Jungle me chudai sex story: मां को चोदा कहानी के पिछले भाग मां की चूत बेटे से चुदी में मैंने बताया था कि कैसे मैंने अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में लिया था। उसने अपनी मां को चोदा था। उसके बाद वो बाहर चला गया था। मैं जानती थी कि वो अपने दोस्तों के साथ कहां पर होता था।
मुझे भी शॉपिंग करने के लिए बाहर जाना था इसलिए मैं भी घर का काम निपटा कर तैयार हो गई। जिस रास्ते पर प्रकाश होता था मेरा रास्ता भी वहीं से होकर गुजरता था। मैं अपने रास्ते पर निकल पड़ी। वो रास्ते में वहीं पर खड़ा हुआ था अपने दोस्तों के साथ।
जब मैं वापस आ रही थी तो मैंने उसको उस वक्त भी वहीं पर खड़े हुए देखा। वो मुझे घूर रहा था। उसकी नजरें मेरे शरीर पर घूम रही थीं और उसकी आंखों में वासना साफ दिख रही थी। फिर मैं वहां से घर आ गयी। घर आकर मुझे खाना बनाना था।
उसके बाद जब मैं खाना बना रही थी तो उसका मैसेज आया कि कुछ मीठा खाने के लिए लाता हूं तो मैंने बोल दिया कि ले आना। वो घर आया और मुझे गिलास में डाल कर कुछ दिया। मैंने पूछा- ये क्या है? वो बोला- ठंडाई है, पीकर देखो।
मैंने ठंडाई को पी लिया तो मुझे अच्छा महसूस हुआ। उसमें हल्का सा नशा हो रहा था। ठंडाई का स्वाद मीठा दूधिया था जिसमें केसर की खुशबू और बदाम के टुकड़े घुले हुए थे। पीते ही मेरे पेट में गर्माहट फैल गई। मेरे सिर में हल्का चक्कर सा आने लगा।
मेरी त्वचा संवेदनशील हो गई और मेरी चूत के अंदर एक हल्की सी खुजली और नमी महसूस होने लगी। उसके बाद हम दोनों ने साथ में खाना खाया। खाते समय उसकी नजरें बार-बार मेरे चूचों पर टिक जाती थीं। मैं भी चुपचाप उसके शरीर को देख रही थी।
फिर वो मेरे पास बैठ गया और मुझे फोन में सेक्स वीडियो दिखाने लगा। सेक्स वीडियो में मैंने देखा कि एक मोटे लंड वाला आदमी एक औरत की गांड में लंड डाल रहा था। उस मोटे लंड की नसें उभरी हुई थीं और वो औरत की गांड को पूरी तरह फैला रहा था। औरत की आहें और कराह सुनकर मेरी सांसें तेज हो गईं।
वो वीडियो देखते हुए हम दोनों ही गर्म हो गये थे। वीडियो की मोन आहें और चपचप की आवाजें सुनकर हमारी उत्तेजना बढ़ रही थी। उसके बाद उसने मेरे ब्लाउज को धीरे-धीरे उतार दिया। उसकी उंगलियां मेरी पीठ पर घूमती हुई ब्लाउज की हुक एक-एक करके खोल रही थीं।
ब्लाउज उतरते ही मेरे बड़े-बड़े चूचे बाहर आ गए। उनकी निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुकी थीं। उसने दोनों हाथों से मेरे चूचों को जोर से दबाना शुरू कर दिया। उसके अंगूठे मेरे निप्पल्स को घुमा रहे थे जिससे मैं सिहर उठी और मेरे मुंह से हल्की सी आह निकल गई।
फिर उसने मेरे चूचों को मुंह में लेना शुरू कर दिया। वह एक चूचे को पूरा मुंह में भरकर चूसता था। उसकी जीभ निप्पल के चारों ओर घूम रही थी। वह हल्का-हल्का काटता और फिर चाटता। दूसरे चूचे को हाथ से मसलता हुआ वह तेजी से सांस ले रहा था।
मैं भी उसके पैंट के ऊपर से उसके लंड को सहलाने लगी। उसका लंड सख्त होकर तना हुआ था और गर्मी महसूस हो रही थी। फिर मैंने उसके पैंट की चेन खोली और उसके लंड को बाहर निकाल लिया। मैंने उसके गर्म और मोटे लंड को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।
मेरी जीभ उसके लंड के सिरे पर घूम रही थी। मैं उसके अंडकोष को हाथ से सहला रही थी। उसका स्वाद नमकीन और मांसल था। मेरे मुंह में लार भर गई और चूसते समय चपचप की आवाजें आने लगीं। उसने मेरी साड़ी को ऊपर उठाया और मेरी चूत में उंगली डालनी शुरू कर दी।
उसकी उंगली मेरी चूत की भीगी हुई दीवारों को छूती हुई अंदर-बाहर हो रही थी। वह मेरी क्लिटोरिस को रगड़ रहा था। इससे मेरी चूत से रस निकलने लगा और मेरी जांघें कांपने लगीं। मैं कराह रही थी और मेरी सांसें भारी हो गई थीं।
उसके लंड को चूसते हुए वो बहुत गर्म हो गया और उसने मुझे बेड पर गिरा कर मेरी चूत मार ली। उसने मेरी टांगें चौड़ी करके फैलाईं। उसने अपना लंड मेरी चूत के मुंह पर रगड़ा। फिर धीरे-धीरे अंदर डाला।
उसका मोटा लंड मेरी चूत को फैलाता हुआ पूरी तरह अंदर चला गया। उसने दूसरी बार मेरी चूत में लंड दिया था। वो जोर-जोर से धक्के देने लगा। हर धक्के पर मेरे चूचे हिल रहे थे। मेरी चूत उसके लंड को कसकर पकड़ रही थी।
मैं जोर-जोर से कराह रही थी। मेरे चेहरे पर पसीना आ गया था। आखिर में उसने मेरी चूत में पानी गिरा कर उसे फिर से भर दिया। उसके वीर्य की गर्म धारें मेरी चूत के अंदर छूट रही थीं और कुछ बाहर भी निकल रहा था।
फिर वो उठ कर जाने लगा तो मैंने पूछा- कहां जा रहा है। वो बोला- बस कुछ काम है. तुम शाम को तैयार रहना. हमें शाम को कहीं पर जाना है। मैंने पूछा- कहां पर जाना है? वो बोला- वो सब शाम को पता लग जायेगा।
मैं शाम की तैयारी करने लगी। उसके बाद कब शाम हो गयी पता नहीं चला। शाम को वो गाड़ी लेकर आ गया। उसके हाथ में एक साड़ी थी। मैंने पूछा कि ये किसके लिए है? वो बोला- आज मैं तेरे साथ सुहागरात मनाऊंगा. तुम जल्दी से चलने की तैयारी करो।
मैंने पूछा- लेकिन हम कहां पर जा रहे हैं? वो बोला- तुम तैयार हो जाओ. बाकी सब पता चल जायेगा। मैं तैयार होने लगी। मैंने वो साड़ी ले ली और उसके साथ निकल पड़ी। हम लोग गाड़ी से जा रहे थे। घर से दूर 10 किलोमीटर पर एक जंगल था।
उसमें काफी अंधेरा था लेकिन जुगनुओं की रोशनी हो रही थी। बहुत घने पेड़ थे.
उसने गाड़ी को बीच जंगल में रोक दिया। फिर वो मेरी तरफ देख कर बोला- तुम जल्दी से तैयार हो जाओ।
मैंने उसकी आँखों में देखा तो उसकी नजरों में जल रही वासना साफ दिख रही थी। फिर वो मुझे गाड़ी से बाहर ले गया। बाहर निकलते ही ठंडी और सुगंधित जंगल की हवा मेरे शरीर को छू गई।
मैंने आस-पास देखा तो चारों ओर घना जंगल ही दिखाई दे रहा था। वहाँ किसी राजा-महाराजा की पुरानी शिकारगाह थी और पास में ही एक शांत तालाब था जिसके पानी पर चाँदनी चमक रही थी। चाँद भी निकल आया था और पूरी जगह को रौशन कर रहा था।
चारों तरफ जुगनू उड़ रहे थे जो अंधेरे में छोटी-छोटी जादुई रोशनियाँ बना रहे थे। हवा में पत्तियों की सरसराहट और तालाब के पानी की हल्की लहरों की आवाज आ रही थी। बहुत ही खूबसूरत और रोमांचक माहौल था।
वहाँ पर पहले से ही एक मोटी गद्दी बिछी हुई थी। साफ लग रहा था कि मेरा बेटा पहले ही यहाँ आकर अपनी माँ को चोदने की पूरी तैयारी कर चुका था।
मैं उसकी बात मानकर साड़ी पहनकर तैयार हो गई। मैंने वह सुंदर साड़ी लपेट ली जो उसने मेरे लिए लाई थी।
मैं वहाँ जाकर गद्दी पर बैठ गई। मैंने घूंघट निकाला हुआ था। उसने धीरे से मेरे पास आकर घूंघट उठाया और मुझे गहरी नजर से देखा।
वो बोला- मां तुम सांवली जरूर हो लेकिन बहुत सेक्सी दिखती हो।
मैंने शर्माते हुए उसके गालों को चूम लिया। घर से निकलने से पहले पी हुई ठंडाई का नशा अभी भी मेरे दिमाग और शरीर पर काम कर रहा था। मेरी चूत हल्की-हल्की गीली हो चुकी थी।
मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया। मैं उसके नरम और गर्म होंठों को जोर से चूस रही थी। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई और उसकी जीभ से उलझ गई।
मेरे बेटे ने मुझे अपनी मजबूत बाँहों में कसकर भर लिया। तुरंत ही उसने मेरे चूचों को दबाना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियाँ मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरे भरे हुए स्तनों को जोर-जोर से मसल रही थीं।
उसने मेरी साड़ी को खोलना शुरू किया जैसे मेरी पहली सुहागरात हो रही हो। उसने साड़ी की पल्लू को धीरे-धीरे खींचा, फिर कमर से साड़ी खोल दी और उसे नीचे सरका दिया।
फिर उसने मेरे ब्लाउज की हुक खोली और मेरे बड़े-बड़े चूचे बाहर निकाल दिए। आखिर में उसने पेटीकोट की नाड़ी खींचकर उसे भी उतार दिया।
उसने मुझे पूरी नंगी कर दिया।
वो मेरे चूचों को पीने लगा और उनको भींचते हुए उनका रस निचोड़ने लगा। उसने एक चूचे को पूरा मुंह में भरकर जोर-जोर से चूसना शुरू कर दिया। उसकी गर्म और नम जीभ मेरी सख्त निप्पल के चारों ओर तेजी से घूम रही थी। कभी-कभी वह हल्का सा काट लेता तो मीठी-मीठी दर्द भरी सिहरन मेरे पूरे शरीर में दौड़ जाती। दूसरे चूचे को वह अपने मजबूत हाथ से कसकर भींच रहा था जैसे उसमें से दूध निकालना चाहता हो। उसकी उंगलियों का दबाव बढ़ते ही मेरे स्तनों से हल्का सा रस निकलने लगा जिसे वह चाटकर पी जाता था।
मैंने भी उसके लंड को सहलाना शुरू कर दिया। मेरे बेटे ने मेरे लिए बहुत ही अच्छा सरप्राइज रखा हुआ था। मैं उसके लंड को मजे से सहला रही थी और वो मेरे चूचों को पीने में लगा हुआ था। चारों तरफ पूरा सन्नाटा था। बस हमारे चूमने-चाटने की गीली चपचप की आवाजें और हल्की आहें जंगल की खामोशी को तोड़ रही थीं।
फिर उसने मेरी चूत के अंदरूनी हिस्से को खींचना शुरू कर दिया। मेरी चूत मैंने दिन में ही साफ कर ली थी, सारे बाल हटा दिए थे इसलिए वह बिल्कुल चिकनी, गुलाबी और नरम दिख रही थी। वो मेरी चूत के लबों को अपनी उंगलियों से धीरे-धीरे सहला रहा था। मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं। मेरी सांसें तेज होने लगी थीं और मेरी छाती ऊपर-नीचे होने लगी थी।
उसके बाद मेरे बेटे ने मेरी चूत को दोनों हाथों से फैला दिया। उसकी अंगुलियां मेरी गीली पंखुड़ियों को पूरी तरह अलग कर रही थीं। वो मेरी चूत को चाटने लगा। मुझे गजब का मजा आने लगा। उसकी गर्म जीभ मेरी चूत के ऊपरी हिस्से पर बनी क्लिटोरिस को तेज-तेज रगड़ रही थी। फिर उसने अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर घुसा दी और जोर-जोर से चूसने लगा। मेरी चूत से निकलता रस उसके मुंह में जा रहा था। मैं पागल सी होने लगी थी। मेरी कमर अपने आप ऊपर उठ रही थी और मेरे मुंह से अनियंत्रित कराह निकल रही थी।
उसके बाद उसने तेल की एक शीशी निकाली। उसमें सरसों का तेल था। मैंने पूछा- ये किसलिए है।
वो बोला- मैं तेल लगा कर चूत में डालूंगा अपना लौड़ा।
उसने मेरी चूत के मुंह पर ठंडा और चिपचिपा सरसों का तेल लगाया। फिर उसने अपनी उंगली से मेरी चूत के अंदर भी तेल लगाने लगा। उंगली अंदर-बाहर होने से चूत में चिकनाहट भर गई और एक गर्म-सुनसनाहट महसूस होने लगी।
फिर उसने अपने लंड पर तेल लगाना शुरू कर दिया। उसने अपने लंड को तेल लगा कर एकदम से चिकना कर दिया। उसका लंड रात में चांदनी में भी चमक उठा था।
उसने मेरी टांगों को फैला दिया और मेरी बालों वाली चूत पर अपने लंड का सुपारा रख दिया। उसके बाद उसने हल्का सा जोर लगाया तो मेरे मुंह से हल्की सी आह निकल गई। उसके लंड का सुपारा मेरी चूत में चला गया था। चूंकि चूत पर तेल लगा था और उसके लंड पर भी तेल लगा था इसलिए लंड आसानी से चूत में घुस गया।
मुझे महसूस ऐसा हो रहा था कि उसके लंड का टोपा अंदर चला गया है लेकिन ऐसा वास्तव में नहीं था। वो मेरी चूत के साथ खेल रहा था। उसका लंड काफी बड़ा लग रहा था। मेरी चूत उसके लंड के सामने छोटी लग रही थी।
मेरे बेटे का लंड देख कर मैं खुश हो रही थी। उसका लंड सात इंच के करीब लग रहा था और उसकी मोटाई भी सुबह के बदले काफी ज्यादा दिख रही थी।
उसके बाद मेरे बेटे प्रकाश ने मेरी चूत को सहलाया और दोबारा से अपना लंड मेरी चूत पर लगा दिया। उसने अपने लंड को मेरी चुदासी हो चुकी चूत पर टिका कर एक हल्का सा धक्का दे दिया। अबकी बार उसने लंड चूत में घुसा दिया था। मुझे मजा आ गया।
फिर वो धक्के देने लगा और उसने पूरा लंड मेरी चूत में घुसा दिया। उसका मोटा और लंबा लंड मेरी तेल लगी चूत को पूरी तरह से फैलाता हुआ जड़ तक चला गया। हर धक्के के साथ मेरी चूत की दीवारें उसके लंड को कसकर जकड़ ले रही थीं। चपचप… चपचप… की तेज आवाजें जंगल की खामोशी में गूंजने लगीं।
उसके बाद वो मेरे होंठों को पीने लगा और मैं भी चुदाई में उसका साथ देने लगी। उसने मेरे होंठों को चूसते हुए अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी। मैं भी उसकी जीभ को जोर से चूस रही थी।
अंधेरे में जंगल में बेटे का लंड लेते हुए अलग ही रोमांच पैदा हो रहा था मेरे अंदर। चारों तरफ घने पेड़, जुगनुओं की रोशनी और ठंडी हवा के बीच अपनी बेटे से चुदवाने का यह पाप भरा सुख मुझे पागल कर रहा था। वो भी कुछ ज्यादा ही जोश में लग रहा था अपनी मां की चूत मारते हुए। उसने मेरी चूत में धक्के दे कर पूरा लंड जड़ तक घुसा दिया तो मुझे तकलीफ होने लगी और मैं कराहने लगी। मेरी चूत के अंदर से जलन और खिंचाव का एहसास हो रहा था।
उसने पूछा- दर्द कर रहा है क्या मेरा लंड? मैंने कराहते हुए कहा- हां, बहुत दर्द हो रहा है. सुबह से ये तीसरी चुदाई है. मेरी चूत शायद अंदर से छिल गई है।
अब उसने मेरी दोनों कलाईयों को पकड़ कर एक जोर से झटका मारा तो मैं तो जैसे पूरी तरह से कांप गई। अब उसने मेरे मम्मों के चूचकों को मुँह से पकड़ लिया और काटने लगा। वो मेरे चूचों को पीने लगा और धीरे धीरे नीचे से अपनी कमर को भी चलाने लगा। उसके धक्के पहले से ज्यादा ताकतवर लग रहे थे। मेरी चूत में उसका लंड अंदर तक घुसा हुआ था और हर धक्के पर मेरी पूरी देह हिल रही थी।
ऐसे ही चूत में लंड को धकेलते हुए अब वो मस्ती में मेरी चूत की चुदाई करने लगा। मुझे भी अब मजा आने लगा था। मेरे मुंह से कामुक आवाजें निकलने लगी थीं। उसकी स्पीड और तेज हो गई थी।
मैं बोली- थोड़ा आराम से कर बेटा… आह्ह … दर्द कर रहा है तेरा लौड़ा। वो बोला- साली रंडी, चुपचाप करके लेटी रह, तेरी चूत का मजा लेने दे मुझे. मैं आज इसकी चटनी बना दूंगा। इतना बोल कर वो फिर से जोर के धक्के देने लगा।
फिर उसने पूछा- मजा आ रहा है क्या मां? मैंने कहा- मुझे मां मत बोल कुत्ते, मुझे आरती कह कर बुला। वो बोला- कितना मजा आ रहा है आरती? मैंने कहा- बहुत मजा आ रहा है मेरे लाल। वो बोला- आइ लव यू आरती डार्लिंग. तुम कितनी सेक्सी और हॉट हो. तेरी चूत मारने में कमाल का आनंद मिल रहा है। मैंने पूछा- सुबह भी तुम्हें मजा आया था क्या? वो बोला- हां, सुबह तो बाथरूम में मैंने लौड़े पर साबुन लगा कर चूत में डाला था. इसलिए मजे से अंदर चला गया था। उसके बाद वो फिर से जोर के धक्के देने लगा।
मेरी चीख निकलने लगी। आह्ह … प्रकाश … चोद मुझे … आहह्ह चोद दे मेरी चूत को आईई … आह्हह … प्रकाश ने अपने होंठों को मेरे होंठों पर कस लिया और फिर तेजी के साथ मेरी चूत को चोदने लगा। उसकी लार मेरे मुंह में जा रही थी और मैं उसकी लार को खींच कर पी रही थी। उसके लंड से चुद कर मेरी प्यास बुझ रही थी। उसने अपनी कमर को झटके देते हुए पूरे लंड को जड़ तक पेलना शुरू कर दिया और हर धक्के पर उसकी गोलियां मेरी चूत से टकरा जाती थीं। मेरी चूत का बैंड बजने लगा था।
उसने पता नहीं कौन सा टॉनिक पी लिया था। उसका लंड मेरी चूत को फाड़ने पर तुला हुआ था। मगर दर्द के साथ ही मुझे मजा भी बहुत दे रहा था मेरे बेटे का लौड़ा। मैं उसके लंड के नीचे पड़ी हुई अंधेरे जंगल में खुले में चुद रही थी। ऐसी चुदाई मेरी जिंदगी में पहली बार हो रही थी। उसके हर धक्के जवाब मैं अपनी गांड को उठा कर दे रही थी।
कुछ देर ऐसे ही दोनों एक दूसरे से युद्ध करते रहे। उसके हर जोरदार धक्के से मेरी चूत के अंदर की दीवारें खिंच रही थीं और फिर कसकर उसके मोटे लंड को जकड़ ले रही थीं। चपचप चपचप की तेज आवाजें जंगल की सन्नाटे में दूर तक गूंज रही थीं। फिर उसने उठने के लिए कहा और अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगा दिया।
उसके बाद उसने मुझे घोड़ी बना दिया। मेरी दोनों घुटनों और हाथों को जमीन पर टिका दिया। उसने मेरी गांड में उंगली से तेल अंदर करना शुरू कर दिया। उसकी चिकनी उंगली मेरी गांड के छेद को धीरे-धीरे फैलाती हुई अंदर घुस गई। पहले तो मुझे तेज दर्द हुआ लेकिन थोड़ी ही देर में वह दर्द मीठे मजा में बदल गया।
उसकी उंगली अंदर-बाहर घूम रही थी और मेरी गांड की अंदरूनी दीवारों को चिकना बना रही थी। उसके बाद उसने लंड को मेरी गांड पर पटका और पीछे से मेरे चूचों को दबाते हुए उनको खींचने लगा। उसका लंड मेरी गांड पर रगड़ने लगा।
उसके बाद उसने अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर लगाया और मेरी गांड में अपना तेल लगा हुआ लंड पेल दिया। मेरी जान हलक में अटक गई। वो मेरी पीठ को काटने लगा और उसने पूरा लंड मेरी गांड में घुसा दिया। उसका मोटा सुपारा पहले मेरी गांड के टाइट छेद को फाड़ता हुआ अंदर गया फिर पूरा लंड जड़ तक चला गया।
मैं बोली- बात सुहागरात मनाने की हुई थी हरामी। गांड मारने की नहीं। वो बोला- सुहागरात में गांड भी मारी जाती है आरती। फिर उसने पूरा लंड मेरी गांड में ठोक कर मेरी गांड को चोदना शुरू कर दिया। उसके धक्के मेरी गांड में तेजी के साथ लगने लगे। हर धक्के पर उसकी गोलियां मेरी गांड से टकरातीं और पचाक पचाक की आवाज निकलती। मुझे भी मजा आने लगा।
पांच-सात मिनट तक उसने मेरी गांड को चोदा और फिर अपने लंड को बाहर निकाल लिया। उसके लंड में अभी भी उतना ही तनाव था। उसने दोबारा से मेरी चूत में लंड को पेल दिया और मेरे बालों को पकड़ कर मेरी चूत मारने लगा।
मुझे मजा आने लगा और मैं एकदम से झड़ने लगी। जंगल के सन्नाटे में चूत का पानी निकाल दिया मेरे बेटे के लंड ने। उसके बाद चुदाई में पच-पच की आवाज होने लगी। उसके धक्के अब और तेज हो गये।
दो मिनट तक मेरी चूत तो जोरदार तरीके से चोदने के बाद उसने मेरी चूत में ही अपना माल गिरा दिया और मेरे ऊपर हांफते हुए गिर गया। मैं भी थक गई थी। सुबह से उसने मेरी इतनी चुदाई कर दी थी कि मेरी हालत खराब हो गई थी। हम कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे और उसके बाद उठने लगे।
मेरी चूत और गांड में दर्द हो रहा था लेकिन मैं पूरी तरह से खुश हो गयी थी। मेरे जवान बेटे ने अपनी मां को चोदा। मेरी चूत की प्यास को बुझा दिया था। इस तरह से हम दोनों ने जंगल में सुहागरात मनाई।
उस दिन के बाद से हम दोनों चुदाई का मजा लेते रहते हैं। बेटे ने मां को चोदा। आपको यह कहानी पसंद आई या नहीं … कहानी पर राय दें। मुझे अपने बेटे से चुदाई करवाना बहुत पसंद है। मैं अक्सर उसके साथ इसी तरह मजे लेती रहती हूं।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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