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जीजा ने मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया

हैलो दोस्तों, मेरा नाम कनिका है और मैं हरियाणा की रहने वाली हूँ। दोस्तों, मैं सेक्स की बहुत भूखी हूँ, लेकिन एक रंडी नहीं। मेरी यह आज की कहानी मेरी पराए मर्द से पहली चुदाई की एक घटना है। दोस्तों, मैं अब 42 साल की हूँ और संजीव जीजाजी 58 साल के हैं। मेरे फिगर का साइज 44-40-48 है। मेरी लंबाई 5 फीट 7 इंच है और संजीव 6 फीट 1 इंच लंबे, चौड़ी छाती वाले और थोड़े मोटे हैं, लेकिन बहुत अच्छे स्वभाव के हैं। दोस्तों, अब मैं आप सभी को मेरा पहला सेक्स अनुभव बताती हूँ।

यह मेरा सेक्स संजीव से कैसे शुरू हुआ? दोस्तों, बात 1996 की है। तब मैं 25 साल की थी। उन दिनों मेरे पति भी आर्मी में थे। तभी उनको कुछ बीमारी लग गई और वो बहुत ज्यादा बीमार हो गए। तब ज्यादा मोबाइल नहीं होते थे। तभी मुझे टेलिग्राम से यह मैसेज मिला और मैं बहुत घबरा गई। मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। मैं बस रो रही थी और सोच रही थी कि कैसे अपने पति के पास उनसे मिलने जाऊँ? क्योंकि सफर बहुत लंबा था और अंजान था।

उसी समय मेरे घर पर अपनी पत्नी के साथ संजीव, मतलब मेरे जीजाजी, आ गए मुझसे मिलने। यानी मेरी मुँह बोली बहन के साथ। तो मुझे रोते देखकर उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या बात है, तुम रो क्यों रही हो? तो मैंने उनको सब बता दिया। उस समय संजीव भी आर्मी में थे और वो मुझसे बोले कि इसमें रोने की क्या बात है। अगर तुम्हें उससे मिलना है तो चल, मैं तुम्हें वहाँ पर लेकर चलता हूँ। फिर दीदी ने ही मुझे कुछ सांत्वना दी और उन्होंने मेरे घर पर बात करके मेरे भाई को बुला लिया। मेरे भाई ने मेरे साथ जाने के बजाय संजीव को मेरे साथ ले जाने के लिए बोला। मेरे दोनों बच्चों को वो अपने साथ गाँव ले गए।

फिर उसी रात को संजीव मेरे पास रहे और सुबह हम लोग एक प्राइवेट बस से दिल्ली आ गए। फिर वहाँ हमने ट्रेन में फर्स्ट क्लास में सीट बुक करवा ली। रात को दस बजे हमारी ट्रेन चली। टिकट चेक होने के बाद संजीव ने दरवाजा बंद करके मुझे ऊपर सुला दिया और खुद नीचे सो गए। बस यही सफर मेरे लिए पहली पराए मर्द से सेक्स की वजह बन गया। रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी और संजीव सो गए थे। शायद वो सोने का नाटक कर रहे थे।

तभी मैं बाथरूम जाने के लिए नीचे उतरी तो मैंने देखा कि संजीव का लंड एकदम तना हुआ है और खंभे की तरह खड़ा है। मैं उनका लंड देखकर एकदम हैरान हो गई और मन ही मन सोचने लगी कि इतना बड़ा लंड आदमी का कैसे हो सकता है? मैंने बहुत बार चाहा लेकिन मेरी नजर संजीव के लंड पर से हट ही नहीं रही थी। उनके लंड को बेड शीट के नीचे से देखकर ही मेरी चूत गीली हो रही थी। लेकिन अब तक मैं किसी पराए मर्द से चुदी नहीं थी, इसलिए मैं आगे नहीं बढ़ पा रही थी। फिर जैसे-तैसे करके मैं बाथरूम में चली गई। जब मैं वहाँ से वापस आई तो मैंने देखा कि उनका लंड अब भी वैसे ही तना हुआ है। अब मैं बहुत डरते-डरते उनकी सीट पर बैठ गई और बहुत हिम्मत करके उनकी आँखों में आँखें डालकर देखने लगी। तभी वो मुझसे बोले।

संजीव: क्यों कनिका, नींद नहीं आ रही क्या? वो मेरे उनके पास बैठते ही बोले।

मैं: जी हाँ, मुझे नींद नहीं आ रही, थोड़ा डर लग रहा है। लेकिन दोस्तों, पता नहीं उनकी क्या हालत होगी?

फिर संजीव मेरा हाथ पकड़ते हुए बोले कि डर लग रहा है तो एक काम करो, थोड़ा पानी पी लो। मैंने थोड़ा पानी पिया और उसी बीच मैंने महसूस किया कि वो मुझसे थोड़ा और सटकर बैठ गए। फिर हम कुछ इधर-उधर की बातें करने लगे। दोस्तों, तब मैंने महसूस किया कि संजीव ने अपना लंड मेरी गांड से बिल्कुल सटा रखा था और मुझे अच्छा भी लग रहा था। लेकिन मैं उनसे कुछ कह नहीं पा रही थी। तभी इतने में एक स्टेशन आ गया। वहाँ पर संजीव ने दो कप चाय ली और फिर हमने चाय पी। उस समय रात के करीब दो बज रहे थे।

फिर चाय पीने के बाद संजीव ने मुझसे कसम देकर पूछा कि कनिका, क्या तू मुझे एक बात सच-सच बताएगी?

मैं: हाँ, अगर मुझे पता है तो मैं आपको जरूर बताऊँगी।

संजीव: तू अभी कुछ देर पहले क्या देख रही थी? क्यों, तुझे अच्छा लगा क्या? सच बोलना प्लीज। अगर तुझे अच्छा लगा तो मैं तुझे और भी मजा दूँगा और अगर नहीं लगा तो मैं कुछ नहीं कहूँगा।

दोस्तों, यह बात कहकर संजीव ने मेरा एक हाथ अपने हाथों में लेकर जोर से दबा दिया और थोड़ा मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखने लगे। फिर जैसे-तैसे करके मैंने कहा कि हाँ, मुझे अच्छा लगा। तो बस फिर क्या था, संजीव मेरे ऊपर लट्टू हो गए। अब उन्होंने मुझे अपनी गोदी में कैच कर लिया। फिर मैं एकदम से उनके ऐसा करने से बहुत आश्चर्यचकित हो गई क्योंकि वो मुझे अपनी छाती पर जोर से दबाने लगे। जिसकी वजह से मेरी छाती उनकी छाती से दब रही थी और मुझमें एक अजीब सा अहसास ला रही थी। मेरे बदन पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी। अब संजीव मेरे बूब्स को दबाने लगे और मेरी चूत को मसलने लगे और मेरे कपड़े उतारने लगे। फिर वो खुद भी नंगे हो गए और अब उनका लंबा, मोटा, तना हुआ लंड मेरी आँखों के सामने उछल रहा था।

फिर उन्होंने मुझे अपनी बाहों में लेकर अब सीट पर लिटा दिया और फिर मेरी चूत को चाटने लगे। दोस्तों, वैसे तो मेरे पति ने भी मेरी चूत बहुत बार चाटी थी, लेकिन आज मुझे चूत चटवाने का असली मजा संजीव से आया। मैंने उनके कुछ देर चाटने के बाद पानी छोड़ दिया। तब संजीव ने मुझसे अपना लंड चुसवाया और मैं उनके लंड का टोपा अंदर-बाहर करके उनका लंड चूस रही थी। मुझे उनका लंड पूरा मुँह में लेने में दिक्कत हो रही थी क्योंकि उनका लंड बहुत मोटा था। वो बहुत मुश्किल से मेरे मुँह के अंदर जा रहा था, लेकिन उतनी ही आसानी से मेरे हलक में पहुँच रहा था। ज्यादा लंबा होने की वजह से मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और मेरी आँखों से आँसू बाहर आने लगे थे।

फिर करीब कोई दो-पाँच मिनट लंड को चूसने के बाद संजीव ने मुझको खिड़की के सहारे घोड़ी बना दिया। अब एक बार मेरी चूत चाटकर एक ही जोर के धक्के में अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया। अब मैं दर्द होने की वजह से बहुत जोर से चीखने-चिल्लाने लगी थी और अपनी चूत को आगे की तरफ करके लंड को बाहर निकालने की नाकाम कोशिश करने लगी। लेकिन संजीव की मजबूत पकड़ और मेरी चूत में फँसे हुए लंड से मैं थोड़ा भी आगे नहीं बढ़ सकी। अब वो मोटा और सख्त लंड मेरी चूत में लगातार आगे-पीछे होने लगा था। लेकिन अब जल्दी ही मुझे भी बहुत मजा आने लगा और मैं सिसकियाँ लेने लगी। उफ्फ्फ्फ अहाह्ह्ह्हह्ह हाँ और जोर से चोदो जीजू, उईईईईईई माँ, मेरी चूत को और जोर से मारो। अहह्ह्हह्ह्ह्ह, संजीव, मैं गई।

फिर कुछ देर की चुदाई के बाद संजीव ने मेरी चूत में अपना वीर्य डाल दिया। फिर वो कुछ देर वैसे ही मेरी चूत में अपना लंड रखकर रुक गया। उसके कुछ देर बाद संजीव ने मेरी चूत से अपना लंड बाहर निकाला और मेरी चूत को साफ किया और अपना लंड भी साफ किया। फिर हम दोनों एक ही सीट पर पूरे नंगे बैठकर एक-दूसरे की बाहों में आकर प्यार करने लगे और चूमने-चाटने लगे। फिर उस पूरी रात को दूसरी सुबह तक हमने करीब तीन बार जमकर सेक्स किया। मुझे उसकी चुदाई में बहुत मजा आया। फिर मैं अपने कपड़े पहनकर बहुत थककर गहरी नींद में सो गई। लेकिन संजीव नहीं सोए। दोपहर को जब मैं नींद से उठी तो मैंने देखा कि ट्रेन एक स्टेशन पर खड़ी हुई थी। संजीव ने खाना मँगवाया और खाना खाकर हम दोनों फिर से सो गए।

उस रात को फिर से एक बार मेरी उस ट्रेन में बहुत जमकर चुदाई हुई। इस तरह से मैं संजीव से चुदते हुए अपने पति के पास पहुँच गई। वहाँ से वापसी में भी हमने दो बार बहुत मस्त चुदाई की। उसके बाद जब तक मेरे पति जॉब पर रहे, मैं कभी उनके साथ नहीं गई। मैं बस छुट्टियों में ही उनसे चुदवाती और बच्चों की पढ़ाई का बहाना करके मैं उनकी गैरमौजूदगी में संजीव से बहुत मस्त चुदवाती रही। बहुत बार संजीव ने मुझे अपने फार्म हाउस में भी अपने साथ ले जाकर वहाँ पर चोदा है। मैंने उसकी चुदाई के बहुत मजे लिए। हर कभी कोई अच्छा मौका देखकर उससे चुदवाती रही। एक बार बरसात में भीगते हुए भी संजीव से मेरी चुदाई हुई। उसने मेरी चूत को अब चोद-चोदकर पूरी तरह से भोसड़ा बना दिया।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।
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