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सौतेले बेटे का लंड मां की चूत में

Sauthali maa ki chudai sex story: मेरा नाम आरती है और मैं 42 साल की हूं। मेरे पति की मृत्यु हो चुकी है और मैं उनकी दूसरी पत्नी थी। उनकी पहली पत्नी से एक बेटा है जिसकी उम्र अब बीस साल के ऊपर होने वाली है। मैं उसे अपने बेटे की भांति मानती हूं और उसी के साथ ही रहती हूं। घर में सिर्फ हम दोनों का ही सहारा है। मैं हर रोज उसकी देखभाल करती हूं और उसे अपना बेटा समझकर प्यार देती हूं। मेरी जिंदगी में अब वही एकमात्र साथी है।
मैं काफी बोल्ड किस्म की औरत हूं। गाली हमेशा मेरे मुंह पर रहती है। मेरे बेटे को मुझसे बहुत डर लगता है क्योंकि जब मैं गुस्सा हो जाती हूं तो गंदी गालियां देती हूं। मेरी आवाज उस समय तेज और भरी हुई होती है जो कमरे में गूंज जाती है। उसकी आंखें डर से नीचे झुक जाती हैं और शरीर कांपने लगता है।
देखने में मैं सांवले रंग की हूं। मेरी त्वचा गहरे भूरे रंग की है जो पसीने से हमेशा चमकती रहती है। मेरे चूचे लटके हुए हैं। वे भारी और नरम हैं जिनकी वजह से वे नीचे की ओर झूलते रहते हैं और चलने पर हिलते हैं। हाइट 5.3 फीट है और मेरी कमर 32 की है। मेरे चूतड़ बहुत बड़े हैं और मेरी गांड 44 के साइज की है। वे मोटे और गोल हैं जो साड़ी के नीचे से भी उभरकर दिखाई देते हैं।
कई सालों से किसी ने भी मुझे चोदा नहीं था। मेरे शरीर की हर नस में आग सी जल रही थी। इसलिए मैं बहुत चिड़चिड़ी हो गई थी। मेरी चूत हमेशा सूखी और प्यासी रहती थी जिसकी वजह से नींद नहीं आती थी। मैं काफी निराश रहने लगी थी। रातों को अकेले लेटकर मैं बार बार अपने शरीर को छूती थी लेकिन संतोष नहीं मिलता था। कई बार मेरी नजर मेरे बेटे पर जाती थी लेकिन मैं कुछ कर नहीं पाती थी। मेरे मन में गहरी इच्छा जागती थी। सोचती थी कि बेटे का लंड लेकर चूत की प्यास बुझवा लूं। मेरी नजर में इस माँ बेटा सेक्स में कोई बुरी नहीं थी। वैसे भी तो वो मेरा सगा बेटा नहीं था।
फिर एक दिन ऐसे ही सुबह का वक्त था। कमरे में हल्की धूप आ रही थी और ठंडी हवा बह रही थी। मेरा बेटा प्रकाश तैयार होकर कहीं जाने की फिराक में था तो मैंने उसे टोक दिया। मैं बोली- कहां जा रहा है?
वो बोला- कहीं नहीं अम्मा।
मैंने पूछा- क्या प्लान है आज तेरा. बहुत ही तैयार होकर जा रहा है. गर्लफ्रेंड के पास जा रहा है क्या?
वो बोला- नहीं अम्मा, मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।
मैंने कहा- तो साले फिर क्या बुड्ढा होकर बनायेगा गर्लफ्रेंड? जब लंड खड़ा होना बंद हो जायेगा तेरा. अभी नहीं चोदेगा तो फिर कब चोदेगा?
वो मेरी तरफ हैरानी से देख रहा था। उसकी आंखें चौड़ी हो गई थीं और चेहरा लाल पड़ गया था। वह हक्का बक्का सा खड़ा था।
मैं बोली- ऐसे क्या देख रहा है हरामी, सही बोल रही हूं. गर्लफ्रेंड बना कर मजे करने का मन नहीं करता क्या तेरा?
उसके चेहरे पर अजीब से भाव थे। फिर मैंने अपनी साड़ी का पल्लू उसके सामने उतार दिया। साड़ी का पल्लू धीरे से मेरे कंधे से सरक गया। मेरे चूचे मेरे ब्लाउज में लटके हुए थे। ब्लाउज का पतला कपड़ा उनके भारीपन से तना हुआ था। मैं उसके पास जाकर बोली- देख, कैसे लटक गये हैं. तेरा लौड़ा भी लटक जायेगा एक दिन।
उसके बाद मैंने अपने ब्लाउज को उसके सामने ही उतार दिया और मेरे चूचे उसके सामने लटक कर नंगे हो गये।

वो मेरे चूचों को घूरने लगा। उसकी आंखें मेरे नंगे भारी और लटके हुए चूचों पर पूरी तरह जमी हुई थीं। वह बिना पलक झपकाए उन्हें घूर रहा था जैसे कभी ऐसा नजारा देखा ही न हो। मेरे सांवले रंग के बड़े चूचे उसके सामने लटक रहे थे जिनकी काली चूचियां सख्त होकर बाहर निकल आई थीं और हल्की हवा में धीरे धीरे हिल रही थीं। उसकी सांसें तेज हो गई थीं और चेहरा उत्तेजना से लाल पड़ गया था। मैं उसके उस घूरते चेहरे को देखकर अंदर से और भी गर्म महसूस कर रही थी।

मैं बोली- खड़ा हुआ या नहीं सूअर की औलाद? मेरी आवाज में गुस्सा और कामुकता दोनों का मिश्रण था। मैंने अपनी कमर को हल्का सा मोड़कर आगे बढ़ाया ताकि मेरे चूचे और ज्यादा उसके मुंह के पास लटक जाएं। मेरी आंखें उसकी आंखों में गड़ी हुई थीं।

वो मेरी तरफ हैरानी से देख रहा था। उसके चेहरे पर हैरानी शर्म और उत्तेजना के मिले जुले भाव साफ दिख रहे थे। उसके गाल लाल हो गए थे और होंठ थोड़े से खुले हुए थे।

मैंने कहा- गर्लफ्रेंड को नहीं चोदेगा तो क्या अपनी अम्मा को चोदेगा? मेरे शब्दों में साफ चुनौती थी। मैंने एक हाथ से अपने बाएं चूचे को हल्का सा उठाकर उसे और करीब दिखाया ताकि वह महसूस कर सके कि मैं कितनी गंभीर हूं।

अब भी उसने कुछ नहीं किया तो मैंने उसके चेहरे पर एक तमाचा मार दिया। तमाचे की तेज आवाज पूरे कमरे में गूंज गई। मेरी हथेली उसके बाएं गाल पर जोर से पड़ी और लाल निशान तुरंत उभर आया। वो गर्म हो गया। उसके शरीर में गुस्सा और उत्तेजना दोनों एक साथ उबल पड़े। उसने मेरे चूचों को दोनों हाथों से जोर से पकड़ लिया और उन्हें नीचे की तरफ खींच दिया।

मैं बोली- हरामजादे इनको खींचते नहीं दबाते हैं। मेरी आवाज अब और भारी और कामुक हो चुकी थी। मैंने उसे सीधे आंखों में देखते हुए कहा।

मैंने उसके मुंह पर एक और चमाट मार दिया। दूसरा चमाट पहले से भी तेज था। उसके दाएं गाल पर मेरी उंगलियों के निशान गहरे पड़ गए। उसके होंठ हिल गए और एक हल्की सी कराह निकली।

वो मेरे चूचों को अपने हाथ में लेकर मसलने लगा। अब उसका डर पूरी तरह टूट चुका था। उसके दोनों हाथ मेरे बड़े भारी चूचों को अच्छी तरह थाम चुके थे। उसकी उंगलियां मेरे नरम मांस में धंस गईं और वह उन्हें जोर जोर से मसलने लगा। उसके अंगूठे मेरी काली चूचियों को दबा रहे थे और उन्हें घुमा रहे थे। मेरे चूचे उसके हाथों में दबकर आकार बदल रहे थे। मुझे तेज सुखद दर्द और गहरी उत्तेजना महसूस हो रही थी। मेरी चूत गीली होने लगी थी और पसीना मेरी पीठ पर बहने लगा था।

मैंने उसको पकड़ लिया और उसको अपनी बांहों में भर लिया। मैंने अपनी दोनों बांहों को उसके गर्दन के चारों ओर लपेट लिया और उसे अपने नंगे सीने से चिपका लिया। मेरे भारी चूचे अब उसके सीने से पूरी तरह सट गए थे।

हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे। उसके गर्म होंठ मेरे होंठों से टकराए। पहले हल्का सा स्पर्श फिर गहरी किस शुरू हो गई। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई और उसकी जीभ से उलझने लगी। चूसने की चटचटाती आवाजें कमरे में भर गईं। लार एक दूसरे के मुंह में जा रही थी। वो दोनों हाथों से मेरे चूचों को दबा रहा था और मैं उसके सिर को पकड़ कर उसके होंठों को चूसने में लगी हुई थी।

कुछ देर तक वहीं खड़े होकर हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसते रहे। उसके गर्म और नरम होंठ मेरे होंठों से पूरी तरह चिपके हुए थे। हमारी जीभें एक दूसरे के मुंह में घुसकर उलझ रही थीं और चूसने की चटचटाती आवाजें पूरे कमरे में भर गई थीं। लार हमारे होंठों के कोनों से बहकर चिन पर गिर रही थी। मैंने अपनी आंखें बंद कर ली थीं और पूरी तरह उसकी जीभ के स्वाद में खो गई थी। बहुत दिनों बाद किसी मर्द के मुंह का यह गर्म और नम स्पर्श मिला था।

उसके होंठों को चूसते हुए मुझे मजा आने लगा था। मेरी सांसें तेज और भारी हो गई थीं। बहुत दिनों बाद किसी मर्द के होंठों को चूसने का मौका मिला था। मैं पागल सी होकर उसके निचले होंठ को चूस रही थी और ऊपरी होंठ को हल्का सा काट रही थी। मेरे बदन में एक झुरझुरी सी दौड़ रही थी। मैंने अपने हाथ को धीरे से नीचे ले जाकर उसके लंड को हाथ में ले लिया। उसके लंड को हाथ में लेकर मेरी चूत में एक झुरझुरी सी मचल गई।

अपने बेटे को गले लगा कर मैंने उसको बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया। मेरी दोनों बांहें उसकी पीठ के चारों ओर लिपटी हुई थीं और मैं उसे अपने नंगे सीने से कसकर भींच रही थी। वो भी मेरे चूचों को पीने लगा। उसके होंठ मेरे एक चूचे को पूरी तरह मुंह में ले ले रहे थे और वह जोर जोर से चूस रहा था। बहुत दिनों के बाद मेरे चूचों को एक मर्द के होंठों का स्पर्श मिला था। मैंने उसके मुंह को अपने चूचों में दबा दिया। वो मेरे निप्पलों को काटने लगा। मेरी चूत में मस्ती भरने लगी।

अब मैंने उसकी गांड को दबाना शुरू कर दिया। मेरी उंगलियां उसकी पैंट के ऊपर से उसके मोटे चूतड़ों को जोर से मसल रही थीं। वो मेरे चूचों को चूस रहा था और मैं उसकी गांड को दबा रही थी। उसके चूतड़ दबाने में बहुत मजा आ रहा था। मैं अपने पति के चूतड़ों से भी खेलती थी। मगर पति के जाने के बाद वो सुख मुझे नहीं मिल पाया था। मैंने उसकी पैंट ऊपर से उसकी गांड को खूब मसला और दबाया। उसका लंड मेरी चूत के आसपास लग रहा था और मैं मजे ले रही थी।

उसके बाद उसने मेरी साड़ी को उतारना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियां मेरी कमर के पास साड़ी की गांठ को खोल रही थीं। वो मेरी साड़ी को खोलने लगा और मैं उसकी शर्ट को उतारने लगी। उसने मेरी साड़ी को पूरी तरह खोल दिया और मैं केवल पेटीकोट में आ गई।

उसके बाद उसने मेरी चूचियों को हाथों में भर लिया और मैं अपने बेटे के लंड को पकड़ कर खेलने लगी। उसकी शर्ट को उतारने लगी। वो मेरी चूचियों से खेल रहा था।

मैंने उसकी शर्ट को उतार दिया। उसके बदन को चूमने लगी। उसकी गर्दन को चूमा। उसके गालों को काटने लगी। मैं भूखी कुतिया की तरह उसके बदन को चाट रही थी। उसकी बनियान को मैंने खींच कर फाड़ दिया तो उसने मेरी चूचियों को पकड़ कर खींच दिया। वो मेरी चूचियों पर तमाचे देने लगा।

अपने बेटे प्रकाश की छाती को नंगी कर दिया मैंने और फिर उसके जिस्म को चूमने लगी। वो भी मजा लेकर अपने निप्पल चुसवा रहा था। मैंने उसके पूरे बदन पर अपनी लार लगा दी। उसके निप्पलों को काटने में बहुत मजा आ रहा था मुझे। वो भी सिसकारियां लेने लगा था।

उसके बाद मैंने उसकी पैंट को खोलना शुरू कर दिया।

मैंने उसकी पैंट को खोल दिया। उसने लम्बे कट वाला अंडरवियर पहना हुआ था। उसके कच्छे के अंदर ही उसका लंड एकदम टाइट हो गया था। मैंने उसके लंड को हाथ में पकड़ कर उसके लंड को दबाना शुरू कर दिया। उसके लंड को हाथ में लेकर बहुत अच्छा लग रहा था।

अब मेरे बेटे प्रकाश ने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोलना शुरू कर दिया। उसकी उंगलियां मेरी कमर के पास पेटीकोट के नाड़े को पकड़कर धीरे धीरे खींच रही थीं। नाड़ा ढीला होते ही पेटीकोट का पतला कपड़ा मेरी मोटी जांघों से नीचे सरकने लगा और मेरी सांवली त्वचा हवा में खुलने लगी। उसने मेरे पेटीकोट को पूरी तरह खोल दिया और उसे मेरे पैरों तक उतार दिया। अब मैं उसके सामने पूरी तरह नंगी खड़ी थी। मेरी भारी गांड और प्यासी चूत बिना किसी कपड़े के उसके सामने थी।

उसके हाथ मेरी चूत को सहलाने लगे। उसकी गर्म हथेली मेरी चूत की ऊपरी हिस्से पर घूम रही थी और उंगलियां धीरे धीरे मेरी लबियों को छू रही थीं। मैं नीचे से कच्छी नहीं पहनती थी तो उसने एकदम से मेरी चूत को मसलना शुरू कर दिया। उसके मोटे हाथ मेरी नरम और गीली चूत की दोनों पत्तियों को जोर से दबा रहे थे। मेरी चूत में बहुत दिनों के बाद ऐसा गीलापन आया था। गर्म और चिपचिपा रस उसके उंगलियों पर लगने लगा था और मेरी जांघों पर बहने लगा था। वो मेरी टांगों के बीच में बैठ गया और मेरी चूत में झांक कर देखने लगा।

उसने अपने हाथों से मेरी चूत को खोल कर देखा। उसकी उंगलियों ने मेरी चूत की दोनों तरफ की लबिया को फैला दिया ताकि अंदर का गुलाबी और भीगा हिस्सा साफ दिखाई दे। मेरी चूत पूरी तरह सूजी हुई थी और उसका रस चमक रहा था।

मैं बोली- कुत्ते, देख क्या रहा है. इसको अपने लंड से शांत कर दे. बहुत दिनों से इसको लंड नहीं मिला है. तेरे पापा के जाने के बाद से ही प्यासी है ये मादरचोद. अपनी मां को चोद दे आज हरामी।

वो मेरी बात सुन कर उत्तेजित हो गया। उसकी सांसें तेज हो गईं और आंखों में भूख साफ दिखने लगी। उसने मुझे दोनों हाथों से कसकर उठाया और फिर बाथरूम में ले गया। वहां जाकर उसने शावर चला दिया। ठंडे पानी की तेज धार हमारे दोनों के बदन पर गिरने लगी। हम दोनों के बदन गीले हो गये। पानी हमारे नंगे शरीर पर बह रहा था और हम दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे।

उसने मेरी चूत में उंगली करनी शुरू कर दी। मेरी चूत में मजा आने लगा मुझे। वो मेरी चूत में दो उंगली डाल कर अंदर बाहर कर रहा था। उसकी उंगलियां मेरी चूत की अंदरूनी दीवारों को रगड़ रही थीं और हर बार गर्म पानी के साथ मेरा रस बाहर निकल रहा था। उसके बाद मैंने उसके गीले होंठों को चूसना शुरू कर दिया।

हम दोनों एक दूसरे के बदन को फिर से चूसने लगे। पानी की धार के नीचे हमारी जीभें एक दूसरे के मुंह में घुस रही थीं और लार पानी के साथ मिल रही थी। उसका लंड उसके कच्छे में एकदम टाइट होकर मेरी चूत में घुसने को हो रहा था। मैंने उसके गीले चूतड़ों को दबाया। उसके चूतड़ काफी गर्म थे। मुझे मर्दों के चूतड़ दबाने में बहुत मजा आता था। मगर प्रकाश ने अभी कच्छा पहना हुआ था।

मैंने उसके जिस्म को चूमा और फिर उसके पेट को चूमते हुए उसकी टांगों के बीच में बैठने लगी। पानी की तेज धार शावर से हमारे गीले बदन पर लगातार गिर रही थी और हर जगह से छोटी छोटी नदियां बह रही थीं। मैंने अपनी गर्म और नम जीभ से उसके सीने की मांसपेशियों को चाटा फिर धीरे धीरे नीचे उतरकर उसके पेट के हर इंच को चूमने लगी। उसके पेट की त्वचा सिकुड़ रही थी और पसीने के साथ पानी का मिश्रण मेरी जीभ पर चखने को मिल रहा था। मैं घुटनों के बल सरकती गई और अंत में उसकी फैली हुई टांगों के बीच में बैठ गई। मेरी सांवली गांड फर्श पर ठंडे पानी में भीग रही थी।

उसका लंड एक तरफ तना हुआ था। गीले अंडरवियर में किसी डंडे के जैसा दिख रहा था। मोटा और लंबा लंड कपड़े को पूरी तरह तान रहा था और उसकी नसें साफ उभरी हुई थीं। पानी की वजह से कपड़ा उसके लंड से चिपक गया था जिससे उसका आकार और भी साफ दिख रहा था। मैंने दोनों हाथों से उसके कच्छे को पकड़ कर नीचे खींच दिया। उसका लंड बाहर आ गया। वह सीधा खड़ा होकर मेरे मुंह के सामने झूल रहा था। उसके झाँट भी काफी काले और घने थे जो पूरे लंड के नीचे और अंडकोष पर फैले हुए थे।

मैंने कहा- इनको साफ क्यों नहीं करता है रे हरामी?

वो बोला- आज कर लूंगा रंडी।

उसके मुंह से गाली सुन कर मुझे अच्छा लगा। अब वो मर्दों वाली भाषा बोल रहा था। उसके शब्दों ने मेरी चूत को और भी गीला और प्यासा कर दिया।

उसके कच्छे को उतारने के बाद मैंने उसके लंड के टोपे को खोल दिया और उसके लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी। मैंने पहले उसके लंड के गोल और मोटे टोपे को अपनी गर्म जीभ से चारों तरफ चाटा फिर धीरे से पूरा मुंह में ले लिया। उसके मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं। आह्ह … मां … स्सस … मस्त लौड़ा चूसती हो तुम तो।

मैं बोली- कुत्ते बहुत दिनों के बाद लंड मिला है इसलिए चूस रही हूं।

अपने बेटे के लंड को चूसने में मुझे इतना मजा आ रहा था जितना कभी पति के लंड को चूसने में भी नहीं आया। मैं उसकी पूरी लंबाई मुंह में लेने की कोशिश कर रही थी। मेरी लार उसके लंड पर बह रही थी और मैं जोर जोर से चूस रही थी। उसके झाँट मेरी नाक को छू रहे थे और उनका नमकिन स्वाद मेरी जीभ पर फैल रहा था।

मैंने कई मिनट तक उसके लंड को चूसा तो उसने मुझे हटा दिया और फिर नीचे फर्श पर गिरा लिया। उसने मेरी टांगों को खोल दिया। मेरी चूत पर अपना मुंह लगा कर उसको चाटने लगा। मेरी चूत में आग सी लग गई। उसकी गर्म जीभ से मेरी चूत भड़क उठी। ऊपर से शावर का पानी गिर रहा था और नीचे से वो अपनी गर्म जीभ मेरी चूत में चला रहा था। उसने मेरी चूत को चाट चाट कर मुझे पागल कर दिया।

उसके बाद मैंने उसको दो चाटें मारते हुए कहा- साले अब चूसता ही रहेगा या चोदेगा भी इसको?

प्रकाश ने मेरी चूत में से जीभ को निकाल लिया और अपने लंड को हिलाने लगा। उसने मेरी टांगों को फैला कर अपना लंड मेरी चूत के ऊपर रख दिया और मेरे ऊपर लेट कर अपना लंड मेरी चूत में पेल दिया।

बेटे का लंड चूत में गया तो मुझे आनंद आने लगा। उसने पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया और धक्के देने लगा। मैं उसके होंठों को पीने लगी। वो भी अपनी मां की चूत को चोदने का मजा लेने लगा।

उसके धक्कों से चुदाई करवाते हुए मेरी चूत में मजा आ रहा था। उसके हर जोरदार धक्के से मेरी चूत की अंदरूनी दीवारें पूरी तरह फैल रही थीं और एक गहरी खुजली भरी उत्तेजना मेरी रीढ़ तक दौड़ रही थी। मैंने अपनी टांगों को उसकी पीठ पर रख लिया और वो तेजी के साथ पूरे लंड को मेरी चूत में पेलने लगा।

उसके धक्के काफी तेज थे। हर बार जब वह पूरा लंड अंदर तक ठेलता तो उसके अंडकोष मेरी गांड से टकराते और पच-पच की जोरदार आवाज पूरे बाथरूम में गूंज जाती। मेरे पति ने मेरी चुदाई इतने जबरदस्त तरीके से कभी नहीं की थी। रूम में पच-पच की आवाज होने लगी थी। मेरी चूत की प्यास बुझ रही थी। मेरी आंखें बंद होने लगी थी।

वो पूरी ताकत लगा कर मेरी चूत को चोद रहा था। उसके लंड को मैं अंदर तक महसूस कर रही थी। उसके लंड के झटके मुझे बहुत मजा दे रहे थे। हर धक्के के साथ मेरी चूत से गर्म और चिपचिपा रस बाहर निकलकर उसके लंड पर चढ़ रहा था और पानी की धार के साथ नीचे बह रहा था।

कई मिनट तक वो मेरी चूत को चोदता रहा। फिर उसने लंड को निकाल लिया। मगर मैं अभी प्यासी थी।

मैंने पूछा- क्या हुआ?

वो बोला- झुक जा रंडी. तेरी चूत को कुतिया बना कर चोदूंगा।

मैं उसकी बात सुनकर खुश हो गई।

उसके सामने मैं घोड़ी बन गई। मैंने दोनों हाथों को फर्श पर टिका दिया और अपनी मोटी गांड ऊपर उठा दी। मेरी चूत अब पीछे से पूरी तरह खुली हुई थी। उसने लंड पर थूक लगाया और मेरी चूत में लंड को फिर से पेल दिया। अब उसका लंड और अंदर तक जा रहा था। मैंने कहा- आह्ह … शाबाश मेरे बच्चे … ऐसी चुदाई करना कहां से सीख कर आया है तू?

वो बोला- इसमें सीखने वाली कौन सी बात है मां. चूत तो चुदने के लिए ही बनाई है।

इतना कह कर वो जोर से मेरी चूत में लंड को पेलने लगा।

लगभग पंद्रह मिनट तक उसने मेरी चूत को बजाया और फिर वो थकने लगा। शायद उसका वीर्य निकलने वाला था।

वो बोला- मेरा होने वाला है रंडी. कहां पर निकालूं अपने माल को?

मैं बोली- अंदर ही निकाल दे. बहुत दिनों से मेरी चूत ने लंड का माल नहीं पीया है।

वो तेजी के साथ धक्के लगाने लगा और दो मिनट के बाद ही उसकी गति धीमी पड़ने लगी। उसने मेरी चूत को खूब बजाया मगर मैं अभी भी नहीं झड़ी थी। उसके बाद वो मेरे ऊपर ही लेट गया। हम दोनों बुरी तरह से हांफ रहे थे। उसके बाद हम कुछ देर तक वहीं पर नंगे होकर पड़े रहे। प्रकाश उठ कर बाहर आ गया. मैं बाथरूम में नहाने लगी।

अब हम दोनों शांत हो गये थे। बाथरूम के फर्श पर हम दोनों नंगे लेटे हुए थे और हमारी सांसें धीरे धीरे सामान्य होने लगी थीं। मेरे बदन पर अभी भी पसीना और पानी की नमी चिपकी हुई थी। मेरी चूत में हल्का सा दर्द और गर्माहट महसूस हो रही थी लेकिन अंदर से एक गहरी तृप्ति का एहसास हो रहा था। कई सालों बाद पहली बार मेरी चूत को इतना संतोष मिला था। प्रकाश भी मेरे बगल में लेटा हुआ हांफ रहा था और उसकी छाती ऊपर नीचे हो रही थी। मेरे पूरे शरीर में एक हल्कापन था जैसे सारी चिड़चिड़ापन और निराशा धुल गई हो।

कुछ देर बाद मैं उठी और कपड़े पहनने लगी। मैंने अपनी साड़ी और ब्लाउज को ठीक किया। मेरे चूचे अभी भी थोड़े सूजे हुए थे और निप्पलों पर उसके दांतों के हल्के निशान थे। मैंने आईने में खुद को देखा तो मेरे चेहरे पर एक अनोखी चमक थी। मैंने कपड़े पहन कर घर का काम निपटाया और तब तक मेरा बेटा भी तैयार हो गया। वो थोड़ी देर में बाहर चला गया।

मैं आज बहुत खुश थी। मेरे मन में एक नई ऊर्जा और संतोष भरा हुआ था। कई सालों से जो खालीपन और चिड़चिड़ापन था वो आज दूर हो गया लग रहा था। मुझे फिर शॉपिंग करने के लिए जाना था तो मैंने भी बाजार जाने के लिए सोचा। मैं ये भी जानती थी कि प्रकाश अपने दोस्तों के साथ कहां पर होता है। वो हमेशा ही अपने दोस्तों के साथ नाके पर खड़ा रहता था। मैं जानती थी वो वहीं पर मिलेगा और मेरा रास्ता भी वहीं से होकर जाता था। मैं अपने रास्ते पर निकल पड़ी।

माँ बेटा सेक्स कहानी के अगले भाग में बताऊंगी कि मेरे बेटे ने मेरे साथ और क्या क्या किया। कहानी के बारे में मुझे मैसेज करना चाहें तो कर सकते हैं। अपनी राय कमेंट के जरिये भी बता सकते हैं।

कहानी का अगला भाग: बेटे ने जंगल में मां को चोदा तालाब के किनारे

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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