भतीजे की चुदाई चाची को पसंद आई

Chachi ki chudai sex story, Chikni chut sex story: दोस्तो, सुमित का आप सबको प्यार भरा नमस्कार।

आज मैं आप लोगों को अपनी कहानी सुना रहा हूँ। मेरी यह कहानी बिल्कुल 100% सच्ची है।

मेरी उम्र 24 साल है। शरीर से दुबला-पतला हूँ। मेरा लंड ज़्यादा बड़ा नहीं है लेकिन मैं किसी भी लड़की या औरत को संतुष्ट कर सकता हूँ।

यह कहानी मेरी और मेरी सेक्सी चाची शोभा (बदला हुआ नाम) के बारे में है।

बात उस वक्त की है जब मैं 19 का था। मेरे सबसे बड़े चाचा मुम्बई में एक दुकान चलाते थे और मेरे छोटे चाचा भी उनके काम में मदद करते थे।

लेकिन मेरी छोटी चाची गाँव में दादी के साथ रहती थीं। मेरी चाची की उम्र करीब 25 साल की होगी। देखने में वो बस ठीक-ठाक ही थीं।

चाचा साल में 3-4 बार ही गाँव आते थे तो चाची से ज़्यादा मिल नहीं पाते थे। उनकी शादी हुए 9 साल हो गए थे लेकिन उनको कोई संतान नहीं थी।

मेरा परिवार पूना में रहता था। मैं अपने माँ-बाप का एकलौता लड़का था। मैं हर साल गर्मी की छुट्टी में गाँव आता था।

चाची मुझे अपने बच्चे की तरह मानती थीं और मेरा बहुत ख़याल रखती थीं। रात में हम सब लोग एक साथ ही सोते थे। नीचे ज़मीन पर मैं, चाची, दादी, मेरी सबसे छोटी चाची, उनकी लड़की, मेरे सबसे छोटे चाचा सोते थे।

ऊपर खाट पर मेरे दादाजी अकेले सोते थे।

एक दिन मैं चाची से सटकर सोया था। रात के सन्नाटे में घर पूरी तरह शांत था। हम दोनों एक ही कमरे में, एक ही चारपाई पर सो रहे थे क्योंकि गर्मी के कारण दूसरे कमरे में पंखा खराब था। चाची की साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था और उनकी सांसें गहरी और नियमित चल रही थीं।

मध्यरात्रि के आसपास मेरी आँख खुली। अंधेरे में भी मैंने देखा कि मेरा दायाँ हाथ उनकी छाती पर टिका हुआ था। मेरी हथेली ठीक उनके एक स्तन के ऊपर रखी थी और उसकी नरमी मुझे तुरंत महसूस हो रही थी। चाची गहरी नींद में थीं; उनकी साँसें धीमी और भारी थीं, होंठ हल्के खुले हुए थे। उन्हें बिल्कुल पता नहीं था कि मेरा हाथ कहाँ है।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। पहले तो मैं डर गया और हाथ हटाने की सोचने लगा, लेकिन फिर एक अजीब-सी हिम्मत जागी। मैंने बहुत धीरे-धीरे, लगभग रुक-रुक कर अपनी हथेली को हल्का सा दबाया। उनकी ब्लाउज की नरम कपड़े के नीचे से स्तन की गर्माहट और मुलायमियत मेरे हाथ में समा रही थी। मैंने अँगुलियों को हल्के-हल्के हिलाया, धीरे-धीरे सहलाने लगा। पहले तो सिर्फ हथेली से गोल-गोल घुमाया, फिर अँगुलियों से हल्का दबाव डालते हुए उनकी छाती को मसलने लगा।

कुछ देर बाद मुझे लगा कि उनकी साँसों का लय बदल रहा है। वे अब पहले जितनी गहरी नहीं सो रही थीं। शायद नींद टूट रही थी। डर के मारे मैंने तुरंत हाथ हटाने की कोशिश की।

तभी चाची ने मेरे कलाई को पकड़ लिया। उनका हाथ गर्म था और पकड़ मजबूत। उन्होंने बिना कुछ बोले, बिना आँखें खोले मेरे हाथ को वापस अपनी छाती पर रख दिया। मेरी साँस रुक गई। अब मेरी हिम्मत दस गुना बढ़ गई थी।

मैंने धीरे-धीरे उनके ब्लाउज के ऊपरी हुक को खोला। एक के बाद एक, बहुत सावधानी से। ब्लाउज पूरी तरह खुल गया। अंदर सफेद ब्रा थी, जो रात की हल्की रोशनी में भी साफ दिख रही थी। मैंने ब्रा के हुक को भी पीछे से खोल दिया। ब्रा ढीली हो गई और उनके दोनों स्तन बाहर आ गए। वे गोल, भरे हुए और निप्पल हल्के गुलाबी रंग के थे।

मैंने पहले एक स्तन को दोनों हाथों से पकड़ा। हथेली से नीचे से ऊपर की ओर सहलाया, फिर अँगुलियों से निप्पल को हल्के से दबाया। निप्पल तुरंत सख्त हो गया। मैंने सिर झुकाकर अपना मुँह उनके स्तन पर रख दिया। पहले तो सिर्फ होंठों से छुआ, फिर जीभ से गोल-गोल चाटा। आखिरकार मैंने पूरा निप्पल मुँह में ले लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा।

चाची अब जाग चुकी थीं, लेकिन चुप थीं। उन्होंने मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपनी छाती पर और जोर से दबाया। मैंने एक स्तन को चूसते हुए दूसरे को हाथ से मसलना शुरू किया। कभी दबाता, कभी सहलाता, कभी निप्पल को अँगुलियों से रगड़ता। चाची की साँसें तेज हो गई थीं। वे मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थीं और कभी-कभी मेरे सिर को और गहराई से अपनी छाती पर दबा देती थीं।

मैंने लगभग आधे घंटे तक बारी-बारी से दोनों स्तनों को चूसा। कभी एक को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूसता, कभी दोनों को एक साथ हाथों में लेकर दबाता। चाची मेरी पीठ पर हाथ फेर रही थीं और मुझे अपनी बाँहों में कसकर जकड़ रही थीं। उनकी साड़ी अब कमर तक सरक चुकी थी और उनकी साँसें गरम-गरम मेरे कानों पर पड़ रही थीं।

फिर एक पल आया जब मैं थक गया। मैंने धीरे से उनका स्तन मुँह से निकाला, ब्लाउज को हल्का सा ढक दिया और उनके बगल में लेट गया। चाची ने मेरे माथे पर हल्का सा हाथ फेरा, फिर वे भी शांत होकर सो गईं।

उस रात के बाद यह हमारा रोज का खेल बन गया। हर रात जब घर वाले सो जाते, मैं चाची के पास लेटता और यही सब दोहराता।

कुछ दिनों में मेरी छुट्टी खत्म होने वाली थी तो पिताजी मुझे लेने गाँव आ गए और मैं उनके साथ पुणे चला गया। कुछ महीनों बाद चाचा गाँव आ गए और दादी से बात करके चाची को अपने साथ मुंबई ले गए। चाचा ने अपनी नई दुकान चालू की थी और एक मकान भी खरीद लिया था। अब चाचा और चाची मुंबई में रहने लगे। कुछ सालों बाद चाची ने एक लड़की को जन्म दिया। समय बीतता गया। इस दौरान मेरी और चाची की एक या दो बार मुलाकात हुई थी। अब मैं भी अच्छे नंबरों से पास हो गया और मैंने पुणे के एक अच्छे कॉलेज में बी.टेक. के लिए दाखिला ले लिया था।

जब मैं बी.टेक. के दूसरे साल में था तो मैंने एक कम्पटीशन में हिस्सा लिया और हमारा ग्रुप अगले राउंड के लिए सिलेक्ट हो गया। बाद में हमारे कॉलेज के प्रोफेसर ने हम लोगों को बताया कि हम सब लोगों को दो दिन के लिए मुंबई के आईआईटी कॉलेज में जाना है। मेरा दिल में बहुत खुशी हुई क्योंकि मैं बहुत सालों बाद मुंबई जाने वाला था और चाची से मिलने का मौका भी मिला था।

अगले हफ्ते हम लोग मुंबई के लिए रवाना हो गए। मैंने अपने सर से बात कर ली थी कि मैं अपने चाचा के घर रहूँगा क्योंकि उनका घर कॉलेज के पास ही था। मैंने चाचा को फोन करके बता दिया था कि मैं मुंबई आ रहा हूँ तो वे भी बहुत खुश हुए।

हम लोग सुबह 9 बजे कॉलेज पहुँच गए। शाम को 5 बजे हमारा कम्पटीशन खत्म हो गया। रिज़ल्ट अगले दिन शाम को 4 बजे आना था तो मैंने सर से बात की और मैं चाचा के घर निकल गया। मैं पहले दुकान पर गया। चाचा से मिला। वो मुझे देख कर बहुत खुश हो गए। उनसे बात करने के बाद घर आ गया।

जैसे ही चाची ने मुझे देखा तो फट से गले लगा लिया। मैंने भी उन्हें अपनी बांहों में भर लिया। उनकी नरम, भरी हुई चूचियाँ मेरे सीने से जोर से रगड़ रही थीं। उनकी साड़ी का ब्लाउज इतना टाइट था कि उनकी गहरी दरार साफ़ दिख रही थी और उसकी गर्माहट मेरे शरीर में सीधे उतर रही थी। मेरे लंड में तुरंत खून दौड़ने लगा। वह सख्त होकर उठ खड़ा हुआ और मेरी पैंट के अंदर तनकर दबाव बनाने लगा।

चाची ने मेरे शरीर में आए बदलाव को महसूस कर लिया। मेरे कमर के पास उनका पेट दबा हुआ था और मेरा खड़ा लंड उनकी जांघों के बीच हल्के से टच कर रहा था। एक पल के लिए उनकी सांसें रुक सी गईं। फिर उन्होंने धीरे से खुद को पीछे खींचा और मुझसे अलग हो गईं। उनकी आँखों में शर्मिंदगी थी, लेकिन साथ ही कुछ और भी था – एक हल्की सी चमक, जो छिपाने की कोशिश कर रही थी। मेरा दिल उनको छोड़ने को तैयार नहीं था। मैंने उनकी कलाई पकड़ ली और धीरे से कहा, “चाची… बस एक मिनट…”

उनका घर ज़्यादा बड़ा नहीं था। दो कमरों का था। उसमें से भी मेरे चाचा ने एक कमरा किराए पर दे दिया था। चाची ने मेरे लिए चाय बनाई। फिर इधर-उधर की बातें की। मेरे पूछने पर पता चला कि चाचा रात को एक बजे घर आते हैं। उनकी बेटी अभी ढाई साल की थी। मैंने सोच लिया था कि आज मौका हाथ से जाने दिया तो पता नहीं बाद में मिले या ना मिले।

मैं कुछ देर बाद घूमने के लिए बाहर गया था। लौटते समय मेडिकल से दो वियाग्रा की गोलियाँ ले लीं।

करीब रात के नौ बजे मैं घर पहुँचा। देखा कि चाची अपनी छोटी बेटी को सुला रही थीं। बच्ची को अच्छे से सुलाने के बाद हम दोनों ने साथ में खाना खाया। खाने के बाद चाची ने बाकी सारे काम निपटाए और सोने की तैयारी करने लगीं। उन्होंने बच्ची को ऊपर बिस्तर पर लिटा दिया था।

मैंने चुपके से वियाग्रा की गोली निगल ली। अब हम दोनों नीचे ज़मीन पर बिछी चादर पर लेटे हुए थे और हल्की-फुल्की बातें कर रहे थे। लेकिन मेरे दिमाग में बस एक ही ख्याल बार-बार आ रहा था — उनकी चुदाई का। वियाग्रा का असर धीरे-धीरे शुरू हो रहा था और मेरा लंड पहले से ही सख्त होने लगा था।

करीब आधे घंटे बाद चाची की साँसें गहरी और नियमित हो गईं। मुझे लगा कि वो सो गई हैं। मैंने थोड़ी हिम्मत जुटाई और धीरे से उनके करीब सरक गया। फिर हल्के से अपना हाथ बढ़ाकर उनकी एक चूची पर रख दिया। साड़ी और ब्लाउज के ऊपर से भी उनकी गरमाहट और मुलायमियत महसूस हो रही थी।

कुछ देर तक मैं बस हल्के-हल्के दबाता रहा। जब देखा कि उनकी तरफ से कोई विरोध या हरकत नहीं हो रही, तो मैंने थोड़ा और दबाव बढ़ाया। अब मैं चूची को पूरा मसल रहा था, उँगलियों से निप्पल की जगह टटोल रहा था। थोड़ी ही देर में चाची के मुँह से हल्की-सी सिसकारी निकली — “म्म्म…”। मैं समझ गया कि वो सोने का नाटक कर रही हैं।

मेरी हिम्मत और बढ़ गई। मैंने उनके कान के पास मुँह ले जाकर धीरे से कहा, “अगर असली मज़ा चाहती हो तो खुलकर साथ दो, चाची।”

चाची ने आँखें खोलीं, मुस्कुराईं और बहुत धीमी, कामुक आवाज़ में बोलीं, “मेरे राजा… आज मेरी प्यास बुझा दे। बहुत दिनों से प्यासी हूँ।”

मैंने पूछा, “क्या बात है? चाचा…” उन्होंने आह भरते हुए कहा, “बेटी होने के बाद वो मुझे छूते भी कम हैं। बहुत कम चोदते हैं अब।”

यह सुनते ही मैंने उन्हें कसकर अपनी बाँहों में जकड़ लिया। उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और जोर-जोर से चूमने लगा। पहले हल्के चुम्बन, फिर जीभ से उनके होंठों को चाटा, फिर जीभ अंदर डालकर उनकी जीभ से खेलने लगा। उनकी साँसें तेज़ हो गईं। मैं उनके होंठ चूस रहा था जैसे कोई भूखा आदमी सालों बाद खाना पा रहा हो।

मेरा एक हाथ उनकी चूची पर गया। ब्लाउज के ऊपर से ही मैंने उसे दबाया, मसला। धीरे-धीरे सहलाने लगा। उनकी साँसें और गर्म हो रही थीं। फिर मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोल दिए। अंदर ब्रा नहीं थी। उनकी दोनों चूचियाँ आज़ाद हो गईं। मैंने एक चूची को मुँह में लिया और जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को घुमाता, चाटता, हल्के से काटता। दूसरी चूची को हाथ से दबाता, मसलता।

चाची की सिसकारियाँ बढ़ने लगीं — “आह्ह… राजा… और ज़ोर से… चूसो…”

मैंने उनकी साड़ी को धीरे-धीरे ऊपर किया और पूरी तरह उतार दिया। अब वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज (जो खुला हुआ था) में थीं। उन्होंने अपना हाथ मेरी पैंट के अंदर डाला। मेरे सख्त लंड को पकड़ा और सहलाने लगीं। उनकी उँगलियाँ मेरे लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैं सिहर उठा।

मैंने उनका पेटीकोट भी खोल दिया। उनकी चिकनी, बिना बाल वाली चूत मेरे सामने थी। मैंने हाथ बढ़ाकर उस पर उँगलियाँ फेरनी शुरू कीं। चूत पहले से ही गीली थी। मैंने बीच की दरार पर उँगली रखी और धीरे से अंदर डाली। उनकी चूत गरम और नरम थी। उँगली अंदर-बाहर करने लगा।

चाची की सिसकारियाँ तेज़ हो गईं — “आईईई… ईईई… ओह्ह… राजा… और अंदर… आह्ह…”

वो मेरे लंड को और ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगीं। मैं भी मस्ती में कराह रहा था — “आह्ह… चाची… कितना अच्छा लग रहा है… ईईउउ…”

फिर चाची ने मेरी चड्डी पूरी तरह नीचे कर दी। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा और सख्त था। उन्होंने उसे हाथ में पकड़ा, ऊपर-नीचे किया और फिर मुँह में ले लिया। उनका गरम मुँह मेरे लंड पर लगा तो मैं सातवें आसमान पर पहुँच गया। वो जीभ से चाट रही थीं, सिर को आगे-पीछे कर रही थीं, कभी गहराई तक ले रही थीं। मैं पहली बार लंड चुसवा रहा था और वो अनुभव अविस्मरणीय था।

कुछ देर बाद हम दोनों ने 69 की पोजीशन बना ली। मैं उनकी चूत चाट रहा था, जीभ अंदर डाल रहा था, क्लिट को चूस रहा था। और वो मेरे लंड को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूस रही थीं। हम दोनों की सिसकारियाँ और कराहें कमरे में गूँज रही थीं।

मेरा यह पहला मौका था जब मैं किसी के साथ इतने करीब आया था। मन में एक अजीब सी घबराहट थी कि कहीं मैं अभी से ही झड़ न जाऊं, कहीं सब कुछ इतनी जल्दी खत्म न हो जाए।

मैंने धीरे से उनका मुंह छोड़ा और अपना लंड उनके होंठों से बाहर निकाला। फिर मैं उनके ऊपर झुक गया, छाती से छाती सटाकर उन्हें पूरी तरह अपनी बाहों में ले लिया।

चाची ने मेरी आंखों में देखते हुए प्यार से कहा, “अब चोद भी दो मेरे राजा… बस अब और इंतजार नहीं होता।”

मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया, “जरा रुक जा मेरी रानी… थोड़ा मजा तो लेने दे। सब कुछ इतनी जल्दी नहीं करनी।”

वो बेचैनी से करवट लेते हुए बोलीं, “अब और बर्दाश्त नहीं होता मेरे राजा। मेरी बुर में अपने ये लंड को डालो… जल्दी से चोद दो मुझे।” उनकी आवाज में एक तरह की ललक और बेसब्री थी जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी।

फिर मैं बिस्तर पर खड़ा हुआ। उन्हें धीरे से पेट के बल लिटाया। उनके नरम, गोल चूतड़ों के नीचे एक मोटा तकिया रख दिया ताकि उनकी कमर ऊंची हो जाए और चूत पूरी तरह मेरे सामने आ जाए। उनकी चूत पहले से ही गीली थी, चमक रही थी, और लाल-लाल होकर फूली हुई लग रही थी।

मैंने अपना लंड हाथ में लिया, उसकी नोक को उनकी चूत की दरार पर रखा। धीरे-धीरे दबाव डालने लगा। चाची ने अपनी कमर को थोड़ा और ऊपर उठाया, जैसे मुझे और गहराई में बुला रही हों।

मैंने एक गहरी सांस ली और फिर जोर का झटका मारा। पूरा लंड एक ही धक्के में उनकी चूत के अंदर समा गया।

चाची जोर से चिल्लाईं, “आह्ह्ह… आआअ… ईईई… मार डाला… बस… बस… धीरे करो प्लीज…” उनकी आवाज में दर्द और सुख दोनों थे। उनकी चूत मेरे लंड को इतनी कसकर जकड़ रही थी कि मुझे लगा जैसे वो मुझे अंदर खींच रही हो।

मैंने कुछ पल रुककर उन्हें सांस लेने दिया। फिर धीरे-धीरे धक्के देने शुरू किए। पहले हल्के, फिर थोड़े गहरे। हर धक्के के साथ उनकी चूत और गीली होती जा रही थी, और आवाजें आने लगीं – फच… फच… फच…

चाची भी अब साथ दे रही थीं। वो अपनी कमर को मेरे धक्कों के साथ ऊपर-नीचे करने लगीं। उनकी हरकतें तेज होती जा रही थीं।

वो कराहते हुए बोलीं, “आआह… एयेए… उअयू… ईस्स… मार डाला… चोदो… और जोर से… आह्ह… और जोर से…”

मेरे ऊपर वियाग्रा का असर अब पूरी तरह छा चुका था। लंड पत्थर की तरह सख्त था, और थकान का नामोनिशान नहीं। मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी। अब धक्के तेज और गहरे हो रहे थे। हर धक्के में मैं जड़ तक जाता और पूरी ताकत से वापस खींचता।

चाची ने अपने नाखून मेरी पीठ पर गड़ा दिए। दर्द और सुख का मिला-जुला एहसास था। हम दोनों एक-दूसरे में पूरी तरह समा जाना चाहते थे। उनकी चूत मेरे लंड को बार-बार निचोड़ रही थी, जैसे वो मुझे और गहराई में खींचना चाहती हो।

लंबी और जोरदार चुदाई चल रही थी। मैंने महसूस किया कि चाची अब चरम पर पहुंचने वाली हैं। उनकी सांसें तेज हो गईं, शरीर कांपने लगा।

तभी उन्होंने मुझे कसकर जकड़ लिया। अपनी टांगें मेरी कमर पर लपेट लीं और कमर को तेज-तेज हिलाने लगीं। मैं भी उसी पोजीशन में उन्हें जोर-जोर से धकेल रहा था। तकिया उनके नीचे था, इसलिए हर धक्का बहुत गहरा जा रहा था।

कुछ देर बाद मैंने हांफते हुए कहा, “मेरा निकलने वाला है…”

चाची ने तुरंत जवाब दिया, “अंदर ही छोड़ दो… प्लीज राजा… अंदर ही… तेजी से करो… और जोर से… मेरा भी दूसरी बार होने वाला है… तेज… और तेज… हम्म्म्म…”

वे ऐसा कहते-कहते अचानक अकड़ गईं। उनकी चूत ने मेरे लंड को बहुत जोर से निचोड़ा। पूरा शरीर कांप उठा और वो जोर से झड़ गईं। उनकी चूत से गर्म पानी की लहरें निकलने लगीं।

उसी पल मैं भी उनके साथ ही झड़ गया। लंड अंदर ही धड़क-धड़क कर सारा माल उनकी चूत में उड़ेल दिया। हम दोनों एक साथ चरम पर पहुंचे।

हम पसीने से लथपथ थे। सांसें तेज चल रही थीं। चाची के चेहरे पर संतुष्टि और खुशी के भाव थे, मानो उनकी सालों की प्यास कुछ हद तक शांत हो गई हो।

मैंने घड़ी देखी। अभी ग्यारह बजकर तीस मिनट हुए थे।

मैं कुछ देर तक उनके ऊपर ही पड़ा रहा। धीरे-धीरे मेरा लंड सिकुड़ने लगा और उनकी चूत से फिसलकर बाहर आ गया।

चूत से हम दोनों का मिला-जुला पानी धीरे-धीरे बहने लगा, तकिए पर फैलने लगा। मैं उनके बगल में लेट गया। अपना हाथ उनकी नरम, गोल चूचियों पर रखकर धीरे-धीरे सहलाने लगा।

चाची मुझे बोलीं – अभी भी तेरा दिल नहीं भरा क्या?

मैं बोला – एक बार और हो जाए तो मज़ा आ जाएगा।

चाची बोलीं – नहीं। टाइम तो देख, तेरे चाचा आते ही होंगे।

तो मैं बोला – चाचा को आने में अभी बहुत टाइम है। प्लीज़ एक बार और करते हैं ना।

चाची बोलीं – तू नहीं मानने वाला। चल, कर ले। तुझे जो करना है। पर जल्दी कर, समझा?

उसके बाद मैंने धीरे से उनके कंधे पकड़े और उन्हें अपनी तरफ खींच लिया। चाची ने पहले तो हल्का सा धक्का दिया, लेकिन उनकी साँसें पहले से ही तेज़ चल रही थीं। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले हल्के चुंबन, फिर जीभ अंदर डालकर उनकी जीभ से खेलने लगा। चाची की जीभ भी अब मेरे साथ नाच रही थी। उनकी साँसें गरम होकर मेरे मुँह में आ रही थीं।

मैंने उनके कान में फुसफुसाया – चाची, आपकी चूत अभी भी गीली है ना?

चाची ने मेरी गर्दन पर हाथ रखकर कहा – हाँ रे हरामी… तूने तो पहले ही भिगो दी है। अब जल्दी कर, चोद मुझे।

मैंने उनका ब्लाउज़ ऊपर किया और ब्रा के ऊपर से स्तनों को दबाया। निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे। मैंने ब्रा नीचे खींची और एक निप्पल को मुँह में ले लिया। चूसने लगा, जीभ से घुमाते हुए। चाची की सिसकारी निकली – आह्ह… चूस अच्छे से… दूसरा भी चूस… तेरी चाची के चुचे कितने दिन से तरस रहे थे।

मैंने दूसरा निप्पल भी मुँह में लिया और दोनों को बारी-बारी चूसता रहा। मेरे हाथ उनकी साड़ी के नीचे गए। पैंटी पहले से गीली थी। मैंने उँगली से बाहर से ही रगड़ा तो चाची काँप गईं।

चाची बोलीं – अंदर डाल ना… उँगली से चोद… जल्दी।

मैंने पैंटी साइड की और दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं। उनकी चूत गर्म और फिसलन भरी थी। अंदर-बाहर करने लगा। चाची की कमर ऊपर-नीचे होने लगी।

चाची ने मेरी कमर से हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को बाहर निकाला। उसे मुठिया में पकड़कर सहलाने लगीं। – कितना सख्त हो गया है तेरा लंड… चाची की चूत में घुसने को बेताब है।

फिर उन्होंने मुझे पीठ के बल लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गईं। अपनी पैंटी पूरी उतारी, चूत को मेरे लंड पर रगड़ा। गीला मुंह मेरे लंड के सिर पर फिसल रहा था।

चाची बोलीं – ले अब… चाची तेरे लंड पर चढ़ रही है।

उन्होंने कूल्हे नीचे किए। मेरा लंड धीरे-धीरे उनके अंदर समाता गया। पहले सिर, फिर आधा, फिर पूरी लंबाई। चाची ने आँखें बंद करके लंबी आह भरी – आह्ह… कितना मोटा है… पूरी भर गई चूत।

अब वो ऊपर-नीचे होने लगीं। धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ी। हर बार नीचे आने पर उनकी चूत मेरे लंड को पूरी तरह निगल लेती। चाची ज़ोर-ज़ोर से कूल्हे हिला रही थीं। स्तन उछल रहे थे।

चाची बोलीं – चोद मुझे… ज़ोर से… तेरी चाची को चोद… हाँ… ऐसे ही… और तेज़… आह्ह… तेरे लंड ने तो चूत फाड़ दी।

मैंने उनके कूल्हे पकड़े और नीचे से धक्के मारने लगा। हमारे शरीर आपस में टकरा रहे थे। चपचप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी।

कुछ देर बाद चाची अकड़ने लगीं। उनकी जाँघें कस गईं। चूत की दीवारें मेरे लंड को ज़ोर से दबाने लगीं।

चाची चीखीं – आ रहा है… मैं झड़ रही हूँ… आह्ह्ह… ले मेरी चूत का रस… ले…

उनका शरीर काँपने लगा। गर्म रस मेरे लंड पर बहकर नीचे तक आ गया। चाची कुछ पल थरथराती रहीं, फिर ढीली पड़ गईं।

पर मेरा अभी नहीं हुआ था। मैंने उन्हें नीचे किया। अब मैं ऊपर आया। उनकी टाँगें अपने कंधों पर रखीं। इस पोज़िशन में चूत और गहरी लग रही थी।

मैंने एक झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया। चाची की आँखें खुल गईं – ओह्ह… इतना गहरा… मार डालेगा रे… चोद ज़ोर से।

अब मैं तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। हर धक्के के साथ उनके स्तन उछल रहे थे। चाची की सिसकारियाँ फिर शुरू हो गईं।

चाची बोलीं – हाँ… ऐसे ही… फाड़ दे चूत… अपनी चाची की चूत में अपना माल डाल… भर दे अंदर… मैं तेरी रंडी हूँ आज… चोद मुझे जैसे चाहे।

मैंने रफ्तार और बढ़ाई। दस मिनट तक लगातार ज़ोर-ज़ोर से चोदा। मेरी साँसें तेज़ थीं। कमर में आग लग रही थी।

आखिरकार मैं हाँफते हुए बोला – चाची… अब आ रहा है…

चाची ने मेरी कमर पकड़ी और बोलीं – अंदर डाल… पूरी तरह अंदर… चाची की चूत में अपना गरम माल भर दे… ले…

मैंने आखिरी कुछ धक्के और तेज़ किए। फिर पूरी ताकत से गहराई तक धकेला और छूट गया। गर्म-गर्म वीर्य की मोटी-मोटी धार उनके अंदर निकलने लगी। एक… दो… तीन… चार बार तक झटके आए। चाची की चूत मेरे वीर्य से भर गई। कुछ वीर्य बाहर भी निकलकर उनकी जाँघों पर बह गया।

मैं कुछ पल उसी हालत में रहा, फिर धीरे से बाहर निकला। चाची की चूत से मेरा सफेद वीर्य धीरे-धीरे बाहर रिस रहा था।

उसके बाद मैं और चाची अपने कपड़े ठीक करके सो गए।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी? उसके बाद चाची को कई बार चोदा मैंने, बाकी कहानी अगले भाग में

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