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उर्मिला की चूत से खून निकल आया

Chut se khoon sex story, Desi first time bleeding sex story, Desi virgin first fuck sex story: मैं उस दिन बस स्टॉप पर खड़ा था और बस का इंतजार कर रहा था। गुड़गाँव में मुझे अभी कुछ ही दिन हुए थे। करीब एक महीने पहले यहां मेरी नौकरी लगी थी और मैं इस नए शहर में आया था। मेरे एक पुराने दोस्त ने बहुत मदद की थी। वह यहां पहले से ही रहता था और उसी के साथ मैं रह रहा था।

बस आई तो मैं जल्दी से चढ़ गया। शुरू में बैठने की जगह नहीं मिल रही थी। बस थोड़ी दूर चलने के बाद अगले स्टॉप पर एक सीट खाली हुई और मैं वहां बैठ गया। जैसे ही मैं बैठा, कंडक्टर मेरे पास आया और बोला, भाई साहब टिकट कटवा लो। मैंने टिकट लिया और फिर फोन में समय देखने लगा। तभी मेरी नजर बिल्कुल सामने खड़ी एक लड़की पर पड़ी।

उसकी आंखें बड़ी-बड़ी थीं और चेहरा इतना निखरा हुआ कि मन एकदम खुश हो गया। मैंने उसे कहा कि आप बैठ जाइए। वह पहले थोड़ा झिझकी लेकिन मैंने फिर से आग्रह किया तो वह मेरे बगल में बैठ गई। उसने बहुत प्यारी मुस्कान के साथ थैंक्यू कहा। उस मुस्कान ने मेरे दिल को छू लिया।

उसके बाद से वह लड़की मुझे रोज बस में दिखने लगी। मैं उसे हर बार हेलो कहता और वह भी मुस्कुराकर जवाब देती। धीरे-धीरे हमारी बातचीत बढ़ी। उसका नाम उर्मिला था। हम दोनों काफी करीब आ गए। मैं उर्मिला के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहता था। एक दिन मैंने उसे डिनर पर इनवाइट किया। पहले वह थोड़ा कतराई लेकिन मेरी जिद पर आकर मान गई।

डिनर के दौरान हमने बहुत अच्छा समय बिताया। उसकी हंसी, उसकी बातें, सब कुछ इतना अच्छा लगा कि मन में एक अलग ही खुशी छा गई। अब हम दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब थे। गुड़गाँव में मेरी कोई खास दोस्ती नहीं थी। मैं सिर्फ ऑफिस जाता और घर लौट आता। उर्मिला से बात करके दिन अच्छा बीतता। अगर उससे बात न हो या मिलना न हो तो मन उदास रहता।

धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि मैं उर्मिला से प्यार करने लगा हूं। मैंने अपने दोस्त से इस बारे में बात की। उसने मुस्कुराकर कहा कि लगता है तुम उर्मिला से सच में प्यार कर बैठे हो। मुझे भी यही महसूस हो रहा था। उसके बिना सब अधूरा सा लगता था। मैंने फैसला किया कि अब उसे अपने दिल की बात बता दूंगा।

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लेकिन इससे पहले ही उर्मिला ने मुझे प्रपोज कर दिया। उस दिन मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब हम दोनों एक हो चुके थे। हम एक-दूसरे के बिना रह नहीं पाते थे। साथ में बिताया हर पल बहुत खूबसूरत लगता था। मैं उर्मिला को कभी कोई कमी महसूस नहीं होने देता था। मिलने पर उसके चेहरे की मुस्कान मेरी सारी थकान मिटा देती थी।

उर्मिला ने कहा कि वह अपनी फैमिली को सब बता देगी। मैंने उसे मना किया कि अभी कुछ मत बताना। वह मेरी बात मान गई। हम दोनों अपने रिलेशन में बहुत खुश थे। कुछ दिनों बाद मुझे लखनऊ अपने घर जाना पड़ा। वहां पहुंचते ही पापा की तबीयत अचानक खराब हो गई। मुझे अस्पताल में काफी समय बिताना पड़ा। उर्मिला बार-बार फोन कर रही थी लेकिन मैं फोन नहीं उठा पाया।

बाद में जब मैंने फोन किया तो उसने थोड़ी नाराजगी से कहा कि मैं कब से फोन कर रही थी, तुमने क्यों नहीं उठाया। मैंने बताया कि पापा की तबीयत खराब थी इसलिए अस्पताल में था। अब उनकी तबीयत बेहतर है और कल डिस्चार्ज हो जाएंगे। अगले दिन पापा घर आए तो उर्मिला से लंबी बात हुई। उसने फिर पापा की तबीयत पूछी। मैंने बताया कि अब सब ठीक है। उसने पूछा कि तुम कब वापस आ रहे हो। मैंने कहा जल्दी आ जाऊंगा।

कुछ दिनों बाद मैं गुड़गाँव लौट आया। उर्मिला से मिलते ही दोनों ने एक-दूसरे को कसकर गले लगा लिया। उस दिन हमने बहुत प्यार भरा समय बिताया। एक दिन उर्मिला मेरे फ्लैट पर आई। मेरा दोस्त कुछ दिनों के लिए बाहर गया था। इसलिए मैंने उसे घर बुला लिया था। हम दोनों सोफे पर बैठकर बातें कर रहे थे।

मैंने धीरे से उसके हाथ पकड़ लिए। उसके नरम, गर्म हाथों को अपनी हथेलियों में बंद करके सहलाने लगा। मेरी उंगलियां उसकी हथेली पर धीरे-धीरे घूम रही थीं, कभी हल्के से नाखूनों को छूतीं, कभी कलाई की नसों पर दबाव डालतीं। उर्मिला की सांसें धीरे-धीरे भारी होने लगीं। उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। मैंने उसका चेहरा दोनों हाथों में थामा, उसकी आंखों में देखा। उसकी पुतलियां फैली हुई थीं, होंठ थोड़े खुले हुए। मैंने धीरे से अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।

उसके होंठ बहुत मुलायम, गुलाबी और गर्म थे। पहले तो हल्का-सा स्पर्श था, फिर मैंने धीरे से दबाव बढ़ाया। हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे। मेरी जीभ ने उसके होंठों को चाटा, फिर धीरे से उसके मुंह में प्रवेश किया। उसकी जीभ मेरी जीभ से मिली। हम दोनों गहराई से किस करने लगे। उसका मुंह मीठा था, जैसे कोई हल्की सी मिठास। हमारी सांसें एक-दूसरे के मुंह में मिल रही थीं। मैंने उसके निचले होंठ को हल्के से काटा, फिर चूसा। उर्मिला ने मेरी पीठ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया।

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मैंने उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके बड़े, भरे हुए स्तनों को सहलाना शुरू किया। कपड़े के ऊपर से ही उनकी नरमी और गर्मी महसूस हो रही थी। उसकी सांसें और तेज हो गईं। मैंने धीरे-धीरे ब्लाउज के बटन एक-एक करके खोल दिए। ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दोनों हाथों से दबाया। ब्रा का कपड़ा पतला था, निप्पल सख्त होकर बाहर उभर आए थे। मैंने ब्रा के हुक खोले और ब्रा उतार दी। उसके गोरे, गोल, सुडौल स्तन मेरे सामने थे। निप्पल गुलाबी और खड़े हुए थे।

मैंने एक स्तन को मुंह में लिया। जीभ से निप्पल को घुमाया, हल्के से चूसा। उर्मिला की सिसकारी निकली, “आह्ह…” वह मेरे बालों में उंगलियां फेर रही थी, कभी दबा रही थी। मैंने दूसरे स्तन को भी चूसा। दोनों स्तनों को बारी-बारी से मुंह में लेकर चाटता रहा। जीभ से निप्पल को तेज-तेज घुमाता, कभी हल्के से दांतों से काटता। उसके शरीर में हल्की कंपकंपी दौड़ रही थी। उसके निप्पल और सख्त हो गए थे। मेरी भी सांसें तेज हो रही थीं, लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था।

मैंने कहा, “उर्मिला, मेरे लंड को मुंह में ले लो।” वह थोड़ा शरमाई, चेहरा लाल हो गया, लेकिन फिर मेरी कमर पर हाथ रखकर पैंट की बटन खोली। पैंट और अंडरवियर नीचे किया। मेरा सख्त, गरम लंड बाहर आया। उसने उसे हाथ में लिया। उसकी उंगलियां मेरे लंड पर घूम रही थीं। धीरे-धीरे सहलाने लगी, ऊपर-नीचे करती हुई। फिर उसने सिर झुकाया और लंड के सुपारे को जीभ से चाटा। मैंने आह भरी। उसने धीरे से मुंह में लिया। उसका गर्म, गीला मुंह मेरे लंड को ढक रहा था। जीभ सुपारे के चारों ओर घूम रही थी। वह धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगी। मैंने उसके सिर पर हाथ रखा, हल्के से दबाया। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरी सांसें तेज हो गईं।

हम दोनों अब पूरी तरह नंगे हो चुके थे। मैंने उसे उठाकर बिस्तर पर लिटाया। उसके स्तनों को फिर से चूसा। मेरी उंगलियां उसकी जांघों पर घूम रही थीं। धीरे-धीरे जांघों को अलग किया। उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी के किनारे से उंगली डाली और धीरे से उतार दी। उसकी चूत मेरे सामने थी। हल्के, मुलायम बालों से ढकी हुई, होंठ फूले हुए, बीच में गीला चमकता हुआ। मैंने अपनी जीभ से चूत के होंठों को चाटना शुरू किया। उसका स्वाद मीठा-नमकीन था। चूत से पानी निकल रहा था। मैंने जीभ को अंदर डाला, चाटता रहा।

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फिर क्लिटोरिस पर जीभ रखी और हल्के से चाटा। उर्मिला जोर से सिसकारी, “आह्ह… ओह्ह…” उसने मेरे सिर को अपनी जांघों के बीच दबाया। मैंने क्लिटोरिस को जीभ से तेज-तेज घुमाया, कभी चूसा। उसका पानी मेरे मुंह में आ रहा था। मैंने एक उंगली अंदर डाली। चूत बहुत टाइट थी। उंगली अंदर-बाहर करने लगा। उर्मिला की कमर उठ रही थी। वह अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। उसने कहा, “बस… अब डाल दो…”

मैंने कहा, “अब मैं तुम्हारी चूत में लंड डालना चाहता हूं।” उर्मिला ने आंखें बंद करके हामी भरी। मैंने अपना लंड हाथ में लिया। सुपारा उसके चूत के मुंह पर रखा। धीरे से दबाव दिया। चूत का मुंह टाइट था। जैसे ही सुपारा अंदर गया, उर्मिला ने दर्द से कराहा। मैं रुका, फिर धीरे-धीरे और अंदर धकेला। जैसे ही लंड आधा अंदर गया, उसकी चूत से गर्म खून निकल आया। खून मेरे लंड पर लगा। उर्मिला ने दर्द से आंखें बंद कर लीं, लेकिन फिर बोली, “अच्छा लग रहा है… जारी रखो…”

मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। हर धक्के के साथ चूत और गीली हो रही थी। खून और उसका पानी मिलकर चिकनाई बढ़ा रहा था। चूत अब थोड़ी ढीली पड़ रही थी। मैंने रफ्तार बढ़ाई। उर्मिला की सिसकारियां तेज हो गईं, “आह्ह… ओह्ह… और जोर से…” वह मेरी कमर पर पैर लपेटकर चिपक गई। मैं जोर-जोर से चोदने लगा। उसके स्तन उछल रहे थे। कमरे में सिर्फ हमारी सांसें और चपचप की आवाज गूंज रही थी।

मेरी गर्मी चरम पर पहुंच गई। मैंने तेज-तेज धक्के मारे। आखिरकार मैंने उसके अंदर अपना गरम माल गिरा दिया। उर्मिला भी कंपकंपी के साथ झड़ गई। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे। हमारी पहली रात बहुत यादगार थी। जिस तरह हमने एक-दूसरे को प्यार किया, वह कभी नहीं भूल सकता।

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