पहले चाची और फिर उनकी बेटी को चोदा

Chachi ki chudai sex story, Chachi ki beti ki chudai sex story, Chacheri bahan threesome sex story: अपने पेरैंटस के गुज़र जाने के बाद मैं अपने चाचा, चाची और उनकी बेटी (मेरी कज़िन बहन) के साथ उनके बंगले में रहता था।

मेरे चाचा बहुत ही कामयाब बिज़नेस मैन थे। घर में हर तरह के सुख-साधन और लग्ज़री मौजूद थी। मेरी उम्र उस समय अठारह साल की थी और मेरी चाची बयालीस साल की थी और उनकी बेटी मुझसे एक साल बड़ी थी और अभी-अभी बीस साल पूरे कर चुकी थी और कॉलेज में पढ़ रही थी।

आपको बता दूँ की मेरी मीना चाची का गदराया बदन बहुत ही मादक और मस्त था। उसकी चूचियाँ छत्तीस साइज़ की थीं, गोल, भरी हुई, इतनी मुलायम कि सिर्फ देखने से ही हाथों में लेने की तलब लग जाती थी। वह हमेशा छत्तीस-सी साइज़ की ब्रा पहनती थी जो उसके उभरे हुए स्तनों को और भी उभार कर दिखाती थी। पतली कमर के नीचे उसके मोटे-मोटे, गोल, नरम चूतड़ अढ़तीस साइज़ के थे, इतने भरे हुए और लुभावने कि हर कदम पर हिलते हुए किसी को भी पागल कर सकते थे। जिसको देख के किसी का भी लंड तन जाये। चाची की शक्ल-सूरत और जिस्म भी बिल्कुल नीता अंबानी जैसा था, वही आकर्षक चेहरा, गहरी आँखें, मोटे होंठ और वो कामुक मुस्कान जो सीधे दिल में उतर जाती थी।

मेरी कज़िन बहन, सोनिया जो बस जवान ही हुई थी, एकदम अपनी माँ की तरह मस्त दिखने लगी थी। उसकी जवान देह में वही मादकता झलकने लगी थी। जब वो छोटी स्कर्ट पहनती थी तो मैं हमेशा कोशिश करके उसके ठीक सामने बैठ जाता था ताकि उसकी चिकनी, गोरी, मखमली जाँघें पूरी तरह नजर आएँ। स्कर्ट के नीचे उसकी तंग पैंटी में कसी हुई चूत का उभार साफ दिखता था, वो हल्का सा उठा हुआ गोला जो मेरी नजरों को चुरा लेता था। उसके गोल, भरे हुए चूतड़ स्कर्ट के नीचे से और भी उभर कर दिखते थे, हर हलचल में हिलते हुए मुझे बेचैन कर देते थे। मैं हमेशा इस फिराक में रहता था की मुझे एक बार अपनी मीना चाची और सोनिया दोनों को पूरी नंगी देखने को मिल जायें, उनकी चमकती त्वचा, उनके उभरे हुए निप्पल, उनकी गीली चूत सब कुछ बिना किसी कपड़े के।

मीना चाची शिक्षित और काफी आधुनिक थी और किट्टी पार्टियों और कुछ चैरिटबल संस्थाओं से भी जुड़ी हुई थी। शराब-सिगरेट का सेवन भी करती थी। मीना चाची ज्यादातर साड़ी या सलवार-सूट पहनती थी लेकिन कभी-कभार जींस, स्कर्ट वगैरह जैसे वेस्टर्न कपड़े भी पहनती थी। जब शाम को चाची साड़ी में बैठ कर व्हिस्की पीती थी और स्मोक करती थी तो मेरा लंड कस कर अकड़ जाता था।

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दोस्तों आपने कभी साड़ी वाली औरत को व्हिस्की और सिगरेट पीते हुए देखा है की नहीं? इतना मस्त सीन होता है की इच्छा करती है की वहीं साली की साड़ी उठा के लंड पेल दें। वो गहरे लाल होंठों से व्हिस्की का घूँट लेती थीं, गिलास को धीरे-धीरे होंठों से छूकर, फिर सिगरेट को होंठों के बीच दबाकर गहरी कश खींचती थीं। धुएँ का गुबार उनके मुँह से निकलता हुआ उनके चेहरे के सामने फैल जाता था और उनकी साड़ी का पल्लू हल्का सा सरक जाता था जिससे उनकी गहरी दरार और ब्रा का किनारा झलक जाता था। मैं उन दोनों माँ-बेटी को सिर्फ देख कर ही मस्त हो जाता था और बाथरूम में जा कर उनकी उतरी हुई ब्रा और पैंटी, जिस में से उनकी मस्त चूत और चूची की मादक खुशबू आती थी और कभी उनकी ऊँची ऐड़ी वाली सैंडल जिन में से उनके पैरों के पसीने की तीखी-मीठी महक आती थी, खूब सूँघता हुआ मुठ मारता था। मीना चाची की पैंटी में हमेशा मादक सूगंध आती थी, उनकी पसीने और चूत के रस की मिली-जुली गंध जो मेरे दिमाग को चकरा देती थी।

सोनिया की पैंटी में उसकी ताजी, जवान चूत की तीखी, कच्ची खुशबू होती थी जो मेरे नथुनों में भर जाती थी। मैं उनकी ब्रा के कप को जीभ से चाटता था जहाँ उनके निप्पल दबे होते थे, पैंटी के बीच वाली पट्टी को मुँह में लेकर उनकी चूत के रस का स्वाद चखता था और सैंडल के अंदरूनी हिस्से को जीभ फेरता हुआ उनके पैरों की गंध को सोखता था, फिर अपना सख्त लंड हाथ में लेकर जोर-जोर से हिलाता था और उनकी खुशबू में डूब कर झड़ जाता था।

एक दिन की बात है, मेरा लंड रात को अचानक खड़ा हो गया और मेरी इच्छा हुई की मैं मीना चाची के बाथरूम में जा कर उनकी पैंटी और ब्रा सूँघ कर मुठ मारूँ।

मैं चुप-चाप बाथरूम की ओर जाने लगा तो मुझे मीना चाची के कमरे से हल्की सी लाइट और कुछ आवाज़ सुनाई दी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैं धीरे से उनके दरवाजे के पास पहुँचा और कान लगा कर सुनने लगा। अंदर मीना चाची चुदाई में पूरी तरह मस्त हो चुकी थीं। उनकी आवाज़ में वो मादकता थी जो कभी मैंने नहीं सुनी थी। वो चाचा को बहनचोद और मादरचोद की गालियाँ दे रही थीं। इतनी सफिस्टिकेटिड, पढ़ी-लिखी, हमेशा शालीन दिखने वाली चाची के मुँह से ऐसी गंदी, रसीली गालियाँ निकल रही थीं कि मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था। मेरे कान गर्म हो गए, सांसें तेज़ हो गईं और लंड पहले से कहीं ज्यादा सख्त होकर फड़फड़ा उठा।

मुझसे रहा नहीं गया। मैंने सोचा यह मौका है जब मैं मीना चाची को पूरा नंगा और चुदते हुए देख सकूँगा। मैं तुरंत बालकोनी की ओर मुड़ा क्योंकि मुझे पता था वहाँ की खिड़की पर पर्दा नहीं है और वहाँ से पूरा बिस्तर साफ दिखाई देगा। मैं चुपचाप, दबे पैरों से बालकोनी में घुसा। जैसे ही मैंने अंदर झाँका, मेरी साँस रुक सी गई। मीना चाची अपनी दोनों टाँगों को पूरी तरह फैला कर लेटी हुई थीं। उनकी साड़ी कमर तक सरक चुकी थी, ब्लाउज़ खुला हुआ था और ब्रा ऊपर धकेली हुई थी। उनकी भरी हुई छत्तीस साइज़ की चूचियाँ हिल रही थीं, गहरे गुलाबी निप्पल सख्त और उभरे हुए। एक हाथ में सिगरेट थी, वो गहरी कश खींच रही थीं और धुआँ उनके होंठों से निकलकर हवा में घुल रहा था। दूसरी तरफ चाचा उनके बीच में थे, उनका मोटा लंड मीना चाची की चूत में पूरी तरह भीड़ा हुआ था। चाची की चूत की होंठें लाल और गीली थीं, चाचा के हर धक्के पर चूत से चटक-चटक की आवाज़ निकल रही थी और उनका रस उनकी जाँघों पर बह रहा था।

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मीना चाची नशे और कामुकता में डूबी हुई थीं और गालियों के साथ-साथ चीख रही थीं, “मादरचोद कभी तो मेरी चूत को ठंडा करा कर, बस भोंसड़ी वाले अपना लंड डाल कर अपने आप को ठंडा कर लेता है। आज मादरचोद अगर तूने मेरी चूत को ठंडा नहीं किया तो मैं बज़ार में रंडी बन कर चुदवाऊँगी।” उनकी आवाज़ में इतनी भूख थी कि मेरे शरीर में आग लग गई।

चाचा भी पूरी ताकत से धक्के मार रहे थे, पसीने से उनका बदन चमक रहा था। वो हाँफते हुए बोले, “साली रंडी कितना चोदता हूँ तुझे। पर तेरी चूत की प्यास ही खत्म नहीं होती और तेरा बदन इतना मस्त है की चार पाँच शॉट में ही मेरा लंड झड़ जाता है।” और इतना बोलते-बोलते ही चाचा का शरीर अकड़ गया, उनका लंड मीना चाची की चूत के अंदर गहराई तक धँस गया और वो जोर-जोर से झड़ने लगे। गर्म वीर्य की धारें चाची की चूत में भरने लगीं। चाचा लुड़क कर चाची के बगल में गिर पड़े, हाँफते हुए।

मीना चाची अभी भी अधूरी थीं। वो सिगरेट का एक और कश लेकर बोलीं, “पता नहीं कब मेरी चूत की प्यास ठंडी होगी, ये गाँडू तो मुझे ठंडा ही नहीं कर पाता है।” उनकी चूत अभी भी फड़फड़ा रही थी, चाचा का वीर्य बाहर निकलकर उनकी जाँघों पर बह रहा था।

चाचा और चाची को इस तरह गंदी भाषा में गालियाँ देते हुए बातें करते सुनकर मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया था। मेरी बड़ी इच्छा हुई कि मैं अंदर जाऊँ और मीना चाची को पकड़ कर खूब चोदूँ, उनकी गीली चूत में अपना लंड डालकर उनकी वो प्यास बुझाऊँ जो चाचा नहीं बुझा पा रहे थे।

मैं अपना लंड हाथ में पकड़ कर वापस अपने कमरे की ओर चल दिया। रास्ते में सोनिया का कमरा पड़ता था। चाची की चुदाई देखने के बाद मेरा लंड फड़फड़ा रहा था, सिर चकरा रहा था। पता नहीं मैं किस ख्याल में सोनिया के कमरे में घुस गया। मुझे जब ध्यान आया तो मैंने अपने आप को सोनिया के बिस्तर के पास खड़ा पाया। सोनिया इस समय अपनी पतली नाईटी में आराम से सो रही थी जो उसके मोटे चूतड़ों को सिर्फ आधा ढके हुए थी। नाईटी ऊपर सरकी हुई थी, उसकी गोरी, चिकनी जाँघें पूरी तरह नंगी थीं और पैंटी की पतली पट्टी उसके चूतड़ों के बीच में धँसी हुई थी।

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मेरे सामने अभी भी मीना चाची की चुदाई का सीन चल रहा था और इसी गर्मी में मैंने देखा कि सोनिया की मस्त चिकनी-चिकनी टाँगें और फुले हुए चूतड़ जो उसने पैंटी में छुपाये हुए थे। मुझ से रहा नहीं गया और मैं बिस्तर के साइड में हो कर उसकी चिकनी टाँगों को अपने होठों से चूमने लगा। मेरे होंठ उसकी मुलायम, गर्म त्वचा पर सरक रहे थे। मैं धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ा और उसकी गाँड की दरार में अपने होंठ और नाक रख दी। जिस चूतड़ की खुशबू मैं उनकी पैंटी में सूँघता और चाटता था, वही चूतड़ आज मैं असली में सूँघ रहा था। उनकी हल्की पसीने वाली, मादक गंध मेरे नथुनों में भर गई। मैंने जीभ निकालकर धीरे से उस दरार को चाटा, पैंटी की पट्टी को दाँतों से खींचकर थोड़ा सा हटाया और अपनी नाक को उनकी गर्म, नरम गुदा और चूत की शुरुआत पर रगड़ा। मेरी साँसें तेज़ हो गईं, लंड कपड़ों के अंदर तड़प रहा था। इतने में सोनिया कुछ कुनमुनाई और मैं डर के मारे चुप चाप कमरे से निकल गया।

उसके बाद मैं बाथरूम गया और मीना चाची की पैंटी और ब्रा अपने रूम में ला कर सूँघते और चाटते हुए खूब मुठ मारी, और मैंने इरादा किया की एक बार मैं मीना चाची के साथ ट्राई तो मार के देखूँ, क्या पता, प्यासी चूत है, अपने आप ही मुझे चोदने को दे दे। मुठ मारते-मारते मैं मीना चाची की ब्रा अपने होंठों से लगा कर सो गया।

अगली सुबह में मीना चाची ने मुझे झकझोड़ के जगाया और बोली, “सुनील आज स्कूल क्यों नहीं गया? देख सुबह के दस बज रहे हैं, तेरे चाचा को तो आज सुबह महीने भर के लिये युरोप और अमेरिका जाना था, वो तो कभी के चले भी गये और सोनिया भी अपनी कालेज ट्रिप के साथ जयपुर चली गई है, मैं भी थक रही हूँ, तू नहा धो के नाश्ता कर ले तो मैं भी थोड़ा लेटूँगी।”

मैंने जल्दी से उठ कर सबसे पहले मीना चाची की पैंटी और ब्रा ढूँढी पर मुझे कहीं नहीं मिली। मेरी तो डर के मारे सिट्टी पिट्टी गुम हो गई, और मैं सोचने लगा की अगर चाची को पता पड़ गया तो चाची मेरी खूब पिटाई करेंगी।

मैं चुपचाप अपने सारे काम पूरे करके टीवी देखने बैठ गया और उधर चाची मुझे नाश्ता देकर अंदर जा कर लेट गयीं। थोड़ी देर बाद आवाज दे कर मुझे अपने कमरे में बुलाया, और बोली “सुनील मेरा जरा बदन दबा दे।”

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उस समय मीना चाची सिर्फ़ ब्लाऊज़ और पेटीकोट में थीं और कहने के बाद पेट के बल हो कर उल्टी लेट गई। मीना चाची ने अपने ब्लाऊज़ का सिर्फ़ एक हुक छोड़ कर सारे हुक खोले हुए थे और अपना पेटीकोट भी कुछ ज्यादा ही नीचे कर के बाँधा हुआ था जिस से उनकी गाँड की गहरी, गर्म दरार साफ नज़र आ रही थी, वो मोटी, मुलायम गुदगुदी वाली चूतड़ों की बीच वाली लकीर जो मेरी साँसें रोक दे रही थी।

मेरे सामने वो चूतड़ थे जिसे सिर्फ़ देख कर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था और मीना चाची तो अपना पूरा बदन मेरे को दिखाते हुए मसलने को कह रही थी। मैं बिना देर करे चुपचाप चाची के साईड में बैठ कर धीरे-धीरे उनका बदन दबाने लगा, पहले उनके कंधों को, फिर पीठ की चिकनी त्वचा को, हर दबाव के साथ उनकी गर्माहट मेरे हथेलियों में उतर रही थी। उनके चिकने बदन को छूते ही मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया, पैंट के अंदर सख्त होकर दर्द देने लगा और मैं डरने लगा की कहीं मीना चाची को मेरे उभरे हुए लंड का अहसास न हो जाये। जब मैंने पेटीकोट के ऊपर से मीना चाची के चूतड़ दबाये तो लंड एक दम मस्त हो गया, वो गोल, भरे हुए गद्दे जैसे नरम लेकिन अंदर से ठोस मांस मेरी उँगलियों के नीचे दबते हुए हिल रहे थे। पेटीकोट के पतले कपड़े के नीचे से उनकी गर्मी और मुलायमियत सीधी मेरे हाथों तक पहुँच रही थी, मैंने हल्के-हल्के गोल-गोल दबाया, फिर थोड़ा जोर से मसल लिया, हर बार उनकी चूतड़ों की मांसलता मेरे लंड को और सख्त कर देती थी।

थोड़ी देर बाद चाची बोली, “अरे सुनील, जरा तेल लगा कर जोर से जरा अच्छी तरह से मालिश कर।”

मैंने कहा, “चाची तेल से आपका ब्लाऊज़ खराब हो जायेगा, आप अपना ब्लाऊज़ खोल दो।”

मीना चाची बोली, “सुनील मैं तो लेटी हूँ, तू मेरे पीछे से ब्लाऊज के हुक खोल के साईड में कर दे।”

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मैं जिस मीना चाची को नंगा देखने को तरसता था और जिसकी ब्रा सूँघता था, मैंने बड़े धीरे-धीरे से उनके ब्लाऊज के हुक खोले, हर हुक खुलने के साथ उनकी पीठ की चिकनी, गर्म त्वचा और ज्यादा नजर आने लगी। अब चाची की नंगी पीठ पर सिर्फ़ काली ब्रा के पतले स्ट्रैप दिख रहे थे, जो उनकी गोरी पीठ पर काले रंग की लकीरें खींच रहे थे। मैंने थोड़ा सा तेल अपने हाथों पर लेकर चाची की पीठ पर मलना चालू किया, तेल की ठंडक पहले लगी फिर उनकी शरीर की गर्मी से तेल गर्म होकर फिसलने लगा, मेरी उँगलियाँ उनकी रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ ऊपर-नीचे सरक रही थीं, कंधों से कमर तक हर इंच को दबाते हुए। पर बार-बार चाची की काली ब्रा के स्ट्रैप दिक्कत दे रहे थे, तेल उन पर चिपक रहा था और मालिश में रुकावट आ रही थी।

मैंने मीना चाची को बोला कि “चाची आपकी पूरी ब्रा खराब हो रही है और मालिश करने में भी दिक्कत हो रही है।”

तब मीना चाची बोली कि “तू मेरे ब्रा के स्ट्रैप खोल दे।”

मीना चाची के मुँह से यह सुन कर मेरा लंड तो झटके लेने लगा, दिल की धड़कनें तेज हो गईं और हाथ काँपने लगे। मैंने भी बड़े ही प्यार से, धीरे-धीरे ब्रा के पीछे के हुक खोल दिये, हर हुक खुलने के साथ ब्रा ढीली पड़ती गई और उनकी भरी हुई चूचियाँ नीचे की ओर थोड़ा सा ढीली होकर बिस्तर पर दब गईं। पहली बार इतने पास से मैं मीना चाची की चिकनी सुंदर पीठ देख रहा था, वो पूरी तरह नंगी पीठ, बिना किसी कपड़े के, तेल से चमक रही थी, उनकी कमर की पतली घुमावदार लकीर और कूल्हों की शुरुआत तक की मुलायम त्वचा मेरी आँखों के सामने थी। मैं उस नंगी पीठ पर धीरे-धीरे तेल से मालिश करने लगा।

थोड़ी देर बाद मीना चाची बोली, “सुनील जरा मेरे नीचे भी मालिश कर दे।”

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मैंने कहा, “चाची कहाँ करूँ?” तो मीना चाची बिना किसी शरम के बोलीं की “मेरे चुतड़ों की और किसकी।”

मैंने भी सोचा मौका अच्छा है और मैंने कहा, “पर उसके लिए तो आपका पेटीकोट उतारना पड़ेगा।”

तब चाची बोली, “जा कर अच्छे से पहले दरवाजा बंद कर आ।”

मैं जल्दी से जाके दरवाजा बंद कर के आया तो देखा मीना चाची पहले से ही अपना पेटीकोट उतार कर पिंक पैंटी और काली ब्रा को अपने हाथों से दबाय, पेट के बल उल्टी बिस्तर पर लेटी हुई थीं। उनकी पीठ की चिकनी त्वचा पर हल्की सी चमक थी, साड़ी का ब्लाउज ऊपर सरका हुआ था जिससे कमर की गहरी घुमावदार रेखा साफ दिख रही थी। पिंक पैंटी उनके मोटे चूतड़ों में इतनी कसी हुई थी कि कपड़े के नीचे से गोलाई और दरार का उभार स्पष्ट नजर आ रहा था। काली ब्रा के स्ट्रैप उनके कंधों पर तने हुए थे, और ब्रा के कप उनके भारी स्तनों को नीचे से सहारा दे रहे थे। मैंने तेल की बोतल उठाई, हाथों में गरम तेल लिया और धीरे-धीरे चाची की मस्त टाँगों से मालिश शुरू की। पहले उनकी पिंडलियों पर, फिर जाँघों के पिछले हिस्से पर, जहां त्वचा इतनी नरम और गर्म थी कि मेरे हाथ फिसलते जा रहे थे। धीरे-धीरे मैं ऊपर की ओर बढ़ा, उन मस्ताने गदराये चूतड़ों तक पहुँचा। मैंने दोनों हाथों से उनके चूतड़ों को पकड़ा, तेल से भिगोकर गोल-गोल घुमाते हुए दबाव डाला। हर दबाव में उनके चूतड़ हल्के से हिलते, मांस की मुलायम लहरें उठतीं और मेरे लंड में सिहरन दौड़ जाती। मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था की वो मीना चाची जिसका नाम लेकर मैं रात भर मुठ मारता था, एक दिन ब्रा और पैंटी में मेरे सामने लेट कर मेरे हाथ से अपनी मालिश करवायेंगी।

मालिश करते-करते जब मैं मीना चाची की जाँघों के ऊपरी हिस्से पर पहुँचा तो मेरे अंगूठे बार-बार पैंटी के किनारे से टकराते, फिर पैंटी के ऊपर से उनकी कसी हुई चूत की मछलियों पर रगड़ते। वो गर्माहट, वो हल्की सी नमी जो पैंटी के कपड़े से रिस रही थी, मुझे एक अजीब तरह का आनन्द दे रही थी। मेरे लंड में खून तेजी से दौड़ने लगा, वो सख्त होकर पैंट में दब रहा था। मुझे पता नहीं क्या सूझा, मैंने मीना चाची की पैंटी के साइड वाले इलास्टिक को हल्का सा खींचा और अपनी एक उंगली धीरे-धीरे अंदर डाल दी। मेरी उंगली उनकी चूत की गर्म, चिकनी त्वचा से टकराई। चूत एकदम बिना बाल की थी, पूरी तरह साफ, मुलायम और गीली। उसकी साफ़्टनैस से मालूम हो रहा था की चाची शेव नहीं बल्कि हेयर रिमूवर से अपनी चूत के बाल साफ़ करती थीं। मैंने उंगली को और अंदर सरकाया, उनकी चूत की होंठों के बीच फेरने लगा, हल्के-हल्के दबाव डालते हुए क्लिटोरिस की ओर बढ़ा। चाची की साँसें भारी होने लगीं, उनके चूतड़ हल्के से ऊपर उठने लगे।

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इस पर चाची ने एक चाँटा और मारा और बोलीं, “बहनचोद मुझे तो तूने नंगा देख लिया चुदवाते हुए. अब तू अपने कपड़े उतार के मेरे समने पूर नंगा हो के दिखा. मैं देखूँ तो सही आखिर तेरी लुल्ली है या लंड!”

उस समय चाची की चूचियाँ देख कर मेरा लंड पूरा तना हुआ था। मीना चाची ने आगे बढ़ कर अपने लिये एक सिगरेट जलाई और मेरा पायजामा खोल दिया और मेरा सढ़े आठ इंच लम्बा और ढाई इंच मोट लौड़ा मीना चाची की आँखों के सामने झूलने लगा। मीना चाची की आँखें फैल गयीं और वोह बस इतना ही बोली, “मादरचोद! इंसान का लंड है की घोड़े का. अभी तक कहाँ पर छुपा के रखा था. पहले क्यों नहीं दिखाया. इस लंड को देख कर तो कोई भी औरत नंगी हो कर अपनी चूत उछाल- उछाल कर चुदवायेगी!”

ये बालते-बालते मेरे लंड को चाची ने अपने हाथ में ले लिया और बड़े प्यार से अपना हाथ आगे-पीछे करते हुए उसे देखने लगी। दोस्तों पहली बार जब कोई औरत आपका लंड पकड़ती है और जो मस्ती बदन में चढ़ती है वोह मैं आपको बता नहीं सकता। मेरी ज़िंदगी में वोह पहली औरत का स्पर्श था जो मेरे लंड को मिल रहा था, और वो भी उस औरत का जिसको याद कर-कर के मैं कितनी बार मुठ मार चुका था। चाची की हथेली गर्म और नरम थी, उँगलियाँ मेरे लंड की मोटी नसों पर धीरे-धीरे सरक रही थीं। वो ऊपर की तरफ खींचतीं तो मेरी चमड़ी तनी हुई ऊपर चढ़ जाती, नीचे करतीं तो सिरा बाहर निकल आता, उसकी उँगलियाँ मेरे लंड के सिरे पर रुक कर हल्के से दबातीं, जहाँ से पहले से ही पारदर्शी रस की बूँदें टपक रही थीं। इस से पहले कि मैं कुछ बोल पाता, मेरे लंड से पिचकारी निकली और मीना चाची के होंठों और नंगी चूचियों पर जा कर पसर गयी।

मीना चाची अब बड़े प्यार से बोलीं, “माँ के लौड़े! बहनचोद! तू तो एकदम चूतिया निकला. मैं तो समझ रही थी की मेरी ब्रा खोल कर और मुझे पैंटी में देख कर शायद तू मेरे साथ जबर्दस्ती करके मेरी चुदाई करेगा. पर मुझे तू माफ कर दे, जब तूने मुझे अपनी बाहों में लेकर चोदा नहीं तो मैंने गुस्से में तेरी पिटाई कर दी. पर क्या करूँ इतने साल हो गये हैं मेरी चूत को ठंडा हुए।

रोज़ अपने आप ही वाइब्रेटर डाल कर ठंडी करती हूँ पर असली मर्द से चुदने की ख्वाहिश मन में ही रह जाती है! आज जब मैं सुबह तेरे कमरे में गयी और अपनी पैंटी और ब्रा से तेरा मुँह ढका पाया तो मैं समझ गयी की तू मेरे सपने देख कर मुठ मारता है. इसी बहाने से मैंने आज तुझे मसाज के लिये बुलाया था, पर तेरा घोड़े जैसा लंड देख कर तो मैं पागल हो गयी हूँ. ऐसे लंड के तो मैं सिर्फ़ सपने ही देखती थी. और तू भी अब चूत लेने के लिये तैयार है. चल आज से सपने देखना बंद कर. और बता अपनी चाची की चूत चोदेगा?”

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मेरे तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गयी। मैं पहले तो हक्का बक्का खड़ा रहा और बाद में मैंने कुछ झिझकते हुए उन ही के अंदाज़ में कहा, “चाची! जब से मेरा लंड खड़ा होना चालू हुआ है तब से मैंने सिर्फ़ आपको याद कर के मुठ मारी है. मैं हमेशा ही आपको सपने में बिना कपड़ों के नंगी, सिर्फ़ ऊँची हील्स वाली सैंडल पहने हुए इमैजिन करता था और आपके मोटे चूतड़ और चूचीयों को इमैजिन करता था, मैंने मुठ तो बहुत मारी है पर मुझे चोदना नहीं आता, तुम बताओगी तो मैं बहुत प्यार से मन लगा कर तुमको चोदूँगा!”

चाची बोलीं, “सुनील अब तेरा लंड देखने के बाद ही मैं तो तेरी हो गयी और चुदाई तो मैं खूब सीखा दूँगी. पर तुझे मेरी हर बात माननी होगी और अगर तूने मुझे मस्त कर दिया तो मैं तुझे जो तू इनाम माँगेगा तुझे दूँगी. और ध्यान रहे ये बात किसी को मालूम नहीं होनी चाहिए!”

अब हम दोनों के बीच कोई शरम या पर्दा नहीं रह गया था। चाची ने कहा, “आज से तू और मैं जब भी अकेले होंगे. तू मुझे सिर्फ़ मीना बुलाना और अब मुझे अपनी बाहों में भर कर मेरे होंठ चूसते हुए मेरे चूतड़ मसल!”

मैंने भी इतने दिनों की मुठ मारने के बाद मिला चाची का नंगा बदन अपनी बाहों में पकड़ कर उठा लिया और नंगी मीना चाची को अपनी बाहों में भर कर उनके नरम-नरम होंठों को अपने मुँह से चूसने लगा। बता नहीं सकता कि मैं उस समय किस जन्नत में था, और अपने हाथ पीछे ले जा कर उनकी पैंटी में डाल कर उन मतवाले चूतड़ों को दबाने लगा। जब मैं पेटीकोट के उपर से दबा रहा था, मुझे उस समय ही मालूम हो गया था कि मीना चाची के चूतड़ बहुत ही तगड़े और मस्त हैं, और अब जब उनके नंगे चूतड़ पकड़े तो हाथों में कुछ ज्यादा ही जान आ गयी और मैं कस-कस कर मसलने लगा।

मीना चाची ने भी मुझे अपनी बाहों में कस कर पकड़ रखा था जिस से उनकी माँसल चूचियाँ मेरे सीने से लग कर मुझे गुदगुदा रही थी।

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थोड़ी देर एक दूसरे को चूसने के बाद मीना चाची मुझ से अलग हुई और अपनी अलमारी खोल कर व्हिस्की की बोतल निकाल कर बोली, “जब तक सोनिया वापस नहीं आती तेरी चुदाई की क्लासिज़ चालू और अब तू हफते भर मेरी क्लास अटेंड करेगा!”

इतना कह कर मीना चाची ने दो ग्लास में शराब डाली और दो सिगरेट जला लीं और एक मुझे देते हुए कहा, “जो मैं बताऊँ वैसे ही करना!”

“लेकिन चाची मैंने कभी स्मोक या ड्रिंक नहीं की है!” मैं थोड़ा हैरान होते हुए बोला।

“मादरचोद. नहीं की है तो आज कर ले. चुदाई भी तो तूने पहले कभी नहीं की है. मज़ा आयेगा.. बिलीव मी!” चाची बोली।

उसके बाद मीना चाची एक हाथ में व्हिस्की का ग्लास और एक में सिगरेट पकड़ कर मेरे सामने आई और बोली, “बहन के लौड़े! तू मुझे हाई हील के सैंडलों में इमैजिन करता है ना, चल अब अपने हाथों से मेरे पैरों में सैंडल पहना और फिर मेरा पेट चूमते हुए मेरी पैंटी उतार और पीछे से मेरी गाँड के छेद में उंगली डाल और धीरे-धीरे से अपने मुँह से मेरे पेट को चूमते हुए मेरी बूर के ऊपर ला कर मेरी चूत को अभी सिर्फ़ ऊपर से ही चूस। मैं तुझ से नाचते हुए अपनी चूत चुसवाँऊगी, बाद में जब तू अपनी ड्रिंक और सिगरेट खतम कर लेगा तब तुझे बताऊँगी की औरतें अपनी चूत का पानी मर्दों को कैसे पिलाती हैं।”

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मैं तो उस समय कुछ बोलने की हालत में ही नहीं था। मैं तो बार-बार यही सोच रहा था की मैं कोई सपना तो नहीं देख रहा हूँ। जिस औरत को नंगा देखना और चोदना मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मकसद था वो ही औरत मेरी बाहों में नंगी मुझ से चुदवाने के लिये मचल रही है। खैर, मैंने मीना चाची के आदेश अनुसार उनके गोरे-गोरे नरम पैरों को पहले धीरे से चूमना शुरू किया। मेरे होंठ उनके नाजुक तलवों पर लगे, फिर एड़ियों पर, फिर पंजों पर जीभ फेरते हुए मैंने उनकी चार इंच ऊँची पेन्सिल हील्स वाली सैंडलें उठाईं। आज तक मैं चाची के सैक्सी सैण्डलों को चूम-चूम कर और अपने लंड पे रगड़-रगड़ कर मुठ मारता था पर आज वही नंगी चाची के सैण्डलों में बँधे पैरों को मैं चूम रहा था। सैंडल के चमड़े की ठंडक और उनके पैरों की गर्माहट मिलकर मेरे लंड को और सख्त कर रही थी। मैंने सावधानी से उनकी एड़ी को सैंडल के अंदर फिसलाया, पट्टियों को कस कर बाँधा, और हर पट्टी बाँधते वक्त उनके नरम पैरों को चूमता रहा। इस का सीधा असर मेरे लंड पे हो रहा था, जो अब दर्द भरी सख्ती से फड़क रहा था।

फिर मैं मीना चाची के बताय तरीके से उनको अपनी बाहों में भर कर चूमने लगा। मेरे होंठ पहले उनके नाभि के आसपास के नरम पेट पर रुके, फिर नीचे की ओर सरकते हुए उनकी पैंटी की कमरबंद को दाँतों से पकड़कर धीरे-धीरे नीचे खींचा। चाची ने अपने चूतड़ हिला-हिला कर मदद की, उनकी मोटी जाँघें फैल गईं और पैंटी घुटनों तक सरक गई। उनकी चूत अब मेरे चेहरे के ठीक सामने थी, गीली, सूजी हुई, हल्की सी खुशबू वाली। जब मेरे होंठ मीना चाची की चूत के उभार पर टच हुए तो मीना चाची ने कस कर मेरा सर पकड़ा और चूत के उभार पर दबा दिया। उनकी उँगलियाँ मेरे बालों में फँस गईं, दबाव इतना था कि मेरी नाक उनकी गीली दरार में दब गई। वो मीठी-मीठी सितकारियाँ भरने लगी और बोली, “सुनील तुझे मैं ज़िंदगी का इतना प्यार दूँगी की जब तू अपनी बीवी को चोदेगा तो हमेशा मेरी ही चूत याद करेगा!”

मैं भी मन लगा कर मीना चाची की चूत की दरार पर और उभार पर जीभ फेरने लगा। पहले हल्के-हल्के, सिर्फ क्लिटोरिस के ऊपरी हिस्से पर जीभ की नोक से छूता रहा, फिर पूरी दरार के साथ-साथ ऊपर से नीचे तक लंबी लकीरें खींचीं। उनकी चूत का रस मेरी जीभ पर फैल रहा था, नमकीन-मीठा, गर्म। चाची अपनी कमर हिलाकर मेरे मुँह पर चूत रगड़ रही थीं, उनके चूतड़ मेरे हाथों में दब रहे थे। थोड़ी देर बाद मीना चाची के चूतड़ों में एक तेज कंपन आया, उनकी जाँघें काँपने लगीं और मेरा सर जोर से दबाते हुए अपनी चूत का पानी बहार छोड़ दिया। गर्म, चिपचिपा रस मेरे होंठों, ठोड़ी और गालों पर बह गया। मैंने सब चाट लिया, उनकी साँसें तेज थीं, सीने ऊपर-नीचे हो रहा था।

उसके बाद मेरी बगल में बैठ गयी और बोली, “सुनील! आज पहली बार ऐसा हुआ है की मैं अपनी चूत चुसवाते हुए झड़ी हूँ!”

मीना चाची की आँखें शराब और ओरगैज़्म के कारण नशीली हो रही थी। उन्होंने मेरा लंड पकड़ लिया और चोंकते हुए बोली, “हाय-हाय सुनील! यह क्या हाल कर रखा है तूने अपने लंड का. तन कर एक दम फटने को हो रहा है. मेरे प्यारे सुनील! लंड को इतना नहीं अकड़ाते की लंड फट ही जाये और वैसे भी आज से यह लंड अब सिर्फ़ मेरा है. चल थोड़ा तेरे लंड को ढीला कर दूँ. फिर तुझे आराम से अपनी चूत का पानी पिलाऊँगी!”

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इसके बाद मीना चाची ने मुझे एक छोटा सा पैग और दिया और एक-एक सिगरेट जला कर मेरे बदन से चिपट गयी, और मुझे खींच कर बिस्तर पर टाँगें सीधी कर के पीठ के सहारे बिठा दिया और बोली, “चल अब तू आराम से अपनी ड्रिंक और सिगरेट पी.!” और फिर मेरा लंड पकड़ कर कहा, “मैं लंड की ड्रिंक और सिगरेट बना कर पीयुँगी. और तेरी मस्ती निकले तो निकाल दियो मेरे मुँह में. लंड चूसना किसे कहते हैं अब मैं तुझे वो बताऊँगी!”

इतना कह कर मीना चाची ने अपने रसीले, गर्म, नरम होंठ मेरे लंड के सुपाड़े पर रख दिए जो कि तन कर एक दम लाल टमाटर की तरह फूलकर चमक रहा था, उसकी चमड़ी तनी हुई, नसें उभरी हुईं, और सुपाड़ा चमकदार लाल होकर धड़क रहा था। उन्होंने पहले धीरे से होंठों से सुपाड़े को चूमा, फिर जीभ की नोक से उसके चारों ओर गोल-गोल घुमाई, मेरे पेशाब के छेद से निकलने वाली हल्की सी चिपचिपी बूँद को चाट लिया। फिर उन्होंने मुँह खोलकर सुपाड़े को अंदर लिया, होंठों से कसकर बंद किया और धीरे-धीरे जीभ को नीचे से ऊपर फेरते हुए, गोल-गोल चक्कर काटते हुए मेरे लंड को अपने गर्म, गीले मुँह के अंदर सरकाने लगी। उनकी जीभ मेरे लंड की नसों पर दबाव डाल रही थी, हर इंच को चाटते हुए आगे बढ़ रही थी, और उनका मुँह इतना गर्म और नम था कि मेरे लंड को जैसे आग में डाल दिया हो।

मुझे नहीं मालूम औरतों को लंड चूसते हुए कैसा लगता है पर मैं इतना बता सकता हूँ की कोई भी मर्द मादरचोद अपना लंड चुसवाने के बाद बिना चूत लिये रह नहीं सकता, चाहे उसे उसके लिये कुछ भी क्यों ना करना पड़े। मेरे उपर तो उस समय मीना चाची के नंगे बदन का नशा, व्हिस्की का नशा, सिगरेट का नशा और मीना चाची से लंड चुसवाने का नशा ऐसा छाया हुआ था की जैसे मैं किसी और दूसरी दुनिया में हूँ। ये चारों ही नशे ज़िंदगी में पहली बार मैं अनुभव कर रहा था। उनकी चूचियाँ मेरी जाँघों पर दब रही थीं, उनके निप्पल सख्त होकर मेरी त्वचा को छू रहे थे, उनकी साँसें गर्म-गर्म मेरे पेट पर पड़ रही थीं, और हर बार जब वो गहरी साँस लेतीं तो उनका मुँह मेरे लंड को और गहराई तक खींच लेता।

पहले तो मीना चाची बड़े प्यार से अपना मुँह उपर नीचे सरका-सरका कर मुझे लंड चुसाई का मज़ा देने लगी। उनका मुँह धीरे-धीरे आगे बढ़ता, मेरे लंड को आधा तक अंदर लेतीं, फिर होंठ कसकर पीछे खींचतीं, जीभ से सुपाड़े को जोर से चाटतीं, फिर दोबारा अंदर लेतीं। मेरा पूरा लंड मीना चाची के मुँह में समा नहीं पा रहा था पर वो बहुत तबियत से मेरी आँखों में आँखें डाल कर चूस रही थी, उनकी आँखों में शरारत, भूख और प्यार का मिश्रण था। मेरा तो मस्ती के मारे बुरा हाल था। मैने मीना चाची का सिर कस कर अपने हाथों में पकड़ लिया, उनके बालों को मुट्ठी में भर लिया और हाथ से उनका सिर उपर नीचे करने लगा। नीचे से अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर मीना चाची के मुँह में ही धक्के देने लगा, हर धक्के पर मेरा लंड उनके गले तक जाता, उनकी गला थोड़ा सा सिकुड़ता, और वो हल्की सी गड़गड़ाहट की आवाज करतीं। और जब मैं झड़ा तो

मैंने कस कर मीना चाची का सिर पकड़ कर नीचे से एक जोरदार शाट लगाया जिस से मेरा लंड सीधा मीना चाची के गले में जा कर फँस गया और उस समय मेरा पूरा साढ़े आठ इंच लम्बा और ढाई इंच मोटा लौड़ा जड़ तक मीना चाची के मुँह में घुसा हुआ था। मेरी झाँट के बाल उनकी नाक में घुस रहे थे, उनकी नाक मेरी जड़ से सटी हुई थी, और मेरी पहली गरम, गाढ़ी धार उनके गले में सीधी जा रही थी। जब मैं शाट लगा कर मीना चाची के गले में अपना लंड फँसाकर झड़ रहा था उस समय मीना चाची बूरी तरह छटपटा रही थी, उनके हाथ मेरी जाँघों पर कसकर दब रहे थे, वो पीछे हटने की कोशिश कर रही थीं पर मैंने भी कस कर उनका सिर पकड़ा हुआ था। उनकी आँखें पानी से भर आईं थीं, गला सिकुड़ रहा था, पर वो मेरे लंड को गले में ही रखे हुए थीं। जब तक मेरे पानी की आखिरी बूँद नहीं निकली, मैंने मीना चाची का सिर नहीं छोड़ा, हर धड़कन के साथ मेरी गरम धार उनके गले में उतर रही थी।

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मीना चाची वाकय में बहुत चूदास औरत थी। इतनी तक्लीफ होने के बाद भी मेरे लंड का सारा पानी चाट-चाट कर पी गयी और एक भी बूँद बाहर नहीं गिरने दी। उन्होंने धीरे-धीरे मेरा लंड मुँह से बाहर निकाला, जीभ से साफ करते हुए, फिर होंठ चाटते हुए मेरी ओर देखा। मीना चाची ने मेरा झड़ा हुआ लंड अपने मुँह से बाहर करा तो मैं बोला, “चाची आई एम सारी! पर यह मेरा पहली बार था इसलिये मैं अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पाया!”

मीना चाची ने मेरे होंठ चूमते हुए कहा, “डार्लिंग तू सिर्फ़ मुझे मीना बोल. और मादरचोद मैं इसी तरह तो अपन बदन रगड़वाना चाहती हूँ. कसम से आज पहली बार लंड चूसने का असली मज़ा मिला है। ऐसा प्यारा और तगड़ा लंड हो तो मैं ज़िंदगी भर चूसती रहूँ!”

लंड चुसवाने के बाद मैं भी थोड़ा सा मस्त हो चूका था। मैंने कहा, “क्यों मीना चा. मेरा मतलब सिर्फ़ मीना. तुम्हारा इतना चुदास बदन है. तुमने शादी से पहले किसी से चुदवाया या नहीं?”

मीना चाची बड़े दुख से बोली “अरे नहीं रे, मेरे पास अपनी चूत फड़वाने के और नए-नए लंड लेने के मोके तो बहुत थे पर मैंने सोचा हुआ था के मैं अपनी चूत सुहाग रात वाले दिन ही अपने हसबैंड को दूँगी। पर मुझे क्या पता था की मेरी किस्मत में ऐसा गांडू लिखा हुआ है। अगर मुझे पता होता तो मैं शादी से पहले जम कर अपनी चूत का मज़ा उठाती। तेरे चाचा का सिर्फ़ पाँच इंच लम्बा और एक इंच मोटा है और बस पाँच-छ: धक्के में ही झड़ जाता है और गांडू की तरह मेरी चूचियों पर उल्टा लेट कर सो जाता है!”

इतना कह कर मीना चाची बिस्तर से उठीं और अलमारी से नौ इंच लम्बा वाइब्रेटर लेकर आयी और बोली, “अभी तक तो मेरा असली हसबैंड ये ही है जिस से मैं अपनी चूत की आग बुझाती हूँ। तेरे चाचा के अलावा तू पहला लड़का है जिस से मैं अपना नंगा बदन चुदवाऊँगी. बस तू मेरा साथ मत अलग करना!”

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मीना चाची कहते-कहते बहुत भावुक हो गयी थीं। मैंने मीना चाची को अपनी बाहों में भर लिया और एक दम फ़िल्मी डाय़लोग मारते हुए बोला, “मीना डार्लिंग आज से मैं तुम्हारे जिस्म की भूख को शाँत करूँगा और जब तुम कहोगी उसी समय अपना लंड तुम्हारी सेवा में हाज़िर कर दूँगा! आज से तुम्हारे दुख के ओर वाइब्रेटर के दिन बीत गये। आज से तुम सिर्फ़ इस असली लंड का मज़ा लो.!” और इतना कह कर मीना चाची को दबा दबा कर उसके रसीले होंठ चूसने लगा।

मीना चाची की चूचियों का दबाव पाकर और उनकी मस्त मोटी-मोटी जवानी सीने से लगा कर मेरा लंड फिर से पूरा तन गया था। मीना चाची बोली, “भोसड़ी के! तेरा लंड है की मस्त गन्ना. देख तो सही कैसे खड़ा हो कर लहरा रहा है!”

मैंने कहा, “मीना यह तो फिर से तुम्हारे होंठों को ढूँढ रहा है चुसाने के लिये।”

मीना चाची बोली, “सुनील! गन्ना तो मैं अबकी बार अपनी चूत में ही चूसूँगी, पहले तो मुझे अपनी सिगरेट और ड्रिंक आराम से पीने दे और तू अपनी ड्रिंक मेरी चूत से निकाल कर पी. आ जा सुनील आज तुझे औरतों की चूत पीना सिखा दूँ!”

इतना कह कर मीना चाची अपने चूतड़ आराम से बिस्तर पर टिका कर बैठ गयी और अपनी दोनों टाँगें फैला कर पैंटी में कसी हुई चूत की मछलियों को दिखाने लगी। पैंटी का पतला कपड़ा उनकी भरी हुई चूत पर इतना कस कर चिपका हुआ था कि गुलाबी होंठों की आकृति साफ उभर रही थी, बीच में हल्की सी नमी का धब्बा बन चुका था जो कपड़े को गहरा कर रहा था। जब भी मैं मीना चाची और सोनिया की पैंटी सूँघता था तो बहुत ही मादक खुशबू आती थी। मैं भी देखना चाहता था की आखिर वो आती कहाँ से है।

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इतने में मीना चाची बोलीं, “चल मादरचोद! मेरी टाँगें और जाँघें चूमते हुए मेरी पैंटी उतार और मेरी चूत में अपना मुँह लगा कर ऐसे चूस जैसे आइसक्रीम चूसता है और फिर अपनी जीभ को मेरी दरार के अंदर डाल और खूब घुमा-घुमा कर मेरी चूत को अंदर तक चाट, याद रहे चूसाई और चटाई तब तक चलती रहे जब तक मैं तुझे मना नहीं करूँ और इस दौरान अगर मेरी चूत से मेरी मस्ती निकले तो उसे अपनी ड्रिंक समझ कर चाट कर पी जाना!”

बड़ा ही सैक्सी सीन था। मीना चाची बिल्कुल नंगी, सिर्फ पैंटी और सैक्सी सैंडल पहने, एक हाथ में ड्रिंक का गिलास और दूसरे में सिगरेट लिए स्मोक कर रही थीं। उनकी साँसों के साथ धुआँ उनके मोटे होंठों से निकलकर हवा में घुल रहा था। उनके मस्त मम्मों पर भूरे-भूरे निप्पल तने हुए, सख्त होकर खड़े थे, जैसे कह रहे हों कि आजा, आज जी भर के मज़ा ले ले, बहुत मुठ मार ली तू ने। फिर चाची ने अपनी चिकनी मस्त टाँगों को और फैला दिया, घुटनों को मोड़कर एड़ियाँ बिस्तर पर टिकाईं, जिससे उनकी जाँघों की मुलायम मांसलता और भी उभर आई। मैंने भी झुकते हुए मीना चाची की मस्त जाँघों को बारी-बारी चूमते हुए खूब चाटा, जीभ से उनकी गर्म, नरम त्वचा पर लकीरें खींचीं, जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर धीरे-धीरे जीभ फेरते हुए ऊपर की ओर बढ़ा, जहाँ पैंटी का किनारा उनकी त्वचा से चिपका हुआ था। फिर मस्ती में पहली बार मीना चाची की पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत की दरार को चाटने लगा। मेरे होंठ पैंटी के कपड़े पर दबे, हल्की नमी मेरे होंठों को गीला कर रही थी, और मीना चाची मस्ती में आ गयीं और बोलीं, “सुनील अब जल्दी से मेरी पैंटी उतार के मेरी मस्त जवानी चूस ले, मदरचोद इतना मज़ा दूँगी कि किसी औरत ने आज तक किसी मर्द को नहीं दिया होगा!”

मैं बड़े प्यार से मीना चाची की पैंटी धीरे-धीरे उनकी चूत से सरकाते हुए उतारने लगा। मीना चाची ने अपने चूतड़ हवा में उठा दिये थे ताकि मैं आसानी से पैंटी को नीचे सरका सकूँ। पैंटी धीरे-धीरे उनकी जाँघों पर फिसलती हुई नीचे आ रही थी, और जैसे-जैसे कपड़ा सरकता गया, उनकी चिकनी, मुलायम चूत मेरे सामने खुलती गई। मीना चाची शायद यह नहीं जानती थीं कि यह मेरे लिए किसी सुहाग रात से कम नहीं थी, और अपनी प्यारी दुल्हन का मुखड़ा, जिसके कारण ना जाने मैंने कितनी बार अपने हाथ से अपने लंड का पानी गिराया था, आराम से पैंटी उतार कर इत्मीनान से देखना चाहता था।

मीना चाची बोलीं, “देख ले सुनील! जी भर के देख मेरी चिकनी चूत को. पता है मैं अपनी चूत शेव नहीं करती क्योंकि उस से चूत थोड़ी सी खुरदरी हो जाती है. बल्कि हेयर रिमुवर से बाल साफ़ करती हूँ ताकि मेरी चूत हमेशा मुलायम और चिकनी रहे।”

मैं देर तक मीना चाची की चूत को देखता रहा और अपनी हथेली फेरता रहा। उनकी चूत के गुलाबी होंठ हल्के से खुले हुए थे, बीच में चमकती नमी की परत थी, और हल्के सुनहरे बालों की महीन परत ने उनकी मुलायम त्वचा को और भी आकर्षक बना दिया था। कुछ देर बाद मीना चाची बोलीं, “देख सुनील इतना नहीं तरसाते. मेरे भोसड़े में आग लग रही है. जल्दी से चूसके ठंडी कर दे।”

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मैंने भी अब ज्यादा रुकना मुनासिब नहीं समझा और अपने होंठ मीना चाची की चूत के गुलाबी होंठों पर रख दिये। जैसे ही मेरे गर्म होंठ उनकी ठंडी-गर्म, नम चूत से मिले, मीना चाची ने एक गहरी सिसकारी ली और मेरे सर को अपनी चूत पर दबा लिया। मेरा मुँह पूरी तरह दब गया, मेरी नाक उनकी चूत की मादक, गहरी खुशबू में डूब गई, जो मीठी-नमकीन, पूरी तरह नशे की तरह थी। मुझ पर ना जाने क्या नशा चढ़ा, मैंने अपने होंठों से उनकी चूत के होंठ दबाकर चूसने शुरू कर दिये, धीरे-धीरे चूसते हुए जीभ को बाहर निकालकर उनकी दरार पर फेरा, फिर जीभ को अंदर डालकर गोल-गोल घुमाने लगा। अंदर की गर्म, गीली दीवारें मेरी जीभ को लपेट रही थीं।

इस समय मीना चाची ने मेरा सर अपनी पूरी ताकत से अपनी चूत पर दबाया हुआ था और अपनी मस्त चिकनी जाँघों से मेरा सर जकड़ लिया था, जिसके कारण मीना चाची की सिसकारियाँ और गालियाँ मेरे कानों तक धीमी-धीमी पहुँच रही थीं। मीना चाची के मस्त चूतड़ अब उछलने चालू हो गये थे, और उन्होंने मेरे हाथ अपनी चूचियों पर से हटा कर अपने दोनों चूतड़ों के नीचे कर दिये थे।

मैं भी इशारा पाकर उन मस्त चूतड़ों को दबा-दबा कर मसलते हुए मीना चाची की चूत चूसता रहा। मेरी उँगलियाँ उनके नरम, गोल चूतड़ों में धँस रही थीं, उन्हें मसलते हुए मैं जीभ को और गहराई में डाल रहा था। अचानक मीना चाची ने अपने चूतड़ों का एक जोरदार झटका मारा और मेरा सर दबा कर मेरे मुँह में अपनी चूत का पानी निकालने लगीं। पहले मुझे अजीब सा टेस्ट लगा पर बाद में इतना टेस्टी लगा कि मैं दोबारा उनकी चूत में जीभ घुसेड़ कर उनकी चूत की दीवारों पर लगा हुआ

उनकी चूत का पानी चाटने लगा। मीना चाची शायद इस दोबारा चुसाई के लिये तैयार नहीं थीं और अचानक चालू हुई दोबारा चुसाई ने मीना चाची को पागल बना दिया और उन्होंने अपनी जाँघें जोर से कस कर झड़ना चालू किया। उन्होंने अपनी जाँघें इतनी जोर से दबा ली थीं कि अगर मैं अपने दोनों हाथों से उन्हें अलग नहीं करता तो शायद मेरा सर चकनाचूर हो जाता। मैंने जब मुँह उठा कर देखा तो मीना चाची के चेहरे पर भरपूर ठंडक दिखायी पड़ रही थी।

उन्होंने मेरी आँखों में आँखें डालते हुए कहा, “पता है सुनील! आज मेरे जीवन में पहली बार मेरी चूत के लिप्स किसी मर्द के होंठों से चूसे गये हैं। मैंने आज तक सिर्फ किताबों में पढ़ा था या ब्लू-फिल्मों में देखा था कि औरतों को अपनी चूत मर्दों से चुसवाने से चूत को वो सुख मिलता है जो उसको लंड से चुदवाकर भी नहीं मिलता। वाकई में सुनील आज तूने मेरी चूत चूसकर वो सुख दिया है जो मुझे आज तक नसीब नहीं हुआ था, थैंक यू!”

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मैंने भी कहा, “चाची. सारी. मीना. मुझे नहीं मालूम तुम्हें कितना मज़ा आया. पर मुझे तो तुम्हारी चूत का पानी पी कर और चूत चूस कर मज़ा आ गया, आज के बाद जब भी तुम मिलोगी, मैं सबसे पहले तुम्हारी चूत चूसूँगा और चाटूँगा।”

मेरा लंड इतनी सारी मस्ती एक साथ मिल जाने पर लोहे की रॉड की तरह सख्त और गरम हो रहा था, उसकी नसें फूल कर उभर आई थीं और सुपाड़ा चमक रहा था। चाची ने बड़े प्यार से अपनी मुलायम, गीली होंठों को चौड़ा करके मेरे लंड का सुपाड़ा अपने मुँह में भर लिया। पहले तो उन्होंने सिर्फ होंठों से उसे हल्के से दबाया, फिर धीरे-धीरे जीभ की नोक से सुपाड़े के चारों ओर गोल-गोल घुमाने लगीं, फिर जीभ को नीचे से ऊपर की ओर फेरा, जिससे मेरे पूरे लंड में एक मीठी कंपकंपी दौड़ गई। एक पूरा मिनट तक वो ऐसे ही करती रहीं, कभी जीभ की सतह से चाटतीं, कभी होंठों से चूसतीं, कभी हल्का सा दाँत लगाकर छेड़तीं। मैं अपना कंट्रोल पूरी तरह खो बैठा, मेरी साँसें तेज़ हो गईं, दिल की धड़कनें कान में गूँजने लगीं। मैंने मीना चाची की गर्दन पकड़ ली और उनका मुँह अपने लंड पर जोर से दबाने लगा, लंड उनके गले तक धकेलने की कोशिश करने लगा। मीना चाची ने झट से अपना मुँह ऊपर खींच लिया, होंठों पर मेरे प्रीकम की चमक चमक रही थी, और प्यार से बोलीं, “सुनील मैं तो तेरे लंड को बता रही थी कि अपनी दुल्हन से मिलने के लिए तैयार हो जा, आज तेरी दुल्हन जी भर के तेरे धक्के लेगी और बाद में तेरी आखिरी बूँद तक चूसेगी। अब बस आजा सुनील तुझे आगे का लेसन पढ़ा दूँ। अब मुझसे सहन नहीं हो पा रहा है।”

मीना चाची ने एक तकिया अपने मोटे चूतड़ों के नीचे लगाया जिससे उनकी कमर ऊँची हो गई, दूसरा तकिया अपने सिर के नीचे रखा और पीठ के बल लेट गईं। उनकी साँसें भारी थीं, छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। बड़े प्यार से बोलीं, “चल आज तू अपनी मीना चाची की सवारी कर ले, चढ़ जा अपनी मीना पर, और तू भी सीख ले औरत पर चढ़ना किस को कहते हैं। बहुत तरसा है ना तू मेरी चूत के लिए, चल आज के बाद नहीं तरसेगा, चल आजा बना ले अपनी चाची से संबंध, बना दे अपनी चाची को रंडी।”

मुझे मीना चाची ने अपनी टाँगें फैला कर टाँगों के बीच में कर लिया, उनकी जाँघें गरम और मुलायम थीं, मेरी कमर को हल्के से जकड़ लिया। तकिया लगा होने के कारण मीना चाची की चूत एकदम फूल कर उठी हुई थी, उसके गुलाबी लिप्स सूजे हुए, चमकते हुए, बीच में से चिपचिपा रस टपक रहा था। मीना चाची बोलीं, “देख सुनील मैं अपने हाथ से अपनी चूत के लिप्स खोलूँगी, तू बस अपने हाथ से अपना लंड पकड़ कर मेरा जो गुलाबी छेद दिखेगा, उस पर अपने लंड का सुपाड़ा रगड़, और जब तक मैं ना कहूँ लंड मेरे अंदर मत उतारना।”

मीना चाची ने एक सिगरेट जलाई, होंठों से गहरी कश खींची और धुआँ छोड़ा, फिर दूसरे हाथ की दो उँगलियों से अपनी चूत के लिप्स को धीरे से अलग किया। अंदर का गुलाबी, गीला मांस झलक उठा, छोटा सा छेद सिकुड़ता-फैलता दिख रहा था, रस की एक पतली धार बह रही थी। और बोलीं, “आजा बेटा! चल रगड़ अपना लंड।”

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मैंने भी अपनी मस्ती में डूबे हुए लंड को मीना चाची की फैली हुई चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया। सुपाड़ा उनके गरम, चिपचिपे लिप्स से टकराया तो एक बिजली सी दौड़ गई, उनकी चूत की गर्मी मेरे लंड के पूरे सिरे में समा गई। मैं धीरे-धीरे ऊपर-नीचे रगड़ता रहा, कभी सुपाड़े को उनके क्लिटोरिस पर दबाता, कभी लिप्स के बीच में फिसलाता। पहली बार मुझे मीना चाची की चूत की वो गहरी, नम गरमी महसूस हुई जो मेरे पूरे बदन को आग लगा रही थी। मीना चाची सिसकारी लेते हुए बोलीं, “देख ले बहनचोद! जैसे तूने मुझे बाहों में लेकर किस किया था उसी तरह मैं तेरे लंड को अपने चूत के लिप्स के बीच में लेकर किस कर रही हूँ. मज़ा आ रहा है कि नहीं?”

मेरी ज़िंदगी में तो पहली बार मेरा लंड किसी चूत से टच हुआ था। मेरे दोनों कान लाल हो गये थे, चेहरा तप रहा था, साँसें रुक-रुक कर आ रही थीं। मैंने कहा, “मीना मेरे बदन में यह कैसी आग लग रही है?”

मीना चाची बोलीं, “बस मेरी जान थोड़ा सा और. फिर तू मेरी आग बुझा और मैं तेरी आग बुझाऊँगी।”

एक मिनट और लंड घिसने से मेरा बदन मारे मस्ती के कांपने लगा। मीना चाची समझ गयी कि मैं अब कंट्रोल के बाहर हूँ। उन्होंने बड़े प्यार से अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपनी चूत के छेद पर टिका दिया और बोलीं, “देख सुनील! तेरा लंड बहुत मोटा लम्बा और तगड़ा है, मेरी चूत में इसकी जगह धीरे-धीरे ही बनेगी. इसलिये तू धीरे-धीरे अपना लंड मेरी चूत में उतार और अपने चूतड़ के धक्के दे और लंड आगे पीछे कर. चल अब चालू हो जा. तू भी सीख ले चुदाई क्या होती है. चोद ले अपनी चाची को जी भर के. पर मादरचोद अगर तू अपने चाचा की तरह जल्दी झड़ा तो इसी वाइब्रेटर से तेरी गाँड मारूँगी वो भी बिना क्रीम के!”

मैंने पहले तो एक हल्का सा शॉट लगाया जिस से मेरा लंड का सुपारा मीना चाची की चूत के गीले, फूले हुए होंठों को चीरता हुआ सिर्फ दो इंच अंदर सरक गया। उनकी चूत की गर्म, नरम दीवारें तुरंत मेरे लंड को जकड़ लेने लगीं, जैसे कोई गीली, गरम मुट्ठी मुझे भीतर खींच रही हो। मीना चाची की चूत अंदर से सुलग रही थी, उसकी असली गरमी अब मेरे लंड की नसों तक पहुँच रही थी, हर धड़कन के साथ वो गर्माहट मेरे पूरे बदन में फैल रही थी। मीना चाची बोली, “आआहहहहहहहहहहहा मेरे राजा. शाबाश मेरे शेर. अब धीरे-धीरे अपना लंड पेल मेरे अंदर!”

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मैंने भी एक-दो हल्के धक्के तो दिये, हर बार मेरा लंड थोड़ा और अंदर जाता, उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को मसलती हुई फैलतीं, गीला रस मेरे लंड पर चिपकता हुआ चिकनाहट बढ़ाता। पर इतना ताव आ गया कि मैंने एक जोर का झटका मारा और मेरा छः इंच लंड एक झटके में मीना चाची की चूत में पूरी तरह समा गया। उनकी चूत की गर्म, तंग नली ने मेरे लंड को जड़ तक निचोड़ लिया, अंदर की हर परत मेरे लंड की नसों को दबा रही थी। मीना चाची ने अपने चूतड़ ऐसे उछाले जैसे उन्हें बिजली का करंट लग गया हो और बोली, “बहन के लौड़े! चोदना सीखा नहीं और मेरी चूत फाड़ने पर उतर आया. ज़रा आहिस्ता-आहिस्ता चोद अपनी चूत रानी को!”

मीना चाची बोलती रहीं और मैंने मीना चाची को उनकी कमर के नीचे से उभरे हुए मोटे चूतड़ों से दोनों हाथों से कस कर पकड़ लिया। मेरी उँगलियाँ उनके नरम, मांसल गालों में धँस गईं। मैंने अपने चूतड़ों का पूरा दम लगा कर जबरदस्त शॉट मारा जिस से मेरा पूरा लंड जड़ तक मीना चाची की चूत में धँस गया। उनकी चूत का मुंह मेरे लंड की जड़ पर फैल गया, गीला रस मेरी जांघों तक बहने लगा। मैं उनके बदन पर पूरी तरह लेट गया, अपनी बाहों में उन्हें कस के पकड़ लिया जिस से उनकी सख्त, उभरी हुई निप्पल मेरे निप्पल से रगड़ खा रही थीं और उनके माँसल, भरे हुए जोबन मेरी छाती के नीचे पूरी तरह दब गए, उनकी गरमी मेरी त्वचा में समा रही थी।

मीना चाची ने दर्द के मारे करीब एक फुट अपनी गांड हवा में उछाली और गालियाँ देती हुई बोली, “माँ के लौड़े! क्या कर दिया तूने. माँ चोद कर रख दी मेरी चूत की. अरे भोसड़ी वाले ऐसे थोड़ी मैंने चूत की माँ चोदने को कहा था. तेरा साला लंड है कि मूसल. मेरी तो मदरचोद चूत फट गयी आज. चोद दे मादरचोद. हाय हाय बड़ा दर्द हो रहा है!” पर मैंने मीना चाची को पूरी तरह से दबोच रखा था और उनकी टाँगें अपनी टाँगों में फंसाकर उन्हें जकड़ लिया था, उनकी हर हलचल मेरे नीचे दबी हुई थी।

अब मैंने धीरे-धीरे अपना लंड आगे पीछे करना चालू किया। हर बार बाहर निकालते वक्त उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को खींचतीं, फिर अंदर धकेलते वक्त गीला, गरम रस चटकने की आवाज के साथ मेरे लंड को चिकना करता। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख कर बड़े प्यार से उनके मुँह को चूमा, उनकी जीभ को अपनी जीभ से लिपटाकर चूसा, उनकी सांसें मेरी सांसों में मिल गईं। धीरे-धीरे शॉट लगाते हुए मैं उनकी चूत की गहराई को महसूस करता रहा। जब मैंने देखा की मीना चाची का तड़पना कुछ कम हो गया, उनकी आँखें आनंद से बंद होने लगीं तो मैंने उन से पूछा कि “डार्लिंग दर्द हो रहा है तो थोड़ा सा बाहर निकाल लूँ?”

मीना चाची एकदम शेरनी की तरह बोली, “मादरचोद इतने साल मैं इसके लिये तो तड़पी हूँ की कोई तो मेरी चूत फाडे और चोद-चोद कर उसका भोंसड़ा बना दे और तू कह रहा है की बाहर निकालूँ.! आज पहली बार तो औरत होने का सुख मिल रहा है. चोद मेरे राजा मेरी टाँगें उठ-उठा के जितना चोदना है चोद ले. मेरे सनम मेरी तो चूत अब तेरी हो गयी!”

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मीना चाची इस समय पूरी मस्ती में थीं। झूठ नहीं बोलूँगा, मैं भी पूरी तरह से मसताया हुआ था और मैंने एक किताब में देखे हुए पोज़ को आज़माते हुए मीना चाची की दोनों टाँगें अपने कंधे पर रखीं। उनकी जांघें मेरे कंधों पर टिकीं, उनकी एड़ियाँ मेरी पीठ पर दब रही थीं। मैंने उनके मस्त मम्मे दोनों हाथों में कस कर पकड़ लिये, उँगलियाँ उनके निप्पल के चारों ओर घुमाईं, उन्हें मसलते हुए उछल-उछल कर मीना चाची की चूत में पेलने लगा। हर धक्के में मेरा लंड पूरा जड़ तक उनकी चूत में उतर रहा था, उनकी चूत की गहराई से गीला रस छलकता हुआ मेरी जांघों पर गिर रहा था, चूतड़ों के टकराने की थप-थप की आवाज कमरे में गूंज रही थी और मीना चाची की सिसकारियाँ ऊँची होती जा रही थीं।

इतना प्यारा सीन था दोस्तों की जब मैं कस कर शॉट लगाता था उस समय मीना चाची के चूतड़ पूरे फैल जाते और चौड़े हो कर दब जाते और मेरा पूरा लंड मीना चाची की चूत में समा जाता और फिर जब मीना चाची नीचे से अपने चूतड़ों का धक्का देती तो मेरा लंड थोड़ा सा बाहर आता और मीना चाची की वो मस्त गाँड फिर गोल और मस्त हो जाती।

अब हम दोनों की चुदाई की लय सैट हो चुकी थी। मीना चाची की चूत मेरे लंड को इतनी कसकर चूस रही थी कि हर धक्के पर गर्म, गीले, मखमली दीवारें मेरे सुपाड़े को मसलती हुई महसूस होती थीं। उनकी चूत का रस मेरे लंड पर बहता हुआ टपक रहा था, हर बार बाहर आने पर चिपचिपी आवाज़ के साथ। मीना चाची तो मानो जन्नत की सैर कर रही थी,

और बारबार यही बोल रही थी कि “आज जैसी चुदाई का सुख मुझे कभी नहीं मिला. मुझे मालूम था की चुदाई में मज़ा आता है पर इतना मज़ा आता है मुझे नहीं मालूम था! ले मेरे बलम. चोद अपनी चाची को, जी भर के अपनी चाची की जवानी का मज़ा लूट ले! कहाँ था बहन चोद. अभी तक क्यों नहीं सेकी मेरी चूत अपने लौड़े से. अब तो खूब चुदवाऊँगी मेरे राजा. मेरे दिलबर, आज से तो तू मेरा असली हसबैंड है!”

उनकी आवाज़ में इतनी मादकता थी कि मेरे कान गर्म हो जाते थे। उनकी साँसें तेज, गर्म, मेरे गले पर लग रही थीं। मैं उनके मोटे चूतड़ों को दोनों हाथों से कसकर दबाता, उंगलियाँ गहरे गड्ढों में धँसाती, फिर जोर से धक्का मारता। हर धक्के पर उनकी चूचियाँ ऊपर-नीचे उछलतीं, निप्पल सख्त होकर मेरी छाती से रगड़ खातीं।

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करीब पन्द्रह बीस मिनट तक जम कर टाँगें उठा कर चोदने के बाद मेरा पानी निकलने वाला था। मैंने मीना चाची की दोनों टाँगें छोड़ कर उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और बोला, “मेरी रानी! ले मेरा पानी अपनी मस्त चूत में. कर ले ठंडा अपनी चूत को मेरे लंड के पानी से।” मीना चाची भी बोलीं कि राजा मैं भी बस झड़ने की कगार पर हूँ जरा दो तीन धक्के करारे-करारे जमा दे मेरी चूत में।” मैंने मीना चाची को कस के अपने चूतड़ हिला-हिला कर जबरदस्त शॉट देने चालू कर दिये।

मीना चाची तो दो धक्कों बाद ही किलकारी मारते हुए झड़ने लगी। उनका पानी गरम-गरम, तेज धार में सीधा मेरे लंड के लाल हुए सुपाड़े पर गिर रहा था जिसे मैं पूरी तरह से महसूस कर रहा था। उनकी चूत की दीवारें सिकुड़ती-फैलती, मेरे लंड को दबाती-छोड़तीं, जैसे पूरा शरीर काँप रहा हो। मैंने भी दो-तीन धक्के और मारे और मीना चाची के होंठों पे अपने होंठ चिपका दिये और उनकी जीभ चूसते हुए अपने लंड का पानी मीना चाची की चूत में निकाल दिया। मेरे लंड से गरम-गरम फुहारें निकलती रहीं, उनकी चूत की गहराई में भरती रहीं, इतना कि ओवरफ्लो होकर बाहर बहने लगा। दोस्तों मेरी ज़िन्दगी में वो पहला अवसर था जब मैंने किसी औरत के साथ संभोग करा था। मीना चाची की चूत के अंदर झड़ने में जो स्वर्ग का आनन्द प्राप्त हो रहा था उसके कारण मैं क्षण भर के लिये अपने होश हवास खो बैठा।

जब मुझ होश आया तो देखा मीना चाची मेरे लंड पर झुकी हुई थी और बड़ी बेसब्री से मेरा लंड चूस रही थी। उनकी जीभ मेरे सुपाड़े के चारों ओर घूम रही थी, हमारा मिला-जुला रस चाट रही थीं, होंठों से चूसकर साफ कर रही थीं। मुझे होश में आया देख उन्होंने मेरा लंड छोड़ कर दो सिगरेट जलाईं और मुझे अपनी बाहों में लेकर मेरे सीने पर अपना सर रख कर स्मोक करने लगी और बोली, “सुनील मैं किस ज़ुबाँ से तेरा शुक्रिया अदा करूँ. मेरी समझ में नहीं आ रहा है. मैं तो आज से तेरी हो गयी! तू आज से सही मायने में मेरा हसबैंड है और मैं तेरी वाईफ! तुझे चूत का इतना सुख दूँगी की तू हमेशा मुझे याद करेगा! तूने मुझे बताया है कि असली चुदाई क्या होती है! आज पहली बार है कि चुदवाकर मेरी चूत को पसीना आ गया। मैं तो बस आज से तेरी गुलाम हो गयी। बस मेरे प्यारे सुनील. मुझे चोदना मत बँद करना, तेरे लिये तो मैं चूत-वालियों की लाइन लगा दूँगी। मेरी बहुत सी सहेलियाँ हैं जिनके मर्द सिर्फ़ नाम के मर्द हैं. साले कर कुछ नहीं पाते!”

मैंने भी मीना चाची को अपनी बाहों में कस कर कहा कि “मीना आज से तुम भी मेरी हो गयी. मैं सोच भी नहीं सकता था कि जिस सपनों की रानी की मैं पैंटी-ब्रा और सैंडल सूँघ-सूँघ कर मुठ मारता था वोही मुझे मेरे जीवन में चुदाई का पाठ पढ़ायेगी। मीना तुम नहीं. मैं तुम्हारा गुलाम हूँ और जब तक चाचा नहीं आते, तुम मेरी वाईफ बन जाओ और मुझे जम कर अपने शरीर की शराब पिलाओ।”

ज़िंदगी की पहली चुदाई अपने सपनों की रानी के साथ करके मैं तो अपने आप को बड़ा ही भाग्यशाली समझ रहा था। पहली चुदाई करने के बाद मैं और चाची एक स्मोक करते हुए एक दूसरे से लिपट कर पड़े हुए थे। मीना चाची अपना सिर मेरी छाती पर रख कर स्मोक कर रही थी और मैं धीरे-धीरे उनके मस्त मोटे चूतड़ों पर हाथ फेर रहा था। उनकी त्वचा अभी भी गर्म थी, पसीने से चिकनी, हर स्पर्श पर हल्की सिहरन दौड़ जाती थी। मैंने कहा, “मीना डार्लिंग क्या हुआ. तुम तो एकदम ही शाँत हो कर लेट गयी हो।”

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तो मीना चाची ने शर्माते हुए मेरे होंठों का किस लिया और बड़े प्यार से लंड हाथ में लेकर बोली, “सुनील मुझे लग रहा है कि मेरी असली शादी तो आज हुई है और सुहाग रात मनी है. और जैसे कोई लड़की पहली बार अपने मर्द से चुदवाकर मस्त हो कर शर्माती है. बिल्कुल मुझे वैसा ही लग रहा है। सुनील मेरे सरताज. मेरी चूत के मालिक! तू जो बोलेगा मैं सब करूँगी पर तू मुझे आज कसम दे कि तू हर रोज़ मुझे चोदेगा। चाचा आ जायेगा तब भी मैं मौका निकाल कर तुझसे अपनी चूत ठंडी करवाऊँगी।”

मैं तो अपने जीवन की पहली चुदाई कर के मस्त पड़ा हुआ था। मैंने भी कहा, “मीना मेरा मुठ मारने का हमेशा ही एक सीन मेरे दिमाग में घूमता था, जिस को मैं सोच-सोच कर तुम्हारी याद में अपना लंड मुठियाता था।”

मीना चाची बड़े प्यार से बोली, “अब क्या जरूरत है सपने देखने की. तू बोल तो सही. मैं तेरे लिये अब कुछ भी करूँगी।”

मैंने कहा, “मीना मैं हमेशा ही यह सोचता था कि तुम्हारी शादी मुझ से हुई है और अपनी सुहाग रात वाले दिन तुम शर्माती हुई दुल्हन की तरह सज-धज के मेरे लिये पलंग पर बैठी हो और फिर मैं तुम्हें जी भर के चोदता हूँ।”

मीना चाची ने मेरे होंठों का एक लम्बा सा किस लिया और करीब पाँच मिनट तक मेरे होंठ चूसने के बाद बोली, “मेरे राजा! बस अब तुझे मेरी चूत और नहीं मिलेगी और ना ही तू मुठ मारेगा।”

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मेरे उपर तो जैसे पहाड़ गिर पड़ा। मैंने कहा, “मीना ये तुम क्या कह रही हो?”

मीना चाची बड़े ही मादक अँदाज़ में बोली, “मादरचोद! आज तेरी और मेरी, रात को सुहाग-रात मनेगी और मैं चाहती हूँ कि तू अब दिन भर मुझे नंगा देखे और अपना मूसल जैसा लौड़ा मसले ताकि जब रात को मेरे साथ सुहाग-रात मनाये तो मुझे कड़-कड़ाते हुए चोदे जिस से मेरी चूत का एक-एक पोर खुल जाये।”

मैंने भी कहा, “मीना पर मैं रात तक कैसे दोबारा इंतज़ार करूँगा. इतनी नशीली शराब पीने का!”

मीना चाची ने मेरी छाती को चूमते हुए कहा, “बहनचोद तू मेरे बारे में सोच कि मैं कैसे रहुँगी रात तक तेरा मस्त मादरचोद लंड लिये बिना। मेरी चूत खुली हुई तो क्या हुआ पर मैं भी अपनी ज़िंदगी में वो सुख भोगना चाहती हूँ जिस की कभी मैंने कल्पना करी थी।”

इसके बाद मीना चाची उठी और अपनी पिंक ब्रा और पिंक पैंटी पहन ली। मीना चाची दिन भर सिर्फ़ ब्रा-पैंटी और मेरी पसंद के चार इंच ऊँची एड़ी के सैण्डलों में ही घूमती और घर के काम करती रही और बीच-बीच में अपने हाथ या सैण्डल से मेरे लंडा को सहला कर या कभी एक चूँची बाहर कर के मेरे होंठों के पास ला कर भाग जाती। कभी दूर खड़े हो कर अपनी पैंटी धीरे से नीचे खिसका कर अपनी चूत का उभार दिखाती, और कभी मेरे चेहरे के सामने अपने चूतड़ ला कर पैंटी सरकाती और अपनी गाँड दोनो हाथों से पकड़ कर चौड़ा कर के दिखाती। जब मैं पकड़ने को जाता तो कहती “मेरे मादरचोद डार्लिंग! ये सब माल जी भर के भोगना रात को।”

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मेरे लंड का तो बुरा हाल था। बेचारा दिन भर मीना चाची का बदन देख-देख कर अटेंशन में खड़ा रहा। शायद वो भी सोच रहा था कि छिनाल जितना तरसाना है तरसा ले, रात को तेरे भोसड़ी को भोंसड़ा नहीं बनाया तो मेरा नाम नहीं। मीना चाची ने शाम को मुझे एक घंटे के लिए घर के बाहर भेज दिया और बोलीं, “डार्लिंग! इंतज़ार की सारी घड़ियाँ खत्म। वापस आकर नहा-धोकर एकदम दूल्हा बनकर अपनी दुल्हन की सुहागरात मना। आज तेरी शादी मुझसे हुई है और मैं तेरी दुल्हन हूँ, तेरी पत्नी हूँ और तू मेरा हसबैंड। जल्दी से आ मेरी जान! मेरी चूत में शोले भड़क रहे हैं। दिन भर तो मैंने बर्दाश्त कर लिया, पर अब बर्दाश्त नहीं होता!”

मैं भी एक घंटे के लिए बड़े बेमन से बाज़ार घूमता रहा और वापस आकर अपने कमरे में जाकर नहाने चला गया। रेज़र से अपनी सारी झांटें साफ कीं, लंड पर खूब तेल की मालिश की और पूरे बदन को रगड़-रगड़कर साफ किया। तैयार होते वक्त अपने बदन पर खूब क्रीम मली, अच्छा-खासा परफ्यूम छिड़का। सबसे स्मार्ट कपड़े पहने और शीशे में खुद को देखकर सुहागरात मनाने के लिए मीना चाची के कमरे की तरफ चल पड़ा।

मेरी मीना चाची वाकई में एक बहुत ही स्टाइलिश और मस्त औरत थीं। जब मैंने उनके कमरे में खट-खट किया तो वो अंदर से बोलीं, “बस दो मिनट में अंदर आ जाना।”

मैंने दो मिनट बाद दरवाज़ा खोला तो दंग रह गया। चाची ने उस एक घंटे में कमरे की काया ही पलट दी थी। पूरा कमरा गुलाब की पंखुड़ियों से सजा हुआ था। हवा में भीनी-भीनी, उत्तेजित करने वाली इम्पोर्टेड खुशबू फैली हुई थी। मीना चाची अपनी सबसे सेक्सी दिखने वाली साड़ी पहनकर, चेहरे पर लंबा सा घूंघट डाले, पलंग के बीचों-बीच बैठी हुई थीं। पलंग के साइड टेबल पर एक पूरी व्हिस्की की बोतल और सिगरेट का पैकेट रखा हुआ था। बोलने की ज़रूरत नहीं कि उस वक्त हमारे दोनों जिस्मों में एक लावा फूट रहा था – एक-दूसरे को बुरी तरह चोदने की चाहत में। चाची ने सब इंतज़ाम कर रखा था कि आज रात भर जमकर चुदाई होगी।

मैंने धीरे से पलंग पर बैठकर मीना चाची को अपनी ओर खिसकाया और बड़े धीरे से उनका घूंघट ऊपर उठा दिया। मीना चाची ने आज कुछ ज़्यादा ही सेक्सी मेकअप किया था। उनके होंठों पर लाल चमकदार लिपस्टिक लगी हुई थी। पूरे मुखड़े पर बहुत सुंदर और गहरा मेकअप था। ब्लाउज़ उन्होंने बहुत लो-कट वाला पहना था – अगर इसे ब्रा कहें तो शायद ज़्यादा सही होगा। अंदर उन्होंने बहुत छोटी साइज़ की ब्रा पहनी थी, जिससे उनकी मस्तानी चूचियाँ छलक-छलककर बाहर आने को मचल रही थीं। घने-घने बाल खुले रखे थे, जो किसी झरने की तरह उनकी कमर तक लहरा रहे थे। हाथों और पैरों के नाखूनों पर गहरी लाल नेल पॉलिश लगी थी। मुझे और उत्तेजित करने के लिए उन्होंने काले रंग की लगभग पाँच इंच ऊँची पेंसिल हील सैंडल पहनी थी। उनके गोरे-गोरे पैर उन सैंडलों में देखकर मेरा लंड पैंट के अंदर साँप की तरह फुफकारने लगा।

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मैंने बड़े प्यार से मीना चाची का चेहरा अपने दोनों हाथों में लिया और उनके गुलाबी, मुलायम होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले धीरे-धीरे होंठों को चूमा, फिर जीभ अंदर डालकर उनकी जीभ से खेलने लगा। मैं उनकी जीभ को चूस रहा था, काट रहा था, चाट रहा था। मीना चाची ने भी मुझे अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया। अपनी भरी-भरी चूचियों को मेरे सीने से दबाते हुए उन्होंने मेरे होंठों और जीभ को बड़ी गहराई से चूसा। हम दोनों ऐसे चूमते रहे कि होश ही नहीं रहा कि कितनी देर बीत गई।

जब आखिरकार हम अलग हुए तो मैंने कहा, “मीना डार्लिंग, तुम तो वाकई बहुत खूबसूरत हो। मैं तुम्हें अपनी वाइफ बनाकर धन्य हो गया। तुम्हारा बदन ऐसा लगता है जैसे भगवान ने खुद अपने हाथों से बनाया हो। तुम्हें देख लेने के बाद कोई इंसान कैसे अपने आप पर काबू रख सकता है!”

मीना चाची मुस्कुराईं और बोलीं, “माय डार्लिंग! मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ कि तुम मेरे हसबैंड हो। और आशा करती हूँ कि तुम मेरी बूर को चूत और चूत को भोंसड़ा बना दोगे!”

इतना कहकर हम दोनों पलंग से उठे और एक-दूसरे को बाहों में भरकर डांस करने लगे। कमरे में हल्का संगीत बज रहा था। डांस करते-करते मैंने पीछे से मीना चाची की साड़ी उठाई और उनकी पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया। मैंने उनके नरम, गोल चूतड़ों को दोनों हाथों से मसलना शुरू किया। उँगलियाँ उनके चूतड़ों की दरार में सरकाती जा रही थीं। इधर मीना चाची ने मेरी शर्ट के बटन एक-एक करके खोलने शुरू किए। सारे बटन खोलकर उन्होंने मेरी शर्ट उतारकर फेंक दी। मैंने भी मीना चाची की साड़ी का एक छोर पकड़ा और धीरे-धीरे खींचना शुरू कर दिया। मीना चाची ने अपना पूरा मस्त शरीर घूम-घूमकर दिखाते हुए साड़ी को धीरे-धीरे उतरवाया। साड़ी फर्श पर गिरते ही उनका पेटीकोट और ब्लाउज़ में लिपटा हुआ जवानी का मेला मेरे सामने था।

अब मीना चाची सिर्फ़ ब्रा-कट ब्लाउज़ और एक बहुत ही झीने, पारदर्शी पेटीकोट में थीं। पेटीकोट इतना पतला था कि उसके नीचे का हर विवरण साफ़-साफ़ दिख रहा था। आज उन्होंने काली जी-स्ट्रिंग पैंटी पहनी हुई थी, जो सिर्फ़ उनकी चूत को मुश्किल से ढक पा रही थी। बाकी उनका पूरा निचला हिस्सा नंगा-सा था – उनके गोरे, मोटे, मांसल चूतड़ पूरी तरह उभरे हुए, चमकते हुए और गज़ब ढा रहे थे। जैसे ही मीना चाची ने अपनी नज़रें झुकाईं और नई-नवेली दुल्हन की तरह शरमाने लगीं, मैंने आगे बढ़कर उन्हें अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया। मेरे हाथ सीधे उनके पेटीकोट के ऊपर से उनके गुदाज़, मुलायम चूतड़ों पर जा पड़े। मैंने दोनों हाथों से उन्हें जोर-जोर से दबाना शुरू किया, उँगलियाँ उनके मांस में धँसती हुईं महसूस हो रही थीं।

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मीना चाची ने भी अपनी नन्हीं-सी शरम को एक तरफ़ रख दिया। उन्होंने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए, मेरी पैंट की बटन खोली, ज़िप नीचे की और पूरी पैंट सहित अंडरवियर को भी खींचकर नीचे उतार दिया। मेरी उत्तेजना अब खुलकर बाहर आ चुकी थी। इधर मैंने भी देर न की। मीना चाची के पेटीकोट के नाड़े को एक झटके में खोल दिया। पतला कपड़ा सरसराते हुए उनके पैरों तक गिर पड़ा। फिर मैंने अपने हाथ पीछे ले जाकर उनके ब्रा-नुमा ब्लाउज़ के हुक तलाशे। एक-एक करके सारे हुक खोल दिए। ब्लाउज़ धीरे-धीरे उनकी बाँहों से सरकता हुआ नीचे आया। मैंने उसे पूरी तरह उतारकर एक तरफ़ फेंक दिया।

अब मीना चाची सिर्फ़ एक माइक्रो ब्रा, जी-स्ट्रिंग पैंटी और हाई हील सैंडलों में थीं। उनकी ब्रा इतनी छोटी थी कि उसके कप बड़े मुश्किल से निप्पलों को ढक पा रहे थे। ब्रा इतनी टाइट थी कि मीना चाची के भारी, फूले हुए मम्मे उबाल खा रहे थे, बाहर आने को बेताब थे। मैं भी अब सिर्फ़ अंडरवियर में था। हमने एक-दूसरे को फिर से अपनी बाहों में जकड़ लिया। दोनों के शरीर एक-दूसरे से सटे हुए थे। हम धीरे-धीरे एक-दूसरे को मसलते हुए, रगड़ते हुए नाचने लगे। हमारी साँसें तेज़ हो रही थीं, गर्माहट बढ़ रही थी।

थोड़ी देर बाद मैं कुर्सी पर बैठ गया। मीना चाची की ओर देखकर मैंने कहा, “डार्लिंग, तुम आज अपनी गाँड हिलाते हुए दो पैग बनाओ। और फिर अपने हाथों से मुझे पिलाओ।”

मीना चाची ने मादक अंदाज़ में मुस्कुराया। उन्होंने अपने भारी-भारी चूतड़ों को मेरे चेहरे के ठीक सामने लाकर टेबल पर झुकना शुरू किया। जी-स्ट्रिंग पहने होने की वजह से उनकी चूत तो ढकी हुई थी, लेकिन स्ट्रिंग का पतला स्ट्रैप उनकी गाँड की दरार में पूरी तरह समा गया था। वह भूरा छेद अब भी छिपा हुआ था, पर चूतड़ों की हरकत से सब कुछ और भी उत्तेजक लग रहा था। उनके मस्त, फूले हुए चूतड़ मेरी आँखों के सामने लहरा रहे थे। मैं मदहोश हो गया। मैंने आगे बढ़कर अपने होंठ उनके चूतड़ों पर लगा दिए। फिर धीरे से जीभ निकालकर उनकी गाँड की दरार में घुसेड़ दी। जीभ आगे बढ़ती गई और उनके भूरे छेद पर पहुँच गई। मैंने वहाँ जीभ फेरनी शुरू कर दी – गोल-गोल, ऊपर-नीचे।

मीना चाची एकदम सिहर उठीं। “डार्लिंग! ये क्या कर रहे हो… बड़़ी गुदगुदी हो रही है!” उनकी आवाज़ में मस्ती और कंपन दोनों थे।

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मैंने कोई ध्यान नहीं दिया। जीभ की हरकत जारी रखी। साथ ही अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उनकी झुकी हुई, लटकती छातियों को पकड़ लिया। ब्रा के ऊपर से ही मैंने उन्हें जोर-जोर से दबाना शुरू किया। उँगलियाँ कपड़ों में धँस रही थीं। मीना चाची मस्ती के मारे अपने चूतड़ गोल-गोल हिलाने लगीं। उनके चूतड़ मेरे मुँह पर रगड़ रहे थे। पैग बनते-बनते खत्म हो गए।

मैंने उन्हें खींचकर अपनी गोदी में बैठा लिया। “मीना, क्या बात है। मैंने ऐसी पैंटी आज तक नहीं देखी, जिसमें चूत तो ढकी रहे, पर गाँड पूरी नंगी।”

मीना चाची ने बड़ी मस्ती से कहा, “डार्लिंग, इसे जी-स्ट्रिंग कहते हैं। ये खास चुदास औरतों के लिए बनाई गई है। जिनकी चूत में ज़्यादा खुजली होती है, जो पब्लिक में अपने चूतड़ों का जलवा दिखाना चाहती हैं, वो ऐसी पैंटियाँ और हाई हील सैंडल खूब पहनती हैं। हाई हील से चाल और भी मस्तानी हो जाती है। पीछे से गाँड उभर आती है, सामने से छातियाँ सैक्सी तरीके से हिलती हैं। मैंने आज खास तेरे लिए पहनी है।”

मैंने उनकी फूली हुई चूचियों की गहरी घाटी में अपना मुँह लगा दिया। पसीने और परफ्यूम की मिली-जुली महक सूँघते हुए मैंने वहाँ चूसना शुरू किया। जीभ से घाटी को चाटा, होंठों से चूसा। मीना चाची ने मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी चूचियों पर और ज़ोर से दबा दिया। मैं पूरी ताकत से चूस रहा था।

थोड़ी देर बाद मैंने कहा, “अब मुझे ड्रिंक पिलाओ।”

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मीना चाची ने टेबल से ग्लास उठाया। मेरे होंठों से लगा दिया और बोलीं, “डार्लिंग, एक घूँट में खत्म करना!”

मैंने दूसरा ग्लास उठाकर उनके होंठों से लगाया। उन्होंने नीट ड्रिंक बनाई थी – बिना सोडा, बिना पानी। मीना चाची तो रोज़ जमकर पीती थीं, पर मैं अभी नौसिखिया था। फिर भी हिम्मत करके मैंने एक घूँट में खाली कर दिया। मीना चाची ने भी पूरा ग्लास एक ही घूँट में पी लिया।

मैंने उनकी कमर में बाहें डालकर उन्हें अपनी ओर कसकर खींच लिया। उनकी उठी हुई, मदमस्त चूचियों को फिर से दबाने लगा। “मेरी जान, एक सिगरेट पिला दो!”

मीना चाची बोलीं, “डार्लिंग! सिगरेट मैं अपने स्टाइल से पिलाऊँगी।”

उन्होंने सिगरेट जलाई। एक लंबा कश लिया। फिर अपने होंठ मेरे होंठों से सटा दिए। सारा धुआँ धीरे-धीरे मेरे मुँह में छोड़ दिया। वह गर्म, तीखा धुआँ मेरे गले से नीचे उतरा। मैंने कसकर उनकी एक चूँची, जो मेरी हथेली में थी, बेदर्दी से मसल दी। मीना चाची चिहुँक उठीं। “तुम बड़े वो हो जी… मेरी मस्त जवानी इतनी बुरी तरह मसल कर रख दी!”

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मैंने कहा, “मीना रानी, आज तुम्हारी चूचियाँ कुछ ज़्यादा ही उभार लिए हुए हैं। तुमने क्या जादू कर दिया कि सुबह से शाम तक इतनी बड़ी हो गईं?”

मीना चाची शर्माते हुए बोलीं, “मैं आज तुम्हें वही चूचियाँ का मज़ा देना चाहती हूँ जो मेरी शादी के समय थीं। इसीलिए मैंने इस टाइट माइक्रो ब्रा में अपनी चूचियाँ कसी हैं। ताकि वे इसमें समाएँ नहीं और फूट-फूटकर बाहर निकलने को तरसें। मेरी चूचियाँ कब से तड़प रही हैं तेरे होंठों से चूसने के लिए।”

मैंने बिना देर किए अपने हाथ पीछे ले जाकर उनकी माइक्रो ब्रा के हुक खोल दिए। हुक खुलते ही उनकी चूचियाँ स्प्रिंग की तरह उछलीं। ब्रा की कैद से आज़ाद होकर मचलकर बाहर आ गईं। मीना चाची ने अपने भूरे निप्पलों पर आज रूज़ लगाया था – अब वे एकदम गुलाबी, चमकते हुए लग रहे थे। मैंने बेसब्री से उन पिंक निप्पलों को अपने मुँह में ले लिया। लंबे-लंबे चूस्से मारने लगा। रूज़ की वजह से निप्पल चैरी की तरह मीठे लग रहे थे। मीना चाची की सिसकारियाँ निकल रही थीं। मेरी इच्छा हो रही थी कि उनकी चूत का जूस इन निप्पलों से निकले और मैं पी जाऊँ।

मीना चाची मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबाती हुई सिसकारियाँ भर रही थीं। “डार्लिंग! पी ले मेरे जिस्म का नशा… आज तो जी खोलकर अपनी जवानी का नशा पिलाऊँगी तुझे। अरे मादरचोद, चूस ले मेरे निप्पलों को!”

और उन्होंने अपने हाथ नीचे ले जाकर मेरी अंडरवियर उतार दी। मेरा लौड़ा पूरी ताकत से उछलकर उनके पेट पर टकराया।

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मीना चाची मेरे लंड को दोनों हाथों से कसकर दबा रही थीं। उनकी उँगलियाँ मेरे लंड की नसों पर दबाव डाल रही थीं, जैसे उसे और भी सख्त करना चाह रही हों। उन्होंने मेरी आँखों में देखकर बड़ी मादक आवाज़ में कहा, “वाह मेरे बहन के लौड़े! अपनी दुल्हन से मिलने के लिए चिकना-चौड़ा बनकर आया है। आज देखती हूँ कि किसकी माँ चुदती है – मेरी चूत की या तेरी।”

फिर मीना चाची ने मेरे बाल पकड़कर मेरे सिर को अपनी चूचियों से ऊपर उठाया। उनकी साँसें तेज़ थीं, आँखें कामुकता से चमक रही थीं। “डार्लिंग, पहले एक मीठा सा चोदा लगा दे। मेरी चूत इस वक्त धड़क रही है। नहीं तो जलकर खाक हो जाएगी। बाद में आराम से चूसते-चाटते हुए एक-दूसरे को चोदेंगे।”

मेरा हाल भी बुरा था। सुबह की चुदाई के बाद से मैं भी मीना चाची को चोदने के लिए तड़प रहा था। मैंने उन्हें अपनी गोदी में उठाया। उनके भारी शरीर को सहलाते हुए बिस्तर पर लिटा दिया। मीना चाची ने खुद अपनी टाँगें फैला दीं। मैंने उनके जी-स्ट्रिंग पैंटी के दोनों तरफ़ की पतली पट्टियों को पकड़ा और धीरे से नीचे खींच दिया। पैंटी उनके घुटनों तक सरक गई और फिर पैरों से उतर गई।

वाह, क्या नज़ारा था! मीना चाची की चूत पूरी तरह नंगी हो चुकी थी। उन्होंने अपनी चूत के दोनों होंठों पर भी रूज़ लगाया था – अब वे गुलाबी, चमकते हुए और फूले हुए लग रहे थे। चूत की दरार से हल्का-सा नमी चमक रही थी। मैंने उनकी चूत को देखकर कहा, “मीना, थोड़ा और तड़प ले मेरी जान। अभी तो तेरी बूर के लिप्स मुझे इनवाइट कर रहे हैं चूसने के लिए।”

और बोलते ही मैंने अपना मुँह उनकी चूत पर लगा दिया। दोनों होंठों को अपने होंठों से चिपकाया। जीभ बाहर निकालकर उनकी चूत में धीरे-धीरे घुसेड़ दी। जीभ अंदर-बाहर होने लगी। मैंने उनकी चूत की दीवारों को चाटा, क्लिटोरिस को जीभ की नोक से छुआ। मीना चाची की कमर उठने लगी।

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वे सिसकारियाँ भरते हुए बोलीं, “डार्लिंग, मैं अपनी चूत का पहला पानी तेरे लंड पर झाड़ना चाहती हूँ। मादरचोद, बाद में चाट लेना मेरी बूर। अभी तो अपने गन्ने से मेरी चूत को चोद दे। जालिम, कितना और तड़पाएगा अपनी मीना को?”

मैंने देखा कि उनकी चूत से मदन रस थोड़ा-थोड़ा रिसने लगा था। अगर मैं और चाटता तो वे वहीं झड़ जातीं। इसलिए मैंने अपना मुँह हटाया। उनके ऊपर चढ़ गया। अपने चूतड़ उनकी मोटी-मोटी चूचियों पर रख दिए। मेरा लंड उनके चेहरे के सामने लहरा रहा था। मैंने कहा, “मेरी जान! जरा अपनी चूँची के निप्पलों से मेरी गाँड मारो। और मेरे लंड को अपने होंठों का प्यार दो। फिर देखो आज तुम्हारी चूत की क्या भजिया बनाता हूँ!”

मीना चाची ने झट से मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लिया। उनके गर्म, गीले होंठ लंड को घेर लेते हैं। उन्होंने दोनों हाथों से अपनी चूचियाँ पकड़ीं। कभी एक निप्पल, कभी दूसरा – मेरी गाँड के छेद पर रगड़ने लगीं। निप्पल सख्त थे, गुलाबी और रूज़ से चमकते हुए। मैं धीरे-धीरे उनका मुँह चोद रहा था। लंड अंदर-बाहर हो रहा था। मैंने कहा, “मेरी जान! आज तो लंड की पहली धार तुम्हारे मुँह में ही उतारूँगा। ज़रा तबियत से चूस। मेरी प्यारी जान। झड़ने के बाद तू लंड के खड़े होने की चिंता मत कर। आज तो जमकर तेरे साथ सुहाग रात मनानी है। मैं पूरी रात चोदूँगा।”

फिर मैंने अपनी शॉट्स की स्पीड बढ़ा दी। हुमच-हुमच के मीना चाची के मुँह में लंड पेलने लगा। हर थ्रस्ट में पूरा लंड जड़ तक उनके गले में उतार देता। फिर खींचकर बाहर निकालता। इससे पहले कि वे साँस ले पातीं, दोबारा गले तक धकेल देता। मीना चाची भी पीछे नहीं थीं। वे इतनी जोश से चूस रही थीं जैसे सदियों से लंड चूसने को तरस रही हों। उनकी जीभ लंड की नोक पर घूम रही थी, होंठ कसकर दबा रहे थे।

पाँच मिनट तक मैंने उनके मुँह को ऐसे ही चोदा। आखिर में मैंने पूरा लंड उनके गले में फंसा दिया। और बलबला कर झड़ गया। मेरी सारी धार सीधे उनके गले में उतर रही थी। मीना चाची ने बिना नखरे किए, बिना एक बूँद गिराए, मेरा पूरा रस पी लिया।

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जब रस निकल चुका, मैंने लंड निकालना चाहा। लेकिन मीना चाची ने मेरे चूतड़ पकड़ लिए। अपने मुँह पर दबा लिया। और झड़े हुए लंड की दोबारा चूसाई शुरू कर दी। उनकी जीभ अब भी लंड को सहला रही थी, चूस रही थी। वह नशीली चूसाई मुझे पागल कर रही थी। झड़ने के बाद दोबारा चुसवाने का जो मज़ा था, उसका वर्णन करना मुश्किल है। मेरा लंड भी जैसे मादरचोद हो गया था। पाँच मिनट की उस गहरी चूसाई में ही साला फिर से पूरा खड़ा हो गया।

मैंने उनकी ओर देखा और कहा, “मीना, आ जाओ। अब तुम्हारी चूत रानी बजाता हूँ!”

वो थोड़ा सा लंड अपने मुँह से निकालकर बोलीं, “थोड़ा सा और ठहर डार्लिंग, अभी थोड़ा और चूस के लोहे की तरह बना दूँ, फिर जमके मेरी चूत बजाना!”

ये बोलकर उन्होंने मेरा पूरा लंड मुँह के बाहर निकाला। अब सिर्फ़ मेरे लंड के सुपाड़े और मूतने वाले छेद को अपनी जीभ में लपेट-लपेटकर चूसना शुरू किया। उनकी जीभ गोल-गोल घूम रही थी, सुपाड़े की नोक पर रुककर चाट रही थी, फिर मूत्रमार्ग के छोटे छेद पर जीभ की नोक से हल्के-हल्के दबाव डाल रही थी। वह गुदगुदी इतनी तेज़ थी कि मेरी कमर सिहर रही थी, पैर काँप रहे थे। अभी तक का सबसे ज्यादा उत्तेजक और गुदगुदाने वाला मज़ा था ये। मैं मस्ती में आकर अपने चूतड़ों के नीचे दबी हुई उनकी मोटी-मोटी चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ लिया। उँगलियाँ उनके मुलायम मांस में धँस रही थीं। मैंने उन्हें बेरहमी से मसलना शुरू किया – कभी निचोड़कर, कभी दबाकर, कभी हल्के से खींचकर। मीना चाची की सिसकारियाँ मुँह से निकल रही थीं, लेकिन वे चूसना नहीं रोक रही थीं।

करीब दो-तीन मिनट ऐसे ही करने के बाद मेरा लंड वाकई दोबारा फटने की कगार पर आ गया था। सुपाड़ा फूलकर लाल हो चुका था, नसें उभर आई थीं। मीना चाची ने इसे भाँप लिया। उन्होंने जीभ फेरना तुरंत बंद कर दिया और मुस्कुराते हुए बोलीं, “अब आ जा डार्लिंग! अब मेरी चूत खोल दे इस लौड़े से!”

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मैं उनके ऊपर से हटकर उनकी जाँघों के बीच में आ गया। मीना चाची ने खुद अपनी जाँघें पूरी तरह फैला दीं। अपनी दोनों उँगलियों से चूत के गुलाबी लिप्स को अलग-अलग खींचकर खोल दिया। उनका रस से भरा हुआ गुलाबी छेद पूरी तरह नंगा हो गया – अंदर की गीली दीवारें चमक रही थीं, क्लिटोरिस फूला हुआ था। मीना चाची ने बड़ी मादक आवाज़ में कहा, “देख ले डार्लिंग! अपनी पूरी खोल के दे रही हूँ। बाद में मत कहना कि मीना चाची ने खोलके चुदवाई नहीं!”

मैंने आगे बढ़कर अपने लंड का सुपाड़ा उनके चूत के खुले हुए लिप्स के बीच में रख दिया। हाथ से पकड़कर धीरे-धीरे सुपाड़े को उनके गुलाबी छेद पर रगड़ने लगा। रस से गीला सुपाड़ा उनके लिप्स पर फिसल रहा था। मैंने पूछा, “आज तुम्हारी चूत हलाल करूँ कि झटका चोदूँ?”

मीना चाची ने आँखें बंद करके कहा, “हलाल तो बहुत हो चुकी डार्लिंग! आज तो झटका चुदाई कर दो और माँ चोद दो मेरी चूत की!”

मैंने घुटनों के बल होकर उनकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर उठा लीं। उन्हें पूरी तरह फैला दिया। अपनी कमर और गाँड में पूरा जोर लगाया और एक करारा, तेज़ झटका मारा। मेरा साढ़े आठ इंच लंबा, मोटा लौड़ा एक ही धक्के में उनकी चूत में जड़ तक समा गया। मीना चाची क्षण भर के लिए चीख पड़ीं। उनकी आँखें फैल गईं, मुँह खुल गया। फिर वे बड़बड़ाने लगीं,

“मादरचोद! आखिर तूने मेरी चूत की माँ चोद ही डाली। अरे भोसड़ी वाले, मैंने ये थोड़ी बोला था कि अपना पूरा गन्ना मेरी चूत में एक झटके से उतार देना। बहन के लौड़े! आज मुझे वाकई लग रहा है कि मेरी असली सुहाग रात तो आज है। इतना दर्द तो मुझे पहली सुहाग रात को भी नहीं हुआ था। डार्लिंग, क्या लौड़ा दिया है! मेरी तो चूत आज वाकई चूत बन गई। डार्लिंग, तूने आज मुझे धन्य कर दिया। मैं तो तेरी गुलाम हो गई। मादरचोद! तू मेरा हसबैंड बन जा आज से। ले मेरी चूत, चोद ले। जितनी चोदनी है!”

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मैं तो बस लगातार दनादन उनकी चूत में धक्के दे रहा था। हर धक्के के साथ मेरी जाँघें उनके मोटे चूतड़ों और जाँघों से टकरा रही थीं। थप-थप की तेज़ आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। मीना चाची की चूत मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थी, जैसे उसे अंदर ही रोकना चाहती हो। करीब आठ-दस मिनट की ज़ोरदार चुदाई के बाद मीना चाची ने किलकारी मारते हुए मेरे लंड पर अपना गरम पानी फेंक दिया। उनकी चूत की दीवारें सिकुड़ने लगीं, रस मेरे लंड पर बहने लगा।

मैंने उनकी टाँगें अपने कंधों से उतारकर नीचे कर दीं। उन्हें थोड़ा चौड़ा करके उनके ऊपर लेट गया। उन्हें अपनी बाहों में कसकर जकड़ लिया। अपने होंठ उनके रसीले, गर्म होंठों पर जमा दिए। उनकी जीभ को चूसने लगा – गहराई से, धीरे-धीरे। अब मैं बड़े आराम से अपने चूतड़ उछाल-उछालकर लंड उनकी चूत में पेल रहा था। मीना चाची ने भी अपने दोनों हाथ मेरे चूतड़ों पर कसकर दबा दिए। जब मैं लंड बाहर खींचता, वे मेरे चूतड़ों को और ज़ोर से दबातीं, जिससे लंड तेज़ी से वापस उनकी चूत में समा जाता।

करीब पंद्रह-बीस मिनट तक ऐसे ही गहरी, धीमी चुदाई चलती रही। मीना चाची ने अचानक कहा, “तुझे एक नया आसन बताती हूँ। उसमें मर्द का लंड औरत की चूत में पूरा अंदर तक जाता है!”

इतना कहकर उन्होंने मुझे अपने ऊपर से उतरने को कहा। फिर मेरे सामने घुटनों के बल कुत्तिया की तरह हो गईं। अपने मोटे चूतड़ मेरी तरफ़ करके बोलीं, “ले बहन के लौड़े! अब तू कुत्ता बन। मैं अपनी चूत उभारके देती हूँ और तू उसमें अपना मस्त गन्ना उतार। फिर कस-कसकर मेरे चूतड़ों पर धक्के मारते हुए तबला बजा!”

मीना चाची ने अपनी कमर नीचे की, पेट बिस्तर पर टिका दिया, चूचियाँ बिस्तर पर दबा दीं और गाँड ऊपर उठा दी। उनकी जाँघों के बीच से मुस्कुराती हुई, रस से चमकती चूत पूरी तरह खुल गई। उनके चौड़े चूतड़ों के कारण भूरा गाँड का छेद भी साफ़ दिख रहा था। वह अभी तक इस्तेमाल न किया हुआ लग रहा था – टाइट, साफ़ और थोड़ा सिकुड़ा हुआ। उस नज़ारे को देखकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था।

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मैंने मीना चाची की रिस रही, गीली बूर में अपना लंड थोड़ा सा घिसा। सुपाड़ा उनके फूले हुए लिप्स पर रगड़ रहा था, रस से चिकना होकर फिसल रहा था। फिर मैंने कमर में जोर लगाकर एक तेज़ धक्का मारा। पूरा लंड झटके से उनकी चूत में जड़ तक उतर गया। वाह, क्या मज़ा आया! जैसे ही मेरी जाँघें उनके फूले हुए, मांसल चूतड़ों पर जमकर टकराईं, मक्खन की तरह मेरा लंड उनकी उभरी हुई, गरम चूत में पूरी तरह समा गया। धक्के के दबाव से मीना चाची के चूतड़ स्पंज की तरह दबकर फैल गए – दोनों तरफ़ चौड़े होकर फैले, फिर स्पंज की तरह ही धीरे-धीरे वापस अपनी मूल शेप में फूलकर आ गए। उस उछाल और वापस आने की हरकत से मुझे उनके चूतड़ों का मुलायम, रबड़ जैसा स्पर्श महसूस हो रहा था। इस डॉगी स्टाइल आसन में मीना चाची की चूत लेना मुझे इतना मज़ेदार लग रहा था कि मैं और जोश में आ गया। मैंने अपनी चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी – तेज़, गहरे धक्के मारने लगा।

जोश में आकर मैंने अपनी एक उँगली अपने थूक से अच्छी तरह गीली की। इससे पहले कि मीना चाची कुछ समझ पातीं, मैंने अपनी उँगली उनकी टाइट गाँड के छेद पर रखी और धीरे से अंदर धकेल दी। उँगली की नोक अंदर घुसी तो उनका पूरा शरीर सिहर उठा।

वो एकदम चिहुँक पड़ीं और बड़बड़ाईं, “क्या कर रहा है मादरचोद! मेरी चूत तो अपने लंड से भर दी, अब क्या मेरी गाँड अपनी उँगली से भरेगा क्या? आज पहली बार किसी मर्द ने मेरी गाँड का छेद छेड़ा है। चल, थोड़ा मेरी गाँड में अपनी उँगली चला दे!”

वाकई उनका गाँड का छेद बहुत टाइट था। उँगली थूक से गीली होने के बावजूद बड़ी कसी-कसी, मुश्किल से अंदर जा रही थी। मैंने धीरे-धीरे उँगली अंदर-बाहर करना शुरू किया – पहले सिर्फ़ नोक, फिर आधी उँगली, फिर पूरी। मीना चाची की सिसकारियाँ बढ़ गईं, लेकिन वे चूतड़ पीछे करके मेरे धक्कों का जवाब दे रही थीं। करीब आठ-दस मिनट तक कुत्ते की तरह चुदाई चलती रही। इस दौरान मीना चाची दो बार अपनी चूत का गरम पानी फेंक चुकी थीं। हर बार जब उनका रस निकलता, उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को और कसकर जकड़ लेतीं। वे मेरे हर शॉट का जवाब अपने चूतड़ों के ज़ोरदार धक्के से दे रही थीं और बड़बड़ाती जा रही थीं,

“मेरे जानू, आज तो ज़िंदगी का असली मज़ा आ गया। बहन के लौड़े, जब तेरा मूसल जैसा लंड पूरा मेरे अंदर घुसकर मेरी बच्चेदानी पर लगता है, तो मैं तो बस गनगना जाती हूँ। बहनचोद! तू मेरा हसबैंड क्यों नहीं बनता? तुझसे तो इतना चुदवाती कि तू हमेशा मस्त रहता। मादरचोद, तेरे से चुदवाकर मेरी चूत को पसीना आ जाता है। तेरी तो जिससे शादी होगी, उसकी सुहाग रात वाले दिन माँ चुद जाएगी। ज़िंदगी भर चोदना भूल जाएगी। चोद मेरे लंड, चोद, बहनचोद!”

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मीना चाची बड़बड़ाती रहीं और मैंने अपने धक्के जारी रखे। कुछ देर बाद मेरे लंड का पानी बहुत उबाल खा चुका था। मीना चाची की मस्त, गीली चूत में अपनी मस्ती निकालने के लिए बेकरार हो रहा था। मैंने उन्हें कहा, “रानी, अब तुम सीधी हो जाओ। मैं तुम्हारी चूचियों पर पसरकर तुम्हारा मुँह चूसते हुए झड़ना चाहता हूँ!”

मीना चाची ने तुरंत मेरा लंड अपनी चूत से निकाला और फौरन सीधी लेट गईं। मैंने भी बिना वक्त गँवाए अपना लंड फिर से उनकी चूत में पूरा घुसेड़ दिया। उनके ऊपर लेट गया। दोनों हाथों से उनकी भारी, फूली हुई चूचियाँ पकड़ लीं। अपने होंठ उनके रसीले, गर्म होंठों पर जमा दिए। उनकी जीभ को गहराई से चूसने लगा – होंठ चूसते, जीभ चूसते। साथ ही दनादन उनकी चूत में शॉट्स मारने लगा। हर धक्का गहरा, तेज़। जब मेरा लंड आखिरकार झड़ा, तो मैंने इतनी जोर का आखिरी शॉट मारा कि मीना चाची दर्द और मज़े से चीख पड़ीं। उनकी गाँड एक फुट हवा में उछल गई, जैसे कह रही हों – ले मादरचोद! भर मेरी चूत को! मीना चाची ने मेरा पूरा माल अपनी चूत में सोख लिया। उन्होंने कसकर मुझे अपने बदन से चिपका लिया और बुरी तरह मेरा मुँह चूसने लगीं – जीभ अंदर डालकर, होंठ काटकर, साँसें तेज़ करके।

मुझे इस चुदाई में सुबह से भी ज़्यादा मज़ा आया था। इतनी देर चोदने के बाद उनके गुदाज़, मुलायम बदन पर लेटना बहुत अच्छा लग रहा था। उनकी चूचियाँ मेरी छाती से दब रही थीं, उनकी साँसें मेरे कानों में गर्म हो रही थीं। थोड़ी देर बाद मैंने धीरे से अपनी चूत से लंड निकाला। मीना चाची टपाक से उठ बैठीं। उन्होंने मेरा अभी-अभी झड़ा हुआ लंड अपने मुँह में ले लिया। जीभ से सुपाड़े को साफ़ किया, लंड की पूरी लंबाई चाटी, बचे हुए रस को चूसकर साफ़ कर दिया। उनकी जीभ हर जगह फिसल रही थी – सुपाड़े पर, नसों पर, जड़ तक। वे इतनी प्यार से चूस रही थीं जैसे कोई कीमती चीज़ हो।

मीना चाची ने आगे बढ़कर दो सिगरेट जलाईं और बोली, “सुनील डार्लिंग! आज से तू सिर्फ मेरा हसबैंड है। तेरा चाचा तो बस नाम का मेरा हसबैंड है। मैं सिर्फ तेरी गुलाम बन कर रहुँगी। तूने मुझे जीवन का वो सुख दिया है जिसके लिये मैं पिछले इक्कीस साल से तरसी हूँ। बस मुझे दिन में एक बार जरूर चोद दिया कर। देख मेरी चूत अभी तक तेरे धक्कों से हिली हुई है। आज मुझे मालूम पड़ा असली मर्द क्या होता है। डार्लिंग देख तो सही मैं तेरे लंड से किस-किस को खुश करवाती हूँ!”

मैंने भी सोचा मीना चाची इस समय चुदवा कर पूरी तरह मस्त है, क्यों ना अपने दिल की बात कह दूँ। मैंने बड़े प्यार से मीना चाची का चेहरा अपने हाथ से अपनी तरफ घुमाया और हिम्मत करके बोल डाला कि “मीना देखो आज के बाद तुम हमेशा मेरी रहोगी। मैं हर रोज़ तुम्हारी चूत की ऐसी चुदाई करूँगा कि तुम्हें रात में चाचा से चुदवाने कि इच्छा ही नहीं होगी पर तुम मेरा एक काम करवा दो डार्लिंग! ज़िंदगी भर तुम्हारा गुलाम बन कर रहूँगा!”

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मीना चाची बोलीं, “बोल शरमाता क्यों है? अब तो मैं तेरी पत्नी हो गयी, अब तो तू दिल खोल के बोल जो भी बोलना है। अगर तू मेरी गाँड मारना चाहता है तो डार्लिंग मैं उसके लिये भी तैयार हूँ। अपने इस प्यारे लवर को नहीं दूँगी तो और किस को दूँगी। अगर कुँवारी चूत ना दे सकी तो क्या, अपनी कुँवारी गाँड तो दे ही सकती हूँ!”

मैंने कहा, “नहीं मीना बात असल में ये है कि कल मैं तुम्हारी चुदाई देखने के बाद अँजाने में ही सोनिया दीदी के कमरे में चला गया था और वहाँ पर उनके बदन को मैंने खूब चूसा और चाटा था और बाद में उनकी गाँड खूब सूँघी और चाटी थी। मीना! जो उनकी ताज़ी चूत की खुशबू आ रही थी वो मैं बता नहीं सकता। मैं सोनिया दीदी के साथ चुदाई करना चाहता हूँ!”

मीना चाची थोड़ी सी संजिदा हो गयी और बोली, “सुनील तू क्या कह रहा है? तू एक माँ से उसकी बेटी चुदवाने के लिये कह रहा है। मुझे मालूम है कि वोह इतनी सुंदर दिखती है कि कॉलोनी के कईं लड़के उसकी तरफ ऐसे देखते है जैसे वहीं सड़क पर लिटा कर चोद डालेंगे!”

मैंने कहा, “चाची तुम ही ने तो कहा था कि अगर तुम्हें मालूम होता कि तुम्हारी शादी ऐसे गाँडू से होगी तो तुम शादी से पहले जम कर चुदवाती। क्या मालूम सोनिया दीदी को भी तुम्हारी तरह इस आग में ना जलना पड़े। घर की बात है. घर में ही रहेगी और अगर सोनिया दीदी से मेरे शारिरिक संबंध बन जाते है तो हम तीनों दिन भर चुदाई का मज़ा उठा सकते है। घर की बात घर में ही रहेगी और किसी को मालूम भी नहीं पड़ेगा। चाचा तो सुबह आफिस चले जाते हैं और रात को नौ-दस बजे आते हैं और एक बार सोनिया दीदी ने मुझ से चुदवा लिया तो वोह भी ठंडी रहेगी क्योंकि उनकी चूत में भी कीड़े रेंगने तो चालू हो ही गये होंगे, तो क्या पता किससे जा कर चुदवा ले!”

मीना चाची मेरे होंठों को प्यार से चूमते हुए बोली, “सुनील तूने बात तो बहुत सही कही है और मैं नहीं चाहती कि सोनिया भी मेरी तरह इसी आग में जले। चल तू चिंता मत कर उसे वापस आने दे। मैं मौका देख कर उसे तैयार कर लुँगी!”

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बातें करते और सिगरेट पीते हुए काफी देर हो चुकी थी और इस दौरान मीना चाची बारबार अपने हाथ से मेरा लंड रगड़ते हुए अपनी चूचियाँ मेरे ऊपर घिस रही थीं और सोनिया की चूत मिलने की खबर से मेरा लंड फिर से तन कर मैदान में आ गया था। मीना चाची ने तो सोचा भी नहीं था कि इतनी जल्दी मेरा लंड फिर से तैयार हो जायेगा। इस बार मीना चाची ने कहा कि वोह अपने तरीके से मुझे चोदेंगी, और आराम से एक सिगरेट जला कर मुझे नीचे लिटा कर अपनी दोनो टाँगें चौड़ी कर के मेरे लंड के उपर खड़ी हो गयीं और धीरे-धीरे अपने घुटनों के बल बैठने लगीं।

जब उनकी चूत मेरे लंड तक पहुँची तब उन्होंने एक हाथ बड़ा कर मेरा लंड पकड़ा और चूत के मुँहाने पर घिसने लगी, और थोड़ी देर घिसने के बाद गपाक से अपनी जाँघें चौड़ी कर के मेरे लंड पर बैठ गयीं और उछल-उछल कर मुझे चोदने लगीं। मुझे तो इस आसन में बहुत मज़ा आ रहा था। मैंने लेटे हुए अपने हाथ आगे बढ़ा कर उनके फूले हुए मस्त गुबारे जो मदमस्त हो कर झूल रहे थे, पकड़ कर मसलने चलू कर दिये। मीना चाची ने मुझे करीब आधा घँटा तक इस आसन में चोदा और खूब अपनी चूत का पानी निकाला।

हमने उस रात दो बार और संभोग करा और पस्त हो कर एक दूसरे की बाहों में सो गये। हफ़्ते भर तक, जब तक सोनिया वापस नहीं आयी हम लोग दिन भर नंगे पड़े रहते थे और एक दूसरे को जी भर के भोगते थे। इस दौरान मीना चाची ने मुझे कई नये आसन और चोदने के तरीके बताय। हमने ब्लू फ़िल्म भी देखी और उसमें देख-देख कर हम भी उनकी नकल करते हुए एक दूसरे को चोदते थे। सोनिया के वापस आने के एक दिन पहले मीना चाची को अपने भाई के घर जाना पड़ा।

जाने से पहले मुझे समझा के गयीं कि “देख कल सुबह सोनिया आ जायेगी और मैं परसों से पहले नहीं आ पाऊँगी। अपने मस्ताने पर काबू रखना और यह मत सोचना कि मैंने सोनिया को चोदने कि इजाज़त दे दी है तो तू उसे अकेले में पा कर चोद लेगा। मैं बड़े तरीके से उसे समझा कर तेरे साथ चुदवाऊँगी। डार्लिंग मज़ा चुदाई में तब आता है जब मर्द और औरत मिल के संभोग करें!”

इतना समझा कर मीना चाची चली गयीं। अगले दिन सुबह ही सोनिया को आना था। मैं ड्राइवर के साथ कार में उसे कॉलेज से दस बजे जाकर ले आया। अबकी बार सोनिया को देखने का मेरा नज़रिया ही कुछ और था। मैं रास्ते भर उसे अपनी आँखों से नंगा करता रहा, और सोनिया मुझे अपनी ट्रिप के बारे में बताती जा रही थी। उसे क्या मालूम था कि उसकी माँ और मेरे बीच में क्या संबंध बन चूके थे जिस के कारण मुझे उसके बदन की कुँवारी नशीली शराब पीने को मिलने वाली थी।

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घर आ कर सोनिया बोली, “सुनील मैं तो नहा धो कर एक कोक पीयूँगी और सोऊँगी। मैं इतने नहा कर आती हूँ, तुम मेरे लिये एक गिलास में कोक और बर्फ निकाल दो!”

मैंने कहा, “कोई बात नहीं दीदी आराम से नहा लो!”

मेरे दिमाग में तो सिर्फ़ सोनिया को चोदने का नज़ारा घूम रहा था। एका एक मुझे एक आइडिया सुझा जो मैंने एक किताब में पढ़ा था। सोचा क्यों ना ट्राई मार के देखूँ। यही सोच के मैं चुप-चाप मीना चाची के कमरे में गया और नींद की चार-पाँच टेबलेट ला कर सोनिया की कोक में मिला दी। मुझे मीना चाची ने कल ही बताया था कि जब कईं बार वोह रात को चुदाई के लिये बहुत परेशान हो जाती थीं और सो नहीं पाती थीं तो वोह नींद की गोली लेकर सो जाती थीं। इतने में सोनिया भी नहा-धो कर बाहर आ गयी थी। मुझे आज तक पता नहीं चल पाया है कि लड़कियाँ और औरतें, बहन की लौड़ियाँ इतने सैक्सी कपड़े क्यों पहनती हैं कि जिससे मर्द बे-काबू हो जाये। क्या हर औरत मन ही मन यह चाहती है कि कोई उसे चोदे? सोनिया ने भी ऐसी नाइटी पहनी हुई थी जो फ़्रंट ओपेन थी और जिस से सिर्फ उसके चूत्तड़ और आधी जाँघें छिप रही थी और स्लीवलेस होने के कारण उसकी साफ चिकनी बगलें दिख रही थीं।

नाइटी का कपड़ा इतना मोटा नहीं था, जिसके कारण उसकी छाती पर उठ रही नोकों से मालूम पड़ रहा था कि उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी, और जब वोह चौंकड़ी मार कर मेरे सामने पलंग पर बैठी तो मेरा तो बुरा हाल हो गया। उसकी चिकनी जाँघें और पैंटी में कसे हुए उसके चूत्तड़ और चूत की मछलियों को देख कर मेरा लंड तन गया। मैंने बड़ी मुश्किल से अपने ऊपर चद्दर डाल कर खुद को शरमिन्दा होने से बचाया। कोक पीते समय सोनिया ने बताया कि अबकी बार उसे ट्रिप में बहुत मज़ा आया और उसने अपनी सहेलियों के साथ खूब मस्ती करी। थोड़ी देर में वोह बोली, “सुनील मुझे बहुत जोर से नींद आ रही है, मैं तो अपने कमरे में सोने जा रही हूँ!”

मैंने करीब आधा घंटा वेट करा और अपने कमरे में बिस्तर पर लेट कर अपने लंड को मीना चाची के हाई हील के सैंडल से सहलाता रहा। उसके बाद मैं उठा और सोनिया के कमरे कि तरफ गया। सोनिया ए.सी. चला के आराम से दरवाज़ा बंद करके सो रही थी। मैंने चुप-चाप दरवाज़ा खोला और कमरे में घुस गया। सोनिया बड़े आराम से बिस्तर पे पीठ के बल सो रही थी और उसकी नाइटी जो पहले से ही छोटी थी, और उठ कर उसकी नाभी तक चढ़ गयी थी, जिससे कमर के नीचे का सब कुछ दिख रहा था। उसकी पैंटी में छुपी हुई चूत के उभार साफ-साफ दिखाई दे रहे थे। मेरा तो मादरचोद लंड साला हरामी ये देख कर ही खड़ा हो गया।

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मैंने सोनिया के पास जा कर उसके कँधे पकड़ कर थोड़ा जोर से हिलाया और बोला, “दीदी देखो आपकी सहेली का फोन आया है!”

सोनिया को कुछ फरक नहीं पड़ा। वोह तो बस बे-खबर हो कर सोती रही। मैंने फिर भी अपने को पक्का करने के लिये फिर से उसे जोर से आवाज़ दी और हिलाया पर उसको नींद की गोली के कारण कोई असर नहीं हुआ। मैंने सबसे पहले अपने कपड़े उतारे और पूरा नंगा हो कर सोनिया की नाइटी के आगे के बटन खोलने लगा और एक-एक करके सारे बटन खोल दिये। दोस्तों, उस समय मेरे हाथ काँप रहे थे क्योंकि आज मैं इतनी हिम्मत करके सोनिया का गोरा दूधिया बदन देखने जा रहा था जिसकी पैंटी और ब्रा सूंघ-सूंघ कर खूब मुठ मारा करता था। सोनिया एक दम दूध की तरह गोरी थी और आज से पहले मैं बहुत तड़पा था उसका नंगा बदन देखने के लिये।

नाइटी के सारे बटन खुलते ही उसके मस्त खिलौने नंगे हो गये और मैंने देखा कि सोनिया के निप्पल भूरे नहीं बल्कि पिंक से थे। सोनिया अब सिर्फ मेरे समने एक पैंटी में लेट कर बे-खबर सो रही थी। मैंने झुक के अपने होंठ खोल के सोनिया के गुलाबी निप्पल अपने होंठों में दबा लिये और उसकी जवान, अभी तक अनछूई मस्त बत्तीस साईज़ की चूँची अपने हाथ में भर ली। मीना चाची की बड़ी-बड़ी गदरायी हुई चूचियों को दबाने के बाद जब मैंने सोनिया की चूचियाँ दबाईं, तब मालूम पड़ा कि साली लौंडिया कि चूँची क्या चीज़ होती है। ऐसा लग रहा था जैसे किसी सख्त अनार को पकड़ लिया हो। दूसरा हाथ मैंने सोनिया की पैंटी में डाल दिया और उसकी बूर को अपने हाथों से फील करने लगा। सोनिया की चूत पर मेरा हाथ टच होते ही मैं तो ऐसा गनगनाया कि मैंने सोनिया के मस्त कच्चे अनार छोड़ कर दोनों हाथों से उसकी पैंटी उतारने लगा।

माँ कसम दोस्तों! क्या साली कुँवारी चूत थी मेरी आँखों के सामने। झूठ नहीं बोलूँगा, इच्छा तो यह करी कि उसकी टाँगें खोल के अपना लौड़ा सरका दूँ उसकी कसी चूत में, पर मीना चाची की इन्सट्रक्शन याद आ गयी। सोनिया की चूत कुँवारी होने के कारण उसकी बूर के लिप्स अभी तक खुले नहीं थे, बल्कि बड़े कायदे से एक लाईन में थे और उसके उसने भी मीना चाची की तरह अपनी चूत से झाँटें साफ कर रखी थीं। मेरा तो लौड़ा बुरी तरह से अकड़ गया था।

मैं भी बिना समय गँवाये मौके का पूरा लाभ उठाना चाहता था और मैं पूरा नंगा सोनिया के ऊपर चढ़ गया। मेरा लंड एकदम सोनिया की चिकनी मखमली चूत पर लग गया था। मैंने मारे मस्ती के सोनिया के पूरे नंगे बदन को अपनी बाहों में कस कर भर लिया और उसके नरम रस भरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और तबियत से उन्हें चूसने लगा। सोनिया की चूचियाँ इतनी सख्त थीं कि मेरी छाती में उसके निप्पल चुभ रहे थे और वो कसे हुए अनार जो मेरे सीने से लग कर थोड़े से दब गये थे, बहुत ही प्यारा सुख दे रहे थे। मेरा बदन तो मारे मस्ती के काँप रहा था, और मैंने अपने आप को थोड़ा सम्भालने के लिये एक सिगरेट जलाई और उसके ऊपर अपना लंड घिसने लगा।

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शुरू में तो मेरी यह हालत थी कि बस अभी रस निकला, पर बड़ा कँट्रोल करने के बाद मैं अब बड़े आराम से उसकी चिकनी मखमली चूत पर अपना लंड घिस रहा था। दोस्तों! इतना मज़ा आ रहा था कि कलपना करना भी मुशकिल है। सिगरेट खतम होने के बाद मैंने अपने मुँह में उसकी चूँची भर ली और जोर-जोर से चूसना चालू कर दिया। चूचियों का टेस्ट इतना नशीला था कि इतनी देर से रोका हुआ मेरे लंड का लावा पूरा सोनिया के पेट पर निकल गया और मैं भी परवाह किये बिना सोनिया कि तन्नाई हुई चूचियाँ चुसने में लगा रहा। दोस्तों!

मैंने किताबों में सिर्फ पढ़ा था कि जवान चूँची चूसने से लंड तन्ना जाता है पर मैंने तो उस समय खुद अनुभव किया कि मादरचोद मुश्किल से तीन या चार मिनट में फिर से गन्ना बन गया। मैंने उठ कर कपड़े से सोनिया का पेट साफ करा और एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर सोनिया के होंठों पर घिसने लगा। क्या सनसनाहट हो रही थी कि मेरा लंड और कस गया।

करीब पाँच-दस मिनट बाद मैंने सोनिया कि टाँगें खोलीं और उसकी जाँघों को चूसता हुआ अपनी जीभ उसकी कुँवारी बूर पर ले गया। मैंने भी अपनी जीभ की धार सोनिया के बूर की दरार पर खूब घीसी। बाद में जब मस्ती बढ़ गयी तब मैंने अपने होंठ पूरे चौड़े किये और सोनिया की मस्तानी चूत अपने मुँह में भर ली और चूसाई चालू कर दी। क्या मादक सुगँध आ रही थी। मैं तो जन्नत में था। करीब आधा घंटा बूर का मज़ा अपनी ज़ुबां से लूटने के बाद मैं उसकी खुली टाँगों के बीच बैठ गया और अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर दूसरे हाथ से अपना सुपाड़ा सोनिया की चूत के लिप्स खोल कर घिसने लगा। थोड़ी ही देर में लौड़ा इतना उबाल खा गया कि इससे पहले मैं रोक पाता सोनिया के खुले लिप्स के उपर ही मेरा लंड झड़ गया। मैंने करीब दो घँटे सोनिया के शरीर के साथ जी भर के खेला, और बाद में फिर से उसे पैंटी पहना कर और नाइटी ढँग से बंद कर के मैं बाहर आ गया और टी.वी. देखने लग गया।

सोनिया करीब शाम को पाँच बजे उठी और उन ही कपड़ों में मेरे पास आ कर बैठ गयी और बोली “सुनील शरीर बहुत दुख रहा है!”

मैने कहा, “कोई नहीं दीदी थोड़ा सा सुस्ता लो अभी आप ट्रिप से आयी हो इसके लिये थकान ज्यादा हो गयी है!”

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सोनिया वहीं पर मेरी जाँघों का सहारा ले कर लेट गयी और सुस्ताने लगी। थोड़ी देर बाद वो उठी और फ़्रैश होने के लिये चली गयी। शाम के साढ़े सात बज चुके थे। मैं मीना चाची के कमरे से व्हिस्की की बोत्तल ले आया और अपने लिये एक पैग बनाया और टी. वी. देखने लगा। इतने में सोनिया बाहर आयी और मुझे व्हिस्की पीते देख बोली, “सुनील तुम कब से पीने लग गये, मैं पापा-मम्मी से तुम्हारी शिकायत कर दूँगी।”

मैंने कहा, “सोनिया दीदी आपकी मम्मी को मालूम है। मैं कभी-कभी उनके साथ छुप कर पी लेता हूँ।” मैंने सोनिया को नहीं बताया कि उसकी मम्मी ने ही मुझे हफ़ते भर पहले पीना सिखाया है। और मेरी प्यारी दीदी आप क्या मेरी शिकायत करोगी!

“सच में? रियली.?” तब सोनिया बड़े ही शरारती मूड में मुझसे बोली, “एक शर्त है! तुम्हें मुझे भी टेस्ट करानी पड़ेगी।”

मुझे तो जैसे मन माँगी मुराद मिल गयी। मैंने कहा “चलो आप बैठो। मैं आपके लिये एक पैग बना कर लाता हूँ।”

मैंने अंदर जा कर तीन पैग के बराबर एक पैग बनाया और बाहर आ कर सोनिया को दे दिया। सोनिया एक दम मेरे बगल में बैठी और पहला घूँट उसने ऐसे पीया जैसे कोई कोका कोला हो। पूरा आधा ग्लास एक झटके में पी गयी। फिर बोली, “क्या सुनील यह तो बहुत स्ट्राँग है!”

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मैंने कहा, “कोई नहीं, आराम से एक-एक घूँट भर के पियो. तब आपको मज़ा आयेगा!”

टी.वी. पर रोमाँटिक फिल्म चल रही थी। मैं मीना चाची के रूम से जा कर सिगरेट ले कर आ गया। सोनिया पर अब खुमारी चढ़नी चालू हो गयी थी। मैंने जब अपने लिये एक सिगरेट जलाई तो वो बोली, “सुनील ये तुम्हें को क्या हो गया है, पहले शराब, फिर सिगरेट!”

मैंने कहा, “सोनिया दीदी शराब का मज़ा दुगना हो जाता है स्मोक करने से!”

उसने मेरे हाथों से सिगरेट छीन कर एक जोरदार कश लगाया। पहली बार पीने के कारण उसको खाँसी लग गयी। मैं एकदम घबरा उठा और उसकी पीठ सहलाने लगा और पेट के ऊपर हाथ ले जा कर उसे पीछे आराम से सोफे पर बैठाने की कोशिश करने लगा। नाइटी का कपड़ा चिकना होने के कारण मेरे हाथ फिसल गये और उसकी पूरी लैफ्ट साइड की चूँची मेरे हाथ में आ गयी। सोनिया ने उसका कुछ बूरा नहीं माना और मैं भी उसकी चूँची दबाये हुए सोफे पर पीछे खींच लाया और बोला, “सोनिया दीदी! ऐसे थोड़ी पी जाती है! देखो मैं बताता हूँ कि कश लिया जाता है!”

सोनिया शायद खाँसी से थोड़ा घबरा गयी थी। इस कारण वो मेरी बाहों का सहारा ले कर मेरे आगोश में बैठ गयी। पहले तो मैंने उसे उसका पैग दिया और बोला, “लो एक घूँट लगा लो, थोड़ा सा आराम मिलेगा और फिर एक कश लगाओ।”

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दो-तीन बार कश लगाने के बाद सोनिया को मज़ा आने लगा और बोली, “सुनील मुझे एक पैग और दो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है!”

मैंने फिर से पहले जैसा पैग बना कर सोनिया को दे दिया। अब वो पैग और सिगरेट तो ऐसे पी रही थी जैसे कब से उसकी आदत हो और अब वो थोड़ा मस्ती में भी आ गयी थी। अचानक उसने मुझसे पूछा, “सुनील! ये लंड क्या कॉक. आय मीन. पेनिस किसको कहते है?”

मैं तो सोनिया के मुँह से लंड सुन कर हक्का बक्का रह गया। मैंने कहा, “आप ये मुझसे क्यों पूछ रही हो?”

सोनिया बोली, “इसलिये पूछ रही हूँ कि मुझे हिंदी के वर्ड नहीं पता बस कॉक दिक पेनिस वगैरह ही पता है! मैंने पहले कभी इन बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। मेरी सहेली संजीदा ने मुझे बताया है कि अपनी पुस्सी में कॉक लेने में बड़ा मज़ा आता है। वो अपनी पुस्सी में अपने नौकर का कॉक खूब लेती है। उसका नौकर इसे लंड बोलता है! बताओ ना सुनील ये पेनिस को ही लंड कहते हैं ना? तुम्हारे पास भी तो होगा, मैं देखना चाहती हूँ!”

मुझे सोनिया के इस बात पर हँसी आ गयी। सोनिया काफी पढ़ाकू लडकी थी और हमेशा फर्स्ट आती थी। मैंने कहा, “आप सहेलियाँ आपस में ऐसे बातें करती हो.?”

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तो वो एकदम बोली, “सुनील तुम भी एक दम अनाड़ी हो। मैंने बताया तो था सुबह कि अब की बार ट्रिप पर बहुत मज़ा आया। अबकी पहली बार हम सब ने इस तरह की बातें करी और पता है सुनील? हम चारों को एक रूम मिला था और संजीदा इतनी बदमाश है. उसी ने हम सबको यह सिखाया है। वो ही रात को हमारे सारे कपड़े उतार देती और फिर कहती थी कि एक-एक करके उसके ऊपर अपना बदन घिसो।

मैं सारी सहेलियों में सबसे सुंदर हूँ तो उसने मुझे अपने नीचे लिटा लिया और बोली- सोनिया तुझे तो नंगा देख कर ही किसी का भी लंड झड़ जायेगा, अब तू चुपचाप पड़ी रह और उसने मेरी पुस्सी पर अपना मुँह लगा दिया और अपनी जीभ से चाटने लगी। सुनील बहुत मज़ा आया था। सबसे सुंदर होने के कारण रोज़ तीनों मिल कर मेरे ऊपर चढ़ती थीं और मुझे चूसती थीं। आज मैं जब से सो कर उठी हूँ मेरे पूरे बदन में फिर से वैसी ही बेचैनी हो रही है जो मुझे तब होती थी जब मेरी सहेलियाँ मेरे साथ अपना बदन घिसती थीं।”

मैंने भी सोचा कि मौका अच्छा है और सोनिया को बोला कि, “मैं आपको अपना लंड दिखाऊँगा तो मुझे क्या मिलेगा?”

सोनिया फट से बोल पड़ी, “जो तुम लेना चाहो।”

मैने कहा, “जो मैं बोलूँगा आपको मेरी बात माननी पड़ेगी और जैसे-जैसे मैं कहूँ वैसे ही आपको करना पड़ेगा। बोलो तैयार हो तो मैं अपना लंड दिखाऊँ।”

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सोनिया तो एकदम उतावली हो रही थी। मैंने उसे अपने सामने खड़ा करा और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये और अपने दोनों हाथ उसकी पैंटी में डाल कर उसके मस्त चूत्तड़ों को दबाने लगा। सोनिया ने भी अपना मुँह खोल दिया था और मैं बड़े आराम से उसकी जीभ चूसने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने अपने हाथ उसकी पैंटी पर से हटाये और उसकी नाइटी खोल दी और उसको सिर्फ पैंटी पहने रहने दिया।

मैंने भी उसको छोड़ के अपने बदन पर अंडरवीयर के अलावा सारे कपड़े उतार दिये। सोनिया को शराब के नशे में होश भी नहीं था कि मैं उसको नंगा कर चुका हूँ। बाद में मैंने उसकी पैंटी उतार दी और उसकी दरार पर अपना हाथ फेरने लगा। जैसे ही मैंने उसकी दरार पर हाथ फेरा तो सोनिया का थोड़ा सा नशा टूटा और वोह बोली, “क्या सुनील तुमने मुझे तो नंगा कर दिया पर अभी तक अपना लंड नहीं दिखाया। यह बात गलत है!”

मैंने जल्दी से अपना अंडरवीयर उतारा और अपना मोटा तगड़ा तंदुरूस्त लंड उसके हाथों में दे दिया। सोनिया को तो मानो लकवा मार गया। वो बोली, “सुनील यह इतना सख्त बड़ा और मोटा कैसे हो गया!”

तब मैंने सोनिया को बड़े प्यार से अपनी जाँघों पर बिठाया और उसकी पुश्त चूचियों को अपने हाथों में भर कर बोला, “मेरी प्यारी दीदी! य़े तो आपको नंगा देख कर इतना बड़ा हो गया है! आपको पता है पुस्सी में को चूत कहते हैं और चूत में जब लंड जाता है तो उसे चुदाई कहते हैं! मर्दों को जब चूत नहीं मिलती और बहुत जोश में होते हैं तो वो अपने हाथ से अपने लंड को कसकर पकड़ लेते हुए आगे-पीछे करते हैं, जिसे मुठ मारना कहते हैं। इस तरह औरते भी जब मस्ती में होती हैं तो वोह अपनी जाँघें चौड़ी करके अपनी उँगली पर थूक लगा कर अपनी चूत के दाने को खूब मसल-मसल के अपनी आग ठंडी करती हैं। कईं औरतें अपनी चूत में गाजर, केला य बैंगन डाल कर अपनी प्यास बुझाती हैं!”

सोनिया हंसते हुए बोली, “सुनील मैं बच्ची नहीं हूँ तुमसे दो साल बड़ी हूँ और सैक्स, फकिंग और मैस्टरबेशन के बारे में जानती हूँ. बस ये हिंदी के वर्ड्स मेरे लिये नये हैं. मैं खुद भी कईं बार मैस्टरबेट करती हूँ. मेरा पूछने का मतलब ये था कि इतना बड़ा और मोटा लंड इतनी छोटी इतनी छोटी कंट. ऑय मीन चूत. ऑय मीन चूत में कैसे जायेगा। संजीदा तो कह रही थी कि लंड सिर्फ़ पाँच-छे इंच लम्बा होता है और करीब एक डेढ़ इंच मोटा होता है!”

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मैंने कहा, “आप अभी यह मत सोचो, समय आने पर आप बड़े प्यार से अपने अंदर ले लोगी, और तरसोगी कि और मिल जाये। पर अभी आप वक्त मत खराब करो। अभी आप इसे लॉलीपॉप की तरह अपने मुँह में लेकर चूसो और जब तक मेरा जूस नहीं निकल जाता, आप इसे चूसती रहना और मेरा पूरा जूस पी जाना और मेरे मुँह पर अपनी चूत रख दो। मैं भी आपकी कुँवारी चूत का पानी पीना चाहता हूँ।”

सोनिया को मुँह में लेने में थोड़ी सी तकलीफ हुई क्योंकि मेरा लंड मोटा था और अभी उसका मुँह छोटा था पर धीरे-धीरे सरकाने पर वो बड़े आराम से अपना मुँह ऊपर नीचे करते हुए चूसने लगी। मैंने भी सोनिया के दोनों चूत्तड़ अपने हाथों में ले लिये और उनको मसलते हुए उसकी ताज़ी जवान खुशबूदार चूत पर अपने होंठ चिपका दिये और सोनिया की तरह मैं भी उसकी चूत तबियत से चूसने लगा। करीब आधा घँटा एक दूसरे की चूसाई के बाद मेरा लंड अपनी धार उसके ताजे मुँह में देने को तैयार था और इधर सोनिया का भी मस्ती के मारे बुरा हाल था।

वो अब आगे-पीछे होते हुए मेरे मुँह पर अपनी बूर जोर से घिस रही थी। मैंने उसका सिर अपने हाथ ले जा कर लंड पर दबा दिया और पिचकारी छोड़ दी। सोनिया ने भी लंड बाहर नहीं निकाला और मेरा पूरा जूस पी गयी। मैंने भी अपनी जीभ की स्पीड और बूर की चूसाई तेज़ कर दी और तभी सोनिया ने अपने मुँह से मेरा लंड निकाला और जोर से किलकारी मारते हुए मेरे मुँह में अपना जूस निकाल दिया। हम दोनों थोड़ी देर इस अवस्था में पढ़े रहे और फिर बाद में नंगे ही एक दूसरे की बाहों में सोफे पर बैठ गये और स्मोक करने लगे।

मैंने बड़े प्यार से सोनिया का चेहरा उठा कर पूछा, “कैसा लगा अपने छोटे भाई का लंड और चूसाई? मज़ा आया कि नहीं?”

वोह शरमाते हुए बोली, “सुनील तुम बड़े बदमाश हो, पर सच में इतना आनंद तो मैंने आज तक महसूस ही नहीं किया। संजीदा और बाकी सहेलियाँ भी जब चूसती थीं और अपना बदन घिसती थीं तब भी इतना मज़ा नहीं आता था। सुनील मैं तो अब रोज़ चूसूँगी और अपनी तुमसे चुसवाऊँगी!”

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मैंने भी अंजान बनते हुए कहा, “क्या सोनिया दीदी?”

तो वो बोली, “धत्त सुनील! तुम्हारा लंड और अपनी चूत!”

सोनिया मेरे आगोश में लेट कर बड़े ही प्यार से मेरे लंड से खेल रही थी जो अब फिर से खड़ा हो गया था। सोनिया बोली, “सुनील तुम मेरी चूत में नहीं डालोगे क्या.? मेरी बहुत इच्छा हो रही है कि लेकर तो देखूँ कैसा लगता है। साली कुत्तिया संजीदा अपनी चूत के पपौटे दिखा-दिखा कर बहुत चिढ़ाती थी औ कहती थी कि देखो चुदा कर मेरी चूत तुम सबसे सुंदर है। अब मैं भी उसे चिढ़ाऊँगी कि देख साली रन्डी. तू तो सिर्फ पाँच-छः इंच वाले से चूदाती है। मैं तो अपने कज़न सुनील का साढ़े-आठ इंच का लंड लेती हूँ अपनी चूत में।” फिर बोली, “सुनील तुमने किसी को चोदा है पहले?”

तब मैंने उसे सच-सच बताना ठीक समझा और बोला, “सोनिया दीदी! मैं मन ही मन में आपको और आपकी मम्मी से बहुत प्यार करता हूँ और रात को आप दोनो के ख्वाब देख कर मुठ मारा करता था.” और फिर मैंने उसे पूरी कहानी बता दी।

सोनिया बड़े आश्चर्य के साथ बोली, “क्या??? सुनील तुम मम्मी को चोदते हो? मैं नहीं मानती।”

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तब मैंने कहा, “चलो ठीक है, कल जब आपकी मम्मी घर पर आयेंगी और मुझे जब अंदर बूलायेंगी तब आप बालकोनी से देखना. आपकी मम्मी कितने प्यार से मुझसे चुदवाती है। हमने तो प्लैन भी बनाया है कि आपकी मम्मी आपके साथ मेरी चुदाई करवायेंगी।”

सोनिया इतना सब सुन कर थोड़ी सी गरम हो गयी थी और अपनी चूत उसने मेरी टाँगों पर घिसनी चालू कर दी थी। मैंने कहा, “सोनिया दीदी! मैं आपको बड़े प्यार से चाची के प्लैन वाले दिन ही भोगना चाहता हूँ। इस लिये आज सिर्फ एक दूसरे की चूसाई करेंगे.” और इतना कह कर फिर से हम लोग ६९ के आसन में हो कर एक दूसरे को चूसने लगे। उस रात हम दोनों एक ही कमरे में एक दूसरे को बाहों में भर कर सोये। अगली सुबह मुझे मीना चाची को लेने जाना था तो मैं सोती हुई नंगी सोनिया को प्यारी से पप्पी दे कर मीना चाची को लाने के लिये एयरपोर्ट चला गया।

कार में बैठते ही मीना चाची ने मुझे किस करा और बोली, “सुनील मैं तो बूरी तरह से मचल रही हूँ चुदाई के लिये। सोनिया जब तक सो कर उठेगी तब तक तू मेरी जम कर चुदाई कर दे।”

मैंने कहा, “मीना डार्लिंग! मैं भी तो तड़प रहा हूँ तुम्हें चोदने के लिये और तुम अब सोनिया की चिंता छोड़ दो!” और मैंने मीना चाची को सारी कहानी बता दी।

मीना चाची ने आगे बढ़ कर मुझे किस कर लिया और बोली, “मैं तो सोनिया के साथ तेरी चुदाई कल करवाऊँगी। आज तो तू दिन भर सिर्फ मुझे चोद कस कर। मेरा तो पूरा बदन तरस रहा है तेरे हाथों से मसलवाने के लिये।”

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हम जब घर पहुँचे तो सोनिया उठ गयी थी। थोड़ी देर इधर-उधर की बातें करने के बाद मीना चाची बोलीं, “सोनिया देख मैं सुनील के साथ सोने जा रही हूँ, तो कोई भी फोन या कोई घर पर आये तो उसे मना कर देना और मुझे डिस्टर्ब मत करना।”

सोनिया मेरी तरफ देख कर मुस्कराई और समझ गयी कि उसकी मम्मी कमरे में जा कर मुझसे चुदवायेंगी। मीना चाची ने उसे देख लिया और बोली “सोनिया बेटा! मुझे सुनील ने सब बता दिया है। तू घबरा मत. कल मैं तुझे ज़िंदगी का वो सुख दिलवाऊँगी जिसकी तूने कल्पना भी नहीं करी होगी।”

इतना बोल कर मीना चाची ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और मैंने उनको। फिर हम दोनों कमरे में घुस गये और घुसते ही एक दूसरे पर ऐसे टूट पड़े जैसे कितने दिनों के भूखे हों। मैं मीना चाची को अपनी बाहों में भर कर बुरी तरह से मसलते हुए चूस रहा था और मीना चाची मेरी पैंट खोल रही थी। मैंने देखा कि सोनिया बालकोनी में खड़ी हो कर हम दोनों को देख रही थी। इस ख्याल से कि सोनिया अपनी मम्मी को मुझ से चुदाते हुए देखेगी, मेरा लंड कुछ ज्यादा ही अकड़ गया और मैंने मीना चाची के कँधे दबा कर उन्हें वहीं बिस्तर पर बिठा दिया और सिर को पकड़ कर अपना लंड मीना चाची के मुँह में उतार दिया और सोनिया को देखते हुए मीना चाची का मुँह चोदने लगा और अपना पूरा लंड उनके मुँह में फँसा कर झड़ गया।

फिर मैंने मीना चाची कि साड़ी, ब्लाऊज़, पेटीकोट उतारे और सोनिया को दिखाते हुए उनकी चूचियाँ ब्रा के ऊपर से पहले खूब मसलीं और बाद में उनकी ब्रा उतार के उनके दोनों निप्पल अपनी उँगलियों के बीच में मसले। मीना चाची तो सितकार उठी और बोली, “मादरचोद इतना क्यों भड़का रहा है मेरी चूत की आग? पहले से ही चूत में आग भड़की हुई है।”

मैंने मीना चाची को खड़ी कर के उनके चूत्तड़ बालकोनी की तरफ कर दिये ताकि सोनिया आराम से देख सके। मीना चाची के हाई हील सैण्डलों में कसे पैर जमीन पर थे और मैंने उन्हें चूचियों के सहारे बिस्तर पर टिका दिया जिससे उनकी चूत और गाँड के छेद खुल कर सामने आ गये। मैंने सोनिया की तरफ़ देखते हुए मीना चाची की चूत और गाँड के छेद पर उँगली फेरनी चालू कर दी और एक हाथ से अपना लंड सहलाने लगा। उसके बाद मैने झुक कर मीना चाची के सैण्डलों में कसे पैर चाटने लगा और फिर धीरे-धीरे उनकी टाँगों और जाँघों को चाटते हुए ऊपर बढ़ा और फिर उनकी उभरी हुई चूत को अपनी जीभ से चटना शुरू कर दिया जिससे मीना चाची की सितकारियाँ निकलनी चलू हो गयी और वोह अपनी गाँड के धक्के मेरे मुँह पर देने लगी।

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मीना चाची की चूत अपने मुँह में झड़वाने के बाद मैंने खड़े-खड़े ही अपना लंड सोनिया को दिखाते हुए मीना चाची की चूत पर रखा और झुक कर उनकी मदमस्त लटकती हुई चूचियों को पकड़ कर मसलते हुए जोर से धक्का मारा जिससे मेरा पूरा लंड मीना चाची की चूत में समा गया। मीना चाची इस पोज़ में अपने चूत्तड़ मटकाती हुई मेरा लंड ले रही थी और मैं भी पूरे जोश में उनकी चूत चोद रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने अपना लंड निकाल कर मीना चाची की टाँगें फैला कर बिस्तर पर लिटा दिया और उनके ऊपर चढ़ कर दना-दन चोदने लगा। करीब आधा घँटा चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़े और मीना चाची ने अपनी जाँघें बंद करके मेरा लंड अपनी चूत में ही रहने दिया और बोली, “डार्लिंग! ऐसे ही मेरे ऊपर सो जा ताकि जब तेरा दोबारा खड़ा हो तो बिना वक्त गंवाये मुझे चोदना चलू कर देना। मेरी चूत को इतनी ठंडक मिली है कि मैं तो एक सिगरेट पी कर सोऊँगी।”

मैं तो मस्ती में था और मीना चाची कि गुदाज़ चूचियों पर लेट कर सुस्ताने लगा। दिन भर हम दोनों ने जी भर के एक दूसरे के साथ चुदाई की और अपने बदन की हवस को पूरा शाँत की।

शाम को मीना चाची बिस्तर पर सिर्फ हाई हील वाले काले और चमचमाते सैण्डल पहने, नंगी पसरे हुए ड्रिंक पी रही थीं और मैं अपने होंठ और जीभ उनके सैण्डलों और पैरों पर फिरा रहा था। मुझे उनके सैण्डलों और पैरों की महक और टेस्ट बहुत अच्छा और उत्तेजक लग रहा था, जिसकी वजह से मेरा लौड़ा तन कर सीधा खड़ा था। मीना चाची बोली, “डार्लिंग अब और चूदाई नहीं करेंगे ताकि तेरा लंड कल सोनिया की चूत के लिये एकदम तैयार और बे-करार रहे। मैं चाहती हूँ कि जब उसे तेरा लंड मिले तो एक दम ताज़ा और मस्त मिले। कल दिन में सोनिया के साथ अपना हनीमून मना लेना।”

मैंने उनकी सैण्डल चाटते हुए कहा, “मीना चाची! दिदी मेरे लिये एकदम तैयार कर देना और हनीमून मैं उनके साथ मॉडर्न ड्रैस में मनाऊँगा।”

मीना चाची बोली, “तू चिंता मत कर! मैं उसे कल सुबह बाज़ार से सैक्सी काली ब्रा-पैंटी, मॉडर्न ड्रैस और सैक्सी हाई हील सैंडल दिला कर लाऊँगी जिसे देख कर तेरा लंड और तन जाये। मैं उसे बिलकुल मॉडर्न तरह से तैयार करूँगी और ध्यान रहे कल बारह-एक बजे तक तू घर पर मत रहना। मैं अपनी बेटी को बड़े प्यार से तैयार करना चाहती हूँ ताकि उसे अपनी पहली चूदाई हमेशा याद रहे!”

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मैंने कहा, “पर अभी अपने इस तने हुए लंड का क्या करूँ?”

मीना चाची बोलीं, “तुझे मेरे सैंडल पहने हुए पैर बहुत सैक्सी लगते हैं ना! तो तू अभी अपना लंड इन्हीं पर घिस कर क्यों नहीं ठंडा कर लेता। सच, तुझे मेरे हाई हील सैंडल पहने पैरों को चोदने में जरूर मज़ा आयेगा।”

मीना चाची का यह आईडिया सुन कर मेरा लंड और भी अकड़ गया। मैंने झट से उनके सैंडल पहने पैरों को अपने दोनों हाथों में लिया और अपना लंड दोनों सैंडलों के बीच में आगे-पीछे करने लगा। सैंडल के तलुवों और लैदर का फील बहुत मस्त लग रहा था और चार-पाँच मिनट में ही मेरी पिचकारी मीना चाची के सैंडल, पैरों और टखनों पर छूट गयी। उसके बाद मीना चाची को नंगा बिस्तर पर छोड़ के बाहर आ गया और सीधा सोनिया के कमरे में गया। सोनिया सिगरेट पीते हुए पूरी नंगी हो कर अपनी चूत के दाने को घिस रही थी और मस्ती में अपने चूत्तड़ ऊपर नीचे उछाल रही थी। मुझे आया देख कर शरमा गयी और बोली, “सुनील ये क्या. तुम बिना नॉक करे ही आ गये।”

मैंने प्यार से उसका किस लिया और बोला, “मेरी प्यारी दीदी! बस आज-आज मुठ मार लो, कल के बाद तो आपकी जब भी इच्छा होगी, मैं आपको खूब चोदूँगा। बताओ आपको कैसा लगा अपनी मम्मी की चूदाई देख कर?”

सोनिया बोली, “सुनील! मम्मी बहुत ही सैक्सी दिखती है नंगी हो कर। मैंने तो मम्मी के साथ तुम्हें नंगा देख कर ही अपनी जाँघें कस ली थीं और जब तुम मम्मी के चूत्तड़ फैला कर उनकी चूत चाट रहे थे, मैंने अपना एक हाथ अपनी पैंटी में डाल कर अपने दाने को खुब घिसा था। सुनील बताओ ना! मम्मी मेरी तुम्हारे साथ चुदाई कब करवायेंगी।”

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मैं बोला, “बस मेरी डार्लिंग दीदी! कल के लिये आप तैयार हो जाओ। कल आपको कच्ची कली से पूरा फूल बना दूँगा। फ़िलहाल अभी थोड़ा मेरे लंड को चूसते हुए अपनी मुठ मारो। देखो कितना मज़ा आयेगा।”

सोनिया ने लपक के मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया और अपनी चूत घिसते हुए सका-सक मेरा लौड़ा चूसने लगी और पँद्रह-बीस मिनट बाद तबियत से चूसते हुए अपनी चूत का और मेरे लंड का पानी निकाला। मैंने भी झुक के उसकी चूत का पानी अपनी जीभ से चाट-चाट कर पीया। मीना चाची नहा-धो कर सिर्फ़ पैंटी-ब्रा और सैण्डलों में ही अपने रूम से निकली और अपने मोटे-मोटे चूत्तड़ मेरी गोदी में रख कर बैठ गयी और हम तीनों ने एक साथ ड्रिंक की और स्मोक किया। मीना चाची उसके बाद उठीं और सोफ़े पर बैठ कर सोनिया को अपनी गोद में बिठाया और बोली, “मॉय डीयर! तू तैयार है ना औरत बनने के लिये?”

सोनिया ने शरमा कर अपना मुँह मीना चाची की ब्रा में कैद उन्नत चूचियों में छुपा लिया। मीना चाची ने उसका सिर उठा कर कहा, “सोनिया तू बड़ी किस्मत वाली है जो तुझे घर बैठे इतना तगड़ा मर्द और मस्त लंड मिलेगा। मैं नहीं चाहती कि तू भी मेरी तरह चुदाई के लिये तड़पे। तेरे पापा मुझे एक दम ठंडा नहीं कर पाते हैं, जिससे मेरा दिमाग खराब रहता था। पर अब मुझे सुनील का लंड मिल गया है जो मुझे पोर-पोर तक चुदाई का सुख देता है। मेरी इच्छा यही है सोनिया बेटी कि तू भी भरपूर चुदाई का मज़ा ले ले शादी से पहले। पता नहीं शादी के बाद ये सुख तुझे मिले ना मिले।”

उसके बाद हमने खाना खाया और अपने-अपने कमरे में चले गये। अगले दिन मैं सुबह नहा-धो कर बाहर चला गया ऐसे ही घूमने के लिये और करीब साढ़े बारह बजे वापस आया। मीना चाची ने मुझे पहले तो बाहों में लेकर किस करा और बोली, “तेरी रानी अंदर बैठी है सज-सँवर के। जा पहले तू नहा-धो ले और फ़्रैश हो जा। अब कल सुबह तक तुझे उसकी जम कर चुदाई करनी है। मैं सब कुछ रूम में ही पहूँचा दूँगी।”

मैं भी बेसब्री के साथ नहा-धो कर तैयार हुआ और सिर्फ़ अपनी सबसे सैक्सी दिखने वाली अंडरवियर पहनी और मीना चाची का चुम्बन लेकर कमरे में घुस गया। मज़ा आ गया था। अंदर मीना चाची ने पूरा डिस्को बनाया हुआ था और सोनिया को बहुत ही सैक्सी टॉप-स्कर्ट में तैयार करा हुआ था। सोनिया की टॉप के उपर के चार बटन खोल कर नीचे से गाँठ बन्धी हुई थी और गज़ब का मेक-अप करा हुआ था। सोनिया भी हाई हील्स पहन कर एक डाँस पर अपने चूत्तड़ थिरकाते हुए नाच रही थी। मैंने चुपचाप पीछे से जा कर उसकी मचलती हुई चूचियों को पकड़ लिया और सोनिया को हवा में घूमा दिया। फिर सीधा कर के हमने एक दूसरे को बाहों में कस लिया और तड़ातड़ एक दूसरे को चूमने और चाटने लगे। मीना चाची ने सही कहा था। वाकय में सोनिया बहुत ही सैक्सी लग रही थी और अगर वोह ऐसे रूप में कहीं सड़क पर चली जाती तो जरूर उसकी चूत का आज भोंसड़ा बन जाता।

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सोनिया ने झूक कर ड्रिंक बनाना चालू किया तो मैंने भी पीछे से उसकी स्कर्ट नीचे खिस्का दी और झुक कर कुत्ते कि तरह उसके चूत्तड़ों में अपना मुँह लगा दिया और चाटने लगा। मीना चाची ने सोनिया को काले रंग की नेट की बहुत ही टाईट रेशमी पैंटी पहनायी थी जिससे वो उसकी गाँड की दरार में घुस गयी थी और उसके गोरे फूले हुए छोटे-छोटे मस्त चूत्तड़ों को और मादक बना रही थी। क्या महक आ रही थी उसके पिछवाड़े से। मैं तो मस्ती के आलम में आ गया था।

सोनिया ने मुझे एक ड्रिंक दी और अपने लिये एक सिगरेट जलाई और मेरी गर्दन में अपनी बाहें डाल कर बोली, “सुनील. सुनील. आज जी भर के अपनी चचेरी बहन को चोद लो!” और मुझे बिस्तर पर बिठाकर मेरी अंडरवियर में तन्नाए हुए लंड पर अपने चूत्तड़ घिसते हुए बैठ कर ड्रिंक और स्मोक करने लगी। मैंने उसकी टॉप के बटन और बंधी हुई गाँठ को खोला और उसकी स्टॉप उतार दी। मीना चाची ने सोनिया को क्या मस्त काले रंग की रेशमी ब्रा पहनायी थी। एकदम पतले स्ट्रैप थे और ब्रा के कप सिर्फ़ उसके आधे निप्पल और नीचे की गोलाइयाँ छुपाये हुए थे। रेशमी नेट के अंदर से उसकी दूधिया चूचियों की बड़ी साफ झलक मिल रही थी। मैंने उसे खड़ा होने को कहा और कुर्सी पर टाँगें फैला कर बैठ गया और सोनिया को बोला कि वो अपनी टाँगें मेरी टाँगों के दोनों तरफ करके अपनी पैंटी में कसी हुई बूर मेरे लंड पर रखे और आराम से बैठ कर ड्रिंक करे। तब तक मैं उसकी कसी हुई मस्त जवानी जम कर चूसना और दबाना चाहता था।

सोनिया बड़े ही कायदे से मेरे लंड के उठान पर बैठ गयी और बहुत हल्के-हल्के ढँग से अपनी पैंटी मेरे लंड से उठी हुई मेरी अंडरवियर पर घिसते हुए मेरी गर्दन में बाहें डाल कर ड्रिंक और स्मोक करते हुए बोली, “सुनील डार्लिंग मसल डालो मेरी इन जवानियों को। देखो तो सही कैसे तन कर खड़ी है तुमसे चुसाने के लिये। मेरे मस्ताने सेबों का मज़ा ले लो मेरी जान।”

मैं भी अपने हाथ उसकी पीठ पर ले गया और उसकी ब्रा के हूक खोल दिये और बड़े प्यार से उसकी चूचियाँ नंगी करी। उसकी बत्तीस साइज़ की कसी हुई मस्तियाँ मेरे सामने तन कर खड़ी हुई थीं और मैंने भी बिना वक्त गँवाये दोनों चूचियों पर अपना मुँह मारना शूरू कर दिया। मैं बहुत ही बेसब्रा हो कर उसकी चूचियाँ मसल और चूस रहा था जिससे उसको थोड़ा सा दर्द हो रहा था। पर फिर भी मेरे सिर को अपनी चूचियों पर दबाते हुए कह रही थी, “डार्लिंग आराम से मज़ा लो, इतने उतावले क्यों हो रहे हो। आज तो हमारा हनीमून है। कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ। जम के चूसवाऊँगी और मसलवाऊँगी। इनको इतना मसलो कि कॉलेज में मेरी चूचियाँ सबसे बड़ी हो जायें।”

करीब आधा घँटा इस चूसाई के बाद मैंने कहा, “सोनिया दीदी! अब तो आप तैयार हो जाओ औरत बनने के लिये।”

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मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और फूलों से सजे पलंग पर लिटा दिया। लाल गुलाब से सजे पलंग पर काले रंग की पैंटी से ढका सोनिया का गोरा बदन ऐसा लग रहा था जैसे कोई अपसरा अपने कपड़े उतार के सो रही हो और काला भँवरा उसकी ताज़ी चूत का रस चूस रहा हो। मैं करीब पाँच मिनट तक सोनिया के नंगे बदन की शराब अपनी आँखों से पीता रहा, और फिर बिस्तर पर चढ़ कर मैंने सोनिया की कमर चूसनी चालू करी और चूसते हुए अपना मुँह उसकी पैंटी पर लाया और पैंटी का इलास्टिक अपने दाँतों में दबा कर अपने मुँह से उसकी पैंटी उतारने लगा। सोनिया ने भी अपने चूत्तड़ हवा में उठा दिये थे ताकि पैंटी उतारने में परेशानी ना हो। पर मीना चाची ने इतनी टाइट पैंटी पहनाई थी कि मुझे अपने हाथ भी लगाने हे पड़े उतारने में। दोस्तों! पैंटी उतार के जो नज़ारा मेरे सामने था, मैं आपको बता नहीं सकता।

मीना चाची ने बड़े ही प्यार से सोनिया की चूत के बाल साफ़ करे थे। सोनिया चूत चुदने के लिये इतनी बेकरार थी कि चूत के लिप्स गीले थे। सोनिया बोली, “डार्लिंग! मम्मी ने मेरी पूसी क्रीम से साफ करी है और मुझे बोला है कि मैं कभी भी अपनी पूसी शेव नहीं करूँ नहीं तो खराब हो जायेगी।”

मेरा लंड तो सोनिया की चिकनी नंगी मस्ताई हुई, चुदने के लिये तैयार चूत को देख कर ही मेरी अंडरवियर को फाड़ कर बाहर आने के लिये बेकरार था और उछल-कूद मचा रहा था। मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी अंडरवियर उतार दी और अपना मुँह मेरे सामने लेटी हुई नशे की बोतल के खज़ाने के मुँह पर लगा दिया। सोनिया तो मस्त हो गयी और मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी। मैं भी चाहता था कि सोनिया थोड़ा पानी छोद दे ताकि उसकी ताज़ी कुँवारी चूत थोड़ी चिकनी हो जाये और तकलीफ कम हो। मैंने उसकी चूत का दाना चूसते हुए अपनी जीभ से उसकी चुदाई चालू कर दी और करीब पाँच मिनट बाद ही सोनिया ने मेरा सिर अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और कस कर अपनी पूरी ताकत से मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा लिया और जोश में काँपते हुए चूत्तड़ों के धक्के देती हुई मेरे मुँह में अपना रस देने लगी। मैंने भी मन से उसकी जवान चूत चूसी और चूत के लाल होंठों को अपने होंठों से चूसा।

फिर मैं घूटने के बल सोनिया के सामने बैठ गया और बूरी तरह अकड़ा हुआ अपना लंड उसके सामने कर दिया और सोनिया की गर्दन में हाथ डाल कर उसका मुँह अपने लंड के पास लाया और बोला, “मेरी प्यारी सोनिया दीदी, मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर अपनी चूत बजाने के लिये तो इनवाइट करो।”

सोनिया ने तपाक से अपना मुँह खोला और मेरा सुपाड़ा अपने होंठों के बीच ले लिया और जीभ फेरने लगी। मेरे लंड पर सोनिया के जीभ फेरने ने वो काम किया जो आग में घी करता है। मुझसे रहा नहीं गया और दोनों हाथों से सोनिया का सर पकड़ कर उसके मुँह में ही मैंने आठ-दस शॉट लगा दिये। लौड़े का तो मारे गुस्से के बूरा हाल था। एक तो उसे कल से चूत नहीं मिली थी और दूसरा उसके सामने ऐसी मलाईदार चूत थी और मैं चूतिया की तरह उसकी भूख मिटाने की बजाये चुम्मा चाटी कर रहा था।

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अपना लंड सोनिया के मुँह से बाहर निकाल कर के मैं बिस्तर पर से उतरा और मीना चाची ने पहले से ही इम्पोर्टेड बड़ी ही खुशबू वाली चिकनाहट की क्रीम मेज पर रखी हुई थी। मैंने उसे उठा कर थोड़ी ज्यादा ले कर सोनिया की चूत पर और चूत के अंदर की दीवारों पर लगा दी और फिर अपने लंड पर लगाने लगा। सोनिया बोली, “ये तुम क्या कर रहे हो?”

मैंने उसे समझाया और बोला, “आज मैं आपकी चूत को भोंसड़ा बनाने जा रहा हूँ तो मुझे अपना लंड आपकी चूत में घूसेड़ना पड़ेगा और आपको तकलीफ ना हो इस लिये मैं आपकी चूत को और अपने लंड को चिकना कर रहा हूँ।”

मैंने बिस्तर पर चढ़ कर सोनिया की जाँघों को अपने हाथों से पूरा फैला दिया और एक हाथ से लंड पकड़ कर दूसरे हाथ से सोनिया की चूत के लिप्स खोल कर अपना गुस्साया हुआ लाल सुपड़ा उसकी गुलाबी चूत से सटा दिया और बहुत हल्के-हल्के घिसते हुए बोला, “देख लो सोनिया दीदी! अपने लंड की आपकी चूत से मुलाकात करा रहा हूँ।”

सोनिया को भी अपनी चूत पर लंड घिसाई बहुत अच्छी लग रही थी। वोह सिर्फ़ मस्ती में “ऊँमम ऊँमम” कर सकी। एक दो मिनट बाद मैंने देखा कि सोनिया पर मस्ती पूरी तरह से सवार हो चूकी है तो मैंने अपने लंड का एक हल्का सा शॉट दिया जिससे मेरा लंड सोनिया की चूत बहुत ज्यादा कसी होने के कारण से फिसल कर बाहर आ गया। इससे पहले कि सोनिया कुछ समझ पाती, मैंने एक हाथ से अपना लंड सोनिया के चूत के लिप्स खोल के उसके छेद पर रखा और अपने चूत्तड़ों से कस के धक्का दिया जिससे मेरा मोटा तगड़ा लंड दो इंच सोनिया की चूत में घुस गया। सोनिया की गाँड में तो जैसे भूचाल आ गया। वोह जोर से चीखी, “सुनील मार डाला! ये क्या डाला है मेरे अंदर। बहुत दर्द हो रहा है। सुनील प्लीज़ बाहर निकाल ले।”

मैंने कुछ परवाह ना करते हुए दूसरा शॉट और कस के लगाया और अब मेरा पाँच इंच लंड सोनिया की चूत में समा चुका था। ऐसा लग रहा था जैसे किसी बोत्तल के छोटे छेद में अपना लंड घुसा दिया हो और बोत्तल के मुँह ने कस कर मेरे लंड को पकड़ लिया हो। अगर मैंने सोनिया की कमर कस के पकड़ नहीं रखी होती तो सोनिया मेरा लंड निकाल के बाहर भाग जाती और ज़िंदगी भर कभी भी किसी से चुदवाती नहीं। सोनिया अब मेरे सीने पर मुक्के मारने लगी तो मैंने उसके दोनों हाथ पकड़ कर फैला दिये और अपने पूरे शरीर का भार देते हुए उसके ऊपर लेट कर अपना पाँच इंच लंड अंदर-बाहर करने लगा। करीब पाँच-दस मिनट तक सिर्फ पाँच इंच से ही संतोष करने के बाद मैंने सोनिया से पूछा, “दीदी अब कैसा लग रहा है?”

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तो बड़ी रुआँसी बोली, “जब तुमने घुसेड़ा था उस समय तो मेरी जान ही निकल गयी थी पर अब तुम्हारी लंड घिसाई से थोड़ी राहत मिली है और अच्छा भी लग रहा है।”

मैंने मौका अच्छा देख और अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और उसे पूरा दबोच कर एक ज़ोरदार कड़कड़ाता हुआ शॉट दिया जिससे मेरा पूरा साढ़े आठ इंच लौड़ा सोनिया की चूत में समा गया। मेरे होंठ उसके होंठों पर रखे हुए थे इस कारण वो ज्यादा जोर से नहीं चीख पायी। मेरा पूरा लंड जो उसकी चूत में समा गया था उससे सोनिया को दर्द इतना हो रहा था कि अगले पाँच मिनट तक मैं तो शाँत अपना लंड उसकी चूत में डाल कर उसके रसीले होंठ चूसता रहा और सोनिया नीचे से दर्द के मारे लगातार अपने चूत्तड़ उछालती रही। जब पाँच मिनट बाद उसने अपने चूत्तड़ उछालना बँद किया तब मैंने अपने लंड को धीरे-धीरे उसकी चूत में सरकाना चालू किया।

सोनिया अभी भी अपना बदन दर्द के मारे कसमसा रही थी पर पूरी मेरे नीचे दबी होने के कारण कुछ कर नहीं पा रही थी और पँद्रह-बीस धक्के अपनी चूत में ले लेने के बाद उसका दर्द भी कम हो गया था और उसका कसमसाना भी। मैंने सोनिया के होंठों के ऊपर से अपने होंठ हटा लिये और बोला, “क्यों मेरी प्यारी दीदी! अब बताओ कैसा महसूस हुआ जब मैंने अपना मस्त लौड़ा आपकी चूत में डाल कर कली से फूल बना दिया और अब कैसा लग रहा है दर्द खतम होने पर।”

सोनिया बोली, “क्या डार्लिंग तुमने तो मेरी जान ही निकल दी। जब तुमने अपना लंड मेरी चूत में पेला था उस समय तो मुझे ऐसा लगा था कि शायद आज तुम मुझे मेरी चूत से लेकर दो हिस्सों में फ़ाड़ के रख दोगे। बहुत दर्द हुआ था सुनील पर तुमने इतने प्यार से मुझे सम्भाला और बाद में जो प्यार से मेरी चूत बजा रहे हो तो ऐसा लग रहा है कि मैं ज़न्नत में हूँ। मेरे बदन से ऐसी मस्ती छूट रही है कि क्या बताऊँ। सुनील अब बहुत मज़ा आ रहा है। अब तुम जी भर के मुझे चोदो।”

मैंने सोनिया की दोनों जाँघें चौड़ी कर दीं और अपने हाथों से उसकी दोनों सैंडल की हील पकड़ लीं और खुद घूटने के बल बैठ कर अपनी गाँड के दनादन धक्के मारने लगा। सोनिया को अब भी तकलीफ हो रही थी पर वो भी अब चुदाई में पूरा साथ दे रही थी। पहली चुदाई के कारण वो और ज्यादा मस्ती सहन नहीं कर पायी और सितकारी भरती हुए अपनी चूत का पानी मेरे लंड पर गिराने लगी और बड़बड़ा रही थी, “आह आँह सुनील मज़ा आ गया। मुझे क्या मालूम था इतनी तकलीफ के बाद इतना सुख मिलेगा। इस सुख के लिये तो मैं अपनी चूत बार-बार तुमसे फड़वाऊँगी।”

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मैंने भी लगातार आठ-दस शॉट लगाये और बलबला कर उसकी चूत में जड़ तक अपना लंड उतार के झड़ गया। मैं सोनिया की कोरी चूत को चोद कर मस्त हो गया था और आराम से उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को चूस रहा था। थोड़ी देर बाद मैं उसके ऊपर से हटा और और उसका मुँह पकड़ कर अपने लंड पर लगा दिया और कहा, “बहन की लौड़ी दीदी! जब तक मैं न कहूँ मेरा लंड चूसती रहना नहीं तो गाँड मार मार के लाल कर दूँगा!” और आराम से सिगरेट सुलगाकर अपनी पीठ टिका कर पीने लगा।

सोनिया ने भी पूरी हिम्मत दिखायी और बिना वक्त बर्बाद करे मेरा लंड चूसना चालू कर दिया। करीब दस- पँद्रह मिनट की लगातार चूसाई से मेरा लंड फ़िर से तन्ना गया, पर मैंने अपने आप पर पूरा कंट्रोल रख कर सोनिया के मुँह में अपना लंड तबियत से चूसाता रहा। दस मिनट बाद मैंने सोनिया को बोला, “चलो आज आपको घोड़े की सवारी करना भी सिखा दूँ। मेरी प्यारी दीदी! करोगी ना मेरे लंड पर घोड़े की सवारी?” सोनिया ने बड़े आश्चर्य से पूछा, “सुनील कैसे घोड़े की सवारी? तुम्हारा मतलब है कि मैं तुम्हारे लौड़े पर बैठ और उसे अपनी चूत में अंदर लूँ और अपने चूत्तड़ ऊपर-नीचे उछाल-उछाल कर लंड को अपनी चूत में चोदूँ?”

मैंने कहा, “हाँ दीदी! आपको तो सब पता है. पर ध्यान रहे लंड बाहर नहीं निकलना चाहिए।”

सोनिया मेरे लंड के दोनों तरफ़ पैर करके खड़ी हो गयी और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी और एक हाथ से मेरा तन्नाया हुआ लंड पकड़ा और एक हाथ की उंगलियों से अपनी चूत के लिप्स खोले। जब मेरा लंड उसकी चूत से टकराया तो थोड़ा सा वोह घबरायी पर मैंने उसकी घबराहट देख कर उसके चूत्तड़ कमर के पास से कस कर पकड़ लिये और इससे पहले वो कुछ समझ पाती मैंने नीचे से अपने चूत्तड़ एक झटके से उछाले और पूरा लंड गप से उसकी चूत में उतार दिया। सोनिया बहुत छटपटाई पर मैंने भी उसकी कमर कस कर पकड़ी हुई थी।

दो तीन मिनट बाद जब उसक दर्द कम हुआ तो मैंने उसको अपने ऊपर झुका लिया और बोला, “सोनिया दीदी! अब आप अपने चूत्तड़ उछाल-उछाल कर ऊपर नीचे करो और लंड सवारी का मज़ा लो।”

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इतना कह कर मैंने उसका सिर दबा कर उसके होंठ अपने होंठों में ले लिये और चूसते हुए अपने दोनो हाथों से उसके पीछे से फैले हुए चूत्तड़ पकड़ लिये और मसलने लगा। सोनिया की हिम्मत मुझे माननी पड़ी कि दर्द होने के बावजूद भी बड़े प्यार से उछलते हुए मुझे चोद रही थी, और दूसरी बार करीब आधे घंटे तक हमने इसी पोज़ में चूदाई करी और मैंने अपने लंड का फाऊँटेन उसकी चूत में गिरा दिया और सोनिया को दबोच कर अपने ऊपर ही लिटा कर रखा और लगातार दो बार चुदाई करने के कारण हम थोड़ा सुस्ताने लगे।

करीब एक घण्टे बाद मेरी जब आँख खूली तो देखा सोनिया सिगरेट पीते हुए मेरे लंड से खेल और चूस रही थी। जब मुझे उसने अपनी और घूरते पाया तो थोड़ा शरमा उठी। मैंने भी कहा, “दीदी! चूसो इसे. मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।”

इस समय मेर गन्ना पूरी तरह से तन्नाया हुआ था। मुझे एक शरारत सूझी और मैंने सोनिया से कहा, “सोनिया दीदी! आपको ये तो मानना पड़ेगा कि आज भी और आगे भी मैं जब आपको चोद कर ये सुख दूँगा, ये सब आपकी मम्मी की वजह से ही मुमकीन हुआ है।”

सोनिया तपाक से बोली, “यू आर राइट सुनील! ऑल थैंक्स टू मम्मी! अगर मम्मी नहीं मानतीं तो पता नहीं मेरी चूत कब चुदती।”

मैंने कहा, “फिर तो दीदी ये गलत बात है कि हम दोनों अंदर इतना मज़ा ले रहे हैं और आपकी मम्मी बाहर अपनी चूत अपनी उँगली से ठंडी कर रही है। मेरी बड़ी इच्छा है कि आप दोनों को मैं एक ही पलंग पर एक साथ नंगा करके चोदूँ।”

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सोनिया फ़ोरन ही तैयार हो गयी और बोली, “मैं अभी जा कर मम्मी को बुला कर लाती हूँ।”

मैंने कहा, “नहीं! आप बैठ कर एक ड्रिंक और सिगरेट पियो। मैं आपकी मम्मी को लाता हूँ।”

मैं नंगा ही बाहर गया तो देखा कि मीना चाची अपना ब्लाऊज़ उतार कर ब्रा और पेटीकोट में लेटी हुई थी और अपना पेटीकोट कमर तक उठा कर स्मोक करते हुए अपने वाइब्रेटर से मुठ मार रही थीं। मुझे देख कर बोली, “क्या बात है सुनील! सोनिया ठीक तो है ना?” मीना चाची की ज़ुबान नशे में बहुत लड़खड़ा रही थी और आँखें भी नशे में भारी थीं।

मैंने कहा, “डार्लिंग घबराओ नहीं! मेरा लंड ले कर एक दम मस्त चूत हो गयी है साली की। अभी तक दो बार लंड का पानी पी चूकी है, और तीसरी बार चुदाने को मचल रही है। चुदाने के मामले में एक दम तुम्हारी बेटी है! साली की बहुत गरम चूत है। इसको अगर दमदार मर्द नहीं मिला तो ये तो दूसरे मर्दों से खूब चुदवायेगी। तुम्हारी तरह वाइब्रेटर से ठंडी नहीं होगी।”

मीना चाची बोली, “क्या बात है (हुच्च) तू बाहर कैसे आ गया?”

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मैंने कहा, “मीना मेरी बड़ी इच्छा है कि तुम्हारी बेटी के सामने तुम्हें चोदूँ और तुम्हारी चूत बजाऊँ।”

मीना चाची बोली, “व्हॉट? ऑर यू क्रेज़ी? (हुच्च) मुझे अपनी बेटी (हुच्च) के सामने चुदाने में शरम आती है।”

सोनिया जो शायद दरवाजे पर खड़ी हो कर हमारी बातें सुन रही थी, सिर्फ़ सैंडल पहने नंगी ही एक दम बाहर आ गयी और बोली, “मम्मी आज से तुम मेरी सबसे बेस्ट फ़्रैंड हो और चुदवाने में क्या शरमाना। मैं भी तो देखूँ कि चुदाई का असली मज़ा कैसे लिया जाता है।”

मीना चाची उठ कर खड़ी हुईं तो गिरते-गिरते बचीं। उन्होंने काफ़ी ड्रिंक कर रखी थी और नशे और हाई पेन्सिल हील की सैण्डलों की वजह से उनका बैलेंस बिगड़ गया पर सोनिया ने उनको अपनी बाहों में भर लिया। मैने भी पीछे से जा कर मीना चाची की दोनों चूचियों को अपने हाथों से दबा लिया और मीना चाची को बीच में दबाये हुए बेडरूम में ले कर आ गये क्योंकि वो नशे में अपने आप चलने की सूरत में नहीं थीं।

मैंने सोनिया को कहा, “चलो दीदी! अपनी मम्मी का पेटीकोट उतारो और अपनी मम्मी की चूत नंगी कर के मुझे दिखाओ।”

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मैंने मीना चाची की ब्रा खोल कर उनकी चूचियाँ नंगी कर दीं। सोनिया ने भी मीना चाची के सारे कपड़े उतार दिये और बोली, “लो सुनील अबकी बार मेरी मम्मी की चूत की सिकाई करो।”

क्या नज़ारा था दोस्तों! अब दोनों माँ बेटी एक साथ बिल्कूल नंगी, सिर्फ़ हाई हील सैण्डलों में, मेरे सामने थीं। मैंने भी नंगी मीना चाची को अपनी बाहों में ले लिया और किस करने के बाद बोला, “मीना डार्लिंग! आज तुम्हारी बेटी की चूत खोली है तो आज मैं तुम्हारे साथ भी हनीमून मनाऊँगा और जैसे तुमने उस दिन कहा था कि कोरी चूत तो नहीं दे सकी पर अपनी कोरी गाँड मरवाऊँगी, तो डार्लिंग तुम्हारी बेटी मेरा लंड चूस कर मोटा करेगी और आज मैं तुम्हारी गाँड का उद्घाटन करूँगा। अपनी गाँड मरवाओगी ना मीना डार्लिंग।”

मीना चाची नशे के कारण बहकी हुई आवाज़ में बोलीं, “मेरे गाँडू राजा! मैं तुझे अपना सब कुछ सौंप चुकी हूँ। साले (हुच्च) तू. तूने. मेरी चूत मारी. मेरे मुँह, गले में मादरचोद अपना लंड चोदा और मेरी चूचियों के बीच में भी लंड घिस के चोदा और.. और. यहाँ तक की साले चूतिये तूने मेरे सैण्डलों और पैरों को भी नहीं छोड़ा.. बोल साले भोसड़ी के. (हुच्च) तुझे कभी मैंने ना कहा क्या. हैं? तो इसके बाद क्या पूछता है. जैसे तू मुझे चोदना चाहता है वैसे चोद, अब गाँड मारनी है. तो साले गाँड मार ले, पर मेरी गाँड जरा प्यार से मारना, मैंने आज तक (हुच्च) तेरे चाचा को उँगली तक नहीं लगाने दी।”

मैंने कहा, “डार्लिंग तुम बस आराम से एक और ड्रिंक लगा कर कुत्तिया बन कर अपनी गाँड हवा में उठाओ. मैं अपना लंड सोनिया से तबियत से चुसवाकर तुम्हारी मस्त गाँड के लिये तैयार करता हूँ।”

मीना चाची ने ड्रिंक बनाने की बजाये व्हिस्की की बोत्तल ही मुँह से लगा कर पीने लगी। मुझे पहले तो चिंता हुई कि कहीं इतना पीने से बिल्कुल ही पस्त हो कर सो ना हो जायें और मेरा सब प्लैन चोपट हो जाये पर फिर ख्याल आया कि चाची पीने की आदी हैं। वैसे तो आम-तौर से वो लिमिट में ही पीती हैं पर पहले भी मैंने उन्हें ज्यादा पी कर नशे में धुत्त देखा है और जब भी मीना चाची नशे में कंट्रोल के बहार हुई हैं तब वो पस्त या शाँत होने की बजाय हमेशा काफ़ी बेकाबू और ज्यादा उत्तेजित ही हुई हैं। यही सोच कर मैंने सोनिया को बुला कर अपने सामने घुटने बर बैठा कर लंड चूसने के लिये बोला और कहा, “लो सोनिया दीदी! चूस के तैयार करो अपनी मम्मी के लिये। देखो आज आपकी मम्मी कैसे नशे में धुत्त होकर मेरा लंड अपनी गाँड में लेगी। मीना! देख तेरी बेटी क्या तबियत से मेरा लंड चूसे के मोटा कर रही है तेरी गाँड के लिये। ये तो आज अपनी मम्मी की गाँड फड़वाकर ही मानेगी। देख तो सही साली एक दिन में ही क्या रंडी की तरह चूसने लग गयी है।”

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मैं सोनिया का मुँह पकड़ कर हलके-हलके शॉट लगाने लगा। इतनी देर में मीना चाची भी एक हाथ में बोत्तल पकड़ कर पलंग पर जैसे मैंने कहा था वैसे ही कुत्तिया बन गयी। मैने सोनिया के मुँह से अपना लंड निकाला और बोला, “दीदी चलो ज़रा अपनी मम्मी कि गाँड के छेद को तैयार करो मेरे लंड के लिये. अच्छे से क्रीम लगाओ ताकि आपकी मम्मी को ज्यादा तकलीफ न हो।”

सोनिया ने अपने हाथ में खूब सारी क्रीम भरी और मीना चाची की गाँड के छेद पर लगाने लगी और बोली, “सुनील! मम्मी की गाँड का छेद तो बहुत टाईट है। मेरी उँगली भी बड़ी मुशकिल से अंदर जा रही है।”

मैंने कहा, “आराम से खूब क्रीम मलो। थोड़ी देर बाद जब गाँड का छेद रीलैक्स हो जायेगा तब बड़े आराम से मेरा लंड अंदर जायेगा.” और मैं स्मोक करने लग गया। दोस्तों क्या सीन था कि एक बेटी अपनी माँ की गाँड पर पूरी लगन से क्रीम मल रही थी और अपनी माँ को गाँड मरवाने के लिये तैयार कर रही थी। सिगरेट खतम होने के बाद मैं पलंग पर चढ़ा और अपना तन्नाया हुआ लंड मीना चाची के चूत्तड़ों पर फेरने लगा और सोनिया को बोला, “अब ज़रा मेरे लंड के ऊपर भी क्रीम लगाओ! अब मैं आपकी मम्मी के भूरे रंग के गाँड के छेद को खोलूँगा।”

सोनिया ने बड़े ही प्यार से मेरे लंड पर क्रीम लगायी और एकदम चिकना कर दिया। मैंने सोनिया को कहा कि वो अपने दोनों हाथों से अपनी मम्मी के चूत्तड़ पकड़ ले और खींच कर चौड़े करे ताकि मीना चाची की गाँड का छेद थोड़ा सा खुल जाये। सोनिया ने मेरे कहे अनुसार अपनी मम्मी के दोनों विशाल चूत्तड़ों को पकड़ लिया और चौड़े कर दिये जिससे मीना चाची की गाँड का छेद थोड़ा सा खुल गया। मैंने अपने हाथ से लंड पकड़ा और गाँड के भूरे छेद पर टिका दिया और दूसरे हाथ की उँगलियों से गाँड के छेद को और चौड़ा किया और लंड का सुपाड़ा टिका कर हल्के से झटका दे कर मीना चाची की कोरी गाँड में सरका दिया। क्रीम की चिकनाहट के कारण मेरा एक इंच लंड मीना चाची की गाँड के छल्ले में जा कर फँस गया।

मीना चाची बोलीं, “सुनील बहुत दर्द कर रहा है बाहर निकाल ले।”

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मैंने कहा, “मीना घबराओ नहीं। आराम-आराम से दूँगा। बस तुम हिम्मत कर के लंड लेती रहो।”

इतना बोल कर मैंने सोनिया को इशारा किया कि वो अपनी माँ की गाँड एक दम कस कर पकड़ ले। सोनिया ने भी मेरा कहना माना और मैंने अपने दोनों हाथों से मीना चाची की कमर पकड़ ली और ज़ोरदार झटका मारा जिससे चिकनाहट होने के कारण मेरा लंड सरकते हुए पूरा सात इंच मीना चाची की गाँड में समा गया। मीना चाची को तो जैसे बिजली का शॉक लग गया हो। अगर सोनिया ने उनके चूत्तड़ और मैंने उनकी कमर कस कर नहीं पकड़ी होती तो शायद मीना चाची मेरा लंड निकाल देतीं पर बेचारी मजबूर थी. सिवाये कसमसाने के और गालियाँ देने के अलावा वो कुछ भी नहीं कर सकती थीं।

मैंने भी बिना कुछ परवाह किये बिना अपना पूर लंड मीना चाची की गाँड में उतार कर ही दम लिया और हल्के-हल्के शॉट देने लगा। मीना चाची तो दर्द के मारे पागल हो गयी थी और बोले जा रही थीं, “अरे मादरचोद, भोसड़ी वाले मार डाला रे। तेरी माँ का भोंसड़ा मादरचोद! अगर मुझे मालूम होता कि गाँड मरवाने में इतना दर्द होता है तो बहन के लंड तुझे छूने भी ना देती। बहनचोद मैं ज़िंदगी भर तुझे जैसे कहेगा वैसे ही चुदवाऊँगी और चूसूँगी। तू जिसको बोलेगा मैं उसको चुदवा दूँगी तेरे से। मुझे छोड़ दे माँ के लौड़े। हाय मेरी माँ! फट गयी मेरी गाँड। मादरचोद सत्यानाश कर दिया तूने आज मेरी गाँड का। आज तक मैंने बड़े प्यार से बचा कर रखी थी।”

मीना चाची बोलती रहीं पर अब मैं ताव में आ चुका था और हुमच-हुमच कर अपना लंड गाँड में पेल रहा था। मीना चाची को भी अब अच्छा लगने लगा था क्योंकि अब वो कह रही थीं, “मार ले मेरे डार्लिंग! मार ले अपनी चाची की गाँड। हाय हाय! शूरू-शूरू में तो बहुत दर्द हुआ डार्लिंग पर वाकय में अब बहुत मज़ा आ रहा है। सोनिया तू भी सुनील से अपनी गाँड जरूर मरवाना।”

करीब बीस पच्चीस मिनट तक मीना चाची की गाँड मारने के बाद मैंने अपना रस मीना चाची की गाँड में ही निकाल दिया।

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दोस्तों! उस दिन के बाद महीने भर जब तक चाचा नहीं आये, मैंने उन दोनों माँ-बेटी को एक ही बिस्तर पर एक साथ नंगा करके खूब चोदा। चाचा के आने के बाद, मीना चाची को दिन में जब भी समय मिलता, एक बार तो चुदवा ही लेती थी। और मैं हर रोज़ सोनिया के साथ सोता था और हम दोनों जम कर चुदाई करते थे। मीना चाची ने और सोनिया ने अपनी सहेलियों का भी खूब मज़ा दिलवाया। मीना चाची और सोनिया के कारण मुझे अलग-अलग औरतों को चोदने का मौका मिला। आशा करता हूँ कि आप सब को मेरी आप-बीती सुन कर मज़ा आया होगा।

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