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अब तक आपने पढ़ा। आफरीन और मैं एक-दूसरे को चूमने लगे थे।
कहानी का पिछला भाग: ब्रेकअप के बाद आफरीन की चूत चुदाई – 1
अब आगे।
चूमते-चाटते हुए मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर गिरा दिया। उसकी पीठ नीचे आ गई और मैं उसके ऊपर झुक गया। मैंने उसे उल्टा कर दिया, यानी पेट के बल लिटा दिया, और उसके कुर्ते के ऊपर से ही उसकी पीठ पर होंठ फिराने लगा। मेरे होंठ उसकी रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ नीचे की ओर सरकते गए। आफरीन की सांसें तेज हो गईं। वह पागल होती जा रही थी, उसका शरीर हल्का-हल्का कांप रहा था।
कुछ मिनट तक मैं यूं ही उसकी पीठ चूमता रहा, कभी कंधों पर, कभी कमर के पास। फिर मैंने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और उसके मम्मों को कुर्ते के ऊपर से ही पकड़ लिया। इस बार उसने मुझे रोका नहीं। उल्टा, उसने अपना शरीर थोड़ा और मेरी ओर दबाया, जैसे कह रही हो कि और जोर से पकड़ो। उसके मुंह से सेक्सी, भरी हुई आवाजें निकलने लगीं। “ओह… आह्ह… उउम्म्म… अह… सैंडी… लव मी…”
मैंने धीरे-धीरे उसका कुर्ता ऊपर की ओर खींचना शुरू किया। आफरीन ने भी पूरा साथ दिया। उसने अपने हाथ उठाए और कुर्ता सिर से निकाल दिया। अब वह सिर्फ गुलाबी ब्रा और काली सलवार में मेरे सामने थी। उसकी त्वचा इतनी नरम और गोरी लग रही थी कि मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था।
मैंने फिर से उसके मम्मों पर ध्यान दिया। इस बार ब्रा के ऊपर से ही मैंने उन्हें चूसना शुरू कर दिया। मेरे होंठ कपड़े के साथ-साथ उसके निप्पल्स को दबाते गए। आफरीन और ज्यादा पागल हो गई। उसने अपने दोनों हाथ मेरे सिर पर रखे और मेरे बालों को पकड़कर मेरा मुंह अपने मम्मों पर और जोर से दबाने लगी।
फिर मैंने उसकी गर्दन पर किस करना शुरू किया। मेरे होंठ उसकी गर्दन की नसों पर सरकते हुए नीचे की ओर आए। साथ ही मैंने अपने दोनों हाथ उसके पीछे ले जाकर ब्रा के हुक खोलने की कोशिश की। लेकिन पहली बार में हुक नहीं खुल रहा था। मैं थोड़ा नया था इस मामले में।
आफरीन हंस पड़ी। उसकी हंसी में शरारत थी। उसने कहा, “अरे पागल, ऐसे नहीं होता,” और खुद ही पीछे हाथ करके ब्रा के हुक खोल दिए। ब्रा ढीली हुई और मैंने उसे धीरे से उतार दिया।
मेरी आंखों के सामने उसके सुडौल, गोल, गोरे मम्मे थे। निप्पल्स गुलाबी और सख्त हो चुके थे। देखते ही मेरा सारा खून उबल पड़ा। मैंने बिना देर किए एक मम्मे को मुंह में ले लिया। मेरी जीभ निप्पल के चारों ओर घूमने लगी, फिर मैंने उसे जोर से चूसा। आफरीन की पीठ का कमान हो गया। वह कराह रही थी।
मैंने एक-एक करके दोनों मम्मों को बारी-बारी चूसा। कभी हल्के से दांतों से काटा, कभी जीभ से चाटा। आफरीन मेरा साथ दे रही थी। वह मेरे सिर को और जोर से दबा रही थी, जैसे कह रही हो कि और गहराई से करो।
फिर उसने इशारे से मुझे अपनी शर्ट उतारने को कहा। मैंने जल्दी से शर्ट उतारी और फेंक दी। अब हम दोनों ऊपर से नंगे थे। हम एक-दूसरे को जंगली जानवरों की तरह चूम रहे थे। पूरे कमरे में चूमने-चाटने की आवाजें गूंज रही थीं – उम्म्म… म्म्मच… आह्ह… आआह्ह…
मैंने धीरे से एक हाथ उसकी सलवार के ऊपर से उसकी चूत पर रख दिया। कपड़े के ऊपर से भी उसकी गर्मी महसूस हो रही थी। वह भट्टी की तरह तप रही थी। मैंने उंगलियां हल्के-हल्के घुमानी शुरू कीं। आफरीन की सांसें और तेज हो गईं।
कुछ ही देर में उसने भी अपना हाथ मेरी पैंट के ऊपर रख दिया। मेरा लंड पहले से ही पूरा टाइट हो चुका था। उसके हाथ लगते ही वह और सख्त हो गया। अब मुझसे सहन नहीं हो रहा था।
मैंने उसकी सलवार के अंदर हाथ डाला और पहली बार उसकी चूत को सीधे छुआ। वह पहले से ही गीली हो चुकी थी। मेरी उंगलियां उसकी गीली चूत पर सरक रही थीं। मज़ा इतना आ रहा था कि मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था।
मेरा हाथ सही से काम नहीं कर पा रहा था, इसलिए मैंने उसका नाड़ा पकड़ा और धीरे-धीरे खोलना शुरू किया। नाड़ा खुलते ही मैंने सलवार नीचे खींची। आफरीन ने अपनी कमर थोड़ी उठाई और सलवार को पैरों से बाहर निकाल दिया। अब वह सिर्फ गुलाबी पैंटी में थी। पैंटी पूरी तरह गीली हो चुकी थी और उसकी चूत के होंठ फूलकर बाहर आ रहे थे।
मैंने फिर से पैंटी के अंदर हाथ डाला। मेरी उंगली धीरे से उसकी चूत में घुसी। मैंने अंदर-बाहर करना शुरू किया। आफरीन कभी मेरे बाल पकड़ती, कभी मेरी पीठ पर नाखून गड़ा देती। उसका पूरा ध्यान मेरी उंगली पर था।
फिर मैंने धीरे से उसकी पैंटी को नीचे खींचा। आफरीन ने पैर थोड़े उठाए और मैंने पैंटी उतार दी। अब वह पूरी नंगी मेरे सामने थी। कमरे की हल्की रोशनी में उसकी चूत साफ दिख रही थी – क्लीन शेव, गुलाबी, दो होंठ आपस में चिपके हुए, और बीच में चमकती हुई नमी।
मेरा मन उसे चूमने का बहुत तेज हो गया। मैं नीचे की ओर झुका। आफरीन ने पूछा, “यह क्या कर रहे हो?”
मैंने कहा, “यार, मत रोको मुझे। मैं एक बार इसे किस करना चाहता हूं।”
उसने हल्के से कहा, “पर जल्दी करना। मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता।”
मैं उसकी मर्जी के खिलाफ कुछ नहीं करना चाहता था। लेकिन मेरे मन में बहुत उत्सुकता थी। मैंने कभी ऐसा नहीं किया था। अंतर्वासना की कहानियों में पढ़ा था कि इसमें अलग ही मज़ा होता है। इसलिए मैंने पहली बार ट्राई किया। मैंने अपने होंठ उसकी चूत के होंठों पर रख दिए।
आफरीन एक झटके से हिल गई। उसे झटका-सा लगा। लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कह पाती, मैंने अपनी जीभ अंदर डाल दी और चाटना शुरू कर दिया। मेरी जीभ उसके क्लिटोरिस पर घूमने लगी, फिर चूत के अंदर-बाहर होने लगी। टेस्ट हल्का नमकीन था, लेकिन मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
आफरीन ने मेरे बाल पकड़ लिए और मेरा सिर अपनी चूत पर जोर से दबाने लगी। उसके मुंह से सेक्सी आवाजें निकल रही थीं – “आह्ह… सैंडी… प्लीज़… उम्म्मह… ओह सैंडी… फक मी…”
मैंने सही मौका देखा। मैंने उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। फिर मैंने अपनी पैंट और चड्डी उतार दी। मेरा लंड फूलकर और भी मोटा और सख्त हो चुका था। लंबाई ज्यादा नहीं थी, लेकिन इतनी थी कि उसे अच्छे से संतुष्ट कर सके।
उसने मेरे लंड को देखा। उसकी आँखों में उत्सुकता और थोड़ी शरारत थी। धीरे से उसने अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को अपनी नरम हथेली में ले लिया। जैसे ही उसके उंगलियों ने उसे छुआ, मेरा लंड और भी टाइट हो गया, जैसे कोई स्प्रिंग दब गई हो। उसकी उंगलियां धीरे-धीरे ऊपर-नीचे सरकने लगीं, टोपे को हल्के से दबाती हुईं।
आफरीन ने मेरी ओर देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “सैंडी… मैं भी इससे किस करना चाहती हूँ।”
मैंने उसकी आँखों में देखते हुए जवाब दिया, “मेरी जान, आज से ये तुम्हारा ही तो है। जो मन करे वो करो।”
उसने झुककर मेरे लंड के टोपे पर सबसे पहले एक हल्का-सा किस किया। उसके होंठों का स्पर्श इतना नरम था कि मेरे पूरे शरीर में करंट-सा दौड़ गया। मैंने आँखें बंद कर लीं और उस अच्छे एहसास को महसूस करने लगा। फिर उसने जीभ से टोपे को हल्के से चाटा, जैसे कोई मीठी चीज चख रही हो।
मैंने धीरे से उसके सिर को पकड़ा और अपने लंड की ओर खींचा। पहले तो उसने हल्का विरोध किया, जैसे शरम से या आदत न होने से। लेकिन मैंने बहुत प्यार से कहा, “बस थोड़ा और, मेरी जान…”
उसने फिर से होंठ खोले और टोपे को मुंह में ले लिया। धीरे-धीरे उसने और अंदर लिया। अब उसका मुंह गर्म और गीला था। वह मेरे लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई बच्चा कुल्फी चूसता है – कभी तेज, कभी धीरे, जीभ को चारों ओर घुमाती हुई। उसकी जीभ टोपे के नीचे वाली नस पर बार-बार सरक रही थी, जिससे मुझे बहुत तेज मज़ा आ रहा था।
मैं अब अपना कंट्रोल खोने लगा था। मैंने धीरे-धीरे कमर हिलानी शुरू की, अपना लंड उसके मुंह में आगे-पीछे करने लगा। पहले हल्के झटके, फिर थोड़े गहरे। आफरीन ने भी साथ दिया। उसने अपने हाथ मेरी जांघों पर रखे और मुंह को और आगे बढ़ाया।
मैंने अपना लंड लगभग पूरा उसके गले तक अंदर डाल दिया। उसका गला थोड़ा सिकुड़ा, लेकिन वह रुक नहीं गई। अब वह पूरी तरह इस मज़े में डूब चुकी थी। उसके मुंह से हल्की-हल्की चूसने की आवाजें आ रही थीं – चुप… चुप… म्म्म…
कुछ मिनट ऐसे ही चलता रहा। मुझे लगा कि अब मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने हांफते हुए कहा, “आफरीन… मैं आने वाला हूँ…”
उसने मेरी बात सुनी, लेकिन मुंह नहीं छोड़ा। उल्टा, उसने और जोर से चूसना शुरू कर दिया, हाथ से मेरे लंड की जड़ को दबाते हुए। मैं खुद को रोक नहीं पाया। एक जोरदार झटके के साथ मैं उसके मुंह में ही झड़ गया। गरम-गरम वीर्य उसके मुंह में भर गया। मुझे इतना तीव्र और गहरा मज़ा पहले कभी नहीं आया था। मेरे पूरे शरीर में कंपकंपी दौड़ गई।
आफरीन ने सब कुछ निगल लिया। फिर उसने धीरे से मेरा लंड मुंह से निकाला और मेरी ओर मुस्कुराई।
मैं थोड़ा थक गया था, लेकिन अभी भी उत्सुक था। मैंने उसे फिर से बिस्तर पर लिटा दिया। इस बार मैंने उसके पैर थोड़े फैलाए और अपनी जीभ उसकी चूत पर रख दी। मैंने पहले से ज्यादा ध्यान से चाटना शुरू किया। मेरी जीभ उसके क्लिटोरिस पर गोल-गोल घूम रही थी, कभी हल्के से दबा रही थी, कभी पूरी चूत के होंठों को चाट रही थी।
आफरीन पागल हो रही थी। वह अपनी गाँड बार-बार ऊपर उठा रही थी, जैसे और गहराई चाह रही हो। उसने मेरे बाल पकड़ लिए और मेरा सिर अपनी चूत पर जोर-जोर से दबाने लगी। उसके मुंह से लगातार कराह निकल रही थी – “आह्ह… सैंडी… और… ओह्ह… हाँ… ऐसे ही…”
मैंने अपनी एक उंगली भी अंदर डाली और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा, साथ ही जीभ से क्लिटोरिस को चाटता रहा। उसका पूरा बदन कांपने लगा। उसकी सांसें बहुत तेज हो गईं। फिर अचानक उसका बदन अकड़ गया। उसने एक लंबी आह भरी और गरम-गरम रस मेरे मुंह में छोड़ दिया। मैंने सब चाट लिया। उसका स्वाद मीठा-नमकीन था, और मुझे बहुत अच्छा लगा।
अब हम दोनों थोड़ा थक चुके थे। हम बिस्तर पर एक-दूसरे के बगल में लेट गए। मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया। हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। हमारे जिस्म एक-दूसरे से चिपके हुए थे। उसकी छाती मेरी छाती से दब रही थी, उसकी सांसें मेरे कानों में पड़ रही थीं। हम दोनों की गर्मी एक-दूसरे को महसूस हो रही थी। कमरे में सिर्फ हमारी सांसों की हल्की आवाज और बाहर से आती हल्की हवा की सरसराहट थी। हम ऐसे ही चुपचाप एक-दूसरे को जकड़े हुए लेटे रहे, जैसे समय रुक गया हो।
मेरा लंड फिर से गरम होने लगा। धीरे-धीरे वह पहले जैसा सख्त और फूला हुआ हो गया, अपना पूरा साइज़ ले आया। आफरीन ने इसे देखा तो मुस्कुराते हुए हंस पड़ी। उसकी आँखों में शरारत थी।
उसने कहा, “इसे अभी चैन नहीं मिला क्या?”
मैंने उसकी कमर पर हाथ रखते हुए जवाब दिया, “मेरी जान, अभी तो सब मज़ा बाकी है।”
वह मेरी ओर और करीब आई और बोली, “तो कुछ बाकी मत छोड़ना। मुझे भी बहुत दिनों से किसी का प्यार नहीं मिला है।”
मैंने उसके गाल पर किस करते हुए कहा, “मेरी जान, मैं तुम्हें आज के बाद हमेशा खुश रखूँगा। भरपूर प्यार करूँगा। कभी कमी नहीं होने दूँगा।”
आफरीन ने थोड़ा रुककर अपनी आँखें नीची कीं और धीरे से कहा, “मेरे बॉयफ्रेंड ने लास्ट टाइम मुझे चार-पाँच महीने पहले चोदा था। उसके बाद ऐसा कोई नहीं मिला जिसने मुझसे उसके सिवा छुआ भी हो।”
उसकी बात सुनकर मेरे अंदर एक अलग सी ताकत आई। अब उसने पहल की। वह मेरे ऊपर चढ़ आई। उसके नंगे जिस्म की गर्मी मुझे महसूस हो रही थी। उसने मेरे सीने पर होंठ रख दिए। धीरे-धीरे किस करते हुए नीचे की ओर सरकी। मेरे निप्पल्स पर जीभ फिराई, फिर पेट पर, और फिर और नीचे।
फिर उसने अपने हाथों से मेरा लंड पकड़ा। अपनी चूत के मुँह पर उसे रख दिया। उसकी चूत अभी भी गीली और गरम थी। टोपे को उसके होंठों पर रगड़ते हुए उसने मेरी ओर देखा।
बाकी काम मुझे करना था। मैंने कमर थोड़ी ऊपर की और हल्का-सा धक्का दिया। उसकी चूत इतनी गीली थी कि मेरा लंड आसानी से सरकता हुआ आधा अंदर चला गया। आफरीन के मुंह से एक प्यारी, भरी हुई आवाज निकली, “अह्ह्ह्ह्ह्… ह्म्म्म्म… प्लीज़ सैंडी… धीरे करो। अब तो मैं सिर्फ तुम्हारी ही हूँ…”
मैंने उसके माथे पर किस करते हुए कहा, “मेरी रानी, अब तो मैं तुझे जी भर के प्यार करूँगा। तेरी प्यास को मिटाता रहूँगा। और तुम्हारी इस चूत को भी मेरी आदत हो जाएगी।”
यह कहते ही मैंने अचानक एक जोरदार धक्का और लगा दिया। मेरा लंड अब लगभग पूरा अंदर चला गया। आफरीन संभाल नहीं पाई। उसके मुंह से एक ज़ोरदार चीख निकली, “आअहहह… उमाआ… आह सैंडी… क्या करते हो… आराम से करो मेरी जान…”
मैंने थोड़ा रुक गया। उसके चेहरे को देखा। उसकी आँखें बंद थीं, होंठ कांप रहे थे। फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। पहले हल्के, फिर थोड़े गहरे। वह मेरी गोद में बैठी आराम से चुद रही थी। उसके मम्मे मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे।
फिर मैंने उसे धीरे से नीचे लिटा दिया। अब मैं उसके ऊपर था। मैंने उसके पैर थोड़े फैलाए और फिर से अंदर डाला। इस बार मैंने ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। पूरे कमरे में चुदाई की मस्त आवाजें गूंज रही थीं – पच… पच… फच… फच… साथ ही उसकी कराहें, “ह्म्म्मर… अहह… सैंडी फाड़ दो आज मेरी चूत को… बुझा दो मेरी प्यास…”
मैंने हांफते हुए कहा, “मेरी जान, तुम बस देखती जाओ। आज जो मज़ा तुम्हें आएगा, वो तो उस कमीने ने भी नहीं दिया होगा। ना जाने वो कैसे इतनी खूबसूरत लड़की को धोखा दे सकता है।”
मेरे धक्के तेज़ होते जा रहे थे। आफरीन भी अपनी कमर को बार-बार ऊपर उठाकर मेरे हर झटके का पूरा जवाब दे रही थी। उसकी दोनों टांगें मेरी कमर पर लिपटी हुई थीं और हर धक्के के साथ उसकी एड़ियां मेरी पीठ पर और ज़ोर से दब रही थीं। उसकी चूत मेरे लंड को इतनी कसकर जकड़ रही थी कि हर बार बाहर निकलते वक्त भी उसे छोड़ने में मुश्किल हो रही थी। उसकी गीली, गरम दीवारें मेरे लंड की हर नस को महसूस कर रही थीं।
मैंने अपनी रफ्तार और बढ़ा दी। अब धक्के गहरे, तेज़ और लगातार हो रहे थे। कमरे में सिर्फ़ हमारी साँसों की तेज़ आवाज़ और चुदाई की गीली थपथपाहट सुनाई दे रही थी – फच्… फच्… फच्…। उसकी चूत से निकलता रस मेरे लंड पर, मेरी जांघों पर और चादर पर तक फैल रहा था। उसने पहले ही एक बार जोर से झड़कर अपना रस छोड़ दिया था और अब उसका वो गरम, चिपचिपा रस मेरे लंड को और फिसलन भरा बना रहा था।
मैंने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “मेरी जान… मैं झड़ने वाला हूँ…”
वह तुरंत, लगभग सिसकारी भरते हुए बोली, “प्लीज़… बाहर मत निकालना। मैं तुम्हें पूरा महसूस करना चाहती हूँ… अंदर ही… अंदर ही झड़ो मेरे अंदर…”
उसकी ये बात सुनते ही मेरे शरीर में एक नई ऊर्जा दौड़ गई। मैंने अपने दोनों हाथ उसकी कमर के नीचे डालकर उसे और ज़ोर से अपनी ओर खींचा। अब मेरे धक्के और भी गहरे जा रहे थे। लंड की पूरी लंबाई हर बार उसके सबसे अंदर तक जा रही थी और वापस निकलते वक्त उसकी चूत की मुंहरी मेरे लंड के सुपारे को कसकर पकड़ ले रही थी। उसकी साँसें अब पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थीं। वह बार-बार मेरा नाम ले रही थी – कभी धीरे, कभी ज़ोर से।
मैंने अपनी स्पीड को आखिरी हद तक बढ़ा दिया। अब धक्के इतने तेज़ और इतने गहरे थे कि बिस्तर भी हल्का-हल्का हिल रहा था। मेरे अंडकोष हर धक्के के साथ उसके नितंबों से टकरा रहे थे और वो हल्की थपकी की आवाज़ भी कमरे में गूंज रही थी। मैंने महसूस किया कि अब मेरी सारी ताकत एक बिंदु पर केंद्रित हो रही है।
आखिरी बार मैंने पूरा ज़ोर लगाकर एक बहुत गहरा, बहुत तेज़ धक्का मारा। मेरा लंड उसके गर्भाशय के मुंह तक जा पहुंचा। उसी पल मैं उसके अंदर ही झड़ने लगा। गरम-गरम वीर्य की मोटी-मोटी धारें एक के बाद एक उसके अंदर छूटने लगीं। मैंने महसूस किया कि कैसे मेरी हर धार उसके अंदर की दीवारों से टकरा रही है।
मेरे साथ ही आफरीन भी दूसरी बार जोर से झड़ पड़ी। उसका पूरा शरीर एकदम अकड़ गया। उसकी चूत की मांसपेशियां मेरे लंड को इतनी ज़ोर से सिकोड़ने लगीं कि मुझे लगा जैसे वो मुझे पूरा निचोड़ लेगी। उसने अपनी दोनों टांगों को मेरी कमर पर और कस लिया, अपने हाथों से मेरी पीठ को नाखूनों से खरोंचते हुए मुझे और गहराई से अपनी ओर खींच लिया। उसकी सिसकारियां अब चीख में बदल गई थीं।
हम दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए, सांसें तेज़ लिए हुए, पसीने से तरबतर, उसी हालत में कुछ पल तक ऐसे ही रहे। मेरे लंड से आखिरी बूंदें भी उसके अंदर जा रही थीं और उसकी चूत अभी भी हल्के-हल्के कंपकंपा रही थी।
हम दोनों पसीने से पूरी तरह लथपथ थे। कमरे में पंखा फुल स्पीड पर चल रहा था।
अब हम दोनों हल्का महसूस कर रहे थे। सांसें अभी भी थोड़ी तेज़ चल रही थीं, लेकिन शरीर में वो भारीपन अब नहीं रहा था। मैंने धीरे से उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके माथे पर एक नरम, प्यार भरा किस किया।
आफरीन ने आँखें बंद करके मुस्कुराते हुए कहा, “सैंडी… यार, इतना मज़ा मुझे आज तक नहीं आया। सच में नहीं आया।”
उसकी आवाज़ में अभी भी वो तृप्ति की गहराई थी। मैंने उसके बालों को सहलाया और धीरे से बोला, “यार, किसी एक के लिए ज़िंदगी मत बर्बाद करो। लाइफ में और भी बहुत कुछ है। और तुम्हारी फैमिली भी तो है।”
वो तुरंत मेरे सीने से और ज़्यादा चिपक गई। उसने मेरी कमर के चारों ओर अपनी बाहें कस लीं और सिर मेरे कंधे पर टिका दिया। फिर धीमी, थकी हुई आवाज़ में बोली, “यार सैंडी, मैंने तो अपने घरवालों की भी बात नहीं सुनी थी। अब मेरे अब्बू मुझसे बात तक नहीं करते। बस मेरी अम्मी से कभी-कभी फ़ोन पर बात हो जाती है।”
उसकी आवाज़ में दर्द था। मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा, “अपनी फैमिली से जाकर मिलो। उन्हें प्यार से ‘सॉरी’ बोलो। और हाँ, अपनी मॉम और डैड से अपनी नई लाइफ के लिए रिक्वेस्ट करना। आख़िर माँ-बाप ही तो हैं। वे तुम्हें ज़रूर माफ़ कर देंगे।”
उसने चुपचाप मेरी बात सुनी और फिर धीरे से ‘हाँ’ में सिर हिलाया।
मैंने बिस्तर के पास रखी घड़ी पर नज़र डाली। 8:45 हो रहे थे। मैं झट से उठ खड़ा हुआ। आफरीन भी धीरे-धीरे उठी। हम दोनों ने बाथरूम में जाकर फ्रेश हो लिया। मैंने कपड़े पहने—वही जींस और टी-शर्ट जो मैंने पहले उतारी थी। आफरीन ने भी सलवार-कमीज़ पहन ली और बालों को जल्दी से बाँध लिया।
फिर मैं बाहर जाने लगा। गेट तक पहुँचते ही आफरीन ने मेरे पीछे से आकर मुझे रोक लिया। उसने मेरी कमर से पकड़ा, मुझे अपनी तरफ़ घुमाया और दोनों हाथों से मेरे गाल पकड़कर मुझे एक लंबा, गहरा किस किया। उसका होंठ मेरे होंठों पर कई सेकंड तक टिका रहा। फिर उसने धीरे से मेरे कान में कहा, “सैंडी… थैंक यू। सब कुछ के लिए।”
मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा, एक बार फिर उसे हल्का सा गले लगाया और फिर घर की ओर चल पड़ा।
उस दिन के बाद जब भी हमें मौका मिलता, हम उसके कमरे में खूब मस्ती करते। आज आफरीन अपनी फैमिली के साथ है। उसके घरवालों ने उसे माफ़ कर दिया है।
उसके घरवालों ने उसकी शादी अच्छी जगह करवा दी है। उसका पति अच्छा आदमी है और वो उसे खुश रखता है। आज उसकी एक लड़की भी है।
हम अब सिर्फ़ कभी-कभी फ़ोन पर ही बात कर पाते हैं। आज इतने सालों बाद मैंने यह स्टोरी लिखी है। जिसमें उसकी मर्ज़ी शामिल है।
मेरी फ़्रेंड आज बस खुश है। मैं यही चाहता था। मैं अकेला हो गया हूँ। पर उसकी यादें मेरे साथ हैं।
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