Bahan ki gand chudai sex story: मेरा नाम मुकेश है। मैं बोकारो का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 25 साल है। मेरे घर में चार लोग हैं – पापा, मम्मी, बहन और मैं। मेरी बहन रेनू की उम्र 18 साल है। वह ट्वेल्थ में पढ़ती है। वह बहुत खूबसूरत और सेक्सी है। वह टाइट जींस और शॉर्ट स्कर्ट पहनती है।
शुरू में मेरे मन में उसके प्रति कोई गलत इरादा नहीं था। लेकिन एक दिन सब बदल गया।
मम्मी हमेशा रेनू को टाइट कपड़े न पहनने की सलाह देती थी लेकिन वह नहीं मानती थी। एक दिन रेनू ट्यूशन से रोती हुई घर आई। सब परेशान हो गए लेकिन वह कुछ नहीं बताती थी। मैं उसके पीछे उसके कमरे में गया।
मैंने उसका हाथ अपने सिर पर रखा और अपनी कसम देते हुए कहा कि सच बता। रेनू ने बताया कि ट्यूशन से आते समय उसके क्लास के लड़के मोनू ने बहुत गंदी बातें की थीं। उसने कहा था कि रेनू की चूचियां इतनी बड़ी कैसे हो गईं और गांड इतनी मोटी कैसे हो गई। साथ ही उसने पूछा था कि क्या वह अपनी गांड मरने देगी।
यह सुनकर मैं चौंक गया। मेरी नजर अनजाने में ही रेनू की गांड पर चली गई। उसने बहुत टाइट जींस पहनी थी। उसकी गांड सच में बहुत मस्त और गोल थी। देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया।
उस दिन के बाद मैं घर में रेनू को घूरने लगा। जब वह चलती तो उसकी गांड लहराती थी। मैं उसके बारे में गंदे खयाल सोचने लगा। मैं उसकी गांड चोदना चाहता था।
एक दिन मम्मी-पापा मामा की शादी में चले गए। रेनू एग्जाम के कारण घर पर ही रुक गई। हम दोनों अकेले थे। मैं उसे घूरने का पूरा मौका मिल रहा था।
रात में मुझे टॉयलेट जाना था। तब मुझे रेनू की आवाज सुनाई दी। वह फोन पर किसी से बात कर रही थी। मैंने सुन लिया कि वह मोनू को “आई लव यू” बोल रही थी। मोनू ने उसे घर बुलाने के लिए कहा लेकिन रेनू ने मना कर दिया क्योंकि मैं घर पर था।
अगले दिन मैंने जानबूझकर टेंशन वाला चेहरा बनाया।
रेनू ने मेरे उस उदास और परेशान चेहरे को देखा तो उसकी भौंहें सिकुड़ गईं। वह चिंता से मेरे पास आई और धीरे से पूछने लगी कि क्या बात है। मैंने कुछ पल चुप रहकर गंभीर स्वर में कहा कि यह बहुत सीक्रेट बात है। उसकी जिद बढ़ती गई। वह मेरे हाथ पकड़कर बार-बार पूछने लगी कि मुझे बताना ही पड़ेगा। आखिरकार मैंने हार मानकर सेक्स के बारे में बात शुरू की।
मैंने धीरे-धीरे विस्तार से बताया कि मेरा दोस्त राज अपनी बहन को चोदता है। मैंने उसे बताया कि राज कैसे अपनी बहन को बिस्तर पर लिटाकर उसके कपड़े उतारता है, उसके स्तनों को चूसता है और फिर अपनी मोटी लंड उसकी चूत में धकेलकर जोर-जोर से हिलाता है। रेनू चौंक गई। उसकी आँखें फैल गईं और मुंह थोड़ा खुला रह गया। उसके गालों पर लाली छा गई लेकिन वह चुपचाप सुनती रही। उसकी सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं।
फिर मैंने पूछा कि क्या उसका कोई बॉयफ्रेंड है। उसने शर्माते हुए हां कहा। मैंने मुस्कुराते हुए उसे बताया कि मैं अपनी गर्लफ्रेंड की गांड और चूत मारता था। मैंने विस्तार से वर्णन किया कि कैसे मैं उसे चारों खाने चित लिटाता, उसकी जांघें फैलाकर पहले उसकी गीली चूत को अपनी उंगलियों से सहलाता, फिर अपनी लंड उसके मुंह में देता और अंत में जोरदार धक्कों से उसकी चूत और गांड दोनों में घुसाकर चोदता था।
बातें करते-करते मैंने उसे गरम कर दिया। रेनू की सांसें अब भारी हो रही थीं। उसके स्तन ऊपर-नीचे तेजी से हिल रहे थे। उसकी गर्दन लाल हो गई थी और वह बार-बार अपनी जांघें रगड़ रही थी। उसकी आँखों में शर्म के साथ उत्तेजना साफ झलक रही थी। उसकी हथेलियाँ नर्वस होकर मुट्ठी बन रही थीं।
आखिर मैंने सीधे कहा कि अगर वह चाहे तो मैं उसे घर पर मोनू के साथ चुदवाने में मदद कर सकता हूं लेकिन बदले में मुझे उसकी गांड चाहिए।
पहले तो रेनू मना करने लगी लेकिन जब मैंने कल रात उसकी फोन वाली बात बता दी तो वह चुप हो गई।
उसके चेहरे पर शर्म और घबराहट के भाव उभर आए। वह कुछ पल के लिए नीचे देखती रही और फिर धीरे से सिर हिलाकर चुप रह गई। मैंने इस मौके का फायदा उठाते हुए उसके करीब सरक गया। मैंने अपने दोनों हाथों को उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके स्तनों पर रखा और धीरे-धीरे उन्हें दबाना शुरू कर दिया। उसके नरम और गोल चूचियों को अपनी हथेलियों में भरकर मैं उन्हें मसलने लगा। रेनू की सांसें तेज हो गईं और उसकी छाती ऊपर-नीचे हिलने लगी।
फिर मैंने उसके होंठ चूसने लगा। मैंने अपना मुंह उसके मुंह पर रखा और उसके निचले होंठ को चूसने लगा। मेरी जीभ उसके होंठों के बीच घुसकर उसके मुंह के अंदर घूमने लगी। उसके गर्म और नम होंठों का स्वाद मुझे और उत्तेजित कर रहा था। धीरे-धीरे वह भी साथ देने लगी। उसने अपनी बाहें मेरी गर्दन के चारों ओर डाल दीं और मेरे होंठों को जोर से चूसने लगी।
मैंने उसे नंगा कर दिया। मैंने उसके सारे कपड़े एक-एक करके उतार दिए। जब उसकी चूत पूरी तरह दिखाई दी तो मैंने देखा कि वह बिल्कुल चिकनी और बाल रहित थी। उसकी गुलाबी और नरम चूत की फांकों के बीच हल्की नमी चमक रही थी। मैंने घुटनों के बल बैठकर अपनी जीभ से उसकी चूत चाटी। मेरी जीभ उसके क्लिटोरिस पर घूमने लगी और फिर ऊपर से नीचे तक पूरी चूत को चाटने लगा। रेनू बहुत गीली हो गई। उसकी चूत से पारदर्शी रस निकलने लगा जो मेरी जीभ पर चिपचिपा स्वाद छोड़ रहा था। वह कराहने लगी और उसकी जांघें कांप रही थीं।
फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला। मैंने अपनी मोटी और कठोर लंड की नोक को उसकी चूत के मुंहाने पर रखा और धीरे से दबाव डालकर अंदर डाला। पहले दर्द हुआ। रेनू की आंखें बंद हो गईं और उसने दांत भींच लिए। उसकी चूत बहुत टाइट थी जिससे मुझे भी थोड़ा दर्द महसूस हुआ। लेकिन कुछ ही देर बाद वह मजा लेने लगी। उसकी चूत अब पूरी तरह गीली और ढीली हो गई थी। मैंने उसे जोर-जोर से चोदा। मेरे तेज धक्कों से उसके पूरे शरीर हिल रहे थे। उसकी चूचियां ऊपर-नीचे उछल रही थीं और वह जोर-जोर से कराह रही थी।
आखिर मैंने उसकी चूत में ही झड़ दिया।
थोड़ी देर बाद मैंने उसे घुमाया और उसकी गांड चाटी।
मैंने रेनू को पेट के बल लिटा दिया और उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया। उसकी गोल-मोटी और नरम गांड अब मेरे चेहरे के सामने थी। मैंने उसके नितंबों को जोर से फैलाया और अपनी गर्म, नम जीभ से उसके टाइट गांड के छेद को चाटना शुरू कर दिया। मेरी जीभ उसके सिकुड़े हुए छेद पर बार-बार घूम रही थी और बीच-बीच में अंदर धकेलने की कोशिश कर रही थी। रेनू का पूरा शरीर झनझना उठा। वह हल्की-हल्की सिसकारियां भरने लगी, “उम्म्म… अह्ह… भैया… क्या कर रहे हो… अह्ह…”
फिर अपना लंड उसकी टाइट गांड में डाला। मैंने अपनी मोटी, नसों वाली लंड की नोक को उसके गांड के छोटे से छेद पर रगड़ा और धीरे-धीरे दबाव बढ़ाने लगा। वह चीखी लेकिन मैंने रुकने नहीं दिया। रेनू की तेज चीख कमरे में गूंज गई, “आआआह्ह… दर्द हो रहा है… भैया निकालो ना… बहुत जलन हो रही है…” उसकी गांड की दीवारें मेरी लंड को बहुत जोर से रोक रही थीं। जलन और तीखा दर्द उसे सता रहा था। उसकी आंखों से आंसू निकल आए थे और वह बिस्तर को दोनों हाथों से कसकर पकड़े हुए थी। फिर भी मैंने रुकने की बजाय उसकी कमर को मजबूती से थामकर एक लंबा, जोरदार धक्का मारा। मैंने उसकी गांड में पूरा लंड पेल दिया।
रेनू ने कहा, “भैया जी भर के चोद लो, मेरी यह मस्त गांड अब तुम्हारी है।”
उसकी आवाज पहले दर्द से कांप रही थी लेकिन धीरे-धीरे उसमें मस्ती घुलने लगी। मैंने उसकी गांड में जोर-जोर से धक्के मारे। हर धक्के के साथ उसके नितंब मेरे पेट से जोरदार टकरा रहे थे और “चप्प-चप्प” की आवाजें भर रही थीं। रेनू अब दर्द और खुशी के मिश्रण में जोर-जोर से कराह रही थी, “अह्ह… अह्ह… भैया… फाड़ दो मेरी गांड… और जोर से… हां… यही… मारो ना… मेरी गांड तुम्हारी है… चोदो और तेज…” उसकी टाइट गांड मेरी लंड को कसकर दबा रही थी। दर्द अब उसके लिए गहरे मजा में बदल रहा था। वह अपनी गांड पीछे की तरफ उठाकर मेरे धक्कों का स्वागत कर रही थी। आखिरकार उसकी गांड में ही अपना सारा माल झाड़ दिया।
उसकी गांड सूज गई थी और वह चल नहीं पा रही थी। लेकिन उसके चेहरे पर संतोष था।
अगली कहानी में बताऊंगा कि कैसे मेरी बहन ने मेरे ही बेड पर अपने यार मोनू से चुदाई करवाई और मैं छिप कर देखता रहा, और उसके यार के जाने के बाद उसके माल से भरी मेरी बहन की चूत को मैंने भी मारी।
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