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पति नशे में और पत्नी उसके दोस्त के लण्ड पे

Drunk sex story: ये कहानी तब कि है जब मेरे पति ज़िंदा थे और हमारी लाइफ अच्छी चल रही थी। हमारे कोई औलाद भी नहीं हुई थी।

मेरे सास और ससुर कुछ दिनों के लिए घर से बाहर गए हुए थे। घर पर सिर्फ मैं और मेरे पति दोनों ही थे। मेरे पति मेरे ससुर से बहुत डरते थे इसलिए उनके सामने कभी शराब नहीं पीते थे। लेकिन अब घर में ससुर जी नहीं थे तो उन्हें पूरी छूट मिल गई थी। वे रोज शाम को नशे की हालत में घर आने लगे थे। साथ में बोतल भी लेकर आते थे ताकि घर पहुंचकर और ज्यादा पी सकें।

जब वे पूरी तरह नशे में धुत हो जाते तो फिर घर का कोई कोना बाकी नहीं रहता था। रसोई में, बाथरूम में, बरामदे में कहीं भी वे मेरा पीछा करते। मेरे कपड़े एक-एक करके उतारते हुए मेरे बदन को पूरी तरह नंगा कर देते। पहले ब्लाउज के हुक खोलकर मेरी छातियों को बाहर निकालते। फिर साड़ी की पेटी खींचकर नीचे सरकाते। पैंटी को घुटनों तक उतारकर पूरी तरह फेंक देते। मैं नंगी खड़ी रहती तो वे अपनी पैंट उतारकर अपना सख्त लिंग बाहर निकाल लेते।

उनकी उंगलियां मेरी चूत पर घूमतीं। पहले हल्के से सहलाते फिर दो उंगलियां अंदर डालकर तेजी से अंदर-बाहर करने लगते। मेरी चूत गीली होकर चूने लगती। वे मुझे दीवार से सटाकर या फर्श पर लिटाकर अपनी मोटी लिंग मेरी चूत में धकेल देते। जोर-जोर से धक्के मारते हुए चोदते। “आह्ह… उफ्फ… तेरी चूत कितनी टाइट है आज भी…” वे नशे में बुदबुदाते। मैं दर्द और मजे के मिले-जुले एहसास में कराहती, “अम्मा… धीरे… आह्ह…” लेकिन वे रुकते नहीं। उनकी सांसें तेज हो जातीं। पसीना उनके माथे से मेरी छातियों पर टपकता। वे मेरी गांड पकड़कर और गहरे धक्के लगाते। आखिर में गरम वीर्य मेरी चूत के अंदर छोड़कर सांसें लेते रह जाते।

मुझे अभी इस घर में ज्यादा समय नहीं हुआ था शादी को। इसलिए मैं उनसे थोड़ा डरती भी थी कि कहीं इनको मेरी वजह से गुस्सा न आ जाए या हमारे बीच कोई झगड़ा न हो जाए। इसीलिए मैं उन्हें कुछ भी करने से नहीं रोकती थी। इस बात का वे पूरा फायदा उठाते थे। मुझे चोदने के लिए घर का कोई भी हिस्सा इस्तेमाल कर लेते। कई बार तो बरामदे में ही वे मुझे चोदते थे। जिससे मुझे डर भी लगता था कि कहीं कोई आ न जाए। क्योंकि दरवाजे के अंदर घुसते ही बरामदा सामने ही था। लेकिन मेरी किस्मत अच्छी थी कि कोई भी अंदर नहीं आया।

मेरे सास-ससुर के जाने के बाद कोई एक दिन भी ऐसा नहीं निकला जब उन्होंने मुझे नंगी ना किया हो और मेरी चूत ना मारी हो। ये सब तो ठीक था। आखिर है तो मेरे पति। उनका जब मन करे मुझे चोद सकते हैं।

लेकिन एक दिन तो हद ही हो गई..

नशे में धुत्त हो चुके थे और उनके साथ काम करने वाला लड़का उनको घर छोड़ने आया।

जब वो वापस जाने लगा तो मेरे पति ने उसको रोक लिया। और कहा – रुक भाई, अभी तो और दारू पीनी है.. और खाना भी खाना है। वो दोनों कमरे में बैठ गए और दारू पीने लगे। मेरे पति की आंखें लाल हो चुकी थीं। उनका चेहरा लालिमा लिए हुए था और बोलते समय लड़खड़ाहट साफ झलक रही थी। उनके दोस्त ने भी हिचकिचाते हुए बैठ लिया। दोनों गिलासों में व्हिस्की डालकर पीने लगे। कमरे में शराब की तेज गंध फैल गई थी।

फिर मैं भी कमरे में गई और उनको खाने के लिए कहने लगी। लेकिन दोनों लोग पूरी तरह से नशे में धुत्त हो चुके थे। उनकी आंखें बोझिल हो रही थीं और बातें बेमतलब की हो रही थीं। मेरे पति ने मुझे भी पीने को कहा। जब मैंने मना किया तो उन्होंने गुस्से से मुझे देखा और कहा कि पी ले कुछ नहीं होता। उनकी आवाज भारी और डरावनी लग रही थी। मैं डरते हुए उनके पास बैठ गई।

मैंने डर के मारे एक ही सांस में एक पूरा पेग खाली कर दिया। मुझे नहीं पता था कि दारू को एक-एक घूंट करके पीते हैं। पूरा घूंट गले से नीचे उतरते ही आग सी जलन हुई। मेरी आंखों में पानी आ गया। सीने में गर्मी फैल गई और पेट में उबाल सा उठने लगा। फिर वो दोनों बातें करते-करते और पीने लगे। कुछ देर बाद मेरा सर भी घूमने लग गया। कमरा हल्का-हल्का चकराने लगा। मुझे लग चुका था कि अब मुझे भी नशा चढ़ रहा है। मेरे गाल गर्म हो रहे थे और शरीर में एक अजीब सी सुस्ती छा रही थी।

मैं भी वही बैठी रही उनकी बातें सुन रही थी। बातों-बातों में मेरे पति की बातें मुझ पर आ गईं और वो अपने दोस्त के सामने मेरी तारीफ करने लगे। उन्होंने अपने दोस्त को बताया कि हमारी शादी को डेढ़ साल हो गया है। आज तक इसने मुझसे कोई शिकायत नहीं की। घर का सारा काम कर लेती है और मेरे पापा-मम्मी को अपने पापा-मम्मी की तरह प्यार करती है। उनकी आवाज नशे में ऊंची हो रही थी और शब्द थोड़े टूट-टूटकर निकल रहे थे।

उनके दोस्त ने कहा – सौभाग्य वाले आदमी को मिलती है ऐसी पत्नी.. और भाभी सच में बहुत अच्छी है। मेरे पति बोले – गुणवान तो है ही, साथ में इसका शरीर भी बहुत अच्छा है। उनके दोस्त और मैं उनकी शक्ल देखने लगे कि ये क्या बोल रहे हैं। मेरे पति ने उससे कहा – क्या हुआ? अच्छा नहीं है क्या इसका शरीर? तुझे पसंद नहीं आया क्या? मेरे पति को बिलकुल भी होश नहीं था कि वो क्या बोल रहे थे। उनकी आंखें लाल और भारी थीं। वे बार-बार गिलास उठाकर घूंट ले रहे थे।

उनका दोस्त घबराते हुए बोला – अच्छा है भैया..

मेरे पति बोले – अभी तो इसने कपड़े पहने हैं.. जब बिना कपड़ों के होती है ना तब लगती है कि ये मेरी पत्नी है..

मुझे ज्यादा होश नहीं था लेकिन इतना पता चल रहा था कि वो क्या बात कर रहे हैं। और उनकी बातें मेरी समझ में भी आ रही थीं। शराब के नशे में मेरा सिर भारी हो रहा था। कमरे की रोशनी धुंधली लग रही थी और दीवारें थोड़ी-थोड़ी घूमती सी महसूस हो रही थीं। उनके दोस्त को पता चल चुका था कि मेरे पति अब पूरी तरह सेट हो चुके हैं और थोड़ा बहुत खुमार मुझे भी चढ़ चुका है।

मेरे पति ने हाथ में दारू का गिलास उठाया और एक सिप पीकर फिर बोले – तुझे पता है ये जो तेरी भाभी है,,, मैं पहला आदमी हूं जो इसकी लाइफ में आया हूं.. मुझे भी विश्वास नहीं हुआ कि इसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं था शादी से पहले.. पहली रात को पता चला कि ये पेटी पैक है.. उनकी आवाज नशे में लड़खड़ा रही थी लेकिन उत्साह से भरी हुई थी।

वो बोला – भैया, पेटी पैक मतलब? मेरे पति बोले – ये पहले कभी चुदी नहीं थी.. इसको पहली बार मैंने चोदा और इसकी चुत खोली.. मुझे थोड़ा गुस्सा आया ये सुनकर कि ये हमारी पर्सनल बातें ऐसे किसी से कैसे शेयर कर सकते हैं। मेरे गाल शर्म से लाल हो गए। दिल जोरों से धड़कने लगा। वो लड़का भी मुझे शर्म भरी निगाहों से देखने लगा। उसकी नजरें मेरे शरीर पर रुक-रुककर घूम रही थीं।

वो उठ खड़ा हुआ और बोला – भैया अब निकलता हूं.. रात बहुत हो गई है… मेरे पति बोले – अरे, बैठ ना.. बाद में चला जाना.. लेट हुआ तो तुझे मैं ड्राप कर दूंगा… और उन्होंने उसे जाने नहीं दिया। हम तीनों फिर से बैठ गए। मेरी तारीफें अभी खत्म नहीं हुई थीं।

वो बोले – मैंने जरूर कोई अच्छा काम किया होगा जो मुझे ऐसी बीवी मिली.. तुझे पता है.. बिस्तर में पूरा मजा देती है….. क्यों मीना (मेरी तरफ देखते हुए लड़खड़ाती आवाज में बोले)। उनकी आंखें मेरी छातियों पर अटक गई थीं। नशे की वजह से उनकी सांसें भारी हो रही थीं।

मुझे भी अब ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। क्योंकि मेरा नशा भी बढ़ता जा रहा था और बातें धुंधली सी सुनाई दे रही थीं। शरीर में गर्मी फैल रही थी। फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी तरफ खींचा और मुझे उनकी गोद में बैठा दिया। मैं उनकी गोद में बैठ गई और मेरा एक हाथ उनके गले में डाल दिया…

उन्होंने अपना गिलास उठाया और मेरी तरफ बढ़ाया।

मेरे मना करने पर भी उन्होंने जबरदस्ती मुझे एक सिप पिला दी। फिर गिलास रखकर उन्होंने मुझे लिप किस किया। एक हाथ से मेरे बोब्स को जोर-जोर से सहलाने लग गए। और मेरे ब्लाउज के ऊपर के दो हुक खोल दिए।

तभी मुझे थोड़ा होश आया। मैंने देखा कि उनका दोस्त सामने ही बैठा है जो मुझ पर अपनी नजर गड़ाए हुए है। उनके होंठ मेरे होंठों पर चिपके हुए थे। उनकी जीभ मेरे मुंह के अंदर घुसकर घूम रही थी। शराब की तेज गंध मेरे नथुनों में भर रही थी। उनका हाथ मेरी छाती को मसल रहा था। उंगलियां ब्लाउज के कपड़े पर से ही मेरे निप्पल को दबा रही थीं। मेरी सांसें तेज हो गई थीं।

मैं उठकर वापस अपनी जगह पर बैठ गई।

मैं अपनी ब्लाउज के हुक बंद करना भूल गई। क्योंकि मुझे इतना होश नहीं था कि मेरे हुक खुले हुए हैं। मेरा क्लीवेज कुछ हद तक दिखाई दे रहा था। मेरे पति का दोस्त तिरछी नजरों से बार-बार मेरे क्लीवेज को देख रहा था।

“भाभी जी बाथरूम किस तरफ है? मुझे बाथरूम जाना है।” वो लड़का बोला।

मैंने बाथरूम की तरफ इशारा करते हुए रास्ता दिखा दिया।

वो उठकर दो कदम ही चला होगा कि लड़खड़ाकर नीचे गिर पड़ा। मैं झट से उठी और झुककर उसे उठने में मदद करने लगी। तभी मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया। मेरे खुले हुए हुक से मेरे बूब्स आधे बाहर आने लगे। मेरी भारी छातियां लगभग आधी बाहर निकल आई थीं। गुलाबी निप्पल हल्के से झांक रहे थे।

वो मेरे बूब्स को देखते हुए खड़ा हो गया। और लड़खड़ाते हुए कदमों के साथ बाथरूम चला गया।

मैं वापस अपनी जगह बैठ गई। और मेरे पति अपना सर पीछे करके आंखें बंद करके लेटे हुए थे।

वो लड़का बाथरूम जाकर वापस आ गया और बैठ गया।

मैंने कहा कि मैं खाना ले आती हूं अब। पीना बहुत हुआ।

और मैं रसोई में चली गई। और खाना गर्म करने लग गई। मेरे पति आंखें बंद करके बैठे-बैठे ही सो चुके थे।

मौका देखकर वो लड़का भी रसोई की तरफ आया।

मैंने पूछा – क्या हुआ?

वो बोला – पानी पिला दो भाभी।

मैंने कहा – अंदर रखा तो है पानी।

वो बोला – वो तो खत्म हो गया। सब पानी दारू में मिला दिया।

फिर मैं पानी का गिलास भरने लगी और वो रसोई में आ गया। उसको शायद मुझसे बातें करनी थी..

उसने बात शुरू की – खाने में क्या बनाया है भाभी..?

मैंने कहा – दाल और बाटी बनाई है।

फिर वो बोला – भैया को ज्यादा नशा हो गया है.. वो सो चुके हैं शायद।

मैंने कहा – अच्छा.. खाना खाने के लिए तो उठाना पड़ेगा।

वो बोला – हाँ भाभी।

“भाभी आपसे एक बात पूछूं?”

मैंने कहा – हाँ पूछो।

वो बोला – भैया अभी अंदर जो बोल रहे थे वो सच है क्या?

मैंने कहा – क्या बोल रहे थे वो?

वो बोला – यही कि आप अपने सास ससुर का अच्छे से ख्याल रखती हो।

मैंने कहा – हाँ।

वो बोला – आप घर का सारा काम अकेले कर लेती हो और इससे आपको कोई शिकायत नहीं है।

मैंने कहा – हाँ।

वो बोला – शादी से पहले आपका कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं था।

मैंने कहा – नहीं था।

वो बोला – आपका शरीर बहुत अच्छा है.. बिना कपड़ों के आप और भी अच्छी लगती हो.. और आपकी सुहागरात के पहले तक आप वर्जिन थीं।

मैं गुस्से से उसका चेहरा देखने लग गई।

उसने कहा – ये भैया ने ही तो बताया है अभी।

मैंने कहा – वो नशे में हैं।

वो बोला – और आप?

मैंने कहा – थोड़ा सर घूम रहा है मेरा भी।

वो बोला – आपके ब्लाउज के हुक खुले हुए हैं।

तभी मेरा ध्यान मेरी ब्लाउज की तरफ गया। और मैं हुक बंद करने लगी।

तभी वो बोला – रहने दो भाभी जी, ऐसे ही अच्छे लग रहे हो।

मैं कुछ पल के लिए रुक गई और उसकी बात पर गौर करने लगी कि अभी उसने क्या बोला। और फिर मैंने उसकी बात को नजरअंदाज कर लिया और दाल को चम्मच से हिलाने लगी। और एक बार फिर मेरा ध्यान अपने ब्लाउज के हुक से हट गया।

वो वापस बाहर चला गया और वहीं जाकर बैठ गया।

थोड़ी देर में मैं भी खाना लेकर वहां पहुंच गई।

अपने पति को जगाया और हम तीनों खाना खाने लगे।

मेरे पति ने मुश्किल से दो बाइट खाई होगी और वो उठकर लड़खड़ाते हुए बाथरूम की तरफ गए। शायद उनको उल्टी हो रही थी। उनकी चाल अनियंत्रित थी। दीवार का सहारा लेकर वे किसी तरह बाथरूम पहुंचे।

वो बाथरूम से बाहर निकले और सीधे पलंग पर जाकर लेट गए।

मैं उन्हें फिर से बुलाने जाने लगी तो उस लड़के ने मुझे रोक लिया। बोला, “भाभी रहने दो.. वो नहीं खा पाएंगे अब खाना.. उनको नींद की जरूरत है।”

मैं वापस बैठ गई। और हम दोनों खाना खाने लगे।

उसकी नजरें बार-बार मेरे बूब्स पर पड़ रही थीं जो खुले हुए हुक से बाहर आ रहे थे। मेरी भारी छातियां ब्लाउज से आधे बाहर झांक रही थीं। निप्पल हल्के-हल्के दिखाई दे रहे थे।

मैंने उसकी नजरों को भांप लिया कि वो मेरे क्लीवेज को देख रहा है। तो उसने मुझसे कह दिया – “भाभी आपका क्लीवेज ज्यादा ही दिख रहा है।”

मैंने अपने क्लीवेज पर नजर डाली और उनको ढकना चाहा लेकिन मेरे हाथ सब्जी से गंदे हो रहे थे तो मैं कुछ नहीं कर सकी।

वो बोला – “कोई नहीं भाभी, आराम से खाना खा लो, फिर बंद कर लेना हुक।”

फिर हम खाने लगे। और वो लगातार मेरे क्लीवेज को देखने लगा। मैं उसको नजरअंदाज करके खाने में अपना ध्यान लगा रही थी।

वो बोला – “भाभी, भैया सच कह रहे थे.. आपका शरीर सच में बहुत अच्छा है…. एक बात बताओ ना.. क्या भैया ने ही आपकी चुत की सील तोड़ी..?”

ये सुनते ही मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई और मेरे हाथ से निवाला वापस थाली में गिर गया। हल्का-हल्का नशा तो मुझे भी था। और मुझे उसकी इस तरह की बातें भी अच्छी लगने लगी।

मैंने उसकी बात पर कोई रिएक्ट नहीं किया।

अब वो मुझसे थोड़ा खुलने लग गया और मुझसे कहने लगा कि भैया बहुत लकी हैं जो उनको आपके जैसी बीवी मिली। “मेरी बीवी तो शादी से पहले ही किसी लड़के के साथ चुद कर अपनी सील तुड़वा चुकी थी..”

मैंने कहा – अच्छा.. आप शादीशुदा हो।

वो बोला – हाँ.. तीन साल हो गए हैं मेरी शादी को.. लेकिन मुझे मेरी बीवी के साथ सोने में मजा नहीं आता।

मैंने कहा – क्यों।

वो बोला – आप जैसी खूबसूरत नहीं है ना।

ये सुनकर मुझे अपनी खूबसूरती पर थोड़ा घमंड होने लगा। और मैं कुछ नहीं बोली।

वो बोला – वो मुझसे बात करते-करते अपने लंड को खुजाने लगा। तब मेरी नजर उसकी पैंट पर पड़ी। उसके लंड का साइज उसकी पैंट से साफ दिख रहा था। और मुझे कुछ कुछ होने लगा।

शायद मेरी चूत गीली हो गई थी उसकी बातें सुनकर और उसका लंड का साइज देखकर। मेरी चूत में हल्की-हल्की सिहरन होने लगी थी। गर्मी सी फैल रही थी।

मैं उठकर रसोई में चली गई। और अपने बर्तन भी साथ ले गई।

वो भी मेरे पीछे-पीछे रसोई में आ गया और अपने बर्तन सिंक में रख दिए।

मैं सिंक में हाथ धोने लगी तो उसने भी बीच में अपने हाथ डाल दिए और धोने लगा। तभी उसकी कोहनी मेरे बूब्स से टकरा गई। ये उसने जानबूझकर किया था लेकिन मुझे अच्छा लगा उसकी इस हरकत से। नरम कोहनी की छुअन से मेरी छातियां हल्की सी कांपीं।

वो अभी हाथ धो ही रहा था और अचानक मैं उसकी तरफ पलट गई। मेरे बोबे उसके सीने से टकराए और वो मेरे जिस्म के एकदम नजदीक था।

वो मुझे देखने लगा। और हमारी सांसें आपस में टकराने लग गईं। उसकी गर्म सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं।

तभी मैंने उसके होंठ पर अपने होंठ रख दिए और उसको किस करके पीछे हो गई।

वो मेरी तरफ बढ़ा। मेरे पीछे सिंक थी तो मैं पीछे नहीं जा सकी और वो मुझसे सटकर खड़ा हो गया। मेरी कमर में हाथ डालकर मुझे पकड़ा और मेरे होंठों को चूमने लगा।

कुछ देर में मुझे महसूस हुआ कि वो अपने लंड को मुझसे रगड़ रहा था। उसका खड़ा लंड मुझे अपने पेट पर महसूस हो रहा था जो कि पैंट में था।

मैंने मेरा हाथ मेरे पेट और उसके लंड के बीच ले जाकर उसका लंड सहलाना शुरू कर दिया। और देखते ही देखते उसका लंड पूरे ताव में आकर खड़ा हो गया।

उसने मेरे गले में, छाती पर और मेरे क्लीवेज को चूमते हुए मेरे बूब्स पर अपने हाथ जमा लिए। और धीरे-धीरे उनको सहलाकर दबाने लगा।

उसके स्पर्श में एक अलग सा नशा था। मुझे बहुत उत्तेजित कर रहा था। क्योंकि आज पहली बार मिले इस लड़के ने मेरे बूब्स दबाना शुरू कर दिया था।

उसने मेरे ब्लाउज के बचे हुक खोल दिए और ब्रा का हुक भी खोलकर मेरे बूब्स को आजाद कर दिया।

“भैया सही कहते हैं.. आपके बूब्स बहुत खूबसूरत हैं भाभी..” कहते हुए उसने मेरे बूब्स के बीच मुंह रखा और उन्हें चूमने लगा।

फिर उसने मेरे निप्पल को मुंह में लेकर चूसना शुरू किया। उसी बीच उसका एक हाथ मेरी चूत की तरफ बढ़ गया।

उसने मेरी साड़ी और पेटीकोट ऊपर किया। मेरी जांघों को सहलाते हुए पैंटी तक पहुंचा और पैंटी के अंदर हाथ डालकर मेरी चूत सहलाने लगा।

उसका एक हाथ मेरी चूत पर, दूसरा मेरे बोबे पर और मुंह मेरे निप्पल पर था। मैं पूरी तरह उसकी गिरफ्त में थी।

तभी उसने मुझे कमर से पकड़कर ऊपर उठाया और प्लेटफॉर्म पर बैठा दिया।

मैं पैर लटकाकर बैठ गई।

उसने फिर मेरी साड़ी और पेटीकोट ऊपर उठाकर मेरी पैंटी नीचे खींच ली। मेरी चूत अब उसके सामने पूरी तरह नंगी हो गई।

वो मेरी चुत को सहलाते हुए उसको चूमने लगा। और मेरी जांघों को सहलाने लगा।

फिर उसने अपनी पैंट को खोलकर घुटनों तक उतार दी और अपनी अंडरवियर भी घुटनों तक कर दी। उसका लंड मेरे सामने तनकर खड़ा हुआ था।

मुझे डर लग रहा था कि मैं ये गलत कर रही हूं। नशे की हालत में मुझे कुछ होश नहीं रहा था और इतना सब कुछ हो गया।

मेरे सामने ऐसी स्थिति बन गई कि अब मैं उसको मना भी नहीं कर सकती थी और ना मैं खुद ये चाहती थी कि वो ये काम बंद कर दे।

मैं ये सोच ही रही थी कि तभी मुझे उसका लंड अपनी चुत पर महसूस हुआ। मैंने आंखें खोलकर देखा तो वो अपना लंड अपने हाथ में लिए खड़ा था और मेरी चुत पर रगड़ रहा था।

फिर उसने मुझे वहीं प्लेटफॉर्म पर पीछे की तरफ झुका दिया और मेरे दोनों पैर चौड़े करके मेरी चुत को लंड के सामने खोल दी। और फिर लंड को चुत के छेद पर रखकर दबाने लगा। कुछ ही प्रयास के बाद उसका लंड मेरी चुत के अंदर घुस गया।

अब वो मेरी चुत में झटके मार-मारकर मुझे चोदने लगा।

किसी गैर मर्द से पहली बार चुदने की वजह से मैं बहुत उत्तेजित हो रही थी। उसके कुछ ही झटकों से मैं झड़ गई। और मेरी धड़कनें तेज हो गईं।

उसने मुझे प्लेटफॉर्म से नीचे उतारा और मुझे पलटकर खड़ी होने को कहा।

मैं प्लेटफॉर्म पर अपने दोनों हाथ रखकर खड़ी हो गई और पीछे की तरफ झुक गई।

उसने मेरी साड़ी और पेटीकोट को कमर तक ऊपर उठाकर मेरी गांड को पूरी तरह खोल दिया। फिर दोनों हाथों से मेरी गांड के फूलों को फैलाया। अपनी गर्म सांसें मेरी गांड पर फेंकते हुए उसने अपनी जीभ मेरी गांड के छेद पर रख दी। धीरे-धीरे जीभ घुमाकर चाटने लगा। मेरी पूरी गांड को चाटता हुआ वो बार-बार जीभ अंदर डालने की कोशिश कर रहा था। कभी हल्के से काट भी लेता। फिर उसने जीभ नीचे सरकाकर मेरी चूत को भी चाटना शुरू कर दिया। मेरी चूत से निकल रहे रस को वो चूस-चूसकर पी रहा था। उसकी जीभ मेरी चूत की फुद्दी में घुसने की कोशिश कर रही थी। काफी देर तक वो मेरी गांड और चूत को चाटता रहा। मैं सिसकारियां भर रही थी और मेरी टांगें कांप रही थीं।

उसके बाद उसने अपनी दो उंगलियां मेरी चूत में डालकर तेजी से अंदर-बाहर करने लगा।

उसने अपना लंड मेरी चुत में घुसा दिया और मुझे चोदने लगा।

वो बिना डरे मेरी चुदाई कर रहा था। हम दोनों ही भूल चुके थे कि मेरे पति रूम में सो रहे थे। हमने रसोई का दरवाजा भी बंद नहीं किया था।

उसका लंड काफी मोटा और लंबा था। उसके लंड की नसें भी काफी उभरी हुई थीं। और मेरी चुत ज्यादा खुली हुई नहीं थी। इसलिए मेरी चुत की दीवारों पर जो रगड़ लग रही थी वो मुझे पागल कर रही थी।

वो अब और तेज हो गया। मेरी कमर को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़कर गहरे और जोरदार धक्के मारने लगा। हर धक्के पर उसका पूरा लंड मेरी चुत के सबसे अंदर तक घुस जा रहा था। वो पीछे खींचता, रुकता और फिर पूरी ताकत से अंदर ठोक देता। कभी-कभी वो लंड को पूरी तरह बाहर निकालकर फिर से जोर से धकेलता। मेरी चूत उसके हर झटके के साथ और गीली होती जा रही थी। मेरे बूब्स आगे-पीछे लहरा रहे थे। मेरी सांसें फूल गई थीं और मैं बार-बार कराह रही थी।

मेरे मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं। उसने मेरे मुंह पर हाथ रखकर मुझे चुप कराया और तेज धक्के मारने लगा।

उसको भी मेरी कसी हुई चुत को चोदने में काफी मजा आ रहा था। चोदते-चोदते उसने कहा, “भाभी आपकी चुत बहुत लाजवाब है, काश मेरी बीवी की चुत भी इतनी टाइट होती।”

बहुत देर तक उसने मेरी चुत मारी। मेरी कमर पकड़कर वो लगातार गहरे धक्के देता रहा। आखिर में जब उसे लगा कि उसका माल छूटने वाला है तो उसने लंड को बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगा। उसके लंड से एक तेज फव्वारा छूटा जो सीधा मेरी गांड पर गिरा। बहुत सारा माल नीचे फर्श पर भी गिर गया।

फिर मैंने अपने कपड़े ठीक किए और बाथरूम चली गई। वहां मैंने अपनी पैंटी से अपनी चुत और गांड को साफ किया और पैंटी धोकर दूसरी पैंटी पहन ली।

वापस बाहर आई तो वो घर जाने को तैयार खड़ा था।

मुझसे बोला – भाभी, चलता हूं घर… भैया उठे तो उनको बता देना.. और आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा।

मैंने भी कहा – रात बहुत हो गई है.. ध्यान से जाना।

फिर वो चला गया।

मेरे पति के बाद वो पहला लड़का था जिसने मेरी चुत में अपना लंड डाला।

मैंने उसका नाम भी नहीं पूछा। और ना कभी वो वापस मेरे घर आया।

हम दोनों के अलावा ये बात किसी को पता नहीं थी। मेरे पति तो यही मानते थे कि मुझे सिर्फ वही चोदते हैं। और मैं एक संस्कारी लड़की हूं।

कुछ समय बाद तो मेरे पति का देहांत हो गया। और फिर मैंने अपनी चुत कई मर्दों से चुदवा ली। और अभी तक चुदवा रही हूं। भाई, ससुर, बहन का पति सभी मेरी चुत ले चुके हैं। और मैं एक तरह से चुदक्कड़ बन गई हूं।

धन्यवाद्

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

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इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।