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बस स्टैंड पर मिला हरियाणवी फौजी

Haryanvi soldier gay sex story: मैं, जइन खान, मेरठ के श्याम नगर का रहने वाला हूँ। उम्र 21 साल, रंग गोरा, चेहरा नशीला और बदन ऐसा कि जो देखे, बस देखता ही रह जाए। मेरी आँखों में एक अलग सी चमक है, और हँसी ऐसी कि सामने वाला पल में दीवाना हो जाए। लंबाई 5 फीट 8 इंच, छरहरा बदन, लेकिन गांड भरी हुई, जो लंड की तलाश में हमेशा कुलबुलाती रहती है। मुझे गांड मरवाने और लौड़ा चूसने का गजब का शौक है। लंड मोटा, लंबा, तगड़ा होना चाहिए, बस फिर मैं उसे छोड़ता नहीं—चूस-चूस कर उसका सारा रस पी जाता हूँ। ये कहानी मेरी उसी तलाश और एक हरियाणवी फौजी के तगड़े लंड की है, जो मुझे दिल्ली के बस स्टैंड पर मिला।

ये बात इसी साल की है। मैं दिल्ली अपने किसी सरकारी काम से गया था। कागज बनवाने का काम था, जो सुबह से दोपहर तक निपट गया। दिल्ली में मैंने बस स्टैंड के पास एक छोटे से होटल में कमरा लिया। कमरा साफ-सुथरा, बिस्तर नरम, और खिड़की से बस स्टैंड की हलचल दिखती थी। काम निपटने के बाद दोपहर को फ्री था, तो मन में खुराफात उठी। सोचा, कमरा खाली पड़ा है, क्यों ना किसी तगड़े लंड को ढूंढकर अपनी गांड की गर्मी शांत की जाए। बस, इसी खोज में मैं बस स्टैंड की तरफ निकल पड़ा।

सिंधी कैंप के पास एक पेशाबघर था। मैंने सोचा, यही ठिकाना है, जहाँ लंड की तलाश पूरी हो सकती है। मैं वहाँ खड़ा हो गया, नजरें इधर-उधर दौड़ाने लगा। बसें आ रही थीं, जा रही थीं। लोग पेशाबघर की तरफ आ रहे थे, कोई टैंपो पकड़ने जा रहा था। मैं एक घंटे से खड़ा था, पर कोई ढंग का माल नहीं दिखा। मन में बेचैनी बढ़ रही थी। गांड में खुजली हो रही थी, और लंड की तलब और तेज। तभी एक बस रुकी। उसमें से ढेर सारे लोग उतरे। कुछ पेशाबघर की तरफ आए, कुछ इधर-उधर चले गए।

मेरी नजर एक लंबे-चौड़े मर्द पर पड़ी। उम्र करीब 30-32 साल, कद 6 फीट, चौड़ा सीना, मजबूत बाहें, और चेहरा ऐसा कि देखते ही लगे—ये हरियाणवी फौजी है। कुर्ता-पजामा पहने था, पजामे का नाड़ा ढीला-सा, और चाल में एक अलग सा रौब। वो पेशाबघर की तरफ बढ़ा। मेरे मन में लड्डू फूटने लगे। मैं भी उसके पीछे चल दिया और उसके बगल वाले पेशाबघर में खड़ा हो गया। वो मूत रहा था, और मैंने चोरी-चोरी उसका लंड देखने की कोशिश की। जैसे ही मेरी नजर उसके लंड पर पड़ी, मेरा दिल धक-धक करने लगा। लंड ढीला था, फिर भी मोटा और लंबा, सुपारा गुलाबी और चमकदार।

उसने मुझे झांकते देख लिया और हरियाणवी लहजे में बोला, “के बात सै, भाई? पहली बार लंड देख रिया सै? इतना क्यूँ झांक रिया सै?” उसकी आवाज में मस्ती थी, पर एक दबंगपन भी। मैं हँस पड़ा और बोला, “हाँ जी, पहली बार ही ऐसा माल देखा। आपका लंड तो गजब का मोटा-लंबा है। देखते ही मन कर रिया कि इसे मुँह में ले लूँ।” मेरी बात सुनकर वो हँसा और बोला, “बोल, कहाँ लेगा? मैं दे दूंगा, पर फेर जो मैं करूँ, तू मना ना करियो। हाँ बोल, तो तुझे इस हरियाणवी लंड का स्वाद चखा दूँ।”

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मैंने पल भर की देर न की और हाँ बोल दिया। वो लंड को पजामे में डालते हुए मेरे साथ चल पड़ा। रास्ते में बात हुई तो पता चला, उसका नाम सतपाल है, आर्मी में है, और हरियाणा के जींद का रहने वाला। चेहरा सख्त, पर आँखों में शरारत। मैं उसे उसी होटल के कमरे में ले गया। कमरे में घुसते ही मैंने दरवाजा बंद किया और उसका लंड पजामे के ऊपर से ही पकड़ लिया। मोटा-सा लंड मेरे हाथ में आया, तो मैंने उसे मसलना शुरू कर दिया। सतपाल की साँसें तेज होने लगीं। उसने पजामा खोला और लंड बाहर निकाला। “ले भाई, चूस ले। जितना मन करे, चूस!” उसकी आवाज में एक मर्दाना गुर्राहट थी।

मैं घुटनों पर बैठ गया। उसका लंड अब पूरा खड़ा था—8 इंच लंबा, 3 इंच मोटा, सुपारा टमाटर की तरह लाल और चमकदार। मैंने पहले जीभ से सुपारे को चाटा। “आह्ह… स्स्स…” सतपाल के मुँह से सिसकारी निकली। मैंने जीभ को सुपारे के चारों तरफ घुमाया, फिर धीरे-धीरे लंड को मुँह में लिया। उसका स्वाद नमकीन-सा था, और गंध में मर्दानगी की खुशबू। मैंने लंड को गले तक उतारा, पर पूरा नहीं गया। फिर भी मैं चूसता रहा। कभी सुपारे को चाटता, कभी टट्टों को मुँह में भर लेता। सतपाल की उंगलियाँ मेरे बालों में थीं, और वो धीरे-धीरे मेरे मुँह को चोदने लगा। “आह… भोसड़ी के, बड़ा मस्त चूस रिया सै। ले, और ले मादरचोद!” उसकी गालियाँ मेरे जोश को और बढ़ा रही थीं।

करीब 10 मिनट तक मैंने उसका लंड चूसा। मेरे मुँह में थकान होने लगी थी, पर मजा इतना था कि रुकने का मन नहीं था। सतपाल ने मुझे खींचकर खड़ा किया और बोला, “चल, अब मैं तुझे सिखाऊँगा लंड कैसे चूसते हैं।” उसने मेरे मुँह को पकड़ा और अपना लंड मेरे गले में पेल दिया। “आह… ले साले, हरियाणा का लंड सै ये। दस मिनट में पानी ना छोड़े!” वो मेरे मुँह को जोर-जोर से चोदने लगा। “उम्म… उह्ह… स्स्स…” मेरी साँसें रुक रही थीं, पर मैं उसका लंड पूरा लेने की कोशिश कर रहा था। करीब 15 मिनट तक उसने मेरे मुँह को चोदा, फिर अचानक एक जोरदार पिचकारी मेरे मुँह में मारी। गर्म, गाढ़ा रस मेरे गले में उतर गया। कुछ मेरे चेहरे पर छप गया। इतना माल था कि मेरी शर्ट तक भीग गई। मैंने बाथरूम में जाकर मुँह धोया और कपड़े बदले।

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वापस आया तो सतपाल बिस्तर पर लेटा था, पजामा अभी भी नीचे। मैंने खाना मंगवाया। हम दोनों ने खाना खाया—सादी रोटी, दाल और चिकन। खाने के दौरान उसने बताया कि उसे कुछ काम से जाना है, पर मैंने उसे रात रुकने के लिए मना लिया। मेरी गांड में अभी भी खुजली थी। मैंने कहा, “सतपाल भाई, अभी समय है, मेरी गांड का सुख ले लो।” वो हँसा और बोला, “ना भाई, अभी काम सै। तू चाहे तो एक बार और लंड चूस ले।” मैंने हँसकर हाँ में सिर हिलाया। उसने लंड निकाला, जो अब ढीला था, पर फिर भी मोटा। मैंने उसे हाथ में पकड़ा, जीभ से चाटा, और धीरे-धीरे चूसने लगा। “आह्ह… स्स्स… बड़ा मस्त चूस रिया सै,” सतपाल की सिसकारियाँ फिर शुरू हो गईं। मैंने उसके टट्टों को सहलाया, लंड को गले तक लिया। करीब 10 मिनट बाद उसने फिर मेरे मुँह में पिचकारी मारी। मैंने सारा रस पी लिया और बाकी कपड़े से पोंछ लिया।

थकान के मारे हम दोनों नंगे ही बिस्तर पर लेट गए। मुझे नींद आ गई। शाम को सतपाल वापस आया। उसकी आहट से मेरी नींद खुली। वो कपड़े उतार रहा था। उसका नंगा बदन देखकर मेरी गांड फिर कुलबुलाने लगी। मैंने झट से उसका लंड मुँह में लिया और चूसने लगा। “आह… ले मेरी जान, जितना चूसना सै, चूस ले!” सतपाल की आवाज में जोश था। मैंने जीभ से उसके सुपारे को चाटा, टट्टों को सहलाया, और लंड को गले तक उतारा। करीब 15 मिनट तक चूसने के बाद सतपाल बोला, “चल जइन, अब घोड़ी बन जा। तेरी गांड की बारी सै।”

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मैंने तुरंत पोजीशन ली। गांड हिलाते हुए मैंने कहा, “पेल दो भाई, मेरी गांड की आग बुझा दो।” सतपाल हँसा और बोला, “साले, सूखी गांड मरवाएगा? तेल लगा ले।” मैंने तुरंत तेल की शीशी उठाई और उसके लंड पर खूब तेल मला। फिर अपनी गांड पर भी तेल लगाया। सतपाल ने धीरे से लंड मेरी गांड में डाला। दो इंच ही गया था कि दर्द की चीख निकल गई, “आह्ह… ईईई… भाई, धीरे!” सतपाल रुका, फिर और तेल लगाकर लंड डाला। इस बार लंड सटाक से अंदर चला गया। “आह्ह… उह्ह… फाड़ दी मेरी गांड!” मैं चीखा। सतपाल ने धीरे-धीरे झटके शुरू किए। दर्द धीरे-धीरे मजे में बदलने लगा। “आह… स्स्स… और जोर से पेलो भाई!” मैंने कहा।

सतपाल ने जोरदार झटके शुरू किए। “ले साले, हरियाणा का लंड सै ये। तेरी गांड फाड़ दूंगा!” उसकी गालियाँ मेरे जोश को दोगुना कर रही थीं। “आह… पेलो भाई, मेरी गांड को चोद डालो! आह… स्स्स…” मैं गांड हिलाते हुए चिल्ला रहा था। करीब 20 मिनट तक उसने मुझे घोड़ी बनाकर चोदा। फिर उसने मुझे सीधा लिटाया, मेरी टाँगें उठाईं और लंड फिर से मेरी गांड में पेल दिया। “आह… उह्ह… भोसड़ी के, ले मादरचोद!” सतपाल गुर्रा रहा था। मैं भी जोश में बोल पड़ा, “हाँ भाई, अपनी बीवी की तरह चोदो! फाड़ दो मेरी गांड!”

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शाम के सात बज चुके थे। सतपाल का चेहरा लाल हो गया था। उसने एक जोरदार गुर्राहट के साथ मेरी गांड में पिचकारी मारी। गर्म रस मेरी गांड में भरा गया। “आह… स्स्स… बहुत मजा आया भाई,” मैंने कहा। सतपाल मेरे ऊपर ही लेट गया। कुछ देर बाद हम अलग हुए और आराम करने लगे। रात 11 बजे मैं फिर सतपाल की बाहों में लिपट गया। “जानू, एक बार और चोदो ना,” मैंने मस्ती भरे लहजे में कहा। सतपाल ने मेरे होंठों को चूमा, मेरे सीने को सहलाया, और एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा। “आह… स्स्स…” मैं सिसकार उठा।

“चल, अब आधा घंटा मेरा लंड चूस,” सतपाल ने कहा। मैंने उसका लंड मुँह में लिया और चूसने लगा। जीभ से सुपारे को चाटा, टट्टों को सहलाया, और लंड को गले तक उतारा। “आह… मस्त चूस रिया सै, जइन!” सतपाल सिसकार रहा था। आधा घंटा चूसने के बाद सतपाल ने मुझे गोद में उठाया और दीवार के सहारे टिका दिया। उसने मेरा एक पैर उठाया और लंड मेरी गांड में पेल दिया। “आह… उह्ह… स्स्स…” मैं सिसकार रहा था। सतपाल ने मुझे गोद में उठाकर चोदना शुरू किया। “ले साले, हरियाणा का देसी लंड! चुद ले भोसड़ी के!” वो गुर्रा रहा था। मैं ऊपर-नीचे हो रहा था, उसका लंड मेरी गांड को फाड़ रहा था।

करीब 15 मिनट बाद सतपाल ने मुझे नीचे उतारा और जमीन पर बैठ गया। “चल, अब मेरे लंड पर बैठ,” उसने कहा। मैंने धीरे से लंड अपनी गांड में लिया और ऊपर-नीचे होने लगा। सतपाल ने मुझे अपनी ओर खींचा और मेरे होंठ चूसने लगा। “आह… स्स्स… और जोर से चोदो!” मैं चिल्ला रहा था। करीब 10 मिनट बाद सतपाल ने मुझे बंदर की तरह चोदना शुरू किया। “आह… ले मादरचोद, अब पानी निकालता हूँ!” उसने गुर्राते हुए मेरी गांड में गर्म पिचकारी मारी। मैं थककर उसके ऊपर लेट गया।

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रात का एक बज गया था। हम दोनों नंगे ही लिपटकर सो गए। सुबह सतपाल ने मुझे एक बार फिर चोदा। उसका लंड मेरी गांड में सटाक-सटाक पेल रहा था। “आह… स्स्स… भाई, फाड़ दो!” मैं चिल्ला रहा था। सतपाल ने फिर पिचकारी मारी और 12 बजे वो चला गया।

आपको मेरी ये हरियाणवी फौजी की चुदाई की कहानी कैसी लगी, जरूर बताएँ।

कहानी का अगला भाग: राजस्थान के मॉडल लड़के ने गांड मारी

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