Periods Me Chudai: यह मेरी आज की कहानी आप सभी freesexkahani के पढ़ने वालों को जरूर पसंद आएगी, क्योंकि यह मेरा एक सच्चा सेक्स अनुभव के साथ वो घटना है जिसको मैं बहुत समय से आप तक पहुँचाने के बारे में सोच रहा था और आज ले आया।
दोस्तों, मैं एक बीस साल का मस्त और आकर्षक दिखने वाला लड़का हूँ। मेरा शरीर पूरी तरह गठीला और तंदुरुस्त है। मेरी लंबाई पूरे छह फीट की है। मेरे कंधे चौड़े और मजबूत हैं। मेरी छाती उभरी हुई और कड़ी मांसपेशियों से भरी है। मेरे पेट पर सिक्स पैक साफ दिखते हैं। मेरी बाहें मोटी और शक्तिशाली हैं। मेरे पैर लंबे और मजबूत हैं। मैं पूरी तरह से संतुष्ट करने वाले सेक्स में पूरा विश्वास रखता हूँ।
मेरा मानना है कि सेक्स में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। पार्टनर के शरीर को पहले अच्छे से तैयार करना चाहिए। उसकी सांसों को महसूस करना चाहिए। उसकी त्वचा की गर्माहट को अपने हाथों से महसूस करना चाहिए। उसकी इच्छा को धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए। तभी असली मज़ा आता है। तभी दोनों पूरी तरह संतुष्ट होते हैं। मैं हमेशा यही कोशिश करता हूँ कि मेरी पार्टनर मुझे भूल न पाए।
और मेरी सोच कहती है कि पहले जहाँ तक हो सके अपने घर में ही यह सब करके देखना और इसके बारे में समझना चाहिए। लेकिन कुछ लोगों को यह काम अपने घर में करना बिल्कुल भी पसंद नहीं है। इसलिए वे हमेशा बाहर ही इसका जुगाड़ करते हैं। वे किसी अनजान जगह पर जाते हैं। वे जल्दी से काम निपटाना चाहते हैं। उन्हें पार्टनर की खुशी की कोई परवाह नहीं होती।
वे किसी लड़की को ढूंढते हैं। वे उसे किसी होटल या सुनसान जगह ले जाते हैं। वे जल्दी से कपड़े उतारते हैं। उनका लिंग तुरंत खड़ा हो जाता है। वे बिना ज्यादा तैयारी के सीधे अंदर घुस जाते हैं। उनकी सांसें तेज हो जाती हैं। उनकी कमर तेजी से आगे-पीछे होती है। त्वचा की टकराहट की आवाजें कमरे में गूंजती हैं। कुछ ही मिनटों में वे जोर से कराहते हुए झड़ जाते हैं। उनका गर्म वीर्य अंदर या बाहर निकल जाता है। फिर वे तुरंत कपड़े पहनते हैं और चले जाते हैं।
उनके साथ वाली लड़की वहीं लेटी रह जाती है। उसकी योनि अभी भी फड़फड़ा रही होती है। उसके अंदर की दीवारें खालीपन महसूस कर रही होती हैं। उसका गीला रस उसके जांघों पर बह रहा होता है। उसके स्तन अभी भी सख्त खड़े होते हैं। उसके निप्पल कड़े हो चुके होते हैं। उसकी सांसें अभी भी तेज चल रही होती हैं। उसका शरीर अभी भी गर्म और अधूरा है। उसे कोई चरम सुख नहीं मिला होता। वह सिर्फ इस्तेमाल होने का एहसास लेकर रह जाती है।
दोस्तों, आप लोग ठंडे दिमाग से सोचो। जब परिवार में ही माँ, बहन, चाची, कज़िन, मामी, बुआ जैसी महिलाएँ हों, तो उनको अपने इस काम के बारे में बताकर या अपनी तरफ कैसे भी आकर्षित करके यह हमारा काम बन सकता है। फिर हम लोग बाहर जाकर अपनी इच्छा को क्यों पूरा करें? हम घर के ही किसी सदस्य के साथ जब यह काम करेंगे, उससे बाहर वालों को कुछ पता भी नहीं चलेगा। और हमें मज़ा भी उस काम में बहुत आएगा।
घर में सब कुछ सुरक्षित रहता है। कोई बाहर की नजर नहीं पड़ती। हम धीरे-धीरे एक-दूसरे को समझ सकते हैं। हम घंटों तक समय निकाल सकते हैं। जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं होती। हम शरीर के हर हिस्से को अच्छे से जान सकते हैं। हम एक-दूसरे की सांसों को महसूस कर सकते हैं। हम एक-दूसरे की त्वचा की खुशबू को याद रख सकते हैं। हम एक-दूसरे की आहें सुन सकते हैं।
जब हम घर में ऐसा करते हैं तो डर कम होता है। हम पूरी तरह खुलकर मज़ा ले सकते हैं। हम बार-बार रुक सकते हैं। हम फिर शुरू कर सकते हैं। हम पार्टनर को पहले चरम सुख दे सकते हैं। हम उसकी योनि को अपनी उंगलियों से धीरे-धीरे तैयार कर सकते हैं। हम उसकी गीली गर्माहट को अपनी जीभ से चख सकते हैं। हम उसकी कशिश को बढ़ा सकते हैं। हम उसकी आहें सुनकर और भी उत्तेजित हो सकते हैं।
जब हम अंदर जाते हैं तो उसकी दीवारें हमें कसकर पकड़ लेती हैं। हम उसकी गर्माहट को महसूस करते हैं। हम उसकी सांसें अपनी गर्दन पर महसूस करते हैं। हम उसकी उंगलियां अपनी पीठ पर खरोंचती हुई महसूस करते हैं। हम उसकी टांगें अपनी कमर के चारों ओर लिपटती हुई महसूस करते हैं। हम उसकी आँखें बंद होकर आनंद में डूबी हुई देखते हैं। हम उसकी होंठों से निकलती हुई मीठी आहें सुनते हैं।
ऐसे में बाहर वालों को कभी पता नहीं चलता। हम दोनों मिलकर चरम सुख लेते हैं। हम दोनों थककर एक-दूसरे की बाहों में सो जाते हैं। सुबह उठकर भी कोई शक नहीं होता। यही मेरी सोच है। यही मुझे सही लगता है। यही मुझे पूरा विश्वास दिलाता है कि घर में ही सब कुछ बेहतर हो सकता है।
यह सब मेरे मन के विचार हैं। मेरी सोच यही कहती है।
दोस्तों वैसे हमारे घर परिवार में कभी ना कभी ऐसी घटनाएँ घट ही जाती हैं जो आपको अंदर से पूरी तरह झंझोड़कर रख देती हैं जैसे कभी गलती से आप अपनी बहन को कपड़े बदलते हुए देख लेते हैं या फिर किसी भी लड़की, आंटी, भाभी या औरत को उसके घर के काम करते समय उसके गोरे उभरे हुए गोलमटोल बूब्स का अचानक से नजर आ जाना या किसी औरत को अपने बच्चे को दूध पिलाते हुए हम गलती से उसके बूब्स को देख लेते हैं।
उस स्थिति में आपका लंड तन जाता है। आपकी सांसें अचानक रुक सी जाती हैं। आपके शरीर में एक गर्म लहर दौड़ जाती है। आपका लिंग पैंट के अंदर फूलकर सख्त हो जाता है। वह जोर जोर से धड़कने लगता है। खून तेजी से उसके अंदर भरता है। आपकी आँखें उस नजारे पर टिकी रह जाती हैं। आपका दिमाग एकदम खाली हो जाता है।
आपको याद रहता है सिर्फ वो गोरे गोलमटोल बूब्स। उनकी नरम त्वचा। उनके भारीपन से थोड़ी झुकती हुई आकृति। निप्पल का हल्का सा उभार। कभी कभी कपड़े के नीचे से साफ दिखता अंधेरा घेरा। आपका लंड और भी कड़ा हो जाता है। वह पैंट को अंदर से धक्का मारता है। आपके अंदर का जोश इतना तेज हो जाता है कि आप सब कुछ भूल जाते हैं।
आपको याद नहीं रहता कि वो आपकी बहन है। आपको याद नहीं रहता कि वो कोई रिश्तेदार है। आपको याद नहीं रहता कि वो किसी की माँ है। आपके मन में सिर्फ एक ही बात घूमती है कि उन बूब्स को छूना है। उन्हें मुँह में लेना है। उन्हें चूसना है। उन्हें दबाना है। आपकी सांसें तेज हो जाती हैं। आपका गला सूख जाता है। आपके पैरों में हल्का सा काँपन आ जाता है।
दोस्तों मैं आज एक ऐसी ही घटना आपको सभी को बताने जा रहा हूँ जिसमें मेरे साथ भी कुछ घटित हुआ। मेरे घर में मेरे पापा, मम्मी और मेरी दो बड़ी बहनें रहती हैं। मैं उम्र में बीस साल का हूँ और मेरी दोनों बहन मुझसे दो साल बड़ी हैं। मेरी बहनें दोनों ही सुंदर हैं। उनकी त्वचा गोरी है। उनके बाल लंबे और घने हैं। उनका बदन गठीला और आकर्षक है। उनकी छाती भरी हुई और गोल है। उनकी कमर पतली है और कूल्हे थोड़े चौड़े हैं।
एक बार मेरी माँ ने मुझे पास की दुकान से कुछ सामान लाने को कहा। उन्होंने मेरे हाथ में एक छोटी सी लिस्ट थमा दी। उसमें रोजमर्रा की चीजें लिखी हुई थीं। मैं लिस्ट लेकर दुकान की तरफ चल पड़ा। मेरे मन में कोई खास बात नहीं थी। मैं बस जल्दी से सामान लेकर वापस आना चाहता था।
मैं उस दुकान पर जा ही रहा था कि तभी मेरी बहन ने माँ से कहा कि माँ मेरा वो भी खत्म हो गया है। माँ उसकी उस बात का मतलब तुरंत समझ गई। लेकिन मैं बिल्कुल भी नहीं समझा था। मेरी बहन की आवाज थोड़ी सी नीची थी। उसके चेहरे पर हल्की सी लालिमा आ गई थी। माँ ने सिर्फ एक बार उसे देखा और कुछ भी पूछे बिना सिर हिला दिया।
अब मेरी बहन ने उस लिस्ट को मेरे हाथ से ले लिया। उसने जल्दी से एक पेन निकाला। उसमें उसने बड़े अक्षरों में लिख दिया विस्पर पैकेट। उसने लिखते समय थोड़ा सा झुककर लिखा था। उसकी छाती थोड़ी सी आगे की तरफ झुकी हुई थी। लेकिन मैं उस समय कुछ भी नहीं सोच रहा था। वह लिस्ट मुझे दोबारा पकड़ा दी।
उसके बाद मैं दुकान पर सामान लेने चला गया। दुकान पर जाकर मैंने लिस्ट दिखाई। दुकानदार ने एक एक करके सामान निकालना शुरू कर दिया। उसने सब कुछ एक बड़े बैग में रख दिया। जब उसकी नजर विस्पर पैकेट पर पड़ी तो उसने उसे अलग से लिया। उसने उसे एक सादे कागज में अच्छे से लपेट दिया। उसने कागज को दोनों तरफ से मोड़कर उसे पूरी तरह छिपा दिया। फिर उसने उसे बैग के अंदर डाल दिया।
मैं वो सारे सामान खरीदकर ले आया। और तब मैंने एक बात पर गौर किया कि उस दुकनदार ने उस विस्पर को एक पेपर में लपेटकर मुझे दे दिया था।
फिर घर आते ही मेरी बहनें जिनका नाम पिंकी और सीता था, दोनों ने आकर उस विस्पर के पैकेट को मुझसे लेकर कहीं छुपाकर रख दिया था। उन्होंने उसे जल्दी से मेरे हाथ से ले लिया। फिर वे दोनों मिलकर अपनी कमरे की तरफ चली गईं। उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया और पैकेट को किसी सुरक्षित जगह पर रख दिया।
वो सब कुछ देखकर मेरे मन में यह बात खटकने लगी कि यह क्या चीज़ है जिसको इतने सम्भालकर रखा गया है और इसका क्या मतलब है। मेरे दिमाग में बार बार वही पेपर में लिपटा हुआ पैकेट घूम रहा था। मैं सोच रहा था कि इतनी गोपनीयता क्यों है। मेरी जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी।
तो मैंने उसी रात को अपनी बहन से पूछ लिया कि दीदी वो क्या चीज़ थी जो पेपर में थी और जिसको आपने उठाकर कहीं छुपाकर रख दिया है। चूत से खून निकला।
दोस्तों पहले तो दीदी मेरे मुंह से वो बात सुनकर एकदम घबरा गई। उनके चेहरे का रंग एकदम लाल हो गया। उनकी आँखें बड़ी हो गईं। उनका मुँह खुला रह गया। उनके बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि वो मेरे इस सवाल का क्या जवाब दे। उनके हाथ थोड़े से काँप रहे थे। उनकी सांसें अचानक तेज हो गई थीं। उनकी छाती ऊपर नीचे हो रही थी।
फिर वो थोड़ा सा शांत होकर कुछ सोचकर मुझसे बोली कि यह सब तेरे मतलब का नहीं है। तू अब जाकर पढ़ाई कर। लेकिन दीदी ने मुझे उसके बारे में कुछ भी नहीं बताया। उसकी आवाज थोड़ी काँप रही थी। उसने मेरी तरफ देखने से बच रही थी।
एक बार घर पर कोई नहीं था। तब मैंने रात के समय अपनी दोनों बहनों को चाय बनाकर दी। मैंने जानबूझकर उनसे दोबारा फिर से वही पुराना सवाल किया। मैंने चाय का कप उनके सामने रखा। फिर धीरे से पूछा।
फिर इतने में सीता ने मुझे बता दिया कि मेरा अभी पीरियड्स चल रहा है और मुझे इन दिनों में इसकी बहुत जरूरत होती है। उसने कहा कि चूत से खून निकलता है। इसलिए यह पैकेट जरूरी होता है। उसकी आवाज धीमी थी। उसने मेरी तरफ देखते हुए बताया।
फिर मैंने उससे कहा कि यह आप अपनी पेंटी में लगाती हो ना। तब मेरे मुंह से यह बात सुनकर वो एकदम से चकित हो गई। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उसका मुँह खुला रह गया। उसने कुछ सेकंड तक कुछ नहीं बोला। फिर वो थोड़ी देर सोचकर बोली कि हाँ।
उस दिन से हम भाई बहन एक दूसरे से बहुत ज्यादा घुल मिल गए थे। पिंकी इक्कीस साल की बहुत सुंदर हॉट सेक्सी लड़की थी। उसके बूब्स चौंतीस इंच के थे। वे भारी और गोल थे। वे कपड़ों के अंदर से भी साफ दिखते थे। जब वो चलती थी तो वे हल्के हल्के उछलते थे।
सीता की गांड बहुत मस्त थी। वह गोल और भरी हुई थी। जब वो बैठती थी तो उसकी गांड फैल जाती थी। लेकिन उसके बूब्स छोटे थे। वे टाइट और सुडौल थे। मुझे अपनी बहन पर सेक्स के विचार आने लगे थे।
एक बार सर्दियों के मौसम में हम सभी लोग हमारे गाँव गए हुए थे। और तभी मेरे पापा और मम्मी वहीं गाँव से और कहीं किसी रिश्तेदार से मिलने चले गए। उसके बाद बस में मेरी दोनों बहनें पिंकी और सीता अपने गाँव में ही रुक गईं। उस समय बहुत ज्यादा ठंड थी। गाँव में लाइट भी नहीं होने की वजह से बहुत ज्यादा अंधेरा था। ठंडी हवा चल रही थी। पेड़ों की पत्तियाँ सरसराती हुई आवाजें कर रही थीं।
फिर कुछ देर बाद पिंकी ने सीता के कान में कुछ कहा। लेकिन वो दोनों अब डर गईं। सीता बोली कि तू अकेली चली जा, मैं नहीं जाऊंगी। मुझे बहुत डर लगता है। उसकी आवाज काँप रही थी। उसके चेहरे पर डर साफ दिख रहा था।
फिर मैंने उनसे पूछा कि तुम लोगों के बीच में ऐसी क्या बात है। तब सीता ने मुझसे कहा कि पिंकी को टॉयलेट जाना है और उसको अंधेरा होने की वजह से डर लग रहा है। दोस्तों मैं आप लोगों को बता दूँ कि गाँव में हम लोगों का टॉयलेट कमरे से थोड़ी दूरी पर अलग हटकर था। वहाँ पर बहुत अंधेरा और सन्नाटा भी बड़ा था। ठंडी हवा वहाँ और भी तेज चलती थी।
फिर मैंने मन ही मन खुश होकर उस अच्छे मौके का फायदा उठाकर उसी समय पिंकी को मेरे साथ टॉयलेट चलने को कहा। पहले तो वो नहीं मानी। लेकिन बाद में वो मुझे अपने साथ ले गई। वो उस समय सलवार कमीज और उसके ऊपर एक स्वेटर पहने हुए थी। स्वेटर उसके शरीर पर चिपक गया था। उसकी छाती के उभार साफ दिख रहे थे। मैं अपने साथ में एक लैंप लेकर गया था। लैंप की रोशनी ठंडी रात में पीली पड़ रही थी।
उसने टॉयलेट के अंदर जाकर उसका दरवाजा लगा लिया। वो दरवाजा बहुत पुराना होने की वजह से उसमें बहुत सारे छोटे बड़े छेद भी थे। तभी मैंने एक छेद से अंदर झांककर देखा। तो पाया कि पिंकी अब अंदर खड़ी होकर अपनी सलवार का नाड़ा खोल रही थी। उसकी उंगलियां नाड़े पर फिसल रही थीं। उसने नाड़े को खींचा। फिर वो अपनी सलवार को नीचे करके अपनी लाल रंग की पेंटी को भी उसके साथ नीचे करके उसी समय नीचे बैठकर पेशाब करने लगी।
दोस्तों मैं आप सभी को बता दूं कि लड़कियाँ जब भी बैठकर पेशाब करती हैं तब एक बड़ी ही अजीब तरह की मादक आवाज आती है। और अब वैसी ही वो आवाज मेरे कानों में उसके पेशाब करने की वजह से गूंज रही थी। उसकी पेशाब की धार फर्श पर पड़कर छप छप की आवाज कर रही थी। वह आवाज ठंडी रात में और भी साफ सुनाई दे रही थी। उस आवाज को सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया। वह पैंट के अंदर फूलकर सख्त हो चुका था। वह जोर जोर से धड़क रहा था। मेरी सांसें तेज हो गई थीं। मेरी आँखें छेद से हट नहीं रही थीं।
पिंकी की लाल पेंटी उसकी जांघों पर लटक रही थी। उसकी गोरी त्वचा लैंप की रोशनी में चमक रही थी। उसकी गांड के गोल उभार साफ दिख रहे थे। जब वो बैठी थी तो उसकी पीठ थोड़ी सी झुकी हुई थी। उसके बाल कंधों पर गिर रहे थे। उसकी सांसें भी थोड़ी तेज चल रही थीं। पेशाब की धार अब और तेज हो गई थी। उसकी मादक छप छप की आवाज मेरे दिमाग में बस गई थी। मेरा लंड और भी कड़ा हो गया। वह दर्द करने लगा था।
फिर वो कुछ देर बाद बाहर आ गई। उसके बाद हम दोनों वापस कमरे में चले गए। और इस घटना के बाद मेरा जीवन बिल्कुल बदल गया था। अब मैं दिन रात पिंकी को अपने सपनों में लाकर उसको चोदने लगा था। और उसके मजे लेने लगा था। हर रात मेरे सपनों में वो नंगी लेटी होती थी। मैं उसके ऊपर चढ़ जाता था। मेरा लंड उसकी गीली चूत में घुस जाता था। मैं जोर जोर से धक्के मारता था। उसकी चौंतीस इंच की बूब्स मेरे हाथों में दब जाती थीं। मैं उसके निप्पल चूसता था। वो आहें भरती थी। आह्ह्ह… भाईया… और जोर से… वो चिल्लाती थी। उसका शरीर काँपता था। मैं उसके अंदर झड़ जाता था।
फिर कुछ दिनों के बाद एक बार फिर से मेरे पापा, मम्मी किसी शादी में बाहर गए हुए थे। इसलिए घर पर मैं पिंकी और सीता ही थे। तब मैंने मन ही मन में सोचा कि अपने सपनों को पूरा करने का बस यही एक अच्छा मौका है। वो गर्मियों का समय था। तब पिंकी एक स्कर्ट पहने हुए थी। उसका टॉप गर्मी की वजह से आने वाले पसीने से बिल्कुल भीग चुका था। और एक साइड से उसके बूब्स का आकार मुझे साफ नजर आ रहा था। उसके भारी बूब्स टॉप से चिपक गए थे। पसीने की वजह से कपड़ा पारदर्शी सा हो गया था।
रात को सोने के समय में पिंकी की अलमारी से सीता की एक पेंटी चुराकर ले आया। और उसको अपनी पेंट में रखकर मैं पिंकी और सीता के बीच में सो गया।
फिर रात को मैं अपना पांच इंच का लंड पेंट से बाहर निकालकर अब उसकी पेंटी से रगड़ने लगा था। और मैं उस समय बहुत जोश में था। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। उसका सिरा चमक रहा था। उसमें से थोड़ा सा पानी भी निकल रहा था। मैं उस पानी को पेंटी के कपड़े पर मल रहा था। पेंटी की महक मेरी नाक में भर रही थी। मेरा लंड उस नरम कपड़े पर रगड़ खा रहा था। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।
तभी इतने में सीता की नींद खुल गई। और मेरे हाथ में अपनी पेंटी को देखकर वो सबसे पहले उसने अपने स्कर्ट को छूकर देखा। तो उसको शायद यह लगा कि मैंने सपने में उसकी पेंटी को खोल दिया हो। वो बहुत घबरा गई। उसके चेहरे का रंग उड़ गया। उसकी आँखें बड़ी हो गईं। उसकी सांसें रुक सी गईं। वो मुझसे बोली कि यह तुम क्या कर रहे हो? तुम्हें क्या चाहिए? मैं सबको हल्ला करके बता दूंगी? तुम जाओ यहाँ से?
उसकी आवाज काँप रही थी। उसके हाथ थोड़े से काँप रहे थे। उसने अपनी स्कर्ट को दोनों हाथों से पकड़ रखा था। मैंने कहा कि हल्ला मत करो मेरी प्यारी बहन। यह तो जिंदगी का मज़ा है। अब हम छोटे बच्चे नहीं रहे। अब जवानी आ गई है और उसके कुछ गुण भी आ गए हैं। हमारी यह सब इच्छाएँ तो शादी के बाद पूरी होगी ही, लेकिन क्यों ना इसको थोड़ा सा हम आज ही करके देख लें?
पिंकी भी तब तक हम दोनों की वो बातें सुनकर उठ गई थी। और मुझे उसके चेहरे से साफ साफ पता चल रहा था कि उसको मेरा कहना एकदम ठीक लगा। उसके गाल लाल हो गए थे। उसकी आँखें मेरे लंड पर टिकी हुई थीं। वो अपनी निचली होंठ को दांतों से काट रही थी। वो भी अपने मन में मेरे जैसे ही विचार रखती है। इसलिए उसने अपनी तरफ से मेरी बातें मेरी उस सोच का बिल्कुल भी विरोध नहीं किया। और शायद वो भी अब मेरे साथ सेक्स के मज़े लेने के लिए तैयार थी।
फिर कुछ देर बाद ठीक वैसा ही हुआ। और मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके उन दोनों की स्कर्ट को तुरंत खोल दिया। और फिर उनके बाद टॉप को भी उतार दिया था। जिसकी वजह से अब हम तीनों उस समय केवल अंदरगार्मेंट्स में थे। और उसके बाद हमारे बीच में वो खेल शुरू हो गया।
जिसके मैं बहुत लंबे समय से सपने देखता आ रहा था। पिंकी मेरे सामने पूरी तरह ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। उसके 34 इंच के भारी बूब्स ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थे। सीता की गोल मस्त गांड पैंटी में बहुत आकर्षक लग रही थी। मेरा पांच इंच का लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था। उसका सिरा चमक रहा था।
मैंने पहले पिंकी को अपनी तरफ खींचा। मैंने उसके होंठों पर अपना मुंह रख दिया। हम दोनों गहरी चूमी लेने लगे। उसकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। मैंने उसकी ब्रा का हुक पीछे से खोला। ब्रा नीचे गिर गई। उसके गोरे और भारी बूब्स मेरे सामने आ गए। निप्पल पहले से ही कड़े हो चुके थे। मैंने एक बूब को मुंह में लिया। उसे चूसने लगा। पिंकी सिसकारियां लेने लगी।
“आह्ह्ह… भाईया… चूसो… और जोर से चूसो…” वो सिसकारियों के साथ बोली।
मैंने उसके दूसरे बूब को भी चूसा। फिर मैंने उसकी पैंटी को धीरे से नीचे खींचा। उसकी चूत सामने आ गई। वो पहली बार किसी के सामने खुली थी। थोड़ा सा खून भी निकल रहा था क्योंकि वो पीरियड्स पर थी। मैंने अपनी उंगली उसकी चूत पर फेरा। वो गीली और गर्म थी। खून और उसके रस का मिश्रण मेरी उंगली पर लग गया।
पिंकी ने आँखें बंद कर लीं। “उhhh… भाईया… दर्द हो रहा है… लेकिन मत रुको…”
मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी टांगें फैला दीं। मैं उसके ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड उसकी चूत के पास था। मैंने धीरे से दबाव दिया। उसकी कुंवारी चूत बहुत टाइट थी। लंड का सिरा अंदर घुसा तो पिंकी चीख पड़ी।
“आआआह्ह्ह… भाईया… दर्द… बहुत दर्द हो रहा है… रुक जाओ…”
मैंने रुककर उसे चूमा। उसके बूब्स दबाए। फिर धीरे धीरे और अंदर धकेला। हाइमन टूटा। खून निकला। मेरे लंड पर लाल रंग लग गया। पिंकी की आँखों में आँसू आ गए। लेकिन वो मेरी पीठ में नाखून गड़ा रही थी।
“ओह्ह्ह… भाईया… धीरे… प्लीज धीरे… मेरी चूत फट रही है…”
मैंने बहुत आराम से धीरे धीरे धक्के मारे। हर धक्के के साथ थोड़ा और अंदर जाता। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। खून और उसके रस से सब गीला हो गया था। सीता बगल में बैठी देख रही थी। उसकी सांसें तेज थीं।
कुछ देर बाद पिंकी को दर्द कम हुआ। वो मूव करने लगी। “आह्ह्ह… अब अच्छा लग रहा है… और अंदर… भाईया चोदो मुझे…”
मैंने रफ्तार बढ़ाई। उसके बूब्स उछल रहे थे। मैं उन्हें दबा रहा था। पिंकी चीख रही थी। “आआआह्ह्ह… हाँ… जोर से… मेरी चूत ले लो… भाईया… मैं तुम्हारी हूँ…”
फिर मैंने पोजीशन बदली। पिंकी को कुत्ते जैसी पोजीशन में कर दिया। उसकी गांड ऊपर उठा दी। मैं पीछे से अंदर घुसा। अब और गहराई से चोद रहा था। उसकी चूत से खून और रस निकल रहा था। सीता ने आगे आकर पिंकी के बूब्स चूसने शुरू कर दिए।
“उhhh… सीता… चूस… भाईया और जोर से चोद रहे हैं…” पिंकी कराह रही थी।
मैंने सीता को भी बुलाया। सीता ने अपनी पैंटी उतार दी। उसकी चूत भी थोड़ी गीली थी। मैंने सीता को पिंकी के ऊपर लिटा दिया। अब दोनों बहनें एक के ऊपर एक। मैंने सीता की चूत में लंड डाला। वो भी टाइट थी।
“आह्ह्ह… भाईया… मेरी भी चूत ले लो…” सीता चीखी।
मैं दोनों को बारी बारी चोद रहा था। कभी पिंकी की चूत, कभी सीता की। दोनों कराह रही थीं।
“ले… ले… मेरी चूत… भाईया… चोद… चोद…” पिंकी गंदी बातें करने लगी।
“हाँ… भाईया… हम दोनों तेरी चूतें हैं… भर दो हमारी चूतें…” सीता भी बोल रही थी।
रात भर चला। मैंने पिंकी को कई बार चोदा। मिशनरी, डॉगी, और वो मेरे ऊपर चढ़कर भी चोदी। उसकी चूत से खून लगातार निकल रहा था लेकिन दर्द कम हो गया था। वो मजे ले रही थी।
आखिर में जब मैं झड़ने वाला था तो मैंने सीता के मुंह में लंड डाल दिया।
“ले… मेरे वीर्य का स्वाद ले… बहन…”
मैं उसके मुंह में पूरा वीर्य छोड़ आया। सीता ने सब पी लिया।
उस रात के बाद हम तीनों धीरे धीरे अनाड़ी से उस खेल में खिलाड़ी बनते चले गए। हम तीनों ने जब भी जैसा भी हमें मौका मिला हमने उसका फायदा उठाकर चुदाई के पूरे पूरे मज़े लिए। और वो हर बार मेरे साथ चुदाई करके बहुत खुश हुई। और मैं उनको चोदकर मज़े लेने लगा था।