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आपी ने दिलाई लंड वाली दवाई

आप सोचिए किसी लड़की की उम्र बीस साल हो और बदन बारह साल जैसा रहे तो आप क्या कहेंगे।

हो सकता है आप हेल्थ ड्रिंक पीने को कहें, पौष्टिक खाना खाने को बोलें, व्यायाम या योग करने की सलाह दें, या डॉक्टर के पास जाने को कहें।

लेकिन इतना सब करने के बाद भी कोई फर्क न पड़े तो उसे ठिगनी, नटुरी, बौनी जैसे नाम मिल जाएंगे।

ऐसी हालत में जो कोई भी इलाज बताएगा, वो करने को तैयार हो ही जाएगी।

मैं भी तैयार हो गई थी और वो इलाज बिल्कुल कारगर साबित हुआ।

मैं सबीरा हूं, 21 साल की मस्त माल।

5 फीट 6 इंच लंबी, गदराया बदन, सुडौल चूचियां, मटकता कुल्हा, लचकती कमर और दमकता चेहरा।

बुर फटी हुई है, गांड भी फटी हुई है, बिना शादी के कुंवारी नहीं रही।

समझ गए न कि चुदाई चालू है और ये सब लंड और उसकी मलाई का करिश्मा है।

लेकिन ये सब मुझे मुफ्त में मिल गया हो ऐसा बिल्कुल मत समझना।

मैं मौत के मुंह से बाहर आई हूं तब जाकर ऐसी मस्त माल बन पाई हूं।

मेरा दावा है अगर एक बार मुझ पर आपकी नजर पड़ गई तो आपका लंड अकड़ उठेगा और आपको मूठ मारकर अपनी मलाई निकालनी पड़ेगी।

इसलिए आपके मलाई को बचाने के लिए मैं बुर को बुरके में रखने लगी हूं।

लेकिन लंड देखते ही बुर भोसड़ी खुजलाने लगती है और चुदवाए बिना चैन नहीं मिलता।

मेरी बुर बहुत सम्मान करती है लंडों का।

बीस साल की ठिगनी नटुरी छोटी गुड़िया सबीरा मस्त माल कैसे बन गई, ये आप जरूर जानना चाहेंगे।

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हुआ यूं कि मैं 2-3 साल बाद अपने खालाजान के घर जौनपुर गई।

वहीं मिली मेरी खाला की बेटी समीरा, जो मुझसे सिर्फ दो माह बड़ी थी।

मैं उसे आपी कहती थी।

इस बार जब मिली तो उसका गदराया भरापूरा बदन देखकर मुझे अपने ऊपर गुस्सा आने लगा।

दिल किया कहीं डूब मरूं या फंदे पर लटक जाऊं।

समीरा को मेरी हालत समझते देर न लगी।

उसने मुझे आगोश में भर लिया और अपने बेडरूम में लाकर बेड पर पटक दिया।

मुझे बुरा लगा लेकिन अगले ही पल वो मेरी समस्या का हल बताने लगी।

समीरा बोली, अरे सबीरा बहन! बीस साल की हो अब तक लंड नहीं लेती हो क्या।

मैंने पूछा, ये लंड क्या होता है आपी? कोई दवाई है क्या।

समीरा ने कहा, बस समझ गई। तुम बहुत भोली हो इसीलिए अब तक बच्ची की बच्ची हो।

मैं बोली, अरे आपी! मुझे तो सब कुछ खिलाया पिलाया गया पर मैं बढ़ ही नहीं पाई। अब तुम्हें देखकर मर जाने का मन करता है।

समीरा बोली, ठीक है मरने का शौक है तो मर जा। लेकिन मैं चाहती हूं तुम्हारा मरना भी हो जाए और फिर जीना शुरू हो जाए।

मैंने कहा, ऐसा कैसे होगा? मरकर कौन जिंदा होता है। तुम क्या बक रही हो आपी, मेरा मजाक मत बनाओ।

समीरा बोली, अरे मेरी प्यारी बहना! बुरा मान गई? भला तेरी आपी तेरा मजाक उड़ाएगी। देख सबीरा, अपनी इस आपी की गदराई जवानी देख। मैंने इसे मरकर पाया है और जिंदा तुम्हारे सामने हूं या नहीं।

मैं बोली, बिल्कुल जिंदा हो आपी। खैर छोड़ो सब बातें। आखिर तुम कहना क्या चाहती हो? ये लंड वंड का क्या चक्कर है।

समीरा ने कहा, लंड छोड़, पहले वादा कर कि मरने वाला दर्द सह लोगी। तुम्हें जिंदा रखने की जिम्मेवारी मेरी।

मैंने कहा, लो आपी, पक्का वादा करती हूं। तुम जो चाहे मेरे साथ करो लेकिन मुझे उम्र के लायक तो बना ही दो।

समीरा बोली, अरे बहन! मैं तो कुछ नहीं करूंगी, करेगा तो लंड। मैं सिर्फ तेरी मदद करूंगी।

मैंने पूछा, लंड तो देखने दोगी न।

समीरा ने कहा, हां, लेकिन जब तुम मेरी तरह हो जाओगी तब। उसके पहले तेरी आंखों पर पट्टी रहेगी और लंड से पेलाई होती रहेगी।

मैंने पूछा, तेरी तरह होने में समय कितना लगेगा आपी? और आंखों पर पट्टी क्यों, पेलाई क्या होता है।

समीरा बोली, ज्यादा सवाल मत कर। एक महीने की पेलाई में तुम मेरी तरह हो जाओगी। लंड देखोगी तब जब मैं चाहूंगी।

मैंने कहा, फिर तो तेरे साथ तीन महीने जरूर रहूंगी। अब बताओ लंड आएगा कब।

समीरा बोली, ज्यादा बेचैन मत हो, मैं सब तैयारी कर देती हूं। पहले बाथरूम में चल।

आपी मुझे बाथरूम में ले गई और मुझे नंगा कर दिया।

मेरी चूंचियां कागजी नींबू जैसी छोटी थीं और बुर पर सुनहरे छोटे छोटे बाल थे।

अब आपी भी नंगी हो गई।

उसकी चूचियां बड़ी बड़ी थीं, बदन भरापूरा गदराया और बुर फूली हुई।

मुझे अपने पर तरस आने लगा और रुआंसी हो गई।

लेकिन आपी ने धीरज दिया और मेरे बुर के बालों पर हेयर रिमूवर लगाकर मेरी चूंचियों को धीरे धीरे मसलने लगी।

मुझे मजा आने लगा।

थोड़ी देर बाद आपी ने बुर के बाल भी रगड़कर साफ कर दिए और बुर से खेलने लगी।

मैंने खुद को आपी के हवाले कर दिया था।

आपी ने मेरे बुर पर थोड़ा जेल लगाया, अपनी उंगली को मुलायम किया और खेल खेल में बुर में रेल दिया।

मैं बोली, उई आपी! क्या कर रही हो।

समीरा ने कहा, बस तुम चुप रहो, बकवास मत कर।

आपी ने उंगली से ही पेलाई शुरू कर दी और मैं चुपचाप उंगली पेलाई का मजा लेने लगी।

कुछ देर में लगा जैसे मेरे अंदर लावा फूटा और बह निकला।

मुझे अजीब आनंद का अहसास हुआ और मैंने आपी को बाहों में जोर से कस लिया।

समीरा ने पूछा, कैसा लगा सबीरा।

मैंने कहा, क्या बताऊं और कैसे बताऊं आपी? मेरे पास अल्फाज नहीं हैं।

समीरा बोली, ठीक है, अब अच्छे से नहा धो लो। आज रात तेरे बुर में लंड डलवाऊंगी।

मैंने कहा, ठीक है आपी। आप बड़ी दयावान हो।

समीरा बोली, यह तो रात में पता चलेगा कि मैं दयावान हूं या कसाई।

मैंने पूछा, मतलब।

समीरा ने कहा, मतलब तो रात में ही समझ आएगा मेरी भोली भाली बहना, बस इंतजार करो।

मैं रात होने का इंतजार करने लगी।

नौ बजे तक डिनर खत्म हो चुका था।

हम दोनों एक साथ सोने के लिए आ गईं।

आपी ने सफेद धुली चादर बेड पर डाली, चार तकिए रखे, एक काला दुपट्टा और नारियल तेल की डिब्बी।

मैंने पूछा, आपी! इतना सारा इंतजाम किसलिए।

आपी बोली, अपने सबीरा बहन की सेवा और सुविधा के लिए।

आपी हंसते हुए बोली, आ मेरी बहन! तेरी सेवा करती हूं।

आपी ने मुझे नंगी कर दिया और खुद भी नंगी हो गई।

मुझे बिस्तर पर पटककर मेरे ऊपर चढ़ गई और चूमने चाटने चुसने रगड़ने लगी।

पहले अजीब लगा लेकिन थोड़ी देर में मजा आने लगा।

आपी ने मेरे बुर में ढेर सा नारियल तेल डाला और बुर के अंदर बाहर मसाज करने लगी।

मेरी बुर पानी छोड़ने लगी।

तेल और पानी का मिलना और आपी की उंगली से बुर की चुदाई, घच घुच की आवाज ने मुझे मस्ती में ला दिया।

आपी ने काले दुपट्टे से मेरी आंखें बांध दीं और बोली, बहन सबीरा! अब तुझे लंड का स्वाद चखाती हूं।

ज्यादा चीखना चिल्लाना मत वरना घरवाले जाग गए तो सब खेल खराब हो जाएगा और तुम जैसी हो वैसी ही रह जाओगी। फिर मैं तेरी कोई मदद कभी नहीं करूंगी।

पहली बार है दर्द होगा ही लेकिन अल्लाह कसम आगे जो मजा आएगा वैसा मजा दुनिया के किसी काम में नहीं है।

तुम भले बोलोगी मर गई लेकिन न तुम मरोगी न मैं मरने दूंगी। लंड मारता नहीं, सिर्फ मजा देता है। बस रास्ते की सफाई में थोड़ी तकलीफ होती है।

मैंने कहा, तुम निश्चिंत रहो आपी। मैं तेरी छोटी बहन सबीरा वचन देती हूं कि मैं ऊफ् तक नहीं करूंगी भले मर जाऊं। लेकिन तुम मरने कहां दोगी।

अब आगे की कार्रवाई शुरू करो। बुर कुछ मांग रही है ऐसा लग रहा है।

आपी बोली, ओके ओके बहन।

कुछ देर कमरे में शांति रही फिर पिछले दरवाजे के खुलने और बंद होने की हल्की आवाज आई।

फिर आपी और एक मर्दाना आवाज की फुसफुसाहट सुनाई दी।

आपी ने मुझे बिस्तर पर चित लिटाया और मेरे चूतड़ के नीचे तकिया लगाकर बुर को ऊपर उठा दिया।

मैं बंद आंखों से आपी के अनुसार अपने को करती गई।

आपी ने मेरे सिर को अपनी गोद में रखा तभी किसी मर्दाना हाथ ने मेरी टांगें फैला दीं।

आपी को दिए वचन के अनुसार मुझे चुप रहना था।

मेरी छोटी सी बुर के मुंह पर गरम गोला सटा और गीली मुलायम बुर में घुसने लगा।

मैं समझ गई यही लंड है।

फिर दबाव बढ़ा और मेरी बुर फटने लगी।

उंगली जितनी जगह पहुंचती थी वहां मोटा लंड घुस चुका था।

मोटाई का अंदाज लग चुका था।

मेरा सिर आपी की गोद में था और हाथ मुंह पर।

एक झटके में पूरा डाल दो, आपी ने जैसे आर्डर दिया।

लेकिन उसने लंड बाहर निकाल लिया।

मैं सोचने लगी यह क्या हुआ। आपी तो पूरा डालने को बोली थी और ये पूरा निकाल लिया।

लेकिन पल भर में सब बदल गया।

आपी ने मेरा हाथ, मुंह और सिर कब्जे में लिया।

लंड बुर के गेट पर सेट हुआ और एक जोरदार घातक झटका लगा।

मोटा सरिया मेरी बुर को फाड़ते हुए कलेजे तक पहुंच गया।

मौत से मुलाकात और मुकाबला हुआ।

आपी बोली, रुको मत सलीम! पेलाई शुरू करो। यह छोटी नहीं है, बीस साल की जवान है। लंड मिला नहीं इसलिए बढ़ी नहीं। रहम मत करो। भोसड़ी वाली मुझसे सिर्फ दो महीने की छोटी है। बेधड़क पेलो।

आपी का आर्डर फौजी अफसर जैसा था।

सलीम ने आर्डर पाते ही बुर को भोसड़ा बनाना शुरू कर दिया।

मैं सचमुच मौत से मुकाबला कर रही थी और आपी कसाई की तरह मेरा मुंह, सिर और हाथ दबाए हुए थी।

सलीम का लंड पिस्टन की तरह मेरी बुर में तेजी से अंदर बाहर हो रहा था।

बुर की हर गांठ टूटती जा रही थी और ऐसा लग रहा था कि मैं सचमुच बड़ी होती जा रही हूं।

पांच मिनट में पांच सौ झटके खा चुकी बुर लंड की दीवानी होने लगी।

मैं मौत को मात दे चुकी थी और बुर लंड को दे चुकी थी।

मीठा मीठा दर्द मजा देने लगा।

मुझे संतुलित समझकर आपी ने मेरे मुंह पर से हाथ हटा लिया।

सलीम पूरी रफ्तार में पेलते जा रहा था।

आपी ने पूछा, कैसा लग रहा है सबीरा बहन।

मैं बोली, अभी मत पूछो आपी, पेलवाने दो! आह ओह आह ऊंह ऊंह ऊई ऊई आह ओह ओई आह ऊंह ऊई पेलो पेलो और जोर से पेलो! आह वाह ओहोहो ओह हो अई अई अई मैं गई ऊई ऊई हा हा हा अई आआ आह।

गरमागरम लंड के जूस से बुर भर गई और अब तक की जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी मिली।

थोड़ी देर शांत पड़ी रही।

लंड पाने की खुशी, सील टूटने का दर्द और औरत बनने का आनंद कितना निराला होता है न।

मैंने कहा, आपी तुम्हें दिली शुक्रिया।

आपी बोली, शुक्रिया वुक्रिया छोड़, बता कैसा लगा।

मैंने कहा, आपी! क्या सच में तुम बोलकर बता सकती हो इस खुशी को।

आपी बोली, नहीं रे। तुम सच बोली। इस मजे के लिए कोई अल्फाज ही नहीं बने। अब बता क्या करना चाहती है तू।

मैंने पूछा, लंड दिखा सकोगी? और ये सलीम कौन हैं।

आपी ने कहा, वादे के अनुसार एक महीने बाद लंड और लंडधारी का दीदार कर लेना। फिलहाल लंड और लंडधारी एक माह तेरी सेवा करते रहेंगे।

मैंने कहा, ठीक है आपी।

उस रात चार बार पेलाई हुई।

फिर सुबह होने से पहले पिछला दरवाजा खुला और बंद हुआ।

मतलब पेलने वाला चला गया।

आपी ने मेरी आंखों से दुपट्टा खोल दिया।

अब कमरे में हम दोनों बहनें थीं।

सफेद चादर पर लगे खून के दाग सील टूटने और सुहागरात मनाने की गवाही दे रहे थे।

पहली पेलाई से ही बदन में बदलाव दिखना शुरू हो गया।

दूसरी रात में आपी ने मेरी गांड की भी सील तुड़वा दी।

फिर तीसरी, चौथी, पांचवीं करते करते तीसवीं रात आ गई।

आपी की दवाई करामात कर चुकी थी।

बस आपी बीस तो मैं उन्नीस।

तीसवीं रात को मुझे उस करामाती लंड और लंडधारी का दीदार होना था।

आखिर सलीम कौन होगा।

यह नाम तो यहां घर और आसपास में किसी का नहीं था तो फिर कौन होगा।

वो रात आई और मेरा इंतजार खत्म हुआ।

आपी दरवाजा खोलकर आई और अपने हाथों से मेरी आंखें बंद कर दीं।

सलीम बिस्तर पर बैठ चुका था।

आपी ने मेरे आंखों से अपने हाथ हटाया।

मैं बोली, सबीर भाईजान आप।

आपी बोली, हां सबीरा! भाईजान ने ही मुझमें और तुममें जान डालकर जानदार और शानदार बनाया है। अब इनके शानदार जानदार हथियार का भी दीदार कर ले जिसने तेरी कायापलट कर दिया है।

आपी ने भाईजान को नंगा कर दिया।

उनका हब्शी लंड देखकर मैं सोच में पड़ गई।

इतने बड़े लंड से मेरी छोटी सी बुर पेलवाती रही।

खैर जो हुआ सो हुआ।

उस रात भाईजान ने मेरे सामने ही समीरा आपी को भी जमकर पेला।

महाचुदक्कड़ समीरा आपी ने भाईजान से पेलवा पेलवाकर मुझे भी महाचुदक्कड़ बना दिया।

घर में ही हमारी चुदाई चलती रही और घरवालों को खबर नहीं तो बाहर वाले क्या जानते।

मैं एक महीने के लिए आई थी लेकिन बहाने बना बनाकर छह महीने रह गई।

इन छह महीनों में बिना नागा रोज चार पांच बार चुदवाती रही।

चुदाई ने वो चमत्कार दिखाया कि जब छह महीने बाद घर लौटी तो कोई पहचान नहीं पाया।

आते वक्त समीरा आपी ने मंत्र बताया कि घर के लंड से घर में चुदवाना और बाहर मुंह मत मारना।

फटी बुर और फटी गांड लेकर घर आते ही इस मंत्र का प्रयोग अपने से एक साल छोटे भाई शब्बीर पर कर दिया और चुदाई प्रोग्राम चल निकला।

आपी तेरी दवाई बहुत काम आई।

बधाई बधाई बधाई।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।
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