हाय दोस्तों, सभी मुस्लिम भाइयों और हिंदू चुदाकड़ों को प्रिया का प्रणाम।

यह पूरी तरह काल्पनिक कहानी है।
इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं और उनकी उम्र अठारह वर्ष से अधिक है।
यह कहानी केवल मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है।
इसमें बताई गई कोई भी घटना वास्तविक नहीं है।
किसी भी व्यक्ति, स्थान या घटना से इसका कोई संबंध नहीं है।
अगर आपको ऐसी कहानियां पसंद नहीं हैं तो कृपया आगे न पढ़ें।
मेरी उम्र पच्चीस साल है और तीन साल पहले ही मेरी शादी अर्जुन के साथ हो गई थी।
अर्जुन एक दवा कंपनी में सेल्समैन हैं और अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं।
हमारी जिंदगी में बस हम दो ही हैं। तीन साल बीत जाने के बाद भी हमें कोई औलाद नहीं हुई, और डॉक्टरों ने साफ कहा था कि इसकी वजह अर्जुन का कमजोर लंड है।
हमारी सेक्स लाइफ भी कुछ खास अच्छी नहीं है। उनके लंड के छोटे और कमजोर होने की वजह से वो मुझे ज्यादा मजा नहीं दे पाते। जैसे ही घुसाते हैं वैसे ही जल्दी झड़ जाते हैं।
रात भर मैं तरसती रह जाती हूं और मेरी चूत प्यासी रह जाती है। कई बार मैं खुद ही अपने हाथों से मजा लेने की कोशिश करती हूं, लेकिन उससे भी मन नहीं भरता।
पति के साथ बिस्तर पर मजा न मिलने की वजह से मेरा मन हमेशा कहीं और भटकता रहता है।
चूंकि अर्जुन काम के सिलसिले में बाहर जाते हैं, इसलिए उन्हें अक्सर शहर के बाहर ही रहना पड़ता है।
हमारे घर के पास ही असलम भाई की गोश्त की दुकान है। मैं उन्हें असलम भैया कहती हूं।
असलम भाई देखने में तो कुछ खास नहीं हैं, लेकिन उनकी बॉडी बहुत ही मजबूत और मर्दाना है। उनकी छाती और बाहों पर मांस का खिंचाव साफ दिखता है।
हमारे घर की खिड़की उनके दुकान के ठीक सामने खुलती है। असलम चूंकि कसाई हैं, इसलिए अक्सर लुंगी और बनियान में ही रहते हैं।
मैंने कई बार खिड़की से उनकी लुंगी में से उनके मुस्लिम लंड का आकार देखा है। वो मेरे पति के लंड से तीन गुना बड़ा और मोटा दिखता है। जब वो चलते हैं तो लुंगी के अंदर वो हिलता हुआ साफ नजर आता है।
उस दिन करवा चौथ था। मैंने अपने अर्जुन के लिए पूरे दिन व्रत रखा था।
पर शाम में अर्जुन ने फोन करके कहा कि उसे काम की वजह से आना नहीं होगा और उसे किसी और शहर जाना पड़ेगा।
मुझे इतना गुस्सा आया कि जिस पति के लिए मैंने दिन भर भूखी-प्यासी रहकर व्रत रखा, उसे मेरी कोई परवाह नहीं है। मेरा मन उस वक्त बहुत उदास और गुस्से से भर गया था।
शाम हो चुकी थी। मैंने पूजा की थाली तैयार की और छत पर चली गई पूजा करने।
ऊपर छत पर पहुंचते ही मैंने देखा कि असलम भैया अपनी दुकान की छत पर खड़े होकर तार जोड़ रहे हैं। हवा के झोंके से उनकी लुंगी उड़ रही थी और उनकी चड्डी में से उनका मुस्लिम लंड काफी तना हुआ साफ दिख रहा था।
मैंने उन्हें सलाम किया। उन्होंने मेरी तरफ देखा और जवाब दिया। उसी वक्त मेरी नजर उनके लंड पर पड़ गई, जो लुंगी के अंदर से मुझे प्रणाम कर रहा था।
असलम ने कहा, “क्या हाल है दीदी? आज छत पर कैसे?”
मैंने कहा, “भाई, आज करवा चौथ का व्रत था। उसी की पूजा करने आई थी। पर तुम्हारे भाई को मेरी कोई फिक्र नहीं। उन्होंने कह दिया कि वो आज नहीं आ पाएंगे। अब शायद मुझे अकेले ही पूजा करनी पड़ेगी।”
असलम ने कहा, “आप डरो मत, मैं हूं ना आपके साथ। मैं किसी तरह से आपकी मदद कर सकता हूं तो मुझे खुशी होगी।”
मैं असलम के लंड को ही घूर रही थी, जो उनकी लुंगी में से तना हुआ दिख रहा था। शायद असलम भी समझ गया था कि मेरी नजर कहां टिकी हुई है।
मैंने कहा, “तुम किस तरह से मेरी मदद करोगे?”
असलम ने कहा, “कहो तो तुम्हारी ………मांग में भर दूं।”
मैंने पूछा, “मांग में क्या भरोगे?”
“सिंदूर,” असलम ने जवाब दिया।
मुझे असलम की यह डबल मीनिंग पसंद आ गई।
मैंने कहा, “कैसे भरोगे? अगर मैं कहूं कि मैं तुम्हारे हाथ बांध दूं तो?”
असलम मेरा इशारा समझ गया था। उसने कहा, “अपने हथियार से ही भर दूंगा।”
मैं हंस पड़ी और उसे आंख मार दी। फिर पूजा की थाली लेकर उसके करीब चली गई।
असलम ने भी जल्दी से अपनी लुंगी खोली और अपना काला मुस्लिम कटा हुआ लंड बाहर निकाल दिया।
मैं नीचे बैठ गई और उसके लंड को दूध से अच्छी तरह धोया। फिर उस पर खूब सारा सिंदूर लगाया।
उसके बाद मैंने अपना सिर उसके लंड के सामने झुका दिया।
असलम आगे बढ़ा और अपने मुस्लिम लंड से मेरी मांग भर दी।
उसके बाद उसने मुझे उठाया। मैं खड़ी हुई, साड़ी सिर पर ली और उसके पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
फिर उसने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया और चूमने लगा।
मैं भी उसे चूमने लगी।
उसने मेरी साड़ी उतार फेंकी। अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।
वो मुझे पागलों की तरह चूमने और चाटने लगा। मैं भी उससे चिपक गई और उसके लंड को हाथों से मसलने लगी।
वो मेरे मम्मों को खूब मसल रहा था और चाट रहा था। उसके शरीर से मांस की हल्की बू आ रही थी, लेकिन वो बू मुझे काफी कामुक लग रही थी।
मैंने भी उसके शरीर को चूमना और चाटना शुरू कर दिया।
मैंने कहा, “असलम, मुझे अभी पूजा पूरी करनी है। और यहां कोई देख भी सकता है, इसलिए नीचे चलो।”
असलम ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया। मैंने पूजा की थाली गोद में संभाल ली।
नीचे आकर मैं सीधे मंदिर वाले कमरे में गई और पूजा के फूल मूर्ति को चढ़ाने लगी।
जैसे ही मैं प्रसाद लेने को झुकी, पीछे से असलम ने आकर अपना काला मुस्लिम कटा हुआ लंड मेरी चूत में घुसा दिया।
मेरी चीख निकल गई, “आआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हा ओउईईईईईओओओओ।”
अभी असलम का आधा भी अंदर नहीं गया था। उसने एक और जोर का झटका मारा और लंड पूरा अंदर चला गया।
मेरे मुंह से लगातार चीखें निकल रही थीं। मैं अभी भी प्रसाद लेने के लिए झुकी हुई थी।
मैंने कहा, “असलम, मैं तो प्रसाद लेने आई थी।”
असलम ने कहा, “मंदिर का प्रसाद ले ली, अब मेरा प्रसाद ले।”
यह कहकर असलम ने धक्के मारना शुरू कर दिए।
पंद्रह मिनट तक पीछे से खूब धक्के मारने के बाद असलम मुझसे अलग हुआ।
जैसे ही मैं उससे अलग हुई, मैंने असलम का मुस्लिम कटा हुआ लंड देखा। काला, आठ इंच का मोटा लंड। मैंने इतना सुंदर और मर्दाना लंड आज तक नहीं देखा था।
मैंने उसके लंड को चूम लिया और पागलों की तरह चूसने लगी।
दस मिनट चूसने के बाद जब असलम झड़ने वाला था, उसने कहा, “मैं झड़ने वाला हूं।”
मैंने उसे इशारा किया कि मेरे मुंह में ही झड़ जाए।
असलम ने सारा वीर्य मेरे मुंह में छोड़ दिया।
मेरा करवा चौथ का व्रत असलम के मुस्लिम वीर्य से खुला। मैंने उसे पूरा पी लिया।
मेरी स्टोरी कैसी लगी, जरूर बताएं।
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