Teacher ne student ka lund chusa – हाय, मेरे प्यारे पाठकों! मेरी पिछली कहानी को इतना प्यार देने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। कहानी में आगे बढ़ने से पहले, मैं एक बार फिर अपना परिचय दे देती हूँ।
कहानी का पिछला भाग: स्टूडेंट से चुद गयी – न चाहते हुए भी
मेरा नाम नाज़ूक खान है, और मेरी उम्र 38 साल है। मेरा फिगर 38-32-38 का है, और मेरा रंग एकदम गोरा है। मेरी हाइट 5 फीट 9 इंच है, और मैं बैंगलोर की रहने वाली हूँ। लेकिन शादी के बाद मैं हैदराबाद में रहने लगी हूँ। मेरी पिछली कहानी प्रेगनेंसी पर खत्म हुई थी। मुझे उम्मीद है कि आपको वो कहानी याद होगी। वो मेरे जीवन के सबसे खास दिन थे। आखिर एक औरत को और क्या चाहिए? बस ये कि वो एक दिन माँ बने। लेकिन अगर बच्चे का बाप आपका स्टूडेंट हो, तो?
मेरे पति, इमरान, को मैं क्या समझाऊँगी? और इस बच्चे को मैं कैसे रखूँगी? ये सवाल मेरे दिमाग में बार-बार घूम रहे थे। लेकिन हर्ष की बात को भी तो मैं नजरअंदाज नहीं कर सकती थी। आखिर वही तो इस बच्चे का असली बाप था।
एक दिन हर्ष ने मुझसे कहा, “मैम, आप अपने पति को छोड़ क्यों नहीं देतीं?”
मैंने जवाब दिया, “नहीं मेरी जान, वो मेरे पति हैं। मैंने उनके साथ निकाह किया है। उन्होंने मुझ पर बहुत भरोसा किया है।”
हर्ष ने कहा, “लेकिन मैम, ये मेरा बच्चा है। तो इसे मेरा धर्म ही फॉलो करना चाहिए ना?”
इस बात पर हमारी थोड़ी नोक-झोंक हो गई। मैं उसे समझाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वो अपनी जिद पर अड़ा था।
हर्ष ने फिर कहा, “मैम, आप मेरे घर एक बार चलो। मेरे परिवार से मिलो। और हाँ, वहाँ ये मत बताना कि आप शादीशुदा हैं।”
मैंने हैरानी से पूछा, “लेकिन क्यों?”
वो बोला, “आप बस चलो तो सही।”
मैंने सोचा, ठीक है, देखते हैं ये क्या चाहता है। मैंने कहा, “ठीक है, इस शनिवार को स्पेशल क्लास के बहाने मैं तुम्हारे घर आऊँगी। और हाँ, अच्छी सी साड़ी पहनकर आऊँगी। अब तो अपना मूड ठीक कर लो।”
हर्ष ने शरारती अंदाज में कहा, “नहीं, आप मुझे किस करो, तभी मूड ठीक होगा।”
फिर हमने एक लंबा, गहरा लिपलॉक किया। पूरे 10 मिनट तक हम एक-दूसरे के होंठों में खोए रहे। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी, और मेरे शरीर में एक गर्माहट सी दौड़ रही थी। दिन ऐसे ही बीतते गए।
शनिवार को मैंने अपने पति से कहा, “आज स्कूल में स्पेशल क्लासेस हैं। मुझे आपकी इजाज़त चाहिए थी।”
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इमरान ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे, इसमें इजाज़त की क्या बात? पढ़ाई करना तो अच्छी बात है।”
मैंने थोड़ा संकोच करते हुए कहा, “मैं आपको टाइम नहीं दे पा रही हूँ। इसलिए सोचा, आपसे पूछ लूँ।”
वो बोले, “कोई बात नहीं। तुम बिजी रहोगी, तो तुम्हारा मन भी फ्रेश रहेगा।”
मैंने कहा, “जी, आपका शुक्रिया।”
शनिवार की सुबह मैंने एक खूबसूरत नेट वाली साड़ी पहनी। साड़ी मेरे शरीर को पूरी तरह ढक रही थी, लेकिन मेरा फिगर उभरकर सामने आ रहा था। स्कूल के बाहर हर्ष ने मुझे रोक लिया और बोला, “मैम, साड़ी तो अच्छी है। लेकिन अगर ब्लाउज़ बैकलेस होता, तो और मज़ा आता।”
मैंने हँसते हुए कहा, “पागल हो गए हो क्या? मैं और बैकलेस? नहीं बाबा, नहीं।”
हर्ष ने ज़िद की, “प्लीज़ मैम, मेरे लिए इतना तो कर सकती हैं।”
मैंने कहा, “लेकिन मैं बैकलेस पहनती ही नहीं। मेरे पास कहाँ से होगा?”
वो मुस्कुराया और बोला, “टेंशन मत लो मैम, मैं साथ लाया हूँ।”
मैंने हैरानी से पूछा, “तुम्हें मेरा साइज़ कैसे पता?”
वो शरारती अंदाज़ में बोला, “क्या मैम, जिस जिस्म की मैं चुदाई करता हूँ, उसका साइज़ मुझे नहीं पता होगा?”
मैंने हँसते हुए कहा, “ओहो मेरी जान! ठीक है, दे दो मुझे। स्कूल खत्म होने के बाद पहन लूँगी।”
स्कूल की क्लासेस खत्म होने के बाद मैं स्टाफ रूम में गई और ब्लाउज़ चेंज किया। किस्मत से ब्लाउज़ मेरी साड़ी से पूरी तरह मैच कर रहा था। उसका डीप नेक और बैकलेस डिज़ाइन मेरे फिगर को और भी आकर्षक बना रहा था। हर्ष आया और बोला, “रेडी?”
मैंने कहा, “हाँ, रेडी।”
वो बोला, “क्या रेडी? आपने तो माथे पर बिंदी ही नहीं लगाई।”
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मैंने कहा, “मैं वैसे भी बिंदी नहीं लगाती।”
वो बोला, “रुकिए, मैं लगाता हूँ।”
उसने मेरे माथे पर एक छोटी सी लाल बिंदी लगाई। मैंने शीशे में खुद को देखा, तो सचमुच चेहरा और निखर गया। फिर हमने एक और लंबा किस किया। उसकी जीभ मेरे होंठों पर फिसल रही थी, और मेरे शरीर में सिहरन दौड़ रही थी। फिर हम उसके घर के लिए निकल गए।
रास्ते में हर्ष ने कहा, “मैम, मैं आपको वहाँ आपके नाम से बुलाऊँगा। और हाँ, याद रखना, आप शादीशुदा नहीं हैं।”
मैंने कहा, “ठीक है बाबा, याद रखूँगी। लेकिन तुमने बताया नहीं, मुझे अपने घर क्यों ले जा रहे हो?”
वो बोला, “सब जल्दी ही पता चल जाएगा।”
मैंने कहा, “ठीक है।”
हर्ष का घर पहुँचने में हमें 33 मिनट लगे। मैंने कहा, “तुम्हारा घर तो काफी दूर है।”
वो बोला, “हाँ, नाज़ूक।”
मैं थोड़ा घबराते हुए बोली, “मैं नर्वस हूँ।”
हर्ष ने कहा, “टेंशन मत लो, कुछ नहीं होगा। बस मेरे दादी-दादा और मम्मी-पापा के पैर छू लेना।”
मैंने हैरानी से कहा, “क्या? मैं क्यों?”
वो बोला, “नाज़ूक, प्लीज़ सवाल मत पूछो। जैसा मैं कह रहा हूँ, वैसा करो मेरे लिए।”
मैंने कहा, “ठीक है।”
हम उसके घर पहुँचे। उसका घर देखकर मैं दंग रह गई। मैंने कहा, “वाह! कितना खूबसूरत घर है। बहुत बड़ा और अच्छा बना हुआ है।”
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हर्ष ने कहा, “रेडी हो ना, नाज़ूक?”
मैंने कहा, “हाँ। लेकिन हर्ष, अगर मैं पैर छूने झुकूँगी, तो मेरी क्लीवेज दिखेगी ना?”
वो हँसते हुए बोला, “उतना तो चलता है, नाज़ूक।”
मैंने कहा, “लेकिन…”
वो बोला, “कोई लेकिन-वेकिन नहीं, चलो अब अंदर।”
हम अंदर गए, तो हर्ष की माँ ने हमें दरवाजे पर ही रोक लिया। उन्होंने कहा, “पहली बार आई हो, नज़र तो उतार लूँ।”
मेरे मन में मैंने सोचा, “हाय, कितनी प्यारी हैं आंटी!”
फिर मैंने उनकी नज़र उतारी और उनके पैर छुए। उन्होंने कहा, “जीती रहो, बेटा।”
फिर मैंने हर्ष के पापा और दादी-दादा के भी पैर छुए। हर्ष की दो बहनें मेरे पास आकर बैठ गईं। तभी उसकी माँ बोलीं, “बेटा, तुम तो बहुत खूबसूरत हो।”
उसके पापा ने कहा, “हाँ, और हाइट भी काफी लंबी है।”
माँ ने पूछा, “बेटा, तुम्हारा नाम क्या है?”
हर्ष ने तुरंत कहा, “माँ, मैंने बताया तो था।”
मैंने कहा, “जी, नाज़ूक।”
हर्ष ने जोड़ा, “नाज़ूक खान।”
मैं शॉक्ड हो गई और हर्ष की तरफ देखने लगी। उसने इशारे से मुझे चुप रहने को कहा। उसकी दोनों बहनें आपस में फुसफुसा रही थीं, “ये तो काफी बड़ी उम्र की लगती है।”
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मैं मन ही मन सोच रही थी, “ये सब क्या हो रहा है?”
तभी दादी बोलीं, “ये तो तुझसे बहुत बड़ी है ना, हर्ष?”
हर्ष ने कहा, “दादी, ये मेरी दोस्त है।”
उसकी माँ बोलीं, “बेटा, चलो पूजा करते हैं। हम लोग तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहे थे।”
मैंने मन में सोचा, “पता नहीं इन लोगों को मेरी उम्र 28 लग रही होगी।”
हर्ष ने धीरे से कहा, “मैंने 26 बताई है।”
मैंने धीमी आवाज़ में कहा, “क्यों? और ये सब क्या हो रहा है? पूजा और मैं? हर्ष, तुम भूल गए क्या कि मैं मुस्लिम हूँ और शादीशुदा भी?”
वो बोला, “नाज़ूक, प्लीज़ अभी चुप रहो। जैसा माँ कह रही हैं, वैसा करो।”
मैं मुस्कुराते हुए उसकी माँ के साथ पूजा वाले कमरे में चली गई। मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी मंदिर के सामने भी नहीं खड़ा हुआ था, पूजा करना तो दूर की बात। ये मेरा पहला अनुभव था।
सबसे पहले हर्ष के दादी-दादा ने आरती की। फिर उसके मम्मी-पापा ने आरती की। फिर उसकी माँ ने मुझे बुलाया। मैंने कहा, “नहीं-नहीं, आंटी।”
उन्होंने कहा, “कोई बात नहीं, बेटा। तुम आरती घुमाओ, हर्ष पढ़ेगा।”
हम दोनों ने मिलकर आरती की। करीब 10 मिनट तक हमने आरती की। हर्ष ने कहा, “जैसा मैं करता हूँ, वैसा करो।”
मैंने नर्वस होते हुए कहा, “हाँ, ठीक है।”
फिर उसने भगवान के चरणों में माथा टेका और मुझे इशारा किया कि मैं भी वैसा करूँ। मैंने भी वैसा ही किया। फिर उसकी माँ ने मेरे माथे पर तिलक लगाया। उन्होंने मुझे इतना प्यार और सम्मान दिया कि मैं भूल ही गई कि मुझे घर भी जाना है।
फिर मैंने हर्ष से कहा, “हर्ष, मुझे घर ड्रॉप कर दोगे?”
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वो बोला, “नाज़ूक, तुमने मेरा रूम तो देखा ही नहीं। 10 मिनट के लिए आओ ना।”
मैंने कहा, “लेट हो रहा है, हर्ष।”
वो बोला, “10 मिनट में कुछ नहीं होगा।”
हम उसके कमरे में गए। उसने दरवाज़ा बंद किया और मुझे किस करने लगा। उसका एक हाथ मेरी कमर पर था, और दूसरा मेरे गाल को सहला रहा था। मैंने कहा, “हर्ष, अभी नहीं। ये सब क्या हो रहा था? तुमने अपने घरवालों को नहीं बताया कि मैं तुम्हारी टीचर हूँ?”
वो बोला, “बेबी, शांत हो जाओ। तुम्हें ये सब कैसा लगा, वो बताओ।”
मैंने कहा, “बहुत अच्छा लगा।”
वो बोला, “तुम्हारी खुशी के लिए ये पूजा रखी थी।”
उसकी ये बात सुनकर मैं इमोशनल हो गई। मैंने उसे गले लगाया और ज़ोर-ज़ोर से किस करने लगी। मेरी साड़ी का पल्लू थोड़ा सा सरक गया, और मेरी क्लीवेज उभरकर सामने आ रही थी। मैंने कहा, “आज मैं भी तुम्हें खुश करके जाऊँगी।”
मैंने उसकी पैंट उतारी। उसका 7 इंच का लंड पहले से ही खड़ा था। मैंने उसे अपने मुँह में लिया और चूसने लगी। उसका लंड मेरे मुँह में फिसल रहा था, और मैं अपनी जीभ से उसके टिप को चाट रही थी। “उम्म… आह…” मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। हर्ष ने मेरे सिर को पकड़ लिया और धीरे-धीरे मेरे मुँह में धक्के देने लगा। मैंने उसका लंड 10 मिनट तक चूसा, और फिर उसका वीर्य मेरे मुँह में निकल गया। मैंने उसे निगल लिया और मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखा।
फिर मैंने अपनी साड़ी ठीक की और घर चली गई। अगले दिन क्या हुआ, ये आपको इस कहानी के अगले हिस्से में पता चलेगा। मैं अगली कहानी जल्दी पोस्ट करूँगी। आपका क्या ख्याल है, क्या मुझे हर्ष के साथ ऐसा रिश्ता जारी रखना चाहिए?
कहानी का अगला भाग: स्टूडेंट से चुद गयी – न चाहते हुए भी – 3
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