Chachi chudai sex story, Pyasi chachi sex story, Khet me chudai sex story: मेरा नाम रोहन है, मेरी उम्र 22 साल है और आज मैं आपके सामने अपनी एक सच्ची कहानी कहने जा रहा हूं। बात उन दिनों की है जब मैं पढ़ता था। उन दिनों मेरी गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थीं। अब मेरा सेक्स करने का बहुत मन करने लगा था, पर तब तक मुझे कोई मौका नहीं मिल पाया था। बहुत दिनों से मेरी नजर मेरी चचेरी चाची पर थी, लेकिन तब तक मैंने उनसे अपनी भावनाएँ कभी अभिव्यक्त नहीं की थीं।
एक दिन मेरे एक दोस्त ने मुझे मोबाइल में ब्लू फिल्म दिखाई। फिर क्या था, उस दिन मेरा लंड उफान मार रहा था। पूरी फिल्म देखते हुए मेरे दिमाग में बार-बार चाची का चेहरा और उनका शरीर घूमता रहा। मैंने ठान लिया कि आज तो चाहे कुछ भी हो जाए, चाची को चोदना ही है।
चाची की उम्र लगभग 28 साल है। उनके दो बच्चे हैं – एक की उम्र सात साल के आसपास और दूसरे की नौ साल के करीब। उनका रंग सांवला है, लेकिन चेहरा बहुत आकर्षक है। स्तन मध्यम आकार के हैं, अच्छी तरह उभरे हुए, और उनकी गांड देखकर किसी का भी मन डोल जाए – गोल, भरी हुई और थोड़ी ऊँची। मैं शहर में पढ़ता था, इसलिए जब भी उन्हें कोई सामान मँगवाना होता, वे मुझसे ही कहती थीं। मैं खुशी-खुशी उनका सामान लाकर देता था।
चाचा थोड़े दुबले-पतले हैं। देखने में भी उतने खास नहीं लगते और आए दिन उनकी तबीयत कुछ न कुछ खराब रहती है। चाची को देखकर लगता था कि चाचा उन्हें अच्छी तरह संतुष्ट नहीं कर पाते। उनकी आँखों में एक तरह की प्यास साफ दिखती थी, जो कभी पूरी नहीं हो पाती।
चाची का एक जीजा है, जो हमेशा उनके यहाँ आता-जाता रहता है। कई बार जब चाचा बाहर होते हैं, तो वह पूरा दिन और कभी-कभी पूरी रात भी चाची के साथ उनके कमरे में रहता है। यह बात मेरे मन में कई दिनों से खटक रही थी। मुझे पूरा यकीन हो गया था कि उनके बीच सिर्फ रिश्तेदारी का नहीं, बल्कि शारीरिक संबंध भी है।
इसी वजह से मैंने हिम्मत जुटाई। मैंने सोचा कि अगर आज चाची मुझे मना भी कर देंगी, तो मैं उन्हें ब्लैकमेल कर सकता हूँ। उनके और उनके जीजा के इस संबंध का जिक्र करके उन्हें मजबूर कर सकता हूँ। इसलिए उस दिन मैंने मन बना लिया था कि चाहे जो हो जाए, मैं चाची से अपनी इच्छा कहकर रहूँगा। मुझे भी थोड़ा रस-पान करा दें।
उस दिन करीब दोपहर के दो बज रहे थे। उनके घर में उनके अलावा और कोई नहीं था। दोनों बच्चे अपनी मासी के घर गए हुए थे और चाचा खेतों में काम करने निकल गए थे। मैं इसी मौके का इंतजार कर रहा था। हमारा घर और उनका घर पास-पास ही है, इसलिए मुझे बस कुछ कदम चलकर उनके घर पहुंचना था।
मैं उनके घर के सामने पहुंचा। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने दरवाजा खटखटाया। पहली बार में कोई जवाब नहीं आया। शायद वो सो रही थीं। मैंने फिर दो-तीन बार जोर से खटखटाया। थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला। चाची ने नींद भरी आंखों से मुझे देखा और जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, मैं तेजी से अंदर घुस गया।
मैंने पीछे मुड़कर दरवाजा बंद किया और कुंडी लगा दी। फिर मैंने उनका हाथ मजबूती से पकड़ा और उन्हें अंदर की ओर खींचते हुए ले गया। मैं उन्हें दीवार से सटा कर खड़ा हो गया। मेरी छाती उनकी छाती से सटी हुई थी और मेरी सांसें बहुत तेज चल रही थीं। उनकी पिछवाड़े को दीवार से टिकाकर मैं उनसे पूरी तरह सट गया था।
चाची एकदम डर गई थीं। उनकी आंखें फैल गई थीं और चेहरा सफेद पड़ गया था। मुझे भी समझ नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या करना चाहिए। मेरी सांसें इतनी तेज थीं कि लग रहा था जैसे सीना फट जाएगा। मैंने कुछ पल रुककर गहरी सांस ली और खुद को थोड़ा शांत करने की कोशिश की।
फिर मैंने धीरे-धीरे लेकिन दृढ़ आवाज में कहा, “चाची, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो। मैं आपको जब भी देखता हूं, उत्तेजित हो जाता हूं। यहां तक कि जब आप कपड़े बाहर सुखाती हो, तो मैं आपकी ब्रा देखकर मुठ मारता हूं, बिना उसके रह नहीं पाता।”
मैं रुक गया, लेकिन मेरी आवाज कांप रही थी। फिर एक सांस में बोल पड़ा, “मैंने आज तक कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया है, लेकिन आज मेरा लंड उफान मार रहा है। मैं आपको जी भर कर चोदना चाहता हूं। प्लीज, ना मत करना।”
ये सारी बातें मैंने इतनी तेजी से बोल दीं कि मुझे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था। बोलते-बोलते मेरा दायां हाथ अनजाने में उनके उभारों पर जा पहुंचा। मैंने बिना सोचे-समझे उन्हें जोर से मसलना शुरू कर दिया। आज तक मैंने असल जिंदगी में किसी औरत के स्तनों को छुआ भी नहीं था। इसलिए मैं हैवान की तरह उन्हें निचोड़ने लगा। मेरी उंगलियां उनके मध्यम आकार के, मुलायम लेकिन भरे हुए उभारों पर कसकर दब रही थीं। मैं उन्हें ऐसे मसल रहा था जैसे सालों से इंतजार कर रहा था।
चाची तड़प गईं, लेकिन पहले पल में विरोध नहीं कर पाईं। उनका शरीर मेरे हाथों में कांप रहा था। जैसे ही मैंने चूमने के लिए अपने होंठ उनके होंठों की ओर बढ़ाए, उन्होंने अचानक मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और अपने उरोजों से हटा दिए।
उन्होंने कांपती आवाज में कहा, “ऐसा नहीं बोलते रोहन। मैं तुम्हारी चाची हूं। मुझसे तुम्हें ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए।”
मैंने तुरंत जवाब दिया, “जब आप अपने जीजा के साथ सोती हो, तो क्या ये नहीं सोचतीं कि आप शादीशुदा हो? जो आप उनके साथ करती हो, वो गलत नहीं है? फिर अब ये शब्द अचानक कैसे याद आ रहे हैं आपको?”
यह बोलते ही मैंने उन्हें रोकने का मौका नहीं दिया। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और जोर से चूमना शुरू कर दिया। मेरे होंठ उनके मुलायम, गर्म होंठों से दब रहे थे। मैंने उनकी निचली होंठ को हल्के से काटा, फिर जीभ से उनके होंठों को चाटा।
इस बार वो मुझे रोक नहीं पाई। मैंने उनके होंठों को बहुत देर तक चूसा। पहले उनके निचले होंठ को धीरे-धीरे अपनी जीभ से सहलाया, फिर दोनों होंठों को पूरी तरह अपने मुंह में लेकर गहराई से चूसा। उनकी सांसें तेज हो रही थीं और होंठों से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं। मेरे हाथ उनके मम्मों पर पहुंच गए। मैंने ऊपर से ही उनकी ब्लाउज के ऊपर से दोनों स्तनों को जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया। उनकी निप्पल्स सख्त होकर ब्लाउज के कपड़े से उभर आई थीं। मैंने अंगूठों से उन निप्पल्स को दबाया और गोल-गोल घुमाया, जिससे वो और ज्यादा कराहने लगीं।
वो अपने आप को मुझसे छुड़ाने की कोशिश करने लगी। उनके हाथ मेरी छाती पर पड़े और धक्का देने की कोशिश की, लेकिन उनकी ताकत कमजोर पड़ रही थी। उनकी कोशिशें नाममात्र की थीं। मैंने उनके होंठों को और गहराई से चूमा, जीभ अंदर डालकर उनकी जीभ से खेलने लगा। उसी दौरान मेरे दोनों हाथ नीचे सरक गए और उनके चूतड़ों को पकड़ लिया। मैंने दोनों गालों को जोर से दबाया, मसलने लगा, फिर हल्के से थपथपाया। उनकी साड़ी का पल्लू सरक रहा था और ब्लाउज के नीचे से उनकी नरम कमर की गर्माहट मेरे हाथों को महसूस हो रही थी।
मैं उन्हें दीवार से सटाकर खड़ा कर चुका था। मेरी एक जांघ उनके दोनों पैरों के बीच में थी और मैं धीरे-धीरे उन्हें रगड़ रहा था। उनके शरीर में कंपकंपी चल रही थी। मेरे लंड की सख्ती उनकी जांघों से साफ महसूस हो रही थी। मैंने उनके होंठ छोड़कर उनकी गर्दन पर होंठ रख दिए। पहले हल्के से चूमा, फिर जीभ से चाटा और आखिर में हल्के से दांत गड़ा दिए। वो सिहर उठीं और उनकी सांसें और तेज हो गईं।
इतना सब होने के बाद अचानक मुझे होश आया। सेक्स की आग में मैं कहीं कुछ ऐसा न कर बैठूं जिससे बाद में जिंदगी भर पछतावा हो। मैंने धीरे-धीरे उन्हें ढीला किया और पीछे हट गया। तब तक मेरा लंड पूरी तरह फड़फड़ा रहा था, तनाव से फटने को तैयार था। मुझे नहीं पता उस पल मैंने खुद को कैसे रोक लिया।
मैंने उनकी आंखों में देखते हुए धीरे से कहा, “चाची, मुझे माफ कर दो। मैं थोड़ा बहक गया था। अगर आप नहीं चाहतीं कि मैं आपके साथ कुछ करूं, तो मैं बिल्कुल नहीं करूंगा। बस आप यह बात किसी को मत बताना।”
तब तक मैं उन्हें इतना उत्तेजित कर चुका था कि उनकी सांसें अभी भी तेज चल रही थीं, शरीर हल्का-हल्का कांप रहा था। वो चुदे बिना शायद नहीं रह सकती थीं, लेकिन फिर भी खुद को संभालते हुए बोलीं, “कोई बात नहीं। जवानी में ऐसी गलती हो जाती है। तुम फिक्र मत करो, मैं किसी को नहीं बताऊंगी।”
मैं उनका इशारा अच्छी तरह समझ गया था। लेकिन मैं उन्हें उनकी अपनी मर्जी से, उनकी इच्छा से चोदना चाहता था। मुझे यकीन था कि आज नहीं तो कल वो खुद मुझसे यह सब करवाएंगी। मैंने उन्हें उसी आग में, उसी उत्तेजना में छोड़कर वापस आ गया।
मैं मौके का इंतजार करने लगा। फिर एक दिन चाचा की तबीयत थोड़ी खराब थी और चाची को किसी कारणवश अपनी बहन के यहां जाना था। घर में और लोगों के रहते हुए भी उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उन्हें छोड़ दूं। मैंने हां कर दी। यह जानते हुए भी कि अब वो भी मुझसे चुदना चाहती हैं, मैंने अपनी तरफ से कोई जल्दबाजी नहीं की।
उन्हें ले जाते समय रास्ते में मैंने उनसे कोई बात नहीं की और न ही उन्होंने मुझसे कुछ कहा। जब सड़क में गड्ढे आते थे तो वो मेरी ओर सरक जाती थीं। तब उनके मुलायम दूध मेरे कंधे और पिछवाड़े को छूते थे। हर बार ऐसा होने पर मेरा लंड सलामी देने लगता था, सख्त होकर उठ खड़ा होता था। लेकिन मैंने हर बार खुद को काबू में रखा। उस दिन मैंने उन्हें अच्छे से वहां पहुंचाया और वापस भी अच्छे से ले आया।
कई दिन तक मैंने मुठ मारकर काम चलाया, लेकिन एक दिन चोदने की इच्छा इतनी प्रबल हो गई थी कि बर्दाश्त से बाहर हो रही थी। ठीक उसी दिन चाची ने मुझसे कुछ दवाई मंगवाई। मैंने मन ही मन ठान लिया कि आज मौका हाथ से नहीं जाने दूंगा। स्कूल से लौटते समय मैंने उनकी दवाई की थैली में एक पैकेट कंडोम खरीदकर सावधानी से डाल दिया। घर पहुंचते ही मैंने थैली उन्हें देने के लिए सीधे उनके पास जाकर पकड़ा दी। संयोग से उस वक्त घर में सिर्फ वही थीं। मैंने बिना कुछ बोले थैली सौंपी और चुपचाप वापस आ गया।
मैंने सोचा कि अब तक उन्होंने थैली खोलकर कंडोम देख लिए होंगे। थोड़ी देर बाद मैं घूमने के बहाने उनके घर के पास पहुंच गया। वो भी घर से बाहर निकलीं और इशारे से कुछ कहना चाह रही थीं, लेकिन मैं उनकी बात समझ नहीं पाया। मैंने भी इशारे में ही कहा कि थोड़ी देर बाद आता हूं, जब चाचा यहां न रहें। उन्होंने हल्के से सिर हिलाकर हामी भरी और वापस कमरे में चली गईं।
कुछ देर बाद जब चाचा कहीं बाहर गए, मैं फिर उनके घर पहुंचा। मैंने सीधे पूछा, “क्या बोलना चाह रही थीं, अब बोलो।” उन्होंने थोड़ा संकोच करते हुए कहा, “उस दिन मैंने मना किया था, फिर भी तुमने मेरे साथ जबरदस्ती नहीं की। मुझे तड़पा कर छोड़ गए और आज तक तुमने मेरी कोई बात नहीं टाली। इसलिए अब मैं भी तुम्हारे लिए कुछ करना चाहती हूं। तुम जो चाहो, मेरे साथ कर सकते हो। मैं भी तुम्हारे साथ सोने के लिए बेताब हूं।”
इतना कहते ही उन्होंने शर्म से सिर झुका लिया। मैंने उनका हाथ पकड़ा और बिना किसी हिचकिचाहट के सीधे पूछा, “कब और कहां?” उन्होंने धीमी आवाज में जवाब दिया, “आज रात दस बजे घर के पीछे वाले खेत में, उस बड़े पेड़ के नीचे मिलना।” मेरे मन में जैसे लड्डू फूट पड़े। मैंने बस हां में सिर हिलाया और वहां से चला आया।
पूरी शाम मैं बेचैनी से गुजारा। रात को ठीक साढ़े नौ बजे मैं पेड़ के नीचे पहुंच गया और उनका इंतजार करने लगा। जैसे ही घड़ी में दस बजे, दूर से उन्हें आते देखा। चांदनी रात में लाल साड़ी पहने वो धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ रही थीं। उनकी चाल इतनी मनमोहक थी कि वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं। मेरी धड़कनें तेज हो गईं। हर सेकंड भारी लग रहा था। वो हल्के-हल्के कदमों से पास आती गईं और मैं एकटक उन्हें निहारता रहा।
जब वो बिल्कुल मेरे सामने आकर खड़ी हो गईं, मैंने उनका दाहिना हाथ पकड़ा और धीरे से उसकी उंगलियों पर होंठ रखकर चूम लिया। शर्म से उनका सिर नीचे झुक गया। मैंने उनकी चोटी को पकड़कर उनका चेहरा ऊपर उठाया और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए। उनकी सांसें गर्म और तेज थीं। मैंने अपनी जीभ से उनके होंठों को खोला और अंदर डालकर उनकी जीभ से खेलने लगा। हम दोनों की जीभें एक-दूसरे से लिपट गईं। मैंने उनकी पीठ पर हाथ फेरना शुरू किया। धीरे-धीरे मेरे हाथ नीचे सरकते गए और उनके चूतड़ों तक पहुंच गए। मैंने दोनों गालों को कसकर पकड़ा और जोर-जोर से मसलने लगा। उनकी साड़ी का कपड़ा मेरी हथेलियों के नीचे सरक रहा था।
मैं उनके होंठों को गहराई से चूस रहा था। उनकी जीभ मेरे मुंह में थी और मैं उसे चाट रहा था। वो भी अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थीं। उनकी सिसकारियां मेरे मुंह में दबकर रह गईं। लगभग पांच मिनट तक मैंने उन्हें ऐसे ही चाटा, चूसा और उनकी जीभ से खेलता रहा। फिर मैंने उनके चूतड़ों को और मजबूती से पकड़ा। एक झटके में उन्हें अपनी गोदी में उठा लिया। वो मेरी गर्दन को अपनी दोनों बाहों से जकड़कर लटक गईं। उनकी जांघें मेरी कमर के दोनों तरफ थीं और उनका पूरा वजन मेरे ऊपर था। वो आराम से मेरी गोदी में लटकी रहीं, जैसे वो इसी पल का इंतजार कर रही हों।
इस अवस्था में ठीक उनकी चूत मेरे लंड के सामने थी और उनके उभार मेरे मुंह के बिल्कुल सामने थे। मैंने पहले ब्लाउज के ऊपर से ही उनके उरोजों को चूमना शुरू किया। मेरे होंठ कपड़े के ऊपर से उनकी निप्पल्स पर दब रहे थे। मेरा लंड इतना फुंकार रहा था कि लग रहा था अभी पैंट फाड़कर बाहर निकल आएगा और उनकी चूत को चीर देगा। मैंने कपड़े के ऊपर से ही दोनों उभारों को बारी-बारी से दांतों से हल्के-हल्के काटना शुरू किया। हर काटने पर वो सिहर उठतीं और उनकी सांसें रुक-रुककर चलने लगतीं।
फिर मैंने उन्हें धीरे से जमीन पर लिटा दिया। चांदनी रात की ठंडी हवा उनके बदन को छू रही थी। मैंने उनके ब्लाउज के बटन एक-एक करके खोलने शुरू किए। जैसे ही ब्लाउज पूरी तरह खुला और मैंने उसे उनके बदन से उतारा, वो लाल साड़ी और काली ब्रा में एकदम परी-सी लग रही थीं। उनकी सांसें तेज थीं और छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने उन्हें थोड़ा ऊपर उठाया और ब्रा के पीछे के हुक खोल दिए। ब्रा ढीली हुई और मैंने उसे भी उतार फेंका। अब उनके सफेद-सफेद, गोल-गोल दूध चांदनी में चमक रहे थे। खुले आसमान के नीचे उनके नंगे उरोज कहर ढा रहे थे। उनका ऊपरी बदन पूरी तरह नग्न हो चुका था।
मैंने झुककर एक थन मुंह में भर लिया। जीभ से निप्पल को गोल-गोल घुमाया, फिर जोर से चूसा। दूसरा थन हाथ से मसलते हुए मैंने पहले वाले को चूस-चूसकर लाल कर दिया। दोनों निप्पल्स सख्त और उभरी हुई हो गई थीं। अब मेरे हाथ नीचे सरके। मैंने पेटीकोट के अंदर हाथ डाला तो पता चला कि आज उन्होंने पेटीकोट के नीचे कुछ नहीं पहना था। जैसे ही मेरी उंगलियां उनकी चूत पर पहुंचीं, वो पूरी तरह गीली और गरम थी। चूत से रस टपक रहा था। मैं समझ गया कि चाची अब चुदने को पूरी तरह तैयार हैं।
मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा और धीरे-धीरे पूरी साड़ी उतार दी। फिर पेटीकोट की नाड़ी खोलकर उसे भी नीचे सरका दिया। अब वो मेरे सामने पूरी नंगी लेटी थीं। उनकी चूत चांदनी में चमक रही थी, पूरी तरह भीगी हुई और फूली हुई। मैंने अपनी दो उंगलियां उनकी चूत में घुसेड़ दीं और अंदर-बाहर करने लगा। वो जोर-जोर से आहें भरने लगीं, “उफ्फ… आह… हाय…” उनकी कमर उठ-उठकर मेरी उंगलियों से मिल रही थी। मैंने झुककर उनकी चूत को चाटना शुरू किया। जीभ से क्लिटोरिस को सहलाया, फिर पूरी चूत चाटी। उनका रस मेरे मुंह में आ रहा था। वो हिलने-डुलने लगीं। मैंने दांतों से हल्के से उनकी चूत की त्वचा को काटा और दोनों हाथों से उनके उभारों को जोर-जोर से मसलता रहा। मजा इतना आ रहा था कि समय रुक सा गया था।
बहुत देर तक चूत चाटने के बाद उनकी सांसें और तेज हो गईं। उनका बदन कांपने लगा। मैं समझ गया कि अब लोहा पूरी तरह गर्म हो चुका है, हथौड़ा मारने का वक्त आ गया है। लेकिन मैं उन्हें भी मौका देना चाहता था। मैं चाहता था कि वो मेरे लंड का दीदार करें और उसे छुएं। मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतारे। शर्ट, पैंट, अंडरवियर सब उतार फेंका। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा और फड़फड़ा रहा था। मैंने उसे उनकी मुंह के पास ले जाकर सटा दिया।
शुरू में चाची ने मुंह फेर लिया और मना किया। लेकिन मैंने धीरे से उनका सिर पकड़ा और सुपाड़े को उनके होंठों पर रख दिया। फिर हल्के दबाव से मुंह में घुसा दिया। पहले वो थोड़ी देर शांत रहीं, लेकिन फिर उन्होंने धीरे-धीरे चूसना शुरू कर दिया। उनकी जीभ मेरे सुपाड़े के चारों तरफ घूमने लगी। वो बड़े प्यार से लंड को मुंह में ले रही थीं, चूस रही थीं। मैं कराहने लगा। ऐसा लग रहा था कि अभी उनके मुंह में ही झड़ जाऊंगा। लेकिन मैंने खुद को रोका। थोड़ी देर तक वो मुझे ऐसे चूसती रहीं, फिर उन्होंने मेरा लंड मुंह से आजाद कर दिया।
अब मैं उनकी चूत में पेलने के लिए पूरी तरह तड़प रहा था। मेरा लंड इतना सख्त और गरम हो चुका था कि हर पल बर्दाश्त से बाहर लग रहा था। मैंने उन्हें धीरे से जमीन पर लिटा दिया। उनकी टांगें थोड़ी फैलाकर मैंने उनके बीच में अपनी जगह बना ली। मैंने अपना लंड पकड़ा और उसके सुपाड़े को उनकी चूत की मुंह पर टिकाया। चूत पूरी तरह गीली और खुली हुई थी, जैसे वो मेरे लंड का स्वागत कर रही हो। मैंने उनके दोनों दूधों को हाथों में भर लिया, उंगलियों से निप्पल्स को दबाते हुए धीरे-धीरे कमर आगे की।
सुपाड़ा जैसे ही चूत के मुंह में दबा, वो गहरी सांस लेकर सिहर उठीं। मैंने और थोड़ा दबाव डाला और पूरा लंड एक झटके में अंदर तक घुसा दिया। उनकी चूत इतनी तंग और गरम थी कि मुझे लगा अभी झड़ जाऊंगा। वो “आह्ह्ह…” करके कराह उठीं, उनकी आंखें बंद हो गईं और हाथ मेरी पीठ पर आकर नाखून गड़ा दिए। मैंने कुछ पल ऐसे ही रुककर उन्हें एहसास होने दिया, फिर धीरे-धीरे कमर हिलानी शुरू की।
पहले धीमी गति से अंदर-बाहर करता रहा। हर धक्के के साथ उनका बदन हिलता था और दूध मेरे हाथों में उछलते थे। मैं उन्हें जोर-जोर से निचोड़ता रहा, निप्पल्स को अंगूठे से रगड़ता रहा। धीरे-धीरे मेरी रफ्तार बढ़ने लगी। अब मैं तेज-तेज धक्के मार रहा था। उनकी चूत से चिकचिक की आवाज आने लगी थी। वो भी अब अपनी कमर उठाकर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थीं। इतना आनंद मिल रहा था कि क्या बताऊं। उनकी सिसकारियां रात की खामोशी में गूंज रही थीं – “उफ्फ… आह… और जोर से… हाय…”
करीब दस मिनट तक मैंने उनकी चूत को इस तरह फाड़ा। मेरी सांसें तेज हो गईं, लंड फड़फड़ा रहा था। आखिरकार मैंने जोर का धक्का मारा और सारा वीर्य उनकी चूत के अंदर ही उड़ेल दिया। गरम-गरम वीर्य की धारें उनके अंदर जा रही थीं। वो मंद-मंद मुस्कुरा रही थीं, उनकी आंखों में संतुष्टि थी। मैंने झुककर उनके होंठ चूमे, गले लगाया, उनकी गर्दन पर चूमते हुए कुछ देर ऐसे ही लेटा रहा।
दस मिनट बाद ही मेरा लंड फिर से सख्त होने लगा। वो फिर फड़फड़ाने लगा, सलामी देने लगा। मैंने देखा कि चाची भी अभी तैयार हैं। उनकी चूत से हमारा रस अभी भी बह रहा था। मैंने उन्हें फिर से पोजीशन में लिटाया और इस बार बिना देर किए लंड अंदर डाल दिया। अब चुदाई का दूसरा दौर शुरू हो गया। इस बार मैंने और जोर-जोर से धक्के मारे। उनकी चूत अब और ज्यादा गीली और ढीली हो चुकी थी, लेकिन फिर भी वो मेरे हर धक्के पर कराह रही थीं। मैंने उनकी टांगें कंधों पर रख लीं और गहराई तक पेलना शुरू किया। वो पूरी तरह तृप्त हो रही थीं, बार-बार कह रही थीं – “बस… अब और नहीं… हाय… कितना मजा आ रहा है…”
मैंने इस बार भी लंबे समय तक चोदा। उनकी चूत को पूरी तरह संतुष्ट किया। आखिर में दूसरी बार भी मैंने उनका ही चूत में वीर्य डाल दिया। वो थककर, खुशी से लेटी रहीं। उनकी सांसें अभी भी तेज थीं, लेकिन चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी। इस तरह उस रात मैंने उन्हें दो बार पूरी तरह चोदा और उनकी चूत की प्यास बुझाई।
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