फ्लाइट में मिली चूत को होटल में चोदा बेरहमी से

Flight sex story, Mumbai hotel chudai sex story, Hardcore sex story, Cheating Gf Sex story:अन्तर्वासना के सभी पाठकों को कुणाल सिंह खड़े लंड से प्रणाम करता है। दोस्तों, मैं आपके लिए एक नई सत्य सेक्स कहानी लेकर आया हूं। इस गर्म कहानी को पढ़ने के बाद मेरी प्यारी भाभियों, आंटियों और मेरी दीवानी लड़कियों की चूत से पानी टपकने लगेगा और मेरे प्यारे भाइयों के लंड पैंट में तंबू बन जाएंगे।

दोस्तों, आप तो जानते ही हैं कि मुझे खुलकर सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है। मैं चूत का पुजारी हूं, चूत का दीवाना हूं। चूत जैसा मजा किसी और चीज में नहीं है।

अब मैं कहानी पर आता हूं। यह घटना अभी 8 दिन पहले की है।

मुझे अपने काम से मुम्बई जाना था। वैसे तो मैं कई बार मुम्बई जा चुका हूं लेकिन ट्रेन से आता-जाता रहा हूं। इस बार मुझे जल्दी जाना था तो मैंने हवाई जहाज से जाने की सोची और ऑनलाइन टिकट भी बुक कर दी। मेरी फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट से थी।

मैं टाइम से दिल्ली पहुंच गया और सारी औपचारिकताएं पूरी करके अपनी उड़ान का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर में हमारी उड़ान थी। मैं जहाज में जाकर बैठ गया।

मैं जिस सीट पर बैठा था, उसी के बगल में एक सुंदर लड़की आकर बैठ गई। वह एकदम गोरी थी, जैसे विदेशी अंग्रेज लड़कियां होती हैं, वैसी ही चमकदार त्वचा और बेहद आकर्षक चेहरा। उसकी लंबाई लगभग 5 फुट 7 इंच रही होगी और फिगर करीब 34-30-34 का था। टाइट टॉप और स्किनी जींस में वह एकदम पटाखा लग रही थी। उसके होंठ गुलाबी थे, आंखें बड़ी-बड़ी और बाल लंबे, हल्के लहराते हुए।

उसे देखते ही मेरी सांसें तेज हो गईं। मेरी नजरें बार-बार उसके उभरे हुए स्तनों पर, कमर की पतली लकीर पर और जांघों की चिकनी बनावट पर ठहर जाती थीं। मेरे लंड में तुरंत हलचल मच गई और पैंट के अंदर वह सख्त होकर तंबू बनाने लगा। मैंने अपने आप को संभालने की कोशिश की लेकिन उसकी मौजूदगी में मन बेकाबू हो रहा था।

थोड़ी देर तक हम दोनों चुप रहे। फिर उसने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और बात शुरू कर दी।

“हाय, आप कहां जा रहे हैं?” उसकी आवाज मधुर और थोड़ी नरम थी।

मैंने जवाब दिया, “मुम्बई जा रहा हूं। आप?”

“मैं भी मुम्बई ही जा रही हूं,” उसने कहा और हल्के से अपने बाल पीछे किए। उस हरकत में उसके स्तन थोड़े और उभर आए।

फिर उसने पूछा, “आप मुम्बई में ही रहते हैं क्या?”

“नहीं,” मैंने कहा, “मैं आगरा में रहता हूं। काम के सिलसिले में मुम्बई जा रहा हूं। आप?”

“मैं दिल्ली से हूं,” उसने बताया। “मैं भी किसी काम से जा रही हूं।”

मैंने हिम्मत करके पूछ लिया, “आपका नाम क्या है?”

उसने मुस्कुराकर कहा, “इशिका। और आपका?”

मैंने अपना नाम बताया। वह 24 साल की थी और मुम्बई में एक इंटरव्यू देने जा रही थी।

फिर मैंने भी उसे अपने बारे में थोड़ा-बहुत बताया। बातों-बातों में जहाज की सीटबेल्ट लग गई और पायलट ने उड़ान भरने की घोषणा कर दी।

कुछ ही पल में प्लेन ने रनवे से स्पीड पकड़ी और हवा में उड़ गया।

फिर मैं अपने मोबाइल में कहानियां पढ़ने लगा। मैंने एक पुरानी वाली कहानी खोली और ध्यान से पढ़ने में लग गया।

इशिका ने मुझे मोबाइल पर कुछ पढ़ते देख लिया। उसकी नजर मेरे स्क्रीन पर पड़ी और उसने धीरे से “ओह्ह” कहते हुए अपने मुंह पर हाथ रख लिया। उसकी आंखों में शरारत और उत्सुकता दोनों झलक रही थीं।

उसने मेरी तरफ झुककर धीमी आवाज में पूछा, “तो आप ये सब भी करते हैं?”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “हां, मैं इसका दीवाना हूं। बहुत मजा आता है ऐसी कहानियां पढ़ने और लिखने में।”

वह थोड़ा और करीब आई और बोली, “मैं भी ऐसी कहानियां पढ़ती हूं। बहुत गर्म-गर्म वाली।”

मैंने तुरंत उसे अपनी एक पहले वाली कहानी दिखाई। उसने मोबाइल मेरे हाथ से लेकर ध्यान से पढ़ना शुरू कर दिया। पढ़ते-पढ़ते उसके गाल लाल हो गए और सांसें थोड़ी तेज हो गईं।

कहानी खत्म होने पर उसने पूछा, “आप तो शादीशुदा हो, फिर भी ये सब करते हो?”

मैंने बेझिझक कहा, “हां, करता हूं। शादी के बाद भी मजा लेना बनता है।”

फिर उसने मेरी दूसरी कहानी भी मांग ली। मैंने उसे दोनों कहानियां एक-एक करके पढ़ने दीं। वह पढ़ते हुए बार-बार अपनी होंठ चबाती, आंखें बंद करके कल्पना करती और कभी-कभी मेरी तरफ देखकर मुस्कुराती।

कहानियां खत्म होने के बाद उसने सीधे पूछ लिया, “कुणाल जी, आपने अब तक कितनी लड़कियों की चुदाई की है?”

मैंने ईमानदारी से जवाब दिया, “शादी से पहले चार लड़कियों की खूब चुदाई की थी। हर किसी के साथ कई-कई बार। लेकिन शादी के बाद सिर्फ एक औरत की चुदाई की है। वो भी तब जब उसने मेरी परेशानी पढ़ी और खुद मेल करके मिलने आई थी।”

फिर मैंने भी उससे पूछा, “और तुम? क्या तुमने कभी सेक्स किया है?”

उसने थोड़ा शरमाते हुए कहा, “हां, किया है। मेरा एक बॉयफ्रेंड था। उसने मुझे दो बार ही चोदा है। पहली बार बहुत दर्द हुआ था, दूसरी बार थोड़ा मजा आया। लेकिन ज्यादा कुछ नहीं हुआ।”

फिर हम दोनों चुदाई की बातों में डूब गए। मैंने उसे बताया कि मुझे चूत चाटना कितना पसंद है, लंड चूसवाना कितना अच्छा लगता है। वह भी अपनी फंतासियां बताने लगी। कहने लगी कि उसे किसी अनजान आदमी से चुदवाने का मन करता है, खासकर प्लेन में या होटल में।

बातों-बातों में उसका हाथ धीरे-धीरे मेरी जांघ पर आ गया। उसने हल्के से सहलाना शुरू किया और फिर धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ती हुई मेरे लंड के ऊपर हाथ रख दिया। मेरी पैंट के ऊपर से ही उसने मेरे सख्त लंड की लंबाई और मोटाई नाप ली। उसकी उंगलियां दबाव डालकर महसूस कर रही थीं कि कितना तना हुआ है।

मैं भी पीछे नहीं रहा। मेरा हाथ उसकी जांघ पर रखा और धीरे-धीरे सहलाने लगा। उसकी जींस के ऊपर से ही मैं उसकी गर्माहट महसूस कर रहा था। मेरी उंगलियां धीरे-धीरे उसकी जांघों के बीच की तरफ बढ़ीं और हल्के से दबाव डालने लगीं। वह सिसकारी भर रही थी और अपनी सीट पर थोड़ा-थोड़ा हिल रही थी।

फिर उसने मेरी आंखों में देखकर कहा, “कुणाल जी, मैं आपसे चुदना चाहती हूं। अभी। यहां।”

मैंने भी उसकी आंखों में देखते हुए कहा, “मुझे कोई परेशानी नहीं है। अगर तुम तैयार हो तो मैं भी तैयार हूं। लेकिन प्लेन में इतना आसान नहीं होगा।”

वह मुस्कुराई और बोली, “तो मुम्बई पहुंचते ही?”

मैंने कहा, “हां, पहुंचते ही।”

और ऐसे ही गर्म बातों और हल्की छेड़छाड़ में समय बीतता गया। हमें पता ही नहीं चला कि कब प्लेन मुम्बई एयरपोर्ट पर लैंड कर गया।

मुम्बई पहुंचते ही हम दोनों सबसे पहले बाहर निकले। टैक्सी लेकर हम सीधे एक अच्छे होटल पहुंचे। वहां हमने दो अलग-अलग कमरे बुक कर लिए, लेकिन दोनों कमरे आमने-सामने थे।

इशिका अपने कमरे में सामान रखकर तुरंत मेरे कमरे में आ गई। दरवाजा बंद होते ही वह मेरे सीने से लिपट गई। उसके दोनों हाथ मेरी कमर पर लपेटे हुए थे और वह मुझे जोर-जोर से चूमने लगी। उसके होंठ मेरे गले पर, मेरे कानों पर, मेरे गालों पर फिर मेरे होंठों पर पहुंच गए।

वह अभी भी अपनी टाइट जींस और फिटेड टी-शर्ट में थी। उसके स्तन मेरे सीने से दब रहे थे और मैं उनकी गर्माहट और मुलायमियत महसूस कर रहा था।

मैंने भी उसे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया। मेरे हाथ उसकी पीठ पर फिसल रहे थे। फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों में भर लिया और जोरदार चुसाई शुरू कर दी। हमारी जीभें एक-दूसरे से उलझ गईं। मैंने उसे धीरे से दीवार के सहारे खड़ा कर दिया। उसकी पीठ दीवार से सटी हुई थी और मैं उसके पूरे बदन पर अपना वजन डालकर उसे दबा रहा था।

वह भी मेरे होंठों को ऐसे चूस रही थी जैसे उनमें से कोई मीठा रस निकल रहा हो। उसकी सांसें तेज थीं और वह मेरी जीभ को अपने मुंह में खींचकर चूस रही थी। कभी वह मेरी निचली होंठ को हल्के से काटती, तो कभी मैं उसकी ऊपरी होंठ को चूसकर बाहर खींचता।

फिर मैंने उसे अपनी बाहों में उठा लिया। उसकी टांगें मेरी कमर पर लिपट गईं। मैंने उसे बेड पर पटक दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गया। हम दोनों अभी भी एक-दूसरे के होंठों को ही चूस रहे थे। अब वह मेरी जीभ को पकड़कर चूसती, तो मैं उसकी जीभ को अपने होंठों से बाहर खींचकर चूसता। हमारी लार एक-दूसरे के मुंह में मिल रही थी और कमरे में सिर्फ चूमने की चटखारों और सिसकारियों की आवाजें गूंज रही थीं।

अचानक उसने झटके से मुझे नीचे कर दिया। अब वह मेरे ऊपर थी। उसने मेरी शर्ट के बटन तेजी से खोले और शर्ट उतारकर फेंक दी। फिर उसने मेरी पैंट की जिप खोली, पैंट नीचे खींची और चड्डी सहित मेरे लंड को बाहर निकालने की कोशिश की। मेरी चड्डी के ऊपर से ही उसने मेरे सख्त लंड को सहलाना शुरू कर दिया। उसकी हथेली मेरे लंड की लंबाई पर फिसल रही थी और वह दबाव डाल-डालकर उसकी मोटाई महसूस कर रही थी।

मैंने भी अब अपने हाथ आगे बढ़ाए। मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर की तरफ खींचा और एक झटके में उतार दिया। उसके गोरे-गोरे स्तन ब्रा में कैद थे। ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल सख्त दिख रहे थे।

फिर मैं उठ गया। मैंने उसे पीठ के बल लिटाया और उसकी जींस की बटन खोली। जींस को धीरे-धीरे नीचे सरकाया। उसकी गोरी जांघें नजर आईं। जींस पूरी तरह उतरते ही मैंने उसके गोल-गोल, मुलायम चूतड़ देखे। वे इतने गोल और भरे हुए थे कि मैं उन्हें देखकर और उत्तेजित हो गया।

अब वह मेरे सामने सिर्फ गुलाबी ब्रा और पैंटी में थी। ब्रा में उसके स्तन उभरे हुए थे और पैंटी में उसकी चूत की उभार साफ दिख रहा था।

मैंने उसके पैरों को फैलाया और उसकी गोरी-गोरी टांगों को चूमना शुरू कर दिया। मैंने पहले उसके टखनों को चूमा, फिर पिंडलियों को, फिर जांघों के अंदरूनी हिस्से को। चूमते-चूमते मैं उसकी गांड तक पहुंच गया। उसने खुद को उल्टा कर लिया था। अब उसका चेहरा तकिए में दबा हुआ था और गांड ऊपर उठी हुई थी।

मैंने उसके दोनों चूतड़ों को दोनों हाथों से पकड़ा और जोर-जोर से मसलने लगा। मेरी उंगलियां उसके मुलायम मांस में धंस रही थीं। फिर मैंने उसे चाटना शुरू किया। मेरी जीभ उसके चूतड़ों पर फिसल रही थी। मैंने दोनों गालों को अलग किया और बीच की दरार में जीभ डालकर चाटा।

फिर मैंने उसकी ब्रा की हुक खोली और उतार दी। उसके गोरे स्तन बाहर आ गए। निप्पल गुलाबी और सख्त थे। फिर मैंने उसकी पैंटी को धीरे से नीचे सरकाया। पैंटी उतरते ही उसकी चूत पूरी तरह नंगी हो गई। वह एकदम गोरी, चिकनी और साफ थी। चूत के होंठ हल्के से खुले हुए थे और बीच में गुलाबी हिस्सा चमक रहा था।

उसे देखते ही मेरे मुंह में पानी भर आया। मैंने तुरंत अपना मुंह उसकी चूत पर रख दिया और चूसना शुरू कर दिया। मेरी जीभ उसके चूत के होंठों पर फिसल रही थी। मैंने पहले बाहर के हिस्से को चाटा, फिर धीरे-धीरे अंदर की तरफ बढ़ा।

इशिका पहले से चुदी हुई थी। उसकी चूत थोड़ी खुली हुई थी और वह चुदाई में काफी माहिर लग रही थी। जैसे ही मैंने जीभ से उसके छेद को छुआ, वह उछल पड़ी और मेरे सिर को अपनी जांघों के बीच दबा दिया।

मैं उसकी चूत को खूब जोश से चूस रहा था। कभी मैं जीभ को अंदर डालकर घुमाता, तो वह सिहर उठती। कभी मैंने एक उंगली अंदर डाली और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। मेरी उंगली उसके गीलेपन से चिकनी हो गई थी।

वह बहुत बुरी तरह तड़प रही थी। उसकी सिसकारियां रुक ही नहीं रही थीं। वह बार-बार कह रही थी, “आह्ह… आह्ह… ओफ्फ… हम्म्म… ऐसे ही चूसो कुणाल… बहुत मजा आ रहा है… मेरी चूत का सारा पानी निकाल दो आज… पूरी तरह खाली कर दो…”

मैं समझ गया कि उसकी आग अब बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है। मैंने उसकी चूत के बीच में लटकती उस छोटी-सी चूत की दाने को, क्लिटोरिस को, अपने होंठों से पकड़ा और हल्के से खींचा। वह चीख पड़ी, “आआ… आह्ह… ओफ्फ्फ…”

उसके मुंह से लगातार सिसकारियां निकल रही थीं। उसकी चूत से गाढ़ा, सफेद रस निकलने लगा। वह रस मेरी जीभ पर गिर रहा था और मैं उसे चाट-चाटकर पी रहा था। उसका बदन कांप रहा था और वह बार-बार अपनी कमर उठा-उठाकर मेरे मुंह पर दबा रही थी।

मैंने उसकी आंखों में देखकर कहा, “इशिका, अब मेरा लंड चूसो!”

वह तुरंत उठकर बैठ गई। उसकी आंखों में लालच और उत्साह साफ दिख रहा था। पहले उसने दोनों हाथों से मेरे लंड को पकड़ा। उसकी नरम हथेलियां मेरे सख्त लंड पर फिसल रही थीं। वह धीरे-धीरे ऊपर-नीचे सहलाती रही, कभी सुपाड़े को अंगूठे से रगड़ती, कभी लंबाई पर हल्का दबाव डालती। मेरे लंड से पहले ही थोड़ा सा रस निकल आया था, जिसे उसने उंगली से फैलाकर चिकना कर दिया।

फिर उसने अपना मुंह मेरे लंड के पास लाया। पहले उसने जीभ से सुपाड़े को चाटा, चारों तरफ घुमाकर चाटा। फिर धीरे से होंठों से सुपाड़े को अपने मुंह में लिया और चूसने लगी। उसकी जीभ मेरे लंड के नीचे की नसों पर फिसल रही थी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ती गई और आधा लंड मुंह में लेकर चूसने लगी।

इशिका लंड चूसने में सच में माहिर लग रही थी। वह बहुत अच्छे से चुसाई कर रही थी। कभी पूरा लंड मुंह में ले लेती, गले तक पहुंचा देती, तो कभी बाहर निकालकर उस पर थूक देती। उसका थूक मेरे लंड पर गिरता और चमकदार हो जाता। फिर वह जीभ से पूरा लंड चाटती, सुपाड़े को चाटकर चूसती, फिर दोबारा मुंह में लेकर तेजी से ऊपर-नीचे करने लगती। उसकी सांसें तेज हो रही थीं और मुंह से चटखारे की आवाजें आ रही थीं।

मुझे इतना मजा आ रहा था कि मेरी सांसें रुक-रुककर चल रही थीं। मैं उसके बालों में उंगलियां फेर रहा था और हल्के से उसका सिर दबा रहा था।

अब इशिका रुक गई। उसने मेरा लंड मुंह से निकाला और मेरी तरफ देखकर बोली, “कुणाल, अब मेरी चूत की चुदाई कर दो… अब मुझे क्यों परेशान कर रहे हो… मैं मर ही जा रही हूं… चोदो न मुझे!” उसकी आवाज में बेचैनी और लालसा साफ झलक रही थी।

मैंने ज्यादा देर नहीं की। मैंने उसे सीधा लेटा लिया। उसकी टांगें फैली हुई थीं। मैंने अपने लंड को उसके चूत के मुंह पर रखा। सुपाड़ा उसके गीले चूत के होंठों पर रगड़ा। फिर एक ही जोरदार झटके में मैंने पूरा सुपाड़ा उसकी चूत में उतार दिया।

वह “आह्ह्ह्ह…” करके चीख पड़ी, लेकिन दर्द से नहीं, मजा लेकर। उसने तुरंत मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए। उसके दोनों पैर मेरी कमर पर लिपट गए और उसने मुझे और करीब खींच लिया। उसकी बाहें मेरे गले में डाल दीं। हम दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए थे।

मैं अब उसकी चूचियों को मसलने लगा। मेरे हाथों में उसके मुलायम, भरे हुए स्तन आ गए। मैंने एक चूची को मसलते हुए दूसरे को मुंह में लिया। मैंने निप्पल को जीभ से घुमाया, फिर चूसा। कभी दाईं चूची को मुंह में लेकर जोर से चूसा, तो बाईं को। कभी निप्पल को दांतों से हल्का सा काट लिया, जिससे इशिका कांप उठी और उसकी चूत मेरे लंड पर और सिकुड़ गई।

फिर मैंने उसके पैरों को अपने कंधों पर रख लिया। अब उसकी चूत पूरी तरह मेरे सामने थी। मैंने धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया, लेकिन जल्द ही रफ्तार बढ़ा दी। मैं जोर-जोर से पेलने लगा। हर धक्के के साथ मेरा लंड उसकी चूत में जड़ तक जा रहा था।

अब कमरे में ‘खचाखच… फचाफच…’ की आवाजें गूंज रही थीं। उसकी चूत से निकलता गीला रस मेरे लंड पर चिपक रहा था और हर धक्के के साथ छींटें उड़ रही थीं। इशिका के मुंह से लगातार “ओह्ह… ऊफ़… आह्ह… उफ़…” की आवाजें निकल रही थीं।

वह अपनी कमर उठा-उठाकर मेरे लंड को अपनी चूत में और गहराई तक ले रही थी। उसकी सिसकारियां अब और तेज हो गईं। वह चिल्लाने लगी, “ऊफ़… आह… और पेलो… ऐसे ही… चोदो… मुझे… मैं ऐसे ही लंड से चुदने के लिए तड़प रही हूं… आईईई… सीऊह… सीईई… आह ऊफ़्फ़… चोद… पेल… मार साले मेरी चूत…”

वह अब गालियां देने लगी थी। “कुणाल… कस-कस कर अपना लौड़ा मेरी चूत में डालो… आज इसकी सारी गर्मी निकाल दो! पूरी तरह फाड़ दो मेरी चूत!”

मैं उसकी बातों से और उत्तेजित हो गया। मैं ऊपर से जोरदार झटके दे रहा था और वह नीचे से अपनी चूत उठाकर मेरे लंड पर मार रही थी। दोनों तरफ से धक्के लग रहे थे। मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जड़ तक जा रहा था और बाहर निकलते समय उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थीं।

वह चूत चुदाई का पूरा मजा ले रही थी। उसका बदन पसीने से तर था, स्तन उछल रहे थे और चेहरा लाल होकर आनंद में डूबा हुआ था।

मैं इशिका की जबरदस्त चुदाई कर रहा था। मेरे धक्के तेज और गहरे हो चुके थे। हर झटके के साथ मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जड़ तक घुस रहा था और बाहर निकलते समय उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थीं। इशिका सिसकारियां लेते हुए अपनी चूत चुदवाती जा रही थी।

उसकी आवाजें अब और उग्र हो गई थीं। वह चिल्ला-चिल्लाकर कह रही थी, “आह्सी… आउउई… फाड़ दो… मेरी चूत… मेरे चूचों को खा जाओ… जोर से चूसो इन्हें… और और रगड़ कर पेलो… मेरे जानू… इसे कहते हैं असली चुदाई… चूत के राजा… मेरी चूत का कीमा बना दो जानू… आआह्ह… म्म्म्म… म्म्मार… चूतत… मेरे जानू… डालल… पेलल… आह्सी… ऊईई… मैं गई… मेरे राजा… लगा धक्का… कस कस… कर पेल साले… मार चूत आआ…! मेरी सा…साली… चूत… आह आउइ उउउइ…”

कहते-कहते इशिका ने मुझे बहुत तेजी से जकड़ लिया। उसके दोनों पैर मेरी कमर पर और कसकर लिपट गए। उसकी बाहें मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं। उसका पूरा बदन कांपने लगा। उसकी चूत मेरे लंड को इतनी जोर से सिकोड़ रही थी कि मुझे लगा जैसे वह मुझे अंदर खींच रही हो। अचानक उसने एक लंबी सिसकारी ली और अपना पानी छोड़ दिया।

उसकी चूत से गर्म-गर्म, गाढ़ा रस मेरे लंड पर बहने लगा। वह झड़ते हुए मुझे कसकर पकड़े हुए थी। उसका बदन बार-बार सिहर रहा था और वह “आह्ह… ऊफ़… मैं गई… जानू… मैं गई…” कहकर रोने जैसी आवाजें निकाल रही थी।

मैंने रुकने की बजाय उसकी झड़ी हुई, गीली और गरम चूत पर धक्के पर धक्के लगाते रहे। उसका रस मेरे लंड और जांघों पर फैल रहा था। हर धक्के के साथ ‘फचाफच… चपचप…’ की आवाजें और तेज हो गईं। इशिका अभी भी सिसक रही थी और मेरे कंधों पर अपना सिर दबाए हुए थी।

अब मेरा भी झड़ने का समय आ गया था। मेरी सांसें तेज हो गईं। मैंने आखिरी बार जोर से धक्का मारा और अपना पूरा लंड उसकी चूत में जड़ तक घुसा दिया। फिर मैं भी झड़ने लगा। मेरे लंड से गरम वीर्य की मोटी-मोटी धार निकलने लगी। मैंने इशिका को अपनी बाहों में पूरी तरह कसकर दबा लिया। मेरे दोनों हाथ उसकी पीठ पर थे और मैं उसे इतना जोर से दबा रहा था जैसे उसे अपने अंदर समेट लूं।

वीर्य की धार बार-बार निकल रही थी। मैं “आह्ह… इशिका… ले… ले मेरे वीर्य… ले पूरी तरह…” कहते हुए झड़ता रहा। इशिका भी मुझे कसकर जकड़े हुए थी और मेरे हर स्पंदन को अपनी चूत में महसूस कर रही थी।

हम दोनों एक-दूसरे को बाहों में लिए काफी देर तक ऐसे ही पड़े रहे। हमारी सांसें धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। मेरा लंड अभी भी उसकी चूत के अंदर था, धीरे-धीरे ढीला पड़ रहा था। हम दोनों के बदन पसीने से तर थे। कमरे में सिर्फ हमारी भारी सांसों की आवाज और हल्की सिसकारियां गूंज रही थीं।

काफी देर तक हम दोनों ऐसे ही एक-दूसरे को बाहों में लिए पड़े रहे। मेरा लंड धीरे-धीरे उसकी चूत से बाहर सरक गया। हम दोनों के बीच अब भी गर्माहट बनी हुई थी। इशिका मेरे सीने पर सिर रखे हुए थी और हल्के-हल्के मेरी छाती पर उंगलियां फेर रही थी। हम दोनों की सांसें अब सामान्य हो चुकी थीं, लेकिन बदन अभी भी पसीने और चुदाई के रस से चिपचिपा हुआ था।

तभी अचानक उसके फोन की रिंगटोन बज उठी। इशिका ने आलस भरी आवाज में कहा, “रुकिए, देखती हूं कौन है।” उसने बिस्तर के किनारे पड़ा फोन उठाया और स्क्रीन देखकर बोली, “मेरा बॉयफ्रेंड है।”

वह फोन कान पर लगाकर उठकर बैठ गई। उसने थोड़ा शांत स्वर में बात शुरू की। “हैलो… हां… हां मैं मुम्बई पहुंच गई… हां सब ठीक है… लेकिन सुनो, यहां इंटरव्यू का मामला थोड़ा बदल गया है। कंपनी ने बताया कि अभी दो और राउंड बाकी हैं, जो अगले तीन दिनों में शेड्यूल हैं। तो मुझे यहां रुकना पड़ेगा… हां… तीन दिन और… नहीं, होटल में ही रहूंगी… हां, ठीक है… तुम टेंशन मत लो… मैं संभाल लूंगी… ओके… लव यू… बाय।”

फोन रखते ही उसने मेरी तरफ देखा और शरारती अंदाज में मुस्कुराई। उसकी आंखों में वही पुरानी चमक थी, लेकिन अब उसमें एक गहरा लालच भी मिल गया था। उसने फोन साइड टेबल पर फेंका और मेरे ऊपर लेटते हुए धीरे से मेरे कान में फुसफुसाई, “कुणाल जी… अब तीन दिन तक मैं पूरी तरह आपकी हूं। बॉयफ्रेंड को बहाना दे दिया। अब आप मुझे जितना चाहें उतना चोद सकते हैं… जितनी बार चाहें… जितनी गहराई से चाहें… मैं तैयार हूं।”

मैंने उसे अपनी बाहों में कसकर खींच लिया, उसके होंठों पर एक गहरा चुंबन दिया और कहा, “तो फिर शुरू करते हैं, इशिका। तीन दिन में तेरी चूत को इतना चोदूंगा कि तू कभी भूल नहीं पाएगी। हर बार तेरी चूत मेरे लंड की दीवानी बनी रहेगी।”

और अगले तीन दिनों में वाकई ऐसा ही हुआ। मैंने इशिका की कम से कम 11-12 बार चुदाई की। हर बार अलग-अलग अंदाज में, अलग-अलग जगहों पर। सुबह बिस्तर पर जागते ही पहली चुदाई, जिसमें मैंने उसे डॉगी स्टाइल में घुटनों के बल खड़ा करके पीछे से पेला और उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मार-मारकर लाल कर दिया। दोपहर में शावर के नीचे, जहां पानी की धार हम दोनों के बदन पर गिर रही थी और मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़ा करके घंटों तक चोदा। शाम को बालकनी पर, जहां शहर की लाइटें जल रही थीं और मैंने उसे रेलिंग पर झुकाकर पीछे से इतनी जोर से पेला कि उसकी चीखें हवा में गूंज गईं। रात को बेड पर कई-कई राउंड, कभी मिशनरी में, कभी वह मेरे ऊपर सवार होकर, कभी 69 में एक-दूसरे को चाटते हुए।

हर चुदाई के बाद वह मेरे सीने से लिपटकर कहती, “कुणाल… तुम्हारा लंड मेरी चूत का राजा बन गया है… अब इससे अलग नहीं होना चाहती। तीन दिन बहुत कम हैं… और चाहिए… और चाहिए…”

तीसरे दिन की आखिरी रात, जब हम दोनों थककर चूर हो चुके थे, उसने मेरे गले में हाथ डालकर कहा, “कुणाल… ये तीन दिन मेरी जिंदगी के सबसे गर्म दिन थे। लेकिन ये अंत नहीं है… मैं जल्दी ही फिर मिलने आऊंगी। तब तक मेरी चूत में तुम्हारा नाम लिखा रहेगा।”

मैंने उसे आखिरी बार गहराई से चोदा, उसके अंदर अपना सारा वीर्य छोड़ दिया और फिर दोनों एक-दूसरे को बाहों में लिए सो गए। सुबह जब वह चली गई, तो कमरे में सिर्फ उसकी खुशबू और चुदाई की यादें बची थीं।

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