Teacher ka gangbang sex story: मेरा नाम सुधा है। मैं 28 साल की हूँ। मेरी शादी को छह साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ। कोटा में पति के साथ रहती हूँ। पति सरकारी नौकरी में हैं। सुबह जल्दी निकल जाते हैं और रात आठ बजे लौटते हैं।
पिछले दो साल से हमारे बीच सेक्स लगभग बंद हो गया था। पति थकान का बहाना बनाते या फिर झगड़ा करके सो जाते। कई बार मैंने कोशिश की लेकिन वे मना कर देते। मैं अंदर ही अंदर बहुत प्यासी होती जा रही थी।
मैं घर पर चार लड़कों को ट्यूशन पढ़ाती हूँ। वे सभी 19-20 साल के जवान हैं। शुरू में सब कुछ सामान्य था। लेकिन मैं साड़ी में डीप गले वाले ब्लाउज पहनती थी। जब झुककर पढ़ाती तो मेरी चूचियां आधा दिख जाती थीं। उनकी नजरें बार बार मेरे स्तनों और कमर पर अटकती थीं। मुझे महसूस होता कि उनके पैंट में उभर आता है। मैं शर्माती लेकिन अंदर से एक अजीब सी खुशी भी होती।
एक दिन क्लास के दौरान मैंने उन्हें डांटा कि पढ़ाई पर ध्यान दो। तो अनिल ने हिम्मत करके कहा, “मैडम हम रात को आपके बारे में सोचकर हिलाते हैं।” दूसरे लड़के ने भी कबूल किया कि उनके पास मेरा फोटो है।
मुझे झटका लगा। गुस्सा चढ़ आया। मैंने तेज आवाज में कहा, “क्या बेहूदा बातें कर रहे हो? मैं तुम्हारी टीचर हूँ। ऐसी गंदी बातें करने की हिम्मत कैसे हुई? आज क्लास खत्म। सब निकल जाओ।”
वे डर गए और माफी मांगते रहे। मैंने उन्हें बाहर भेज दिया। लेकिन उस रात पति के आने के बाद भी उनकी बातें मेरे दिमाग में घूम रही थीं। पति फिर थकान का बहाना करके सो गए। मैं बिस्तर पर लेटी रही। उनकी बात याद करके मेरी चूत गीली हो गई।
मैंने पहली बार अपने हाथ नीचे ले जाकर अपनी चूत सहलाई। उनकी बात याद करके मैंने अपनी उंगलियां अंदर डालीं और कल्पना की कि वे मुझे छू रहे हैं। कुछ ही मिनट में मैं जोर से झड़ गई। बाद में बहुत शर्म आई। “सुधा तू क्या कर रही है? वे तेरे स्टूडेंट हैं।”
अगले कुछ दिन क्लास में मैंने साड़ी थोड़ी साधारण पहनी। लेकिन उनकी नजरें अब भी मेरे शरीर पर घूमती रहती। मैं नोटिस करती कि वे बार बार अपनी पैंट एडजस्ट करते। एक दिन रघु ने झुककर कुछ पूछा तो उसकी सांस मेरी गर्दन पर पड़ी। मेरे बदन में करंट दौड़ गया।
क्लास के बाद मैं अकेली रह जाती तो फिर वही कल्पनाएं। खाली कक्षा में मेरी कुर्सी पर बैठे हुए मेरे मन में बार-बार वे चार लड़के घूमने लगते। मैं बाथरूम में जाकर दरवाजा बंद करती और अपने कपड़े उतारने लगती। शीशे के सामने खड़ी होकर मैं अपनी उभरी हुई छातियों को देखती, फिर धीरे से अपनी उंगलियों को अपनी चूत पर ले जाती।
मैं अपनी गीली चूत की फांकों को अलग करके बीच वाली उंगली को अंदर डालती। शुरू में धीमी गति से अंदर-बाहर करने लगती। लेकिन जल्दी ही खुद को रोकने की कोशिश करती, मन में लड़ाई चलती कि यह गलत है, मैं शादीशुदा हूं, लेकिन उत्तेजना इतनी तेज होती कि आत्म नियंत्रण ढीला पड़ने लगता। मैं अपनी चूत को रगड़ने लगती, हथेली से पूरी चूत पर दबाव डालकर ऊपर-नीचे रगड़ती, क्लिटोरिस को अंगूठे से दबाकर घुमाती। कभी-कभी कल्पना करती कि एक लड़का मेरे होंठों को चूस रहा है, उसकी जीभ मेरी जीभ से उलझ रही है और उसके हाथ मेरी कमर को जकड़े हुए हैं। कभी चारों लड़कों के हाथ अपने शरीर पर महसूस करती। एक की उंगलियां मेरी छातियों को मसल रही हैं, दूसरे की जीभ मेरी गर्दन चाट रही है, तीसरा मेरी जांघों के बीच मुंह लगाए हुए है और चौथा मेरे बालों में उंगलियां फेर रहा है।
उत्तेजना बढ़ने पर मैं तेजी से उंगली चलाने लगती। मेरी सांसें भारी हो जातीं, आंखें बंद हो जातीं और मुंह से हल्की-हल्की आहें निकलने लगतीं। चूत से रस निकलकर जांघों पर बहने लगता। मैं खुद को रोकने की बहुत कोशिश करती लेकिन शरीर कांपने लगता, आत्म नियंत्रण पूरी तरह टूट जाता। आखिरकार जब झड़ने का क्षण आता तो पूरा शरीर कांप उठता, चूत सिकुड़ती और गर्म तरल बाहर निकल आता। हर बार झड़ने के बाद गहरा अपराधबोध होता लेकिन अगली बार फिर वही होता।
पति के साथ झगड़े बढ़ गए थे। वे कहते, “तुम्हें बच्चा नहीं हो रहा तो शायद तुममें ही कमी है।” वे बार-बार पूछते, “क्या तुम ठीक से सहयोग नहीं करती हो? मैं तो रोज कोशिश करता हूं।” रात में जब वे मुझे चोदने की कोशिश करते तो उनका छोटा लिंग मुश्किल से अंदर जाता, बस कुछ ही सेकंड में ढीला पड़ जाता और वे झड़ जाते। वे नाकाम होकर गुस्सा करते, “तुम्हारी चूत इतनी ढीली क्यों है? तुममें ही कुछ समस्या है। बच्चा क्यों नहीं आ रहा? डॉक्टर के पास क्यों नहीं जाती? क्या तुम जानबूझकर नहीं चाहती हो?” ये सारी बातें और सवाल मुझे बहुत तोड़ देते। मैं सोचती कि अगर कोई मुझे सच में चाहे, मेरी चूत को अच्छे से भर दे तो कितना अच्छा हो।
धीरे धीरे हफ्ता भर गुजर गया। एक दिन क्लास खत्म होने के बाद वे चारों रुके रहे। घुटनों पर बैठ गए और बोले, “मैडम हम आपसे प्यार करते हैं। हम आपको खुश रखेंगे। हम आपसे सेक्स करना चाहते हैं।”
मैं डर गई। “क्या पागल हो गए हो? मैं शादीशुदा हूँ। एक भी लड़के के साथ सोचना पाप है। और तुम चारों… एक साथ? ये तो नामुमकिन है।” मैंने साफ मना कर दिया। वे निराश होकर चले गए।
लेकिन उस रात मैंने फिर खुद को छुआ। इस बार कल्पना में चारों थे। मैं डर रही थी लेकिन उत्तेजना बहुत ज्यादा थी। पति फिर बाहर गए हुए थे। मैं कई रातें इसी संघर्ष में गुजारती।
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दूसरे हफ्ते वे फिर आए। उन्होंने कहा कि वे किसी को कुछ नहीं बताएंगे। मैंने फिर मना किया लेकिन इस बार आवाज कमजोर थी। मन में सवाल उठ रहे थे। “अगर पति मुझे संतुष्ट नहीं कर पा रहे तो क्या गलत है?”
आखिर एक दिन मैंने हां कर दी लेकिन बहुत शर्तों के साथ। “कल सुबह दस बजे आना। और बहुत सावधानी से।”
रात भर मैं रोई भी और उत्तेजित भी रही। “चारों एक साथ? मेरी चूत कैसे सह पाएगी? लेकिन अब वापसी भी नहीं है।”
अगले दिन पति दूसरे शहर चले गए। मैंने दरवाजा खुला छोड़ दिया और नहाने चली गई। वे आए और बाथरूम के बाहर खड़े होकर बोले, “मैडम प्लीज खोलिए।”
मैं कांप रही थी। कई बार मन में आया कि मत खोल, भाग जा, यह बहुत बड़ा पाप है, लेकिन मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी और दिल जोरों से धड़क रहा था। आत्म नियंत्रण लगातार ढीला पड़ रहा था। आखिर मैंने कांपते हाथों से दरवाजा खोल दिया। तौलिया झटके से हट गया। मैं पूरी तरह नंगी खड़ी थी। शर्म से मेरा चेहरा लाल हो गया। “रुको… धीरे… ये बहुत गलत है,” मैंने कहा।
चारों ने मुझे घेर लिया। एक लड़के ने मेरी दोनों चूचियों को जोर से दबाया, अपनी उंगलियों से निप्पल्स को मसलने लगा। दूसरे ने मेरी गांड को दोनों हाथों से फैलाकर सहलाया, अपनी उंगली को गांड की दरार में घुमाने लगा। तीसरे ने मेरी कमर को पकड़ लिया और चौथे ने मेरी जांघों को छूते हुए ऊपर की ओर हाथ फेरा। मैं नीचे बैठ गई और कांपते हाथों से उनके लंड चूसने लगी। पहले लड़के का मोटा लंड मेरे मुंह में लिया, जीभ से उसकी टिप को चाटा, फिर धीरे-धीरे आगे पीछे मुंह चलाने लगी। मन में बार बार आवाज आ रही थी, “सुधा तू रंडी बन गई।” फिर मैं दूसरे का लंड मुंह में लेने लगी, तीसरे को हाथ से रगड़ने लगी। मेरी चूत से रस टपक रहा था और शर्म के साथ-साथ भारी उत्तेजना भी बढ़ रही थी।
वे मुझे बेडरूम ले गए। फर्श पर लिटाया। मेरी टांगें फैलाकर एक मेरी चूत चाटने लगा। उसकी गर्म जीभ मेरी चूत की फांकों को चाट रही थी, क्लिटोरिस को चूस रहा था और अंदर उंगली डालकर हिला रहा था। दूसरा मुंह में लंड दे रहा था, जो गहराई तक धकेल रहा था। मैं कराह रही थी, “आह… नहीं… हां… धीरे।”
अब मैं पूरी गमर हो चुकी थी, पहली बार मुझे चुदाई का मजा मिलने वाला था, शादी के पहले मैंने अपने कुँवारापन अपने पति के लिए बचाया था लेकिन मेरा पति ही बेकार निकला, अब जब मुझे मौका मिला है औरत होने का सुख भोगने का वो भी चार चार लण्ड एक साथ तो मैंने चुना खुल कर मजा लेने का। अब मैं घुटनों पर बैठ गई। चारों लड़के मेरे सामने एक सीधी लाइन में खड़े हो गए अपना जवान लण्ड झुलाते हुए।
मैंने ऊपर देखते हुए पूछा, “तुम लोगो ने पहले कितनी बार किया है? सच बताना।” वे सब शरमाते हुए मुस्कुराए और अनिल ने जवाब दिया, “मैडम, हम सब अभी तक कुंवारे हैं। हमने कभी किसी लड़की को छुआ तक नहीं है।” यह सुनकर मेरी चूत और भी गीली हो गई। चारों लड़के वर्जिन थे और उनके लंड बहुत मोटे, नसों से भरे और गर्म थे। उनके लंड मेरे चेहरे के सामने झूल रहे थे, पूरी तरह खड़े, मोटी-मोटी नसें उभरी हुईं और सिर से थोड़ा-थोड़ा प्री-कम रिस रहा था।
मैंने बारी-बारी से उनके लंड चूसने शुरू किए।
पहले अनिल का लंड। उसका लंड सबसे मोटा और लंबा था, पूरी शाफ्ट पर मोटी-मोटी नसें उभरी हुई थीं। मैंने उसका मोटा सिर मुंह में लिया और जोर से चूसने लगी। अनिल कराह उठा, “वाह मैडम… आपकी गरम जुबान… आपकी चूचियां कितनी बड़ी और टाइट हैं… बहुत सॉफ्ट हैं।” मैंने पूरा लंड मुंह में लेने की कोशिश की और गला भर गया।
उसका लंड इतना मोटा और लंबा था कि पूरा मुंह में नहीं आ पा रहा था। मैंने सिर्फ आधा ही ले पाई, फिर भी मेरे गले तक दबाव पड़ रहा था। मैंने दोनों हाथों से बाकी शाफ्ट को पकड़कर रगड़ना शुरू किया जबकि मुंह से ऊपरी हिस्से को जोर-जोर से चूस रही थी। मेरी जीभ उसके मोटे सिर के चारों ओर घुमा रही थी, नसों पर दबाव डाल रही थी। अनिल की सांसें भारी हो गईं और वह मेरे बालों को पकड़कर हल्का-हल्का धक्का देने लगा।
मैं तेजी से सिर हिलाने लगी, जितना ले पाती उतना गहरा लेने की कोशिश करती, लेकिन उसकी मोटाई के कारण पूरा नहीं समा पाता था। मुंह से लार निकलकर उसके लंड पर बह रही थी। मैंने उसके अंडकोष को सहलाया, हल्का दबाया और चूसने की गति बढ़ा दी। अनिल कराहते हुए बोला, “मैडम… बहुत तेज… मैं रोक नहीं पा रहा।” उसका शरीर तन गया, लंड मेरे मुंह में और भी सख्त हो गया। आखिरकार वह जोर से कांपा और गाढ़ा गर्म वीर्य मेरे मुंह में फूट पड़ा। मैंने जितना ले पाया निगल लिया, बाकी मेरे होंठों के कोनों से निकलकर चिन पर बह गया।
फिर रघु का नंबर। उसका लंड लंबा, पतला लेकिन घुमावदार था, बीच में मोटी नसें थीं जो उभरी हुई थीं और स्पर्श में गर्म तथा सख्त महसूस हो रही थीं। मैंने घुटनों पर बैठकर उसके सामने अपना मुंह खोला। पहले अपनी गर्म और नम जीभ बाहर निकालकर उसके लंड के सिरे को चाटा। नमक जैसे स्वाद और हल्की मांस जैसी गंध मेरी नाक में भर गई। फिर धीरे से मैंने उसके घुमावदार लंड को अपने मुंह में ले लिया।
मेरे होंठ उसके शाफ्ट के चारों ओर कसकर बंद हो गए। मैंने सिर को तेजी से आगे-पीछे हिलाना शुरू कर दिया। हर बार आगे झुकते समय उसका लंड मेरी जीभ पर रगड़ खाता हुआ गले तक चला जाता। इससे मेरी आंखों में पानी आ जाता और सांस लेना मुश्किल हो जाता। मेरी जीभ लगातार उसकी मोटी नसों को लपेट रही थी। चूसने की गीली और चटकती आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। रघु की सांसें तेज हो रही थीं और उसका शरीर कांपने लगा था।
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रघु ने अपने दोनों हाथों से मेरे घने बाल पकड़ लिए। उसने हल्का सा झटका देते हुए मेरे मुंह को और गहराई में धकेलना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियां मेरी खोपड़ी पर जोर से दब रही थीं। अचानक उसका लंड मेरे मुंह में और भी सख्त हो गया। नसें फड़कने लगीं। रघु जोर से कराहा और पहला झटका लगा। गर्म और गाढ़ा वीर्य मेरे मुंह में फूट पड़ा।
मैं हैरान रह गई। इतना ज्यादा वीर्य किसी से उम्मीद नहीं थी। पहला फव्वारा इतना भारी था कि मेरी जीभ डूब गई। फिर दूसरा, तीसरा और चौथा झटका आया। मोटी-मोटी धारें मेरे गले में उतर रही थीं। कुछ वीर्य मेरे होंठों के कोनों से बाहर निकलकर ठोड़ी पर टपकने लगा। स्वाद नमकीन और थोड़ा मीठा था। मैं पूरी कोशिश कर रही थी कि सब निगल लूं लेकिन इतनी मात्रा थी कि मुंह भर गया। रघु अभी भी कांप रहा था और आखिरी बूंदें भी निकल रही थीं।
रघु ने मेरे बाल पकड़े और बोला, “मैडम आपकी गांड कितनी गोल और उभरी हुई है… चूसते वक्त आपकी आंखें कितनी सेक्सी लग रही हैं।”
तीसरा विक्रम। उसका लंड मोटा सिर वाला और बहुत गाढ़ा था, नसें साफ दिख रही थीं। मैंने घुटनों के बल बैठकर उसके सामने मुंह खोला। पहले मैंने अपनी गर्म जीभ से उसके मोटे लंड के सिरे को चाटा, फिर धीरे-धीरे अपने होंठों को फैलाकर उसे मुंह में ले लिया। मेरे गाल अंदर की तरफ धंस गए क्योंकि उसकी मोटाई मेरे मुंह को पूरी तरह भर रही थी। मैंने उसे चूसते हुए कहा, “विक्रम… तुम्हारा लंड कितना मोटा है।”
वह बोला, “मैडम आपकी चूत देखकर ही खड़ा हो गया… आपकी कमर कितनी पतली है, चोदने में मजा आएगा।”
आखिर राहुल। उसका लंड सबसे मोटा और छोटा लेकिन बहुत मजबूत और पूरी तरह नसों से भरा था। मैंने अपना मुंह जितना फैला सकता था उतना खोला और उसे गहरी गले तक लिया। मेरी आंखें पानी से भर गईं, गला भरा हुआ महसूस हो रहा था। राहुल ने मेरे बाल पकड़कर हल्का दबाव डाला। मैंने जोर-जोर से चूसना शुरू किया, मेरी जीभ उसकी उभरी हुई नसों पर घूम रही थी। राहुल ने कहा, “सुधा मैडम… आपकी चूचियां कितनी बड़े-बड़े निप्पल वाली हैं… हम चारों आपको रोज चोदना चाहते हैं।”
मेरे मुंह से लार और थोड़ा वीर्य का मिश्रण टपक रहा था। मेरी ठोड़ी और गर्दन पर गाढ़ा सफेद वीर्य बह रहा था, जो ब्लोजॉब की वजह से अभी भी मेरे होंठों से रिस रहा था। ब्लोजॉब के बाद वे मुझे फर्श पर लिटा दिया।
अनिल सबसे पहले मेरे ऊपर चढ़ गया। उसने मेरी दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं और मेरी कमर को ऊंचा करके मेरी चूत को पूरी तरह खोल दिया। उसने अपना मोटा लंड मेरी गीली चूत में एक जोरदार धक्के से घुसा दिया। “आह्ह… उफ्फ… अह्ह… अनिल… बहुत मोटा है… धीरे… आह… मेरी चूत फट जाएगी… हां…!” मैं जोर से चीख पड़ी।
वह पागलों की तरह जोर-जोर से ठोकने लगा। हर धक्का इतना तेज और गहरा था कि मेरी पूरी देह हिल रही थी। उसके भारी कूल्हे मेरी जांघों से चट-चट-चट की तेज आवाज के साथ टकरा रहे थे। मेरे बड़े स्तन उछल-उछलकर उसके चेहरे पर लग रहे थे। “फाड़ दो मेरी चूत को… हां… और जोर से चोदो… रंडी बना दो मुझे… आह… उफ्फ… मुझे चोदते रहो… और तेज…!” मैं बेसुध होकर गालियां दे रही थी।
अनिल की सांसें तेज हो गईं। वह और भी जोर से पेलने लगा। आखिरकार वह जोर से कराहा और मेरी चूत के अंदर गर्म-गर्म वीर्य की मोटी धारें छोड़ने लगा। उसका पूरा वीर्य मेरी चूत में भर गया और कुछ बाहर निकलकर जांघों पर बहने लगा।
जैसे ही अनिल हटा, रघु ने मुझे घोड़ी बनाया। मैं चारों हाथ-पैरों पर थी। मेरी पीठ नीचे झुकी हुई थी और गांड ऊपर उठी हुई थी। उसने पीछे से अपना लंबा घुमावदार लंड मेरी वीर्य से भरी चूत में एक ही झटके में पूरा डाल दिया। “आह्ह… रघु… हां… फाड़ दो… आह…!” मैं चीख पड़ी।
वह बेतहाशा तेजी से पेलने लगा। उसके हर धक्के से मेरी गांड जोर-जोर से हिल रही थी और चूत से चुदाई की गीली चट-चट-चट आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। “हां… रघु… और जोर से… आह… मेरी गांड पकड़ो… फाड़ दो आज… चोदो मुझे और तेज… मैं तुम्हारी रंडी हूं… मुझे और चोदो…!” मैं खुशी में गालियां देते हुए चिल्ला रही थी।
रघु ने मेरी कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ लिया और जानवर की तरह तेज-तेज ठोके मारने लगा। उसका घुमावदार लंड मेरी चूत की हर दीवार को रगड़ता हुआ गहराई तक जा रहा था। मेरी चूत से सफेद वीर्य और रस का मिश्रण बाहर निकलकर जांघों पर बह रहा था। अचानक मेरे शरीर में तेज झनझनाहट होने लगी। “आह… रघु… मैं झड़ने वाली हूं… हां… हां…!” मेरी चूत सिकुड़ने लगी और मैं जोर से चीखते हुए पानी की फुहार छोड़ते हुए झड़ गई। गर्म पानी मेरी जांघों पर छूट गया।
वह बोला, “मैडम आपकी गांड हिल रही है… कितनी सेक्सी हो आप।”
विक्रम ने मुझे साइड पोजीशन में चोदा। मेरी एक टांग ऊपर थी। वह मेरी चूत में घुसता और चूचियां चूसता। “विक्रम… हां… मेरी चूचियां चूसो… काटो… आह…!” मैं कराह रही थी। उसका मोटा लंड मेरी चूत को फैलाता हुआ गहरी चोट कर रहा था। वह मेरे निप्पल को मुंह में लेकर जोर से चूस रहा था और दांतों से हल्का-हल्का काट भी रहा था। उसकी गति तेज होती गई। “आह… विक्रम… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… हां…!”
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कुछ ही देर में मेरी चूत फिर सिकुड़ी और मैं फिर पानी की फुहार छोड़ते हुए झड़ गई। मेरा पूरा शरीर कांप रहा था।
राहुल ने मुझे काउगर्ल पोजीशन में बिठाया। मैं उसके ऊपर उछल रही थी। “राहुल… तुम्हारा मोटा लंड मेरी चूत भर रहा है… हां… और तेज…” मैं अपने कूल्हों को तेजी से ऊपर-नीचे कर रही थी। वह नीचे से मेरी चूचियां जोर-जोर से दबाते हुए बोला, “मैडम आपकी नाभि कितनी सुंदर है… आपकी पूरी देह परफेक्ट है।”
मैं उसके ऊपर उछलते-उछलते थक गई थी लेकिन रुक नहीं रही थी। राहुल ने नीचे से तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए। “आह… राहुल… तुम्हारा मोटा लंड मेरी चूत को चीर रहा है… हां… और तेज चोदो…!” तीसरी बार मेरी चूत सिकुड़ गई और मैं जोर से चीखते हुए पानी फूटते हुए झड़ गई।
फिर वे अलग-अलग यूनिक पोजीशन ट्राई करने लगे। एक बार अनिल और रघु ने मुझे दोनों तरफ से चोदा — एक चूत में, दूसरा मुंह में। विक्रम और राहुल मेरी चूचियां चूस रहे थे। मैं चीख रही थी, “आह… ओह मेरे भगवान… चार लंड… मुझे फाड़ दो… हां… चोदो अपनी रंडी टीचर को…”
वे बारी-बारी बदलते रहे। मैंने उन्हें सिखाया कि कैसे संवेदनशील जगह चूसें, कैसे गहरी जगह पर ठोकें। दो घंटे तक लगातार चुदाई चली। मैं चार-पांच बार झड़ चुकी थी। आखिर में चारों ने मेरी चूत, मुंह और चूचियों पर अपना गर्म वीर्य निकाला।
वे चले गए तो मैं फर्श पर पड़ी रही। शरीर लाल निशानों से भरा था। मैं रो रही थी। “मैंने पति को धोखा दे दिया।” लेकिन शाम होते-होते फिर वही चाहत जाग गई।
उसके बाद यह रोज का सिलसिला बन गया। कभी किचन में, कभी बाथरूम में। मैं उनकी लालसा का खिलौना बन चुकी थी। इस चुदाई के बाद मैं रोज उनके लौड़ों से चुदने लगी। अब तो मैं चार लंड एक साथ लेने लगी हूं। एक मेरी चूत में, एक मेरी गांड में और दो को हाथ में लेकर बारी-बारी चूसती हूं। बार-बार अंदर से आवाज आती है कि मैं गलत कर रही हूं लेकिन शरीर की जरूरत पूरी होने लगी तो अब रुकना मुश्किल हो गया है। शुरूआत में लड़कों का टाइमिंग कम था, वे अच्छे से चोद नहीं पाते थे लेकिन समय के साथ उनका अनुभव बढ़ गया है। अब वे मुझे भरपूर चोदते हैं। कई बार उनके साथ मैंने रोलप्ले भी किया है जैसे कि वे चारों मेरे पति के दोस्त हैं और पति ऑफिस में थे, उन्होंने मुझे चोद दिया। कभी एक डॉक्टर और तीन नर्स बनकर मिलकर चोदा। ऐसे न जाने कितने रोल किए। चुदाई का पूरा मजा मुझे मिल रहा है। अब मेरी चूत भी खुश है और मैं भी।
एक रात मेरे पति मेरी चुदाई करते हुए मेरी चूत की ढीलापन को महसूस किए। बोले, “कुछ ज्यादा ही ढीली हो रही है चूत।” मैंने मन ही मन सोचा क्यों नहीं होगी ढीली, एक नहीं चार-चार मोटे लंड से सेवा जो हो रही है इसकी। लेकिन मैं प्यार से शर्माते हुए कहा, “आप आजकल कुछ ज्यादा ही बिजी रहते हो तो मैंने खीरा से खुद को शांत करना शुरू कर दिया है।”
फिर अभी पिछले महीने डॉक्टर ने बताया है कि मेरे पेट में जुड़वा बच्चे पल रहे हैं। मैं डरी हुई हूं। ये बच्चे किसके हैं? चारों में से किसी के भी हो सकते हैं। अब सोचती हूं कि पति की नाकामी और अपनी भूख ने मुझे कहां ले आई। मैं खुश भी हूं और कभी-कभी शर्मिंदगी भी महसूस करती हूं लेकिन आप ही बताओ क्या करती मैं।
खासकर औरतें और लड़कियां कमेंट में जरूर बताएं मैंने गलत किया? क्या आप मेरी जगह होती तो आप क्या करतीं, और क्या आप सच में अपने पार्टनर या पति से खुश हो या आपका भी दिल किसी पर आ गया है।
Surat mein Koi girls ya bhabhi hai
Bilkul sahi kiya, mai bhi hoti to yhi krti, bachcha bhi mil gya, aur mja bhi bharpur mil rha hai. Enjoy kro.
Karogi mere saath aise hi
Aap karo khushi aese