में हो रही थी। मेरी बुआ और फूफा जी वहीं रहते हैं।
मैं मां के साथ पहुंच गया। जैसे ही दामिनी नजर आई, दिल की धड़कन बढ़ गई। वो पहले से कहीं ज्यादा सेक्सी लग रही थी। नीली जींस उसकी जांघों पर टाइट थी। प्रिंटेड रेडीमेड शर्ट के बटन के बीच से उसके बड़े बूब की झलक साफ दिख रही थी। चेहरा मेकअप से चमक रहा था। बाल खुले थे। वो मुस्कुराई तो मेरी सांस रुक गई।
“कैसी है तू दामिनी?” मैंने धीरे से पूछा, आंखों में शरारत भरी हुई।
“बस ठीक हूं भाई।” वो रुककर बोली, फिर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ी, “तुम्हारे लंड की याद आ रही थी क्या?”
उसकी ये बात सुनकर मेरे लंड में हलचल हुई। मैंने भी हंसते हुए जवाब दिया, “तो आज शाम को मिल। तेरी प्यास बुझा दूंगा। पूरी तरह।”
शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। घर में हर तरफ हलचल थी। लेडीज मेहंदी लगा रही थीं। दामिनी भी बैठी थी। उसके हाथों पर लाल मेहंदी सूख रही थी। मैं दूर से उसे देखता रहा। उसकी उंगलियां मेहंदी से सजी हुई थीं। वो कभी-कभी मुझे देखकर शरमाती और मुस्कुराती।
फिर संगीत की रस्म हुई। दामिनी ने जमकर डांस किया। उसकी कमर लहरा रही थी। बूब ऊपर-नीचे हो रहे थे। जींस में उसकी गांड गोल-गोल घूम रही थी। मैं बार-बार नजरें उस पर टिका रहा था। मन ही मन सोच रहा था कि कब ये सब मेरे हाथों में होगा।
दूसरे दिन शादी थी। हम लोग लड़के वाले साइड से थे। मैं दामिनी के साथ ही बारात में गया। पूरा कुनबा साथ था। बारात में शोर-शराबा था। लेकिन मेरी नजरें सिर्फ दामिनी पर थीं।
दूल्हा राजीव गेस्ट हाउस के अंदर चला गया। ज्यादातर लोग वापस लौट गए। पहले जयमाल हुआ। फिर फेरे शुरू हुए। पंडित मंत्र पढ़ रहा था। राजीव और उसकी होने वाली बीवी सामने बैठे थे। दामिनी भी पास में बैठी थी। रात के एक बज चुके थे। ज्यादातर गेस्ट सो चुके थे या कमरों में चले गए थे।
मैंने दामिनी की तरफ देखा। आंखों से इशारा किया। बाहर लॉन की तरफ बुलाया। वो उठी। धीरे-धीरे मेरे पास आई। उसकी साड़ी हल्की सरसराती हुई।
“तू अपने भाई की शादी ही करवाएगी या मेरे साथ भी कुछ करेगी?” मैंने धीमी आवाज में कहा।
“पर शादी तो हो जाए पहले।” वो शरमाते हुए बोली।
मैंने उसका हाथ पकड़ा। हल्के से खींचा। “शादी तो समझ लो हो ही गई है। पंडित को पैसा मिल गया। वो मंत्र पढ़ रहा है। अब तेरा वहां कोई काम नहीं। चल कमरे में। चूत दे। मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो रहा है तेरे लिए।”
दामिनी का मन नहीं मान रहा था। वो हिचकिचा रही थी। लेकिन मेरी पकड़ मजबूत थी। मैंने उसे जबरदस्ती ऊपर की तरफ ले जाना शुरू किया। सीढ़ियां चढ़ते वक्त उसकी सांसें तेज हो रही थीं। मैं जानता था कि अंदर से वो भी उत्सुक है।
लड़के वालों ने अच्छा पैसा खर्च किया था। बड़े-बड़े एसी रूम बुक थे। मैंने एक कमरा चुना। चाबी लगाई। दरवाजा खोला। दामिनी का हाथ अभी भी मेरे हाथ में था। मैंने उसे अंदर खींच लिया।
आप लोगों को बताना ही भूल गया कि दामिनी ने आज अपने भाई की शादी पर ब्लैक कलर की जरी वाली सिल्क साड़ी पहनी थी। साड़ी का पल्लू इतनी खूबसूरती से लिपटा हुआ था कि उसके कर्व्स और भी उभरकर सामने आ रहे थे। जरी की चमक रूम की लाइट में झिलमिला रही थी। वो इतनी अच्छी तरह से तैयार थी कि खुद ही नई-नवेली दुल्हन लग रही थी। चेहरा पूरी तरह मेकअप से निखारा हुआ था। आंखों में काजल, होंठों पर मैजेंटा लिपस्टिक, गालों पर हल्का ब्लश और माथे पर बिंदी। बालों में गजरा लगा था जो उसकी खुशबू से महक रहा था।
हम दोनों बेड पर जाकर बैठ गए। बेड का गद्दा नरम था। कमरे में एसी की ठंडी हवा चल रही थी लेकिन हमारे बीच की गर्मी बढ़ती जा रही थी। हम बातें करने लगे। पहले हल्की-फुल्की बातें। फिर धीरे-धीरे आवाजें कम होने लगीं। मैंने अपना हाथ उसकी पीठ पर रखा। साड़ी के ब्लाउज के ऊपर से उसकी मुलायम पीठ को सहलाने लगा। उंगलियां धीरे-धीरे घुमाता रहा। उसकी सांसें थोड़ी तेज हो गईं।
फिर मैंने उसे अपनी तरफ खींचा। उसके चेहरे को दोनों हाथों में लिया और होंठ उसके होंठों पर रख दिए। दामिनी ने मैजेंटा कलर की लिपस्टिक लगाई थी। उसके होंठ इतने जूसी और रसीले लग रहे थे कि जैसे अभी-अभी किसी मीठे फल को चाटा हो। मैंने पहले हल्के से होंठ दबाए। फिर जीभ से उसके निचले होंठ को चाटा। वो भी जवाब देने लगी। उसने अपनी जीभ मेरी जीभ से मिलाई। हम दोनों ने खूब चूसा। मैं उसके ऊपरी होंठ को चूसता रहा, वो मेरे निचले होंठ को। किस गहरा होता गया। सांसें मिलने लगीं। मुंह में एक-दूसरे की लार का स्वाद आने लगा।
किस थोड़ा रुकने के बाद मैंने उसके गले पर होंठ रखे। जीभ से गले की नस को चाटा। धीरे-धीरे जीभ घुमाता रहा। उसकी गर्दन गरम हो गई थी। मैंने हल्के से दांतों से गले की चमड़ी पकड़ी और चबाया। बहुत हल्का, लेकिन इतना कि उसे सिहरन हो। दामिनी “अह्ह्ह्ह… स्सीईई… अअअअ… आहा… हा हा सी सी सी…” करने लगी। उसकी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। उसका बदन कांप रहा था।
फिर मैंने उसके कान के निचले नरम हिस्से को जीभ से छुआ। धीरे से काटा। कान की लौ को मुंह में लेकर चूसा। वो पूरी तरह उत्तेजित हो गई। अब वो चुदक्कड़ लड़की की तरह व्यवहार करने लगी। उसने खुद मेरे दोनों हाथ पकड़े और अपनी साड़ी के ब्लाउज के ऊपर से अपने स्तनों पर रख दिए। दामिनी का फिगर 36-32-38 का था। उसके मम्मे किसी फुटबॉल की तरह गोल, भारी और उभरे हुए थे। साड़ी और ब्लाउज के नीचे भी उनकी आकृति साफ दिख रही थी।
मैंने दोनों हाथों से उसके स्तनों को दबाना शुरू किया। पहले हल्के से मसलता रहा। फिर जोर से। आटे की तरह गूंथने लगा। ब्लाउज के कपड़े के ऊपर से ही उसके निपल्स सख्त हो गए थे। वो और मादक सिसकारियां निकालने लगी। “उंह… उंह… अह्ह्ह…”
“अनुपम!! मैं अपना ब्लाउज खोल रही हूं। तुम आज अच्छे से मेरे स्तनों को पीना।” दामिनी ने तेज सांसों के साथ कहा।
“जरूर बेबी।” मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया।
उसने धीरे-धीरे ब्लाउज के हुक खोले। एक-एक करके। ब्लाउज खुलते ही उसकी काली ब्रा नजर आई। ब्रा भी जरी वाली थी। उसने ब्रा का हुक पीछे से खोला और ब्रा उतार दी। अब उसके स्तन पूरी तरह खुले थे। उसने अपनी अंडरआर्म्स को अच्छे से क्लीन करके रखा था। कोई बाल नहीं। रूम की ट्यूबलाइट में उसके स्तन चमक रहे थे। गोरे, मुलायम, भारी। निपल्स गुलाबी और सख्त।
मैं चुदास में भर गया। दोनों हाथों से उसके स्तनों को कसकर दबाया। उंगलियों से निपल्स को मसलने लगा। फिर एक स्तन को मुंह में लिया। जीभ से निपल को घुमाया। हल्के से काटा। फिर जोर से चूसा। दूध की तरह चूसने लगा। दूसरा स्तन हाथ से मसलता रहा। दामिनी “अई… अई… अई… इस्स्स्स्… उह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह्हह्ह…” करने लगी। उसकी आवाजें तेज होती जा रही थीं।
तीन साल पहले जब मैंने उसे चोदा था तब उसके स्तनों का साइज सिर्फ 32 इंच था। अब कुछ ही सालों में 36 इंच हो गए थे। बड़े, भरे हुए, मुलायम। मैं दोनों स्तनों को बारी-बारी मुंह में लेकर चूसता रहा। काटता रहा। निपल्स को जीभ से रगड़ता रहा। उसके स्तनों पर हल्के लाल निशान बन गए।
उसके संतरे कितने बड़े-बड़े और मुलायम थे। जितनी गोरी दामिनी थी उससे कहीं ज्यादा सफेद उसके चूचे थे। मैं मुंह में लेकर जोर-जोर से चूसने लगा। एक हाथ से दूसरा स्तन दबाता रहा। बुआ की लड़की की चूत अब कामरस से पूरी गीली हो चुकी थी। वो कमर हिलाने लगी थी।
“मेरे नर्म-नर्म संतरे तेरे ही हैं अनुपम!! इनको अच्छे से दबा-दबाकर चूसो… अअअअअ…!!” दामिनी चीखते हुए बोली।
मैंने स्पीड बढ़ा दी। मुंह में लेकर काट-काटकर जख्मी बनाया। जोर से चूसा। उसके निपल्स लाल हो गए थे।
“जान!! मेरी दोनों मुसम्मी को अपने लंड से चोदकर मुझे मजा दो!! कितने दिन हो गए किसी ने मेरे मम्मे को नहीं चोदा… उंह उंह उंह हूँ… हूँ…” दामिनी ने गहरी सांसों के साथ कहा।
“ठीक है बेबी।” मैंने कहा।
उसके बाद मैंने जल्दी-जल्दी अपना कोट उतारा। शर्ट के बटन खोले। पैंट की जिप खोली और पैंट उतार दी। बनियान और अंडरवियर भी उतारकर पूरी तरह नंगा हो गया। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था। मैंने उसे हाथ में पकड़ा और फेंटने लगा। मेरा नागराज 6 इंच लंबा था और 2 इंच मोटा। सिरा लाल और चमकदार। नसें उभरी हुईं। ये लंड किसी भी मजबूत चूत की दीवार को तोड़ सकता था।
इसी लंड से मैंने तीन साल पहले दामिनी को चोदा था। उस दिन भी ये लंड उसकी तंग चूत में घुसकर उसे पहली बार औरत बनाया था। आज फिर वही लंड मेरे हाथ में था। मैंने उसे अच्छे से पकड़ा। हथेली में लपेटकर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगा। पहले तो वो थोड़ा नरम था लेकिन जैसे-जैसे मैं फेंटता गया, वो सख्त होने लगा। खून तेजी से भरने लगा। लंड की नसें उभर आईं। सिरा लाल होकर फूलने लगा। मैं मुठ मारता रहा। स्पीड बढ़ाता गया। हल्की-हल्की सिहरन पूरे लंड में फैल रही थी। आखिर में मेरा नागराज पूरी तरह खड़ा हो गया। अब वो लोहे जैसा सख्त था। सीधा, कड़ा, तैयार। सिरे से थोड़ा प्रीकम निकल रहा था जो चमक रहा था।
मैंने दामिनी की तरफ देखा। वो बेड पर लेटी हुई थी। उसके बड़े-बड़े स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। अपना लंड उसके दोनों चूचों के बीच में सेट किया। दोनों स्तनों को हाथों से कसकर दबाया। मुलायम, गर्म, भारी दूध मेरे लंड को चारों तरफ से दबा रहे थे। जैसे दो गद्दों के बीच में लंड फंस गया हो। मैंने कमर हिलानी शुरू की। जल्दी-जल्दी आगे-पीछे धक्के देने लगा। लंड चूचों के बीच में फिसल रहा था। मुलायम खाल से रगड़ लग रही थी। वो मजा चूत जैसा ही दे रहा था। दामिनी आंखें बंद करके मजा लुटने लगी। उसके होंठ खुले थे।
“अई…..अई….अई… अह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…” वो लगातार सिसकारियां भर रही थी। उसका बदन कांप रहा था। चूचे और ज्यादा दब गए थे। मैं उसके ऊपर बैठकर जोर-जोर से चोद रहा था। लंड चूचों के बीच में तेजी से घूम रहा था। कभी सिरा उसके गले तक पहुंच जाता था। मैंने स्पीड और बढ़ा दी। खूब चोदा उसकी मुसम्मी को। लंड की रगड़ से उसके स्तनों पर हल्की लाली आ गई।
फिर मैंने लंड को थोड़ा ऊपर उठाया और उसके स्तनों पर हल्की-हल्की पिटाई करने लगा। लंड का सिरा उसके निपल्स पर टकरा रहा था। पट-पट की आवाज आने लगी। दामिनी और जोर से सिसकारियां भरने लगी। मेरे लंड से बहुत सा प्रीकम निकलकर उसके स्तनों पर लग गया। चिपचिपा, गर्म। मैंने फिर से लंड उसके चूचों के बीच रखा और कुछ देर और चोदा। आखिर में मैं नीचे उतरा। उसके एक स्तन को मुंह में लिया। जीभ से चिपचिपा माल चाटकर साफ किया। दूसरे स्तन को भी चूसा। दोनों चूचे अब मेरे थूक और उसके माल से चमक रहे थे।
उसके बाद दामिनी ने खुद ही अपनी ब्लैक साड़ी खोलनी शुरू की। पल्लू धीरे-धीरे नीचे सरका। साड़ी पूरी खुल गई। फिर उसने पेटीकोट का नाड़ा खोला और साया भी उतार दिया। अब वो सिर्फ पिंक कलर की जाली वाली पेंटी में थी। पेंटी इतनी पतली थी कि उसकी चूत की आकृति साफ दिख रही थी। बीच में गीला धब्बा बन गया था। वो मेरे सामने आई। मेरे लंड को दोनों हाथों से पकड़ा। हथेली में लपेटकर फेंटने लगी। जल्दी-जल्दी। जोर-जोर से। ऊपर-नीचे। कभी गोल-गोल घुमाती। मेरी सांसें तेज हो गईं।
“अनुपम!! अब तुम लेट जाओ!! लंड चूसन कार्यक्रम का मजा लो।” दामिनी ने मुस्कुराते हुए कहा। उसकी आंखों में शरारत थी।
“ओके बेबी!!” मैंने कंधे उचकाकर कहा और पीठ के बल लेट गया। गेस्ट हाउस का बेड बहुत गुलगुला और नरम था। जैसे बादलों पर लेटा हो। इस पर चुदाई का आनंद दोगुना होने वाला था। दामिनी मेरे पैरों के बीच बैठ गई। मेरे 6 इंच के लंड को फिर से पकड़ लिया। हथेली से ऊपर-नीचे फेंटने लगी। मैं “आऊ…..आऊ….हमममम अह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा…..” करने लगा। लंड में सिहरन दौड़ रही थी।
फिर वो और मेहनत से फेंटने लगी। एक हाथ से लंड को सहलाती रही। दूसरे हाथ से मेरी गोलियों को हल्के से दबाती, सहलाती। उंगलियों से गोलियां मसलती। मजा देने लगी। उसके बाद चूसने का काम शुरू किया। पहले लंड के सिरे को जीभ से चाटा। प्रीकम का स्वाद लिया। फिर धीरे-धीरे मुंह में लिया। होंठों से लंड को दबाया। जीभ अंदर घुमाती रही। मैं बस लेटकर तमाशा देख रहा था। सब कुछ दामिनी ही कर रही थी। वो किसी अनुभवी रंडी की तरह जानकार लग रही थी। उसके हाथ मेरे लंड पर बड़ी सेक्सी मालिश कर रहे थे। कभी तेज, कभी धीमे। वो मुंह से थूक निकालकर लंड पर लगाती। पूरी तरह गीला और चिकना बना देती। लंड अब चमक रहा था। वो ऊपर-नीचे सिर हिलाने लगी। मुंह में लंड अंदर-बाहर हो रहा था। गहरे तक ले जाती। फिर बाहर निकालती।
उसके बाद दामिनी ने और जोर लगाया। मुंह में लंड लेकर ऊपर-नीचे जल्दी-जल्दी सिर हिलाने लगी। होंठों से लंड को कसकर दबाती हुई। जीभ अंदर घुमाकर सिरे को चाटती रही। कभी गहरे तक ले जाती, गले तक पहुंचाती। फिर बाहर निकालकर सिरे को जीभ से गोल-गोल घुमाती। मेरे लंड के छेद से प्रीकम की बूंदें निकलने लगीं। वो तुरंत जीभ से चाट गई। स्वाद लेते हुए मुस्कुराई। उसकी आंखें मेरी तरफ उठाकर देख रही थीं।
अब मेरी गोलियों का नंबर था। वो पहले एक हाथ से मेरी गोलियों को हल्के से दबाने लगी। उंगलियों से सहलाती रही। गोलियां गर्म हो रही थीं। फिर उसने मुंह नीचे किया। एक गोली को मुंह में लिया। जीभ से चाटा। हल्के से चूसा। दूसरी गोली को हाथ से मसलती रही। फिर दोनों को बारी-बारी मुंह में लेकर चूसने लगी। अच्छे से, धीरे-धीरे। जीभ से चारों तरफ घुमाती। मैं सिहर रहा था।
“आऊ…..आऊ….लगता है आज तू मेरी जान ही ले लेगी!!” मैंने दर्द-मजे की आवाज में कहा। मेरी सांसें तेज हो गईं।
वो और अच्छे से गोलियों को चूसने लगी। मुंह में लेकर हल्के से दांत लगाती, फिर जीभ से सहलाती। मुझे खूब आनंद दे दिया। पूरा लंड और गोलियां उसके मुंह और हाथों से गीली हो चुकी थीं।
फिर दामिनी उठी। अपनी पिंक जाली वाली पेंटी को धीरे से नीचे सरकाया। पेंटी उतारकर फेंक दी। अब वो पूरी नंगी थी। उसने पैर फैलाकर मुझे अपनी चूत दिखाई। चूत बहुत चिकनी थी। बिलकुल साफ, कोई बाल नहीं। होंठ गुलाबी और मोटे। बीच में हल्की दरार से कामरस चमक रहा था। बहुत ही सेक्सी और मस्त दिख रही थी।
“क्या तुम मेरी चूत चूसोगे?” वो शरमाते हुए लेकिन उत्सुक होकर बोली।
“तुम चाहती हो क्या?” मैंने पूछा, आंखों में शरारत भरी।
“हां! अनुपम! मैं चाहती हूं कि तुम मेरी चिकनी चमेली को चूस-चूसकर मजा दे दो।” मेरे बुआ की लड़की दामिनी ने गहरी सांस के साथ कहा।
मैं उसके पैरों के बीच बैठ गया। चेहरा चूत के पास ले गया। पहले जीभ से हल्के से चाटा। आज तीन साल बाद उसकी चूत फिर से पी रहा था। पाव की तरह फूली हुई चूत के चिकने होंठ किशमिश की तरह रसीले और मीठे लग रहे थे। मैंने जीभ से दोनों होंठों को अलग किया। अंदर का गुलाबी हिस्सा नजर आया। जीभ लगाकर उसके यौवनरस का मजा लेने लगा। धीरे-धीरे चाटता रहा। कभी ऊपर से नीचे, कभी गोल-गोल। दामिनी “उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” करने लगी। उसकी कमर उठ रही थी।
उसकी बुर की आकृति बिलकुल तराशी हुई थी। जैसे कोई मूर्तिकार ने बनाई हो। मैंने जीभ से उसके चूत के दाने को छेड़ा। हल्के से दबाया। फिर चूसा। तड़पा-तड़पा पी रहा था। उसकी बुर का स्वाद खट्टा-खट्टा खटाई की तरह था। थोड़ा नमकीन, थोड़ा मीठा। मैं चूसने में व्यस्त हो गया। वो अंगड़ाई लेकर कमर और गांड उठा-उठाकर चुसवा रही थी। उसका बदन ऐठ रहा था। अकड़ रहा था। पैर कांप रहे थे। दामिनी पर अब चुदाई के बादल मंडराने लगे थे।
“सी सी सी सी…तुम्हारी जीभ तो मुझे पागल कर रही है….और चाटो मेरी बुर को ….ऊँ..ऊँ…ऊँ।” दामिनी चीखते हुए बोली।
वो मेरे सिर को हाथों से पकड़कर चूत में दबाने लगी। मेरी नाक उसके क्लिटोरिस पर दब रही थी। उसे बहुत अधिक आनंद मिल रहा था। उसकी चूत बिलकुल चिकनी जेली जैसी थी। गर्म, गीली, नरम। मैं बार-बार जीभ से अंदर घुसाता रहा। फिर उंगली से होंठ खोल देता था। अंदर का गुलाबी माल दिखता। मैं जीभ डालकर चाटता। अब उसकी चूत अपना मक्खन छोड़ने लगी थी। सफेद-सा रस निकल रहा था। मुझे उसे चाटना बहुत प्रिय लग रहा था।
“अई…अई….मेरी चुद्दी में उंगली डालकर मजा दो अनुपम!!” फिर दामिनी ने फरमाइश की।
मैंने तुरंत एक उंगली उसकी चिकनी चमेली बुर में डाल दी। अंदर गर्मी और गीलापन था। उंगली अंदर-बाहर करने लगा। धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। दूसरी उंगली भी डाली। अब दो उंगलियां अंदर-बाहर हो रही थीं। वो अपनी 36 इंच के मम्मे खुद प्रेस करने लगी। निपल्स को कस-कसके मसलने लगी। मैंने काफी देर उंगलियां चलाईं। उसके कामरस से उंगलियां पूरी भीग गईं। फिर मैंने भीगी उंगली निकाली और उसके मुंह में डाल दी। वो चाट गई। अपना रस चखकर और उत्तेजित हो गई।
“मुझे लंड पर बिठाकर चोदो अनुपम!! मेरी वासना की आग को मिटा डालो!” उसकी अगली फरमाइश थी।
मैंने अपनी बुआ की जवान चुदासी लड़की की गांड पर हाथ लगाया। उसकी गोल, मुलायम, भारी चूतड़ मेरी हथेलियों में आ गए। मैंने उन्हें कसकर दबाया और उसे धीरे से ऊपर उठाया। मेरा 6 इंच का लंड पहले से ही पूरी तरह खड़ा और तैयार था। सिरा लाल, नसें उभरी हुईं, चमकदार। वो उसकी चूत का कचूमर बनाने को बेताब था। मैंने लंड का सिरा उसकी चूत के होंठों पर सेट किया। हल्के से दबाया। गीलेपन की वजह से सिरा आसानी से फिसला। फिर मैंने उसकी कमर पकड़कर नीचे खींचा। लंड धीरे-धीरे अंदर घुस गया। पहले सिरा, फिर आधा, फिर पूरा। दामिनी ने आंखें बंद कीं और सिसकारी भरी। वो सही से बैठ गई। उसकी चूत मेरे लंड को पूरी तरह निगल चुकी थी।
उसके बाद धक्का-मुक्की शुरू हो गई। दामिनी ने कमर उछकाना शुरू किया। ऊपर उठती, फिर जोर से नीचे बैठती। हर बार लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। मुझे भी काफी मजा मिल रहा था। उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर दबा रही थीं। जैसे गर्म, नरम, गीली मुट्ठी हो। कुछ देर में सब अच्छे से सेट हो गया। दामिनी को लंड पर बैठकर चुदने की कला अच्छी तरह आती थी। वो कमर को जल्दी-जल्दी हिला-हिलाकर सेक्स करने लगी। कभी गोल-गोल घुमाती, कभी आगे-पीछे।
“उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” वो लगातार सिसकारियां भर रही थी। उसकी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। वो पूरी मस्ती में आ चुकी थी। उसकी मादक सीत्कारें फूट-फूटकर निकल रही थीं। मेरा दमदार लंड मस्ती से उसका गेम बजा रहा था। जल्दी-जल्दी उछलने की वजह से बुआ की लड़की के 36 इंच के दूध ऊपर-नीचे फड़फड़ा कर उछल रहे थे। वो दृश्य देखकर मैं और उत्तेजित हो गया। ऐसी में वो और भी मादक, और भी सेक्सी दिख रही थी।
“तुम भी नीचे से चोदो मुझे!! अह्ह्ह्हह—अई yes can do।” वो बोली और मेरे दोनों हाथ पकड़कर उठाए। उन्हें अपने बड़े-बड़े, गोल चूतड़ पर रखवा दिए। मैंने कसकर पकड़ा। उंगलियां उसके चूतड़ की मुलायम चमड़ी में धंस गईं।
उसके बाद मैं भी अपनी तरफ से धक्का देना शुरू कर दिया। नीचे से कमर उठाकर जोर-जोर से पेलने लगा। हर धक्के में लंड पूरी ताकत से अंदर जाता। दामिनी खूब मजा लूट रही थी। उसकी सिसकारियां और तेज हो गईं। वो ऊपर-नीचे उछल रही थी, मैं नीचे से पेल रहा था। दोनों की रिदम एक हो गई। उसके बाद तो मेरा लंड बिजली की रफ्तार से काम करने लगा। नीचे से तेज-तेज धक्के। पट-पट की आवाज आने लगी। दामिनी चिंघाड़-चिंघाड़ कर गहरी सांसें लेने लगी। उसका बदन कांप रहा था। आखिर में वो थककर नीचे उतर गई।
“साली छिनाल!! मजा आया कि नहीं?” मैंने हंसते हुए कहा और उसे पीठ के बल लिटा दिया। उसके पैर फैलाए। कुछ देर मैंने फिर से उसकी चूत को जीभ से पीना शुरू किया। होंठ चाटे, क्लिटोरिस चूसा, अंदर जीभ डाली। वो फिर से सिहरने लगी। फिर मैंने अपना 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा लंड हाथ में लिया। सिरा उसकी चूत पर रखा और एक धक्के में पूरा अंदर डाल दिया। बुआ की लड़की फिर से आनंदित होने लगी। अब उसकी चूत का छेद अच्छे से ढीला हो चुका था। पहले की तंगी कम हो गई थी। मेरा लंड आराम से अंदर-बाहर दौड़ रहा था। उसके चिकने वीर्य की वजह से लंड सटासट फिसल रहा था। हर धक्के में गीली आवाज आ रही थी।
“ohh!! yes yes yes!! fuck me hard अनुपम!! ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी…” वो चीखते हुए कहने लगी। उसकी आवाजें अब बेकाबू हो चुकी थीं।
अब जाकर हमारी असली चुदाई की स्टोरी शुरू हुई थी। अब जाकर बुआ की लड़की अच्छे से गर्म हो चुकी थी। उसकी चूत पूरी तरह तैयार थी। अब ये मेरा धर्म था कि मैं उसे चोदकर पूरी तरह संतुष्ट करूं। एक पुरुष के दायित्व को निभाऊं। मैंने स्पीड बढ़ा दी। जल्दी-जल्दी चोदने लगा। हर धक्का गहरा और तेज।
फिर तो जो-जो हुआ कि आपको क्या-क्या बताऊं। हम दोनों इतनी तेजी से एक-दूसरे में खो गए कि समय और जगह का पता ही नहीं चला। दामिनी की चूत भट्टी जैसी गर्म और पिघलती हुई लग रही थी। मैं पेलता ही चला गया। मेरा लौड़ा भी उसकी भट्टी में बुरी तरह फंस चुका था। बाहर निकलने का मन ही नहीं कर रहा था। मैं भी पीछे नहीं हट सकता था।
मुझे आज उसको इतना संतुष्ट कर देना था कि बार-बार वो मेरे पास आकर चुदवा लिया करे। मैंने मन बना लिया था कि दामिनी को आज ऐसी चुदाई दूंगा कि वो कभी भूल न पाए। मैं दामिनी को चोदता ही चला गया। बिना रुके, बिना थके। उसकी चूत अब पूरी तरह मेरे लंड की आदी हो चुकी थी। उसकी बुर उसी तरह से चल रही थी जैसे पल्सर बाइक की इंजन – बिलकुल स्मूथ, तेज, बिना किसी रुकावट या आवाज के। हर धक्के में लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थीं लेकिन फिसलन इतनी थी कि कोई रुकावट नहीं आ रही थी।
मैं हब्सी की तरह लंड दौड़ाने लगा। कमर को तेज-तेज हिलाता, नीचे से जोरदार धक्के मारता। हर धक्का गहरा, हर धक्का तेज। दामिनी की सिसकारियां अब चीखों में बदल गई थीं। उसके पैर मेरी कमर पर लिपटे हुए थे। हाथ मेरे कंधों पर नाखून गड़ा रही थी। आखिर में उसकी फुद्दी से पट-पट की तेज आवाजें आने लगीं। गीली चूत और मेरे लंड की रगड़ से कमरे में वो आवाज गूंज रही थी। मेरा मुझ पर कोई कंट्रोल नहीं था। सब अपने आप ही हो रहा था। मेरा लंड खुद ही ऑटो कंट्रोल मोड में आ गया था। वो बस दामिनी की फुद्दी का काम तमाम कर रहा था – तेज-तेज, बिना रुके, बिना थके।
फिर झड़ने की दुखद घड़ी आ गई। मैं महसूस कर रहा था कि अब रुकना मुश्किल है। दामिनी भी जानती थी कि वो भी झड़ने वाली है। उसकी चूत की दीवारें सिकुड़ने लगीं। वो मेरे लंड को और कसकर दबा रही थी। मैंने तुरंत उसे कंधों से पकड़ा। दोनों हाथों से उसके कंधे मजबूती से थामे और उसे अपनी छाती से चिपका लिया। उसका बदन मेरे बदन से सटा हुआ था। उसके बड़े-बड़े स्तन मेरी छाती पर दब रहे थे। मैंने उसके गुलाबी होंठों को चूसना शुरू कर दिया। पहले हल्के से दबाया, फिर जीभ डालकर गहरा किस किया। वो भी मेरे होंठ चूसने लगी। जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं। सांसें मिल रही थीं। किस करते-करते हम दोनों साथ में झड़ गए।
मेरे लंड ने आखिरी धक्का मारा और प्यार का गवाह बनकर मधुर पिचकारियां उसकी चूत में छोड़ दीं। गरम-गरम वीर्य की धारें अंदर जाती रहीं। एक के बाद एक। दामिनी की चूत भी सिकुड़ती हुई अपने रस छोड़ रही थी। वो मेरे लंड पर झड़ गई। दोनों का रस मिलकर बह रहा था। हम कुछ पल ऐसे ही लिपटे रहे। सांसें तेज, बदन पसीने से भीगा हुआ।
फिर कुछ देर बाद मैंने उसे पलटा। उसकी कमर पकड़ी और उसे घुटनों के बल करवट दिया। उसकी गांड ऊपर उठी। गोल, सफेद, मुलायम। मैंने अपना लंड फिर से तैयार किया। अभी भी सख्त था। थोड़ा सा वीर्य और रस लगा हुआ था। मैंने लंड का सिरा उसकी गांड के छेद पर रखा। धीरे से दबाया। दामिनी ने खुद कमर पीछे की। लंड धीरे-धीरे अंदर घुस गया। पहले थोड़ा दर्द हुआ लेकिन वो सह गई। फिर मैंने धक्के शुरू किए। धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाई। उसने खुशी-खुशी चुदवा ली। गांड की तंगी में मजा अलग था। मैंने कुछ देर गांड चोदी। जोर-जोर से नहीं, लेकिन अच्छे से। आखिर में मैंने बाहर निकाला।
फिर वो उठी। कपड़े इकट्ठे किए। पहले पेंटी पहनी, फिर साया, फिर ब्लाउज, फिर साड़ी ठीक की। मेकअप थोड़ा बिगड़ा था लेकिन वो मुस्कुराई। मेरी तरफ देखकर बोली, “बहुत मजा आया अनुपम।” फिर वो कमरे से निकलकर अपने भाई राजीव के पास चली गई। शादी की रस्में अभी भी चल रही थीं। मैं थककर बेड पर लेट गया। पूरा बदन थका हुआ था। आंखें बंद हुईं और मैं सो चुका था।
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