मैं अनिकेत हूँ। नाम बदला हुआ है। कोलकाता से हूँ। उम्र अड़तीस साल है और मैं शादीशुदा हूँ।
यह मेरी पहली गर्म कहानी है जो मैं आप लोगों के सामने रख रहा हूँ।
आज से चार साल पहले मैं अपनी मौसी की बेटी की शादी में बिहार गया था।
वह दो हजार सत्रह का मार्च का महीना था।
कुछ दिन पहले ही होली खत्म हुई थी।
मैं वहां पहुंचा तो सबसे मिलकर काफी अच्छा लगा।
काफी लोग थे वहां।
बहन की सारी सहेलियां भी थीं।
उसकी सहेलियों में एक लड़की थी जो अठारह साल की ही रही होगी। काफी लंबी थी। वह मुझे घूर रही थी।
वह देखने में बहुत गर्म माल थी। बिल्कुल किम शर्मा जैसी।
सच में बहुत नशीली थी।
मैं अपने लिए तय कमरे के अंदर आ गया और उधर लेट कर आराम करने लगा था।
वह लड़की आई और मुझे देखकर वापस चली गई।
उस समय गर्मी काफी ज्यादा हो गई थी।
घर पर जगह कम होने के कारण खाने की जगह और बारातियों के लिए घर से थोड़ी ही दूर एक खुली जगह थी।
यह उनकी निजी जमीन थी और उसके करीब उनका एक बड़ा सा मकान भी था।
वे लोग काफी पैसे वाले थे।
आयोजन वहीं होने वाला था।
कैटरिंग वालों की सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर थी।
वहां एक आदमी जो मेरी मदद कर रहा था, उनका नाम दीपक जी था।
वे करीब पैंतालीस सैंतालीस के आसपास होंगे।
उनसे मेरी अच्छी पहचान हो गई।
वे शादी वाली जगह के पास बने एक मकान में रहते थे।
वे मेरी काम की लगन देखकर खुश थे और मैं उनके अच्छे स्वभाव से।
शादी के एक दिन पहले सब कुछ ठीक ठाक अरेंज हो गया।
उस वक्त दोपहर के दो बजे थे।
भैया ने कहा, चलो अनिकेत, भूख लगी है, खाना खाने चलते हैं।
मैं भी काफी थका सा महसूस कर रहा था।
उतने में मेरे मौसा जी आए और वहां की व्यवस्था देखकर मुझे बोले, बाबू, सब ठीक से हो गया तो खाना खा लो।
मैंने कहा, जी।
फिर दीपक भैया जी मौसा जी से बोले, अरे सुनो, ये अनिकेत दो दिनों से काफी मेहनत कर रहा है। इसके लिए कुछ अरेंज करो रात को। समझ रहे हो न।
वे ड्रिंक्स के लिए बोल रहे थे।
मौसा जी बोले, नालायक। तू मेरा दोस्त है और ये मेरे भाई का बड़ा बेटा है। समझे। तमीज से बात करो यार।
अब मुझे भी समझ में आ गया कि दीपक जी मौसा जी के दोस्त हैं।
मौसा जी बोले, चल तू भी घर पर खाने।
दीपक जी बोले, नहीं, घर पर सब वेट कर रहे हैं। तुम जाओ, शाम को आता हूँ।
बातों ही बातों में पता चला कि वह घर और सारी जमीन उनकी ही है।
घर आया तो मौसी मेरा इंतजार कर रही थीं।
सारे भाई बहन भी थे।
बहुत सारी औरतें भी थीं।
सबसे मेरा परिचय हुआ।
वहां एक भाभी जी थीं, जो काफी आकर्षक दिख रही थीं।
उनकी खूबसूरती का कारण उनकी लंबाई और उनका कटावदार जिस्म था।
भाभी की कमर पतली थी और उसके नीचे बड़ी सी गांड होने के साथ साथ एकदम गोल गोल चूतड़ थे जो बाहर को निकले हुए थे।
पर वे चेहरे मोहरे से काफी सादी थीं। मतलब उन्होंने इतनी सुंदर होने के बावजूद न तो कोई भड़कीले कपड़े पहने थे और न ही कोई खास मेकअप किया हुआ था।
शायद इसी वजह से उनका आकर्षण मुझे अपनी तरफ खींच रहा था।
पहली नजर में देखने के बाद मैंने अपनी निगाहें अलग कर लीं, पर अगले ही पल मुझे न जाने क्या हुआ कि मैंने एक बार फिर से उनकी ओर देखा।
इस बार वे भी मुझे ही देख रही थीं।
मैं झट से अपनी नजरें झुकाकर अंदर की तरफ चल दिया।
उतने में वे भाभी मौसी जी से बोलीं, दीदी, कौन है ये।
मौसी जी बोलीं, मेरी बहन का बड़ा बेटा है। कोलकाता से।
घर के अंदर जाते जाते वे बड़ी गौर से मुझे देख रही थीं और मैंने भी हिम्मत करके उन्हें देखा।
वे भी हमें ही देख रही थीं।
मैं बाथरूम में जाने वाला था कि मेरी बहन ने तौलिया लाकर दिया, जिसकी शादी होनी है।
वे बोलीं, भैया, आप अगर भाभी और बच्चे को लाते तो कितना अच्छा होता।
मैंने कहा, आपको तो पता ही है कि आजकल परीक्षा का समय चल रहा है। अब क्या करूँ, बोलो।
वे कुछ नहीं बोलीं, बस हूँ कह कर रह गईं।
फिर कुछ देर बाद मैं बाथरूम में जाने के लिए टी शर्ट खोल रहा था कि बाहर से आवाज आई, दीदी, मैं भी आती हूँ शाम को। खाने को सब इंतजार कर रहे होंगे।
यही कहती हुई वे कमरे में अंदर आ गईं।
उस वक्त मैं सिर्फ तौलिया बांधे खड़ा था।
उन्होंने मेरी ओर देखा और मुस्कुराकर मेरी बहन की तरफ देखती हुई बोलीं, तुम्हारे भाई की बॉडी तो बड़ी अच्छी है। नजर न लगे।
मैं जब तक कुछ कहता, वे अपनी बात बोलकर बाहर निकल गईं।
मैंने ताजा होकर खाना खाया और आराम करने अपने बिस्तर पर आ गया।
मैं आराम करते हुए उसी भाभी को याद कर रहा था कि अचानक मेरे कमरे में वह सुबह वाली लड़की आ गई।
उसने मुझे देखकर पूछा, जी, वह मैं आपकी सिस्टर को ढूँढ रही थी।
मैं कुछ नहीं बोला।
फिर वह कमरे से बाहर जाते जाते बोली, एक बात बोलूँ।
मैंने कहा, बोलो।
वह बोली, जी, आप मुझे दोस्ती करोगे।
मैं हंसा और बोला, हां, क्यों नहीं।
वह बोली, जी, धन्यवाद।
मैंने कहा, स्वागत है। एक बात मैं भी बोलूँ।
वह बोली, हां जी, कहिए।
मैंने कहा, तुमको पता था ना कि मैं यहां पर हूँ। सच बताना, कुछ बोलना था तो बोलो।
वह बोली, जी, आप मुझे अच्छे लगे इसलिए।
मैंने पूछा, कोई बॉयफ्रेंड।
वह बोली, कोई नहीं, पर कॉलेज में सारे मुझे दोस्ती करना चाहते हैं।
मैंने कहा, क्यों नहीं, तुम हो ही सेक्सी। मतलब सुंदर।
वह हंस पड़ी और पास आकर कान में बोली, धन्यवाद।
मैं उसकी गर्म सांस को महसूस करके सिहर उठा।
वह एक मुस्कान देकर चली गई।
फिर मैं सो गया और सीधा शाम को छह बजे उठा।
मैं तैयार होकर शादी वाली जगह पर चल पड़ा।
घर से बाहर आते ही मैंने एक सिगरेट जलाई और अपनी मस्ती में धुआं उड़ाने लगा।
उधर सब मुझे ही देख रहे थे, शायद मेरे शरीर की बनावट के कारण कई भाभी कुछ ज्यादा ही ध्यान से घूर रही थीं।
अभी आधे रास्ते में ही था कि वे भाभी जी मिलीं।
मैंने उनसे सिगरेट छुपाई और नजरें झुका लीं।
मैं रास्ते के एक तरफ था और वे उस तरफ थीं मगर नजरें तो मिल ही गईं।
वे मुझे देखकर मुस्कुराईं और बोलीं, एक मिनट सुनिएगा।
मैंने तुरंत सिगरेट फेंकी और उनकी तरफ गया।
वे बोलीं, क्यों। क्या हुआ। आपने सिगरेट क्यों फेंकी।
मैंने कहा, कुछ नहीं, ऐसे ही। जी, आप बोलो।
फिर वे बोलीं, कुछ नहीं, ऐसे ही आपको सामने से देखना था।
मैं तो जैसे भूत बन गया था कि अजीब मामला है।
मैंने जबरन कहा, धन्यवाद।
वह बोलीं, धन्यवाद क्यों।
मैंने कुछ नहीं कहा और आगे चल दिया।
शादी वाली जगह पर पहुंच कर जो काम पड़ा था वह सब निपटाया।
फिर दीपक भैया आए तो हम लोग बैठकर बातें करने लगे।
मैंने कहा, माफी, आप तो मौसा जी के दोस्त हैं और मैं आपको भैया कहकर पुकारता हूँ। माफी।
उन्होंने कहा, माफी क्यों। तुम भैया बोलो, अच्छा लगता है।
तभी दीपक भैया के लिए अंदर से आवाज आई, पापा। पापा।
मैंने पीछे मुड़कर देखा कि ये तो वही लड़की थी, मेरी बहन की सहेली।
भैया बोले, अनिकेत, ये मेरी बेटी श्वेता है।
मैं उसे देख कर मुस्कुरा दिया।
फिर भैया उससे बोले, बेटा, ये अनिकेत अंकल हैं।
वह बोली, मैं मिल चुकी हूँ इनसे, सहेली के घर पर।
वह लगातार मुझे घूरे जा रही थी।
अब मैंने जानबूझ कर उसे अनदेखा किया।
दीपक जी बोले, बेटा, चाय बना ला।
वह जी पापा कह कर अंदर चली गई।
फिर दीपक भैया से मिलने दो लोग और आए।
मैं साइड में चला गया।
दो मिनट के बाद भैया बोले, अनिकेत, तुम रुको थोड़ा। मैं पास के घर से अभी आता हूँ। उधर एक अंकल हैं। वे थोड़ा बीमार हैं, मैं उनसे मिलकर आता हूँ। तुम अंदर जाकर चाय पी लेना और श्वेता को मेरे जाने के बारे में बता देना।
मैंने कहा, जी।
जब श्वेता आई तो मैंने बता दिया।
वह बोली, ठीक है, आप आ जाओ अंदर। साथ में चाय पीते हैं।
मैं जाकर आंगन में बैठा तो वह बोली, जी, छत पर चलते हैं।
मैं उसके पीछे गया।
वह लैगिंग और कुर्ती पहनी थी।
मैं उसकी पतली कमर को देख रहा था।
पतला शरीर था।
छत से बाहर का नजारा मनमोहक था।
हम दोनों साथ में चाय पी रहे थे।
वह बोली, जी, एक बात बोलनी थी।
मैं तो सोच ही रहा था बात करने का।
वह बोली, मैं आपको एक किस करना चाहती हूँ, कृपया मना मत करना।
मैंने सीधे कहा, अगर कोई आ गया तो।
वह चाय वहीं रखकर मेरा हाथ पकड़ कर अंदर वाले कमरे में ले गई और बोली, पापा को आने में देर लगेगी। मैंने अंदर से ही सुन लिया था कि वे कहां गए हैं, मुझे पता है।
मैंने बोला, कहां।
वह बोली, जी, पीने। वे दो आदमी के साथ गए हैं ना।
उसने मुझे कुर्सी पर बैठाया और दोनों पैर फैलाकर मेरी गोद में बैठ गई। अपने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ कर मुझे चूमने लगी।
उसका ये रूप देखकर मैंने उसे रोका और बोला, एक शर्त है।
वह बोली, क्या शर्त। जो भी हो, पर कृपया मुझे अपने मन की करने से मना मत करना।
मैंने कहा, मैं तुम्हें हाथ नहीं लगाऊंगा, पर तुम मेरे पूरी गर्दन में चूमोगी और वह भी जीभ लगाकर।
वह हंस कर बोली, आप मेरे लिए ही आए हो, ऐसा लग रहा है।
मैंने अपने दोनों हाथ पीछे सोफे पर फैला दिए।
वह चालू हो गई। उसने मेरे होंठ और गर्दन पर पांच मिनट तक लगातार चूमा।
मैंने उसे उकसाते हुए कहा, थोड़ा जंगली तरीके से करो न।
वह माहिर लड़की थी तो बोली, मैं अपने तरीके से करूंगी, तो आप बुरा मत मानना।
मैंने कहा, ठीक है करो।
फिर उसने अपने मुँह से मेरे मुँह पर थूका और चाटने लगी। मेरे मुँह में जीभ डालकर मेरी जीभ को चूसने लगी।
मैं सिर्फ बैठे बैठे मजे ले रहा था और वह मेरा मजा ऐसे ले रही थी, जैसे मैं उसका मनपसंद खिलौना हूँ।
कोई पांच मिनट के बाद वह बोली, मुझे ऐसे ही पसंद है ये सब। धन्यवाद।
मैंने उसे उठाया और बोला, अब मैं कुछ करूँ।
वह बोली, आपकी मर्जी, जैसे भी करो।
मैंने कहा, पर तुम हिलना मत।
वह बोली, ठीक है।
मैंने उसे उठाया और दीवार की तरफ उसका मुँह कर दिया। उसकी कुर्ती ऊपर को उठाई और लैगिंग्स को नीचे खींच दिया।
वह बोली, हम्म। यह सब रात को करते हैं न। सही मौका देखकर।
मैंने कहा, घबराओ मत। लंड नहीं डालूंगा। तू ले भी नहीं सकेगी ऐसे।
वह बोली, हां पता है। सील पैक हूँ न। तो अभी क्या करोगे आप।
मैंने कहा, देखती जाओ, बस हिलना मत।
मैंने उसके नर्म नर्म चूतड़ों पर अपना एक हाथ फेरा और दूसरा हाथ उसकी गर्दन पर रख दिया।
फिर उसके कान के पास जाकर बोला, मजा आया ना चूम करके।
उसने हां में सिर हिला के जवाब दिया।
तभी अचानक से मैंने उसके चूतड़ पर थप्पड़ मारा।
उसने हल्की सी सिसकारी मारी।
फिर मैंने दूसरे चूतड़ पर थप्पड़ मारा।
मैंने उसके कान में बोला, मजा आया।
वह बोली, हां।
मैं अब दे थप्पड़ दे थप्पड़ उसके चूतड़ों पर बरसाते हुए तबला सा बजाने लगा।
इसी के साथ मैंने उसके दोनों कानों को बारी बारी से अपने मुँह में भरकर खूब चाटा।
वह मदहोश हो रही थी। कृपया धीरे धीरे करो न। अच्छा लग रहा है।
मैंने कहा, गांड उठाकर रखना।
वह मान गई।
मैंने नीचे बैठकर उसकी गांड में जीभ की नोक को लगाया, तो वह सिहर उठी।
उसने गांड दबा ली। मैंने जीभ को उधर ही रखा, तो उसने वापस से गांड खोल ली।
वह सिसिया कर बोली, आह कमाल हो आप।
इस बार उसने अपनी गांड को लुपलुप करते हुए खोल बंद करना जारी रखा।
मैंने भी पूरी तन्मयता से उसकी गांड को दो मिनट तक चूसा।
वह अपनी चूत से लगातार बह रही थी।
फिर मैंने उसकी चूत को भी चूसा।
अब वह लगभग कांप रही थी।
मैंने उसे सामने किया और उसके होंठों को चूमा।
वह भी मुझे चूमने लगी।
इस सब में तीस मिनट हो गए थे।
मैंने कहा, चलो, अब बस करो। कोई आ न जाए।
वह मुझे छोड़ना ही नहीं चाहती थी।
मैंने समझाया तो मन भारी करके उसने मुझे धकेल दिया।
वह बोली, जाओ आप। आप बिल्कुल अच्छे नहीं हो।
उसने कपड़े ठीक किये और बोली, आप बाहर बैठो। मैं अभी आई।
मैं बाहर जाकर पंडाल में बैठ गया।
कोई दो मिनट बाद भैया आ गए।
सच में वे थोड़ी पीकर आए थे।
हम दोनों मिल कर बातें करने लगे।
वे बोले, मुझे जरा पानी पीना है।
उन्होंने श्वेता को आवाज लगाई।
मैंने कहा, मैं लाकर देता हूँ।
मैं श्वेता को आवाज लगाते हुए अंदर गया।
मुझे पता चला कि वह बाथरूम में है। शायद अपनी चूत उंगली कर रही थी।
मैंने कहा, तुम्हारे पापा को पानी चाहिए।
अंदर से बोली, आप बात मत करो मुझसे। आप जाओ।
मैंने पानी की एक बोतल जो सामने पड़ी थी, उसे उठाई और बाहर आ गया।
मैंने बोतल भैया को पकड़ा दी।
वे उसे गटगट करके खत्म करते हुए बोले, और एक बोतल लाना कृपया। वह मेरे दोस्त आने वाले हैं न तो उनको भी लगेगा।
मैंने कहा, जी, श्वेता शायद बाथरूम में है। और वहां एक ही बोतल थी।
वे बोले, कोई बात नहीं। अपना ही घर समझो। ऊपर वाले कमरे में फ्रिज है, उधर जाओ और निकाल लेना।
मैंने अंदर जाकर देखा, वह अब भी बाथरूम में थी। मैंने खटखटाया तो बोली, जी, एक मिनट रुकिए, आई।
मैंने कहा, कृपया दरवाजा खोलो।
वह फिर बोली, बस एक मिनट।
मैंने कहा, नहीं, अभी खोलो।
उसने दरवाजा खोल दिया। उस वक्त उसने सिर्फ कुर्ती पहनी हुई थी और लैगिंग झूल रही थी।
मैंने उसका हाथ पकड़ा, बाहर खींचा। उसकी लैगिंग्स को हाथ से पकड़ कर उसे अपने साथ बाहर खींच लिया।
वह किसी कटी हुई डाली की तरह झूलती हुई बाहर आ गई।
मैंने बिना समय गंवाए उसे कुर्सी पर बैठाया और दोनों पैर अलग करके चूत चाटना चालू कर दिया।
वह सीईईई करके आवाज करने लगी और बोली, कृपया जोर जोर से चाटो आह कृपया।
मैंने अचानक से अपनी दो उंगलियां उसकी बुर में अंदर डाल दीं तो वह छटपटा गई।
मैं दनादन अंदर बाहर करने लगा।
वह पैर से चूत दबाने लगी।
एक मिनट के बाद वह अकड़ती हुई झड़ गई और कांपने लगी।
फिर शांत होकर मुझसे लिपट गई।
मुझे चूमती हुई वह लव यू लव यू बोल रही थी।
मैंने उस गर्म कुंवारी लड़की को वासना से देखा और पानी की बोतल लेकर बाहर आया तो देखा भैया नहीं थे।
मैं वहीं बैठकर अपना मोबाइल चलाने लगा।
फिर रात नौ बजे करीब मैं वहां से निकला।
घर आया तो देखा औरतों का गीत संगीत चल रहा है।
मैं छत पर जाने के लिए मुड़ा कि मौसी बोलीं, बेटा, खाना खा लो।
मैंने कहा, बाद में।
मैं छत पर गया। वहां मेरे कुछ भाई बहन थे।
मैं एक कोने में जाकर धूम्रपान करने लगा।
नीचे की तरफ सामने किसी का बाथरूम था।
वहां से आवाज आ रही थी, कृपया। कृपया। ह्म्म्म। आह और कृपया।
मैंने देखा कि वही भाभी किसी और औरत के साथ मजे कर रही थी।
वह भी बाथरूम में लेस्बियन संबंध में।
मैं तो दंग रह गया कि ये तो जरूरत से ज्यादा ही खतरनाक निकली।
फिर किसी महिला की आवाज आई, आह हो गया, चलो अब।
पर उन भाभी की आवाज आई, अभी नहीं। अभी और चूसो मेरी चूत को कृपया।
मैंने अपनी लंबाई का फायदा उठाया और बाथरूम में वेंटीलेटर वाली खिड़की से झांक कर देखा, उन दोनों का सिर्फ चेहरा ही नजर आ रहा था।
मैं एक कुर्सी लेकर वहीं बैठ गया।
वहां काफी अंधेरा भी था।
मैंने एक और सिगरेट जलाई और बैठ गया।
दोस्तो, यह मां बेटी वाली कहानी का पहला भाग आपको पसंद आया होगा।
हालांकि इस भाग में आपको पूरी चुदाई पढ़ने को नहीं मिली लेकिन मुझे विश्वास है कि इस कहानी के अगले भागों को पढ़ कर आप जरूर जुड़े रहेंगे।
कहानी का अगला भाग: शादी में मिली भाभी और उनकी बेटी को चोदा- 2
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