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सुंदर भाभी ने सिखाया कामसूत्र

Bhabhi ne chudai sikhaya sex story: मेरा नाम अमित है। मेरी उम्र २४ साल है और मुझे सेक्स और संभोग काफी पसंद है। मुझे सेक्स कामसूत्र मेरी पड़ोसन ने सिखाया। यह बात उस समय की है जब मैं १८ साल का था।

हमारे पड़ोस में एक परिवार रहता था और उनसे हमारे परिवार के बहुत ही अच्छे संबंध थे। हम दोनों परिवारों के बीच काफी आना-जाना होता था। उनके दो लड़के थे और दोनों की शादी हो चुकी थी। सबसे छोटे वाले लड़के की शादी दो साल पहले हुई थी, मगर उसकी बीवी को अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ था। उसकी बीवी बहुत ही सुंदर और मस्त थी। उसका फिगर देखते ही मेरा लंड तुरंत झटके मारने लगता था। वह इतनी सुंदर थी कि कोई भी उसे देखे तो बस घूरता ही रह जाए।

एक दिन की बात है, दोपहर का समय था। हम सब लोग धूप में बैठे हुए आराम से बातें कर रहे थे। अचानक बातों-बातों में मेरा हाथ भाभी की जांघों के नीचे चला गया। मुझे खुद भी पता नहीं चला कि यह कैसे हुआ। उनकी जांघें बहुत ही गरम और नरम थीं। मुझे कुछ अजीब सा महसूस होने लगा। मैंने सोचा कि भाभी मेरे बारे में क्या सोचेंगी, लेकिन किसी अज्ञात कारण से मैं अपना हाथ वहां से नहीं हटा पाया।

मुझे उलझन में देखकर भाभी ने मेरी परेशानी तुरंत समझ ली। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और धीरे से मुस्कुरा दी। अब मुझे उनकी पूरी सहमति मिल चुकी थी। मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ और अंदर की ओर सरकाना शुरू कर दिया। लेकिन जिस तरीके से भाभी बैठी हुई थीं, एक हद तक पहुंचने के बाद मेरा हाथ आगे नहीं बढ़ पा रहा था।

यह सब देखकर भाभी थोड़ी सी आगे की ओर सरक गईं। इससे मेरा हाथ सीधे उनकी गांड के नीचे आ गया। मैंने उनके नितंबों को हल्के से दबाना शुरू किया। फिर अपनी उंगली को उनकी गांड के छेद पर घुमाने लगा। भाभी पूरी मस्ती में वैसी ही बैठी रहीं। उनकी सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं लेकिन चेहरे पर मुस्कान बनी रही। थोड़ी देर बाद जब धूप चली गई तो सब लोग उठ गए और अपने-अपने घर जाने लगे।

जाते वक्त भाभी ने मुझसे कहा कि शाम को ५ बजे मेरे घर आना, मुझे कुछ काम है। अब तो मुझे पूरी तरह समझ आ चुका था कि भाभी ने मुझे क्यों बुलाया है। मैंने भी अपना लंड बड़ी मुश्किल से काबू में रखा हुआ था। वहां से निकलते ही मैं सीधे बाथरूम में भागा और भाभी के नाम पर मस्त हस्तमैथुन किया। शाम को ठीक ५ बजे मैं अनजान बनकर उनके घर चला गया। मैं उनको यह नहीं जताना चाहता था कि मुझे उनकी मंशा समझ आ गई है।

जब मैं उनके घर में घुसा तो देखा कि भाभी सर पर चुन्नी बांधकर लेटी हुई थीं। मैंने भाभी से कहा, आप तो सो रही हो, चलो मैं बाद में आ जाता हूं। भाभी बोलीं, रुक-रुक मत जा, यहां पर आ जा। मैं उनके पास गया। फिर वो मुझसे बोलीं कि सर में दर्द हो रहा है, थोड़ा दबा दो। मैंने कहा ठीक है और उनका सर दबाने लगा। तो वो बोलीं कि ऐसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा, तुम ऊपर पैर करके बैठ जाओ और मैं तुम्हारी गोदी में सर रख लेती हूं फिर तुम अच्छे से दबा देना।

मैंने वैसा ही किया। फिर उन्होंने मेरी गोद में सर रख दिया और मैं उनका सर दबाने लगा। कुछ देर तक सर दबाने के बाद मैंने उनसे पूछा कि अब कैसा लग रहा है। भाभी बोलीं, काफी ठीक है, लेकिन थोड़ा नीचे की ओर दबा दो। मैंने मन ही मन खुश होते हुए कहा, ठीक है दबा देता हूं।

फिर उन्होंने अपना कान मेरी तरफ कर दिया। अब उनका गाल मेरे लंड की तरफ था। जब भी मैं उनके कान के पास दबाता, उनका नरम और गर्म गाल मेरे लंड को दबा देता। ऐसा करते-करते कुछ ही पलों में मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया। मुझे फिर से अजीब सा लगने लगा। मैंने भाभी से कहा कि अब मुझे चलना चाहिए।

भाभी ने मुझे रुकने की जिद की और बोली मेरे कान के पास दर्द हो रहा है, कुछ और देर दबा दे; जब मुझे थोड़ा सा आराम मिलेगा, तब तू चले जाना।

मै अब कुछ भी नहीं कर पा रहा था। उनके नरम और गर्म गालों के कारण मेरा लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था। उसकी मोटाई और कठोरता से मेरी पैंट तंग हो रही थी। लंड के सिरे पर हल्की नमी महसूस हो रही थी।

फिर कुछ देर के बाद वो बोलीं, अरे ये क्या है जो मेरे गालों को लग रहा है। उनकी आवाज में आश्चर्य के साथ एक कामुक झनक थी।

मैंने भोला बनते हुए कहा, क्या भाभी कुछ भी नहीं है। मेरी आवाज थोड़ी कांप रही थी। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के मेरे पेंट का ज़िप खोल दिया। उनकी उंगलियां मेरी जांघों को छूती हुई नीचे सरक रही थीं। फिर उन्होंने मेरा खड़ा और गर्म लंड बाहर निकाल लिया। तुरंत अपना नरम, मुलायम गाल उसके ऊपर रख दिया। लंड की गरमी उनके गाल पर फैल गई। वे फिर आराम से लेट गईं और बोलीं, अब दबाव अब मुझे और आराम मिल रहा है।

फिर कुछ देर के बाद हिलते-हिलते वो अपना गीला और नरम होंठ मेरे लंड के टोपे पर लगाने लगी थीं। उनके गर्म सांसों की हल्की नमी मेरे लंड पर पड़ रही थी। होंठ धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। अब तो मुझे पक्का पता चल गया था कि उनके मन में क्या चल रहा है। मगर फिर भी मैं अनजान बनाने का नाटक कर रहा था।

फिर वो अचानक से उठ गईं और मुझसे पूछा, तेरा क्या हाल हो रहा है। उनकी आंखों में शरारत और कामुकता चमक रही थी।

मैंने कहा, भाभी मजा आ रहा है। ऊऊओ………..आआआआअ……. फिर उन्होंने मुझे गले से लगा लिया। उनकी नरम छातियां मेरी छाती से सट गईं। उन्होंने मेरे होंठों को और मेरे गालों को चूमना शुरू कर दिया। उनके गर्म और नम होंठ मेरी त्वचा पर बार-बार दब रहे थे। फिर उन्होंने मुझे बोली कि चल अब तू भी ऐसे ही कर मुझे।

मैं भी फिर उनको चूमने लगा। उनके गालों पर और होंठों को चूसने लगा। उनके होंठों का मीठा स्वाद मेरी जीभ पर फैल गया। मुझे भी अब मजा आने लगा। हम दोनों के सांस एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रहे थे। फिर कुछ १५-२० मिनट तक हम दोनों एक दूसरे को चूमते और चूसते रहे। उनके होंठ मेरे होंठों को बार-बार चबा रहे थे। कभी-कभी उनकी जीभ मेरी जीभ से टकराती।

फिर हम दोनों अलग हुए। हमारे होंठों पर लार की चमक बाकी थी। फिर उन्होंने मुझसे कहा कि किसी को बताना नहीं। उसके बाद मैं फिर अपने घर को निकल पड़ा।

इसके बाद जब भी हम दोनों को मौका मिला, हम दोनों एक दूसरे को चूसते और चूमते रहते। कभी-कभी मैं एक कदम आगे बढ़ जाता और उनके चुचे दबा देता।

फिर एक दिन मैंने उनसे पूछा, कि आप भैया से खुश नहीं हो क्या।

भाभी मुस्कुराकर बोलीं, ऐसी बात नहीं है। वो क्या है, कि तू मुझे अच्छा लगता है। इसीलिए मैं तुझसे चुदना चाहती हूं। उनकी आवाज में शर्म और कामुकता दोनों थी। उनकी आंखें मेरी आंखों में गहराई से देख रही थीं। मैंने कहा, मैंने तो आज तक किसी को नहीं चोदा। थोड़ी देर बाद हंसकर भाभी बोलीं, चिंता क्यों कर रहा है। मैं आपको सब कुछ सिखा दूंगी। तुझे सिखने का मन है।

मैंने खुश होते हुए बोला, नेकी और पूछ-पूछ। अभी तो उम्र है मेरी सिखने की। और उसके बाद, मैं और भाभी दोनों मौका ढूंढने लगे।

फिर एक दिन वो घर पर अकेली थीं। तब उन्होंने मुझे बुलवा लिया। और जब तक मैं पहुंचा, उसने पूरी तरह से सज-संवार कर रखा था। लाल रंग की साड़ी, गहरी ब्लाउज, मेकअप और खुशबू। उसे देखकर तो मेरी सांस रुक गई। क्या लग रही थीं। और उसको देखकर मेरे लंड ने उसको सलाम बजाना शुरू कर दिया। लंड पूरी तरह खड़ा होकर पैंट में तन गया।

उनके चुचों को मैंने ध्यान से देखा। तो देखा कि उसके बड़े और भरे हुए चुचे कपड़ों में से बाहर आने को बेचैन थे। उनकी गांड भी साड़ी के नीचे हिल रही थी। मैंने उनको इस हाल में देखते ही उन्हें अपने गले से लगा लिया। उनकी नरम छातियां मेरी छाती से जोर से टकराईं। झट से उनके गर्म और मीठे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। और उन्हें जोर-जोर से चूसने लगा।

कुछ देर के चूसने के बाद वो बोलीं कि ऊपर के कमरे में चलते हैं। तुम ऊपर चलो मैं दरवाजा लगा कर आती हूं। मैं ऊपर चला गया। और वो दरवाजा लगाकर ऊपर कमरे में आ गईं। उनको देखकर मुझसे रहा नहीं गया। और मैं उनपर टूट पड़ा। और उनके कामुक होंठों को चूसने लगा। उनके होंठ आज काफी मीठे लग रहे थे, पहले से। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं उनके होंठों को नहीं किसी मिसरी को चूस रहा हूं।

उनके होंठों को चूसते-चूसते उन्होंने अपनी गीली और गर्म जीभ से मेरे होंठों को चाटना शुरू कर दिया। फिर मुझे बोलीं कि अपनी जीभ से मेरी जीभ को छू आआआ…..ऊऊओ। मैंने वैसा ही किया। हमारी जीभें एक-दूसरे में लिपट गईं। लार का स्वाद मुंह में फैल गया। और मुझे काफी मजा आ रहा था। आज तो वो मुझ कामशास्त्र की टीचर लग रही थी।

फिर हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। और फिर उन्होंने मुझे अपने पूरे शरीर पर किस करने को कहा और मस्ती में चूमने के लिए बोला। मैंने उनके गालों, होंठों, माथे, गर्दन, कानों और हर जगह को चूमा। मेरे गर्म और भूखे चुंबनों से वो भी पूरी तरह से मस्ती में आ चुकी थीं। उनकी सांसें तेज हो गई थीं और वो मस्ती में अपना कामुक शरीर हिला रही थीं। उनके निप्पल सख्त होकर खड़े हो गए थे।

अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था। मैंने बड़ी ही बेसब्री से उनके पूरे कपड़े उतार दिए। ब्लाउज की हुक खोलते ही उनके बड़े और भरे हुए चुचे बाहर आ गए। फिर साड़ी और पेटीकोट खींचकर फेंक दिया। अब वो मेरे सामने पूरी तरह से नंगी लेटी हुई थीं। उनकी चिकनी त्वचा, बड़े चुचे, गुलाबी निप्पल और साफ चूत मेरी आंखों के सामने थी।

फिर उन्होंने मुझे कहा कि अब तुम मेरे ऊपर आ जा और मुझे चूसो। फिर मैंने उनके चुचों को अपने हाथों में पकड़ा और कसकर मसलने लगा। उनके दोनों चुचे बड़े ही मजेदार, नरम और भरे हुए थे। मैं दोनों को बारी-बारी से मसल रहा था। कभी जोर से दबाता तो कभी हल्के से सहलाता। वो भी मस्ती में कामुक आवाजों के साथ आआआआ……ओऊ………..अपना बदन हिला रही थीं। उनके निप्पल मेरी उंगलियों के बीच फंसकर और सख्त हो रहे थे।

फिर भाभी ने मेरे सारे कपड़े उतारकर मुझे पूरा नंगा कर दिया। हम एक दूसरे से लिपट गए। हम दोनों के नंगे बदन आपस में चिपके हुए थे। उनके गर्म और नरम चुचे मेरी छाती में धंस रहे थे। मेरा लंड उनकी चूत की घंटी पर बार-बार टक्कर मार रहा था और उसके अंदर जाने को बेचैन था। लंड के सिरे पर पारदर्शी तरल पदार्थ निकल रहा था।

भाभी ने अपने हाथ नीचे कर लिए और मेरा मोटा लंड पकड़ लिया। फिर जोर से खींचने लगीं। मेरा शरीर मस्ती में हिल रहा था। ओऊ……क्या कर रही हो भाभी..वाह… मैंने भी अपना हाथ उनकी चूत पर रख लिया। उनकी चूत पहले से ही गीली और गरम थी। मैंने उसकी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया। मेरी उंगलियां उनकी फूली हुई चूत की लकीर पर ऊपर-नीचे घूम रही थीं। भाभी मस्ती में थीं। उनकी गांड हिल रही थी और वो जोर-जोर से चिल्ला रही थीं। साले….और कर…आआअ…ऊऊऊऊऊ..मस्त…तेरा लौड़ा मस्त है…चोद दे मुझे आज…आआआआआआअ…..ऊऊऊऊऊ……..

फिर उन्होंने मेरी एक जांघ को अपनी चूत के पास अपनी दोनों टांगों के बीच में ले लिया। अब मेरा लंड उनकी चूत को बिलकुल छू रहा था। जब उन्हें मेरे लंड की लंबाई और मोटाई का पूरा अहसास हुआ तो वो बोलीं, साले, तेरा लंड तो छुपा रुस्तम है। और फिर से मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया। हंसते हुए तेजी से अपना मुंह आगे बढ़ाया और मेरा पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया। फिर अपने मुंह को आगे-पीछे करके मेरा मुठ मारने लगीं। उनके गर्म और गीले मुंह की नमी मेरे लंड पर फैल रही थी। मेरे लंड के टोपे को अपनी जीभ से सहला रही थीं। आआआआअ……ओ..बस…….तुम सेक्सी हो मेरी जान…..आज तो तेरी जान ले लूंगा…..आआआअ…ऊऊओ…बस….

मैं तो एकदम सा पागल सा हुए जा रहा था। फिर वो अचानक से रुक गईं और बोलीं, बस चोदने की बारी। इतना कहकर वो लेट गईं और मुझे बोलीं कि चल अब मेरे ऊपर आ। मैं जब उनके ऊपर आया तो उन्होंने मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत के ऊपर रख लिया। और अपनी चूत से रगड़ने लगीं। उनके मुंह से बड़ी कामुक आवाजें निकल रही थीं….आआआ…सी….सी…सी…आ…ऊ…आ…ओउच….

और अपनी गांड को सही तरीके से रखने के लिए उन्होंने गांड के नीचे तकिया रख लिया। और मुझे मेरा लंड चूत के ऊपर चलाने को कहा। बोला कि रगड़ते हुए ही धक्का मार देना। मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ना शुरू किया। तो वो मस्ती में कसमसाने लगीं और मचलने लगीं। फिर मैंने धीरे से एक धक्का मार दिया। मेरा लंड थोड़ा सा अंदर गया। मेरा लंड पहली बार किसी चूत में जा रहा था तो मुझे थोड़ा सा दर्द होने लगा। दर्द काफी हो रहा था तो मैं रुक गया।

भाभी ने पूछा, क्या हुआ? मैंने कहा, मेरे लंड की खाल छिल गई है और काफी दर्द हो रहा है। भाभी बोलीं कि कुछ नहीं होगा, तेज धक्के मार, सब ठीक हो जाएगा। और भाभी बेचैनी में अपनी गांड हिलाकर मेरे लंड को अंदर लेने की कोशिश करने लगीं।

मैने जैसा भाभी ने बोला, वैसा ही करना शुरू कर दिया। मैंने जोर से धक्के मारकर लंड को और अंदर डालना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ मेरा मोटा लंड उनकी टाइट और गीली चूत को चीरता हुआ आगे बढ़ रहा था। आआअ….ऊऊओ… मेरा दर्द बढ़ रहा था और मुझे दर्द सहन नहीं हो रहा था। लंड की खाल खिंच रही थी और चूत की दीवारें उसे कसकर दबा रही थीं।

लेकिन भाभी मुझे बार-बार बोलती रहीं कि मेरे लंड को उनकी चूत में आगे-पीछे कर। उनकी आवाज में बेचैनी और भूख थी। कुछ देर में मेरा दर्द कम होने लगा। चूत की गरमी और चिकनाहट ने दर्द को मजा में बदल दिया। मैंने पूरे जोश में लंड को तेजी से चलाना शुरू कर दिया। अब मुझसे सहन नहीं हो रहा था।

भाभी का शरीर काफी तेज चल रहा था। उनकी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी। उनकी चूत मेरे लंड को बार-बार निचोड़ रही थी। और एक ही जोरदार झटके के साथ उन्होंने अपना पानी छोड़ दिया। गर्म और चिपचिपा रस मेरे लंड के चारों ओर बहने लगा। उनकी चूत सिकुड़-सिकुड़ कर मेरे लंड को दबा रही थी। उनके मुंह से ऊंची चीख निकली।

फिर मुझे लगा कि मैं भी झड़ने वाला हूं। तो मैंने भाभी को बोला कि भाभी अजीब सी चुभन है, लगता है कुछ बाहर आने वाला है। भाभी समझ गईं। उन्होंने तुरंत मेरा लंड अपनी चूत से बाहर निकाल लिया। और उसे अपने मुंह के सामने रख लिया। मेरा लंड पूरी तरह चमक रहा था, उनकी चूत के रस से भीगा हुआ।

एक ताजा और जोरदार झटके के साथ मेरा गरम पानी भाभी के मुंह में चला गया। पहली फुहार उनके गले तक गई। भाभी ने मेरा पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया। उनके गर्म और गीले मुंह ने उसे कस लिया। भाभी ने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। उनकी जीभ लंड के टोपे को घुमा रही थी। उन्होंने मेरे वीर्य की एक-एक बूंद चूस ली। कुछ बूंदें उनके होंठों के कोनों से बहकर चिन पर गिर रही थीं। मेरा लंड बिलकुल सिकुड़ गया।

मुझे भी उस दिन बड़ा मजा आया और मेरा पहला कामसूत्र बहुत ही मस्त था। उसके बाद तो हमको जब भी मौका मिलता, हम एक दूसरे को मस्ती में चोदते और मजे लेते।

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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