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बॉस को चूतिया बनाकर बॉस की बीवी को चोदा

Boss ki biwi ki chudai sex story, Cheating wife sex story: हेलो फ्रेंड्स, मैं थोर आपके लिए नयी ऑफिस सेक्स स्टोरी लेकर आया हूं। उम्मीद है आपको मेरी पिछली सेक्स कहानियों की तरह ये भी पसंद आएगी। ये कहानी मुझे दुशंत ने भेजी है, पुणे से। चलिए तो कहानी शुरू करते हैं दुशंत की जुबानी।

दोस्तों मेरा नाम दुशंत है। मैं 26 साल का हूं, और एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर हूं। मेरी शादी अभी नहीं हुई है, और मेरा लंड 6.5 इंच का है। इस कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि कैसे मुझे अपने बॉस की बीवी को चोदने का मौका मिला।

मेरा बॉस 45 साल का एक आदमी है। नेचर का बहुत अच्छा है, और अपने एम्प्लॉयी का भी ख्याल रखता है। दो महीने पहले मैंने जब ऑफिस आके बॉस को कॉल किया, तो उनकी वाइफ ने फोन उठाया, और कहा कि बॉस का एक्सीडेंट हो गया था, और वो हॉस्पिटल में थे।

ये सुनकर मुझे शॉक लगा, और मैं जल्दी से हॉस्पिटल के लिए निकल गया। वहां जाकर देखा, तो बॉस का एक पैर, एक हाथ, और कुछ पसलियां टूट चुकी थीं। उनकी पूरी बॉडी पर बैंडेज लगी थी। वो होश में थे, लेकिन ठीक होने में एक महीना लगने वाला था।

फिर बॉस ने अपनी पावर ऑफ अटॉर्नी अपनी बीवी को दे दी। उनकी बीवी का नाम ऋतु है। ऋतु मैडम की उम्र 40 साल है, और वो भरे हुए बदन की एक सेक्सी महिला है। उस दिन मैं दूसरी बार उनसे मिल रहा था। इससे पहले एक पार्टी में बॉस उनको अपने साथ लेकर आए थे। वो इतनी सेक्सी लगी थी मुझे कि मैंने उसी रात मैडम के नाम की मुठ मारी थी।

फिर अगले दिन से मैडम ने ऑफिस आना शुरू कर दिया। मैडम फॉर्मल पैंट-शर्ट और ब्लेजर पहनकर आती थी। उनकी टाइट पैंट में उनकी गांड क्या कमाल की लगती थी। ऑफिस के सारे मर्दों का ध्यान मैडम की गांड की तरफ रहता था। मैं लकी था, जो हर वक्त उनके आस-पास रहकर उनको सब समझा रहा था।

मैडम काफी मॉडर्न टाइप की भी थीं। एक दिन मैं उनके टेबल के सामने खड़ा था। मैंने उन्हें एक फाइल साइन करने के लिए दी थी। वो फाइल को ध्यान से देखने के लिए थोड़ा आगे झुकीं, और उनकी सफेद शर्ट के ऊपरी दो बटन खुले हुए थे। झुकने से उनकी गहरी क्लीवेज साफ नजर आने लगी। वो भरे हुए, गोरे स्तन थोड़े-थोड़े हिल रहे थे, और ब्रा की काली लेस भी झांक रही थी। मेरी नजरें बार-बार वहां टिक जाती थीं। मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। दिल की धड़कन तेज हो गई थी, और गले में कुछ अटक सा गया था।

तभी मैडम ने कुछ पूछने के लिए सिर उठाया और सीधे मेरी आंखों में देखा। उन्हें तुरंत समझ आ गया कि मेरी नजर कहां अटकी हुई है। उनके होंठों पर हल्की-सी शरारती मुस्कान फैल गई। उन्होंने धीरे से, मजाक भरे लहजे में कहा,

मैडम: लगता है आपको व्यू अच्छा लग रहा है, दुशंत जी।

मैं एकदम घबरा गया। चेहरा लाल हो गया, और मैंने जल्दी से नजरें हटाकर अंजान बनने की कोशिश की।

मैं: जी मैडम!?

मैडम ने हल्के से हंसते हुए खिड़की की तरफ इशारा किया, जहां बाहर शाम का नजारा दिख रहा था।

मैडम: नजारा अच्छा है ना?

मैं समझ गया कि वो मजाक कर रही हैं। मैंने हकलाते हुए जवाब दिया,

मैं: जी हां!

उनकी मुस्कान और गहरी हो गई। उन्होंने आंखों से ही मुझे कुछ पल तक घूरा, जैसे मेरी हर हरकत को पढ़ रही हों। फिर उन्होंने फाइल पर साइन करके मुझे लौटा दी। मैं फाइल लेकर तेजी से वापस अपनी सीट पर आ गया, लेकिन मन में उनका वो मजाक और वो क्लीवेज का नजारा बार-बार घूम रहा था।

कुछ दिन बाद मुझे कंपनी के काम से दूसरे शहर जाना था। मेरी फ्लाइट रात की थी। साथ में एक महत्वपूर्ण फाइल ले जानी थी, जो मैंने मैडम को साइन के लिए दी थी। शाम को मैंने मैडम को फोन किया।

मैं: गुड इवनिंग मैडम। मैडम, वो फाइल जो मैंने साइन के लिए दी थी, वो आपने कहां रखी है?

मैडम: ओह, वो तो मैं घर ले आई हूं। क्या आप यहां आकर ले जाएंगे?

मैं: जी मैडम, मैं थोड़ी देर में आ जाता हूं।

मैडम: ओके, गुड।

आधे घंटे बाद मैं उनके घर पहुंच गया। काफी बड़ा और शानदार बंगला था। नौकर ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर ड्रॉइंग रूम तक ले गया। नौकर मुझे छोड़कर चला गया।

मैं अंदर दाखिल हुआ तो मैडम सोफे पर आराम से बैठी थीं। उन्होंने फुल लेंथ वाली हल्की गुलाबी नाइट्टी पहनी हुई थी, जो उनके भरे हुए जिस्म पर चिपकी हुई लग रही थी। नाइट्टी का कपड़ा इतना पतला था कि उनके कर्व्स साफ नजर आ रहे थे। उनके हाथ में एक क्रिस्टल ग्लास था, जिसमें अम्बर कलर की दारू चमक रही थी। कमरे के एक कोने में छोटा-सा बार काउंटर था, जहां कई बोतलें सजी हुई थीं। दारू का ग्लास देखकर मुझे समझ आ गया कि मैडम शौकीन और आजाद ख्याल वाली औरत हैं।

फिर मैं उनके पास गया। फाइल टेबल पर रखी हुई थी, जिसे उन्होंने हल्के से उंगली से इशारा करके बताया। मैंने फाइल उठाई, सिर झुकाकर कहा, “थैंक यू मैडम,” और वापस मुड़कर चलने लगा। तभी उनकी आवाज पीछे से आई, नरम लेकिन साफ।

मैडम: तुम्हारी फ्लाइट कब है?

मैं रुक गया, पलटकर देखा। वो सोफे पर आराम से बैठी थीं, ग्लास हाथ में लिए, आंखों में एक चमक थी।

मैं: दो घंटे बाद मैडम।

मैडम ने ग्लास को होंठों से लगाया, एक घूंट लिया और फिर मुस्कुराई।

मैडम: तो अभी जाकर क्या करोगे? आओ, मुझे ड्रिंक के लिए जॉइन करो।

उनके शब्दों में एक तरह का न्योता था, जो सीधा दिल तक पहुंच रहा था। फ्री की दारू, वो भी इतनी आकर्षक और सेक्सी औरत के साथ – मना करना नामुमकिन था। मैंने हल्के से मुस्कुराकर हामी भरी और उनके बगल वाले सोफे पर बैठ गया।

मैडम ने तुरंत बार की तरफ हाथ बढ़ाया। उन्होंने एक क्रिस्टल ग्लास लिया, व्हिस्की की बोतल से दो बड़े पैग बनाए – एक खुद के लिए, दूसरा मेरे लिए। बर्फ के टुकड़े डालकर ग्लास मुझे थमाया। हमने ग्लास टकराए, “चीयर्स,” कहा और पीना शुरू किया। दारू गले से उतरते ही गर्माहट फैल गई।

कुछ घूंटों के बाद मैडम ने ग्लास टेबल पर रखा, मेरी तरफ मुड़ीं और सीधे आंखों में देखकर बोलीं।

मैडम: उस दिन तुम मेरी क्लीवेज देख रहे थे। मैं तुम्हें सेक्सी लगती हूं?

उनका सवाल इतना सीधा था कि मैं एक पल के लिए हक्का-बक्का रह गया। लेकिन झूठ बोलना बेकार था।

मैं: मैडम, आप बहुत सेक्सी हैं। ऑफिस में सारे आदमी आपके पीछे पागल हैं।

मैडम ने हल्के से हंसते हुए पूछा,

मैडम: तुम भी हो?

मैंने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दिया। मेरी मुस्कान ने सब कुछ कह दिया। मैडम की आंखों में शरारत बढ़ गई। वो धीरे-धीरे अपनी जगह से उठीं, मेरे बिल्कुल पास आकर बैठ गईं। उनका शरीर मुझसे सटा हुआ था। उनकी नाइट्टी का पतला कपड़ा मेरी बांह को छू रहा था। उन्होंने अपना हाथ मेरी छाती पर रख दिया, उंगलियां हल्के से दबाकर बोलीं।

मैडम: देखो दुशंत, मेरे हसबैंड तो हॉस्पिटल में हैं। मैं बहुत अकेला फील कर रही हूं। क्या तुम मुझे कंपनी दे सकते हो?

उनकी आवाज में एक हल्की कंपकंपी थी, लेकिन आंखों में साफ इच्छा झलक रही थी। मैं समझ गया कि वो क्या चाह रही हैं। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

मैं: मैडम, अगर सर को पता चल गया तो?

मैडम ने मेरी आंखों में देखते हुए जवाब दिया,

मैडम: क्यों, तुम उन्हें बताओगे क्या?

मैं: नहीं।

मैडम: फिर?

उस एक शब्द ने सब कुछ बदल दिया। मैडम ने धीरे से आंखें बंद कीं और अपना चेहरा मेरे करीब ला दिया। मैंने भी खुद को रोक नहीं पाया। मेरे होंठ उनके रसीले, नरम होंठों से जा मिले। वो किस इतना गहरा और जुनूनी था कि सांसें रुक सी गईं। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेलने लगी, जैसे सालों की प्यास बुझ रही हो।

हम दोनों वाइल्ड होकर एक-दूसरे को चूमने लगे। मेरे हाथ उनके जिस्म पर घूमने लगे – पहले कमर पर, फिर पीठ पर, धीरे-धीरे ऊपर की तरफ। उनकी नाइट्टी के नीचे का भरा हुआ जिस्म इतना गरम और मुलायम था कि हाथ रुक नहीं रहे थे। मैंने उनकी कमर को कसकर पकड़ा, उन्हें और करीब खींचा। मैडम की सांसें तेज हो गईं, वो मेरे होंठों पर और जोर से दबाव डाल रही थीं।

मेरा एक हाथ उनकी जांघ पर पहुंच गया, नाइट्टी के ऊपर से सहलाने लगा। मैडम ने हल्की सी आह भरी और मेरे गले में मुंह छिपा लिया। कमरे में सिर्फ हमारी सांसों और हल्की-हल्की चूसने की आवाजें गूंज रही थीं।

किस टूटते ही मैडम अचानक खड़ी हो गईं। उनकी सांसें अभी भी तेज चल रही थीं, होंठ सूजे हुए और लाल थे। उन्होंने मेरी आंखों में देखा, एक नॉटी मुस्कान के साथ, और बिना कुछ कहे बेडरूम की तरफ चल पड़ीं। उनकी कमर मटक रही थी, नाइट्टी का पतला कपड़ा उनके कूल्हों पर लहरा रहा था। मैं उनके पीछे-पीछे चला, दिल की धड़कनें कान में गूंज रही थीं।

बेडरूम के दरवाजे के ठीक बाहर पहुंचते ही मैडम रुक गईं। उन्होंने धीरे से अपनी नाइट्टी के कंधों से पट्टियां सरकाईं। कपड़ा धीरे-धीरे नीचे सरकता हुआ उनके पैरों के पास गिर गया। अब वो सिर्फ काली लेस वाली ब्रा और पैंटी में थीं। ब्रा उनके भरे हुए स्तनों को मुश्किल से संभाल पा रही थी, और पैंटी इतनी टाइट थी कि उनकी चूत की आकृति साफ उभर रही थी। काले रंग में वो कमाल की लग रही थीं – जैसे कोई बॉम्ब तैयार हो विस्फोट के लिए। उनकी गोरी त्वचा पर काले लेस का कंट्रास्ट देखकर मेरी सांसें थम सी गईं।

फिर वो बेडरूम में दाखिल हुईं और बड़े बेड पर लेट गईं। पीठ के बल लेटकर उन्होंने हाथ ऊपर करके ब्रा के हुक खोल दिए, लेकिन अभी उतारी नहीं। बस मुझे देख रही थीं, आंखों में इंतजार।

मैंने भी फटाफट अपने कपड़े उतार दिए। शर्ट, पैंट, अंडरवियर – सब फर्श पर गिर गए। अब मैं पूरा नंगा उनके सामने खड़ा था। मेरा लंड पहले से ही सख्त और खड़ा था, 6.5 इंच का मोटा, सिर लाल होकर चमक रहा था। मैडम की नजर उस पर टिक गई। उनके होंठों पर एक शरारती, भूखी मुस्कान फैल गई। आंखें सिकुड़कर नॉटी एक्सप्रेशन में बदल गईं, जैसे कोई बच्चा अपनी पसंदीदा चीज देखकर खुश हो गया हो।

मैं बेड पर चढ़ा और उनके ऊपर झुक गया। सबसे पहले उनके होंठों पर फिर से किस किया, फिर गर्दन पर, कानों के पीछे। मेरे होंठ धीरे-धीरे नीचे सरकते गए। मैंने उनकी ब्रा को ऊपर सरकाया और एक स्तन मुंह में ले लिया। जीभ से निप्पल को घुमाया, चूसा, हल्के से काटा। मैडम की पीठ झटके से ऊपर उठी, हाथ मेरे बालों में फंस गए।

फिर मैं और नीचे सरका। पेट पर किस करते हुए नाभि में जीभ डाली। मैडम सिहर रही थीं। आखिरकार मैं उनकी पैंटी तक पहुंचा। पैंटी के ऊपर से ही चूत पर हाथ फेरा, गर्माहट महसूस हुई। फिर धीरे से दोनों तरफ की इलास्टिक पकड़कर पैंटी नीचे खींची। वो भी उतर गई। अब उनकी सेक्सी, शेव्ड चूत मेरे सामने थी – गुलाबी, गीली, होंठ फूले हुए, बीच में चमकता रस।

मैंने बिना देर किए मुंह लगा दिया। जीभ से ऊपर से नीचे तक चाटा। क्लिटोरिस पर जीभ घुमाई, हल्के से चूसा। मैडम की आहें निकलने लगीं – “आह्ह… दुशंत… हां… ऐसे ही…”। उन्होंने मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी चूत में दबा दिया। मैंने जीभ अंदर डाल दी, चूत के रस को चूसने लगा। स्वाद नमकीन-मीठा था, और वो और गीली हो रही थीं।

मैडम तड़प उठीं। कमर ऊपर-नीचे होने लगी। बोलीं, “दुशंत… और जोर से चाटो… मैं बहुत दिनों से भूखी हूं… आह्ह… मत रुको…”

मैंने और जोर लगाया। जीभ तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। फिर चाटते-चाटते नीचे सरका, उनकी गांड के छेद तक जीभ पहुंचाई। हल्के से चाटा। मैडम पूरे जिस्म से सिहर गईं, एक लंबी आह भरी।

फिर मैं ऊपर आया। अपना सख्त लंड हाथ में पकड़ा और उनकी चूत के होंठों पर रगड़ने लगा। गीला रस लंड पर लग रहा था। मैडम ने मेरी कमर दोनों पैरों से जकड़ ली, हाथों से मेरी पीठ नाखूनों से खींची। बोलीं, “अंदर डाल दो जल्दी… मैं इंतजार नहीं कर सकती… चोदो मुझे…”

मैंने कमर को एक झटका दिया। पूरा लंड एक ही धक्के में अंदर चला गया। मैडम की चूत गर्म, टाइट और गीली थी – जैसे वो मुझे पूरा निगल रही हो। वो जोर से चिल्लाईं, “आह्ह्ह्ह… कितना मोटा है तुम्हारा… भर गया अंदर…”

मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए, फिर रफ्तार बढ़ाई। जोर-जोर से अंदर-बाहर। हर धक्के पर मैडम की आहें कमरे में गूंजने लगीं – “हां… ऐसे ही… और जोर से… आह्ह… दुशंत… चोदो मुझे…”। उनका जिस्म मेरे नीचे तड़प रहा था, स्तन उछल रहे थे, हाथ मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रहे थे।

फिर मैंने मैडम को पलटा और घोड़ी बनाया। वो घुटनों और हाथों के बल पर आ गईं। उनकी कमर नीचे झुकी हुई थी, और गांड ऊपर उठी हुई। वो गोल, भरी हुई, गोरी गांड मेरे सामने थी – इतनी आकर्षक कि देखते ही लंड और सख्त हो गया। मैंने दोनों हाथों से उनकी गांड के गाल पकड़े, हल्के से फैलाए और पीछे से लंड उनकी चूत पर रखकर एक झटका मारा। पूरा लंड फिर से अंदर चला गया।

मैडम की आह निकली, “आह्ह… हां… पीछे से अच्छा लग रहा है…” मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के पर उनकी गांड मेरी जांघों से टकरा रही थी, एक थप-थप की आवाज कमरे में गूंज रही थी। मैंने दाएं हाथ से उनकी गांड पर एक जोरदार थप्पड़ मारा। मैडम सिहर गईं, लेकिन आवाज में मजा था।

मैंने फिर थप्पड़ मारा, इस बार बाईं तरफ। उनकी गांड लाल होने लगी। मैडम बोलीं, “हां ऐसे ही… मेरी गांड भी मारो ना… थप्पड़ मारो जोर से…” मैंने और थप्पड़ मारे, साथ ही लंड को तेजी से अंदर-बाहर किया। उनकी चूत से रस बह रहा था, लंड पूरा गीला हो चुका था।

कुछ देर बाद मैंने लंड निकाला। मैडम की चूत खुली हुई थी, गीली और लाल। मैंने लंड का सिर उनकी गांड के छेद पर रखा। पहले हल्के से रगड़ा, फिर धीरे-धीरे दबाव डाला। मैडम की सांसें तेज हो गईं। वो दर्द से कराह रही थीं, “आह्ह… धीरे… पहले बार है इतने दिनों में…” लेकिन वो पीछे नहीं हट रही थीं। बल्कि कमर थोड़ी और नीचे करके मदद कर रही थीं।

मैंने धीरे-धीरे लंड अंदर डालना शुरू किया। गांड का छेद टाइट था, लेकिन गीलेपन की वजह से सरक रहा था। आधा लंड अंदर गया तो मैडम ने जोर से कराहा, “उफ्फ… दर्द हो रहा है… लेकिन रुको मत…” मैं रुका नहीं। पूरा लंड अंदर डाल दिया। मैडम की पीठ पर पसीना छूट रहा था।

फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। पहले हल्के, फिर तेज। मैडम की चीखें और आहें मिलकर एक कमाल का माहौल बना रही थीं – “आह्ह… हां… गांड में… जोर से… चोदो मुझे…” मैंने उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से पीछे से ठोका। गांड के गाल मेरी हथेलियों में दब रहे थे।

करीब आधे घंटे तक मैंने दोनों छेदों में बारी-बारी चोदा। कभी चूत में पूरी रफ्तार से, कभी गांड में धीरे-धीरे गहराई तक। मैडम बार-बार झड़ रही थीं, उनका जिस्म कांप रहा था। आखिर में मैडम ने हांफते हुए कहा, “अंदर ही झड़ दो… मैं गोली ले रही हूं… सब अंदर डाल दो…”

मैंने आखिरी जोर का धक्का मारा, लंड को चूत के सबसे गहरे में दबाया और झड़ गया। गर्म माल की धारें अंदर जाती रहीं। मैडम भी उसी वक्त झड़ गईं – उनका पूरा जिस्म कांप उठा, चूत सिकुड़ रही थी, आहें लंबी और गहरी निकल रही थीं।

हम दोनों थककर बेड पर लेट गए। पसीने से तर, सांसें तेज। मैडम ने अपना सिर मेरे सीने पर रख दिया, हाथ मेरी कमर पर लपेट लिया। उनकी आवाज थकी लेकिन खुश थी।

मैडम: ये रात मैं कभी नहीं भूलूंगी, दुशंत। जब तक बॉस ठीक नहीं होते, तुम मेरे साथ रहोगे ना?

मैंने उनके बाल सहलाते हुए मुस्कुराकर कहा,

मैं: हां मैडम… जितने दिन चाहें।

फिर हम दोनों ने एक-दूसरे को गहरा किस किया। होंठों पर हल्का नमक पसीने का था। हम ऐसे ही लिपटे रहे और धीरे-धीरे नींद आ गई। मेरी फ्लाइट तो बहुत पहले मिस हो चुकी थी, लेकिन उस रात की चुदाई उसके बदले हजार गुना बेहतर और यादगार थी।

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