Didi ki chudai sex story, Group chudai sex story, Bhai behen group sex story: हेलो दोस्तो. मेरा नाम नरेश है आज मैं आपको मेरे पूजा दीदी के ग्रूप चुदाई की कहानी बताने वाला हू. पूजा दीदी की हाइट 5.6 फीट है. उनके बूब्स इतने बड़े और भरे हुए हैं कि उनकी टाइट ब्लाउज में वे हमेशा उभरे रहते हैं, निप्पल्स की आकृति कपड़े के ऊपर से भी साफ दिखाई देती है. उनकी कमर बेहद पतली और कसी हुई है, जो उनके चौड़े हिप्स और गोल-मटोल गांड के साथ मिलकर एक परफेक्ट घंटी जैसी शेप बनाती है. और उनकी गांड तो ऐसी थी कि जब वो चलती थी तो हर कदम पर दोनों गाल हिलते हुए ऊपर-नीचे होते थे, इतने मुलायम और भारी कि मुहल्ले के सारे लड़कों का लंड तुरंत खड़ा हो जाता था, कई बार तो वे रास्ते में रुककर सिर्फ उसी को देखते रहते थे.
शादी के बाद दीदी पुणे में अपने सास-ससुर के साथ रहती थी. जीजा जी काम के सिलसिले में गुजरात में रहते थे और महीने में सिर्फ एक बार ही आते थे, वो भी दो-चार दिन के लिए.
अब मैं सीधा स्टोरी पे आ जाता हू. तो बात उस दिन की है जब मेरा MBA खत्म हुआ तो जॉब सर्चिंग के लिए मैं पुणे गया तो दीदी के यहां ही रहने लगा.
दिनभर मैं जॉब के लिए इंटरव्यू देता और रात में घर पर आ जाता. एक रात करीब दो बजे मुझे प्यास लगी तो मैं पानी पीने उठा. जैसे ही मैं किचन की तरफ जा रहा था, दीदी के रूम से हल्की-हल्की सिसकारियां और गीली चटकार की आवाजें आने लगीं. मैंने चुपके से दरवाजे की जरा-सी खुली चूक से झांककर देखा तो दीदी बेड पर पूरी तरह नंगी लेटी हुई थीं. उनकी दोनों टांगें फैली हुई थीं और दायां हाथ उनकी चूत पर था जबकि बायां हाथ उनके एक बड़े बूब को मसल रहा था. उनकी उंगलियां चूत की गीली-गीली सिलवटों को अलग-अलग कर रही थीं, क्लिटोरिस को बीच-बीच में गोल-गोल घुमा रही थीं और हर बार तेज सिसकारी के साथ उनका पूरा शरीर कांप उठता था. फोन उनके कान से लगा हुआ था और वे किसी से धीमी, सेक्सी आवाज में बात कर रही थीं, “हां मनोज… और जोर से… मेरी चूत में अपनी उंगली डालो ना…” उनकी सांसें तेज चल रही थीं, बूब्स ऊपर-नीचे हो रहे थे और निप्पल्स सख्त होकर खड़े थे. धीमी लाइट में उनके पसीने से चमकते हुए बूब्स ऐसे लग रहे थे जैसे कोई ताजा दूध से भरी मटकी हों, इतने गोरे और मुलायम कि मैं मन ही मन सोचने लगा कि अगर मैं अभी अंदर जाऊं तो उन्हें पलंग पर पटककर जोर-जोर से चोद डालूं, उनकी चूत में अपना पूरा लंड एक झटके में घुसेड़ दूं.
थोड़ी देर बाद दीदी ने अपनी दो उंगलियां चूत के अंदर तक डाल लीं और तेज-तेज अंदर-बाहर करने लगीं. उनकी चूत से चिकचिक की आवाज आने लगी, गीला रस उनकी उंगलियों पर चमक रहा था और बेडशीट पर छोटे-छोटे धब्बे बन रहे थे. वे अब जोर-जोर से सिसकार रही थीं, “आह्ह… मनोज… चोदो मुझे… मेरी चूत फाड़ दो…” उनका पूरा शरीर ऐंठ रहा था, कमर ऊपर उठ रही थी और गांड तकिया पर रगड़ रही थी. अचानक उनकी सांसें बहुत तेज हो गईं, टांगें कसकर बंद हो गईं, उंगलियां चूत के अंदर गहरे तक रुक गईं और पूरा शरीर एक झटके के साथ कांप उठा. वे जोर से कराहकर शांत हो गईं, उनकी सांसें धीमी पड़ गईं और हाथ चूत पर ही पड़ा रह गया, जहां से अभी भी हल्का-हल्का रस टपक रहा था.
फिर मैं चुपचाप अपने रूम में वापस आ गया और बिस्तर पर लेटकर दीदी के नंगे बदन की याद में अपना लंड पकड़ लिया. मैंने उसे जोर-जोर से मुठ मारना शुरू किया, दीदी की चूत और बूब्स की कल्पना करके कुछ ही मिनटों में अपना पूरा गर्म वीर्य बाहर निकाल दिया और फिर थककर सो गया.
दूसरे दिन मैंने मौका देखकर दीदी का मोबाइल चेक किया तो उसके गैलरी में उनके ढेर सारे नंगे फोटोस थे. एक में वे चारों हाथ-पैर फैलाकर लेटी थीं, चूत पूरी खुली हुई, दूसरी में वे घुटनों के बल बैठकर अपनी गांड को कैमरे की तरफ करके मुस्कुरा रही थीं, तीसरी में वे अपने दोनों बूब्स को दबाकर निप्पल्स को चाट रही थीं. हर फोटो देखते ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मैंने बाथरूम में जाकर फिर से जोरदार मुठ मार ली.
4-5 दिन मैंने कुछ नहीं बोला और चुपचाप सब देखता रहा. फिर एक दिन दीदी के सास-ससुर किसी शादी के लिए दो दिन के लिए बाहर चले गए थे.
तो दोपहर में खाना खाने के बाद मैंने मन में प्लान बना लिया कि आज दीदी से सब पूछ ही लेता हूं.
तो फिर मैंने दीदी को दोपहर में डायरेक्ट पूछ लिया कि ये सब नंगी फोटोस तुम किसको भेजती हो?
दीदी घबरा गईं और उनकी आंखें भर आईं, वे फूट-फूटकर रोने लगीं. वे कहने लगीं कि किसी को बताना मत, प्लीज.
लेकिन मैंने उन्हें विश्वास दिलाया कि मुझे इस अफेयर से कोई प्रॉब्लम नहीं है, मैं बस जानना चाहता हूं.
तो दीदी ने हिचकते हुए बताया कि वो एक जिम ट्रेनर है, उसका नाम मनोज है. फिर दीदी ने बताया कि दो साल से उनका अफेयर चल रहा है.
मैंने भी उस पर कोई ऐतराज नहीं जताया और उनका अफेयर चलने दिया. क्योंकि उसमें मेरा ही स्वार्थ था.
धीरे-धीरे मनोज के साथ मैं भी बातें करने लगा. हमारी अच्छी दोस्ती हो गई थी. हम तीनों एकदम घुलमिल गए.
एक दिन मैंने मनोज को बोला कि मैं पूजा दीदी और तुम्हारी चुदाई देखना चाहता हूं.
तो मनोज ने पहले मना कर दिया लेकिन बाद में वो तैयार हो गया और बोला कि उससे अच्छा आइडिया उसके दिमाग में है. मनोज ने कहा कि उसके तीन दोस्त हैं जो तेरी दीदी को चोदना चाहते हैं. मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं थी पर दीदी मानेगी या नहीं, इस बात का विश्वास नहीं था.
तो मनोज ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है. तेरी दीदी मेरे पांच-छह दोस्तों के साथ पहले ही सो चुकी है. मैं तो पूरी तरह शॉक हो गया.
फिर मैं भी राजी हो गया.
और हम प्लान बनाने लगे.
मनोज के दोस्त का लोनावाला फार्महाउस था, वहां पर सब अडजस्टमेंट कराई गई.
दीदी को लेकर मैं लोनावाला निकला.
हम वहां पहुंचे तो वहां मनोज के साथ उसके नौ फ्रेंड मौजूद थे. मैं घबरा गया.
पर दीदी बोली कि इतने सारे लंड लेने में मजा आएगा मुझे.
सबने अपने-अपने कपड़े निकाल फेंके. सब पूरी तरह नंगे हो गए. और दीदी के सामने उनके लंड और भी सख्त होकर खड़े होने लगे, कुछ के तो नसें फूली हुई दिख रही थीं और सुपारी चमक रही थी.
लेकिन मनोज ने सबको रोका और कहा कि नहीं. आज ओपनिंग तो नरेश यानी कि मैं करेगा. मैं चौंक गया. मनोज बोला कि टेंशन मत ले, ये प्लान तेरी दीदी का ही है.
दीदी को देखा तो वो पूरी तरह नंगी होकर हंस रही थी, उसके बड़े-बड़े बूब्स हिल रहे थे और निप्पल्स सख्त होकर खड़े थे.
और बोली कि शर्मा मत भाई, तू भी एंजॉय कर ले. चख ले जवानी मेरी. और उसने मेरी पैंट की बेल्ट खोलकर मेरी पैंट और अंडरवियर दोनों एक साथ नीचे खींच दी.
मेरा लंड पहले से ही टाइट होकर खड़ा था, सुपारी लाल हो चुकी थी और उस पर पहले से ही प्रीकम की चमक थी. मेरा लंड देखकर दीदी की हवस भरी नजर और खिल गई. उसने तुरंत मेरे लंड को अपने मुलायम हाथ में पकड़ा, उसे सहलाया और फिर मुंह में ले लिया.
दीदी ने मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू किया. पहले उसने जीभ से सुपारी को गोल-गोल घुमाया, फिर धीरे-धीरे पूरे लंड को मुंह में अंदर तक ले लिया, गले तक पहुंचाकर चूसने लगी. उसकी जीभ नीचे से ऊपर तक लिक करती हुई चल रही थी, और हर बार जब वो सुपारी को चूसती तो चटकार की आवाज आती थी. मैं सिहर रहा था, मेरी कमर खुद-ब-खुद आगे-पीछे होने लगी.
मैं भी फिर दीदी के बूब्स दबाने लगा. दोनों हाथों से उनके भारी बूब्स को मसल रहा था, निप्पल्स को अंगूठे और तर्जनी से पकड़कर खींच रहा था, फिर उन्हें चुटकी काट रहा था. दीदी के मुंह से मेरे लंड के साथ-साथ सिसकारियां निकल रही थीं.
फिर मैंने दीदी को बेड पर लिटाया. उसकी टांगें फैलाकर मैंने अपनी जीभ उसकी गरम-गरम चूत पर रखी. पहले मैंने क्लिटोरिस को जीभ की नोक से छुआ, फिर गोल-गोल घुमाया. दीदी की चूत पहले से ही गीली थी, उसका रस मेरी जीभ पर चिपक रहा था. मैंने जीभ अंदर डाली और चूत की दीवारों को चाटा, फिर क्लिटोरिस को होंठों से पकड़कर चूसा. दीदी आह्ह… आअह्ह… आअह्ह… करने लगी, उसकी कमर ऊपर उठ रही थी और हाथ मेरे सिर को दबा रहे थे.
और कहने लगी कि चोद दो अपनी रंडी बहन को.
मैंने उससे पूछा कि कॉन्डम लगा के चोदूं या वैसे ही. तो दीदी बोली कि तेरा लंड तो वैसे ही अच्छा लगेगा. चोद दो वैसे ही.
फिर मैंने अपना लंड दीदी की चूत पर रखा, सुपारी को उसके गीले होंठों पर रगड़ा और फिर एक जोरदार झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया. दीदी जोर से चिल्लाई, “आआआह्ह्ह… कितना मोटा है तेरा…” उसकी चूत बहुत टाइट थी, मेरे लंड को चारों तरफ से जकड़ रही थी, गर्म और गीली.
हमारी चुदाई वो सब देख रहे थे और अपना-अपना लंड मसल रहे थे, कुछ के लंड से प्रीकम टपक रहा था.
मैं झटके लगाता गया, पहले धीरे-धीरे फिर तेज-तेज. हर झटके में मेरा लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था, चूत से चिकचिक की आवाज आ रही थी और दीदी की सिसकारियां बढ़ती जा रही थीं. उसकी चूत मेरे लंड पर कस रही थी, मैं उसके बूब्स दबाता रहा और कमर पकड़कर और जोर से धक्के मारता रहा.
कुछ ही देर में मेरा पानी निकल गया. मैंने जोर से कराहते हुए अपना पूरा गर्म वीर्य दीदी की चूत के अंदर ही छोड़ दिया. मेरे लंड की हर धड़कन के साथ वीर्य की धार निकल रही थी, दीदी की चूत उसे पूरा सोख रही थी और वो भी कांप रही थी.
मेरा होते ही बाकी सब लोग दीदी के ऊपर चढ़ गए। भूखे कुत्तों की तरह वे सब दीदी को रगड़ने लगे, उनकी जीभें और हाथ हर जगह घूमने लगे। दीदी तड़प रही थी, उसका पूरा बदन कांप रहा था, और उसकी सांसें तेज़ और भारी हो चुकी थीं।
दो लड़के तुरंत दीदी के मुँह में अपने लंड ठूँसने लगे। एक ने दीदी के होंठों को जबरदस्ती खोला और अपना मोटा, सख्त लंड अंदर डाल दिया, जबकि दूसरा उसके गाल पर थप्पड़ मारते हुए अपना लंड भी जबरदस्ती मुंह में घुसेड़ रहा था। दोनों एक साथ धक्के मार रहे थे, दीदी का मुंह पूरी तरह भरा हुआ था, उसकी लार उनके लंडों पर बह रही थी और गले तक जाती हुई आवाज़ें निकल रही थीं।
दो अन्य लड़के दीदी के दोनों बूब्स को जोर-जोर से दबा रहे थे। उनकी उंगलियां निप्पल्स को पिंच कर रही थीं, उन्हें खींच रही थीं, और फिर पूरी हथेलियों से बूब्स को मसल रहे थे जैसे आटा गूंथ रहे हों। दीदी के स्तन लाल हो चुके थे, और दबाव से उन पर उंगलियों के निशान पड़ गए थे।
मनोज और उसके दो अन्य दोस्त दीदी की चूत और गांड को सहला रहे थे। मनोज की दो उंगलियां पहले से ही दीदी की गीली चूत के अंदर थीं, वे तेज़ी से अंदर-बाहर हो रही थीं, जबकि उसका अंगूठा क्लिटोरिस पर गोल-गोल घूम रहा था। एक लड़के ने दीदी की गांड के छेद पर थूक लगाया और अपनी मोटी उंगली धीरे-धीरे अंदर डाल दी, फिर दूसरी उंगली भी जोड़ दी। दीदी का पूरा निचला हिस्सा अब पूरी तरह गीला और चिपचिपा हो चुका था।
फिर एक लड़का बेड पर लेट गया, उसने अपना लंड सीधा खड़ा करके पकड़ा। दीदी को जबरदस्ती उसके ऊपर बिठाया गया। जैसे ही दीदी की चूत उसके लंड की नोक पर टिकी, उसने कमर पकड़कर एक ज़ोरदार झटके से पूरा लंड अंदर तक धकेल दिया। दीदी की चीख निकल गई, उसकी चूत अब पूरी तरह फैल चुकी थी। तुरंत दूसरा लड़का पीछे से आया, उसने भी अपना लंड दीदी की उसी चूत में जबरदस्ती घुसा दिया। दो मोटे लंड एक साथ चूत के अंदर थे, दोनों एक-दूसरे को दबाते हुए अंदर-बाहर हो रहे थे। दीदी तड़प उठी, उसका पूरा शरीर कांप रहा था, आंसू उसकी आंखों से बह रहे थे।
तीसरा लड़का अब पीछे आया और अपना लंड दीदी की गांड में धीरे-धीरे घुसाने लगा। पहले नोक अंदर गई, फिर धीरे-धीरे पूरा मोटा लंड गांड के अंदर समा गया। अब तीनों छेद भरे हुए थे—चूत में दो लंड और गांड में एक। तीनों लड़के एक साथ ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगे। पूरा कमरा पचक-पचक की आवाज़ों से भर गया था, साथ ही दीदी की लगातार निकलती आआआअह्ह्ह… आआआआअह्ह्ह… की चीखें गूंज रही थीं।
एक घंटे बाद सबका पानी निकल गया। वे सबने जल्दी से दीदी के मुंह के सामने अपने लंड रखे और एक-एक करके गरम-गरम वीर्य दीदी के चेहरे, होंठों, जीभ और गालों पर छोड़ दिया। सफेद गाढ़ा वीर्य दीदी के पूरे चेहरे पर फैल गया, कुछ बूंदें उसकी ठोड़ी से टपककर उसके बूब्स पर गिर रही थीं। सब थककर हांफ रहे थे।
सब तक चुके थे। मेरा लंड फिर से टाइट होने लगा तो मैं दीदी के पास गया। दीदी ने मेरी ओर देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “क्या बात है मेरे भाई… आज बहुत ही लंड उठ रहा है तेरा। आ जाओ, मैं उसको प्यार करती हूं।”
फिर दीदी ने मेरे लंड को अपने गीले, वीर्य से सने मुंह में लिया। उसकी जीभ मेरे लंड की पूरी लंबाई पर फिरने लगी, नोक को चाटती हुई, फिर पूरा मुंह में लेकर गले तक ले जाने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मेरी सांसें तेज़ हो गईं। मैंने भी अपना हाथ दीदी की चूत पर रखा और उंगलियों से उसकी गीली, सूजी हुई चूत को सहलाने लगा। दीदी फिर से गरम हो गई, उसकी सांसें भारी होने लगीं और वह आह्ह्ह… आह्ह्ह… भरने लगी।
फिर मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। मैंने कहा, “दीदी, आज हम आपकी चूत में तीन-तीन लंड डालेंगे।” दीदी ने हांफते हुए कहा, “ठीक है… मज़ा आएगा।”
फिर मनोज बेड पर लेट गया। उसने अपना लंड सीधा करके पकड़ा। दीदी को उसके ऊपर बिठाया गया और चूत में लंड सेट कर दिया गया। नीचे से मैंने अपना लंड धीरे-धीरे अंदर घुसाया। दीदी चिल्लाने लगी, उसकी चूत अब तीन लंडों के लिए बहुत तंग हो रही थी। फिर मनोज के एक दोस्त ने अपना लंड भी अडजस्ट करके चूत में घुसा दिया। अब तीन मोटे लंड एक साथ दीदी की चूत के अंदर थे। हम धीरे-धीरे धक्के देने लगे।
दीदी ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। उसकी आवाज़ कमरे में गूंज रही थी। पर हम रुकने वाले नहीं थे। हम लगातार चोदते रहे। चूत के अंदर तीनों लंड आपस में टकरा रहे थे, एक-दूसरे को दबा रहे थे। बहुत मज़ा आ रहा था। दीदी अब पूरी तरह उन्माद में थी। वह चिल्ला रही थी, “आआह्ह्ह… फुक्क्क्क… मीईए… हार्ड… चोदो… जोर से… चूत फाड़ दो… आआआह्ह्ह…!”
थोड़ी देर बाद हम तीनों ने चूत के अंदर ही अपना पानी छोड़ दिया। गरम-गरम वीर्य दीदी की चूत में भर गया, इतना कि बाहर निकलकर बहने लगा। जब हमने लंड बाहर निकाले तो तीनों लंड वीर्य से पूरी तरह लथपथ थे, चमक रहे थे।
उस रात हमने पांच बार पूजा दीदी को चोदा। दूसरे दिन दोपहर तक चुदाई चलती रही। और फिर हम रिटर्न घर पे आ गए। तो दोस्तो कैसी लगी यह कहानी।
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