टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए

गांव की चारपाई पर भाभी बहन की जंगली चुदाई

मेरा नाम रितेश है। मैं 28 साल का हूं और दिल्ली में एमएनसी कंपनी में काम करता हूं।

मैं पढ़ने के लिए जब पुणे में रहता था तो मेरे फ्लैट के बगल में एक भैया रहते थे, जसवंत भैया। उनकी बीवी मंजुला जिन्हें मैं भाभी कहता था। बड़ी ही सुंदर और खुशमिजाज लेडी थी। जसवंत भैया की एक बहन थी शीला।

कुछ दिन रहने के बाद हम आपस में काफी घुल मिल गए थे। एक बार जसवंत भैया और भाभी अपने गांव चले गए। वहां फोन नहीं था इसलिए शीला अकेली रह गई। जब बहुत दिनों तक वे वापस नहीं आए तो शीला मेरे पास आई और बोली, रितेश क्या तुम मेरे साथ गांव चलोगे? मेरे भैया और भाभी अभी तक नहीं आए घर से।

वो मेरी बहन जैसी थी इसलिए मैंने उसे बहन मान लिया था। पर पराए बहन तो पराई ही होती है। और हम चल दिए।

हम दोनों पहुंच गए। मंजुला भाभी कुछ काम कर रही थी। जसवंत दिखाई नहीं दे रहा था। मैंने पूछा, “भैया नहीं है? कहां गए?”

मंजुला: “क्यों? मैं नहीं हूं क्या? भैया बिना नहीं चलेगा?”

शीला: “क्यों नहीं चलेगा? हम तो आपको ही ढूंढने आए थे। शीला बहुत उदास हो गई थी आप लोगों के बिना।”

मैं: “इतनी धूप में कहां गए भैया?”

मंजुला: “और कहां? वो भले उनके खेत भले।” कहते-कहते मंजुला का चेहरा उदास हो गया।

शीला: “क्या है भाभी? उदास दिखती हो, क्या बात है?”

मंजुला: “जाने भी दीजिए। ये तो हर रोज का मामला है। आप क्या करोगे?”

मैं: “बता तो सही। दिल हल्का हो जाएगा।”

मंजुला की आंखें भर आईं। मैं और शीला चारपाई पर बैठे थे। हमारे बीच जमीन पर वो बैठ गई और शीला की गोद में सर रख के रो पड़ी। मैंने उसकी पीठ सहलाई और आश्वासन दिया। उसने सारी बात बताई।

हुआ ऐसा था कि उसके पिताजी सूरत शहर में छोटी सी दुकान चला रहे थे। मंजुला वहीं बड़ी हुई थी। जसवंत के साथ शादी होने के बाद किसी ने जसवंत को कहा कि जब कुमारी थी तब मंजुला ने एक रतिलाल नाम के आदमी के साथ चक्कर चलाया था। बस तब से जसवंत मंजुला से खूब नाराज था।

शीला: “क्या सचमुच तूने चक्कर चलाया था?”

मंजुला: “नहीं तो। हमारी दुकान के सामने रतिलाल का पान का गल्ला था। उसने बहुत ट्राई किए लेकिन मैंने दाद नहीं दी थी।”

शीला: “रतिलाल या ना रतिलाल, तुझे किसी ने चोदा था?”

मैं जरा चौंक पड़ा। शीला लेकिन आसानी से बात किए जाती थी।

मंजुला: “किसी ने नहीं। तुम्हारे भैया ने…ने पहली बार वो किया, सुहागरात को तब खून निकला था, उसने देखा भी था।”

शीला: “अब क्या करते हैं भैया?”

मंजुला: “कुछ नहीं। सुबह होते ही खेत में चले जाते हैं और रात को आते हैं। खाना खाकर खटपट वो करके सो जाते हैं। न बात न चीत, कुछ नहीं।”

मैं: “वो क्या?”

शीला ने मेरी जांघ पर चपात लगाई और बोली, “बुद्धू कहीं के। डॉक्टर होने वाला है और इतना जानता नहीं है। भाभी तू इसे बता।”

मंजुला का चेहरा शर्म से लाल हो गया, कुछ बोली नहीं।

शीला: “कितने दिनों से ऐसे चोड़ते हैं?”

मंजुला: “दो महीने हो गए।”

मैं: “किसके दो महीने हुए?”

मेरी किसी ने सुनी नहीं। उन दोनों ने आंख से आंख मिलाई। पहले तो बस नजरें टकराईं। फिर धीरे-धीरे उनकी सांसें तेज होने लगीं। मंजुला भाभी का सीना ऊपर-नीचे होने लगा। शीला ने धीरे से हाथ आगे बढ़ाया और मंजुला भाभी के कंधे को छू लिया। दोनों नजदीक खिसकती गईं। उनके होंठ एक-दूसरे के बहुत करीब आ गए। फिर अचानक उनके होंठ चिपक गए। किस शुरू हुई तो पहले तो नरम-नरम दबाव था। फिर शीला ने अपनी जीभ निकालकर मंजुला भाभी के होंठों को चाटा।

मंजुला भाभी ने भी मुंह खोल दिया और उनकी जीभें एक-दूसरे से लिपट गईं। दोनों के मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकलने लगीं। शीला का एक हाथ मंजुला भाभी की पीठ पर घूम रहा था और दूसरा हाथ उनकी कमर को जकड़े हुए था। मंजुला भाभी का हाथ भी शीला की छाती पर आ गया था। उनकी किस लंबी चली।

मेरे लौड़े में जान आने लगी।

चुंबन छोड़कर शीला ने मेरा हाथ पकड़कर मंजुला के स्तन पर रख दिए और बोली, “उस दिन तू कहता था न कि तुझे स्तन सहलाने का दिल हो जाता है, तो आज शुरू कर।”

मैं: “मैं तो तेरे स्तन सहलाने को कहता था।”

शीला: “बहन के स्तन को भाई नहीं छूता, भाभी की बात अलग है। भाभी ब्लाउज खोल दे वरना ये फाड़ देगा।”

मंजुला ने ब्लाउज खोल के उतार दिया। उसके बड़े-बड़े स्तन देखकर मेरा लंड तन गया। मेरे हाथ दोनों स्तनों को दबाने लगे। शीला ने मेरा लंड टटोला।

“आई, भाई का…का…उसको बहन नहीं छूती।” मैंने कहा। जवाब दिए बिना शीला फिर से मंजुला को किस करने लगी और मेरे लंड को मुट्ठी में लेकर दबोच लिया। मैंने एक हाथ मंजुला के स्तन पर रखते हुए दूसरे से शीला का स्तन पकड़ा और दबाया। इस बार उसने विरोध नहीं किया।

अचानक उसने मंजुला का मुंह छोड़के मेरे मुंह पर अपने होंठ टिका दिए। किसी लड़की के साथ किस का मेरा ये पहला अनुभव था। मेरे बदन में झुरझुरी फैल गई और लंड में से पानी छूटने लगा।

अब मंजुला ने मेरा सर पकड़कर अपनी ओर खींचा और किस करने लगी। शीला ने मेरा लंड फिर से पकड़ा और घिसने लगी। मैंने जब उसकी कुरती के बटन पर हाथ लगाए तब उसने मेरे हाथ झटक दिया और खुद ने कुरती खोल दी। उसने ब्रा पहनी नहीं थी। उसके नंगे स्तन देखकर मैं ताज्जुब रह गया।

बड़े संतरे की साइज के उसके स्तन गोरे-गोरे थे। एक इंच की एरोला के बीच छोटी सी निप्पल थी जो उस वक्त कड़ी हो चुकी थी। जबकि मंजुला के स्तन सीने पे नीचे की ओर लगे हुए थे, शीला के स्तन काफी ऊंचे थे। मंजुला की निप्पल्स और एरोला भी बड़ी-बड़ी थी।

हाथ से शीला के स्तन सहलाते हुए मैंने झुककर मंजुला के निप्पल्स को मुंह में लेकर चूसा। शीला ने कब उठकर मंजुला को चारपाई पर लिटा दिया उसकी मुझे खबर न रही।

“भैया, तुम मेरे पीछे आ जाओ।” कहकर शीला मंजुला की जांघ पर बैठ गई। नाड़ी खोलकर उसने अपनी सलवार उतारी और आगे झुककर अपनी भोस से मंजुला की भोस को रगड़ने लगी।

मैंने पीछे से उसके स्तन पकड़े और घुटनों को मसलने लगा। मेरी हथेलियाँ उसके नरम और भरे हुए स्तनों को पूरी तरह भर ले रही थीं। उंगलियाँ गहरे दबाव के साथ मांसल गोश्त को दबाती और मसलती जा रही थीं। इससे उसके शरीर में धीरे-धीरे सिहरन दौड़ने लगी। उसके चेहरे पर लालिमा फैल रही थी और आँखें आधी बंद हो चुकी थीं। आगे झुकी हुई होने से उसके खुली हुई गांड मेरे सामने थी। गोल-गोल चूतड़ों के बीच की गहरी खाई पसीने से चमक रही थी।

मैंने झट से पजामा की नाड़ी खोलकर लंड बाहर निकाला और शीला के चूतड़ के बीच घिसने लगा। मेरा सख्त और गर्म लंड उसके नरम चूतड़ों की गरमाहट को छूते ही और भी फड़क उठा। मैंने उसे धीरे-धीरे ऊपर-नीचे घिसा। उसकी चिकनी त्वचा पर मेरे लंड की नसें साफ महसूस हो रही थीं। शीला के होंठों से हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकलने लगीं। “आह… भैया…”

“अभी ठहरो जरा भैया… आह्ह… तुम्हें पहले भाभी को चोदना है… मुझे बाद में।” कहके वो जरा आगे सरकी। उसकी आवाज में कामुक कंपन और हल्की काँपती साँसें थीं। मंजुला ने जांघें चौड़ी कीं और मेरा लंड उसकी भोस तक पहुंच गया। उसकी जांघों की गरमाहट और चूत की गीली नमी मेरे लंड के सिरे को छू रही थी। मेरे अंदर एक तीव्र उत्तेजना की लहर उठ रही थी।

मंजुला और शीला काफी एक्साइट हो गए थे। दोनों की भोस गीली-गीली हो गई थी। उनकी साँसें तेज और भारी हो चुकी थीं। मंजुला के चेहरे पर लालिमा गहरी होती जा रही थी। उसके स्तन हर साँस के साथ हिल रहे थे। एक हाथ से लंड पकड़कर मैंने लौड़े का मत्था मंजुला की चूत में डाल दिया। दूसरे हाथ से शीला की क्लिटोरिस को टटोलता रहा। मंजुला की चूत का मुंह गीला और गरम था। लंड का सिरा उसके होंठों को चीरते हुए अंदर घुसने लगा। मेरे लंड में सनसनी दौड़ गई।

एक धक्का जोर से लगाया कि लंड भाभी की चूत में उतर गया। पूरा मोटा लंड एक ही झटके में उसके अंदर समा गया। मंजुला ने जांघें ऊपर उठाकर सहारा दिया। उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थीं। शीला उसके ऊपर झुकी हुई किस करती रही थी। दोनों के होंठ एक-दूसरे से चिपके हुए थे। उनकी आँखों में गहरी कामुकता झलक रही थी। मंजुला की जांघें हल्के-हल्के काँप रही थीं।

मंजुला के हिप्स हिलने लगे और चूत में फट-फट-फटाके होने लगे। मैंने धक्कों की रफ्तार बढ़ाई। हर धक्के के साथ उसकी चूत से चिकनी आवाजें निकल रही थीं। “आह… हाँ… और जोर से…” मंजुला जोर से झड़ पड़ी और शिथिल हो गई। उसके शरीर में तीव्र कंपन हुआ। चूत की दीवारें मेरे लंड को बार-बार दबाती रहीं। उसका गर्म रस मेरे लंड पर बह निकला। मेरे अंदर भी चरम सुख की लहर उठने लगी थी।

मैंने उसकी चूत का रस से गीला लंड निकाला। शीला ने अपने हिप्स थोड़े उठाए और थोड़ा पीछे की तरफ खिसकी। अब लंड का मत्था शीला की योनि के मुंह में लग गया। लेकिन मंजुला की चूत और शीला की चूत में काफी फर्क था। जबकि भाभी की चूत में जाने में लंड को कोई तकलीफ नहीं हुई थी, शीला कुंवारी होने से लंड जल्दी से घुसा नहीं। अकेला मत्था योनि पटल तक गया। मेरे लंड के सिरे पर तीव्र दबाव महसूस हो रहा था। शीला की जांघें हल्के-हल्के काँप रही थीं। उसके चेहरे पर दर्द और उत्तेजना का मिश्रण दिख रहा था।

मैंने थोड़ा लंड बाहर निकाला और फिर से डाला। सी-सी आवाज करते हुए शीला बोली, “आह… फिकर मत करना भैया… आह्ह… डाल दो अपना लंड।” उसकी आँखों में आँसू भर आए थे लेकिन उसने मेरी आँखों में गहरी नजर डाली। मैंने एक-एक इंच सरकाता लंड को इस्तेमाल करते हुए दस बार धक्के लगाए और शीला की चूत को चुदवा होने दिया। हर धक्के के साथ उसकी योनि धीरे-धीरे खुल रही थी। उसके स्तन ऊपर-नीचे हिल रहे थे।

आखिर योनि पटल तोड़ना ही तो था। मैंने शीला के चूतड़ पकड़े और एक जोर का धक्का लगाया। योनि पटल तोड़के लंड चूत में पैठा। शीला के मुंह से चीख निकल गई। “आआह्ह…!” उसके पूरे शरीर में तेज कंपन हुआ। जांघें काँप उठीं। लंड के बाहर निकलने पर हल्के लाल रंग का खून उसकी चूत की नमी के साथ मिलकर बह निकला। गीली लालिमा लंड पर चमक रही थी। मैं थोड़ी देर रुका लेकिन मेरा लंड थुमक-थुमक करता था और ज्यादा मोटा होके चूत को भी ज्यादा चौड़ा करता था। मेरे अंदर दबाव बढ़ रहा था। मैंने साँस को नियंत्रित करके उत्तेजना को रोका।

खुद शीला ने कहा, “अब दर्द कम हो गया है, भैया… आह… अब आराम से चोड़िए।” उसकी आवाज अब दर्द से कामुकता की ओर मुड़ रही थी। मैंने धीरे से धक्के लगाने शुरू किए। शीला की चूत अब धीरे-धीरे मेरे लंड को अपनी नमी से लपेट रही थी।

उधर आगे झुककर शीला ने अपने स्तन भाभी के मुंह के पास रख दिए थे। मंजुला शीला की निप्पल्स को चाट रही थी और चूस रही थी। दोनों की आँखों में गहरी नजरें मिल रही थीं। वे बार-बार गहरी किस कर रही थीं। उनकी जीभें एक-दूसरे से उलझ रही थीं। उसका एक हाथ शीला की क्लिटोरिस से खेल रहा था।

जब शीला की चूत फट-फट करने लगी तब मैंने धक्कों की रफ्तार और गहराई बढ़ा दी। शीला ने कहा, “भैया… आह्ह… भाभी को भी मजा चखाते रहना।” मंजुला की चूत दूर कहां थी? शीला की चूत से निकालके मैंने मंजुला की चूत में लंड डाल दिया और चोड़ने लगा। मंजुला बोली, “देवरजी… आह… मैं तो एक बार झड़ चुकी हूं। शीला बहन का ख्याल रखिएगा।” दोनों की जांघें और कूल्हे स्विच के दौरान तेजी से काँप रहे थे।

मैंने लंड निकालके फिर से शीला की चूत में डाला और चोड़ने लगा। ऐसे चार-पांच बारी चूत बदलते-बदलते मैंने उन दोनों को एक साथ चोदा। हर बार स्विच करते समय उनकी गीली चूतों की नमी मेरे लंड पर चमक रही थी। मैं दबाव को नियंत्रित रखते हुए धीमी रफ्तार से धक्के दे रहा था। दोनों की जांघें काँप रही थीं। स्तन हिल रहे थे। उनकी आँखों में गहरी कामुकता और विश्वास था। “आह… हाँ भैया… और गहरा…” जैसी प्रोत्साहन भरी कराहें निकल रही थीं।

आप पूछेंगे कि मैं झट से क्यों न झड़ गया। इसका राज ये है कि भाभी के घर आने से पहले मैंने एक बार हस्तमैथुन करके लंड को शांत किया था। आधा घंटे की चुदाई के बाद मैं मंजुला की योनि में झड़ा। दरमियान शीला एक बार और मंजुला दो बार झड़ी। दोनों ने उठकर मेरा लंड साफ किया। नर्म होते हुए लंड को हाथ में पकड़के शीला ने पूछा, “भैया, एतराज न हो तो मैं… मुंह में लूं तुम्हारा लंड को?” उसकी आँखों में शरारत और इच्छा झलक रही थी।

मुझे क्या था? मैं चारपाई पर लेटा रहा और शीला ने लंड की टोपी खिसकाके मत्था खुला किया और जीभ से चाटा। तुरंत ही लंड तन गया। मुंह में लेने के लिए शीला को अपना मुंह पूरा खोलना पड़ा, फिर भी मुश्किल से वो लंड को मुंह में ले पाई। जब लंड पैठा तब ताज्जुबी से उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। मेरे अंदर एक गर्म लहर दौड़ गई।

लंड का मत्था मुंह में ही पकड़े हुए उसने हाथ से लंड को घिसना शुरू किया। मेरे लंड से पानी छूटने लगा। अपना सर हिलाके शीला लंड को अंदर-बाहर करने लगी, साथ-साथ जीभ से टटोलने लगी। “आह… mmm…” उसकी कराहटें लंड पर कंपन पैदा कर रही थीं। मंजुला उसके पीछे बैठके एक हाथ से स्तन सहलाती थी और दूसरे हाथ से क्लिटोरिस। शीला की जांघें काँप रही थीं।

शीला की एक्साइटमेंट काफी बढ़ गई तब मैंने लंड छुड़ाया और तेजी से उसको जमीन पर लिटा दिया। उसने अपनी जांघें उठाईं और चौड़ी पकड़ रखी। खुली हुई भोस में मैंने झट से लंड डाल दिया और तेजी से उसको चोड़ने लगा। दस-पंद्रह धक्के में हम दोनों एक साथ झड़े। उसके शरीर में तीव्र कंपन हुआ। जांघें और कूल्हे जोर से काँप उठे।

“भैया, मुंह में लंड लेने की मजा चूत में लाने जैसी ही है। भाभी, तू भी ट्राई कर लेना।” शीला ने कहा। उसकी आवाज में संतोष था। मैंने कहा, “अब मेरे लंड में चोदने की ताकत नहीं है।” “देखूं तो।” कहके मंजुला ने मेरे नर्म लौड़े को मुंह में लिया और चूसने लगी। थोड़ी देर लगी लेकिन लंड खड़ा तो हो ही गया। मंजुला की आँखें मेरी आँखों से मिलीं।

पंद्रह मिनट की एक और चुदाई हो गई। मंजुला ने आग्रह करके मुझे मुंह में झड़ाया। लंड ने जो वीर्य छोड़ा ये सारा वो पी गई। उसके गले की हरकत साफ दिख रही थी। उसके होंठों और ठोड़ी पर लार और वीर्य का मिश्रण चमक रहा था। हम तीनों थके हुए थे। बिना कपड़े पहने हुए सो गए।

⚠️

⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।