Vidhwa Naukarani ki chudai sex story: मेरा नाम स्नेहा है। मैं अभी २८ साल की हूँ। मेरे पति का निधन एक साल पहले हो गया था। वो एक रोड एक्सीडेंट में मारे गए थे। मैं एमए पास हूँ और एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हूँ। लेकिन वेतन बहुत ही कम था। उन्हीं दिनों मेरी एक सहेली ने बताया कि सेठ विनय के यहाँ घर की देखभाल के लिए एक महिला की जरूरत है। मैं उनसे जाकर मिल लूँ। वो अच्छी सैलरी देंगे। बस उनसे ये मत बताना कि तुम ज्यादा पढ़ी-लिखी हो।
मैं सेठ विनय के यहाँ ७:३० बजे ही पहुँच गई। वो उस समय घर पर ही थे। मैंने घर की घंटी बजाई तो उन्होंने मुझे अंदर बुला लिया। मैंने उन्हें बताया कि मैं आपके यहाँ नौकरी के लिए आई हूँ।
उन्होंने मुझे गौर से देखा और कुछ सवाल किए। फिर बोले, कितना वेतन लोगी? जी, मैं जहाँ काम करती थी वहाँ ३५०० मिलते थे। अभी ४००० रुपये दूँगा। और आगे काम देखकर बढ़ा दूँगा। तुम्हें रहना और खाना फ्री है। जाओ, पीछे सर्वेंट क्वार्टर है। उन्होंने चाबी देते हुए कहा। सफाई कर लेना। आज से ही काम पर आ जाओ।
मेरी तो जैसे किस्मत खुल गई। किराए के मकान का खर्चा बच गया और खाना भी मुफ्त। फिर ४००० रुपये वेतन। मैंने चाबी ली और पीछे जाकर ताला खोला। शानदार दो कमरों का मकान था। सारी सुविधाएँ मौजूद थीं। मैंने जल्दी से सफाई की और घर जाकर जो थोड़ा सामान था उसे दिन में ही शिफ्ट कर लिया। मेरा ५ साल का लड़का है और मैं। और इतना बड़ा घर।
सेठ जी काम पर जा चुके थे। घर पर ताला लगा था। शाम को जब सेठ जी घर आए तो मैं उनसे मिलने गई। उन्होंने सारा काम बता दिया। विनय सेठ करीब ३५ साल के थे और मधुर स्वभाव के थे।
मैंने झटपट शाम का खाना बनाया। मेरा खाना सर्वेंट क्वार्टर में ही अलग बनता था। उन्होंने मुझे हिदायत दी कि मुझे हमेशा नहा-धोकर साफ रहना है। साफ कपड़े… बाल बंधे हुए… एकदम साफ-सुथरे… वगैरह। उन्होंने पहले से ही तैयार नए कपड़े मुझे दिए।
विनय बहुत मोटे इंसान थे। कहते हैं उनकी बीवी उनके मोटापे के कारण उन्हें छोड़कर भाग गई। विनय का एक दोस्त जो उनसे भी अमीर था, उसकी रखैल बनकर एक अलग मकान में रहती है। विनय सेठ अकेले थे।
विनय सेठ को अब मैं विनय कहकर संबोधित करूँगी। विनय को जिम जाते हुए दो महीने हो चुके थे। उनका मोटापा अब काफी कम हो चुका था। शरीर गठीला हो गया था। मैं भी अब उनकी तरफ आकर्षित होने लगी थी। औरत को मर्द की जरूरत होती है, ये बात मैं जानती थी। मेरा अधिकांश समय खाली रहने में गुजरता था। खाली दिमाग शैतान का घर होता है।
मैं भी भरपूर जवां थी। मेरे स्तन भी पुष्ट थे और उभरे हुए थे। मेरा जिस्म भी अब कसमसा रहा था। रह-रहकर मेरे उरोज कसक जाते थे। रह-रहकर अंगड़ाई आने लगती थी। कपड़े तंग से लगते थे। मेरे आगे और पीछे के निचले भाग भी शांत होने के लिए कुछ माँगते थे।
एक बार रात को लगभग ११ बजे मुझे खयाल आया कि मेन गेट खुला रह गया है। सोने से पहले जब मैं बाहर निकली तो मैंने देखा विनय की खिड़की थोड़ी सी खुली थी। मैंने यूं ही अंदर झाँका तो मेरे बदन पर चींटियाँ रेंगने लगीं।
विनय बिल्कुल नंगा था और खड़े होकर मुठ मार रहा था। मैं वहीं खड़ी रह गई। मेरा दिल धक-धक करने लगा। वो शायद ब्लू फिल्म देख रहा था और मुठ मार रहा था। मेरा हाथ बरबस मेरी चूत पर चला गया और दबाने लगा। मेरी चूत गीली होने लगी थी। जहाँ मैं चूत दबा रही थी वहाँ पेटीकोट गीला हो गया था।
उसके मुँह से वासना भरी गालियाँ निकल रही थीं। चोद साली को और चोद। माँ चोद दे इसकी… हाय। भोसड़ी के क्या लंड है? ऐसे ही मुँह से अस्पष्ट बोल जा रहा था। फिर उसके मुँह से आह निकल गई। उसके लंबे लंड से पिचकारी निकल पड़ी। वीर्य लंड से झटके खाकर निकल रहा था।
मेरा दिल डोलने लगा। मेरी छाती धड़कने लगी। पसीने की बूँदें छलक आईं। मैं वहाँ से हटकर मेन गेट बंद करके आई।
उस रात मुझे नींद नहीं आई। बस करवटें बदलती रही। चुदने के विचार आते रहे। विनय का लंड चूत में घुसता नजर आने लगा। जाने कब आँख लग गई। सुबह उठी तो मन में कसक बाकी थी।
खड़ी होकर मैंने अंगड़ाई ली और अपने बोबे को देखा। और धीरे-धीरे उन्हें मसलने लगी। मुझे मेरी चोली तंग लगने लगी। फिर ब्लाउज के बटन बंद करने लगी। सामने जाली वाली खिड़की से विनय मुझे ये सब करते देख रहा था। मेरा दिल धक् से रह गया। मैंने यूं दर्शाया जैसे मैंने विनय को देखा ही नहीं। पर मुझे पता चल गया कि विनय मेरे अंगों का रस लेता है।
आप यह Vidhwa Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है। और ऐसी कहानियां पढ़ने के लिए दोबारा विजिट करें Free Sex Kahani
मैं भी अब छिप-छिपकर खिड़की से उसकी हरकतें देखने लगी। और घर में आकर खूब तड़पने लगी। कपड़े उतार फेंकती थी। अपने जिस्म को दबा डालती थी। विनय अब भी खिड़की पर छुप-छुपकर मुझे देखता था। सिर्फ उसे बहकाने के लिए मैं दरवाजे पर अपने बोबे दबाती और कभी चूत दबाती। ताकि वो भी मेरी तरह तड़पे और वासना में आकर मुझे चोद दे।
पर वो मेरे सामने नॉर्मल रहता था। मेरी चोली अब छोटी पड़ने लगी थी। उरोज मसलते-मसलते फूलने और बड़े होने लगे थे। एक बार तो वो जब खिड़की से देख रहा था, मैंने मोमबत्ती लेकर अपनी चूत पर रगड़ ली।
इसी तरह ६ महीने बीत गए। इसी बीच विनय ने मेरी सैलरी ८००० कर दी। ये सब मेरी सेक्सी अदाओं का इनाम था।
मुझे भी अब चुदने की इच्छा तेज होने लगी। इन दिनों मैं विनय के जाने के बाद अक्सर उनके बेडरूम में जाकर टीवी देखती थी। आज मैंने कुछ सीडी टीवी के पास देखी। मैंने उसे यूं ही उठा ली और देखने लगी। एक सीडी मुझे लगी कि शायद ब्लू फिल्म की है। मैंने वो सीडी प्लेयर में लगाई और देखने लगी।
उसे देखते ही मैं एकदम उछल पड़ी। मेरा अनुमान सही निकला। वो ब्लू फिल्म थी। मैं जिंदगी में पहली बार ब्लू फिल्म देख रही थी। मेरे दिल की एक बड़ी हसरत पूरी हो गई। बहुत इच्छा थी देखने की।
सीन्स आते-आते मैं पसीने में तर हो गई। मेरे कपड़े फिर से तंग लगने लगे। लगता था सारे कपड़े उतार फेंकूँ। मेरा हाथ अपने आप चूत पर चला गया। मैं अपना दाना मसलने लगी। कभी-कभी उंगली डालकर अपनी चूत घिस लेती। मेरी साँसें और धड़कनें तेज हो चली थीं।
अचानक मैंने समय देखा तो विनय के लंच पर आने का समय हो गया था। मैंने टीवी बंद कर दिया। अपने आप को संयत किया और अपने कपड़े ठीक कर लिए। और डाइनिंग टेबल ठीक करने लगी।
मेरी नजरें अब बदल चुकी थीं। मर्द के नाम पर विनय ही था जिसे मैं रोज देखती थी। मैंने उसे नंगा भी देखा। मुठ मारते भी देखा। पेंसिल को खुद की गांड़ में घुसाते हुए भी देखा। मेरे दिल पर ये सब देखकर छुरियाँ चल जाती थीं।
मैंने अपने कमरे में जाकर अपनी ड्रेस बदल आई और एक हल्की सी ड्रेस पहन ली जिसमें मेरे उरोज और जिस्म सेक्सी लगें। मैं वापस आकर विनय का इंतजार करने लगी। विनय ठीक समय पर आ गया।
आते ही उसने मुझे देखा और देखते ही रह गया। वो डाइनिंग टेबल पर बैठ गया। मैं झुक-झुककर अपने बोबे हिला-हिलाकर खाना परोसने लगी। वो मेरे ब्लाउज में बार-बार झाँक रहा था। मेरे बदन में कमकंपी छूटने लगी। अब मैं उसे जवान और सेक्सी नजर आने लगी थी।
मैं उसके पीछे जाकर अपने बोबे भी उसे टकरा दिए। फिर मैं भी सिहर उठी। उसने अपना खाना समाप्त किया और अपने रूम में चला गया। मैं उसे झाँककर देखती रही। अचानक उसकी नजर सीडी पर पड़ी और वो पलक झपकते ही समझ गया।
विनय अपने बेड पर लेट गया और अपनी आँखें बंद कर लीं। विनय के मन में खलबली मची थी। मुझे लगा कि विनय काफी कुछ तो समझ गया है।
मैं उसके बेडरूम में आई। कहीं से शुरू तो करना ही था। मैंने कहा – सर, मोजे उतार दूँ?
हाँ… हाँ… उतार दो। और सुनो, क्या तुम मेरी कमर दबा सकती हो? उसने मुझे पटाने की एक कोशिश की। मेरा दिल उछल पड़ा। मुझे इसी का तो इंतजार था।
मैंने शर्मा कर कहा – हाँ, दबा दूँगी।
आप यह Vidhwa Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है। और ऐसी कहानियां पढ़ने के लिए दोबारा विजिट करें Free Sex Kahani
मुझे कोशिश करके आज ही उसे फँसा लेना था और अपनी चूत की प्यास बुझा लेनी थी। आखिर मैं कब तक तड़पती। जबकि विनय भी उसी आग में तड़प रहा था। विनय ने अपनी कमीज उतार दी।
इतने में बाहर हॉर्न की आवाज आई। मुझे गुस्सा आने लगा। मेरा बेटा सचिन स्कूल से आ गया था। कहीं गड़बड़ न हो जाए। कहीं मूड बदल न जाए।
सर… मैं अभी आई। कहकर मैं जल्दी से बाहर आई और सचिन को कहा कि वो खाना खा ले और फिर आराम कर ले। मैं सेठ जी को लंच करा के आती हूँ। उसे सब समझाकर मैं वापस आई।
विनय ने भी अपना ढीला सा पायजामा पहन लिया था और उल्टा लेटा हुआ था। मैंने तेल की शीशी उठाई और बिस्तर पर बैठ गई। मैंने तेल उसकी कमर पर लगाया और उसे दबाने लगी। उसे मजा आने लगा। मैं उसे उत्तेजित करने के लिए उसकी चूतड़ों की जो दरार नजर आ रही थी, उस पर भी तेल लगा कर बार-बार छू रही थी।
रानी… तेरे हाथों में जादू है। जरा नीचे भी लगा दे। मैं समझ गई कि वो रंग में आने लगा है। गर्म लोहे पर चोट करना जरूरी था। वरना मौका हाथ से निकल जाता।
मैंने कमर से थोड़ा नीचे दरार के पास ज्यादा मलना शुरू कर दिया। और अपना हाथ उसके चूतड़ों के उभारों को भी लगा देती। मुझे लगा कि उसका लंड अब बिस्तर से दबकर जोर मार रहा है। उसके जिस्म की सिहरन अब मुझे महसूस हो रही थी। मौका पाकर मैंने इस स्थिति का फायदा उठाया।
मैंने कहा – सर अब सीधे हो जाओ। आगे भी लगा देती हूँ। जैसे ही वो पलटा, उसका तना हुआ लंड सामने खड़ा हुआ आ गया।
मैं सिहर उठी। हाय राम! ये क्या! मैंने अपना चेहरा छुपा लिया।
विनय ने कहा – सॉरी रानी, मेरे जिस्म पर ७-८ महीने बाद किसी औरत का हाथ लगा था। इसलिए भावनाओं पर काबू नहीं रह सका। उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
सर जी… शर्म आती है। मैंने भी किसी मर्द को बहुत समय से छुआ नहीं है। मैंने आँख पर से हाथ हटा लिया और जैसे हामी भरते हुए विनय का साथ दिया।
फिल्म कैसी लगी? …मजा आया…?
जी… जी… क्या कह रहे हैं आप? मैं सब समझ चुकी थी। मैं जानबूझकर शर्मा रही थी। बस विनय के पहल का इंतजार था। सो उसने पहल कर दी। मेरी चूत फड़क उठी। मैंने अपना हाथ नहीं छुड़ाया। वो मेरा हाथ खींचकर अपने और समीप लाया।
मेरा बदन थरथरा उठा। चेहरे पर पसीना आ गया। मेरी आँखें उसकी आँखों से मिल गईं। मैं होश खोने लगी। अचानक मेरी चुचियों पर उसके हाथ का दबाव महसूस हुआ। वो दब चुकी थी। मैं सिमट गई। सर प्लीज…! नहीं… मैं मर जाऊँगी…!
विनय ने तकिए के नीचे से एक ५०० का नोट मेरी चोली में घुसा दिया। ५०० मेरे लिए बड़ी रकम थी। मैं पिघल उठी। मेरा काँपता जिस्म उसने भींच लिया। मैंने अपने आप को उसके हवाले कर दिया।
“पसीना पोंछ लो।” उसने चादर के एक कोने से मेरा मुँह पोंछ दिया। और मेरे नरम काँपते होंठों को उसने अपने होंठों से दबा लिया। मेरी इच्छा पूरी हो रही थी। पैसे भी मिल रहे थे। और अब मैं चुदने वाली थी। मेरा शरीर वासना की आग में सुलगने लगा था। चूत पानी छोड़ने लगी थी। शरीर कसमसाने लगा। उसकी बलिष्ठ बाहें मुझे घेरने लगीं। मेरा हाथ नीचे फिसलता हुआ उसके लंड तक पहुँच गया।
आप यह Vidhwa Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है। और ऐसी कहानियां पढ़ने के लिए दोबारा विजिट करें Free Sex Kahani
मैंने इजाजत माँगी। सर… छोटे साहब को?
रानी… मेरी रानी… जरा जोर से थामना। कहीं छूट न जाए। उसने अपने लंड को और ऊपर उभार लिया। मेरा हाथ उसके लंड पर कस गया। उसने मुझे एक झटके में ही बिस्तर पर खींचके पटक दिया। और सीधे मेरी चूत पर वार किया। मेरी चूत को अंदर हाथ डालकर दबा दिया। मैं तड़प उठी। वो मसलता ही गया। मैं छटपटाती ही रही। पर उसने अपना हाथ नहीं हटाया।
हाय… रे! सर जी… मर गई मैं। क्या कर रहे हो… आह्ह्ह्ह! मैं रे…! मेरी खुशी भरी तड़पन उसे अच्छी लगने लगी।
कहाँ थी तू अब तक रे! क्या मस्त हो रही है! विनय नशे में बोला। मेरी चूत दबाकर मसलता रहा। पर ये ५०० का नशा भी साथ में था। उसकी इच्छा मुझे पूरी जो करनी थी। मेरे सारे कपड़े एक-एक करके उतरते जा रहे थे। हर बार मैं जानकर नकली विरोध करती।
अंततः मैं निर्वस्त्र हो गई। मेरी चुचियाँ बाहर झलक पड़ीं। मेरा नंगा जिस्म चमक उठा। मैंने नशे में अपनी आँखें खोलीं तो विनय का बलिष्ठ जिस्म नजर आया जिसे मैं छुप-छुपकर कितनी बार देख चुकी थी। उसका चेहरा मुझे अपनी चूत की तरफ झुकता नजर आया। मेरी क्लीन शेव चूत की पंखुड़ियों के बीच रिसता पानी उसे मदहोश करने लगा।
उसकी जीभ का स्पर्श मुझे काँपकाँपाने लगा।
मैंने सिसकारी भरते हुए कहा। सर नहीं प्लीज… मत करिए। पर उसने मेरी टांगों को चीरकर चूत और खोल दी। और उसके होंठ मेरी चूत से चिपक गए। मैंने अपनी चूत मस्ती में और उभार दी।
रानी… ना ना करते, पूरी चुद जाओगी। कहकर उसने चूत पर जीभ गहरी घुसाकर निकाली। मैं उत्तेजना से कसमसा उठी। अब मेरा दाना और चूत दोनों ही जीभ से चट रहा था। बहुत सालों बाद मुझे ये सुख मिला था।
उसने मुझे घुमाकर उल्टी कर दिया। और चूतड़ों को थपथपाने लगा। यानी अब मेरी गांड़ की बारी थी। मेरा दिल खुशी के मारे उछल पड़ा। गांड़ चुदवाना मेरा पहला शौक रहा है। उसके बाद फिर चूत चुदाई का आनंद।
सर ये नहीं… प्लीज… मेरी फट जाएगी। मैंने अपने नखरे दिखाए। पर ये क्या विनय ने एक और ५०० का नोट लहरा दिया।
ये इस प्यारी गांड़ की चुदाई की रानी। मैं पिघल उठी। मेरे मन चाहे कम के अब मुझे १००० मिल चुके थे। इससे ज्यादा खुशी और क्या हो सकती है। विनय ने थूक का एक बड़ा लौंडा मेरे चूतड़ों के छेद पर टपका दिया। और उछलकर मेरी पीठ पर चढ़ गया। कुछ ही देर में उसका लौड़ा मेरी गांड़ के छेद में घुस गया। दर्द झेलना तो मेरी आदत बन चुका था।
आह… रे… घुस गया सर…!
रानी तू कितनी अच्छी है। पहले कहाँ थी रे!
आप ही ने इस गरीब पर ध्यान नहीं दिया। हाय गांड़ चुद रही है रे!
रानी… तुझे मैं अपनी रानी ही बनाकर रखूँगा। तूने तो मुझे खुश कर दिया… आज!
आप यह Vidhwa Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है। और ऐसी कहानियां पढ़ने के लिए दोबारा विजिट करें Free Sex Kahani
धचाक धचाक लंड घुसता रहा। मेरी गांड़ चुदती रही। आज गांड़ को लंड का प्यारा-प्यारा मजा मिल गया था। मैं विनय की आभारी हो चुकी थी। मैंने भी अब मन की करने की सोची। और कहा – सर, अब आप कहें तो मैं आपको चोदूँ दूँ?
कैसे… आदमी कैसे चुद सकता है?
आप बिस्तर पर सीधे लेट जाइए। मैं आपके खड़े लंड पर बैठकर आपको चोदूँगी। विनय हँस पड़ा।
छुरी तरबूज पर पड़े या तरबूज छुरी पर। चुदेगी तो चूत ही ना। मैं शर्मा गई।
हटो जी… आ जाओ ना…!
विनय नीचे लेट गया। उसका खड़ा लंड मेरी चूत को चुनौती दे रहा था। मैं धीरे से उसके लंड पर निशाना लगाकर बैठ गई। पर विनय को कहा चैन था। उसने नीचे से ही अपने चूतड़ उछालकर मेरी चूत को लपेटे में ले लिया। और चूत को चीरता हुआ लंड अंदर घुस पड़ा।
मेरा बैलेंस गड़बड़ा गया। और मैं धच् से लंड पर पूरी बैठ गई। मेरे मुँह से चीख निकल पड़ी। लंड चूत की पूरी गहराई पर जाकर गड़ चुका था। मेरी चूत से थोड़ा सा खून निकल पड़ा था। मैंने उंगली से देखा तो लाल रंग। पर ये तो लड़कियों के साथ चुदाई में साधारण सी बात है। पर विनय घबरा गया। अरे ये क्या… खून… सॉरी!
मैंने उसके होंठों पर उंगली रख दी। और नशे में उसकी आँखों में देखा। और कहा – चुप रहो ना… करते रहो!
पर इसका तुरंत मुझे मुआवजा मिल गया। एक ५०० का नोट और लहरा उठा। ये विनय क्या कर रहा है?
नहीं चाहिए मुझे। पर उसने मुझे दिए हुए नोटों के पास उसे रख दिया। हमारा कार्यक्रम आगे बढ़ चला। अब मुझे पूरी जान से उसे संतुष्ट करना ही था। मैंने अपनी चूत अंदर ही अंदर सिकोड़ ली और टाइट कर ली। फिर उसके लंड को रगड़ना शुरू कर दिया। चूत को टाइट करने से मुझे चोट भी लग रही थी। पर विनय को टाइट चूत का मजा आने लगा था।
पर नतीजा। मैं चरम सीमा पर पहुँच गई। साथ ही विनय भी अपना शरीर लहराने लगा।
मेरी जानू… मेरी जान… मैं तो गया। निकल जा रहा है। रानी हाय… उईiiiiएeeeeeeeee। विनय के साथ मेरा भी रस निकलने लगा। उसका लंड भी मेरी चूत में अपना वीर्य छोड़ने लगा। हम दोनों आपस में लिपटे पड़े। मैं पूरी तरह झड़ चुकी थी। उसके वीर्य को मेरी चूत में लिपटकर निकलने का मौका दे रही थी। कुछ ही देर में हम दोनों निढाल पड़े थे।
विनय उठा और पास में पड़ा तौलिया लपेटकर बाथरूम में चला गया। मुझे भी कुछ नहीं सूझा तो मैं भी उसी के साथ बाथरूम में घुस गई। और पानी से चूत पर लगा वीर्य साफ करने लगी।
आज तो रानी तुमने मेरी आत्मा को प्रसन्न कर दिया। अब एक काम करो। सामने ब्यूटी पार्लर में जाओ और उसे कहना कि मैंने भेजा है।
मैं सर झुकाए बाहर आकर कपड़े पहनने लगी। और नोट गिनकर संभालकर अपने ब्लाउज में रखने लगी। पर ये क्या विनय ने एक झटके से मेरे हाथ से नोट ले लिया।
आप यह Vidhwa Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है। और ऐसी कहानियां पढ़ने के लिए दोबारा विजिट करें Free Sex Kahani
क्या करोगी इनका। ये तो कागज के टुकड़े हैं। मेरा दिल तो धक्क से रह गया। मेरे तो होश उड़ गए। रुपये छीनने से मुझे ग्लानि महसूस होने लगी।
पर दूसरे पल ही मेरे चेहरे पर दोगुनी खुशी छलक पड़ी। विनय ने अलमारी खोलकर गहने मेरी तरफ उछाल दिए। सजो मेरी रानी। आज से तुम मेरी नौकरानी नहीं रानी की तरह रहोगी। और रहे रुपये, ये सब तुम्हारे ही हैं।
मेरी आँखें फट रही थीं। ये सब क्या हो गया। मैंने सिर्फ अपनी वासना की प्यास बुझाई थी। मेरी आँखों से खुशी के आँसू निकल पड़े। मेरे हाथ बरबस भगवान के सजदे में उठ गए।
शाम को जब मैं पार्लर से बाहर आई तो एक सेक्सी बाला दिख रही थी। मेरे रूप को पार्लर में निखार दिया गया था। विनय सच में हीरे की पहचान रखता था।
घर पर मेरा बेटा सचिन भी मुझे पहचान न सका। बोला – मैडम माँ घर पर नहीं हैं। मैंने उसे गोद में उठाकर चूम लिया। वो हैरानी से देखता रह गया। रात होते ही अपनी काली चमचमाती कार में हम सचिन के साथ फाइव स्टार होटल में गए।
विनय ने वहाँ मुझे पहली बार इंग्लिश में बात करते हुए देखा। मेरी स्टाइल भी देखी। तुम तो कह रही थी कि तुम ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं हो। और ये स्टाइल?
विनय मैं एमए हूँ और एक इंग्लिश स्कूल में टीचर थी। पर मुझे ज्यादा वेतन वाली नौकरी चाहिए थी। आपको जैसी चाहिए थी मैं वैसी बन गई।
विनय को मुझ पर नशा हो उठा। कुछ दिनों में होटल में लोग मेरे दीवाने हो गए।
मैंने विनय से कहा मैं घर पर खाना बना लूँगी। हम यहाँ खाना खाने नहीं आएंगे। विनय सब समझ चुका था।
अगले दिन मैं अखबार में विज्ञापन देखकर। मेरे घर के आगे लड़कियों और महिलाओं की लाइन लगी थी। और मुझे अपने परिवार यानी मैं, विनय और सचिन के लिए नौकरानी चुननी थी।