Bhabhi ki condom lga kar chudai: यह कहानी मेरे मामा के लड़के की वाइफ मेरी भाभी के बीच की सेक्स कहानी हे कैसे मैंने अपनी भाभी की चुदाई की।
मेरा नाम अजीत है। मेरी उम्र अभी 30 साल है। मैं आपको एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूं दोस्तों। मेरा नाम अजीत है। मेरी उम्र उस समय 22 साल थी और भाभी का नाम सरिता था।
भाभी की उम्र उस समय 28 से 30 साल के बीच रही होगी। भाभी की खूबसूरती का कोई जवाब नहीं था। उनकी गोरी-गोरी त्वचा चमकती हुई लगती थी। उनकी आंखें बड़ी-बड़ी और आकर्षक थीं जो किसी को भी अपनी ओर खींच लेती थीं। उनकी नाक नुकीली और होंठ गुलाबी थे। खासकर उनकी छातियां भरी-भरी और उभरी हुई थीं जिनका कोई मुकाबला नहीं हो सकता था। उनके शरीर की हर अदा में एक अलग ही आकर्षण था।
तो बात कुछ ऐसी शुरू हुई। मैं अपने मामा के यहां गया हुआ था। मामा के यहां पहुंचकर मैं सभी से मिला और भाभी से भी मिला। भाभी बड़ी खूबसूरत थीं। भाभी की चुचियों का तो कोई जवाब ही नहीं था। उस दिन जब मैं भाभी से मिला तो मेरे दिमाग में उनके प्रति कोई गलत विचार नहीं थे। मैं उनसे कम बात करता था। ज्यादा बातचीत नहीं करता था।
पर कुछ समय के बाद भाभी से मेरी बातचीत कुछ ज्यादा ही होने लगी थी। नॉर्मल बातें होती थीं। उनके प्रति मेरे मन में कोई गलत विचार नहीं थे। पर ऐसे ही बातचीत चलते-चलते मेरे मन में उनके प्रति थोड़ा प्यार हो गया। कुछ समय बाद मैं अपने घर आ गया। पर मेरा मन अब कहीं नहीं लग रहा था। भाभी की बातें थोड़ी-थोड़ी दिमाग में आने लगी थीं। उनकी मुस्कान, उनकी आवाज और उनकी खूबसूरती बार-बार याद आती रहती थी।
कुछ समय बाद मैं मामा के घर दोबारा गया। इस बार भाभी से मेरी बातचीत कुछ ज्यादा ही हो रही थी। भाभी से धीरे-धीरे थोड़ी मजाक भी होने लगी थी। पर सेक्स के बारे में कोई बात मेरे दिमाग में नहीं थी। बस उनसे थोड़ा-बहुत मजाक हो जाता था। पर भाभी से मुझे प्यार होने लगा था। मैं भाभी से घंटों घंटों बैठकर बातें करता था। भाभी की ओर से मुझे कोई खास प्रतिक्रिया नजर नहीं आ रही थी।
ऐसे ही 5 दिन बीत गए। एक दिन भाभी कमरे में एलईडी देख रही थीं। मैं भी उनके पास जाकर बेड पर बैठ गया। थोड़ी देर तक उनसे बातें करता रहा। बातों ही बातों में मैंने उनकी पैर की पाजेब को छू दिया। उन्होंने अपना पैर मुझसे दूर कर लिया।
मुझे भी पता नहीं लगा कब मैंने उनका पैर को छुआ।
भाभी के नजदीक रहने की वजह से उनके मन में भी बदलाव आने लगा था। एक रात मुझे ऐसा महसूस हुआ कि भाभी के मन में मेरे प्रति प्यार जाग रहा है। रात के करीब 8:00 बज रहे थे। खुले चौक में तीन चारपाइयां पड़ी हुई थीं। एक चारपाई पर मैं लेटा हुआ था। दूसरी चारपाई पर भाभी आराम से बैठी हुई थीं। तीसरी चारपाई पर मामी पड़ी हुई थीं।
भाभी और मेरे बीच बातचीत चल रही थी। हल्की-हल्की हवा चल रही थी जो उनके बालों को उड़ा रही थी। उनकी सांसों की हल्की आवाज और मुस्कान मेरे दिल को छू रही थी। बातचीत चलते-चलते मेरा हाथ चारपाई से नीचे लटक गया था। अचानक भाभी ने अपना नरम और गर्म हाथ आगे बढ़ाया और मेरे हाथ को धीरे से पकड़ लिया। उनकी उंगलियां मेरी उंगलियों में फंस गईं। बहुत देर तक ऐसे ही बातचीत चलती रही। भाभी ने मेरा हाथ पकड़कर रखा। उनकी हथेली की नमी और हल्का दबाव मुझे अच्छा लग रहा था। फिर मामी ने भाभी से कहा, “चल कर सो जाओ।”
फिर भाभी अपने कमरे में जाकर सो गईं। कई दिन तक ऐसे ही बातचीत चलती रही। फिर एक दिन मैं अपने घर आ गया। कुछ समय के बाद भाभी हमारे घर पर रहने के लिए आई थीं। भाभी को देखकर मेरा मन खुश हो गया था। अब भाभी के बिना मेरा मन कहीं नहीं लगता था। उनके आने से घर में एक अलग ही सुकून और उत्साह महसूस होने लगा था।
फिर एक दिन घरवालों ने कहा कि तेरी भाभी को चारपाई बुनाई आती है। उसके साथ मिलकर एक चारपाई बुनाई कर लो। मैंने कहा, “ठीक है।” ऐसे मौके की तो मुझे जरूरत थी।
फिर मैंने भाभी के साथ चारपाई बनवाई। चारपाई बनते समय मैंने भाभी के साथ बहुत मजाक किए। हम दोनों हंसते-हंसते काम कर रहे थे। कभी-कभी हमारे हाथ आपस में छू जाते थे। उनकी हंसी की आवाज मेरे कानों में मीठी लग रही थी। चारपाई बुनाई करने के बाद हमने खाना खाया। फिर घरवालों ने कहा कि अपनी भाभी को उनके घर छोड़ आओ।
फिर मैं भाभी को उनके घर छोड़ने बाइक पर गया। बाइक पर बातचीत करते हुए हम दोनों आगे बढ़ रहे थे। हवा हमारे चेहरे पर तेजी से लग रही थी। बातचीत के दौरान मैंने मजाक करते हुए भाभी से कहा, “आज कौन से होटल में चलना है बताओ।” भाभी ने हंसकर जवाब दिया, “जहां तुम्हारी मर्जी वहां ले चलो। पर फिर देख लेना। तुम्हारे भैया को पता लग गया ना तो हम दोनों नहीं बचेंगे।” हंसकर भाभी ने कहा। मैंने भाभी से बोला, “अब तो तुम्हारे बिना भाभी घर पर मन नहीं लगेगा।” इस बात पर भाभी हंसने लगीं।
फिर मैं भाभी को लेकर मामा के घर चला गया। मामा के घर पहुंचकर हमने खाना खाया। और फिर रात को सो गए। सुबह का नाश्ता खाने के बाद मैंने कहा, “दो-चार दिन रुक कर ही जाऊंगा।” शाम के समय भाभी से फिर बात हुई। बहुत देर तक हम दोनों बात करते रहे।
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भाभी से मुझे बहुत लगाव हो गया था। अब उनके बिना मेरा मन नहीं लगता था। अब मैंने सोच लिया था कि भाभी से साफ-साफ कह देता हूं। “भाभी मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं।” यह बात मैं अपने मन में बैठकर सोच रहा था। उस समय तक मेरे मन में उनके साथ सेक्स करने की बात बिल्कुल भी नहीं आ रही थी।
पर अब मैंने सोच लिया था कि भाभी से बोल दूंगा। जो होगा देखा जाएगा। फिर अगले दिन मेरे मामा का लड़का कंपनी में काम पर गया था। मामा खेत में गए थे। और मामी गांव में किसी के यहां पर गई हुई थी। अब मैंने सोच लिया था यह बहुत अच्छा मौका है।
फिर मैं भाभी के पास उनके साथ बैठ गया। भाभी उस समय सब्जी काट रही थीं। उनकी उंगलियां चाकू के साथ तेजी से चल रही थीं। मैं उनके पास बैठकर बातें करने लगा। बात करते-करते मैंने भाभी से कहा, “मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। आप बुरा तो नहीं मानोगी।”
भाभी बोलीं, “नहीं देवर जी आप बोलिए। बुरा मानने वाली क्या बात है। ऐसी क्या बात है जिसका मैं बुरा मानूं।” फिर भाभी ने कहा, “देवर जी बोलिए।” मैंने उनके हाथ पर अपना हाथ रखकर बोलने की कोशिश करने लगा। पर मुझे डर लग रहा था। इसलिए मैंने थोड़ी देर चुप रहना ही सही समझा।
भाभी के हाथ पर हाथ रखने के बाद भाभी थोड़ा अलग सा महसूस कर रही थीं। उनकी सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं। फिर हम दोनों चुप हो गए। कुछ देर बाद भाभी ने मुझसे पूछा, “बताइए आप क्या कहना चाहते थे।”
मैंने भाभी से बोला, “पहले आप प्रॉमिस कीजिए कि बुरा नहीं मानोगी और भैया से नहीं बोलोगी।” भाभी कहने लगीं, “ऐसी क्या बात है देवर जी जो तुम मुझसे प्रॉमिस करवा रहे हो।” मैंने भाभी से बोला, “पहले आप प्रॉमिस कीजिए।” भाभी बोलीं, “देवर जी चलो प्रॉमिस किया। अब तो बता दीजिए।” मैंने भाभी के दोनों हाथ अपने हाथों में पकड़ लिए और नजर झुका कर उनसे बोलने लगा।
भाभी मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं आप मुझे बहुत पसंद हो बहुत दिनों से मैं आपको यह बात कहना चाहता था यह बोलकर मैं चुप हो गया।
भाभी ने अपने हाथ छुड़ा लिए और वहां से चली गईं। मैं थोड़ी देर ऐसे ही चुपचाप बैठा रहा। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। फिर थोड़ी देर बाद भाभी रसोई में काम कर रही थीं। मैं उनके पास चला गया। रसोई के अंदर जाकर मैंने भाभी का हाथ दोबारा पकड़ लिया। भाभी हाथ छुड़ाने लगीं। मैंने भाभी का हाथ नहीं छोड़ा।
मैं बोला, “भाभी मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं। क्या आप मुझसे प्यार नहीं करतीं?” भाभी बोलीं, “देवर जी हाथ छोड़ दीजिए। कोई देख लेगा। मैं शादीशुदा हूं।” मैंने कहा, “भाभी कोई नहीं देख रहा। आप मेरी बात का जवाब दीजिए। आप मुझसे प्यार करती हो कि नहीं?”
भाभी बोलीं, “देवर जी मैंने आपको बता दिया है। मैं शादीशुदा हूं। मैं किसी और से प्यार नहीं कर सकती।” मैंने कहा, “भाभी आपको शाम तक का टाइम दे रहा हूं। शाम तक मुझे जवाब दे देना। शाम को जवाब नहीं दिया तो मैं यहां से चला जाऊंगा। फिर कभी तुम्हारे पास नहीं आऊंगा।” ऐसा कहकर मैं नीचे आ गया।
शाम होने का इंतजार करने लगा। पर अब मेरा मूड ऑफ हो गया था। भाभी मुझे देख रही थीं कि मेरा मूड खराब हो गया है। उन्होंने मुझे दोपहर का खाना खाने के लिए कहा। मैंने मना कर दिया। “मुझे भूख नहीं है।” भाभी का भी अब मूड कुछ अलग दिखाई दे रहा था। भाभी मुझसे प्यार तो करती थीं पर डर रही थीं।
उन्होंने दोबारा मुझे कहा, “देवर जी खाना खा लीजिए।” मैंने बोला, “खाना तो तभी खाऊंगा जब जवाब मिल जाएगा।” फिर भाभी चली गईं। और शाम होने का इंतजार करने लगा। शाम के समय भाभी ने खाना खाने के लिए कहा। मैंने जवाब दिया, “पहले मेरी बात का जवाब दे दीजिए वरना मैं खाना नहीं खाऊंगा।”
भाभी मुस्कुराकर बोलीं, “अगर मैंने हां बोल दी तो क्या आप खाना खा लोगे?” मैंने कहा, “बिल्कुल भाभी जी।” भाभी ने अपने हाथ से रोटी का टुकड़ा तोड़कर मुझे खिला दिया और मुस्कुराकर चली गईं।
फिर सभी के खाना खाने के बाद भाभी से रात को मेरी मुलाकात हुई। मैंने भाभी का हाथ पकड़ लिया और अपनी ओर खींच लिया। और अपने गले लगा लिया। भाभी ने मुझे कसकर पकड़ लिया। मैंने कहा, “आई लव यू भाभी जी।” भाभी बोलीं, “आई लव यू देवर जी।”
फिर हम बहुत देर तक ऐसे ही एक दूसरे के गले लगे रहे। भाभी की गरम सांसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं। उनके नरम शरीर का स्पर्श मुझे रोमांचित कर रहा था। मैंने भाभी के गाल पर एक किस कर दी।
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फिर मामी की आवाज सुनाई दी मामी बोल रही थी सरिता कहां हो तुम भाभी ने जवाब दिया मम्मी आ रही हू।
फिर भाभी वहां से चली गईं। फिर हम रात को सो गए। सुबह भाभी कमरे में झाड़ू लगा रही थीं। उस कमरे में अकेला पड़ता था। मैं सो रहा था। भाभी ने मेरे गाल पर किस कर दी। “उठ जाओ देवर जी।” भाभी को पकड़कर मैंने उन्हें अपने ऊपर खींच लिया। और उनके गालों पर किस करने लगा। भाभी कहने लगीं, “छोड़ो देवर जी। कोई आ जाएगा।” और अपने आप को छुड़ा कर चली गईं।
जब भी मेरा मौका लगता मैं भाभी का हाथ पकड़ लेता और उन्हें अपने गले से लगा लेता। जी भरकर मैं उन्हें अपने गले नहीं लगा पा रहा था। अब भैया की ड्यूटी रात की चल गई थी। रात का खाना खाने के बाद भाभी अपने कमरे में सोने चली गईं। मैं बराबर वाले कमरे में सोने चला गया। मामी भाभी के कमरे के बाहर चारपाई डालकर सो रही थीं। मैं अपने कमरे में पढ़कर फोन देख रहा था।
फोन देखते-देखते 11:00 बज गए। फिर मैंने सोचा क्यों ना आज भाभी से रात को मिल जाए। मैंने भाभी के कमरे के बाहर जाकर देखा कि मामी सो रही है या जाग रही है। मामी सोई हुई थी। मैं भाभी के कमरे में अंदर चला गया। भाभी सोई हुई थीं। मैंने भाभी को उठा दिया।
भाभी धीरे से बोलीं, “देवर जी तुम यहां क्या कर रहे हो?” मैंने कहा, “आपसे मिलने आया हूं मेरी जान।” भाभी बोलीं, “बाहर मम्मी पड़ी हुई है। उठ गई तो प्रॉब्लम हो जाएगी।” मैंने कहा, “मामी तो सो रही है। घबराने की कोई बात नहीं है।”
भाभी बोलीं, “देवर जी आप चले जाइए। बात को मान लीजिए।” भाभी बार-बार मुझे जाने के लिए बोल रही थीं। भाभी बहुत डर गई थीं। मैंने भाभी को पकड़ लिया। और उनके होठों पर अपने होंठ रख दिए। और किस करने लगा। भाभी अभी भी बोल रही थीं, “देवर जी आप चले जाओ।”
मैं उन्हें लगातार किस करता रहा। उनके रसीले और नरम होंठ मेरे होंठों के नीचे दब रहे थे। 10 मिनट तक लगातार किस करने के बाद भाभी ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मुझे गले लगा लिया। फिर मैंने उन्हें दोबारा किस करना शुरू कर दिया। किस करते-करते मुझे 20 मिनट हो गए थे। भाभी के होंठ बड़े रसीले थे।
अब किस करते-करते मेरे हाथ उनकी चुचियों पर चले गए। मैंने उनकी भरी हुई छातियों को धीरे से दबाया। भाभी बोलीं, “प्लीज अब चले जाइए।” मैंने कहा, “क्यों भाभी क्या हुआ?” भाभी बोलीं, “इससे आगे हमें नहीं बढ़ाना चाहिए।” मैंने कहा, “भाभी प्यार ही तो कर रहा हूं।”
भाभी बोलीं, “देवर जी नहीं। आप प्यार से आगे बढ़ रहे हो। तुम्हारे हाथ गलत जगह जा रहे हैं।” मैंने कहा, “नहीं मेरी प्यारी भाभी सिर्फ ऊपर ऊपर से ही प्यार करूंगा।”
इसके बाद फिर से किस करना शुरू कर दिया 10 मिनट तक दोबारा किस करते-करते मेरा हाथ भाभी की चूचियों पर चला गया सूट के ऊपर से ही चूचियों को दबाने लगा।
अब मेरा मन उनके साथ सेक्स करने का करने लगा। अब मैंने सोचा कि वैसे तो भाभी मेरे साथ सेक्स नहीं करेंगी। क्यों ना उन्हें पहले तैयार किया जाए। मैं उन्हें फिर उनके होंठों पर किस करते-करते उनकी गर्दन तक आ गया। गर्दन पर किस करने के बाद मैंने उनके कपड़ों के ऊपर से उनकी चूचियों पर किस करना शुरू कर दिया।
थोड़ी देर तक चूचियों को चूमने के बाद मैं उनके पेट पर चला गया। उनका थोड़ा सूट ऊपर उठाकर उनकी नाभि पर किस करने लगा। मेरी जीभ उनकी नाभि के आसपास घूम रही थी। भाभी बोलीं, “नहीं देवर जी। आपने वादा किया था ऊपर ऊपर से करूंगा पर आप तो नीचे तक चले गए।” वे अपने को दूर करने लगीं।
मैंने कहा, “ऊपर ऊपर से ही कर रहा हूं। नीचे नहीं पहुंच रहा हूं।” इसके बाद फिर से किस करने लगा। किस करते-करते मैं उनकी छाती को भी दबा रहा था। मेरी उंगलियां उनकी कमर पर फिसल रही थीं। फिर मैंने उनकी गांड़ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनकी नरम और गोल गांड को सहलाता रहा।
कुछ देर बाद भाभी को भी मजा आने लगा था। उनकी सांसें तेज हो रही थीं। इस बात का फायदा उठाते हुए मैंने भाभी की सलवार का नाड़ा खोलने की कोशिश की। पर भाभी ने मेरा हाथ पकड़ लिया। भाभी बोलीं, “देवर जी नहीं। बस करो।” मैंने कहा, “मेरी जान अब मत रोको।”
उसके बाद मैंने जबरदस्ती उनका नाड़ा खोल दिया। भाभी सलवार उतरने नहीं दे रही थीं। बड़ी मुश्किल से जबरदस्ती मैंने उनका सलवार उतार दिया। भाभी ने अंदर ग्रीन कलर की जालीदार कच्छी पहन रखी थी। भाभी अपनी चूत को दोनों पैरों को मोड़कर छुपा रही थीं। भाभी को शर्म आ रही थी। भाभी बार-बार बोल रही थीं, “बस करो देवर जी।”
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फिर मैं उनका सूट निकालने की कोशिश करने लगा। पर भाभी सूट को निकालने नहीं दे रही थीं। मैंने भाभी से बोला, “भाभी निकलने दो वरना फाड़ दूंगा।” बड़ी मुश्किल से सूट को निकाल दिया। भाभी ने अंदर ग्रीन कलर की ब्रा पहन रखी थी। बड़ी सुंदर जालीदार ब्रा थी। भाभी के गोरे बदन पर ग्रीन कलर की ब्रा और कच्छी गजब ढा रही थी।
भाभी के होंठों पर किस करने लगा। किस करते-करते उनकी चूचियों पर आ गया। उनकी चूचियां बिल्कुल खड़ी-खड़ी थीं। ब्रा के ऊपर से चूचियों को चूसने लगा। मैंने उनकी ब्रा को हटाकर चूची को मुंह में भरकर पीने लगा। भाभी को मजा आने लगा था पर भाभी मेरा साथ नहीं दे रही थीं।
दोनों चूचियों को पीने के बाद मैं उनके पेट पर किस करते हुए उनकी कच्छी निकालने लगा। कच्छी निकलते ही भाभी ने अपनी चूत को छुपा लिया। मैंने उनके दोनों पैरों को खोलते हुए उनकी चूत पर मुंह रख दिया। चूत को चाटने लगा। मेरी जीभ उनकी गीली और गर्म चूत की फांकों के बीच घूम रही थी।
थोड़ी देर चूत चाटने के बाद भाभी को मजा आने लगा। भाभी की आवाज बदलने लगी थी।
भाभी- आ….आ…ई….उ…आ भाभी की चुत को चाटते हुए एक हाथ से उनके आमों को पकड़ने लगा भाभी की चूची बिल्कुल टाइट हो गई थी निप्पल बिल्कुल खड़े हो गये थे भाभी अपने गांड़ उठा उठा कर चुत चटवा रही थी।
कुछ देर तक चुत चाटने के बाद मैं दोबारा उनके होंठों पर किस करने लगा। भाभी ने मुझे कसकर गले लगा लिया। उनके नाखून मेरी पीठ पर हल्के से खिंच रहे थे। मैंने भाभी के माथे को चूम लिया और भाभी की ओर तिरछी नजर से देखने लगा। भाभी ने मेरे चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने होंठों पर मेरे होंठ रख दिए। भाभी पूरे जोश में आकर किस करने लगीं। अपनी जीभ को मेरे मुंह में डालकर गहरी किस करने लगीं। हमारी जीभें आपस में उलझ रही थीं।
अब मैंने भाभी की ब्रा का हुक खोल दिया। भाभी के दोनों आम आजाद हो चुके थे। अब मैं उनके आमों को चूसने लगा। क्या गोरे गोरे आम थे। मैं एक चूची को मुंह में लेकर जोर-जोर से चूस रहा था। दूसरी चूची को हाथ से मसल रहा था। अब भाभी को बहुत मजा आ रहा था। भाभी से सेक्सी आवाज निकल रही थी।
भाभी- आ…आ…ई…आ…उ…आ मेरी जान क्या करके छोड़ेगा आज। मैंने कहा, “आज तो डार्लिंग चोदकर ही तम लूंगा।”
भाभी के आमों को छोड़कर मैं उनके पेट पर किस करते हुए एक बार उनकी चूत पर किस किया। और अपने सारे कपड़े उतार दिए। अब मेरा लोड़ा पूरी तरह से तैयार था। कड़ा और तना हुआ खड़ा था। भाभी की दोनों टांगें चौड़ी कर दीं। भाभी की चूत लबलब करने लगी।
जैसे ही चूत पर लोड़े को लगाया भाभी मना करने लगीं। भाभी बोलीं, “नहीं मेरी जान आगे मत करो।” मैंने कहा, “अब क्या हुआ मेरी सरिता डार्लिंग। अब तो सब कुछ हो चुका है। अब रुका नहीं जाता मेरी जान।”
भाभी बोलीं, “बिना कंडोम के नहीं कर सकती।” मैंने कहा, “मेरी जान अब कंडोम रात को कहां से लाऊं। भाभी आप ही देख लो। कहीं पर भैया ने रख रखा होगा अपने लिए।” भाभी बोलीं, “आपके भैया के पास तो रखे हैं पर मैं नहीं दे सकती। आपके भैया को पता लग जाएगा।”
मैंने कहा, “भैया को कुछ पता नहीं लगेगा। आप बता दीजिए कहां पर रखा है। सुबह ही लाकर दूसरा यहीं पर रख दूंगा।” भाभी ने बताया, “अलमारी के ऊपर रखा हुआ है।” जब मैं अलमारी के ऊपर से कंडोम उठने लगा मैंने देखा वहां पर पूरा पैकेट रखा हुआ था।
कंडोम को अपने लोड़े पर अच्छे से चढ़ा लिया। भाभी की चूत की फांक पर अपना मोटा और कड़ा लोड़ा रगड़ने लगा। लोड़े का सिरा उनकी गीली चूत की फांकों को बार-बार चीरता हुआ ऊपर-नीचे सरक रहा था। इससे भाभी की सांसें भारी हो गईं और उनकी चूत और भी गीली हो गई।
कुछ देर ऐसे ही रगड़ने के बाद मैंने धीरे से लोड़े को उनकी चूत के अंदर घुसाने की कोशिश की। थोड़ा सा लोड़ा अंदर चला गया। भाभी ने मुझे कसकर गले लगा लिया। उनकी छाती मेरी छाती से सट गई थी। भाभी फुसफुसाकर बोलीं, “अजीत थोड़ा आराम से… दर्द हो रहा है।”
मैंने धीरे-धीरे पूरा लोड़ा उनकी तंग चूत में उतार दिया। उनकी चूत की दीवारें मेरे लोड़े को जोर से निचोड़ रही थीं। फिर मैंने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के पर भाभी का शरीर हिल उठता था। अब भाभी मजे में पागल हो चुकी थीं। भाभी ने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए।
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भाभी दबे स्वर में बोलीं, “आ…आ… मेरी जान… आ…आ…” वे अपनी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही थीं क्योंकि बाहर मामी सो रही थीं। मैंने कहा, “ले मेरी जान और ले मेरी जान। आज तो भाभी तेरी चूत ही फाड़ डालूंगा।”
भाभी मजे में आकर तेज आवाज निकालने लगीं। मैंने तुरंत उनकी कच्छी उठाकर उनके मुंह में ठूंस दी। अब उनकी आवाजें दबी हुई थीं पर शरीर अभी भी जोर-जोर से हिल रहा था। फिर से धक्के पर धक्के लगाने लगा। लोड़ा पूरी तरह अंदर तक जाता और बाहर निकलता। उनकी चूत से चिकना रस निकलकर बिस्तर पर फैल रहा था।
ऐसे ही चुदाई लंबे समय तक चलती रही। मैं कभी तेज धक्के मारता तो कभी धीमे-धीमे गहरे धक्के देता। भाभी पूरा मजा ले रही थीं। उनकी आंखें बंद थीं और वे बार-बार सिर हिला रही थीं। 10 मिनट तक लगातार चुदाई चलती रही।
भाभी दबी हुई आवाज में बोलीं, “मेरी जान मैं तो गई…” मैंने कहा, “भाभी मैं भी आ रहा हूं।” तीन-चार जोरदार और तेज धक्के मारने के बाद हम दोनों का काम तमाम हो गया। मेरा लोड़ा उनकी चूत के अंदर ही फड़फड़ाकर रुक गया।
मैं भाभी के बराबर में लेट गया। भाभी ने कहा, “चले जाओ देवर जी। मम्मी उठ जाएगी।” भाभी के होंठ पर एक लंबा किस करके चला आया।