टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए

मेरी चूत और सहेली की बुर भाई ने एक साथ फाड़ी

Desi Threesome Sex Story: दोस्तों, मेरा नाम प्रीति है। मेरे भाई का नाम आलोक है और चाचा की लड़की का नाम उज्ज्वला है। उज्ज्वला मेरी बहन कम सहेली ज्यादा है। हम दोनों की दोस्ती इतनी गहरी है कि हम एक दूसरे की हर छोटी बड़ी बात को खुलकर साझा करते हैं, अपनी खुशियां दुख साझा करते हैं और कभी कभी अपनी गुप्त इच्छाओं के बारे में भी बात करते हैं बिना किसी झिझक के।

हम साथ में घूमते फिरते हैं, फिल्में देखते हैं और एक दूसरे का पूरा साथ देते हैं। फिलहाल मेरी शादी हो गई है और मेरी एक बेटी भी हो गई है। बेटी के आने से मेरे जीवन में नई खुशियां आई हैं लेकिन मेरे शरीर ने भी एक नया आकर्षक रूप ले लिया है जो पहले से कहीं ज्यादा लुभावना बन गया है और लोग मुझे और ज्यादा देखते हैं।

बेटी हो जाने के बाद मेरी फिगर का साइज 34-30-36 का हो गया है। मेरे स्तन अब 34 इंच के भरे हुए और भारी हो चुके हैं जो नरम और मांसल हैं, उनकी निप्पल्स हल्की सी हवा के झोंके से भी सख्त हो जाते हैं और पूरे शरीर में एक सिहरन फैला देते हैं। मेरी कमर 30 इंच की पतली है जो मेरे बदन को आकर्षक घंटी का आकार देती है और मेरी गांड 36 इंच की गोल मोटी उभरी हुई है जो चलने पर लहराती और उछलती रहती है, उसकी नरमाई को महसूस करने की इच्छा हर मर्द को होती है।

मेरा गोरा बदन चिकना और मुलायम है जैसे दूध और शहद की तरह, त्वचा पर हाथ फेरने पर रेशम का एहसास होता है, लाल लाल होंठ हैं जो फूले हुए रसीले और चमकदार हैं तथा किसी को भी उन्हें चूसने के लिए ललचा देते हैं। मेरी गांड भी जरूरत से ज्यादा सेक्सी है, उसकी नरमता और गोलाई देख कर मन ललचाता है। आपने देखा होगा सनी लियोनी की गांड को, मेरी गांड बिल्कुल वैसी ही है, उतनी ही भारी और आकर्षक जिसे देखकर इच्छा जाग उठती है।

शादी के पहले तक तो मैं एकदम बिंदास लड़की थी और मैंने कई लड़कों से अपनी चूत चुदवाई भी थी। उन अनुभवों में उनके सख्त गर्म लंड मेरी गीली और तंग चूत के अंदर घुसते ही मुझे तीव्र झुरझुरी महसूस होती, उनकी मोटाई मेरी अंदरूनी दीवारों को खींचती और भरती, हर जोरदार धक्के से मेरी चूत से रस बह निकलता, मेरे मुंह से कराह निकलती, शरीर पसीने से तर हो जाता और चरम सुख की लहरें बार बार मुझे झकझोर देती थीं।

आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

उन पलों में मेरा बदन उनके नीचे लहराता, मेरी चूत उनके लंड को कसकर पकड़ लेती और हम दोनों की सांसें एक साथ तेज हो जातीं। मेरी गांड उनके हाथों में दबती और मैं और ज्यादा उत्तेजित हो जाती। लेकिन शादी के बाद यह सब बदल गया था। अब मैं एक साधारण गृहिणी की जिंदगी जी रही थी पर मेरी अंदर की कामुकता कभी शांत नहीं हुई। अभी भी मुझे चोदने को बहुत सारे लड़के अपना लंड हिलाते हैं, उनकी भूखी आंखें मेरे गोरे बदन, भरे स्तनों और सेक्सी गांड को निहारती रहती हैं। मैं खुद भी किसी न किसी से चुदने को मचलती हूं, अकेले में मेरी चूत गर्म होकर गीली हो जाती है, मैं तड़पती हूं लेकिन बदनामी की वजह से मैं डरती थी। इसलिए शादी के बाद मेरी किसी गैर मर्द से पहली चुदाई भाई के लंड से ही हुई।

मेरे भाई के लंड का साइज काफी बड़ा है जो मेरी चूत को पूरी तरह फैलाकर भर देता है और मुझे गहरी तृप्ति देता है। मेरी चचेरी बहन की फिगर 30-28-32 की है। वह उम्र में मुझसे छोटी है और मेरा भाई भी मुझसे छोटा है। यह घटना आज से तीन साल पहले की है, जब मैं इक्कीस साल की थी, मेरा भाई उन्नीस साल का था और मेरी बहन उससे छोटी थी। उस वक्त मैं अपने भाई से चुदी थी। उस समय मैंने महसूस किया कि परिवार के अंदर भी इतना जोश और आकर्षण छिपा हो सकता है।

दरअसल हुआ यूं कि उस दिन हमारे घर पर कोई नहीं था। मम्मी और बाकी के सब लोग मेला घूमने गए थे जिससे पूरा घर सुनसान हो गया था, हर कोने में खालीपन का अहसास हो रहा था, हवा में हल्की ठंडक थी और दूर मेला की ध्वनियां आ रही थीं जो वातावरण को रोमांचक बना रही थीं। घर की खालीपन ने मेरे अंदर एक अजीब सी उत्तेजना जगाई थी, मैं महसूस कर रही थी कि आज कुछ खास होने वाला है। उस दिन घर पर हम तीन ही रह गए थे। मेरा भाई द्वार पर बैठा था, तो मैंने उसके सर पर हाथ फेरते हुए उसे छेड़ दिया और वह भी मुझे छेड़ने लगा।

उससे बचने के लिए मैं भागती हुई अपने कमरे में बिस्तर पर आकर लेट गई और मैंने एक चादर ओढ़ ली। मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज थी कि सीने में जोर जोर से आवाजें आ रही थीं, सांसें थोड़ी थोड़ी भारी और गर्म हो चुकी थीं। मैं चित लेट गई और हल्की सफेद चादर को अपने गोरे बदन पर अच्छी तरह से ओढ़ लिया, जिससे मेरे भरे हुए 34 इंच के स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे और 36 इंच की सेक्सी गांड का गोलाकार आकार चादर के नीचे भी साफ उभर कर दिखाई दे रहा था। कमरे में हल्का सा अंधेरा था, बाहर से आती ठंडी हवा मेरी गरम त्वचा को छू रही थी और मेरे लाल लाल होंठों पर हल्की सी ठंडक महसूस हो रही थी। चादर के नीचे मेरा पूरा बदन अभी भी पहले की छेड़छाड़ से उत्तेजित था और मेरी चूत धीरे धीरे गीली होने लगी थी।

तभी मुझे खोजता हुआ मेरा भाई आ गया। वह भी मजाक मजाक में आकर मेरे ऊपर चढ़ कर लेट गया। उसके भारी और कड़ियल युवा शरीर का पूरा वजन मेरे नरम गोरे बदन पर आ गया, उसकी चौड़ी छाती मेरे भरे स्तनों पर दब रही थी और उसकी गर्म सांसें मेरे गालों तथा गर्दन पर लगातार पड़ रही थीं। मैं महसूस कर रही थी कि उसकी मांसपेशियां मेरी त्वचा से सट गई हैं और उसकी हल्की पसीने की गंध मेरे नथुनों में घुस रही है। मैं उससे कुछ नहीं बोली, क्योंकि मुझे उसका यूं अपने ऊपर चढ़ जाना बहुत अच्छा लग रहा था। उसके शरीर की गर्माहट मेरे अंदर तक उतर रही थी, मेरी चूत में एक हल्की सी सिहरन दौड़ गई थी और मैं चुपचाप उसकी निकटता का आनंद ले रही थी।

आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

कुछ पल बाद मैं बोली, भाई तुम और नीचे को हो जाओ। शायद भाई को भी मेरा भरा हुआ बदन सुख दे रहा था और उसे भी उत्तेजित होने लगा था, तो वह और थोड़ा सा नीचे को हो गया। जैसे ही वह नीचे सरका, उसके मजबूत हाथ अनजाने में मेरी एक भरी हुई चूची पर आकर जोर से दब गए। उसकी हथेली मेरी नरम, मांसल और गोल चूची को पूरी तरह घेरकर पकड़ लेने के बाद हल्का दबाव डाल रही थी, जिससे मेरी निप्पल तुरंत सख्त होकर खड़ी हो गई और पूरे स्तन में एक मीठी सी झनझनी फैल गई।

साथ ही उसका एक पैर का घुटना मेरी दोनों जांघों के बीच में घुस गया और सीधे मेरी चूत की फूली हुई पतलियों पर टकरा गया। आह क्या बताऊं सखियों, चूत पर एक गैर मर्द का घुटना पड़ते ही मेरे सारे बदन में झनझनी सी दौड़ गई। एक तीव्र बिजली सी करंट मेरी रीढ़ की हड्डी से गुजरी, मेरी चूत के अंदर गहराई में गर्म लहरें उठने लगीं और मेरी टांगें अनायास ही थोड़ी सी फैल गईं।

उसका कड़ियल शरीर मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मैं जन्नत में हूं। उसके घुटने की हड्डी मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी फूली हुई चूत की संवेदनशील पतलियों को दबा रही थी, जिससे मेरी चूत का रस धीरे धीरे निकलने लगा और पैंटी का कपड़ा गीला होने लगा। मुझे चुदाई की चुल्ल होने लगी तो मैं अपनी चूत को उसके घुटने से रगड़वाने लगी। मैंने अपने कूल्हों को हल्का हल्का ऊपर नीचे करके अपनी गीली और गर्म चूत को उसके घुटने पर दबाते हुए जोर जोर से रगड़ना शुरू कर दिया, हर रगड़ के साथ मेरी चूत की अंदरूनी दीवारें सिकुड़ रही थीं और ज्यादा से ज्यादा रस बाहर निकल रहा था। इससे मेरे भाई को भी शायद मजा आने लगा था तो वह अपना हाथ मेरी चूची पर फेरने लगा।

उसके उंगलियां मेरी चूची को मसल रही थीं, निप्पल को हल्का हल्का दबा रही थीं, घुमाते हुए सहला रही थीं और कभी कभी हल्के से खींच भी रही थीं। उसके हाथ से अपनी चूची मिंजवाते ही मेरी आंखें मदहोशी के आलम में बंद हो गईं। मेरे मुंह से हल्की सी कराह निकल गई और पूरा बदन एक मीठी सुस्ती में डूब गया।

मैं अपने भाई से कुछ बोल ही नहीं पा रही थी जबकि कमरे का दरवाजा भी खुला था, तब भी हम दोनों को कोई होश नहीं था कि हम दोनों भाई बहन होकर यह सब क्या कर रहे हैं। हम दोनों की सांसें तेज और भारी हो चुकी थीं, कमरे में सिर्फ हमारी उत्तेजित सांसों की आवाज और चादर की हल्की सरसराहट गूंज रही थी। कुछ पल बाद मेरा भाई थोड़ा सा और नीचे सरक गया। अब उसका बड़ा लंड मेरी चूत पर रगड़ गया। उसके कड़े, मोटे और लंबे लंड का पूरा आकार मेरी पैंटी के पतले कपड़े के ऊपर से मेरी चूत की दरार पर जोर से दब रहा था, मैं महसूस कर रही थी कि उसकी लंड की नसें और गर्मी मेरी चूत की पतलियों तक पहुंच रही हैं। उसका लंड मेरी पैंटी के ऊपर से ही रगड़ा था लेकिन मन मयूर सा हो नाच उठा था और अंदर से दिल में आह आह की आवाज आने लगी थी।

आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

मेरी पैंटी भी एक आधुनिक किस्म की पैंटी थी जिसमें चूत को सिर्फ एक पतली सी पट्टी से ढका गया होता है। वह पट्टी इतनी पतली और छोटी थी कि मेरी चूत की दोनों पतलियां लगभग आधी खुले हुए से दिखती थीं और लंड के दबाव से वे और भी फूलकर बाहर निकल रही थीं। सच में जब मेरा भाई मेरी चूत को अपने लौड़े से रगड़ रहा था तो मुझे बेहद सनसनी हो रही थी। उसके लंड की गर्मी और मोटाई मेरे चूत के रस से गीली पैंटी के माध्यम से सीधे मेरी संवेदनशील चूत की त्वचा तक पहुंच रही थी, हर जोरदार रगड़ के साथ मेरी चूत अंदर से सिकुड़ रही थी, रस की धारा और तेज हो रही थी और मेरी टांगें कांपने लगी थीं। वह याद मुझे अभी भी आने लगी है जब मैं आपको यह कहानी सुना रही हूं। आप यूं समझें कि उस पल की याद आई तो मेरी चूत अभी भी स्टोरी लिखते समय गीली हो गई है।

उस समय मेरे भाई के लंड का सुपारा सीधा मेरी चूत के छेद पर ही जा रहा था। उसका मोटा गोल सुपारा मेरी चूत की फूली हुई पतलियों के बीच ठीक छेद पर दब रहा था जहां से गर्म रस पहले ही बह निकल रहा था। पैंटी का पतला कपड़ा अब पूरी तरह सरक चुका था और मेरी चूत का मुंह खुला हुआ था। मैं महसूस कर रही थी कि उसका सुपारा मेरी चूत की नरम और गर्म त्वचा से सीधा टकरा रहा है जिससे मेरे पूरे बदन में बिजली सी दौड़ रही थी। पैंटी ने भी खुद ब खुद सरक कर लंड को अंदर लेने के लिए अपना मुंह खोल दिया था। मेरी पैंटी की वह पतली पट्टी अब पूरी तरह हट चुकी थी और मेरी चूत की दोनों पतलियां बाहर निकल कर लंड का स्वागत कर रही थीं।

मैं कुछ बोल नहीं पा रही थी। मेरे मुंह से सिर्फ भारी सांसें निकल रही थीं और मेरी आंखें आधी बंद हो चुकी थीं। भाई कभी ऊपर उठकर फिर से मेरे ऊपर लेट जाता था और वह जितनी जोर से गिर गिर कर लंड से ठोकर दे रहा था उतनी ही जोर से मेरी चूत के छेद में लंड घुस रहा था। हर बार जब वह ऊपर उठता तो उसका लंड थोड़ा बाहर निकल जाता और फिर पूरे जोर से नीचे गिरता जिससे मेरा पूरा बदन हिल जाता और मेरी चूत अंदर तक कांप उठती।

मैंने भी अब अपनी टांगें फैला दी थीं और उसके लंड की चोट को अपनी चूत पर झेलने लगी थी। मेरी दोनों जांघें पूरी तरह खुली हुई थीं और मेरी चूत अब बिल्कुल खुले मुंह के साथ उसके लंड के नीचे पड़ी थी। टांगें फैल जाने से चूत का मुंह पूरा खुल गया था। अब मेरी चूत की अंदरूनी गुलाबी दीवारें साफ दिख रही थीं और वे गर्म रस से चमक रही थीं। पैंटी का अवरोध भी लगभग समाप्त हो गया था। उसकी पतली पट्टी अब मेरी गांड के नीचे दबी हुई थी और कोई रुकावट नहीं बची थी। उसने भी शायद अपने लौड़े को बाहर निकाल लिया था जिस वजह से लंड चूत का स्पर्श हम दोनों को ही होने लगा था। अब उसका नंगा कड़ा लंड सीधे मेरी नंगी चूत से टकरा रहा था और दोनों की गर्मी एक दूसरे में समा रही थी।

इसके बाद तो मेरे भाई ने चूत पर निशाना साधा और सटीक अंदाज से इतनी जोर से मेरी चूत पर अपने लंड को गिराया कि मेरी चूत में उसका लंड घुसता चला गया। उसका मोटा सुपारा पहले मेरी चूत के छेद को फैलाते हुए अंदर घुसा फिर पूरा लंड धीरे धीरे मेरी तंग चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया। उसी पल मेरे मुंह से चीख निकल गई, आह आह आह भाई मेरी जान लोगे क्या? मेरी चीख कमरे में गूंज गई और मेरी आंखों से आंसू निकल आए। मेरे भाई आलोक को भी शायद थोड़ा महसूस हुआ होगा, तो उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और अपने कड़क लंड को मेरी चूत में घुसा दिया। उसका चेहरा तनाव से भरा था और उसकी सांसें बहुत तेज हो गई थीं।

आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

मेरी पैंटी चूत से अलग हो गई थी तो उसका पूरा लंड अंदर घुसता चला गया और मेरी चूत से खून गिरने लगा। मेरी चूत की अंदरूनी दीवारें पहले कभी इतने बड़े लंड को नहीं झेली थीं इसलिए वे फटने लगीं और गर्म खून बाहर निकलने लगा। मुझे बेहद दर्द हो रहा था। दर्द इतना तीव्र था कि मेरी टांगें कांप रही थीं और मेरी चूत अंदर से जल रही थी। उस वक्त मुझे ऐसा लग रहा था मानो मेरे भाई ने कोई गर्म रॉड मेरी चूत में पेल दी हो, बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। मेरी चूत के आसपास की मांसपेशियां सिकुड़ रही थीं और खून की गर्म धार मेरी जांघों पर बह रही थी। मेरी चीख निकली तो उसी वक्त मेरे भाई आलोक ने झट से अपने हाथ से मेरा मुंह बंद कर दिया और वह लंड चूत में पेले हुए ही रुक गया। उसका हाथ मेरे मुंह पर मजबूती से लगा था और वह चुपचाप मेरे ऊपर लेटा रहा।

फिर जब आलोक मेरे ऊपर से उठा तो उसका लंड चूत से बाहर आ गया था और एकदम तना हुआ था। लंड बाहर निकलते ही मेरी चूत से और खून बह निकला और बिस्तर की चादर पर छोटे छोटे लाल धब्बे बन गए। उसके मूसल से लौड़े को देख कर मैं घबरा गई। उसका लंड इतना मोटा और लंबा था कि वह मेरी चूत से बाहर निकलते ही हवा में तनकर खड़ा हो गया और उसकी नसें फूली हुई दिख रही थीं। मैं दहशत से बोली, आलोक तेरा लंड कितना बड़ा है। मेरी आवाज कांप रही थी और मेरी आंखें उस लंड पर टिकी हुई थीं। इसी लिए तो मेरी चूत से खून गिर गया है, नहीं तो मैं अब तक कितने ही लंड ले चुकी हूं पर मेरा कभी भी खून नहीं गिरा। यह सुन कर आलोक चौंक गया और वह अब मुझे चोदने के लिए अपने तेवर दिखाने लगा। उसकी आंखों में नई भूख जाग गई थी और उसके लंड ने और भी ज्यादा सख्ती पकड़ ली।

उसने बेड से नीचे उतर कर अपना लंड सही से सहलाया और उसे कपड़े से पोंछ कर मेरे मुंह के करीब ले आया। वह नीचे खड़ा हो गया और अपना भारी लंड हाथ में पकड़कर ऊपर नीचे करने लगा जिससे उसकी लंड की नसें और उभर आईं। मैं भी उसके लंड को देख कर मदहोश हुई जा रही थी और अपनी चूत में इतना हैवी लंड घुसवाने की सोचने लगी थी। मेरी चूत अब भी दर्द कर रही थी लेकिन देखते ही देखते उसमें नई गर्मी भर गई। वह मेरे गालों को दबा कर मुंह में लंड घुसाने की कोशिश करने लगा। उसके अंगूठे और उंगलियां मेरे गालों को जोर से दबा रही थीं जिससे मेरे होंठ थोड़े खुले हो गए। पर मैं उसके लंड को अपने मुंह में नहीं ले रही थी तो उसने मेरे एक दूध को अपनी पूरी ताकत से मसल दिया। उसकी उंगलियां मेरी नरम चूची को कसकर पकड़कर मसल रही थीं और निप्पल को जोर से खींच रही थीं जिससे तेज दर्द के साथ मीठी उत्तेजना भी फैल गई।

इससे मेरा मुंह दर्द से खुल गया और उसी वक्त वह मेरे मुंह में लंड पेल कर चुसवाने लगा। उसका गर्म और मोटा लंड मेरे मुंह में घुसते ही मेरी जीभ को दबा रहा था और मेरे गले तक पहुंच रहा था। मेरा भाई मुझे गाली देने लगा, साली रंडी भोसड़ी वाली, चूस लौड़े को आह चूस आज मेरे लंड को, आह मुझे पता ही नहीं था कि मेरे घर में तेरे जैसी मस्त रंडी बहनें भी हैं, चूस साली बहन की लौड़ी आज तू भी चूस ले मेरे लंड को। आह इस घर में तो पांच पांच रंडियां हैं। उसकी गालियां सुनकर मेरी चूत फिर से गीली होने लगी और मैं अपने भाई का लंड चूसने लगी।

कुछ देर बाद आलोक ने अपना लंड मेरे मुंह से निकाला और पूछने लगा कि दीदी तुम किस किस से चुदी हो बताओ ना प्लीज। उसके मोटे और गर्म लंड को मेरे मुंह से बाहर निकालते ही मेरे होंठों से एक हल्की सी लार की डोर लिपटी हुई थी जो धीरे धीरे टूट गई। लंड अभी भी पूरी तरह सख्त और चमकदार था मेरी थूक से गीला और उसकी नसें फूली हुई दिख रही थीं। आलोक के चेहरे पर उत्तेजना और जिज्ञासा दोनों थे उसकी सांसें अभी भी भारी चल रही थीं और उसकी आंखें मेरी आंखों में गहरी पैठ गई थीं। मैं थोड़ा सा हांफ रही थी मेरे लाल फूले हुए होंठ अब सूजे हुए थे और मेरे मुंह में उसके लंड का नमकीन गाढ़ा स्वाद अभी भी भरा हुआ था।

आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

मैंने उसके लंड का चूमा लेकर उसे बाहर निकाला और बोली मैं तेरे दोस्त रोहन और तेरी गर्लफ्रेंड के भाई से चुद चुकी हूं। पर आलोक तू ऐसा क्यों बोल रहा था कि घर में पांच पांच रंडियां हैं। बता न वे पांच रंडियां कौन कौन हैं। भाई बोला अब एक तुम हो एक बड़ी दीदी काजल और मंझली दीदी सौम्या और तुमसे जो बड़ी है पायल दीदी वह भी रंडी है और इन सबको मैं चोद चुका हूं। उसकी बात सुनकर मेरी आंखें चौड़ी हो गईं लेकिन मेरी चूत में नई गर्मी दौड़ गई और मेरे स्तन हल्के हल्के ऊपर नीचे होने लगे।

बस तू ही एक बची थी जो मुझसे नहीं चुदी थी लेकिन लगता है आज सपना पूरा हो जाएगा। मैं आलोक की बात सुन कर हंसने लगी और बोली ठीक है आज तेरा सपना भी पूरा होगा और तुझे डबल मजा भी मिलेगा लेकिन रात में मिलेगा। तुम्हारा बर्थडे है तो तुमको क्या चाहिए अपना गिफ्ट बोलो। आलोक सोचने लगा तो मैं उसका लंड अपने हाथ में लेकर सहलाती हुई बोली क्या सोच रहे हो गिफ्ट में क्या चाहिए बताओ। मेरी नरम उंगलियां उसके मोटे लंड पर ऊपर नीचे हो रही थीं कभी कभी सुपारे को हल्का दबाती हुई और उसकी गर्मी मेरी हथेली में महसूस हो रही थी।

भाई ने कहा मैं जो मांगूंगा वह दोगी ना। मैं बोली क्या चाहिए मुझे तो तुम रात को चोदोगे ही कुछ और बोलो। तो आलोक ने कहा नहीं मुझे तुम्हारी सहेली बहुत पसंद है प्लीज उसको तुम एक रात मुझसे चुदवा दो ना प्लीज दीदी मना मत करना। मैंने कहा सहेली भी है और वह बहन भी है उसी की कह रहा है न।

उसने कहा हां साली बड़ी मस्त छकटिया है। उसकी बुर बिना चुदी है साली की सील तोड़ने का मन है। मैं बोली ठीक है आज उसकी बुर का भी भोसड़ा बना देना। पर यह तो बता कि तूने सिर्फ चार के नाम लिए हैं पांचवी रंडी कौन है। वह हंस दिया। तो मैं समझ गई कि इसने अपनी मां भी चोद ली है।

शायद इसलिए वह बताने से हिचक रहा था। मैं भी चुप रही और उसके साथ चुदाई का मजा लेने लगी। उसके लंड से चुद कर मुझे बड़ा मजा आया। फिर रात को केक कटा और पार्टी हुई।

आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

उस पार्टी में हम तीनों ही थे। मेरा भाई शराब की बोतल लाया था तो हम तीनों ने पी थी। शराब पीने के बाद हमारा बदन गर्म हो गया था सिर हल्का चकरा रहा था और कामुकता बढ़ गई थी। भाई ने कुछ ज्यादा पी ली थी तो आलोक ने वहीं पर मेरी सहेली को बिस्तर पर पटक दिया और चोदने लगा। उसने उज्ज्वला की टांगें फैला कर उसकी पैंटी खींची और अपना मोटा लंड उसकी तंग चूत पर रख दिया। उज्ज्वला की चीख निकली जब उसका लंड एक झटके में अंदर घुसा। उसकी चूत फट गई थी और वह चीख रही थी।

मगर मेरे भाई ने उसे नहीं छोड़ा और दबा कर चोदता रहा। उसने जोर जोर से अपने कूल्हे हिलाते हुए लंड को पूरी गहराई तक घुसाया बाहर निकाला और फिर से धक्का दिया। हर धक्के से उज्ज्वला का पूरा बदन हिल रहा था और उसके छोटे स्तन उछल रहे थे। कुछ ही देर बाद मेरी बहन व सहेली आहें भरने लगी आह आह भाई और चोदो और चोदो प्लीज मजा आ रहा है। उज्ज्वला की चूत अब गीली होकर चिकनाई से भर गई थी और भाई का लंड आसानी से अंदर बाहर हो रहा था।

मुझे उज्ज्वला की कामुक आवाज सुनाई दी तो मैंने देखा बिस्तर पर उज्ज्वला और आलोक दोनों मस्ती में चुदाई कर रहे हैं। उज्ज्वला की आंखें बंद थीं मुंह से कराह निकल रही थी और उसकी छोटी सी गांड बिस्तर पर दब रही थी। मैं सीन देख कर कामुक हो गई और मेरी चूत भी पानी पानी हो गई। मेरी चूत से फिर से रस टपकने लगा।

मैं भी बेड पर आ गई और भाई से बोली कि भाई मेरी चूत भी चोदो प्लीज। तभी भाई ने सहेली की चूत से लंड निकाला और आकर मेरे होंठ चूसने लगा। उसके गर्म और शराब की महक वाली सांस मेरे मुंह में घुल गई। मेरी सहेली आलोक का लंड चूसने लगी। क्या नजारा था थ्री सम चुदाई का आह आह यह पहली बार हो रहा था। तीनों शरीर आपस में उलझे हुए थे पसीने से तर गर्मी से भरे।

फिर भाई ने दस मिनट तक लंड चुसाई का मजा लिया और सीधे नीचे आ गया। उसने मेरी चूत में अपना मुंह डाल दिया और अपनी जीभ से मेरी चूत चोदने लगा। उसकी गर्म जीभ मेरी चूत की पतलियों को चाट रही थी क्लिटोरिस को चूस रही थी और अंदर तक घुसने की कोशिश कर रही थी। आह आह क्या मजा आ रहा था। पहली बार ऐसा मजा मिला था। मेरी कमर अनायास ऊपर उठ रही थी और मैं उसके सिर को अपनी जांघों से दबा रही थी।

आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

फिर न जाने कब आलोक ने अपना बड़ा लंड मेरी चूत में एक झटके में अंदर डाल दिया और जोर जोर का झटके मारने लगा। क्या बताऊं दोस्तों आपको अपनी चुदाई की कहानी लिख रही हूं न तो मेरी चूत अभी भी एकदम से गर्म हो गई है। काश मेरा भाई अभी मेरे पास होता तो मैं उसके लंड पर झूला झूल रही होती। पर मजबूर हूं आह आह अभी उंगली से ही अपनी चूत चोद रही हूं।

हां तो उधर उज्ज्वला ने अपनी चूत मेरी मुंह पर रख दी और मैं उसकी चूत चाटने लगी। उसकी छोटी चूत मेरे मुंह पर दब गई उसका मीठा रस मेरी जीभ पर फैल गया। आलोक मेरी चूत चोद रहा था और अपने दोनों हाथों से उज्ज्वला की चूचियां दबा रहा था। उज्ज्वला मेरी चूचियां दबा रही थी। हम तीनों आपस में सेक्स कर रहे थे।

भाई मेरी चूत में दनादन दनादन लंड पेल कर चोद रहा था और मैं बस अपनी मुट्ठियां भींच कर भाई के दस इंच के लंड से चूत चुदवाने का मजा ले रही थी। उसके हर झटके से मेरी चूत की अंदरूनी दीवारें खिंच रही थीं और गहराई तक खुजली मिट रही थी। फिर भाई ने कहा दीदी मेरा लंड अब पानी छोड़ने वाला है आपको चूत में ही भर दूं क्या या आपकी सहेली को पिला दूं। मैं बोली नहीं मेरी चूत को ही रस पिला दे। उसने अगले कुछ ही पलों में अपने लंड से निकला गर्म गर्म पानी मेरी चूत में ही छोड़ दिया।

मेरी चूत में इतनी तेज आग जल रही थी कि उसके वीर्य से वह बुझ गई थी। भाई का गाढ़ा गर्म वीर्य मेरी चूत की गहराई में भर गया कुछ बाहर भी निकल कर मेरी जांघों पर बह गया। भाई ने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और एक साइड में लेट गया। फिर मेरी सहेली ने अपनी चूत का पानी मेरे मुंह में भर दिया और मैं उसकी चूत को चाट चाट कर पूरा रस पी गई। फिर सहेली मेरी चूत को चाटने लगी और मेरी चूत का पानी वह पी गई।

उसके बाद हम तीनों ने एक एक बार चूत चुदाई का मजा और लिया और साथ में नंगे नहाने लगे। कैसी लगी भाई और बहन की बुर चुदाई की घर सेक्स कहानी? कमेंट करके बताएं।

आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।

38
89 लोगों को पसंद आया • 64%

Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए