Cousin sister sex story, Swimming pool sex story: मेरा नाम इमरान है और मैं आंध्र प्रदेश से हूं। यह मेरी जिंदगी की असली कहानी है।
उन दिनों की बात है जब मैं स्नातक की पढ़ाई कर रहा था। मेरी उम्र उस समय 21 साल की थी। मेरा लंड सामान्य से काफी ज्यादा लंबा और मोटा है, जो मुझे हमेशा थोड़ा गर्व भी देता था और कभी-कभी परेशानी भी।
जैसे ही कॉलेज की गर्मियों की छुट्टियां शुरू हुईं, मैं अपने दादाजी के गांव कडपा आ गया था। दादाजी का गांव ही वह जगह है जहां मेरी खाला और मामा का परिवार रहता है।
उस दिन मैं बहुत ज्यादा बोर हो रहा था। घर में कुछ काम नहीं था, न कोई दोस्त पास में, न कोई मनोरंजन। तभी खाला के छोटे बच्चे मेरे पास आए और उत्साह से बोले, “इमरान भैया, क्यों न हम सब मिलकर स्विमिंग करने चलें?”
इस पूरी घटना का आगे जिक्र करने से पहले मैं खाला के परिवार के बारे में थोड़ा और बता देना चाहता हूं। मेरी खाला के कुल चार बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी फरीदा है, जिसकी उम्र 19 साल है। उसके बाद करिश्मा है, जो 18 साल की है। बाकी दो छोटे बच्चे अभी स्कूल में पढ़ते हैं, एक लड़का और एक लड़की।
मैं इंटरनेट पर अक्सर सेक्स स्टोरीज पढ़ता रहता था। खास तौर पर बहन-भाई या रिश्तेदारों के बीच चुदाई वाली कहानियां मुझे बहुत आकर्षित करती थीं। उन कहानियों को पढ़ते हुए मैं कई बार कल्पना में खो जाता था।
गांव के हमारे घर में तो टीवी भी नहीं है। इसलिए जब मन करता था टीवी देखने का, तो मैं सीधे खाला के घर चला जाता था। वहां टीवी के साथ-साथ थोड़ा परिवार का माहौल भी मिल जाता था।
एक दिन मैं उनके घर में टीवी देख रहा था। कमरे में अकेला बैठा था और कोई पुरानी फिल्म चल रही थी। तभी फरीदा कमरे में आई और झाड़ू लगाने लगी। उसने हल्की सी कुर्ती पहनी हुई थी और नीचे पेटीकोट। जैसे ही वो झाड़ू मारने के लिए आगे-पीछे हो रही थी, उसके बड़े-बड़े चूचे जोर-जोर से उछलने लगे। कुर्ते का कपड़ा पतला था, इसलिए वो उछाल और भी साफ दिख रहा था।
मैं अनजाने में उसकी तरफ देखता रहा। मेरी नजरें बार-बार उसके उछलते मम्मों पर टिक जाती थीं। वो इतने गोल और भरे हुए थे कि देखते ही मन में एक अजीब सी हलचल होने लगी।
जैसे ही मैंने उसका जवानी से भरा जोबन गौर से देखा, मेरा लंड एकदम सख्त हो गया। वो इतनी तेजी से तन गया कि मुझे पैंट के अंदर असहजता महसूस होने लगी। मैं अब उसे खुलकर निहारने लगा। उसका फिगर 28-24-36 का था। कमर पतली, छाती भरी हुई और गांड मोटी-मोटी उभरी हुई। जब वो चलती थी तो उसकी गांड ऐसे लहराती थी कि कोई भी देखता तो उसका लंड खड़ा हो जाता। फरीदा का रंग बिल्कुल गोरा था, जो उसकी जवानी को और भी आकर्षक बना देता था।
उसकी सबसे बड़ी कमजोरी ये थी कि वो बहुत आलसी है। सुबह देर से उठती थी और काम में भी ज्यादा दिल नहीं लगाती थी।
तभी वो मेरी तरफ मुड़ी और बोली, “इमरान भैया, तुम थोड़ा आगे हटो ना। मुझे इधर झाड़ू मारनी है।”
उसकी आवाज में थोड़ी नखरेबाजी थी। मैंने उसकी तरफ तिरछी नजर से देखा। उसने नीचे सिर्फ पेटीकोट पहना हुआ था, जो थोड़ा ढीला था।
मैं कुर्सी से थोड़ा आगे बढ़ गया। जैसे ही मैं हटा, फरीदा बिल्कुल मेरे सामने आकर झुक गई। वो इतने करीब थी कि उसकी गांड मेरे घुटनों से लग रही थी। जैसे ही वो झुकी, उसकी कुर्ती का गला बहुत नीचे खिसक गया। अब मुझे उसके दोनों चूचे लगभग पूरी तरह दिख रहे थे। वो इतने भरे हुए थे कि ब्रा के कप से बाहर झांक रहे थे। निप्पल गुलाबी और सख्त दिख रहे थे। वो हल्के-हल्के हिल रहे थे क्योंकि वो झाड़ू मार रही थी।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मेरे होश उड़ गए। मैं सोच ही नहीं पा रहा था कि इतनी देर तक मैं कैसे बर्दाश्त करूं। मेरा लंड अब इतना कड़ा हो चुका था कि पैंट के सामने से साफ उभर रहा था।
मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मन में बार-बार एक ही ख्याल आ रहा था कि क्यों न इस फरीदा बहन को अपनी रंडी बना लूं। मैं उसे बिस्तर पर लिटाकर उसके इन बड़े-बड़े चूचों को चूसूं, उसकी मोटी गांड को दबाऊं और उसकी चूत में अपना मोटा लंड पूरा डालकर जोर-जोर से चोदूं। मेरा तन-मन पूरी तरह बेकाबू हो चुका था। मैं बार-बार सोचता रहा कि इसकी चूत कैसी होगी, कितनी टाइट होगी, और मैं इसे कैसे चोदूंगा।
फिर एक दिन मैं मामा से बात कर रहा था। हम दोनों बैठे हुए थे और गाँव की आम बातें हो रही थीं। तभी फ़रीदा का छोटा भाई दौड़ता हुआ आया और उत्साह से बोला, “भैया, आज तो संडे है! क्यों न हम सब मिलकर स्विमिंग करने चलें? तालाब में बहुत मजा आएगा!”
मैंने पहले तो मना कर दिया। बोला, “नहीं यार, मुझे ज्यादा ठंड लगती है पानी में।” लेकिन मन ही मन मुझे लगा कि शायद ये मौका अच्छा हो सकता है।
तभी फ़रीदा पास आई और मीठी आवाज में बोली, “चलो ना भैया, प्लीज। मैं भी स्विमिंग करना चाहती हूँ। बहुत दिनों से मन कर रहा है।” उसकी आँखों में चमक थी और वो थोड़ा नखरे से मुस्कुरा रही थी।
उसकी बात सुनते ही मेरे दिमाग में एक आइडिया कौंध गया। मैंने तुरंत राय बदल दी और बोला, “अच्छा ठीक है, चलो चलते हैं।”
हम सब तैयार होकर तालाब की तरफ चल दिए। दादाजी के खेत में फसल को पानी देने के लिए एक बड़ा सा तालाब था। आस-पास हरे-भरे खेत थे और दूर-दूर तक कोई नहीं दिख रहा था।
हम तालाब के पास पहुँच गए। उस दिन फ़रीदा ने पीला रंग का कुर्ता पहना हुआ था। कुर्ता हल्का और पतला था। नीचे पेटीकोट था जो थोड़ा पारदर्शी था। धूप में देखने पर अंदर का सब कुछ साफ-साफ नजर आ रहा था – उसकी काली पैंटी और ब्रा की झलक तक।
थोड़ी देर चलने के बाद हम तालाब के किनारे पर रुक गए। उस समय सिर्फ तीन लोग थे – मैं, फ़रीदा और उसका छोटा भाई। बाकी बच्चे कहीं और खेल रहे थे।
मैंने अपनी पैंट उतारी और सिर्फ अंडरवियर में खड़ा हो गया। मेरी बॉडी अच्छी थी, लेकिन मेरा लंड अभी से थोड़ा उत्तेजित महसूस हो रहा था। मैं तालाब में उतर गया। पानी ठंडा था, लेकिन ज्यादा गहरा नहीं था। पैरों तक पानी आ रहा था।
मैंने फ़रीदा के छोटे भाई को बुलाया और उसे हाथ पकड़कर तैरना सिखाने लगा। वो हँस रहा था और पानी में छप-छप कर रहा था।
तभी फ़रीदा किनारे से बोली, “भैया, मुझे भी तैरना सिखा दो ना। मैं भी सीखना चाहती हूँ।”
मैंने मुस्कुराकर कहा, “हाँ क्यों नहीं, आ जाओ।”
फ़रीदा अपनी चुन्नी को कसकर बाँधने लगी ताकि वो न बह जाए।
मैंने उसे देखकर कहा, “चुन्नी निकाल दो, खतरा है। पानी में फंस जाएगी तो मुश्किल हो जाएगी।”
फ़रीदा ने थोड़ा झिझकते हुए चुन्नी निकाल दी और बिना चुन्नी के पानी में उतर आई। तालाब का दूसरा सिरा काफी गहरा था। जैसे ही वो पानी में आई, उसके कपड़े पूरी तरह भीग गए। पीला कुर्ता अब उसके बदन से चिपक गया था। उसका पूरा फिगर साफ दिख रहा था – बड़े-बड़े चूचे, पतली कमर, और काली पैंटी जो अब पारदर्शी हो चुकी थी। पानी में उसकी गांड और चूत की आकृति साफ नजर आ रही थी।
मैं उसे वासना भरी नजरों से देखने लगा। मेरी साँसें तेज हो गईं।
वो थोड़ा शरमाकर बोली, “भैया, ऐसे क्यों देख रहे हो? मुझे तैरना सिखाओ ना।”
मैंने उसका हाथ पकड़ा। उसकी हथेली नरम और गर्म थी। मैंने उसे पानी की सतह पर सीधा लिटाने की कोशिश की। उसके बदन को अपने हाथों पर संभाला। मेरे हाथ उसके कमर के नीचे थे। मैंने कहा, “अब हाथ-पैर चलाओ। ऐसे ही तैरते हैं।”
तैरना सिखाने के बहाने मैं धीरे-धीरे उसके चूचे दबाने लगा। मेरी उंगलियाँ उसके चूचों पर रगड़ रही थीं। वो बड़े और मुलायम थे। पानी में वो और भी फिसलन भरे लग रहे थे।
मेरा लंड अब पूरी तरह कड़क हो चुका था। अंडरवियर में वो उभरकर साफ दिख रहा था।
नीचे से मैंने जानबूझकर उसकी गांड पकड़ ली। मेरी हथेली उसकी मोटी गांड पर थी। मैंने हल्का दबाव दिया। उसकी गांड इतनी मुलायम और भरी हुई थी कि हाथ में आती नहीं थी।
फ़रीदा कुछ नहीं बोली। वो बस कहती रही, “भैया, ठीक से सिखाओ न! मुझे डर लग रहा है।” उसकी आवाज में थोड़ी कंपकंपी थी, लेकिन वो रुक नहीं रही थी।
मैंने मन में प्लान बनाया। मैं उसे धीरे-धीरे गहरे पानी की तरफ ले गया। जहाँ पानी उसकी कमर से ऊपर था। फिर अचानक मैंने उसका हाथ छोड़ दिया।
फ़रीदा डूबने लगी। वो हाथ-पैर मारने लगी। पानी में छप-छप की आवाज होने लगी। वो घबरा गई और पानी पीने लगी। डुप-डुप की आवाज आ रही थी।
फ़रीदा चिल्लाई, “भैया! बचाओ!”
मैंने तुरंत उसे पकड़ा। बचाने के बहाने मेरी एक हाथ उसकी कमर पर था और दूसरा हाथ सीधे उसकी चूत पर। मैंने उसकी चूत को जोर से मसल दिया। मेरी उंगलियाँ पैंटी के ऊपर से उसकी चूत की दरार पर रगड़ रही थीं। वो गर्म और नरम थी। पानी में भी वो फिसल रही थी।
वो बेहोश-सी हो गई। उसकी आँखें बंद हो गईं और सिर पानी में लटक गया। मैंने उसके पेट पर हाथ रखा और जोर-जोर से दबाया ताकि पानी निकले। लेकिन वो अभी भी होश में नहीं आई।
मैंने मौका देखकर उसके होंठ अपने होंठों से चिपका लिए। मैंने उसके होंठ चूम लिए। उसके होंठ नरम और गीले थे। मैंने हल्का सा चूसा भी। फिर पेट पर और जोर से दबाया।
कुछ पल बाद वो होश में आई। खाँसते हुए बोली, “भाई, आज तुमने मेरी जान बचाई। थैंक्यू!” उसकी आवाज कमजोर थी लेकिन आँखों में कृतज्ञता थी।
मैंने मुस्कुराकर कहा, “अरे इसमें थैंक्स की क्या बात है। चलो ऊपर चलो, कपड़े सुखाओ।”
मैं उसकी पैंटी में दिखती गांड को देखता रहा। पानी से भीगी हुई काली पैंटी अब उसके बदन से पूरी तरह चिपकी हुई थी। कपड़ा इतना पतला हो गया था कि उसकी मोटी, गोल गांड की दोनों गालें साफ नजर आ रही थीं। बीच में पैंटी की पतली पट्टी गहरी दरार में धंसी हुई थी। गांड की वो उभार देखकर मेरी साँसें तेज हो गईं। मेरा लंड फिर से पूरी तरह खड़ा हो गया। अंडरवियर के अंदर वो इतना सख्त और बड़ा लग रहा था कि कपड़े से बाहर झांक रहा था। उसकी लंबाई और मोटाई से अंडरवियर का आगे का हिस्सा तना हुआ था, जैसे कोई बड़ा हथियार बाहर आने को बेताब हो।
वो मेरी तरफ मुड़ी और मेरे लंड की तरफ देखकर अचानक हँस पड़ी। उसकी हँसी में शरारत और उत्तेजना दोनों थी। बोली, “भाई, ये क्या? तुम्हारा हथियार तो पूरी तरह खड़ा हो गया है। इतना बड़ा कैसे हो जाता है?”
मैं चौंक गया। इतनी खुलकर बात करने की उम्मीद नहीं थी। मैंने हकलाते हुए कहा, “तुम तो इतनी खुल्लम-खुल्ला बोलती हो? मैं तो सोच भी नहीं रहा था…”
लेकिन मन ही मन मुझे खुशी हुई। मैंने सोचा कि अब इस बात का पूरा फायदा उठाना चाहिए। वो खुद इतनी खुलकर बोल रही है, तो शायद वो तैयार है।
मैंने हिम्मत करके कहा, “ये तुम्हारी उठी हुई गांड देखकर कंट्रोल नहीं हुआ। जब से तुम पानी में उतरी हो, तुम्हारी ये मोटी गांड और भीगी पैंटी देखकर मेरा लंड बेकाबू हो रहा है।”
वो फिर हँसी, इस बार थोड़ी शरमाते हुए। उसकी आँखों में चमक थी। बोली, “चलो अब ऊपर आओ। मैं तुम्हें कुछ दिखाना चाहती हूँ।”
मैं जल्दी से पानी से बाहर निकल आया। मेरा लंड अभी भी खड़ा था और अंडरवियर गीला होने से और भी सख्त लग रहा था।
वो मुझे खेत में लगी हरी-हरी घास की तरफ ले गई। वहाँ चारों तरफ शांति थी, कोई नहीं दिख रहा था। जैसे ही हम घास पर पहुँचे, फरीदा ने बिना कुछ कहे अपने सारे कपड़े उतार दिए। पहले पीला कुर्ता उतारा, फिर पेटीकोट, फिर ब्रा और आखिर में काली पैंटी भी। अब वो पूरी तरह नंगी मेरे सामने खड़ी थी। उसका गोरा बदन धूप में चमक रहा था। बड़े-बड़े चूचे बिना ब्रा के और भी उभरे हुए लग रहे थे। निप्पल गुलाबी और सख्त थे। पतली कमर, चौड़ी जांघें और बीच में साफ-साफ दिखती चूत – बिना बाल वाली, गुलाबी और थोड़ी भीगी हुई।
मैं ये सब देखकर हैरान रह गया। मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं।
फरीदा मेरी तरफ देखकर बोली, “भैया, मैंने जानबूझकर घर पर तुम्हारे सामने बहुत एक्सपोज किया था। झाड़ू लगाते वक्त झुककर, कपड़े ऐसे पहनकर कि तुम देख सको। तुम मुझे कैसे देखते हो, ये मैं सब समझ रही थी। भैया, उस दिन तुमने मेरा अंडरवियर भी चुराया था, मैंने देख लिया था। मैंने सोचा था कि तुम भी मुझे चाहते हो। अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता। क्यों पराए लोगों से अपनी चूत चुदवाऊँ? मेरी सहेलियाँ तो सब लंड का मजा ले चुकी हैं। अब मेरी बारी है। आज से मैं तुम्हारी रानी हूँ। तुम मेरी चूत के राजा। अब मैं अपनी उफनती जवानी और बर्दाश्त नहीं कर सकती। आओ राजा, मेरी इस चूत की तपिश को अपने मक्खन से ठंडा करो।”
फरीदा की इतनी खुली और बेबाक बातों से मैं बहुत खुश हुआ। मेरे मन का सारा डर खत्म हो गया।
मैंने कहा, “आ जा मेरी रंडी। आज से तू मेरी है।”
मैं उसके पास गया और उसके चूचे चूसने लगा। मैंने दोनों हाथों से उसके बड़े-बड़े चूचों को दबाया। वो इतने मुलायम और भरे हुए थे कि हाथों में समा नहीं रहे थे। मैंने एक निप्पल को मुँह में लिया और जोर से चूसा। जीभ से घुमाया, हल्का काटा। दूसरा चूचा दबाते हुए चूसता रहा। फरीदा कराहने लगी, “आह… भैया… अच्छा लग रहा है…”
फिर मैंने उसे घुमाया और उसकी गांड की तरफ देखा। मैंने अपनी उंगली उसकी गांड की दरार में डाली। धीरे-धीरे सहलाने लगा। उसकी गांड टाइट थी लेकिन मुलायम। मैंने उंगली अंदर डाली तो वो सिहर उठी।
वो आवाज निकालने लगी, “इस्स… उउउह… आह… भैया… क्या कर रहे हो… अच्छा लग रहा है…”
मैंने घुटनों पर बैठकर उसकी गांड चूसनी शुरू की। मैंने दोनों गालों को फैलाया और जीभ से दरार चाटी। फिर छेद पर जीभ घुमाई। वो काँप रही थी।
उसी समय फरीदा ने झुककर मेरा अंडरवियर नीचे किया। मेरा मोटा और लंबा लंड बाहर आ गया। वो उसे देखकर मुस्कुराई और मुँह में ले लिया। वो धीरे-धीरे चूसने लगी। जीभ से चाटती, सिरा चूसती, फिर गहराई तक ले जाती। मैं कराह रहा था।
वो उत्तेजना में इतनी तेज हो गई कि कुछ ही मिनटों में वो एक बार झड़ गई। उसकी चूत से रस निकला और जांघों पर बहने लगा। वो हाँफते हुए बोली, “भैया… मैं झड़ गई… बहुत मजा आ रहा है…”
मैंने अपना कड़क लंड उसकी गांड के छेद में रगड़ा। मेरा लंड इतना मोटा और सख्त था कि उसकी टाइट गांड की दरार में सिर्फ रगड़ने से ही वो सिहर उठी। मैंने धीरे-धीरे आगे-पीछे किया, लंड का सिरा उसके छेद पर दबाव डाल रहा था। उसकी गांड की गर्मी और टाइटनेस महसूस हो रही थी, जैसे कोई नया छेद खुलने को तैयार हो।
वो जोर से कराही, “आह्ह… क्या टाइट गांड है… भैया… इधर मत करो… ये गलत छेद है… दर्द होगा…” उसकी आवाज में दर्द और उत्तेजना दोनों मिले हुए थे। वो थोड़ा आगे झुक गई ताकि छेद पर दबाव कम हो।
मैंने तुरंत लंड हटा लिया। मैं नहीं चाहता था कि वो डर जाए या दर्द से रुक जाए। मैंने उसकी कमर पकड़ी और उसे थोड़ा सहलाया।
फिर वो मेरी तरफ मुड़ी, घुटनों पर बैठ गई और मेरे लंड को फिर से मुँह में ले लिया। इस बार वो और जोश में थी। वो लंड को गहराई तक ले जाती, जीभ से चारों तरफ घुमाती, सिरे को चूसती और कभी-कभी दाँतों से हल्का काटती। उसका मुँह गर्म और गीला था। मैं उसके बालों में हाथ फेरता रहा और कराहता रहा, “आह… फरीदा… कितना अच्छा चूस रही हो…”
मैं उसे डॉगी स्टाइल में खड़ा करके उसकी चूत मारना चाहता था। मैंने उसे घास पर घुटनों के बल झुकाया। उसकी मोटी गांड ऊपर उठी हुई थी, चूत नीचे से साफ दिख रही थी – गुलाबी, भीगी हुई और थोड़ी खुली हुई। मैंने पीछे से उसकी कमर पकड़ी।
फ़रीदा ने पीछे मुड़कर देखा और नखरे से बोली, “राजा… मेरी चूत में मक्खन डालो ना! अब बर्दाश्त नहीं होता… जल्दी से अंदर डालो…” उसकी आवाज में बेचैनी थी, जैसे वो सालों से इंतजार कर रही हो।
मैंने उसे वैसा ही खड़ा रखा। अपना मोटा लंड उसके चूत के मुंह पर रखा। लंड का सिरा उसकी गीली चूत पर रगड़ा। फिर मैंने जोर से एक धक्का मारा। लंड आधा अंदर चला गया। वो वर्जिन थी, उसकी चूत इतनी टाइट थी कि लंड मुश्किल से अंदर जा रहा था। जैसे ही लंड पूरी तरह अंदर गया, उसकी सील फट गई। गर्म खून मेरे लंड पर बहने लगा और उसकी जांघों पर टपकने लगा।
वो दर्द से चीख पड़ी और रोने लगी, “आह्ह… दर्द हो रहा है… भैया… निकालो… बहुत दर्द है…” उसकी आँखों से आंसू बह रहे थे, बदन काँप रहा था।
लेकिन मैं रुक नहीं सका। मैं बेरहमी से जोर-जोर से धक्के मारता रहा। हर धक्के के साथ लंड और गहराई तक जाता। उसकी चूत अब खून और उसके रस से गीली हो चुकी थी, जिससे लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। मैंने उसकी कमर मजबूती से पकड़ी और तेज-तेज पेलना शुरू कर दिया। “आह… कितनी टाइट चूत है… फरीदा… ले मेरी रंडी…”
कुछ देर बाद उसका दर्द धीरे-धीरे कम होने लगा। उसके चेहरे से तनाव की लकीरें हटने लगीं और आंसू सूखने लगे। दर्द की जगह अब एक अजीब सा सुख महसूस होने लगा, जैसे कोई गर्म तरंग पूरे बदन में फैल रही हो। वो रोना पूरी तरह बंद कर चुकी थी और अब हल्की-हल्की कराह रही थी, “आह… अब अच्छा लग रहा है… भैया… और जोर से… हाँ…” उसकी आवाज में अब दर्द नहीं बल्कि उत्तेजना थी। वो खुद पीछे से अपनी गांड हिलाने लगी, मेरे धक्कों के साथ ताल मिलाकर। उसकी चूत अब मेरे लंड को अच्छे से पकड़ रही थी, हर धक्के पर वो और गीली हो रही थी, जिससे चुदाई की आवाजें और तेज हो गईं – चप-चप की गीली आवाज पूरे खेत में गूंज रही थी।
काफी देर तक हम ऐसे ही चुदाई करते रहे। मैंने उसके बाल पकड़े और उसे और तेजी से पेलता रहा, कभी उसकी गांड पर थप्पड़ मारता, कभी उसके चूचों को नीचे से दबाता। फिर मैंने पोजिशन बदली – पहले डॉगी में ही उसे और गहराई तक चोदा, जहां उसकी गांड मेरी जांघों से टकरा रही थी। उसके बाद मैंने उसे गोद में उठाया, उसके पैरों को अपनी कमर पर लपेटा और खड़े-खड़े धक्के मारे, उसका पूरा वजन मेरे लंड पर था। वो मेरे कंधों पर हाथ रखकर उछल रही थी, “आह… भैया… कितना गहरा जा रहा है…” फिर मैंने उसे घास पर लिटा दिया, उसके पैरों को फैलाया और मिशनरी स्टाइल में चोदा, उसके होंठों को चूमते हुए, उसकी चूत में लंड को पूरी ताकत से अंदर-बाहर करता रहा। हर पोजिशन में उसकी कराहें बढ़ती गईं, और हमारा पसीना मिलकर बदन को चिपचिपा बना रहा था।
आखिर में जब मैं क्लाइमेक्स के करीब पहुँचा, तो मेरे लंड में वो तेज सनसनी होने लगी। मैंने तेजी से धक्के मारे और फिर लंड बाहर निकाला। फरीदा ने तुरंत घुटनों पर बैठकर अपना मुँह खोल लिया, उसकी जीभ बाहर निकली हुई थी। मैंने अपना गर्म, गाढ़ा मक्खन उसके मुँह में छोड़ दिया – पहला पिचकारी उसके होंठों पर, फिर अंदर, और बाकी उसके गाल पर। वो सारा माल निगल गई, आखिरी बूंद तक, और फिर जीभ से मेरे लंड को चाटकर साफ कर लिया, जैसे कोई भूखी रंडी हो।
वो मुस्कुराई, उसके चेहरे पर पूरी संतुष्टि थी, आँखें चमक रही थीं। बोली, “मेरे राजा… आज से मैं तेरी गुलाम हूँ। तुम जब चाहो, मेरी मार लेना। मेरी चूत हमेशा तुम्हारे लिए तैयार रहेगी।”
इसके बाद मैं उसे रोज चोदने लगा। हर दिन कोई न कोई मौका ढूंढकर हम खेत में, घर में या तालाब के पास मिलते और घंटों चुदाई करते।
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