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पति ने मेरी गांड़ में मेरे भाई का लण्ड डलवा दिया

Bhai behen sex story, Pati bhai threesome sex story, Nand bhabhi lesbian chudai sex story: मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से हूं। शादी को दो साल हो चुके हैं और मेरी उम्र अभी सत्ताईस के ऊपर है। मेरे पति की उम्र उनतीस साल है। वे एक बड़ी कंपनी में अच्छे पद पर हैं और काम के सिलसिले में महीने में पंद्रह-बीस दिन बाहर रहते हैं।

मेरे पति हैंडसम और स्मार्ट हैं। उनका व्यवहार भी बहुत अच्छा रहता है। टूर से लौटते समय वे ढेर सारे सौंदर्य प्रसाधन और अन्य चीजें लाते हैं। वे कामुकता बहुत पसंद करते हैं। उन्हें हर बार कुछ नया चाहिए। एक ही तरह की क्रिया से वे जल्दी बोर हो जाते हैं। उनके नए-नए स्टाइल और विभिन्न आसनों से मुझे भी बहुत आनंद मिलता है। इसलिए मैं उनके इन कार्यों में कभी ऐतराज नहीं करती।

पिछले दिन ही वे टूर से लौटे थे। आज मेरा छोटा भाई आया हुआ था। उसकी उम्र उन्नीस साल है। शाम का समय था। मैं और मेरा भाई बेडरूम में बेड पर बैठकर टीवी देख रहे थे। मैं साड़ी-ब्लाउज में थी और वह पैंट-शर्ट में। वह बेड के एक कोने पर बैठा था। मैं पीठ बेड की पुश्त से लगाकर दोनों हाथ सीने पर बांधे बैठी थी।

सात बजने वाले थे। तभी कॉल बेल बजी। मेरे उठने से पहले ही भाई ने दरवाजा खोला और वापस आकर वहीँ बैठ गया।

कौन आया है? मैंने पूछा।

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जीजाजी आए हैं। उसने सामान्य स्वर में कहा।

पति ने बाहर का दरवाजा लॉक किया और बेडरूम में आकर मेरे पास बैठ गए।

देर नहीं हो गई आज आने में? मैंने कृत्रिम क्रोध दिखाते हुए कहा।

देर वाले काम में ही मजा आता है जानमन। उन्होंने मेरे गाल पर किस करते हुए कहा।

उनका एक हाथ मेरे ब्लाउज के ऊपर पहुंच गया। ब्लाउज के ऊपर से ही उन्होंने मेरे स्तन पर चिकोटी काटी। मेरे होंठों से हल्की कराह निकल गई। मेरी कराह सुनकर भाई की नजर हमारी ओर गई और फिर टीवी की तरफ हो गई।

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मैंने उनके हाथ को ब्लाउज से हटाया और धीमे स्वर में कहा, आपको सब्र होना चाहिए। मेरा भाई भी बैठा है और आप उसकी मौजूदगी में ऐसी हरकतें कर रहे हैं।

ओके… तुम जाओ और मेरे लिए अच्छी सी चाय बनाओ। मैं हाथ-मुंह धोकर आता हूं।

उन्होंने धोखे से मेरे होंठ चूमे और उठ गए। मैं बड़बड़ाती हुई उठी। भाई ने कनखियों से यह सब देख लिया था। उसके होंठों पर मुस्कान आ गई।

थोड़ी देर बाद चाय लेकर आई तो पति अपने स्थान पर बैठे थे। मैंने कप दिया और उनके पास बैठ गई। टीवी पर कैबरे गीत चल रहा था। नायिका कम कपड़ों में उत्तेजक अंदाज में नाच रही थी।

हाय… क्या फिगर है। कैसे पतली कमर को झटका देकर देखने वालों को हार्ट अटैक दे रही है। क्यों जानमन, क्या ऐसा डांस कर सकती हो तुम? पति ने चाय पीते हुए कहा।

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तुम चुप रहोगे या नहीं? मैंने धीमे स्वर में कहा।

अरे साले साब, देख रहे हो तुम्हारी बहन हमें कुछ बोलने नहीं दे रही। अगर हमने इस कैबरे डांस की तारीफ कर दी तो क्या गलत है? पति ने भाई से कहा।

भाई मुस्कराकर रह गया। चाय खत्म होने तक पति चुप रहे लेकिन उनका हाथ फिर मेरे ब्लाउज पर आ गया। वे मेरे स्तनों को मसलने लगे। मैंने भाई की मौजूदगी का ख्याल करके हाथ हटाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने ब्लाउज के दो-तीन बटन खोलकर हाथ अंदर डाल दिया। ब्रा के नीचे से निप्पल इतनी जोर से मसला कि मैं तेज कराह उठी।

मेरी कराह ने भाई का ध्यान खींचा। वह कुछ पल हमें देखता रहा। उसकी नजर मेरे ब्लाउज पर जम गई। फिर वह नीची नजर करके बाहर जाने लगा तो पति ने उसका हाथ पकड़कर बेड पर अपने पास बैठा लिया। हाथ ब्लाउज में ही रखकर बोले, अरे यार ये सामान्य पति-पत्नी की नोंक-झोंक है। तुम कहां चले?

अच्छा एक बात बताओ। क्या तुमने कभी किसी जवान औरत के स्तन देखे हैं?

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यह कहते हुए उन्होंने मेरे ब्लाउज को और खोलकर एक स्तन ब्रा से बाहर निकाल दिया। हम दोनों स्तब्ध थे।

मुझे पता है तुमने न देखा है न छुआ है। अपना हाथ इधर लाओ।

पति ने भाई का हाथ पकड़कर मेरे स्तन पर रख दिया। लो देख लो कैसा होता है स्तन। शर्मा मत।

उन्होंने भाई का मुंह मेरे बाएं स्तन के बहुत पास कर दिया। निप्पल उसके होंठों के पास लाकर बोले, होंठ खोलो और इसे चूसो।

भाई ने होंठ नहीं खोले। वह फटी आंखों से देख रहा था। तब पति ने दायां स्तन भी बाहर निकाला और चूसने लगे। मैं उत्तेजना में बहने लगी।

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क्या तुम अपने भाई के होंठ नहीं चूम सकती? पति ने मुझसे कहा।

मेरे मन में अजीब प्यार उमड़ आया। मैंने भाई के गुलाबी होंठ चूम लिए और बायां निप्पल उसके मुंह में दे दिया। अब उसने चूसना शुरू किया। जैसे कोई बच्चा दूध पीता है। मुझे अद्भुत आनंद मिला। मेरे हाथ उसके सिर को सहलाने लगे।

दोनों स्तन चूसे जा रहे थे। मैं उत्तेजित हो रही थी। मेरे हाथ भाई की पीठ से होते हुए उसकी पैंट पर पहुंच गए। मैंने जिप खोली और अंडरवियर के ऊपर से उसके लिंग को सहलाने लगी।

पति ने मेरी साड़ी-पेटीकोट घुटनों से ऊपर कर दी। दाएं स्तन को चूसते हुए जांघें सहलाने लगे। मैंने करवट ली। पीठ उनकी ओर कर ली। उन्होंने साड़ी-पेटीकोट नितंबों तक पलट दी। पैंटी अभी नहीं उतारी थी। जांघें सहला-सहलाकर उत्तेजित कर रहे थे।

मेरे सामने लेटा भाई मेरे स्तनों को चूस रहा था। मैंने उसके अंडरवियर से लिंग बाहर निकाला। सात-आठ इंच लंबा। त्वचा मुंड पर चढ़ी हुई थी। मैं धीरे-धीरे नीचे कर रही थी। उसकी पैंट नीचे सरका चुकी थी।

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अचानक पति बोले, आज नया मजा लेते हैं। तुम्हारे भाई का नया लिंग तुम्हारी योनी में नहीं बल्कि गुदा में डलवाते हैं। तुम्हें मजा आएगा। भाई को भी। हाथ-पांव बेड पर टिकाकर नितंब ऊंचे कर लो।

मैंने वैसा ही किया। पति ने भाई को मेरे पीछे खड़ा किया। उसके लिंग मुंड पर थूक लगाया। मेरी गुदा पर टिकाया। धक्का मारो साले साब लेकिन धीरे-धीरे।

भाई ने कमर पकड़कर धक्का मारा। लिंग ऊपर फिसल गया।

ओफ्फो… रुको। दोबारा कोशिश करते हैं। पति ने कहा।

मैंने करवट ली और पति की ओर देखकर बोली, ये पहली बार कर रहा है। एक ही बार में कैसे घुसेगा वो भी बिना किसी चिकनाई के। रसोई से सरसों का तेल ले आओ। मैं तब तक इसे और उत्तेजित करती हूं।

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पति मुस्कुराए और तेजी से रसोई की ओर चले गए। मैंने अपने भाई की ओर देखा। उसकी आंखों में अभी भी थोड़ा डर और बहुत सारी उत्सुकता थी। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और उसे बेड के सिरहाने पर बैठा लिया। मैंने अपनी टांगें फैलाईं और अपना सिर उसकी मजबूत जांघ पर टिका दिया। उसका लिंग अभी भी तना हुआ था। मैंने धीरे-धीरे अपनी उंगलियों से उसके लिंग मुंड की त्वचा को पीछे सरकाया। गुलाबी मुंड पूरी तरह नंगा हो गया। मैंने उसे देखा और फिर धीरे से अपने होंठों के बीच ले लिया।

मैंने पहले मुंड को जीभ से गोल-गोल घुमाया। फिर धीरे-धीरे मुंह में गहराई तक ले जाकर चूसने लगी। मेरी जीभ उसके मुंड के नीचे की संवेदनशील नस पर बार-बार रगड़ रही थी। मैंने एक हाथ से उसके लिंग की जड़ को पकड़ा और दूसरे हाथ से उसके अंडकोष को हल्के से सहलाया।

वह तुरंत मचल उठा। उसके मुंह से निकला, उफ… ओह… दीदी… शरीर में चींटियां सी दौड़ रही हैं। उसकी सांसें तेज हो गईं। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़े और उन्हें अपनी ओर खींचकर अपने नंगे स्तनों पर रख दिया। मैंने कहा, इनसे खेलते रहो। मसलो इन्हें। चूसो इन्हें।

उसने दोनों स्तनों को थोड़ा जोर से दबाया। उसके अंगूठे मेरे निप्पलों पर घूमने लगे। मैंने लिंग को मुंह से थोड़ा निकाला और जीभ से पूरी लंबाई पर तराशने लगी। ऊपर से नीचे तक। फिर मुंड को फिर मुंह में लेकर तेजी से चूसने लगी। मेरी लार उसके लिंग पर चमक रही थी। वह बार-बार कराह रहा था। उसकी कमर हल्की-हल्की ऊपर उठ रही थी।

तभी पति तेल की कटोरी लेकर वापस आए। उन्होंने बेड पर आकर मेरी एक टांग को ऊंचा उठाया। मेरे नितंब थोड़े अलग हो गए। उन्होंने अपनी उंगलियों पर सरसों का तेल लिया और मेरी गुदा के चारों ओर हल्के से मलना शुरू किया। पहले बाहर की तरफ गोल-गोल। फिर धीरे-धीरे उंगली अंदर डालकर तेल फैलाया। ठंडा तेल मेरी गर्म गुदा में जाने से एक अजीब सिहरन हुई। उन्होंने दो उंगलियां अंदर करके धीरे-धीरे अंदर-बाहर किया। मेरी गुदा धीरे-धीरे ढीली पड़ने लगी।

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अब जीजाजी के पास जाओ। मैंने भाई से मुंह से लिंग निकालकर कहा। वह यंत्र की तरह चुपचाप उठा और पति के पास चला गया।

पति ने मेरे नितंबों के नीचे एक मोटा तकिया रख दिया। अब मेरे नितंब और ऊंचे हो गए। गुदा की खाई पूरी तरह खुल गई। पति ने भाई से कहा, तुम लेट जाओ। मैं तुम्हारे लिंग को ठीक निशाने पर फंसा दूंगा। जोर का धक्का मारना। पहली बार थोड़ा दर्द होगा, घबरा मत जाना। उसके बाद बहुत मजा आएगा।

भाई मेरे पीछे लेट गया। उसने अपनी बांहें मेरी बगलों से निकालकर मेरे दोनों स्तनों को मजबूती से पकड़ लिया। पति ने भाई के लिंग पर ढेर सारा तेल लगाया। लिंग पूरी तरह चिकना और चमकदार हो गया। फिर पति ने मेरी एक टांग को और ऊंचा किया। भाई का लिंग मुंड मेरी गुदा पर टिका दिया। मैंने अपना एक हाथ पीछे करके मदद की। उंगलियों से लिंग मुंड को गुदा के तंग छेद पर सेट किया।

मारो जोर का शॉट। मैं तैयार हूं। मैंने कहा और दांत भींच लिए।

भाई ने मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और जोर से धक्का मारा। लिंग मुंड ने मेरी गुदा को फैलाते हुए अंदर प्रवेश किया। पहले मुंड पूरा अंदर गया। मुझे तेज दर्द हुआ। मैं जोर से कराही, आह्ह्ह…! भाई भी दर्द से कराह उठा, उफ्फ…! उसकी सील टूट गई थी। हल्का-सा गर्म रक्त बाहर निकला और तेल के साथ मिल गया।

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पति ने कहा, रुको मत। पीछे हटो थोड़ा और फिर जोर से।

भाई ने थोड़ा पीछे खींचा और फिर जोर का धक्का मारा। इस बार लिंग का आधा हिस्सा मेरी गुदा में समा गया। दर्द अभी भी था लेकिन अब थोड़ा कम। मेरी गुदा तेल से चिकनी हो चुकी थी।

भाई बोला, ओफ… बहुत दर्द हो रहा है। मैं और नहीं कर सकता। लगता है मेरा लिंग पिस जाएगा। दीदी के कुल्हे चाकी के पाट जैसे हैं।

उसने लिंग बाहर निकाल लिया। मैंने तुरंत पति से कहा, गुदा में तुम डाल दो। जल्दी करो। मेरे भीतर आग भड़क उठी है। इसे मैं योनी का आनंद देती हूं।

मैंने भाई का हाथ पकड़ा और उसे अपने सामने लिटा लिया। उसका लिंग अभी भी तना हुआ था। मैंने उसे हाथ में लिया। धीरे से सहलाया। फिर अपनी योनी के मुंह पर रखा और धीरे से अंदर फंसाया। मैंने कहा, अब धक्का मारो। इसमें दर्द नहीं होगा।

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उसने पहले हल्का धक्का मारा। लिंग मुंड आसानी से मेरी गीली योनी में प्रवेश कर गया। वह आश्वस्त हुआ। फिर धीरे-धीरे गहराई तक धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ उसका लिंग मेरी योनी की दीवारों से रगड़ खा रहा था। मैं आनंद से भर उठी। मेरे हाथ उसके नितंबों पर गए। मैंने उन्हें दबाया और उसे और गहराई तक खींचा। मैंने उसके सिर को सहलाया। उसने मेरे होंठ चूमने शुरू किए। मैंने अपना एक निप्पल उसके मुंह में डाल दिया। चूसो इसे।

वह निप्पल चूसते हुए योनी में जोर-जोर से घर्षण करने लगा। उसकी सांसें तेज थीं। मेरी भी। तभी पति ने अपना लिंग मेरी गुदा पर रखा। उन्होंने पहले मुंड पर तेल लगाया। फिर धीरे-आहिस्ता आगे बढ़ाया। लिंग मुंड गुदा में घुसा। फिर धीरे-धीरे पूरा लिंग अंदर करने लगे।

अब मेरी योनी में भाई का लिंग और गुदा में पति का लिंग एक साथ घर्षण कर रहा था। दोनों अलग-अलग लय में धक्के मार रहे थे। मुझे ऐसा लगा जैसे पूरा शरीर आग से भर गया हो। हर धक्के के साथ एक नई लहर उठ रही थी। मैं कराह रही थी। दोनों की सांसें मेरे कानों में गूंज रही थीं।

मैं काम सुख के चरम पर पहुंच गई। मेरी योनी और गुदा में दोनों लिंगों का एक साथ घर्षण हो रहा था। हर धक्के के साथ आग सी लग रही थी। मेरी सांसें रुक-रुक कर चल रही थीं। पूरा शरीर कांप रहा था। मैं जोर से कराही और चरमोत्कर्ष पर पहुंच गई। मेरी योनी सिकुड़ने लगी। मैंने भाई के लिंग को अपनी योनी की दीवारों से कसकर दबाया।

भाई भी अब रुक नहीं सका। उसने कुछ तेज धक्के मारे और मेरी योनी के अंदर ही स्खलित हो गया। उसका गर्म वीर्य मेरे भीतर छूटा। मैंने तुरंत उसका लिंग बाहर निकाला और मुंह में ले लिया। मैंने उसे प्यार से चूसा। अपनी जीभ से उसके मुंड को साफ किया। बाकी वीर्य को निगल लिया। मैंने उसके लिंग को दुलार भरी नजरों से सहलाया। वह भावुक होकर मेरे शरीर से लिपट गया। उसकी सांसें अभी भी तेज थीं। उसने मेरे गले में मुंह छिपा लिया।

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उसी बीच पति ने मेरी गुदा में आखिरी जोरदार धक्के मारे। वे भी स्खलित हो गए। उनका गर्म वीर्य मेरी गुदा में भर गया। उन्होंने मुझे अपनी बांहों में कसकर भर लिया। तीनों का शरीर एक-दूसरे से चिपका हुआ था। पसीना और तेल मिलकर चिपचिपा हो गया था। हम कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। सांसें धीमी होने लगीं।

उस रात हम तीनों ने बार-बार सुख भोगा। कभी बेड पर, कभी अलग-अलग मुद्राओं में। हम थककर सोए तब जाकर सुबह हुई। भाई पांच दिन तक हमारे साथ रहा। इन दिनों में हम बहुत बोल्ड हो गए थे। घर में कपड़ों का कोई मतलब नहीं रह गया था। हम नंगे घूमते, हंसते-खेलते, कभी भी एक-दूसरे को छू लेते।

दो दिन बाद पति को फिर टूर पर जाना था। जाते समय वे मुस्कुराए और बोले, डार्लिंग अब तुम हमारे बिना प्यासी नहीं रहोगी लेकिन हम प्यासे मर जाएंगे।

मैंने आंख दबाकर हंसते हुए कहा, रास्ते में तलाश कर लेना कोई।

इस बार ट्राई करते हैं। उन्होंने मेरे दोनों स्तनों पर एक-एक चुंबन दिए। फिर मेरे होंठों पर गहरा चुंबन किया। भाई की ओर मुड़कर बोले, गुड लक साले साब। फिर वे चले गए।

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सुबह के नौ बज चुके थे। मैं और भाई अभी तक नहाए नहीं थे। सुबह जल्दी उठकर पति के सफर की पैकिंग और उनके लिए रास्ते का खाना बनाना पड़ा था।

मैंने भाई से कहा, भई मैं नहाने जा रही हूं। तुम्हें नहाना है तो साथ चलो। मैंने मुख्य दरवाजा लॉक किया और बाथरूम की ओर बढ़ी।

ठीक है मैं भी चल रहा हूं। वह मेरे पीछे-पीछे बाथरूम में आ गया।

मैंने शावर खोल दिया। गुनगुना पानी बहने लगा। मैं ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थी। पानी मेरे शरीर पर गिर रहा था। मैंने कहा, जरा हुक खोलना ब्रा का।

वह मेरे पीछे आया। उसने ब्रा के हुक खोले। ब्रा नीचे सरक गई। मेरे स्तन पूरी तरह नग्न हो गए। पानी उनकी गोलाई पर बह रहा था। वह पीछे से सट गया। अपनी बांहें मेरी बगलों से निकालकर मेरे स्तनों पर ले आया। उसने साबुन लिया और धीरे-धीरे स्तनों पर मलने लगा। फिर नाभि पर, गले पर। उसकी उंगलियां मेरी त्वचा पर फिसल रही थीं। मैंने आंखें बंद कर लीं। आनंद से सिहर रही थी।

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उसने मेरी पेटीकोट का नाड़ा खोला। पेटीकोट नीचे सरक गई। वह नीचे बैठ गया। मेरी जांघों पर साबुन मलने लगा। फिर नितंबों पर। उसकी हथेलियां मेरे नितंबों को गोल-गोल घुमा रही थीं। मैं सुलगने लगी। मेरी सांसें तेज हो गईं।

वह मेरे सामने आ गया। मेरी पैंटी पहले ही नीचे सरक चुकी थी। उसने योनी पर साबुन लगाया। उंगलियों से हल्के से रगड़ा। फिर हैंड शावर उठाया। गुनगुने पानी की तेज धार मेरी योनी पर मारी। मैंने उत्तेजना में अपनी उंगलियों से योनी के होंठ थोड़े खोल दिए। पानी सीधे मुहाने पर पड़ने लगा। मैं सिसक उठी। आह… उफ…

बस… बस… मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़ा और अपनी योनी पर झुका दिया। वह जीभ निकालकर चाटने लगा। उसकी जीभ मेरे भंगाकुर पर घूम रही थी। कभी अंदर जाती, कभी बाहर। मैं कराह रही थी। मेरी कमर हिल रही थी।

तभी अचानक कॉल बेल बज उठी। हम दोनों चौंक पड़े। कामुकता एकदम भंग हो गई।

मैंने कहा, तुम नहाओ। मैं देखती हूं कौन है। मैंने जल्दी से टॉवल लिया और शरीर पर लपेट लिया।

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वह प्यासी आंखों से मुझे जाते हुए देखता रहा। मैंने बाथरूम से निकलकर जल्दी-जल्दी अंतर्वस्त्र पहने। पेटीकोट, ब्लाउज और साड़ी लपेटी। बाल अभी भी गीले थे। मैंने दरवाजा खोला। सामने मेरी ननद आरुषी मुस्कुराती खड़ी थी।

क्या भाभी? कितनी देर से खड़ी हूं।

मैं नहा कर कपड़े बदल रही थी। इसलिए देर हो गई।

तभी मैं कहूं कि इतनी सुहानी खुशबू कहां से आ रही है। गीले बाल खुले हैं। वैसे भईया यहां नहीं हैं न?

हां लेकिन इससे तुम्हारा क्या मतलब?

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मतलब अगर वे होते तो मुझे आधा घंटा बाहर खड़ा रहना पड़ता। कोई दरवाजा नहीं खोलता।

क्यों?

क्योंकि तुम्हारे यौवन की महक भईया को पागल बना देती। वे तुम्हारे साथ आधा घंटा बीजी हो जाते।

उसने मेरी जांघ में शरारत से चिकोटी काटी।

अच्छा कुछ ज्यादा हवा लग गई है तुम्हें।

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क्यों जवानी में हवा नहीं लगनी चाहिए? अब अठारहवीं सीढ़ी पर पहुंचने का समय है।

वो तो देख रही हूं। गहरे गले का टॉप। कसमसाते गुंबद। घुटनों तक की स्कर्ट में उभरे नितंब। पतली कमर। जरूर दो-चार को बेहोश करके आई होगी। क्या पियोगी?

अब जो तुम पीती हो वो तो मिल नहीं सकता। इसलिए कुछ और पी सकती हूं।

मैं क्या पीती हूं?

तुम मेरे मुंह से सुनना चाहती हो। तुम पीती हो लिंग रस।

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वह हंस पड़ी।

हटो बदमाश। कितनी मुंहफट हो गई हो। चलो रसोई चलते हैं।

रसोई पहुंचते-पहुंचते आरुषी ने मुझे अपनी बांहों में कसकर भर लिया। उसने मेरे दोनों कपोलों पर गर्म चुंबन किए और कुनमुनाते स्वर में बोली, काश मैं ननद नहीं बल्कि देवर होती। तुम्हारे यौवन की कसम इन दोनों पहाड़ों को पिस डालती। जांघों के बीच अपना लिंग पसलियों तक पहुंचाकर ही दम लेती।

उसके शब्द सुनकर मेरे मन में एक योजना जन्म लेने लगी। मैंने गैस पर चाय का पानी चढ़ाया। पानी गरम होते-होते मैंने मुस्कुराकर कहा, इन पहाड़ों को तो तुम अब भी पिस रही हो। बताओ, कोई बॉयफ्रेंड नहीं है क्या?

नहीं भाभी। कई लड़के कोशिश करते हैं लेकिन मैं उन्हें लिफ्ट नहीं देती।

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यह कहते हुए उसने मेरे ब्लाउज के ऊपरी दो-तीन बटन खोल दिए। ब्लाउज थोड़ा खुल गया। मेरी ब्रा की झलक दिखने लगी।

ये क्या कर रही हो तुम? मैंने हल्के से पूछा।

करने दो न भाभी। स्तन पान में बहुत मजा आता है। मैं अपनी सहेली के साथ ऐसा करती हूं। हम दोनों लेस्बियन लवर हैं। तुम्हारे इतने भरे-भरे यौवन को देखकर मेरा जी मचल उठा है। सोच लो न कि भईया मेरी जगह हैं।

उसने मेरे ब्लाउज में हाथ डाल दिया। ब्रा के कप के ऊपर से मेरे स्तनों को सहलाने लगी। उसकी उंगलियां निप्पलों पर हल्के से दबाव डाल रही थीं। दूसरा हाथ मेरे सपाट पेट पर रेंग रहा था। नीचे की ओर जा रहा था। मेरी सांसें थोड़ी तेज हो गईं।

क्या तुमने कभी लिंग देखा है? मैंने पूछा।

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कभी-कभी इत्तेफाक से उसकी झलक मिल जाती है लेकिन उस झलक का क्या फायदा। पूरा देखने को जी करता है।

मैंने चुपचाप तीन कप निकाले और उनमें चाय डालनी शुरू की।

चलो आज दिखा देंगे। मैंने कहा।

तुम दिखाओगी? कैसे? उसने हैरानी से पूछा। उसकी नजर तीन कपों पर गई।

हैं… ये तीसरा कप किसके लिए है?

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ये मेरे लिए है। मेरे भाई ने रसोई में प्रवेश करते हुए कहा।

आरुषी उसे देखते ही मुझसे दूर छिटक गई। उसकी आंखों में असमंजस के भाव आ गए। वह थोड़ी घबरा गई।

मैंने स्थिति संभाली। ये मेरा छोटा भाई है। और ये मेरी ननद आरुषी है।

भाई ने मेरे ब्लाउज के खुले बटन देखे। मुस्कुराकर बोला, ये भी अपने भाई की तरह तुम्हारे स्तनों की प्यासी हैं।

आरुषी सकपकाई। उसका चेहरा लाल हो गया।

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डोंट वरी आरुषी। आज तुम्हारी हसरत पूरी हो जाएगी। मेरे भाई से मैं कोई पर्दा नहीं करती। तुम्हारे भईया भी पर्दा नहीं करवाते। बल्कि उन्होंने हम दोनों के साथ मिलकर काम सुख प्राप्त किया है।

ना मैं इस चीज को बुरा मानती हूं और न तुम्हारे भईया। रिश्ते तो लोगों ने अपने फायदे के लिए बनाए हैं। मुझे तो अपने भाई के साथ इतना आनंद मिला है कि मत पूछो। जब तुम आई थीं तब हम दोनों बाथरूम में साथ नहा रहे थे।

आरुषी धीरे-धीरे सामान्य होने लगी। उसकी सांसें थोड़ी शांत हुईं। मैंने उसे एक कप चाय थमा दी। दूसरा भाई को दिया। अपना कप लिया। हम तीनों रसोई से बेडरूम में आ गए।

भाई सिर्फ अंडरवियर में था। उसका लिंग अंडरवियर में उभरा हुआ साफ दिख रहा था। आरुषी बार-बार उसकी जांघों के जोड़ पर नजर टिका रही थी। उसकी आंखों में उत्सुकता बढ़ रही थी।

मैंने उसकी स्कर्ट को उसकी फैली टांगों से थोड़ा ऊपर सरका दिया। जांघ पर हल्की चिकोटी काटी।

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तुम्हारे लिए आज बहुत अच्छा दिन है। अगर तुम्हारे भईया यहां होते तो और ज्यादा मजा रहता। फिर भी मेरा भाई तुम्हें पूरी तरह संतुष्ट कर सकता है। हमने इसे पूरी तरह ट्रेंड कर दिया है।

यह कहकर मैंने भाई के अंडरवियर की जिप खोली। उसका तना हुआ लिंग बाहर निकालकर आरुषी के हाथ में थमा दिया। धीरे-धीरे सहलाओ। देखना ये कैसा कठोर और लंबा हो जाता है। भभकने लगेगा।

मैंने आरुषी के टॉप की जिप खोल दी। भाई ने मेरे ब्लाउज को मेरी बाजुओं से निकाल दिया। ब्रा के हुक खोले। जालीदार कप को नीचे सरकाकर मेरे स्तनों को सहलाना शुरू किया। फिर चूसने लगा।

आरुषी बोली, भाभी पहले मैं तुम्हारे स्तन चूसूंगी।

ठीक है। मैंने कहा। और तुम आरुषी के स्तन चूसो। लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता। इसकी स्कर्ट भी बाहर निकालो।

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आरुषी ने मेरे एक स्तन को मुंह में लिया। उसकी जीभ निप्पल के चारों ओर घूमने लगी। धीरे-धीरे चूसने लगी। भाई ने आरुषी के टॉप के नीचे की शमीज को ऊपर किया। उसके गोरे, गुदाज स्तनों को बाहर निकाला। निप्पल चूसने लगा। आरुषी की सांसें तेज हो गईं।

हम तीनों की सांसें तेज हो उठीं। बेडरूम में सिर्फ कराहें और चूसने की आवाजें गूंज रही थीं। आरुषी मेरे स्तनों को चूसते-चूसते उत्तेजित हो रही थी। भाई उसके निप्पलों को जीभ से तराश रहा था। मैं दोनों को देखकर और गर्म हो रही थी।

आरुषी के निरंतर स्तनपान से मेरी उत्तेजना चरम पर पहुंच चुकी थी। मेरे शरीर में आग लगी हुई थी और मैं अब और संयम नहीं रख पा रही थी। मैंने भाई की ओर देखा और थरथराती आवाज में कहा, “आरुषी की योनि में अपना लिंग डाल दो। पहले थूक या तेल लगा लो, ताकि उसे ज्यादा दर्द न हो।”

भाई ने तुरंत बेडसाइड टेबल से तेल की छोटी शीशी उठाई। उसने अपनी हथेली में तेल लिया और पहले अपने लिंग पर धीरे-धीरे चुपड़ा। लिंग पूरी तरह चमकदार और फिसलन भरा हो गया। फिर उसने आरुषी की स्कर्ट को पूरी तरह ऊपर किया और उसकी पैंटी को धीरे से नीचे सरका दिया। आरुषी की नंगी जांघें और नितंब मेरे सामने थे। भाई ने पहले अपनी हथेलियों से उसके नितंबों को सहलाया, फिर जांघों के भीतरी हिस्से को धीरे-धीरे छुआ। आरुषी की सांसें तेज हो गईं।

भाई ने तेल अपनी उंगलियों पर लिया और आरुषी की योनि के होंठों पर धीरे से फैलाया। उसने उंगली से हल्का दबाव डाला ताकि तेल अंदर तक पहुंचे। आरुषी ने हल्की सिसकारी भरी। भाई ने अपना लिंग हाथ में पकड़ा, उसका मुंड आरुषी की योनि के प्रवेश द्वार पर रखा। आरुषी की जांघों को थोड़ा ऊपर उठाया ताकि कोण सही हो जाए। फिर उसने जोर का धक्का मारा। मुंड अंदर घुस गया। आरुषी तेज चीख पड़ी। यह उसका पहला अनुभव था। उसकी आंखों में आंसू आ गए और शरीर कांप उठा।

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मैंने तुरंत आरुषी की पीठ पर हाथ फेरा, उसे सहलाया और उसके होंठों को अपने होंठों से बंद कर लिया। मैंने धीरे से कहा, “शांत हो जा, प्यारी… थोड़ा दर्द होगा, लेकिन फिर मजा आएगा।” उसकी सांसें मेरी सांसों से उलझ गईं। मैंने उसके दोनों हाथ पकड़े और अपनी साड़ी के नीचे अपनी जांघों के बीच ले गई। आरुषी दर्द और उत्तेजना के बीच फंसी हुई थी। उसकी उंगलियां मेरी गीली योनि को छू रही थीं।

भाई ने आरुषी की जांघों को मजबूती से पकड़ा। उसने एक और गहरा धक्का मारा। इस बार उसका पूरा लिंग आरुषी की योनि में समा गया। आरुषी फिर तड़प उठी। उसका शरीर कांप रहा था। मैंने उसकी ओर देखकर कहा, “देख, तुम्हारा भाई कितनी दुश्मनी निकाल रहा है। कितना दर्द हो रहा है न?”

मैंने अपना एक निप्पल उसके मुंह में डाल दिया। आरुषी ने दर्द भूलकर उसे जोर से चूसना शुरू कर दिया। भाई ने अब धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू किया। पहले हल्के धक्के, फिर गति बढ़ाई। आरुषी की कराहें निकल रही थीं, लेकिन धीरे-धीरे वह भी अपने कूल्हों को हिलाने लगी। वह सहयोग करने लगी थी। भाई के धक्के तेज और गहरे होते गए। आरुषी की योनि अब पूरी तरह गीली और ढीली हो चुकी थी।

कुछ ही देर में दोनों की सांसें बहुत तेज हो गईं। भाई ने जोर-जोर से धक्के मारे और अंत में गहराई में जाकर स्खलित हो गया। आरुषी भी उसी क्षण चरम पर पहुंची। उसका शरीर कांपकर थरथरा उठा और वह भी स्खलित हो गई। भाई ने लिंग बाहर निकाला तो उस पर दोनों की मिली-जुली रस की चमक दिख रही थी।

फिर भाई मेरी ओर मुड़ा। मेरी प्यास अब असहनीय हो चुकी थी। उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी साड़ी पूरी तरह ऊपर कर दी। उसने मेरी योनि में लिंग डाला और मुझे भी उसी तरह संतुष्ट किया। हम तीनों थककर एक-दूसरे से लिपटे रहे। क्रीड़ा चलती रही। आरुषी अब पहले से कहीं ज्यादा बोल्ड और खुल चुकी थी। वह हंस रही थी, छेड़ रही थी और खुद आगे बढ़कर हिस्सा ले रही थी।

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शाम को आरुषी चली गई। भाई तीन दिन बाद अपने घर लौट गया। दस दिन बाद पति टूर से लौटे। शाम को जैसे ही वे घर में घुसे, बिना कपड़े बदले, बिना पानी पिए मुझ पर टूट पड़े। उन्होंने मेरा गाउन हटाया, ब्रा को एक तरफ सरकाया और मेरे स्तनों पर मुंह लगा दिया। वे जोर-जोर से चूसने लगे।

मैंने हंसते हुए कहा, “ओफ्फो… तुम सारे भाई-बहन एक जैसे हो। घर आकर पानी पीने की बजाय सीधे स्तनों पर टूट पड़ते हो।”

वह चौंक गए। निप्पल मुंह से निकालकर बोले, “क्या मतलब? मेरे साथ मेरी बहन का जिक्र क्यों?”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “इसलिए क्योंकि तुम गए तो आरुषी आई। दरवाजा खुलते ही उसने ब्लाउज खोलना शुरू कर दिया।”

“व्हाट… आरुषी को भी ये पसंद है?”

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फिर क्या हुआ? उन्होंने मुझे गोद में उठाया और बाथरूम की ओर ले गए।

वह बोले, “जब वह आई तब तुम भाई के साथ बाथरूम में नहा रही थीं?”

“हां, साथ नहा रहे थे। बड़ा मजा आ रहा होगा। चलो, हम भी साथ नहाते हैं। कहानी सुनाओ।”

बाथरूम में उन्होंने मुझे फर्श पर उतारा। मुझे दीवार से सटा दिया। मेरे होंठ चूमे, फिर स्तन चूसने लगे।

मैंने कहा, “फिर क्या हुआ? कहती रहो। इन झरनों से प्यास बुझाने दो।”

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मैंने उनकी टाई ढीली की। कोट उतारा। शर्ट के बटन खोलते हुए बोली, “आरुषी ने तुम्हारी महक की तारीफ की। मैं समझ गई कि वह प्यासी है।”

“उफ… आहिस्ता चूसो। आप पागल हो रहे हो।”

“मजा नहीं आ रहा तो आहिस्ता चूसता हूं।”

“मजा बहुत आ रहा है। लगता है कण-कण बिखर रही हूं।”

उन्होंने निप्पल फिर मुंह में लिया। उनके हाथ मेरे नितंबों पर थे। मैंने उनकी पैंट की बेल्ट खोली।

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मैंने आगे कहा, “आरुषी ने रसोई में मेरे ब्लाउज में हाथ डाला। स्तन चूसने की इच्छा जताई। बताया कि वह अपनी सहेली के साथ लेस्बियन लव करती है।”

“उफ… ओह…”

“शावर खोलो। नहाना भी साथ हो जाएगा।”

मेरे शरीर में पहले ही आग लगी हुई थी। आरुषी की बात ने मुझे और उत्तेजित कर दिया।

पति ने मेरी योनि पर मुंह रख दिया। उन्होंने भगिनी को चूसना शुरू किया। मैंने उनकी बालों में उंगलियां फंसाईं।

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“सुनाओ आगे क्या हुआ।”

“शावर खोलो। मैं बताती हूं।”

“आरुषी के सामने भाई अंडरवियर में आ गया। लिंग उभरा हुआ था। आरुषी की नजर टिक गई। उसे लिंग का पूरा दर्शन पहले नहीं हुआ था।”

“उफ… इतनी कहानी सुनते ही…” पति ने मेरा लिंग अपनी योनि में डाल दिया।

मैं आवेश में थी। सांसें तेज। सिसकारियां निकल रही थीं।

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“स्टोरी का क्या बना? भाई ने आरुषी की प्यास बुझाई न?”

“हां… खूब जोर-जोर से धक्के मारे।”

पति ने मुद्रा बदली। मेरी पीठ उनकी ओर कर दी। मैं झुककर नल पकड़ लिया। उन्होंने धीरे से गुदा में प्रवेश किया। पहले मुंड, फिर धीरे-धीरे पूरा लिंग अंदर। फिर जोरदार धक्के शुरू किए। गुदा में स्खलित हुए। मैं भी चरम पर पहुंच चुकी थी।

फिर हम देर तक लिपटकर नहाते रहे। पति को अब महीने भर टूर नहीं जाना था। उन्होंने आरुषी की कहानी बार-बार सुनी। अफसोस जताया कि उस समय वे क्यों नहीं थे।

1984
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