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बहन की कुंवारी चूत फाड़ी भाई ने लिव इन में

Live in sex story: जिस तरह से शिक्षा के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है उसे देखते हुए देश में एजुकेशन का रेश्यो भी काफी हद तक बढ़ गया है। आज के इस आधुनिक और तेज़ रफ्तार वाले जमाने में हर इंसान और खास तौर पर हर माता पिता अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा देने की सोचते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि शिक्षा ही जीवन की नींव है और इससे बेहतर भविष्य का निर्माण होता है। वे अपनी सारी बचत, मेहनत और समय को इस दिशा में लगा देते हैं, कभी अतिरिक्त ट्यूशन क्लासेस के लिए पैसे जुटाते हैं, कभी दूर दराज के अच्छे संस्थानों में भर्ती करवाने के लिए यात्राएं करते हैं और कभी बेहतर किताबों, लैपटॉप और अन्य सुविधाओं के लिए खर्च करते हैं। स्कूलों, कोचिंग सेंटरों और यूनिवर्सिटीज में छात्रों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि हर जगह भीड़ दिखाई देती है और शिक्षा का स्तर तथा पहुंच दोनों में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। मैं इस प्रयास में कोई कमी निकाल कर लोगों के मन में कोई गलत धारणा पैदा करना नहीं चाहता हूं किंतु मुझे लगता है कि हर सिक्के के दो पहलू हैं।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि शिक्षा के उच्च स्तर से लोगों का जीवन स्तर बेहतर होता है, उनकी सोच व्यापक होती है, रोजगार के बेहतर अवसर मिलते हैं, स्वास्थ्य और जागरूकता बढ़ती है और समग्र सामाजिक विकास होता है लेकिन इस बात को भी नकारा नहीं जा सकता कि किसी चीज का कोई फायदा होता है तो उसका नुकसान भी होता है। शिक्षा की इस अनवरत दौड़ में परिवार के सदस्य अलग अलग शहरों में रहने लगते हैं जिससे भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है, तनाव उत्पन्न हो सकता है और कभी-कभी अप्रत्याशित शारीरिक या मानसिक चुनौतियां सामने आ जाती हैं। इसी सोच को ध्यान में रखकर मैंने यह कहानी लिखी है ताकि शिक्षा के दोनों पहलुओं को आपके सामने स्पष्ट रूप से रख सकूं।
मैं एक बार बिहार राज्य में गया हुआ था। वहां शहर के पास शेरघटी नामक छोटी सी जगह पर जफर खान साहब से मेरी मुलाकात हुई जो एक पुराने और सम्मानित जमींदार परिवार से गहरा ताल्लुक रखते थे। उनके परिवार की जड़ें उस क्षेत्र में बहुत गहरी थीं, पुरानी हवेली जिसमें लकड़ी के नक्काशीदार दरवाजे, ऊंची छतें और आंगन थे, चारों ओर हरे भरे खेत फैले हुए थे जहां फसलें लहराती थीं और परिवार की परंपराएं आज भी पूर्ण रूप से जीवित थीं। उनके दो बच्चे थे। वो दोनों अपने शहर से दूर चले गए थे। एक का नाम आसिफ था जिसकी उम्र चौबीस साल थी। दूसरी एक बेटी थी जिसका नाम था फिजा जो कि उन्नीस साल की थी।
वे दोनों बच्चे अपनी उच्च शिक्षा के लिए बैंगलोर शहर में चले गए थे। आसिफ ने एम.टेक की डिग्री पूरी करने के बाद अब इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पीएचडी का शोध कार्य कर रहा था जिसमें वह प्रयोगशाला में घंटों लगा रहता था और फिजा इंटरमीडिएट पास करने के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा की कठिन कोचिंग ले रही थी जहां वह डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए मेहनत कर रही थी। दोनों ही एक छोटे से दो कमरों वाले फ्लैट में रहते थे। फ्लैट काफी छोटा और संकीर्ण था जिसमें दीवारें करीब करीब थीं, रसोई में बेसिक बर्तन रखे थे, एक कमरे में दो बेड और दूसरे में स्टडी टेबल थी तो दोनों को थोड़ी परेशानी हो रही थी लेकिन दोनों के बीच की जुगलबंदी और समझदारी इतनी अच्छी थी कि दोनों आराम से मैनेज कर ले रहे थे। वे एक दूसरे की मदद से रोजमर्रा की छोटी छोटी समस्याओं को आसानी से सुलझा लेते थे।
उन दोनों के बीच की बॉन्डिंग इतनी अच्छी थी कि दोनों साथ में ही मिलकर खाना बनाते थे। रसोई में खड़े होकर वे ताज़ी सब्जियां काटते, मसालों की तीखी और सुगंधित खुशबू फैलाते हुए चावल, दाल या रोटी पकाते और एक दूसरे से दिन भर की बातें शेयर करते हुए हंसते मुस्कुराते रहते थे। साथ में ही पढ़ाई करते थे जहां वे मेज पर बैठकर किताबें खोलते, एक दूसरे के नोट्स और डाउट्स शेयर करते और रात के अंधेरे में लैंप की रोशनी में घंटों अध्ययन करते थे। साथ ही बाइक से यूनिवर्सिटी भी जाया करते थे जहां सुबह की ठंडी हवा उनके बालों को उड़ाती थी, शहर के व्यस्त ट्रैफिक की हॉर्न और आवाजें सुनाई देती थीं और वे रास्ते भर अपने अनुभव एक दूसरे से बांटते थे।
तीन चार महीने तक सब कुछ अच्छा चल रहा था। वे बैंगलोर के व्यस्त और आधुनिक जीवन शैली को पूरी तरह अनुकूलित कर चुके थे और अपनी दिनचर्या में पूरी तरह व्यस्त थे। एक दिन कोचिंग से वापस आते वक्त रास्ते में अचानक जोर से बारिश होने लग गई। आसमान अचानक काला छा गया था, तेज हवाएं चलने लगी थीं और मोटी मोटी बारिश की बूंदें जोर जोर से गिरने लगी थीं। वो घर की ओर भागे मगर रास्ते में ही दोनों के दोनों पानी में पूरे तर हो गए थे। ठंडी बारिश की बूंदें उनकी त्वचा पर पड़ रही थीं, कपड़े तुरंत भीगकर शरीर से चिपक गए थे, बालों से पानी की धाराएं बह रही थीं और ठंड का एहसास पूरे शरीर में फैल गया था।
उन्होंने जल्दी से बाइक को बेसमेंट में पार्क किया और फिर सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते हुए तेजी से अपने फ्लैट की ओर दौड़े। चूंकि दोनों के कपड़े गीले हो चुके थे और दोनों ही पानी पानी हो रहे थे इसलिए कपड़ों से बहता पानी पैरों में जाकर नीचे टपक रहा था। उनके जूते पानी से लथपथ थे, हर कदम पर चपचपाहट की आवाज गूंज रही थी, गीले कपड़े शरीर को असहज बना रहे थे और ठंड से उनकी हड्डियां ठिठुर रही थीं। सीढ़ियों पर पानी की पतली परत बन गई थी जिससे फिसलन का खतरा बढ़ गया था।
इसी जल्दी जल्दी में सीढ़ियां चढ़ते हुए फिजा का पैर सीढ़ियों पर से फिसल गया। अचानक उसके दाहिने पैर का तलवा गीली और चिकनी सीढ़ी की सतह पर फिसला, उसका पूरा शरीर संतुलन खोकर आगे की ओर झुक गया और वह लड़खड़ाकर नीचे की ओर गिरने लगी। पैर फिसलते ही उसके टखने में तेज मोच आ गई, मोच की जगह पर एक तेज चटकने जैसी सनसनी हुई और दर्द की तीव्र लहर पैर से ऊपर की ओर दौड़ गई जिससे वह जोर से चीख पड़ी। आसिफ ने तुरंत उसको उठाने की बहुत कोशिश की लेकिन उसके पैर में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था और काफी कोशिश करने के बाद भी वो उठने में कामयाब नहीं हो पा रही थी। वह बार बार कराह रही थी, उसका चेहरा पीड़ा से सिकुड़ गया था और आंखों में आंसू भर आए थे।
उठने की जल्दी में उसके पैर में दर्द और तकलीफ और ज्यादा बढ़ गया था। हर छोटी सी कोशिश में दर्द की तीव्रता दोगुनी हो जाती थी, उसके शरीर में कांपन हो रहा था और मुंह से हल्की कराह निकल रही थी। आसिफ भी बेबस हो गया था। वो अपनी बहन को इस तकलीफ में नहीं देख सकता था। उसकी आंखों में गहरी चिंता और बेबसी के भाव थे, दिल की धड़कन तेज हो गई थी और चेहरा चिंता से फीका पड़ गया था। मगर फिजा से उठा ही नहीं जा रहा था। मजबूरी में आसिफ ने अपनी बहन को अपनी गोद में उठा लिया।

वो उसको उठा कर फ्लैट में अंदर ले गया। आसिफ अपनी बहन फिजा को गोद में उठाए हुए सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते हुए फ्लैट की ओर बढ़ रहा था। उसकी बांहों में फिजा का पूरा वजन महसूस हो रहा था। फिजा के गीले और ठंडे कपड़ों से उसकी छाती और पेट के हिस्से पूरी तरह सटे हुए थे। फिजा का बदन उसके गीले बदन से सटा हुआ था। उसकी नरम छाती उसके सीने से दब रही थी और हर कदम पर उनके शरीर एक दूसरे से रगड़ खा रहे थे। फिजा भी पूरी गीली थी और उसका भरा भरा और गुदाज़ बदन जब आसिफ के शरीर से टच हो रहा था तो आसिफ को एक अलग ही फीलिंग आ रही थी। उसके शरीर में गर्मी की लहरें दौड़ रही थीं, दिल की धड़कन तेज़ हो गई थी और एक अनजानी उत्तेजना उसके अंदर जाग रही थी। ऐसी फीलिंग जो उसने आज से पहले कभी महसूस नहीं की थी। उसको वो अहसास काफी खूबसूरत लग रहा था। फिजा की सांसें उसके गले के पास महसूस हो रही थीं, उसकी गीली चोटी उसके चेहरे को छू रही थी और हल्की सी बारिश की गंध उनके दोनों के बीच फैली हुई थी।
उधर फिजा की हालत भी कुछ ऐसी ही थी। उसके मन में भी शायद वही सब उथल पुथल चल रही थी जो आसिफ के मन में चल रही थी। आसिफ की मजबूत और मर्दाना बांहों में उसे भी वही मीठी मीठी और मदहोश कर देने वाली फीलिंग आ रही थी। उसकी पीठ पर आसिफ की हथेली का स्पर्श, उसकी चौड़ी छाती से लगने वाला दबाव और उनके गीले शरीर की गर्माहट एक नई सी अनुभूति दे रही थी। फिजा का चेहरा हल्का लाल हो गया था और वह अपनी आंखें बंद किए हुए थी ताकि वह इस अजीब लेकिन आकर्षक एहसास को और गहराई से महसूस कर सके।
फ्लैट के दरवाजे के बाहर पहुंच कर आसिफ ने किसी तरह बहुत ही मुश्किल से फिजा को सहारा देकर खड़ी होने में मदद की। उसके पैर अभी भी दर्द से कांप रहे थे। फिजा ने दीवार का सहारा लेकर अपने वजन को संभालने की कोशिश की। उसका पूरा शरीर अभी भी भीगा हुआ था और कपड़े त्वचा से चिपके हुए थे। इतने में ही आसिफ जल्दी से फ्लैट का लॉक खोलने लगा। उसकी उंगलियां थोड़ी कांप रही थीं क्योंकि अभी भी फिजा के शरीर की नरमाहट उसके दिमाग में घूम रही थी।
ताला खोलकर वो फिजा को सीधा बेडरूम में ले गया और उसको बेड पर लिटा दिया। फिजा पूरी तरह से भीग गयी थी। इस कारण से उसके सफेद रंग के टॉप में जो कि पूरा का पूरा गीला हो गया था उसके अंदर फिजा ने सफेद रंग की समीज पहनी हुई थी जो गीली होने के कारण उसके बदन से चिपक गयी थी। गीले कपड़ों के कारण उसका टॉप पारदर्शी सा हो गया था। उसकी चिपकी हुई समीज के अंदर से फिजा के मस्त से कसे हुए बूब्स और उसके चूचों पर तने हुए गुलाबी से निप्पल साफ साफ झलक रहे थे। निप्पल ठंड और उत्तेजना से सख्त होकर खड़े हो गए थे और कपड़े के ऊपर से स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। आसिफ भी तिरछी नजर से अपनी बहन के गुब्बारों को घूर रहा था। उसकी निगाहें बार बार उसकी उभरी हुई छाती पर रुक जाती थीं। वह अपने आप को रोकने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसकी आंखें बार बार वहीं चली जाती थीं।
जब फिजा ने देखा कि उसका भाई उसकी चूचियों को इस तरह से घूर रहा है तो वो बुरी तरह से शरमा गयी। उसका चेहरा गहरे लाल रंग का हो गया। उसने अपने दोनों हाथों से अपने बूब्स को छिपा लिया। उसके नरम हाथ उसकी छाती पर दब गए और उसने अपनी छाती को ढकने की कोशिश की। आसिफ भी ये सब देख रहा था। फिर उसने नजर हटा ली और वो अलमारी से तौलिया निकालने लगा। उसके मन में अभी भी वह दृश्य घूम रहा था।
तौलिया के साथ में उसने फिजा के कपड़े भी निकाल दिये। उसने फिजा की ओर कपड़े डाल दिये। फिजा बोली भाईजान मुझे सिर्फ मेरी मैक्सी दे दीजिये। मैं इन गीले कपड़ों के ऊपर से ही मैक्सी डाल कर अपने कपड़े चेंज कर लूंगी।
फिजा के कहने पर आसिफ ने अलमारी से उसकी मैक्सी निकाल कर दे दी। फिर वो रूम से बाहर निकल गया। कुछ देर के बाद वो आयोडेक्स लेकर आया। उसको बहन के पैर की मालिश करनी थी।
वो फिजा के पास बैठ कर उसके टखने पर बाम मलने लगा। आसिफ की उंगलियां धीरे धीरे उसके सूजे हुए टखने पर घूम रही थीं। बाम की ठंडी और मिट्टी जैसी खुशबू हवा में फैल गई थी। आसिफ के छूने से फिजा के बदन में हल्का सा सुरूर और गुदगुदी हो रही थी। हर बार जब उसकी उंगलियां उसके पैर की नाजुक त्वचा पर दबाव डालतीं तो फिजा के शरीर में एक मीठी सी कंपकंपी दौड़ जाती थी। तभी दोनों की नजरें मिल गयीं। उनकी नजर एक साथ टकराई तो फिजा शरमा गयी। उसकी पलकें झुक गईं और दिल की धड़कन बढ़ गई।
फिजा ने अपनी नजरें नीचे करके झुका लीं। आसिफ ने भी उसके टखने पर ध्यान दिया। फिजा पहली बार किसी लड़के के इतना करीब आई थी। अब वो कोई छोटी बच्ची नहीं रह गयी थी। उसकी खिलती जवानी में उसके यौनांगों में कुछ कुछ अब महसूस होने लगा था। उसके शरीर में एक नई तरह की गर्माहट और उत्तेजना जाग रही थी जिसे वह ठीक से समझ नहीं पा रही थी।
काफी देर तक आसिफ ने अपनी बहन के पैर की मालिश की। फिर वो किचन में गया और वहां से हल्दी मिला हुआ दूध लेकर आ गया। उसने वो दूध फिजा को पीने के लिए दिया।
आसिफ के प्यार भरे बर्ताव से वो काफी इम्प्रेस हो गयी। चार दिनों तक आसिफ ने अपनी बहन फिजा का काफी ध्यान रखा। उसने उसका पूरा खयाल रखा। उसको सुबह सुबह बाथरूम में लेकर जाना। उसको ब्रश वगैरह करवाना। ये सब करते हुए वो दोनों काफी करीब आ गये थे।

भले ही वो दोनों रिश्ते में एक दूसरे के भाई बहन लगते थे लेकिन वो दोनों थे तो विपरीत सेक्स वाले। विपरीत सेक्स में आकर्षण हो जाना तो आम सी बात है। मगर यहां पर देखने वाली बात ये भी थी कि प्यार को अक्सर अंधा कहा जाता है। प्यार को दिखाई नहीं देता कि कौन सी राह ठीक है और कौन सी नहीं।
जिस तरह से एक साथ में आग और तेल साथ सुरक्षित नहीं रह सकते इन दोनों के साथ रहने से दुर्घटना होने का खतरा हमेशा बना रहता है। आसिफ और फिजा के साथ भी ऐसा ही हो रहा था। दोनों के दिलों में एक दूसरे के लिए मोहब्बत की चिंगारी सुलग चुकी थी। दोनों के दिल में प्यार के दीये जल उठे थे। उनकी नजरों में अब पहले जैसी भोली भावना नहीं रही थी बल्कि एक गहरी चाहत और शारीरिक आकर्षण उभर आया था जो हर पल बढ़ता जा रहा था।
एक दिन ऐसे ही शाम को अचानक से मौसम बहुत खराब हो गया। देखते देखते ही तेज आंधी तूफान चलने लगा। साथ में ही बारिश भी आ गयी। रात के 9 बज रहे थे। मगर बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी। बाहर हवा की तेज सनसनाहट और बारिश की बौछार की आवाजें फ्लैट की खिड़कियों से अंदर आ रही थीं और कमरे में एक अजीब सी रोमांचक माहौल बना रही थीं।
फिजा उस वक्त किचन में खाना बना रही थी। उसको नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला है। वो अपनी मस्ती में खाना बनाने में व्यस्त थी कि एकदम से पावर कट हो गया। घर में पूरा अंधेरा हो गया। बाहर से भी कोई रोशनी नहीं आ रही थी। अंधेरे में उसकी सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं और वह हाथों को आगे बढ़ाकर रास्ता तलाश रही थी।
अंधेरा होने के कारण उसको कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। वह उजाला करने के लिए किचन से निकल कर बाहर आने लगी। वह इमरजेंसी लाइट ढूंढ रही थी। उसके पैर धीरे धीरे आगे बढ़ रहे थे और हाथ दीवार को टटोल रहे थे ताकि वह संतुलन बनाए रख सके।
अब यहां पर किस्मत का खेल देखिये कि उसी वक्त आसिफ बाथरूम में नहा रहा था। वहां भी अंधेरा हो गया तो वो कुछ देख नहीं पा रहा था। एक तरफ से फिजा अंधेरे में पैर जमाती हुई आगे बढ़ रही थी और दूसरी ओर से आसिफ बाथरूम से निकल कर बाहर आ रहा था। आसिफ का बदन अभी नहाकर ताजा था और उस पर सिर्फ एक तौलिया लिपटा हुआ था जो उसकी कमर पर कसकर बंधा था।
बीच में दोनों कहीं एक दूसरे से टकरा गये और फिजा नीचे गिरते गिरते बची क्योंकि आसिफ ने अपनी बांहों में उसको थाम लिया था। अगर उस वक्त आसिफ ने फिजा को थामा न होता तो उसको अंधेरे में काफी चोट लग सकती थी। उनकी छाती एक दूसरे से सट गई थी और फिजा का नरम बदन पूरी तरह से आसिफ की मजबूत बांहों में समा गया था।
मगर उस चोट से तो वो दोनों बच गये थे लेकिन अब चोट कहीं और लग गयी थी। बाहर की चोट की बजाय अब अंदर की चोट में दर्द होने लगा था। आसिफ की बांहों का सहारा पाकर फिजा के बदन में अलग ही लहरें दौड़ने लगीं। उसकी त्वचा पर गर्माहट फैल गई थी और उसके स्तन आसिफ की छाती से दबकर नरम रगड़ खा रहे थे।
उधर फिजा के बदन को छूने के बाद आसिफ भी बहकने लगा था। वो तो अभी नहाकर ही बाहर आया था। बाहर बारिश का मौसम और अंदर अंधेरे में दो जवान जिस्म एक साथ चिपके हुए आप सोच सकते हैं कि दोनों की हालत क्या हो रही होगी। आसिफ का दिल जोर जोर से धड़क रहा था और उसकी सांसें भारी हो गई थीं।
आसिफ के मुंह से निकला ओह्ह सॉरी। फिजा तुम्हें चोट तो नहीं लगी। वो बोली नहीं भाईजान मैं बिल्कुल ठीक हूं। आप ठीक हो ना। वो बोला हां मैं भी ठीक हूं।
फिर आसिफ ने कहा फिजा वैसे एक बात कहूं। वो बोली हां बोलिये न। आसिफ ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा जिसको कोई इतना चाहता हो उसको भला कैसे कुछ हो सकता है।
फिजा बोली कौन है वो खुशनसीब भाईजान। मुझे भी तो पता चले उसके बारे में। आसिफ ने कहा पागल तू ही तो है और कौन हो सकती है मेरी जिन्दगी में तेरे सिवाय। वो बोली धत्त भाईजान ये भी कोई बात है क्या आप भी न बस।
इतना बोल कर फिजा ने अपने सिर को आसिफ के चौड़े सीने पर रख दिया। ये सब इतना जल्दी में हुआ कि फिजा को संभलने का मौका नहीं मिला और वो अब आसिफ की बांहों में कैद हो गयी थी। आसिफ की मजबूत बांहें उसकी कमर को कसकर जकड़ चुकी थीं और उनकी सांसें एक दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।
आसिफ ने धीरे से फिजा के कानों के नीचे अपने होंठों को ले जाकर प्यार से फुसफुसाया फिजा आई लव यू। फिजा भी आहिस्ता से उसके सीने में अपने सिर को छिपाते हुए धीरे से बोली आई लव यू टू भाईजान।
फिजा की ओर से पॉजीटिव रेस्पोन्स मिलने पर आसिफ ने उसके चेहरे को ऊपर करते हुए अपने होंठों को उसके होंठों पर रख दिया और धीरे धीरे उन दोनों के बीच में लिप-लॉक और किसिंग शुरू हो गयी। आसिफ के नरम लेकिन गर्म होंठ फिजा के होंठों को धीरे से चूसने लगे। उसने अपना ऊपरी होंठ उसके निचले होंठ के बीच में दबाया और फिर अपनी जीभ को धीरे से उसके होंठों के बीच सरकाकर उसके मुंह के अंदर घुसा दिया। फिजा की जीभ भी उसके साथ उलझ गई और दोनों की जीभें एक दूसरे को चाटने लगीं। उनके मुंह से हल्की सी चूचने की आवाजें निकल रही थीं और लार की गर्माहट उनके होंठों को और भी गीला बना रही थी।
आसिफ के साथ लिप लॉक होने से पहले फिजा बस इतना ही बोल सकी ओह्ह भाईजान ऐसा मत कीजिये ये गुनाह है। ऐसा मत कीजिये। आसिफ ने एक हाथ से फिजा के बूब्स को दबाते हुए बोला नहीं फिजा आज मुझे मत रोको। आज वो सब कुछ हो जाने दो मैं अब तुमसे दूरी को बर्दाश्त नहीं कर सकता हूं।
अपने भाई के मर्दाना जिस्म की गर्मी के दायरे में आने के बाद फिजा का बदन भी पिघलने लगा था। वो हकलाने लगी थी और हकलाते हुए बोली भाईजान प्यार तो मैं भी आपसे बहुत करती हूं। मगर मैं इस बात को लेकर सोच रही हूं कि मां और पापा क्या कहेंगे।
आसिफ ने कहा तुम घबराओ नहीं। मैं उन्हें समझा दूंगा। ये कह कर फिजा को उसने गोद में उठाये हुए ही अंधेरे में ही अपने कदमों को अपने बेडरूम की ओर बढ़ा दिया। फिजा अपने भाई की मजबूत बांहों में चिपकी हुई थी। उसकी छाती आसिफ की छाती से लगातार रगड़ खा रही थी और उसके निप्पल उत्तेजना से सख्त होकर खड़े हो गए थे।
दो दिन पहले ही फिजा पीरियड से फारिग हुई थी। उसकी भी सेक्स की ख्वाहिश भड़क उठी थी। आसिफ ने उसे पलंग पर बैठा दिया। उसके बाद उसने फिजा के कपड़े एक एक करके उतार दिये। पहले उसने फिजा की मैक्सी को ऊपर से खींचकर उतारा फिर उसकी समीज को सिर के ऊपर से निकाला। फिजा की गोल और भरी हुई चूचियां अब पूरी तरह खुले में थीं। फिर आसिफ ने उसकी पैंटी को भी धीरे से नीचे सरकाकर उतार दिया। फिजा का बदन अब नंगा था और वो अपने भाई के हवाले थी।
आसिफ ने अपनी बहन की गोल गोल कसी हुई चूचियों को अपने हाथों में भर कर उनको दबाना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियां नरम मांस को गहरे से दबा रही थीं और हर दबाव के साथ फिजा के मुंह से हल्की सी आह निकल रही थी। फिर वो अपनी बहन की चूचियों का रसपान करने लगा। उसने पहले बाएं निप्पल को मुंह में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगा। उसकी जीभ निप्पल के चारों ओर घूम रही थी और कभी कभी हल्के से काट भी रही थी। फिर उसने दाएं निप्पल को भी वैसा ही सताया। फिजा की छाती ऊपर नीचे हो रही थी और उसके निप्पल पूरी तरह से सख्त और लाल हो गए थे।
इधर अंदर इन दोनों के जिस्म में चाहत और वासना का तूफान उठा हुआ था और बाहर मौसम का तूफान भी थमने की बजाय और तेज हो रहा था। दो जिस्म अब मिलन के लिए मचल रहे थे। आसिफ फिजा के पूरे बदन पर चूम रहा था। कभी उसकी चूचियों मसल रहा था तो कभी उसके पेट पर चूम रहा था। कभी उसके होंठों को पी रहा था और कभी उसके कानों पर दांतों से काट रहा था। उसके होंठ फिजा की गर्दन पर घूमे फिर उसकी नाभि पर रुके और फिर नीचे की ओर बढ़ने लगे।
आसिफ अब बेकाबू होता जा रहा था। अब उसने फिजा की दोनों टांगों को फैला दिया था और भाई के होंठ बहन की चूत पर जाकर ठहर गये। उसने पहले अपनी जीभ से फिजा की चूत की बाहरी पलकों को चाटा। फिजा की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी और उसमें से पारदर्शी रस बह रहा था। आसिफ ने अपनी जीभ को उसके क्लिटोरिस पर घुमाया और फिर जोर जोर से चूसने लगा। जैसे ही उसकी चूत पर आसिफ के होंठ लगे तो फिजा ने उसके सिर को अपनी चूत पर दबा दिया। आसिफ की जीभ अब फिजा की चूत के अंदर तक घुस रही थी और वह रस को चूस चूस कर पी रहा था।
फिजा अब बुरी तरह से मचलने लगी और आसिफ उसकी चूत का रस खींच खींच कर बाहर निकालने लगा। इधर फिजा ने आसिफ के बालों को पकड़ लिया और दूसरे हाथ से बेड के बिछौने को नोंचने लगी। उसके शरीर में कंपकंपी दौड़ रही थी और उसकी जांघें कांप रही थीं।
आसिफ के होंठों के प्रहार को फिजा की चूत झेल नहीं पा रही थी। उसके मुंह से सहसा ही निकलने लगा आह्ह भाईजान प्लीज मुझे थाम लीजिये ओह्हह मैं गिर जाऊंगी।

इतना बोलते ही फिजा के शरीर में झटके लगने शुरू हो गये। उसके पूरे बदन में अचानक तेज कंपकंपी छा गई और उसकी जांघों की मांसपेशियां अनियंत्रित रूप से सिकुड़ने लगीं। उसने कस कर आसिफ के मजबूत बाजुओं को पकड़ लिया। उसके नाखून आसिफ की बांहों की त्वचा में गहरे गड़ गए थे और उसकी उंगलियां उसके मांसपेशियों को कसकर जकड़ रही थीं। उसकी चूत से पहला स्खलन होने लगा। उसकी चूत की दीवारें जोर जोर से सिकुड़ रही थीं और उसमें से ढेर सारा गर्म पारदर्शी चिपचिपा पानी निकल आया जो आसिफ की जीभ पर बह रहा था उसके होंठों को गीला कर रहा था और ठोड़ी से नीचे टपक कर बेडशीट को भी भिगो रहा था। फिजा की सांसें तेज और उथली हो गई थीं उसके मुंह से लगातार आह्ह ओह्ह भाईजान की सिसकारियां निकल रही थीं और उसका पूरा शरीर बार बार झटके खा रहा था। आसिफ ने जान बूझ कर उसे झड़ने दिया। वह अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर घुमाता रहा उसके क्लिटोरिस को जोर जोर से चूसता रहा और सारा रस चूस चूस कर पीता रहा ताकि उसका ऑर्गेज्म पूरी तरह से पूरा हो सके। उसे पता था कि अब दूसरी बार जब उसकी चूत में लंड जाएगा तो उसको चोदने का असली मजा आएगा। इससे फिजा को भी चूत में तकलीफ नहीं होगी और लंड आसानी से प्रवेश कर जाएगा।
स्खलन के बाद फिजा सुस्त होकर बेड पर लेट गयी। उसका बदन पसीने से तर था छाती तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी और चूत से अभी भी हल्की हल्की धार निकल रही थी। लगभग आधे घंटे तक वो दोनों चुपचाप लेटे रहे। आसिफ उसको पूरा आराम देकर सहज करना चाह रहा था। वह उसके माथे पर प्यार से हाथ फेरता रहा कभी उसके बालों में उंगलियां घुमाता रहा और उसके गालों को हल्के से सहलाता रहा। आराम करने के बाद अब आसिफ ने फिर से फिजा के जिस्म को छेड़ना शुरू कर दिया। उसने अपनी उंगलियों को उसकी गर्दन से शुरू करके निप्पलों पेट और जांघों पर धीरे धीरे घुमाना शुरू किया फिर हल्के से चूमने और काटने लगा।
बीस मिनट तक वो उसके बदन को छेड़ता रहा। उसको सहलाता रहा। उसके बाद उसने फिजा की दोनों टांगों को फैला कर फिर से मोर्चा संभाल लिया। इस बार आसिफ ने अपने लंड को चूत की दरार के बीच में एडजस्ट कर दिया। उसका मोटा सख्त और गर्म लंड फिजा की गीली चूत की बाहरी पलकों को दबा रहा था और हल्का हल्का रगड़ खा रहा था। अब वो अपने लंड को उसकी चूत पर अप और डाउन करते हुए उसकी चूत पर रगड़ने लगा। लंड की नोक बार बार उसके क्लिटोरिस को छू रही थी जिससे फिजा के शरीर में फिर से उत्तेजना की लहरें दौड़ने लगीं। कुछ ही देर में फिजा दोबारा से गर्म हो गयी। उसके मुंह से अब कामुक सिसकारियां निकलने लगीं आह्ह उफ्फ भाईजान अब कर दीजिये।
आसिफ भी अब ताव में आ चुका था। उसने बहन की चूत के नीचे लंड को सेट करके धक्का लगाया तो फिजा की चीख निकल गयी बाप रे मर गयी रे ओह्ह नहीं भाईजान प्लीज मत डालिये बहुत दर्द हो रहा है। फिजा की चूत बिल्कुल सील पैक थी। 5-6 बार कोशिश करने के बाद भी उसकी चूत में लंड अंदर घुसाने में आसिफ कामयाब नहीं हो पा रहा था। हर धक्के पर फिजा दर्द से कराहती और उसका बदन तन जाता था। जब उसको कोई रास्ता नहीं सूझा तो उसने तेल की बोतल ली और अपने लंड और अपनी बहन की चूत पर नारियल तेल से चिकना कर लिया। तेल की ठंडी चिकनी महक कमरे में फैल गई उसने भरपूर मात्रा में तेल लगाया ताकि घर्षण कम हो और लंड आसानी से अंदर जा सके।
अब वो दोबारा से मोर्चे पर आ गया। उसने फिजा की टांगों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर फैला दिया और मोड़ दिया इससे फिजा की चूत की दरार पूरी तरह खुल गयी। फिर उसने उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने लंड को उसकी चूत पर सेट कर दिया। लंड की नोक अब पूरी तरह चूत के छेद पर टिकी हुई थी। लंड को सेट करने के बाद उसने लंड को अंदर धकेला तो कच्च की आवाज के साथ उसका लंड फिजा की चूत को फाड़ता हुआ उसकी चूत में घुस गया। इससे पहले की फिजा की चीख निकलती उससे पहले ही आसिफ ने उसके मुंह को अपनी हथेली से दबा लिया। इससे उसकी चीख अंदर ही दब कर रह गयी। फिजा दर्द से बिलबिला उठी थी। उसकी आंखों से दर्द के मारे पानी निकलने लगा था। इधर आसिफ को परेशानी हो रही थी। उसको ऐसा लग रहा था जैसे उसने अपने लंड को एक रबर बैंड वाले छल्ले के छोटे से छेद में घुसाया हो और उस छल्ले ने उसके लंड को चारों तरफ से जकड़ लिया हो। उसको ऐसा लग रहा था जैसे उसकी चूत का छेद उसके लंड को अंदर खींच रहा था।
उसके बाद वो धक्के देने लगा। इंच दर इंच उसका लंड फिजा की चूत में घुसता जा रहा था। पहले धक्के में 2 इंच दूसरे में 4 इंच फिर 6 इंच और फिर 8 इंच और अंत में एक और जोरदार धक्के के साथ 9.5 इंच तक उसने अपना लंड उसकी चूत में पूरा घुसा दिया। हर धक्के के साथ फिजा की चूत की दीवारें फैल रही थीं और तेल की चिकनाहट के कारण लंड आसानी से अंदर जा रहा था। इतने में ही आसिफ के फोन का रिंगटोन बजने लगा दूरी ना रहे बाकी तुम इतने करीब आओ कि तुम मुझ में समा जाओ मैं तुम में समा जाऊं।
अब आसिफ धीरे धीरे अपने धक्कों की रफ्तार को बढ़ा रहा था। फिजा के मुंह से जोर जोर से दर्द भरी सिसकारियां निकल रही थीं। बाहर अभी भी तूफानी बारिश जारी थी। अंदर फ्लैट में सुनामी आई हुई थी। आसिफ अब तूफान मेल बन चुका था हच हच फच-फच करते हुए अपनी बहन की जबरदस्त चुदाई कर रहा था। हर धक्के के साथ उसके लंड की गेंदें फिजा की चूत के नीचे जोर से टकरा रही थीं कमरे में चुदाई की फच फच की आवाजें गूंज रही थीं और उनके शरीर पसीने से चिपक रहे थे। लगभग 20 मिनट तक उसकी चूत की जबरदस्त चुदाई चली। तभी फिजा फिर से बोल उठी हाय ओह्ह मुझे संभालिये भाईजान मैं गिर रही हूं। ये कहते हुए उसने आसिफ के कंधे और सीने पर कई जगह अपने दांत गड़ा दिये।
साथ ही उसने दोनों टांगों को आसिफ की कमर में कैंची की तरह फँसा दिया. इस तरह वो चुदाई की चरम सीमा में पहुंच गयी और 7-8 झटके देते हुए जोर जोर से झड़ गयी।

उस रात को उन दोनों के बीच में 3 बार जम कर चुदाई हुई. सुबह 7 बजे आसिफ की नींद खुली तो उसने पाया कि बेडशीट पर जगह जगह खूने के दाग हो गये थे. फिजा की चूत सूज कर कचौरी बन गयी थी. वो अपना मुंह छुपाये हुए रो रही थी. उसकी इज्जत की उस रात में धज्जियां उड़ गयी थीं.

फिजा को रोते हुए देख कर वो उसे तसल्ली देने लगा. वो बोला घबराओ नहीं कुछ नहीं होगा. अब तुम्हारी सारी जिम्मेवारी मेरी है. जब तुमने अपना सब कुछ मुझे सौंप दिया है तो अब मैं तुम पर कोई आंच नहीं आने दूंगा.

धीरे धीरे बीतते दिनों के साथ सब कुछ नॉर्मल होता गया. अब फिजा अपने भाई आसिफ के साथ ही सोने लगी थी. वो दोनों बिल्कुल ऐसे रहने लगे जैसे शौहर और बीवी रहते हैं.

संडे के दिन हर बार दिन में 3-4 राउंड चुदाई के होने लगे थे. दोनों को सेफ्टी और प्रोटेक्शन का जरा भी ध्यान नहीं था. महीना पूरा होते होते फिजा का जिस्म काफी भर गया था. उसके चूतड़ चौड़े और भारी हो गये थे.

उसके दोनों बूब्स भी काफी हद तक बड़े हो चुके थे. अब उसको जीन्स और टीशर्ट टाइट होने लगी थी. उन दोनों को होश तब आया जब अगले महीने में फिजा का पीरियड मिस हो गया.

उसने यूरीन टेस्ट कराया तो उसमें प्रेगनेंसी का टैस्ट पॉजीटिव आया. आसिफ को मालूम चला तो घबराने की बजाय वो उल्टा खुश हो गया. खुश होकर वो बोला आई लव यू मेरी जान तुमने इतनी जल्दी मुझे अपने बच्चे का बाप और मामा बना दिया.

ये सब होने के तीने महीने के बाद ईद की छुट्टी पर दोनों भाई बहन अपने घर गये. जब फिजा की दादी ने उसके जिस्म को देखा तो उसको कुछ शक सा हुआ.

उसकी दादी ने फिजा से पूछा साफ साफ बताओ क्या बात है. दोनों ने ही अपने बीच हुई बात को एक्सेप्ट कर लिया. आसिफ ने घर वालों को खुल कर बता दिया. उसने कहा कि इसमें फिजा की कोई गलती नहीं है. ये बच्चा जो इसके पेट में है वो बच्चा हम दोनों का ही है.

इस बात पर घर में बहुत हंगामा हुआ. वो लोग मानने को तैयार ही नहीं थे कि भाई बहन आपस में मिल कर बच्चा पैदा कैसे कर सकते हैं. जफर साहब भी काफी गुस्सा हो गये.

जफर साहब ने उन दोनों को घर से निकाल देने का फैसला कर लिया. मगर दादी नहीं चाहती थी कि उसके पोता-पोती घर छोड़ कर जायें. उसने अपने बेटे जफर को किसी तरह से समझा दिया. उसने बड़ी ही होशियारी से मामले को निपटा दिया.

अब घरवालों ने फिजा को अपने एक दूर के रिश्तेदार के यहां कानपुर में भेज दिया. फिजा कानपुर में 9 महीने तक रही. उसके बाद उसने वहीं पर जुड़वा बच्चों को जन्म दिया. धीरे धीरे सब कुछ नॉर्मल होता चला गया.

आसिफ की जॉब मुम्बई में माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में लग गयी थी. वो फिजा और दोनों बच्चों को लेकर मुंबई में चला गया और वहीं पर रहने लगा. जफर साहब और उनकी बीवी ने दोनों को माफ कर दिया. एक महीने के लिए वो अपने पोते पोती-कम-नाती नातिन और बेटे बेटी-कम बहू दामाद के पास आकर रहने लगे.

इस तरह से अब यह एक हैप्पी फैमिली बन गयी थी. मगर ये कहानी की हैप्पी एन्डिंग नहीं थी. जफर साहब अभी केवल 48 साल के थे. उनकी नजर अब अपनी ही बेटी फिजा की भरपूर जवानी पर फिसलने लगी थी.

फिजा की बड़ी बड़ी गोल चूचियां उसका भरा बदन और उसके गुदाज चूतड़ और बड़ी बड़ी सुडौल चूचियों को देख कर जफर साहब का लंड फिर से जवान हो जाता था.

जब फिजा चलती थी जफर साहब की नजर अपनी बेटी की मोटी मोटी सुडौल चूचियों को उछलते हुए देख कर ललचा जाती थी. भले ही फिजा उनकी सगी बेटी थी लेकिन वो एकदम से गोरी और कमाल की माल हो गयी थी. आसिफ ने चोद चोद कर उसके हुस्न को और निखार दिया था. अब इसी निखार की चमक जफर साहब की आँखों को भी चुभने लगी थी और वो अपनी बेटी की चुदाई की फिराक में रहने लगे थे.

इत्तेफाक से उनको ये मौका मिल भी गया. इस बार ये हुआ कि माइक्रोसॉफ्ट कंपनी ने आसिफ को तीन महीने के लिए ट्रेनिंग के लिए अमेरिका में भेज दिया.

बस फिर क्या था. जफर साहब के पास इससे अच्छा मौका कहां हो सकता था. उन्होंने अपनी बेगम को साफ साफ शब्दों में अपना इरादा बता दिया कि किसी तरह फिजा की चूत का जुगाड़ करवाओ. मगर किसी तरह का हंगामा नहीं होना चाहिए.

आसिफ के जाने के दूसरे दिन के बाद ही जफर साहब ने अपनी बीवी को कहा कि वो दोनों बच्चों को अपने साथ में सुला ले. बीवी ने वैसा ही किया. फिजा के कानों में बात पहले ही डाल दी गयी थी.

जफर साहब अपनी मजबूत बांहों का प्रयोग करते हुए फिजा को उठा कर अपने कमरे में ले गये. उस रात उन्होंने चार बार अपनी बेटी की जम कर चुदाई की. चूत चुदाई के साथ ही उन्होंने फिजा की गांड चोदने का भी भरपूर मजा लिया.

फिजा के बारे में जफर साहब अच्छी तरह जानते थे कि वो लम्बी रेस की घोड़ी है. इसलिए पहली ही रात को उन्होंने अपना लोहा मनवा लिया. उन्होंने अपने 8 इंची हथियार से फिजा की चूत का रेशा रेशा हिला कर बिल्कुल ढीला कर दिया.

अब धीरे धीरे वो भी बिल्कुल खुल कर अपने पिता के लंड से अपनी चुदाई करवाने लगी. 7 इंची की जगह अब उसको 8 इंची लंड मिल गया था. वैसे भी बाप तो आखिर बाप ही होता है. भाई के लंड में उतना दम कहां जो अपने अब्बू के लंड में उसको दिखाई दे रहा था.

एक महीने तक लगातार चुदवाने के बाद फिजा एक बार फिर से प्रेग्नेंट हो गयी. घर में फिर से खुशियां आ गयीं. मगर इस बार खुशी किसी और के खाते में आई थी. इसलिए अबकी बार आसिफ को अपने पिता के साथ समझौता करना पड़ा.

समझौता एक्सप्रेस दौड़ी और दोनों पार्टियों के बीच में सुलह हो गयी. पिछली बार पिता ने कॉम्प्रोमाइज किया था और अबकी बार कॉम्प्रोमाइज करने की बारी बेटे की थी.

उसके ठीक 9 महीने के बाद फिजा जफर साहब के बच्चे की अम्मी बन गयी. एक बार फिर से घर बच्चे की किलकारियों से गूंज उठा. अब फिजा अपने अब्बू जफर साहब से भी बहुत खुश थी. उसकी खुशी के दो कारण थे. एक तो उसके पास अब एक और औलाद हो गयी थी. दूसरा ये कि जफर साहब अपने बेटे यानि कि फिजा के पति आसिफ से सेक्स के मामले में ज्यादा तजुरबेदार थे.

तो दोस्तो आप लोगों को ये कहानी कैसी लगी. ये कहानी लिखने का मेरा मकसद भी आप लोगों को समझ में आ गया होगा. आजकल के जमाने में ये जो लव आजकल चल रहा है इसके बारे में कुछ भी निश्चित नहीं है. इसलिए युवाओं को काफी सोच समझ कर आगे कदम बढ़ाना चाहिए. समाप्त

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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