Student ne teacher ko jabarjasti choda – हाय, मेरा नाम नाज़ूक खान है। मेरी उम्र 38 साल है, और मेरा फिगर 38-32-38 का है। मेरा रंग एकदम गोरा है, और मेरी हाइट 5 फीट 9 इंच है। मैं खूबसूरत और आकर्षक दिखती हूँ, ऐसा लोग अक्सर कहते हैं। मैं मूल रूप से बैंगलोर की रहने वाली हूँ, लेकिन शादी के बाद अब हैदराबाद में रहती हूँ। ये कहानी मेरी जिंदगी की एक सच्ची घटना है, जो मेरे लिए कभी न भूलने वाली बन गई।
मेरी शादी बहुत कम उम्र में हो गई थी, उस वक्त मैं सिर्फ 18 साल की थी। मेरे पति, इमरान, बहुत अच्छे इंसान हैं। वो मुझे हर तरह से खुश रखते हैं और कभी कोई तकलीफ नहीं देते। लेकिन शादी के कई साल बाद भी हमें कोई बच्चा नहीं हुआ। मैंने कई डॉक्टरों से इलाज करवाया, टेस्ट कराए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इस बात से मैं अंदर ही अंदर टूट सी गई थी, पर इमरान ने मुझे हमेशा सपोर्ट किया।
शादी के बाद मैंने कुछ साल तक घर संभाला, लेकिन बच्चा न होने की वजह से जिंदगी में एक खालीपन सा रहने लगा। इमरान ने मुझे जॉब करने की इजाज़त दी, ताकि मैं अपने आप को व्यस्त रख सकूँ। मुझे हैदराबाद के एक स्कूल में टीचर की नौकरी मिल गई। शुरू में मैं पहली से पांचवीं क्लास के बच्चों को पढ़ाती थी। मुझे बच्चों के साथ वक्त बिताना अच्छा लगता था। दो साल बाद स्कूल ने मुझे आठवीं से बारहवीं क्लास के बच्चों को पढ़ाने का मौका दिया। यहीं से मेरी जिंदगी में एक नया मोड़ आया।
इसी दौरान मेरी मुलाकात हर्ष माथुर से हुई। हर्ष 18 साल का एक समझदार और होनहार स्टूडेंट था। वो बारहवीं क्लास में पढ़ता था, लंबा, गोरा, और थोड़ा सा शरारती। उसका चेहरा मासूम था, लेकिन आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो मुझे बाद में समझ आई। वो हमेशा क्लास में सबसे आगे वाली बेंच पर बैठता था। मैं सोचती थी कि शायद उसे पढ़ाई में बहुत रुचि है, लेकिन असल में उसका मकसद कुछ और ही था।
एक दिन क्लास में मैंने उससे पूछा, “हर्ष, तुम समझ गए ना, या कोई डाउट है?”
हर्ष ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ मैम, सब समझ गया। वैसे मैम, आप इतना खूबसूरत फिगर कैसे मेंटेन करती हैं?”
मैंने हल्के से हँसते हुए जवाब दिया, “ये तो नेचुरल है, हर्ष।”
वो तुरंत बोला, “कसम से मैम, अगर मेरी गर्लफ्रेंड आप जैसी होती, तो मैं दिन-रात उसे बिस्तर से उठने न देता।”
क्लास में हल्की-फुल्की हँसी छा गई। मैंने इसे मजाक समझकर टाल दिया। लेकिन हर्ष की ये बातें धीरे-धीरे बढ़ने लगीं। वो बार-बार मेरे पल्लू को देखता, जैसे इंतज़ार कर रहा हो कि वो कब गिरे। एक दिन मैंने जानबूझकर अपना पल्लू थोड़ा सा गिरा दिया, बस ये देखने के लिए कि वो क्या करता है।
हर्ष ने तुरंत कहा, “मैम, संभाल के! कीमती सामान है, कहीं गिर न जाए।”
मैंने हँसते हुए जवाब दिया, “बेटा, ये कीमती सामान किसी और के लिए है।”
वो शरारत भरी मुस्कान के साथ बोला, “मैम, हमें भी कभी मौका दीजिए ना।”
मैंने उसे हल्के से डांटते हुए कहा, “चल हट, नॉटी!”
क्लास खत्म होने के बाद सारे बच्चे चले गए, लेकिन हर्ष रुका रहा। मैंने पूछा, “हर्ष, तुम नहीं जाओगे?”
वो थोड़ा हिचकिचाते हुए बोला, “मैम, वो मैं…”
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मैंने कहा, “हाँ, बोलो, क्या बात है?”
वो फिर रुक गया, और फिर अचानक बोला, “मैम, मैं आपको फक करना चाहता हूँ। आपकी गांड ने मेरी रातों की नींद उड़ा दी है। मैं रात-रात भर सो नहीं पाता।”
मैं स्तब्ध रह गई। मैंने गुस्से में कहा, “पागल हो गए हो क्या? मैंने तुमसे हँसकर चार बातें क्या कर लीं, तुमने अपने आपको क्या समझ लिया?”
हर्ष ने कहा, “मैम, मैं आपको रेप नहीं करना चाहता।”
मैंने उसे समझाने की कोशिश की, “देखो हर्ष, मैं एक शादीशुदा औरत हूँ। हाँ, मानती हूँ कि तुम्हारी उम्र में लड़कों के ऐसे खयाल आते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि तुम अपनी टीचर के साथ ऐसा सोचो।”
वो बार-बार “प्लीज़, प्लीज़” कहने लगा, और मैं उसे मना करती रही। लेकिन अचानक उसने मेरे पास आकर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और ज़ोर-ज़ोर से मुझे किस करने लगा। मैंने गुस्से में आकर उसे एक जोरदार थप्पड़ मार दिया।
इससे वो और भड़क गया। उसने मेरी साड़ी का पल्लू पकड़ लिया और खींचने लगा। मैं चिल्लाई, “मैं पुलिस को बुला लूँगी!”
वो बोला, “मैं किसी से नहीं डरता।”
मैं मदद के लिए दरवाजे की तरफ भागी, लेकिन उसने कहा, “कोई फायदा नहीं, मैम। मेरे दोस्तों ने बाहर से दरवाजा बंद कर दिया है।”
मैंने गिड़गिड़ाते हुए कहा, “हर्ष, ये गलत है। प्लीज़ मुझे जाने दो।”
वो धीरे-धीरे मेरे पास आया और बोला, “बस एक बार, मैम। इसके बाद मैं आपको कभी फोर्स नहीं करूँगा।”
ये कहते हुए उसने फिर से मुझे किस करना शुरू कर दिया। मैं उसे रोकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी ताकत के सामने मेरी एक न चली। उसने मेरी साड़ी खींचकर उतार दी। अब मैं सिर्फ ब्लाउज़ और पेटीकोट में थी। मेरे दिल में डर था, लेकिन कहीं न कहीं मेरे शरीर में एक अजीब सा उन्माद भी जाग रहा था। ये पहली बार था जब मैं अपने पति के अलावा किसी और मर्द के इतने करीब थी।
हर्ष ने धीरे-धीरे मेरे ब्लाउज़ के बटन खोलने शुरू किए। मैं रो रही थी, लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। उसने मेरा ब्लाउज़ उतार दिया। अब मैं सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में थी। वो मेरे बूब्स को देखकर पागल सा हो गया और बोला, “वाह मैम, आप तो एकदम मिया खलीफा हो! इतने बड़े-बड़े बूब्स!”
उसने मेरे बूब्स को धीरे-धीरे दबाना शुरू किया। उसका स्पर्श मेरे शरीर में सिहरन पैदा कर रहा था। फिर उसने मेरा पेटीकोट भी खोल दिया। अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी। उसने मेरी पैंटी उतारी और मेरी चूत को चाटने लगा। उसकी जीभ मेरी चूत पर फिसल रही थी, और मैं खुद को रोक नहीं पा रही थी।
मैंने कहा, “आह… प्लीज़, मत करो…”
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वो बोला, “मैम, आपकी चूत का मज़ा ही कुछ और है।”
मैं सिसकते हुए बोली, “प्लीज़… आह…”
वो हँसते हुए बोला, “अभी तो शुरुआत है, मैम। आगे-आगे देखो।”
मैं रोते हुए अपने पति को याद कर रही थी। इमरान मुझ पर इतना भरोसा करते थे, और मैं यहाँ अपने ही स्टूडेंट के साथ ये सब कर रही थी। मैंने बहुत कोशिश की उसे रोकने की, लेकिन अब मुझसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था। मेरे शरीर ने मेरे दिमाग को धोखा दे दिया था।
मैंने धीरे से कहा, “और चाटो ना… मेरी चूत को…”
हर्ष हँसते हुए बोला, “साली, अब आई ना अपने असली रंग में?”
मैंने कहा, “हाँ, अब और कितना तड़पाओगे? अपने लंड के दर्शन करवाओ।”
उसने अपनी पैंट उतारी, लेकिन उसका लंड अभी खड़ा नहीं था। मैंने पूछा, “इसे खड़ा होने में कितना टाइम लगेगा?”
वो बोला, “थोड़ा टाइम लगेगा। तुम इसे मुँह में लो, ये झट से खड़ा हो जाएगा।”
मैंने कहा, “नहीं, मैंने कभी मुँह में नहीं लिया।”
वो ज़िद करने लगा, “आज ले लो, चलो जल्दी करो।”
मैंने मना किया, लेकिन उसने जबरदस्ती मेरा सिर पकड़कर अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। पहले तो मुझे उल्टी जैसा लगा, लेकिन धीरे-धीरे मुझे मज़ा आने लगा। मैंने उसके 7 इंच के लंड को 15 मिनट तक चूसा। उसका लंड अब पूरी तरह खड़ा था, और मेरी चूत गीली हो चुकी थी।
मैंने कहा, “अब और कितना तड़पाओगे? डाल दो ना अंदर।”
उसने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और धीरे से अंदर डाला। मुझे हल्का सा दर्द हुआ, और मैंने कहा, “प्लीज़, इसे बाहर निकाल दो।”
वो बोला, “नहीं।”
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उसने एक और झटका मारा, और उसका पूरा लंड मेरी चूत में समा गया। मैं जोर से चिल्लाई, “आह… माँ, मर गई… प्लीज़ निकाल दो!”
वो बोला, “अभी तो कहाँ गया है?”
फिर उसने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। मेरी चूत में दर्द के साथ-साथ मज़ा भी आने लगा। क्लासरूम में मेरी सिसकारियाँ और चुदाई की आवाज़ें गूँज रही थीं। “थप-थप… आह… ऊह…”
मैंने कहा, “और जोर से चोदो… मुझे रगड़ दो!”
वो और तेज़ हो गया। करीब 20 मिनट बाद उसने पूछा, “मैम, पानी अंदर ही डाल दूँ?”
मैंने कुछ नहीं कहा, और उसने अपना सारा माल मेरी चूत में डाल दिया। मैं हाँफ रही थी। मैंने जल्दी से अपनी साड़ी पहनी और घर चली गई।
कुछ दिन मैं स्कूल नहीं गई। लेकिन हर्ष की चुदाई मेरे दिमाग में बस गई थी। मैंने उसे मैसेज किया, “आज उसी क्लासरूम में तैयार रहना।” जब मैं वहाँ पहुँची, वो तैयार था। उस दिन के बाद जब भी मेरा मन करता, मैं हर्ष से चुदवाती।
दो महीने बाद मुझे पता चला कि मैं प्रेगनेंट हूँ। मुझे यकीन था कि ये बच्चा हर्ष का है। मैंने सोचा कि मैं इसे गिरा दूँगी, लेकिन हर्ष ने कहा, “मैम, आप इस मासूम की जान क्यों लोगी?”
मैंने कहा, “तो मैं इसे कैसे जन्म दूँ, वो भी तुम्हारे बिना?”
दोस्तों, आगे क्या हुआ, ये मैं आपको इस कहानी के अगले हिस्से में बताऊँगी। आपका क्या ख्याल है, क्या मुझे ये बच्चा रखना चाहिए?
कहानी का अगला भाग: स्टूडेंट से चुद गयी – न चाहते हुए भी – 2
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