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बारिश में भीगी कुंवारी चूत को खेत में फाड़ा

Khet me chudai sex story: दोस्तों, मैं गोविंद चौधरी राजस्थान के बाड़मेर जिले से ग्रामीण परिवेश में रहने वाला हूं।

यह कहानी मेरी और मेरे पड़ोस में रहने वाली लड़की मिलन चौधरी के बीच हुए सेक्स की है।

कहानी उस समय की है जब मैं 20 साल का था यानी आज से तीन साल पहले की।

उस समय मिलन चौधरी की उम्र 18 साल की थी।

मिलन काफी हॉट गर्ल थी और स्कूल में भी काफी लड़के उस पर मरते थे।

अब मैं मिलन के बारे में आपको बता देता हूं।

वह कक्षा 12वीं में पढ़ती थी और मैं उस समय बीए थर्ड ईयर में पढ़ता था।

उसके साइज के बारे में बता देता हूं।

उसके बूब्स 32 इंच के थे तथा उसके ऊपर छोटे-छोटे निप्पल भी थे जो सलवार कुर्ता पहनने पर ऊपर से दिखाई देते थे।

कमर भी काफी चौड़ी थी यानी लगभग 30 इंच की थी।

और उसकी गांड काफी ज्यादा बड़ी थी लगभग 36 इंच की थी।

हम ग्रामीण परिवेश से आते हैं इस कारण हम खेती-बाड़ी का काम करते हैं और साथ में पशुधन भी रखते हैं जिनको दूर खेत में चराने का काम भी करते हैं।

हम गांव के अंदर दूर-दूर बसी ढानियों में रहते हैं और हमारे घर भी काफी दूर-दूर होते हैं।

मिलन चौधरी का घर मेरे से लगभग 200-300 मीटर दूर है।

हम एक दूसरे के घर आते-जाते रहते थे।

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अब मैं बिना देर करते हुए सीधा कहानी पर आता हूं।

मिलन चौधरी और उसका परिवार भी पशु रखते थे।

इस कारण उन्हें चराने के लिए मिलन और उसका सगा भाई आते थे।

और मैं भी अपनी बहन के साथ पशु चराने आता था।

तो हम पशु चराते साथ में खेल खेलते थे कबड्डी खेलते पकड़म-पकड़ाई खेलते थे कभी छुपन-छुपाई खेलते थे।

इस समय तक मेरे मन में उसके प्रति कोई ऐसा बुरा विचार नहीं था।

लेकिन धीरे-धीरे उसके फिगर और उसकी हॉट शरीर को देखकर मेरा भी मन उसके साथ सेक्स करने को होता था।

कबड्डी खेलते कभी-कभी मैं उसको टच भी कर लेता था।

तो मैं उसकी बूब्स तक मसल देता था लेकिन वह कभी कुछ नहीं कहती थी।

शायद उसको भी अच्छा लगता था।

और कभी-कभी छुपन-छुपाई खेलते-खेलते हुए भी बहुत बार बूब्स मसले थे और कभी-कभी गांड को टच कर देता था उस पर थप्पड़ भी मार देता था तो भी वह कुछ नहीं कहती थी।

कभी-कभी वह पशु चराने अकेली आती थी कभी उसका भाई भी साथ आता था।

इस तरह ही चलता रहता था।

मेरी भी बहन साथ में आती थी इस कारण उसके घरवाले भी ज्यादा कुछ संकोच नहीं करते थे।

वैसे भी मेरे ऊपर उनका विश्वास था।

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कभी-कभी छुपन-छुपाई खेलते-खेलते हम लोग ऐसी जगह छुपते थे जहां पकड़ना काफी मुश्किल काम होता था।

कभी-कभी मेरी बारी होती थी तो मैं पकड़ने जाता था तो मैं मिलन के पास बैठ जाता था मैं उसकी बूब्स मसलने लग जाता था और वो भी मेरा लंड पकड़ कर चूसती थी।

किसी को भी इस तरह पता नहीं चलता था लेकिन अभी तक चुदाई का मौका नहीं मिला था।

एक दिन मैं पशु चराने अकेला गया था और उधर से मिलन और उसका भाई दोनों आए थे।

लेकिन थोड़ी देर बाद में भाई किसी काम से घर चला गया वापस।

फिर खेत में हम दोनों ही रह गए थे।

तभी हल्की-हल्की सी बारिश होना शुरू हो गई थी। इस कारण भाई तो वापस आ नहीं सकता था और हम लोग एक दूर पेड़ों के घने झुंड वाले इलाके में जाकर बैठ गए।

वह जगह घने पेड़ों से घिरी हुई थी जहां बारिश की बूंदें पत्तियों को छूकर हल्की-हल्की आवाज़ करती हुई नीचे गिर रही थीं। हवा में मिट्टी और पत्तों की ताज़ी खुशबू फैली हुई थी। हमारे पास इससे बेहतर चुदाई का कोई मौका नहीं था। मैंने मिलन की ओर देखा और उसे चुदाई के बारे में पूछा।

उसने तुरंत हां कर दी क्योंकि वह भी काफी लंबे समय से इस पल के लिए तड़प रही थी। उसके चेहरे पर इच्छा की चमक साफ दिख रही थी और सांसें थोड़ी तेज़ हो गई थीं। मैंने भी बिना कोई देर किए सबसे पहले उसके ३२ साइज़ के बूब्स को मसलना शुरू कर दिया। उस समय वह सलवार कुर्ता पहने हुए थी। हल्की-हल्की बारिश लगातार गिर रही थी जो उसके कपड़ों को हल्का गीला कर रही थी।

मैंने दोनों हाथों से उसके नरम लेकिन भरे हुए बूब्स को जोर-जोर से दबाया। उंगलियां उसके कपड़े के ऊपर से ही उनकी गोलाई और कड़कपन को महसूस कर रही थीं। वह हल्के-हल्के सिसक रही थी और उसकी आंखें आधी बंद हो गई थीं। काफी देर तक बूब्स मसलने के बाद मैंने धीरे से उसका कुर्ता ऊपर की ओर उठाया और उतार दिया।

ग्रामीण परिवेश में ब्रा जैसी कोई चीज़ नहीं पहनी जाती थी। उसने सिर्फ बनियान टाइप की पतली चमीज पहनी हुई थी जिसे हमारी भाषा में चमीज कहते हैं। मैंने चमीज को भी ऊपर सरकाया और अब उसके दोनों बड़े-बड़े बूब्स पूरी तरह नंगे हो गए थे।

काफी कड़क बूब्स थे उसके। यानी आम की तरह बड़े और गोल। इस छोटी उम्र में भी छोटे-छोटे पेड़ पर भी बड़े-बड़े पपीते लटकाना काफी आश्चर्यजनक बात थी। बारिश की ठंडी बूंदें उसके नंगे स्तनों पर गिर रही थीं जिससे उनकी निप्पल्स सख्त होकर खड़ी हो गई थीं। मैंने दोनों हाथों से उन्हें मसलते हुए अपनी उंगलियों से निप्पल्स को घुमाया और हल्का-हल्का निचोड़ा। वह अब जोर से सांस ले रही थी और उसकी कमर हल्की-हल्की उठ रही थी।

फिर मैंने धीरे-धीरे ऐसे करते हुए सलवार का नाड़ा खोल दिया। सलवार को नीचे सरकाकर पूरी तरह उतार लिया। सलवार और कुर्ता दोनों को मैंने जमीन पर बिछा दिया ताकि एक मुलायम बिस्तर बन जाए। तब मैंने मिलन को कपड़ों के ऊपर लिटा दिया था।

फिर मैंने भी अपनी पैंट उतार दी और उसकी गांड के नीचे लगा दी।

बारिश की हल्की बूंदें अब भी गिर रही थीं और हमारे शरीरों को ठंडक दे रही थीं। मैंने अपनी पैंट को पूरी तरह खोलकर उतारा और उसे मिलन की गोल और नरम गांड के नीचे सावधानी से बिछा दिया ताकि वह आराम से लेट सके। उसके नीचे सलवार और कुर्ता पहले से ही बिछे हुए थे जो अब गीले होकर मुलायम लग रहे थे।

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फिर मैंने उसकी चड्डी उतार कर देखा तो उसकी चूत काफी बड़ी और आकर्षक थी। उसके फांकों को धीरे से अलग करते ही जन्नत जैसे दर्शन हो रहे थे। उसकी चूत के होंठ मोटे और गुलाबी थे जो बारिश की नमी से चमक रहे थे। ऊपर छोटे-छोटे बाल हल्के से उगे हुए थे जो उसके यौवन को और भी आकर्षक बना रहे थे। चूत ज्यादा काली तो नहीं थी बल्कि गुलाबी चूत थी उसकी जो देखते ही लंड खड़ा होने लगा।

मैंने बिना देर करते हुए अपनी चड्डी भी उतार दी और उसे उसकी चूत के ठीक नीचे जमीन पर बिछा दिया। अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। हवा में बारिश की सोंधी खुशबू के साथ हमारे उत्तेजित शरीरों की गंध मिल रही थी। मैंने अपने लंड पर थूक लगाया। लंड पहले से ही पूरा खड़ा और नसों से फूला हुआ था।

मैंने मिलन की दोनों टांगों को धीरे से ऊपर उठाया और अपनी कमर के पास रख लिया। फिर अपने लंड को उसकी चूत पर सेट करने लगा। लंड का सिरा उसके गुलाबी चूत के होंठों को छूते ही वह सिहर उठी। काफी देर तक मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर रगड़ा। ऊपर नीचे और गोल-गोल घुमाते हुए उसके क्लिटोरिस को बार-बार दबाया।

इससे उसकी चूत से गर्म और चिपचिपा पानी छोड़ने लगा जो मेरे लंड को पूरी तरह भीगा रहा था। वह भी मेरा लंड अपनी चूत के अंदर लेने के लिए बेचैनी से तड़पने लगी। उसकी कमर ऊपर उठ रही थी और सांसें तेज़ और भारी हो गई थीं। उसके चेहरे पर दर्द और खुशी का मिला-जुला भाव था।

हालांकि मिलन की यह पहली चुदाई थी। उसकी चूत बहुत टाइट थी और अभी तक किसी ने उसे नहीं चोदा था।

मैंने तो इस तरह काफी लड़कियों को चोदा था तो मुझे चुदाई का काफी अनुभव था।

फिर मैंने चूत पर अपना लंड सेट करके धक्का लगाया। लंड का मोटा सिरा उसके गुलाबी चूत के होंठों को अलग करते हुए अंदर घुसने लगा। तो मेरा दो इंच लंड उसकी फांकों को चीरते हुए अंदर चला गया। उसकी टाइट चूत मेरे लंड को जकड़ रही थी जैसे कोई गर्म और नरम रबर का फंदा हो।

मेरा लंड चूत में घुसते ही उसको एकदम बहुत तेज दर्द हुआ क्योंकि मेरा लंड काफी लंबा और तीन इंच मोटा था। उसकी आंखें एकदम फट गईं और मुंह से एक जोरदार चीख निकल गई जो बारिश की आवाज में घुल गई। उसका पूरा शरीर अकड़ गया और चूत की दीवारें मेरे लंड को और भी जोर से दबाने लगीं।

उसने मुझे हटाने के लिए मुझे धक्के देने शुरू किए और अपने ऊपर से हटाने की कोशिश की। उसके हाथ मेरी छाती पर जोर-जोर से लग रहे थे। इस समय बारिश भी काफी तेज शुरू हो गई थी और मेरी पीठ पर लगती ठंडी बूंदें काफी उत्तेजित कर रही थीं। पानी हमारे नंगे शरीरों पर बह रहा था जिससे उसकी चूत और भी चिकनी हो गई थी।

लेकिन मैंने बिना देर करते हुए उसके बूब्स मसले। दोनों बड़े-बड़े स्तनों को जोर से दबाते हुए अपनी उंगलियों से निप्पल्स को मसलता रहा। फिर उसके गालों पर गहरी किस की और धीरे से कहा, “रुक जा रे, दो मिनट दर्द होगा उसके बाद मजा आएगा।”

फिर मैंने दूसरा धक्का लगाया जिससे चार इंच लंड अंदर चला गया।

उसकी आंखों में आंसू आ गए। उसने मेरे कंधे पर अपने नाखूनों से नोच लिया।

फिर मैंने एक हाथ उसके मुंह पर रखा और तीसरे धक्के में पूरा लंड उसकी चूत के अंदर ठोक दिया। मैंने जोरदार धक्का मारा जिससे मेरा पूरा मोटा और लंबा लंड एक झटके में उसकी टाइट चूत को पूरी तरह चीरता हुआ अंदर चला गया। उसकी चूत फट गई और मेरा लंड पूरा खून से सन गया था। गर्म खून मेरे लंड के चारों ओर बह रहा था जो चूत की दीवारों को चिकना बना रहा था।

एक ही झटके में मैंने उसे लड़की से युवती बना दिया था। उसकी चूत अब पूरी तरह मेरे लंड से भरी हुई थी और उसकी अंदरूनी दीवारें मेरे लंड को जोर-जोर से जकड़ रही थीं। और मिलन की चूत के खून के धब्बे थोड़े से नीचे भी चले गए और मेरी चड्डी पर लग गए थे। लाल खून की छोटी-छोटी धाराएं उसके गांड के नीचे बिछी चड्डी पर फैल रही थीं।

मिलन को बहुत दर्द हो रहा था। उसका पूरा शरीर कांप रहा था। उसकी सांसें तेज और बेढब हो गई थीं। आंखों से आंसू लगातार बह रहे थे और उसके मुंह पर रखे मेरे हाथ के नीचे से हल्की-हल्की चीखें निकल रही थीं।

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बिना देर करते हुए मैंने तेज-तेज धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ मेरा मोटा लंड उसकी चूत को पूरी तरह भरता और खाली करता जा रहा था। उसके गर्म खून और चूत के रस का मिश्रण मेरे लंड को और भी चिकना बना रहा था। लगभग पांच मिनट की चुदाई के बाद वो भी गांड उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी थी। उसकी कमर अब मेरे धक्कों के साथ ऊपर उठने लगी थी।

लगभग 10-15 मिनट की दमदार चुदाई के बाद मैं अपना वीर्य उसकी चूत के अंदर ही छोड़कर उसके ऊपर लेट गया। मेरे लंड के अंदर से गर्म वीर्य की कई तेज धाराएं उसकी चूत की गहराई में छूट रही थीं। वीर्य की गर्माहट उसकी फटी हुई चूत को भर रही थी। अभी मिलन को काफी तेज दर्द हो रहा था।

इस कारण मैं काफी देर अंदर ही ऊपर लेटा रहा। मेरा लंड अभी भी उसकी चूत के अंदर धड़क रहा था।

मैंने वापस उसके बूब्स मसले और चुम्मा-चाटी की।

लगभग 10 मिनट बाद मैंने दूसरे राउंड की चुदाई शुरू की।

इसी समय मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। हम दोनों बारिश में भीग कर तरबतर हो गए थे। ठंडी बारिश की बूंदें हमारे नंगे शरीरों पर तेजी से गिर रही थीं जो हमें हल्की ठंडक के साथ और उत्तेजित कर रही थीं। थोड़ी बहुत ठंड भी लग रही थी जिससे मिलन का पूरा शरीर कांप रहा था और उसकी चूत मेरे लंड को और भी जोर से जकड़ रही थी।

और इस बार मैंने उसे घोड़ी बनाकर पेलना शुरू किया। मैंने मिलन को घुटनों के बल मोड़ा और उसकी कमर को थोड़ा ऊपर उठाया। उसकी गोल-गोल बड़ी गांड अब मेरे सामने पूरी तरह फैली हुई थी। मैंने अपने लंड को फिर से उसकी अब थोड़ी ढीली लेकिन अभी भी टाइट चूत पर रखा और एक जोरदार धक्के से अंदर ठोक दिया।

अब उसको भी मजा आने लगा था। वो रह-रह कर अपनी गांड उठा-उठा कर चुदाई में भरपूर साथ दे रही थी। हर धक्के पर उसकी गांड मेरी जांघों से टकरा रही थी और पच-पच की आवाज गूंज रही थी। अब उसकी चुदाई के कारण उसकी चूत ने बहुत सारा पानी छोड़ दिया था। इस कारण चूत में पच-पच की आवाज आ रही थी जो बारिश की आवाज के साथ मिलकर और भी उत्तेजक लग रही थी।

लगभग 10 मिनट की चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में ही दूसरी बार झड़ गया था। मेरे लंड से गर्म-गर्म वीर्य की मोटी धाराएं उसकी चूत की गहराई में छूट रही थीं। उसके बाद एक बार उसकी टाइट गांड भी मारी थी। मैंने उसके गांड के छेद पर थूक लगाकर धीरे-धीरे अपना मोटा लंड अंदर डाला।

हालांकि उसकी गांड बहुत बड़ी थी इस कारण उसे मारने में मुझे बहुत ज्यादा मजा आया था। उसकी नरम और मोटी गांड मेरे लंड को पूरी तरह समेट रही थी।

मेरे मोटे लंड के हर धक्के पर उसकी बड़ी-बड़ी गांड की नरम चमड़ी लहरा रही थी। अंदर की टाइट गर्माहट और नरमी ने मेरे लंड को पूरी तरह जकड़ लिया था जिससे हर बार निकलने और घुसने में भारी आनंद मिल रहा था। बारिश की ठंडी बूंदों के बीच यह गर्म चुदाई और भी उत्तेजक हो रही थी।

अब मूसलाधार बारिश में ज्यादा देर तक सेक्स नहीं हो सकता था।

चुदाई के बाद हमने कपड़े पहन लिए। भीगी हुई सलवार कुर्ता को शरीर पर चिपकाते हुए हम दोनों ने जल्दी-जल्दी कपड़े डाल लिए।

उसे चलने में भी काफी दिक्कत हो रही थी क्योंकि चूत और गांड दोनों दर्द कर रही थी। हर कदम पर वह लंगड़ाती हुई चल रही थी। उसकी चूत और गांड में अभी भी तीखा दर्द था जो मेरी बार-बार की ठुकाई के कारण हुआ था। उसके चेहरे पर दर्द के साथ संतोष का मिश्रित भाव था।

उसके बाद हमें जब भी मौका मिला तो हम खेत में चुदाई कर ली थी। खेतों के घने इलाकों में छिपकर हम बार-बार एक-दूसरे को भूखे जानवरों की तरह चोदते।

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कभी-कभी वो मेरे घर आती थी तब भी मौका मिलते ही मैं उसकी चुदाई कर देता था। घर के अंदर या पीछे वाले कमरे में हम घंटों तक एक-दूसरे के शरीर का मजा लेते।

मैंने लगभग उसकी तीन साल तक दमदार चुदाई की थी।

तीन साल में मैंने सैकड़ों राउंड सेक्स किया था उसकी चूत और गांड के छेद भी काफी बड़े कर दिए थे। बार-बार की जोरदार पेलाई से उसकी चूत अब आसानी से मेरा मोटा लंड समेट लेती थी और गांड का छेद भी ढीला और लचीला हो गया था।

मेरी चुदाई से उसका बदन काफी भर गया था बूब्स 36 इंच के हो गए थे और गांड भी काफी चौड़ी हो गई।

तीन साल की लगातार और दमदार चुदाई ने मिलन के शरीर को पूरी तरह से बदल दिया था। उसके स्तन अब और भारी तथा गोल हो गए थे जो चुदाई के दौरान लहराते हुए देखने लायक होते थे। जब मैं उसके बूब्स को जोर-जोर से मसलता या चोदते समय वे उछलते-कूदते तो उनका नजारा बेहद उत्तेजक होता। उसकी कमर और जांघें भी भरावदार हो गई थीं जो उसे और आकर्षक बना रही थीं। उसकी चूत और गांड अब पहले से कहीं ज्यादा लचीली और गर्म हो चुकी थीं जो मेरे लंड को आसानी से पूरी गहराई तक समेट लेती थीं।

उसके बाद उसकी शादी हो गई थी।

उसने मुझे अपनी सुहागरात की भी कहानी बताई थी किस तरह उसकी चुदाई उसके पति से हुई थी। उसने विस्तार से बताया था कि सुहागरात की रात उसके पति ने कैसे उसे पहली बार चोदा था और वह कितना दर्द और मजा महसूस कर रही थी।

यह मैं आपको किसी दूसरी कहानी में बताऊंगा।

तो दोस्तों कैसी लगी मेरी विलेज गर्ल फक स्टोरी।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।

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