Naukrani sex story: हेलो देस्तो, मेरा नाम अमित है और आज मैं आपको अपने जीवन से जुड़ी हुई सच्ची घटना सुनाता हूं, जब मैंने अपने दोस्त की पार्टी में उसकी नौकरानी को चोदा। मुझे अपने दोस्त सुनील की पार्टी में सपरिवार निमंत्रण मिला और सुनील ने अपने जन्मदिन की पार्टी एक गेस्ट हाउस में रखी थी। मैं अपने परिवार के साथ वहां गया था। उस दिन मुझे ऑफिस में थोड़ा ज्यादा काम था और मेरी तबियत ठीक नहीं थी, लेकिन सुनील मेरा बचपन का खास दोस्त था और मेरे ना जाने पर बुरा मान जाता। इसलिए मुझे अपने परिवार के साथ सुनील के यहां जाना पड़ा।
मैं पार्टी में चला तो गया, लेकिन वहां जाने के बाद मेरी तबियत और भी ज्यादा बिगड़ गई और मुझे अपनी पत्नी को बताना पड़ा। हममें से किसी को अच्छा नहीं लग रहा था, लेकिन मजबूरी में मेरी पत्नी को सुनील से बात करनी पड़ी।
जब मेरी पत्नी ने सुनील को यह बात बताई, तो सुनील मेरे पास आ गया और मेरी तबियत देखने लगा। चूंकि सुनील एक डॉक्टर था, तो कोई चिंता वाली बात नहीं थी। सुनील का घर गेस्ट हाउस के पास ही था। तो उसने मुझे उसके घर चलने को कहा और मेरी पत्नी को पार्टी में ही रुकने के लिए बोला। मैं सुनील के साथ सुनील के घर आ गया और मुझे दवाई देकर सुनील ने अपनी नौकरानी को मेरा ख्याल रखने के लिए बोला। उसके बाद सुनील पार्टी में वापस चला गया और उसकी नौकरानी मेरे सिरहाने पर बैठ गई। मैंने थोड़ा आराम लेने के लिए बिजली बुझा दी और उसकी नौकरानी वहीं बैठी रही।
सुनील की नौकरानी ने मेरा बहुत ध्यान रखा और मेरे पैर दबाने लगी। थोड़ी देर मेरे पैर दबाने के बाद उसके हाथ ऊपर की तरफ आने लगे। मेरे अंदर एक अजीब एहसास होने लगा और शरीर में मस्ती भरी सिहरन होने लगी। मैं कुछ कह नहीं पा रहा था। सुनील की दी गई दवा काफी असरदार थी और अब मैं काफी अच्छा महसूस कर रहा था। उसकी नौकरानी के हाथ अब भी मेरे शरीर पर ही थे और वो मेरे शरीर पर ऊपर जा रहे थे। अब मुझे मेरे शरीर पर गुदगुद्दी महसूस होने लगी थी।
उसके हाथ अब तेजी से ऊपर जाने लगे और मेरे लंड तक पहुंच गए। वो मेरे लंड के ऊपर अपना हाथ सहलाने लगी। मेरी तबियत काफी हद तक संभल चुकी थी और मुझे कोई तकलीफ नहीं थी। इसलिए मुझे भी कामुक सा अनुभव होने लगा था और मेरे लंड ने खड़ा होना शुरू कर दिया था। थोड़ी ही देर में मेरा लंड एकदम कस चुका था और फूलकर टाइट हो चुका था। वो नौकरानी भी गरम होने लगी थी और उसने किसी परवाह ना करते हुए मेरे पैंट की जिप खोल दी। उसने अपना गर्म हाथ मेरे अंडरवीयर में डाल दिया।
मैं भी अंदर से बेकरार होने लगा था और बड़ी ही मुश्किल से अपने आप को रोक पा रहा था। उस नौकरानी में सेक्स की अजीब सी कशिश थी और उसने मेरी पैंट को नीचे खींचना शुरू कर दिया। मेरी पैंट की बेल्ट काफी कसी हुई थी, तो वो मेरी बेल्ट को खोल नहीं पा रही थी। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था और मैं भी उसकी मदद करने लगा। उसने मेरी बेल्ट उतारकर मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया। मैंने अपने हाथ उसके चुचों पर रख लिए और उसके बड़े, भरे-पूरे और खड़े चुचों को मस्ती में जोर-जोर से दबाने लगा। अब मैं इतना बेचैन हो चुका था, कि मुझे उसके कपड़े फाड़ने का मन करने लगा।
अँधेरे में, हम दोनों एक दूसरे को देख नहीं पा रहे थे और अभी तक हम दोनों ने एक दूसरे का चेहरा भी नहीं देखा था। मैं उस नौकरानी के सहारे से उठकर बैठ गया और हम दोनों एक दूसरे से लिपट गए। हम दोनों ने अंधेरे में ही, एक दूसरे के बचे-खुचे कपड़े उतारकर एक-दूसरे को पूरी तरह से नंगा कर दिया। अब हम दोनों ने नंगे शरीर एक दूसरे से लिपटे हुए थे और हम दोनों के होंठ आपस में जुड़े हुए थे और बड़ी ही कामुकता से हम एक दूसरे को चूस रहे थे। हमारी सांसें गरम थीं और बड़ी तेजी से चल रही थीं। आआअ…..ह्ह्ह्हह्ह…….ऊऊ……… लेकिन, हम दोनों सालों की प्यास बुझाने के लिए एक दूसरे के होंठों का बखूबी इस्तेमाल कर रहे थे।
अचानक से, उसने मेरे होंठों से अपने होंठों को हटा लिया और मुझे पलंग पर धक्का दे दिया और मेरे लंड पर हमला बोल दिया। जब मैं कुछ कर पाता, वो मेरे लंड को अपने मुंह में ले चुकी थी और बड़ी ही मस्ती में चूस रही थी। वो मेरे लंड को पूरा अपने गले में उतार चुकी थी और मुझे ऐसा लग रहा था, कि मैं उसका मुंह नहीं, उसकी चूत को चोद रहा हूं।
मेरे लंड को उसके मुंह में मजा आ रहा था, तो मैंने उसके मुंह को ही चोदने लगा। फिर मैंने उसकी चूत पर हाथ लगाया और उसकी चूत को अंधेरे में महसूस करने की कोशिश करने लगा। उसकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे। उसने मुझे अपनी चूत को चाटने को बोला, लेकिन मैंने उसे मना कर दिया, क्योंकि मुझे सिर्फ मेरी पत्नी की चूत को चाटने में ही मजा आता था। फिर, मुझे लगने लगा, कि अगर उसने ज्यादा देर तक मेरे लंड को चूसा, तो मैं अपना पानी छोड़ दूंगा। तो मैंने अपनी गांड को तेज हिलाना शुरू कर दिया। मेरी गांड तेज हिलते हुए देखकर वो समझ गई और उसने मेरा लंड अपने मुंह से निकालकर अपनी चूत के दरवाजे पर रख लिया।
उसने मेरा लंड अपनी चूत की घंटी पर लगाया और उसको जोर-जोर से रगड़ने लगी। ऊऊऊओ…अ……………एस…….वाह……ऊ….आया…हह…. उसके मुंह से बहुत ही कामुक आवाज निकल रही थी। उसकी आवाजें सुनकर मुझे भी जोश आ गया और मैंने जोर से अपने लंड उसकी चूत में घुसा दिया। वो नौकरानी, मेरा जोश देखकर संतुष्ट हो गई और अपनी गांड को हिलाकर मेरा साथ देने लगी। हम दोनों की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। आआआअ…..ऊऊऊ….ह्ह्ह्हह्ह….aaahhhhhh……
हम दोनों की कामुक आवाजें एक दूसरे की उत्तेजना बढ़ा रही थीं और हम दोनों अपनी गांड को हिलाकर एक दूसरे को जोर से चोद रहे थे और मुझे आज उसकी चूत को फाड़ने का मन कर रहा था। अब मेरी जवानी बाहर आने के लिए मचलने लगी और मुझे मेरे लंड से मेरा पानी बाहर आने लगा। मेरा मन कर रहा था, कि मैं अपने वीर्य से उसकी चूत को भर दूं और उसके चूत को अपने मस्त और गरम पानी से नहला दूं। लेकिन, मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था, इसलिए मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया और मैंने अपना लंड उसके शरीर पर लगा दिया। मेरा सारा गरम पानी नौकरानी के शरीर पर गिर गया और वो चिल्ला उठी। जब मेरा सारा पानी निकल गया, तो मेरा लंड सिकुड़कर बिलकुल छोटा सा हो गया।
ये मेरी जिंदगी का बड़ा अजीब सा किस्सा था, जहां मैंने अपने संभोग की साथी का चेहरा भी नहीं देखा था। उस नौकरानी को मैंने आज तक नहीं देखा। मेरा साथ कामक्रीड़ा के बाद, वो अपने को साफ करने के लिए बाथरूम चली गई और मैं भी उससे बिना मिले पार्टी में चला गया और परिवार के साथ वापस घर चला गया। उसके बाद, मैं सुनील के घर कभी नहीं गया और अगर मुझे उससे मिलना भी होता था, तो मैं उसके ऑफिस में ही चला जाता था। लेकिन, वो कामुक पल मुझे हमेशा याद आते हैं।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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