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जीजा ने साली को दुल्हन बनाया

Saali chudai sex story, suhagraat sex story, kunwari chut sex story: आज मैं अपनी और अपनी साली की कहानी बताने जा रहा हूं। मेरी शादी 2005 में एक साधारण परिवार में हुई थी, उस समय मेरी उम्र 25 साल थी, मेरी ससुराल में मेरी पत्नी, एक छोटी साली जिसकी उम्र 19 साल की थी और मेरे ससुर रहते थे। मेरी सास का देहांत लगभग 10 साल पहले ही हो गया था।

मेरी पत्नी का कोई भी भाई नहीं था और ससुर भी अक्सर अपने गांव में रहते थे, इसलिए मुझे शादी के बाद अपनी पत्नी और साली के साथ उनके शहर वाले घर में रहना पड़ा। मेरी पत्नी देखने में बहुत सुंदर है, साली से भी ज्यादा, मैंने कभी भी अपनी साली से सेक्स करने के बारे में नहीं सोचा, हम लोगों की जिंदगी बहुत ही मजेदार तरीके से कट रही थी।

शादी के एक साल बाद मेरी पत्नी ने एक सुंदर से बेटे को जन्म दिया। क्योंकि बच्चा अभी छोटा था और उन दोनों की देखभाल करने वाली कोई समझदार स्त्री नहीं थी, तो मेरी मां ने मेरी पत्नी को अपने घर बुला लिया।

अब घर में मैं और मेरी साली अकेले रह गए थे, मैं उससे बहुत कम बात करता था और सुबह जल्दी काम पर निकलता था, रात को देर से आता था। मेरी साली मुझे खाना खिलाने के बाद पड़ोस में रह रहे अपने चाचा के घर में सोने चली जाती थी और सुबह जल्दी आकर मेरे लिए खाना बना देती थी। सारी चीजें अपने हिसाब से सही चल रही थीं।

पत्नी से बिछड़े हुए लगभग एक महीना हो गया था और अब मेरा मन चुदाई करने का होने लगा था, लेकिन कोई तरीका समझ में नहीं आ रहा था। मैं कभी-कभी कोई अश्लील फिल्म की सीडी लाकर रात में फिल्म भी देख लेता था, जिससे मेरे मन में चुदाई करने की चाहत और तेज होती जा रही थी।

एक दिन मैंने सोचा कि क्यों ना अपनी साली को पटाया जाए चुदाई के लिए, इससे मेरा काम बहुत आसान हो जाएगा और जब तक पत्नी नहीं आती है, तब तक जब भी मन करेगा, भरपूर मजा ले सकूंगा। यही सोचकर मैं साली को पटाने का जुगाड़ सोचने लगा।

एक दिन की बात है कि मैं अश्लील फिल्म वाली सीडी अपने बिस्तर पर तकिया के नीचे भूल गया और काम पर चला गया। बाद में मुझे याद आया कि मैं सीडी तो घर पर ही भूल गया हूं। फिर मैंने सोचा कि कोई बात नहीं, अगर वो सीडी साली ने देख ली तो मेरा काम और भी आसान हो जाएगा।

यही सोचकर मेरा लंड पैंट के अंदर ही तन गया, अब मेरे मन में केवल अपनी साली को चोदने का ख्याल घूमने लगा।

शाम को जब मैं घर आया तो मेरी साली बिल्कुल नॉर्मल दिखी, वो वैसे भी मुझसे कम ही बात करती थी और मैं भी उससे ज्यादा बात नहीं करता था। उसको नॉर्मल देखकर मेरा मूड खराब हो गया। मैंने सोचा था कि उसकी कुंवारी चूत आज ही चोदने को मिल जाएगी, लेकिन मेरे सारे सपने टूट गए।

उस रात को मैंने अपनी साली को सोचकर दो बार मुठ मारी और अपनी वासना शांत कर ली। अब मैं अपना सारा दिमाग इस बात को सोचने में लगाने लगा कि कैसे अपने दिल की बात साली को बोलूं, पता नहीं वो भी मुझसे चुदना चाहती है या नहीं? ऐसा ना हो कि कुछ बवाल हो जाए!

यही सोचते सोचते सारा दिन बीत गया। मेरा काम में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था, इसलिए उस दिन मैं शाम को जल्दी घर आ गया।

मुझे देखकर मेरी साली ने एक प्यारा सा स्माइल दिया और बोली, “जीजा जी, आज तो आप बहुत जल्दी घर आ गए। आप चाय पीजिए, तब तक मैं सब्जी लेकर आती हूं।”

मैं कपड़े बदलकर चुपचाप चाय पीने लगा और प्यासी नजरों से साली को घूरने लगा। उसकी गोल बड़ी-बड़ी चुचियां और 36 इंच की कमर मेरे अंदर वासना का तूफान पैदा कर रही थी।

वो बोली, “मैं सब्जी लेकर आती हूं।”

और घर से बाहर निकल गई, मैं भूखी नजरों से उसको देखता ही रह गया।

बाजार से वापस आने के बाद वो अपने काम में लग गई और मैं कमरे से बाहर निकलकर पोर्च में बैठ गया। थोड़ी देर बाद जब मैं किसी काम से अंदर गया तो मैंने देखा कि कमरे का दरवाजा बंद है लेकिन उसमें कुंडी नहीं लगी थी।

मैंने धीरे से दरवाजा खोला और अंदर का नजारा देखकर मेरी आंखें फटी रह गईं। मेरी साली अपने कपड़े बदल रही थी, उसके शरीर पर केवल ब्रा और पैंटी थी, उसका शरीर बिल्कुल संगमरमर की तरह चिकना था।

मैंने सोचा कि मौका बढ़िया है, अभी जाकर इसको दबोच लेते हैं और अपनी इच्छा पूरी कर लेते हैं।

लेकिन अंदर से एक डर भी था कि कहीं बात बिगड़ ना जाए, क्योंकि हम दोनों के बीच कभी भी ज्यादा बात नहीं होती थी और ना ही कोई हंसी-मजाक होता था।

अभी मैं ये सब सोच ही रहा था कि दरवाजे की घंटी बजी और मैं जल्दी से बाहर आ गया। दरवाजे पर पड़ोस में रहने वाली चाची और उनकी बेटी आए हुए थे।

मेरा तो सारा मूड ही खराब हो गया, एक सुनहरा मौका आते-आते हाथ से निकल गया।

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उसी बीच मैं 2 दिन की छुट्टी लेकर अपने घर आ गया, क्योंकि अपने बेटे को देखे हुए काफी दिन हो गए थे और पत्नी को भी बहुत दिनों से नहीं छुआ था। लेकिन घर आने के बाद भी पत्नी के साथ सेक्स करने का मौका नहीं मिला।

2 दिन रुकने के बाद मैं वापस आ गया और मैंने जानबूझकर शाम की ट्रेन पकड़ी, रात को लगभग 2 बजे मैं ससुराल वाले घर पहुंचा।

मेरी साली और उसकी चचेरी बहन घर में थीं, वो दोनों मेरे कमरे में मेरे ही बेड पर सो रही थीं।

मैंने उसको बोला, “यही लेटी रहो, मैं एक किनारे लेट जाऊंगा।”

मेरी साली बीच में थी और उसकी चाचा की बेटी किनारे पर लेटी थी। मैं भी कपड़े बदलकर दूसरे किनारे पर लेट गया। लेकिन मेरी आंखों से नींद गायब थी।

मैंने करवट लेने के बहाने अपनी एक टांग अपनी साली के जिस्म के ऊपर रख ली और अपना हाथ उसकी छाती पर रख दिया। अब मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया। मैंने अपने लंड को अपनी साली के कूल्हों से सटा दिया।

लंड की चुभन से उसकी आंख खुल गई और मैं सोने का नाटक करने लगा। उसने सोचा कि मैं थकान की वजह से बहुत गहरी नींद में सो रहा हूं। मेरा हाथ अभी भी उसकी छाती पर ही रखा था और मुझे उसकी धड़कनें तेज होती महसूस हो रही थीं।

शायद मेरे स्पर्श से उसके अंदर भी वासना का संचार हो गया था। थोड़ी देर तो वो अपनी गांड को मेरे लंड पर दबाती रही।

तभी उसकी चाचा की बेटी ने उसकी तरफ करवट ली, जिससे मेरी साली थोड़ा सा अलग हो गई। फिर मैं भी चुपचाप सो गया।

लेकिन मैंने मन ही मन ये सोच लिया था कि अपनी साली को अब जल्दी ही चोदना है। मुझे मन ही मन अपनी चचेरी साली पर बहुत गुस्सा आ रहा था, अगर आज वो ना होती तो आज ही मैं अपनी साली के साथ चुदाई का मजा ले लेता।

खैर कोई भी काम अपने समय से पहले नहीं होता।

दूसरे दिन सुबह मैं देर से उठा और मैंने जानबूझकर ऐसा दिखाया कि मेरा मूड बहुत खराब है। उस दिन मैं काम पर भी नहीं गया।

दोपहर को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में आकर लेट गया। थोड़ी देर बाद मेरी साली भी काम खत्म करके मेरे कमरे में आ गई और उसने मुझसे पूछा, “जीजा, आपका मूड कुछ सही नहीं लग रहा है, क्या बात है?”

मैंने उसको बोला, “मेरी लाइफ बिल्कुल नीरस हो गई है, मेरी बीवी और बेटा मुझसे दूर हैं और मैं यहां अकेला पड़ा हूं। सभी लोग अपने-अपने परिवार के साथ रह रहे हैं और मैं यहां अकेला पड़ा हूं और बीवी और बेटे को प्यार भी नहीं कर सकता।”

यह सुनकर वो बहुत परेशान हो गई और रोने लगी, उसने बोला, “इस सबकी वजह मैं हूं, मेरी वजह से आप दोनों को परेशानी उठानी पड़ रही है।”

मैंने उसको समझाया, “ऐसा नहीं है।”

लेकिन उसने रोना बंद नहीं किया।

फिर मैंने उसको गले से लगाया तो वो और तेज रोने लगी और मैं उसको चुप कराने लगा। तभी मैंने उसके माथे पर एक चुम्बन किया तो वो मुझसे कसकर लिपट गई। पर वो लगातार रो रही थी। मैंने सोचा कि यही मौका है उसको सांत्वना देने के बहाने उससे प्यार करने का!

तभी मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया और उसके होंठों को चूमने लगा। उसने हटने की कोशिश की तो मैं बोला, “आज मत रोको, मैं प्यार का बहुत भूखा हूं। अगर तुम मेरा साथ नहीं दोगी तो कौन देगा। अगर तुम चाहती हो कि मैं परेशान ना रहूं तो मुझे अपनी दीदी की कमी महसूस ना होने दो, मेरे प्यार को अपना लो।”

अब उसका विरोध कम हो गया और वो मेरी बांहों में लिपट गई। मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया, धीरे-धीरे उसकी नरम होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसा, वो भी अब धीरे-धीरे जवाब देने लगी, उसकी सांसें तेज हो रही थीं। मैंने अपने हाथों से उसकी चुचियों को दबाना शुरू किया, वो सख्त हो रही थीं, उसके निप्पल्स उभर आए थे, वो आहें भरने लगी, “आह… जीजा… ये क्या कर रहे हो…” लेकिन उसकी आवाज में विरोध कम था, बल्कि वासना ज्यादा।

मैंने उसके बदन को सहलाना शुरू कर दिया, उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए नीचे उसकी कमर तक पहुंचा, वो भी मेरे शरीर को सहलाने लगी, उसके हाथ मेरी छाती पर घूम रहे थे। फिर उसने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से रगड़ना शुरू कर दिया, मेरा लंड अब पूरी तरह से टाइट हो गया था, वो उसे महसूस करके और जोर से दबाने लगी, “ओह… कितना सख्त है ये…”

तभी मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए तो वो शरमाते हुए मना करने लगी और बोली, “मुझे बहुत शर्म आ रही है। मैंने आज तक किसी के सामने कपड़े नहीं उतारे!”

यह सुनकर मैं बहुत खुश हो गया क्योंकि मुझे एक कुंवारी चूत मिलने वाली थी।

मैंने उसको समझाते हुए कहा, “अरे पगली, शरमाने से काम नहीं चलेगा। प्यार करने का असली मजा तो बिना कपड़ों के ही है। जब दो जिस्म आपस में बिना कपड़ों के मिलते हैं तो सुख दोगुना हो जाता है।”

धीरे-धीरे मैंने अपनी जवान साली के कपड़ों को उसके शरीर से अलग कर दिया, पहले उसकी कमीज उतारी, फिर सलवार, अब वो केवल ब्रा और पैंटी में थी। मैं भी अब केवल जांघिया में था।

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साली का संगमरमर सा दूधिया बदन देखकर मैं पागल हो रहा था। फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी, उसकी गोल-गोल चुचियां बाहर आ गईं, गुलाबी निप्पल्स देखकर मैंने उन्हें मुंह में लिया और चूसना शुरू कर दिया, वो लंबी-लंबी सांसें लेने लगी, “आह… जीजा… ओह… इतना अच्छा लग रहा है…” उसका शरीर अकड़ने लगा, वो मेरे सिर को अपनी चुचियों पर दबाने लगी।

मैं समझ गया कि अब उसकी वासना अपने चरम पर है लेकिन अभी मैं उसको भरपूर मजा देना चाह रहा था जिससे वो मेरी दीवानी हो जाए। मैं बहुत ही प्यार से उसकी चुचियों को चूस रहा था, एक को मुंह में लेकर जीभ से घुमाता, दूसरे को हाथ से मसलता, वो सिसकारियां ले रही थी, “उम्म्ह… आह… हां… और जोर से…”

और फिर मैंने अपना अंडरवियर उतार दिया और उसको लंड सहलाने को बोला। अब मैं उसकी चुचियों को चूस रहा था और वो मेरे लंड को सहला रही थी, उसके नरम हाथ मेरे लंड पर ऊपर-नीचे हो रहे थे, मैंने महसूस किया कि वो धीरे-धीरे जोर से पकड़ रही थी, “जीजा… ये कितना बड़ा है… मैं इसे चूसना चाहती हूं…”

फिर मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया और उसकी चूत को सहलाने लगा, वो पूरी तरह गीली हो चुकी थी, मेरी उंगलियां उसके क्लिट पर रगड़ रही थीं, वो कमर उछालने लगी, “आह… इह्ह… ओह… जीजा… वहां… हां… और…”

मेरी साली की आंखों में वासना की लालिमा साफ झलक रही थी और वो अपनी कमर ऊपर की तरफ उठा रही थी। मैं समझ गया कि अब वो चुदाई के लिए बेताब हो रही है।

तभी मैंने 69 की पोजिशन बना ली और उसको अपना लंड चूसने को बोला और मैं उसकी चूत को चाटने लगा।

जैसे ही मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ लगाई तो वो बहुत जोर से सिसकारियां लेने लगी, “आह… ह्ह्ह… ओह… जीजा… ये क्या… इतना मजा…” मैंने जीभ को चूत के अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया, उसकी चूत का रस मेरे मुंह में आ रहा था, वो पागल सी हो गई और बड़बड़ाने लगी, “आह… जीजा… बहुत मजा आ रहा है। आज से आप मेरे जीजा जी नहीं, मेरे पति हो! मेरे राजा और जोर से चाटो मेरी चूत को! अपना लंड डाल के फाड़ दो मेरी चूत को! बहुत मजा आ रहा है। इतना मजा पहले क्यों नहीं दिया।”

वो बीच-बीच में बड़बड़ा रही थी और रुक-रुक कर मेरे लंड को चूस रही थी, वो मेरे लंड को अपने हलक की गहराई तक ले जा रही थी, ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों… गोग… की आवाजें आ रही थीं, वो जोर-जोर से चूस रही थी, मैं उसके मुंह में धक्के दे रहा था। उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम दोनों लंड और चूत को चूसने में इतना ज्यादा जोश में थे कि अपने चरम तक पहुंच गए। उसकी चूत ने मेरे मुंह पर ही पानी छोड़ दिया, “आह… इह्ह… ओह… आऊ… ऊउइ… ऊई… उईईई…”

फिर मैंने बोला, “मेरा लंड भी झड़ने वाला है।”

तो वो बोली, “अपना माल मेरे मुंह में ही गिरा दो।”

तभी मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी और मेरे माल से उसका मुंह भर गया, जिसको वो पी गई, गों… गों… की आवाज के साथ।

थोड़ी देर तक हम दोनों वैसे ही शांत पड़े रहे। फिर मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया और प्यार करने लगा। वो भी मुझसे लिपटी हुई थी।

मैंने प्यार से उसके गाल पर हाथ फेरते हुए पूछा, “कैसा लगा?”

तो वो मुस्कराते हुए बोली, “बहुत मजा आया… अगर मैं यह जानती कि आप मुझको पसंद करते हैं तो मैं ये एक महीना बर्बाद नहीं होने देती, रात को जब आप और दीदी कमरे में सेक्स के मजे लेते थे तो आप लोगों की आवाजें सुनकर मेरा भी बहुत मन होता था कि कोई मुझे भी ऐसे ही चोदे!”

तो मैंने पूछा, “तुमने कोई बॉयफ्रेंड तो बनाया ही होगा? उससे ही चुदवा लेती।”

वो बोली, “नहीं जीजाजी, लड़के बहुत हरामी होते हैं। कोई गर्लफ्रेंड बन जाए तो सारी दुनिया में बताते घूमते हैं। और मैं नहीं चाहती कि कोई मेरे बारे में उल्टी-सीधी बात करे। मैं तो शुरू से ही आप के साथ प्यार करना चाहती थी। इससे मेरा काम भी चलता रहता और घर की बात घर में ही रहती।”

ये सब सुनकर मैं बहुत खुश हुआ और उसको चूमने लगा।

तो वो बोली, “क्या मेरी चूत को आपके लंड का स्वाद मिलेगा या खाली जीभ से ही काम चलना पड़ेगा?”

मैं बोला, “जरूर मिलेगा मेरी जान! लेकिन मैं इस दिन को एक यादगार दिन बनाना चाहता हूं।”

वो बोली, “कैसे?”

तो मैंने कहा, “जैसे शादी की पहली रात होती है, वैसे ही हम दोनों सुहागरात मनाएंगे।”

वो उठकर बाथरूम में चली गई और नहा-धोकर बाहर आई और मुझसे बोली, “आप भी नहाकर फ्रेश हो जाओ, तब तक मैं दुल्हन की तरह तैयार होती हूं।”

मैं नहाकर बाहर निकला तो वो मेरे बेड पर बिल्कुल दुल्हन की तरह सजी हुई बैठी थी और घूंघट भी किए थी।

मेरा दिल तो खुशी के मारे पागल हो रहा था क्योंकि मैं दोबारा सुहागरात मनाने जा रहा था, वो भी एक कुंवारी कली के साथ।

मैंने बिस्तर पर पहुंचकर उसका घूंघट उठाया तो उसको देखता ही रह गया। वो दुल्हन की तरह सजी हुई बहुत ही सुंदर लग रही थी।

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धीरे-धीरे मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए, पहले साड़ी खोली, फिर ब्लाउज, पेटीकोट, ब्रा और पैंटी, अब वो पूरी नंगी थी, खुद भी पूरा नंगा हो गया। मेरा लंड तो चुदाई के बारे में सोचकर पहले ही खड़ा था। मैंने उसके पूरे शरीर को चूमना शुरू किया, उसके माथे से शुरू करके गर्दन, छाती, चुचियां, पेट, कमर, जांघें और फिर चूत तक, वो भी मेरा भरपूर साथ दे रही थी, “आह… जीजा… ओह… हर जगह… हां…”

तभी मैंने अपनी उंगली उसकी चूत में डाली तो वो दर्द से उछल गई और बोली, “उंगली डालने से दर्द हो रहा है तो लंड कैसे झेलूंगी?”

मैंने कहा, “डरो नहीं मेरी जान, मैं उंगली से तुम्हारी चूत को सहलाऊंगा तो वो थोड़ी गीली हो जाएगी और शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा। वो तो एक बार सबको होता है। लेकिन बाद में बहुत मजा आएगा।”

अब मैंने फिर से उसकी चूत को चूसना शुरू किया, जीभ से उसके क्लिट को चाटता, उंगली अंदर-बाहर करता, वो अपना लंड चूसने को बोली, हम फिर 69 में आ गए, वो मेरे लंड को जोर-जोर से चूस रही थी, ग्ग्ग्ग… गी… गों… की आवाजें, मैं उसकी चूत को चाट रहा था, “आह… इह्ह… ओह… जीजा… और गहराई तक…”

जब चूत पूरी तरह गीली हो गई तो मैं बोला, “आओ मेरी जान… अब हम दोनों एक हो जाएं।”

इतना कहकर मैंने उसको पीठ के बल लिटाया और अपने लंड का सुपारा साली की चूत के मुहाने पर लगाया। वो वासना से भर चुकी थी और बोल रही थी, “जल्दी करो मेरे राजा… अब ये आग बर्दाश्त नहीं हो रही! जल्दी से इस आग को बुझाओ।”

मैंने बड़ी ही सावधानी से अपने लंड को धीरे-धीरे अंदर डालना शुरू किया, जैसे ही आधा लंड उसकी चूत में घुसा, वो दर्द से तड़प उठी, “आह… ह्ह्ह… ओह… दर्द हो रहा है… निकालो…” मैंने फौरन ही उसकी चुचियों को सहलाना शुरू किया और उसके होंठों को चूसने लगा। उसकी चुचियों के निप्पल को भी धीरे-धीरे मसलने लगा और लंड को पूरा अंदर डाल दिया।

जैसे ही लंड उसकी चूत की जड़ तक पहुंचा, उसकी हल्की सी चीख निकल गई, “उम्म्ह… अहह… हय… ओह…” फिर मैंने बहुत ही आराम से धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करना शुरू किया और उसके होंठों को लगातार चूसता रहा। लगभग 10-12 धक्के मारने के बाद जब मुझे लगा कि अब उसका दर्द कुछ कम हो गया है तो मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी।

अब वो भी मेरा साथ देने लगी और अपनी गांड को ऊपर की तरफ उछालने लगी, “आह… ह्ह्ह… इह्ह… हां… जीजा… अब मजा आ रहा है… और जोर से…” लगभग 10 मिनट की चुदाई के बाद वो बोली, “अब मैं झड़ने वाली हूं मेरे राजा!”

तो मैंने भी धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी और 10-15 धक्के लगाने के बाद मेरा माल भी निकलने को तैयार हो गया।

मैंने उससे पूछा, “मैं भी झड़ने वाला हूं अपना माल कहां गिरा दूं?”

तो वो बोली, “आज मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और यादगार दिन है आज तो आप अपना माल मेरी चूत में ही गिरा दो!”

यह सुनकर मैंने अपनी पिचकारी को उसकी चूत में ही छोड़ दिया और उसकी फुद्दी मेरे गर्म माल से भर गई, “आह… इह्ह… ओह… हां… भर दो… आऊ… ऊउइ… ऊई…” इस चुदाई से हम दोनों इतना थक गए कि वैसे ही बिना कपड़ों के एक दूसरे की बांहों में लिपटकर सो गए।

शाम को हमारी नींद देर से खुली। उसने जल्दी से उठकर अपने कपड़े पहने और बोली, “आप भी कपड़े पहन लो। कहीं चाचा के घर से कोई आ गया तो प्रॉब्लम हो जाएगी।”

मैं कपड़े पहनकर कमरे से बाहर आया तो उसने मुझे गले लगाकर मेरे होंठों को चूमा और बोली, “अब तो मैं तुम्हारी घरवाली बन गई हूं। तो अब जब तक दीदी नहीं आ जाती तब तक मुझे सुबह और शाम को डेली तुम्हारा लंड चाहिए। लेकिन अब कंडोम के बिना नहीं चोदने दूंगी। इसलिए अभी बाजार जाकर कंडोम ले आओ और कुछ खाने के लिए भी ले आना क्योंकि देर हो चुकी है और अभी खाना बनाने लगी तो चुदाई का प्रोग्राम नहीं हो पाएगा।”

उसके इस उतावलेपन को देखकर मैं बहुत खुश था, मैंने बाइक उठाई और बाजार चला गया।

उस दिन से दोस्तो, मेरी तो दुनिया ही बदल गई। अब वो सुबह जल्दी आ जाती और मैं शाम को जल्दी आ जाता। हम दोनों के प्यार का सिलसिला चलने लगा। अब हम दोनों ही खुश थे मानो हम लोगों की दुनिया ही बदल चुकी थी।

दोस्तो, उम्मीद है कि मेरी ये कहानी आपको जरूर पसंद आएगी।

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