PG room chudai sex story, Noida office romance sex story: हैलो दोस्तो। मैं संदीप नोयडा से हूं। मेरी उम्र 23 साल है। मैं दिखने में गुड लुकिंग और स्मार्ट हूं। मैं ऐसी कहानियां लगभग पिछले चार साल से पढ़ रहा हूं। यह मेरी पहली स्टोरी है। यह बात आज से तीन साल पहले की है जब मैंने बारहवीं पास की थी और मैं किसी पार्ट टाइम जॉब की तलाश में था। मुझे जॉब मिल गई और वो भी घर से कुछ दूर नोयडा में ही मिली।
मेरे नए ऑफिस में मेरी टीम में कुछ लड़कियां भी थीं। उनमें से एक का नाम था आफरीन। वो बहुत ही सिंपल और आकर्षक थी। मैं उसकी सादगी का दीवाना हो गया था। आफरीन एक सेक्सी फिगर की मालकिन थी। उसके कर्व्स इतने परफेक्ट थे कि नजरें खुद-ब-खुद वहां टिक जाती थीं। हां, वैसे तो मैं हर लड़की और लेडी की बहुत इज्जत करता हूं और आफरीन के लिए भी मेरे मन में शुरू में सम्मान ही था, पर धीरे-धीरे वो सम्मान आकर्षण में बदल गया। पता नहीं क्यों, लेकिन मैं उसे देखते ही रह जाता था।
मैंने ऑफिस में काम के बहाने और कभी किसी छोटी-मोटी बात पर उससे बात करना शुरू किया। वो मुझ पर ध्यान तो देती थी, पर ज्यादा गहराई से नहीं। फिर भी मैं ऑफिस आते ही उसे ढूंढता और उसके पास वाली सीट पर बैठने की कोशिश करता। धीरे-धीरे मैं उसके लंच टाइम पर भी साथ जाने लगा। हम साथ में कैंटीन जाते, हल्की-फुल्की बातें करते।
एक दिन वो अकेले ही लंच पर जाने लगी। दरअसल आज उसकी सहेली नहीं आई थी। मैंने इसे सही मौका समझा और उसके पीछे-पीछे चल दिया। कैंटीन में हमारी मेज के आसपास की लगभग सारी चेयरें खाली थीं क्योंकि ज्यादातर लोग लंच करके वापस जा चुके थे। मैं बिना कुछ कहे उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठ गया। उसने मुझे देखा और होंठों पर हल्की सी मुस्कान बिखेर दी।
वो आज सफेद कुर्ता और काले रंग की सलवार पहने हुए थी। कुर्ते का कपड़ा हल्का पतला था। जब वो आगे झुकी तो उसके अंदर पहनी हुई गुलाबी ब्रा की हल्की झलक साफ दिखाई दे रही थी। ब्रा के लेस वाले किनारे कुर्ते के गले से थोड़े बाहर झांक रहे थे। उसकी सांसों के साथ उसकी छाती हल्के-हल्के ऊपर-नीचे हो रही थी। मुझे वो कुछ परेशान सी लग रही थी।
मैंने पूछा, “क्या बात है? आज तुम कुछ परेशान सी लग रही हो।” वो बोली, “कुछ नहीं।” मैंने फिर कहा, “कुछ तो है। आज तुम्हारे चेहरे पर वो चमक नहीं है जो रोज रहती है।”
वो हंस पड़ी और बोली, “आज तुम्हें क्या हो गया सैंडी? इतना ध्यान देने लगे हो?” मैंने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “बस ऐसे ही। अच्छा लगता है तुमसे बात करके।”
फिर वो थोड़ी गंभीर हो गई और बोली, “यार सैंडी, तुम मेरी लाइफ नहीं समझ सकते। बहुत उलझी हुई है। मैं बोर हो चुकी हूं अपनी लाइफ से।” मैंने कहा, “क्यों यार? तुम इतना नेगेटिव क्यों सोचती हो?” वो बोली, “बस ऐसे ही।”
मैंने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, “शायद अभी तक मैं तुम्हारा इतना अच्छा दोस्त नहीं बन सका कि तुम मुझसे अपनी बातें शेयर करो।”
दोस्तो, एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए। किसी की भी गोपनीयता का बहुत ख्याल रखना चाहिए, खासकर लड़कियों और लेडीज का। अगर एक बार उनके मन में आपकी छवि खराब हो गई, तो उनका भरोसा दोबारा हासिल करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
वो चुप रही, फिर धीरे से बोली, “यार सैंडी, मेरा मन करता है कि मैं इस लाइफ से दूर कहीं अकेले चली जाऊं, जहां मेरा अतीत मेरे साथ ना हो।” मैंने कहा, “अरे यार, अपना माइंड उस तरफ मत ले जाया करो। दोस्तों से बातें शेयर करो, दिल हल्का हो जाएगा।”
फिर मैंने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “चलो, कोई अच्छी फिल्म देखने चलते हैं। मूड फ्रेश हो जाएगा।” उसने कुछ पल सोचा, फिर बोली, “ठीक है, चलो।”
मैं तो ऑफिस के बाद जाने की बात कर रहा था, लेकिन उसके जवाब में कुछ अलग था। मैंने पूछा, “अभी?” वो बोली, “हां, अभी। चलो छोड़ो।”
मैं अपनी गलती पर पछता रहा था कि शायद मैंने जल्दबाजी कर दी। फिर भी मैंने एक बार और कोशिश की, “चलो, चलते हैं।” उसने मेरी आंखों में देखा, फिर धीरे से मुस्कुराई और बोली, “मैं बाहर वेट कर रही हूं। जल्दी आना।”
मैंने अपने एचआर से अपना और उसका हाफ डे लिया और बाहर आ गया। मैंने अपनी बाइक निकाली। आफरीन ऑफिस के बाहर मेरा इंतजार कर रही थी। वो थोड़ी उदास नजर आ रही थी, लेकिन जब मुझे देखा तो हल्की सी मुस्कान दे दी।
मैंने बाइक स्टार्ट की और उसे पीछे बैठने को कहा। वो बाइक पर बैठ तो गई, लेकिन हमारे बीच काफी स्पेस था। वो थोड़ी दूर बैठी हुई थी, जैसे शर्म या झिझक रही हो। मैंने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “सही से बैठो ना आफरीन, वरना गिर जाओगी।”
वो थोड़ा हिचकिचाई, फिर धीरे-धीरे अपने शरीर को मेरी तरफ खींच लिया। अब उसकी छाती मेरी पीठ से हल्के से लग रही थी। उसकी सांसें मेरी कमर के पास महसूस हो रही थीं। मैंने बाइक स्टार्ट की और हम चल दिए।
रास्ते में जब भी मैं ब्रेक लगाता, वो अपने आप मेरे और करीब आ जाती। उसकी दोनों बाहें मेरी कमर के चारों ओर लिपट जातीं। कभी-कभी उसकी हथेलियां मेरी पेट पर टिक जातीं। मुझे उसकी गर्माहट महसूस हो रही थी। उसकी सॉफ्ट ब्रेस्ट मेरी पीठ पर दब रही थीं। मुझे भी अंदर से एक अजीब सा मजा आने लगा था। दिल की धड़कन तेज हो गई थी।
अब मेरे दिमाग में उसके लिए गलत ख्याल आने लगे थे। मैं सोच रहा था कि उसकी ये नजदीकी कितनी अच्छी लग रही है। आखिर मैं भी एक जवान लड़का हूं, कब तक सब कुछ कंट्रोल में रखूं। उसकी सांसें मेरी गर्दन के पास आ रही थीं, और हर ब्रेक पर वो और चिपक जाती।
रास्ते में हम बातें करते रहे। उसने धीरे-धीरे अपनी कहानी सुनानी शुरू की। वो बोली, “सैंडी, मैं एक लड़के से बहुत प्यार करती थी। हमारा रिश्ता दो साल से चल रहा था। हम दोनों शादी की प्लानिंग कर रहे थे। लेकिन कुछ दिनों पहले उसने ब्रेकअप कर लिया।”
उसकी आवाज में दर्द था। वो आगे बोली, “कारण ये था कि उसकी शादी किसी और से तय हो गई थी। परिवार ने उसे जबरदस्ती मना लिया।”
वो रुक गई, फिर बुझे हुए लहजे में कहा, “मैंने अपना सब कुछ उसको दे दिया था। यहां तक कि घरवालों की भी नहीं सुनी। मैंने सबके खिलाफ जाकर उसे चुना था। लेकिन आज मेरे साथ कोई भी नहीं रहा। सब छोड़कर चले गए।”
वो नोयडा में एक पीजी में अपनी एक फ्रेंड के साथ रहती थी। बातें करते-करते हम सेक्टर 18 पहुंच गए। हमने जीआईपी मॉल में फिल्म देखने का फैसला किया।
उस वक्त कोई अच्छी बॉलीवुड मूवी नहीं लगी थी। मैंने हॉलीवुड की एक रोमांटिक-थ्रिलर मूवी का टिकट ले लिया। मैंने काउंटर पर खासतौर से कॉर्नर सीट्स के लिए रिक्वेस्ट की। दोपहर के ढाई बजे थे, इसलिए हॉल में ज्यादा भीड़ नहीं थी। टिकट आसानी से मिल गए।
हम अंदर अपनी सीटों पर आ गए। कॉर्नर सीट्स थीं, सबसे आखिरी रो में, दीवार के बिल्कुल पास। हमारे आगे की रो में सिर्फ दो-तीन लोग बैठे थे, वो भी काफी दूर। फिल्म शुरू हुई तो हॉल में पूरा अंधेरा हो गया। स्क्रीन की रोशनी ही अब दिख रही थी।
हम फिल्म देख रहे थे, लेकिन मेरा ध्यान फिल्म पर नहीं था। मैं बार-बार उसकी तरफ देख रहा था। उसके चेहरे पर स्क्रीन की हल्की रोशनी पड़ रही थी। उसके होंठ थोड़े खुले हुए थे, आंखें स्क्रीन पर टिकी हुई थीं। उसकी साड़ी जैसी कुर्ते की नेकलाइन में उसकी छाती हल्के-हल्के ऊपर-नीचे हो रही थी।
एक बार उसने मेरी तरफ देखा। मैंने झट से नजरें हटा लीं। वो धीरे से बोली, “क्या हुआ? कुछ कहना चाहते हो?”
मैंने हिम्मत जुटाई और धीमी आवाज में कहा, “आफरीन, आई लाइक यू।”
वो हंस पड़ी। हंसी हल्की थी, लेकिन उसमें थोड़ा मजाक भी था। वो बोली, “यार तुम लड़के भी ना… सब ऐसे ही होते हो।”
मैं चुप हो गया। अंदर से थोड़ा गुस्सा भी आया और शर्मिंदगी भी। मैंने कुछ नहीं कहा और गुस्से में फिल्म की तरफ देखने लगा।
कुछ देर बाद उसने मेरी बांह पर हल्के से हाथ रखा और बोली, “संदीप, क्या हुआ? नाराज हो गए?”
मैंने कहा, “कुछ नहीं।”
वो फिर बोली, “कुछ तो बोलो ना।”
मैंने थोड़ा रुककर कहा, “यार, तुम मुझे भी शायद उन लड़कों में गिन रही हो जो बस गलत सोचते हैं। लेकिन मैं वैसा नहीं हूं। मैं सच में तुम्हें पसंद करता हूं। पर अगर तुम्हें बुरा लगा तो सॉरी। आज के बाद मैं तुमसे इस बारे में कभी बात नहीं करूंगा।”
इतने में इंटरवल हो गया। हॉल की लाइट्स जल उठीं और लोग बाहर जाने लगे। मैं गुस्से में उठ खड़ा हुआ और बाहर की तरफ चल पड़ा। आफरीन ने फौरन मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे वापस अपनी सीट पर खींचते हुए बोली, “बैठो ना सैंडी, मैं तुमसे कुछ बात करना चाहती हूं।”
मैं थोड़ा इतराते हुए, गुस्से में बोला, “क्या कहना है?”
वो मेरी आंखों में देखकर धीरे से बोली, “यार सैंडी, मैं आजकल बहुत टेंशन में रहती हूं। तुम तो जानते ही हो। मेरी जिंदगी में सब कुछ उलझा हुआ है। मैं बस… थोड़ा कंफ्यूज हूं।”
मैंने उसके हाथों को और जोर से पकड़ा। मेरी उंगलियां उसकी नरम हथेलियों में फंस गईं। मैंने गंभीर होकर कहा, “मैं उन लड़कों की तरह नहीं हूं, आफरीन। मैं तुम्हें कभी जबरदस्ती कुछ नहीं करूंगा। हां, मैं तुम्हें हाथ तक नहीं लगाऊंगा अगर तुम नहीं चाहोगी।”
वो कुछ नहीं बोली। बस मेरी आंखों में देखती रही। फिर धीरे से हाथ छुड़ाकर बोली, “चलो, बाहर चलते हैं।”
हम दोनों बाहर निकल आए। इंटरवल में हमने कुछ स्नैक्स लिए – पॉपकॉर्न और कोल्ड ड्रिंक्स। फिर वापस अपनी कॉर्नर सीटों पर आ गए। हॉल अभी भी काफी खाली था। ज्यादातर लोग इंटरवल में ही बाहर थे या वापस नहीं लौटे थे।
बैठते ही आफरीन ने हल्के से मुस्कुराते हुए पूछा, “तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?”
मैंने सीधे जवाब दिया, “नहीं।”
उसकी आंखों में एक अलग सी चमक आई। जैसे राहत मिली हो या कुछ उम्मीद जगी हो। वो थोड़ा और मेरे करीब सरक आई।
फिल्म दोबारा शुरू हो गई। अब हम पहले से भी ज्यादा क्लोज होकर बैठे थे। मेरी बांह उसकी बांह से सटी हुई थी। उसकी सांसें मेरे कंधे के पास महसूस हो रही थीं। फिल्म में एक सेक्सी सीन आने लगा। स्क्रीन पर हीरोइन का गला गहरा था, और रोमांटिक मूड बन रहा था।
आफरीन ने धीरे से अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया। उसकी उंगलियां मेरी उंगलियों में फंस गईं। मेरे पूरे बदन में एक अजीब सा झटका लगा। दिल की धड़कन तेज हो गई। मुझे गर्मी सी महसूस होने लगी। मैंने उसके हाथ को और कसकर पकड़ा और उसके चेहरे की तरफ देखा।
वो भी मुझे ही देख रही थी। उसकी आंखें चमक रही थीं। स्क्रीन की रोशनी में उसके होंठ चमकते हुए लग रहे थे। मैंने हिम्मत जुटाई, उसके दोनों कंधों पर हाथ रखे और धीरे से उसे अपनी तरफ खींचा। फिर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
पहले तो उसने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया। वो बस स्थिर रही। लेकिन कुछ सेकंड बाद उसने भी जवाब देना शुरू कर दिया। उसकी वासना की आग मुझे भी जला रही थी। हम दोनों गहराई से किस करने लगे। मेरी जीभ उसके होंठों को छू रही थी। वो धीरे-धीरे मेरे साथ तालमेल बिठा रही थी।
मैं उसे बेतहाशा चूम रहा था। कभी उसके निचले होंठ को हल्के से काटता, कभी ऊपरी होंठ को चूसता। फिर उसके गालों पर किस करता, उसके कान के पास जाकर हल्के से काटता। फिर उसकी गर्दन पर होंठ रखकर चूमने लगा। उसकी गर्दन गर्म थी। वो हल्के-हल्के सांस ले रही थी। हम दोनों भूल चुके थे कि हम सिनेमाहॉल में हैं।
किस करते-करते मैंने अपना दायां हाथ धीरे से उसके चूचे पर रख दिया। उसके कुर्ते के ऊपर से ही उसकी नरम, भरी हुई छाती महसूस हुई। ब्रा का कपड़ा पतला था। मैंने हल्के से दबाया। लेकिन तभी उसने झटके से मेरा हाथ हटा दिया। वो थोड़ी सख्त हो गई। मुझे अजीब लगा। शायद वो तैयार नहीं थी।
मैंने हाथ हटा लिया और चुपचाप फिल्म देखने लगा। हम दोनों कुछ देर नॉर्मल हो गए। कोई बात नहीं हुई।
फिर कुछ देर बाद फिल्म खत्म हो गई। लाइट्स जल उठीं। सब बाहर जाने लगे। हम भी उठे और बाहर आ गए।
बाहर आते ही हम दोनों एक-दूसरे से नजरें नहीं मिला पा रहे थे। मुझे थोड़ा गुस्सा भी आ रहा था, लेकिन मैं उसके दिल का हाल जानता था। इसलिए मन में कोई बात नहीं रखी।
हम अट्टा मार्केट में घूमते रहे। शाम को लगभग छह बजकर पैंतालीस मिनट हो गए थे।
उसने कहा, “घर चलते हैं।”
मैंने भी हां कह दी।
फिर मैंने कहा, “चलो, मैं तुम्हें ड्रॉप कर देता हूं। फिर मैं भी घर चला जाऊंगा।”
उसने हल्के से सिर हिलाया और बोली, “ठीक है।”
अब हम एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे। शाम की हल्की ठंडी हवा में उसकी मुस्कान और भी खूबसूरत लग रही थी। इस बार जब वो बाइक पर बैठी तो पहले से कहीं ज्यादा क्लोज होकर बैठ गई। उसने अपनी दोनों बाहें मेरी कमर के चारों ओर लपेट लीं। उसके गोल-गोल, मस्त मम्मे मेरी पीठ पर पूरी तरह दब रहे थे। कुर्ते के पतले कपड़े के नीचे से उनकी नरमी और गर्माहट साफ महसूस हो रही थी। हर थोड़ी देर में ब्रेक लगाने पर वो और जोर से चिपक जाती। मेरी पीठ पर उसके स्तनों का दबाव बढ़ता जा रहा था। मेरा लंड फिर से सख्त हो गया था। पैंट में वो तनाव महसूस हो रहा था, जैसे बाहर आने को बेताब हो।
कुछ ही देर में हम उसके पीजी पहुंच गए। वो बोली, “आ जाओ सैंडी, एक कप चाय तो पी लो।”
मैंने हां कर दी। मुझे पता था उसकी रूममेट आठ तीस बजे तक आती है, तो अभी हमारे पास अच्छा-खासा समय था। कोई दिक्कत नहीं थी।
हम दोनों अंदर आए। ये एक वन बीएचके फ्लैट था। छोटा सा लेकिन साफ-सुथरा। कमरे में उनके दोनों के कपड़े इधर-उधर बिखरे पड़े थे। बिस्तर पर एक लाल ब्रा और काली पैंटी पड़ी हुई थी। एक कुर्सी पर उसकी सलवार टंगी हुई थी। वो थोड़ी शरमाई, जल्दी से सब कुछ उठाकर अलमारी में डाल दिया और बोली, “मैं चाय लेकर आती हूं। तुम बिस्तर पर बैठो।”
मैंने चाय के लिए मना कर दिया। उठकर उसके पास गया और उसका हाथ फिर से पकड़ लिया। मैंने गंभीर होकर कहा, “आज की बात का बुरा मत मानना, आफरीन। मैं तुम्हें उस नजर से नहीं देखता जो तुम सोच रही हो। मैं सच में तुम्हारी इज्जत करता हूं।”
उसने मेरी आंखों में देखा और धीरे से बोली, “नहीं सैंडी, ऐसा कुछ नहीं है। अब मुझे तुम पर भरोसा है।”
उसने मेरे हाथों को और जोर से पकड़ लिया। उसकी उंगलियां मेरी उंगलियों में कसकर फंस गईं। उसकी हथेलियां गर्म थीं। मेरा हाल और बुरा हो गया। दिल की धड़कन तेज हो गई। मेरा लंड पैंट में पूरी तरह टेंट बना रहा था। वो साफ दिख रहा था। उसने नीचे देखा, फिर मेरी तरफ देखकर हंस पड़ी। उसकी हंसी में शरारत थी।
अब मैंने झटके से उसे अपनी बांहों में भर लिया। अपनी पकड़ और टाइट कर दी। उसके मम्मे मेरे सीने से पूरी तरह दब गए। कुर्ते के ऊपर से ही उनकी मुलायमियत और गोलाई महसूस हो रही थी। हमारी गर्म सांसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं। उसकी सांसें तेज और गर्म थीं। मेरा लंड उसके पेट के पास दब रहा था, जैसे उसे छूने को बेताब हो।
हम दोनों एकदम शांत हो गए। बस एक-दूसरे की आंखों में देख रहे थे। इस बार उसने पहले मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मैं तो सकपका गया। इतनी गहरी, इतनी मस्त किस आज तक नहीं की थी। उसके होंठ नरम और गर्म थे। उसने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठों पर दबाए। मैंने भी जवाब दिया। अगले ही पल हम दोनों एक-दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे।
मैंने उसके निचले होंठ को हल्के से काटा। वो सिसकारी भरकर मेरे बालों में उंगलियां फेरने लगी। मैंने उसकी जीभ को अपनी जीभ से छुआ। हमारी जीभें एक-दूसरे से खेल रही थीं। किस इतनी गहरी हो गई कि सांस लेना मुश्किल हो रहा था। मैंने उसके गालों पर, फिर गर्दन पर किस करना शुरू किया। उसकी गर्दन पर होंठ रखकर हल्के से चूसा। वो हल्के से कांप गई। उसकी सांसें और तेज हो गईं।
अगले भाग में चूत चुदाई की पूरी दास्तान लिखूंगा।
कहानी का अगला भाग: ब्रेकअप के बाद आफरीन की चूत चुदाई – 2
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