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मेरे चाचा ने मेरी जवानी का पूरा मजा लिया

Chacha ne Bhajeet ko khub choda sex story: मेरा नाम आयुषी है. मैं लखनऊ की रहने वाली हूं.
मेरी उम्र 26 साल है. मेरा साइज 36-28-38 का है.
मेरे परिवार में मां पापा, एक 22 साल का छोटा भाई और मैं ही हूं.

मैं बचपन में लखनऊ में रहती थी और अभी दिल्ली में जॉब करती हूं.

बात काफी साल पहले की है. मैं तब जवानी की दहलीज पर कदम रख ही रही थी.
गर्मियों की छुट्टियों में हमको यानि मुझे और मेरे भाई को पापा गांव पर छोड़ आते थे ताकि हम दोनों अपने चाचा के बच्चों के साथ खूब मजे से अपनी छुट्टियां बिता सकें.

हमारा गांव शाहजहांपुर में हैं.
गांव में चाचा चाची और उनके तीन बच्चे रहते हैं.

चाचा जी एक लॉ फर्म में काम करते हैं और चाची का मेकअप पार्लर है.
उनके बच्चे उस टाइम 3 साल 5 साल और 6 साल के थे. चाचा की उम्र शायद 28 की और चाची की 26 रही होगी.

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मेरी कुछ कहानियाँ पहले भी इस साईट आ चुकी हैं: भाई ने खुद अपनी बहन को गैंगबैंग गिफ्ट दिया

अब मेरी यंग स्कूल गर्ल सेक्स कहानी का मजा लें.

मैं और मेरा भाई गांव पहुंचे और सब बच्चों की तरह सारा दिन खेलने में मगन हो गए.
गर्मी बहुत होने की वजह से मैं हमेशा फ्रॉक ही पहने रहती थी.

एक दिन चाचा अपने काम से वापस आए तो मैं घर में अकेली थी.
बाकी बच्चे बाहर खेल रहे थे और चाची पार्लर गई थी.

चाचा ने मुझसे कहा- बेटा जरा पानी देना।

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मैंने उन्हें पानी दिया।

मैं अभी जवानी की चौखट पर कदम रख ही रही थी।

उस समय मेरे अंगूर अब संतरे बनने शुरू हो गए थे। मेरी चूचियों की ग्रोथ आम तौर पर दूसरी लड़कियों से कहीं ज्यादा तेज थी। मेरी चूचियां अब हाथों में अच्छी तरह भरने लायक हो गई थीं।

अगर मैं जरा सी भी झुक जाती थी तो मेरी चूचियां साफ-साफ नजर आती थीं। मेरी मम्मी अभी भी सोचती थीं कि मेरी ब्रा पहनने की उम्र नहीं आई है। लेकिन लंड को कौन समझाए कि मैं अब चोदने लायक माल बन रही हूँ।

मैं अभी एक कच्ची कली थी।

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मेरे चाचा मेरे मम्मों की झलक को नजर भरकर देखते रहते थे। मैंने यह कई बार महसूस किया था।

पानी मांगने के बाद उन्होंने मुझसे कहा- आओ बेटा, मेरे पास बैठो।

मैं उनके पास चली गई और बैठ गई।

उन्होंने अपनी एक बांह मेरी पीठ के पीछे से डाल दी। फिर एक हाथ को सीधे मेरी एक चूची पर रख दिया। दूसरे हाथ से मेरी दूसरी चूची को अच्छी तरह थाम लिया।

उसके बाद उन्होंने मुझे उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया।

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वो बोले- ऐसे बैठो।

जैसे ही उन्होंने मेरी चूचियां पकड़ीं, मेरे पूरे शरीर में एक झनझनाती सी बिजली दौड़ गई।

मैं बिल्कुल शांत बैठी रही।

यह अहसास मेरे लिए एकदम नया और अनजाना था।

फिर वो मुझसे इधर-उधर की बातें करने लगे।

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इसी दौरान मुझे अहसास हुआ कि मेरी गांड के ठीक नीचे कोई मोटी, गर्म और डंडे जैसी चीज दब रही है।

उस वक्त मुझे लंड या चुदाई के बारे में कुछ भी पता नहीं था।

फिर भी मेरी बुर में एक अजीब सी खुजली होने लगी थी।

मुझे लग रहा था कि मैं अपनी बुर में कुछ अंदर घुसा लूं।

कुछ देर बाद चाची आ गईं।

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हम सबने मिलकर खाना खाया और सोने चले गए।

अब चाचा मुझे छूने और बहलाने के रोज नए-नए तरीके ढूंढते रहते थे।

उनके हाथ लगते ही मुझे अच्छा लगता था।

इसलिए मैं कुछ नहीं कहती थी।

चाचा के हाथ लगते ही मैं उनके ऊपर लेट जाती थी।

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अगले दिन फिर से मैं अंदर थी।

बाकी बच्चे बाहर खेल रहे थे।

चाचा ने कहा- यहां आओ बेटा, मैं तुम्हें एक चीज दिखाता हूं।

मैं उनके पास चली गई।

वो मुझे अपने कमरे में ले गए और दरवाजे पर कुंडी लगा दी।

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चाचा ने अपने कपड़े बदलकर सिर्फ लोअर पहन ली।

फिर वो मेरे पास आकर बैठ गए।

वो अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए बोले- बेटा देखो, मुझे यहां पर दर्द हो रहा है।

मुझे कुछ समझ नहीं आया, तो मैंने कुछ भी नहीं कहा।

फिर उन्होंने कहा- तुम्हारे हाथ मुलायम हैं न, तो तुम मेरे यहां पर सहला दोगी तो ठीक हो जाएगा।

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मैंने कहा- ठीक है चाचा जी. मैं सहला देती हूँ।

मैंने अपना छोटा सा हाथ उनके लोअर के ऊपर से उनके लंड पर रख दिया और धीरे-धीरे सहलाने लगी। मेरी मुलायम हथेली उनके मोटे लंड को ऊपर-नीचे करने लगी।

उन्होंने कहा- इस तरह से नहीं बेटा, अन्दर से हाथ डालकर करो, तभी तो दर्द बंद होगा।

ये कहकर उन्होंने अपनी लोअर का नाड़ा खोल दिया और अपना पूरा लंड बाहर निकाल लिया।

उन्हें पता था कि चाची अगले डेढ़-दो घंटे तक नहीं आएंगी।

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मैंने जैसे ही उनका लंड देखा, तो मैंने कहा- आपके सूसू में सूजन है क्या?

मैं उस समय लंड को सूसू ही कहती थी। मुझे मालूम नहीं था कि उसे लंड कहते हैं।

उन्होंने पूछा- क्यों?

मैंने कहा- करन (मेरा छोटा भाई) का छोटा सा सूसू है और आपका शायद चोट लगने से सूज गया है।

वो बोले- छोटे बच्चों का छोटा सूसू होता है और बड़े लोगों का बड़ा।

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उन्होंने मौके का फायदा उठाकर मुझसे कहा- अच्छा तुम अपनी सूसू दिखाओ। तुम्हारी सूसू कितनी बड़ी है?

मैंने कहा- मेरी सूसू ऐसी नहीं है।

तो वो बोले- अच्छा तो फिर कैसी है?

मैंने कहा- वहां पर कुछ नहीं है, बस छोटा सा छेद है।

वो बोले- मैं नहीं मानता, ऐसा थोड़े होता है।

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मैंने झट से अपनी पैंटी उतार दी और फ्रॉक को कमर तक ऊपर कर दिया।

फिर उन्होंने मुझे सोफे पर बिठाया और मेरी दोनों टांगें चौड़ी करके फैला दीं।

उनकी आंखें मेरी छोटी सी बुर पर टिक गईं। वे ध्यान से देखने लगे।

मैंने कहा- देखा, मैंने कहा था ना … बस एक छेद है।

उन्होंने कहा- मुझे तो छेद भी नहीं दिख रहा है। बस एक दरार सी है, दो होंठों के बीच में।

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मैंने उनसे कहा- अरे है चाचा … आप देखो नीचे की तरफ। वो होंठ के नीचे छुपा है।

उन्होंने फिर से मौका पकड़ा और अपनी दोनों अंगुलियों से मेरी बुर के मुलायम होंठों को धीरे से फैला दिया।

फिर उन्होंने एक उंगली मेरी बुर में धीरे से डाल दी और बोले- क्या इस छेद के बारे में कह रही हो?

मैंने तनिक उचकते हुए कहा- हां।

उनकी गर्म उंगली के स्पर्श से मेरी पूरी बुर में एक अजीब सा कंपन फैल गया।

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मुझे बहुत मजा आ रहा था।

फिर वो बोले- अरे, ये तो अन्दर से बहुत गंदा है। तुम नहाते टाइम इसे साफ नहीं करती हो क्या?

मैंने कहा- करती तो हूँ, पर नीचे तो दिखाई नहीं देता है न … इसलिए शायद मैल रह गया होगा।

वो बोले- चलो कोई बात नहीं, मैं साफ कर देता हूँ।

ये कहकर उन्होंने अपनी उंगली मेरी बुर के अंदर और गहरी घुसा दी।

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फिर धीरे-धीरे उसे अंदर बाहर करने लगे।

उनकी उंगली मेरी तंग बुर की दीवारों को रगड़ती हुई अंदर जाती और बाहर निकलती।

हर बार एक चिकनी, गर्म सनसनी मेरी कमर तक दौड़ जाती।

मेरे साथ ऐसा पहली बार हो रहा था पर वो इतने आराम से कर रहे थे कि मुझे बिल्कुल दर्द नहीं हो रहा था; ऊपर से मजा आ रहा था।

मेरी बुर से थोड़ा थोड़ा पानी निकलना शुरू हो गया था।

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चाचा बोले, “देखो बेटा, इसके साफ होने की यही पहचान होती है कि इससे पानी आना शुरू हो जाता है।” मैं कुछ नहीं बोली। मेरे पूरे शरीर में बेहद तीव्र सनसनी दौड़ रही थी। मेरी सांसें तेज हो गई थीं और एक अजीब सा गर्म मजा मेरी बुर के अंदर से उठकर पूरे पेट तक फैल रहा था। मेरी जांघें हल्की हल्की कांप रही थीं।

चाचा आगे बोले, “मेरी उंगली ज्यादा अंदर तक जा नहीं पा रही है। मैं बाद में तुम्हारी सूसू को और अच्छे से साफ कर दूंगा। अभी तुम मेरी सूसू सहला दो।” फिर उन्होंने मेरी गीली पैंटी को धीरे से ऊपर खींचकर मुझे पहना दी। उसके बाद उन्होंने मुझे अपने पास खींच लिया और अपने लंड के बिलकुल करीब बैठा लिया। उन्होंने मेरा छोटा सा हाथ पकड़कर अपने मोटे, गर्म और सख्त लंड पर रख दिया। फिर उन्होंने मेरे हाथ को धीरे धीरे ऊपर नीचे करने लगे।

मेरा हाथ उनके लंड की मोटी नसों और गर्म त्वचा को महसूस कर रहा था। लंड का सिरा थोड़ा नम था और उसकी गर्मी मेरी हथेली में समा रही थी। चाचा बोले, “हां बेटा, ऐसे ही करती रहो। जब दर्द ठीक हो जाएगा तो यहां से मलाई निकलेगी।” मैंने हैरानी से पूछा, “चाचा जी, मलाई क्यों निकलेगी?”

वो बोले, “अरे पागल, तुमको दर्द ठीक करने का इनाम भी तो मिलेगा।” उन्हें पता था कि मुझे दूध, दही, मलाई और मक्खन बहुत पसंद था। मैं तुरंत खुश हो गई और उनके लंड को दोनों हाथों से पकड़कर जोर जोर से मुट्ठी मारने लगी। मेरी छोटी उंगलियां उनके मोटे लंड को जकड़ रही थीं। ऊपर से नीचे तक पूरे लंड को सहलाते हुए मैं तेज तेज गति से हाथ चला रही थी।

कुछ मिनट तक लंड को इस तरह हिलाने के बाद चाचा झड़ने वाले थे। उनका सांस लेना भारी हो गया था और उनकी जांघें तन गई थीं। वो बोले, “बेटा, अब तुम नीचे बैठ जाओ। मेरा दर्द ठीक हो गया है, बस मलाई आने वाली है। जल्दी से अपना मुंह खोलो, फिर तुम्हें ढेर सारी मलाई मिलेगी।”

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उन्होंने मुझे घुटनों के बल नीचे बैठा दिया। फिर उन्होंने जोर जोर से अपने लंड की मुट्ठी मारनी शुरू कर दी। उनका हाथ तेजी से ऊपर नीचे हो रहा था। अचानक उनके लंड का सिरा फड़का और गर्म गाढ़ा लंड रस की कई धारें मेरे खुले मुंह में भर दीं। कुछ मेरे गालों पर भी गिरा, कुछ मेरी जीभ पर। स्वाद नमकीन और थोड़ा कड़वा था। मैंने सब कुछ निगल लिया।

मैंने पी लिया और बोली, “चाचा जी, इसका स्वाद वैसी मलाई जैसा नहीं है।” चाचा बोले, “बेटा, ये नेचुरल मलाई है, एकदम प्योर। इसका स्वाद ऐसा ही होता है। तुम्हें पसंद नहीं आया क्या?” मुझे कुछ भी समझ नहीं आया कि क्या बोलूं। मैंने कह दिया, “नहीं चाचा जी, अच्छी थी मलाई।”

वो बोले, “अरे देखो, मेरी सूसू पर तो थोड़ी सी लगी रह गई है। इसको भी चाट कर खा लो।” मैंने कहा, “इसको कैसे खाऊं चाचा जी?” वो बोले, “अरे जैसे लॉलीपॉप चूसती हो न, वैसे ही चूस लो।”

तो मैंने उनका अभी भी आधा सख्त लंड पकड़ा और लॉलीपॉप की तरह मुंह में ले लिया। मैंने जीभ से उसके सिरे को चाटा, फिर पूरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी। बचा हुआ गाढ़ा रस मेरी जीभ पर फैल गया। मैंने उसे चूस चूस कर पूरा पी लिया।

फिर वो मुझसे बोले, “बेटा, ये सब अपनी चाची को या किसी और को मत बताना क्योंकि मेरे पास इतनी मलाई नहीं है कि मैं सबको दूं। तुमको जब चाहिए हो तब मुझे बता दिया करना, मैं तुम्हें दे दूंगा।” मैं खुश होकर बोली, “ठीक है चाचा जी।”

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बस मैं कूदती हुई रूम से बाहर चली गई। अब लंड रस का स्वाद मेरी जबान पर चढ़ गया था और बुर में उंगली जाने का नया नया अहसास भी मुझे मजे दे रहा था। अब मैं खुद भी चाचा को अकेले ढूंढने लगी थी पर ज्यादातर घर में कोई न कोई होता ही था।

फिर एक दिन रात में सब बच्चे रूम में सो रहे थे और मैं अचानक से जग गई थी.
शायद कोई बुरे सपने की वजह से ऐसा हुआ था.

मुझे डर लग रहा था तो मैं उठी और चाचा चाची के कमरे में चली गई.
कमरा अन्दर से खुला था. चाचा और चाची दोनों सोए हुए थे.

चाचा और चाची पूरे नंगे थे.
चाची मस्त चूचियां सीधे लेटी होने की वजह से दोनों तरफ लटक रही थीं.

मैं चाचा के पास गई, उन्हें उठाया और उनसे धीरे से कहा- मुझे उस कमरे में डर लग रहा है.
वो धीमे से बोले- मेरे पास आ जाओ, यहीं लेट जाओ.

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उन्होंने मुझे अपने पास में लिटा लिया.
थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरी चूची पर धीरे धीरे हाथ फेरना शुरू किया. फिर उन्होंने मुझसे धीरे से कान में कहा- बेटा, तुझे गर्मी लग रही होगी. लाओ मैं तुम्हारी फ्रॉक उतार देता हूँ.

मुझे उनका हाथ फेरने से मजा आ रहा था तो मैंने उन्हें मना नहीं किया.
उन्होंने मेरी फ्रॉक उतार दी.

दूसरी तरफ चाची मस्त सोई पड़ी थीं और उनके पति देव अपनी ही भतीजी के मजे ले रहे थे.
मेरी फ्रॉक उतरने के बाद चाचा जी मेरी चूची पकड़ कर धीरे धीरे मसल रहे थे.

मैंने पूछा- चाचा जी, ये क्या कर रहे हो?
वो बोले- बेटा, इससे तुम्हारी सारी थकान उतर जाएगी, तुम दिन भर तो खेलती हो न!

फिर चूची मसलते मसलते वो बोले- अरे आज तो तुमने अपनी सूसू साफ ही नहीं करवाई और न ही मलाई खाई?
मैंने कहा- आप आज देर में आए थे न और चाची भी घर आ गई थीं. तब आपने कहा था न कि किसी को बताना नहीं है, नहीं तो सब मलाई मांगेंगे.

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तो वो हंसे और बोले- अच्छा हां, ये तो बात सही है. सारी मलाई तो मेरी प्यारी सी आयुषी की है.
फिर वो बोले- आज मैंने तुम्हारी सूसू को साफ करने के लिए बड़ी चीज ढूंढ ली है, उससे सूसू अन्दर तक साफ हो जाया करेगी.

मैं खुश होकर बोली- ये बहुत अच्छा है चाचा जी.
फिर वो बोले- चलो, दूसरे कमरे में तुम्हारी सूसू भी साफ कर देते हैं और तुम्हें मलाई भी देते हैं वरना यहां अगर तुम्हारी चाची जाग गईं तो वो सारी मलाई ले लेंगी और तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा.

मैंने कहा- नहीं, मलाई सिर्फ मुझे चाहिए.
वो फिर से मुस्कुराए और मुझे गोद में उठाकर दूसरे रूम में ले गए.

गेस्ट रूम में बिल्कुल अंधेरा था क्योंकि उस रूम में वैसे भी कोई नहीं जाता था, बेड और गद्दा आदि सब वहां पर था।

चाचा ने अंदर से कुंडी लगा ली।

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मैंने कहा, “चाचा जी, लाइट नहीं जल रही है?” वो बोले, “कोई बात नहीं, मैं अंधेरे में भी तुम्हारी सूसू को अच्छे से साफ कर दूंगा।”

फिर उन्होंने मुझे बेड पर लिटाया और मेरी दोनों टांगों को ऊपर की ओर मोड़ दिया। मेरी घुटनियां मेरे सीने की तरफ आ गई थीं। चाचा ने मुझसे कहा, “बेटा, ऐसे ही टांगें पकड़ कर रखना। मैं तुम्हारी सूसू साफ कर देता हूं।”

फिर उन्होंने अपना चेहरा मेरी बुर के बिलकुल पास ले जाकर मुंह लगा दिया। अपने दोनों हाथों की उंगलियों से उन्होंने मेरी बुर की दोनों पत्तियों को धीरे से फैला दिया। उनकी गर्म सांस मेरी नम बुर पर पड़ रही थी। फिर उन्होंने अपनी गर्म और नम जीभ मेरी बुर पर रखकर लंबी लंबी चाट लगानी शुरू कर दी। उनकी जीभ मेरी बुर के ऊपरी हिस्से से लेकर नीचे तक, फिर वापस ऊपर की ओर घूम रही थी। कभी वह मेरी छोटी सी गांड की सुराख पर भी रुककर चाटते। मुझे बेहद गहरा मजा आ रहा था। ये मजा पिछली बार से पूरी तरह अलग और ज्यादा तीव्र था। मेरी सांसें फूल गई थीं और मेरी बुर से लगातार पानी निकल रहा था।

मैंने पूछा, “चाचा जी, पहले तो आपने दूसरी तरह से साफ की थी?” चाचा बोले, “बेटा, पिछली बार अच्छी तरह से नहीं हो पाई थी। इस बार मैं अच्छे से कर रहा हूं। तुम बस आंखें बंद करके आराम से एंजॉय करो। क्योंकि सूसू साफ करने में बहुत अच्छा लगता है।”

मैंने कहा, “हम्म ठीक है चाचा जी।” उन्होंने पूछा, “तुमको अच्छा लगता है कि नहीं?”

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मैंने हां में सिर हिला दिया।

फिर वो मेरी बुर को पूरे दस मिनट तक लगातार चाटते रहे। उनकी जीभ कभी तेजी से घूमती, कभी धीरे धीरे चूसती। मेरी बुर पूरी तरह भीग चुकी थी। उनकी थूक और मेरा पानी मिलकर बेड पर टपक रहा था। फिर वो उठकर मेरे बगल में लेट गए।

मैंने पूछा, “चाचा जी, साफ हो गई मेरी सूसू?” वो बोले, “नहीं बेटा, अभी तो बस शुरू किया है।”

फिर उन्होंने अपनी एक मोटी उंगली मेरी बुर के मुंह पर रखी और धीरे धीरे अंदर घुसाने लगे। उंगली अंदर जाते ही मेरी बुर की दीवारें सिकुड़ गईं। वो उंगली को अंदर बाहर धीमी गति से चलाने लगे। हर बार अंदर जाते समय उनकी उंगली मेरी बुर के अंदरूनी हिस्से को रगड़ रही थी। मुझे बुर रगड़वाने में बहुत मजा आ रहा था। मैंने अपनी बुर को और फैला लिया और गांड को हल्का ऊपर उठाकर उनकी उंगली के आने जाने का पूरा मजा लेने लगी।

फिर उन्होंने धीरे धीरे अपनी दूसरी उंगली भी मेरी बुर में घुसाने की कोशिश की। दोनों उंगलियां साथ में अंदर जा रही थीं। इससे मुझे थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा था। मेरी भौंहें सिकुड़ गईं और मैंने होंठ काट लिए। पर मैं कुछ नहीं बोली। मुझे लगा शायद सूसू ऐसे ही साफ होती होगी।

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दस मिनट तक बुर में उंगलियां डालकर उन्हें अंदर बाहर करने के बाद वो मेरे सामने बैठ गए। अंधेरा होने की वजह से मुझे कुछ दिख नहीं रहा था। फिर उन्होंने एक तकिया मेरी गांड के नीचे लगा दिया ताकि मेरी बुर ऊपर की तरफ उठ जाए और पूरी तरह खुल जाए।

फिर उन्होंने ढेर सारा थूक अपनी हथेली पर लिया और मेरी बुर पर अच्छे से रगड़ दिया। उनकी उंगलियां थूक को मेरी बुर के अंदर तक फैला रही थीं। उन्होंने मुझसे कहा, “देखो बेटा, मैं तुम्हारी सूसू साफ करने के लिए कितनी अच्छी जुगाड़ लाया हूं। तुम तैयार हो?” मैंने कहा, “हां।”

वो बोले- बेटा, इसमें थोड़ा दर्द होगा. हो सकता है थोड़ा ज्यादा भी हो, पर जब दो तीन बार अपनी सूसू साफ कर लोगी, तो फिर इससे कभी दर्द नहीं हुआ करेगा.
मैंने कहा- ठीक है.

अब चाचा मेरे ऊपर झुके और अपने लंड के सुपारे को मेरी नाजुक सी बुर पर सैट कर दिया.
फिर चाचा धीरे धीरे अपना लंड मेरी बुर के अन्दर घुसाने लगे.

मुझे दर्द हो रहा था पर चाचा जी मेरा मुँह अपने हाथ से बंद किए हुए थे.
फिर उन्होंने एक जोर का झटका मारा और अपना आधा लंड मेरी बुर में घुसा दिया.

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मुझे बहुत दर्द हो रहा था, मैं छटपटा रही थी.
चाचा मेरे मम्मे दबाने और सहलाने लगे. एक हाथ से मेरी चूची के निप्पल को मींजने लगे.

इससे मेरी बुर का दर्द कम होने लगा और बुर के अन्दर घुसा हुआ लंड अपने आप बुर में समायोजित होने लगा.

कुछ देर बाद चाचा ने मेरी गांड हिलती हुई महसूस की तो वो समझ गए कि मेरा दर्द खत्म हो गया है.
अब उन्होंने धीरे धीरे अपना पूरा लंड मेरी बुर में पेल दिया और मुझे लंड से मजा आने लगा.

मेरी बुर ने पानी भी छोड़ दिया था जिससे चिकनाहट हो गई थी और दर्द जाता रहा था.

चाचा ने पांच मिनट तक मेरी बुर में लंड पेला और मुझे चुदवाने में मजा आने लगा.
फिर उन्होंने मुझे अपने ऊपर लिटा लिया और उनका लंड अभी भी मेरी बुर में आधा फंसा हुआ था.

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मुझे ऊपर लिटा कर वो मुझसे बोले- बेटा, सूसू साफ करना बहुत जरूरी होता है. वर्ना उसमें कीड़े लग जाते हैं. इसमें एक दो बार थोड़ा दर्द होता है, पर फिर आराम से साफ होने लगती है.
मैंने गांड मटकाते हुए लंड का मजा लिया और पूछा- चाचा जी, आप किस चीज से मेरी सूसू साफ कर रहे हैं?

वो बोले- मैं अपनी सूसू से.
मैंने कहा- आपकी सूसू तो गंदी हो जाएगी.

वो बोले- नहीं बेटा, वो तो सिर्फ ऊपर से गंदी होगी और उसको साफ करना तो बहुत आसान है.
मैंने पूछा- कैसे?

वो बोले- जैसे उस दिन तुमने लॉलीपॉप की तरह मेरी सूसू को चूसा था, वैसे ही साफ भी की जाती है क्योंकि लड़कों की सूसू सिर्फ मुँह की लार से ही साफ होती है.
मैंने कहा- तब तो मैं आपकी सूसू साफ कर दूंगी. पर जब मैं नहीं होऊंगी, तब आप अपनी सूसू को कैसे साफ करोगे?
चाचा बोले- तब मैं चाची से साफ करवा लूंगा.

मैंने खुश होकर उन्हें गाल पर किस कर लिया.

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इस पर भी वो बोले- जब खुश होते हैं तो गाल पर किस नहीं करते हैं बेटा!
मैंने कहा- तो फिर कहां किस करते हैं चाचा जी?

उन्होंने मेरा सिर पकड़ा और मेरे छोटे छोटे से होंठ पीने लगे.
ये अहसास भी मेरे लिए नया था पर मजा आ रहा था.

चाचा जी मुझे टीन गर्ल पोर्न सिखा रहे थे.

वो किस कर ही रहे थे कि उन्होंने एक जोर का धक्का और दे दिया और उनका पूरा लंड मेरी छोटी सी बुर में समा गया.
अब मुझे दर्द भी हो रहा था और एक अजीब सा मजा भी आ रहा था.

उन्होंने धीरे धीरे मेरी कमर पकड़ कर मुझे ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया और वो खुद भी नीचे से धक्के मार रहे थे.
मुझे धीरे धीरे दर्द कम, मजा ज्यादा आने लगा था.

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कोई 15 मिनट तक चाचा मुझे ऐसे ही चोदते रहे.

फिर वो जैसे ही झड़ने वाले थे, उन्होंने लंड निकाल कर मेरे मुँह में रख दिया और बोले- बेटा, लो जल्दी से सूसू को ऊपर नीचे करो और मलाई पी लो.
मैंने उनके लंड को मुँह में रख कर लंड पर मुट्ठी मारना शुरू कर दिया.

एक मिनट में मेरा पूरा मुँह उनके लंड रस से भर गया.
फिर उन्होंने कहा- ऐसे ही चूसती रहो बेटा … आह जोर जोर से चूसो.

मैं उनका लंड वैसे ही 5 मिनट तक जोर जोर से चूसती रही.
फिर उन्होंने मेरी बुर में उंगली डाली और बोले- हां, आज लग रहा अच्छे साफ हुई है.

मैं फिर से खुश हो गई और उनकी गोद में चढ़ गई.
फिर वो रूम में ले गए मुझे और फ्रॉक पहना कर अपने बगल में लिटा लिया.

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उस रात गलती से मेरी पैंटी उसी रूम में छूट गई थी तो मैं नीचे से नंगी ही थी.
सुबह चाची पार्लर चली गईं.

चाचा और मैं अब भी सोए हुए थे.
फिर थोड़ी देर बाद चाचा उठे.

मेरी फ्रॉक सोते हुए में ऊपर हो गई थी. चाचा ने नंगी बुर देखकर मेरी बुर में थूक लगाया और उंगली डाल कर बोले- उठ जाओ मेरी रानी बिटिया, देखो सुबह हो गई और तुम्हारी सूसू भी रात को कितनी साफ हो गई.
ये कहते हुए वो अपनी उंगली मेरी बुर में अन्दर बाहर करने लगे थे.

कुछ देर बाद चाचा ने गेट के बाहर झांका और चाची को आवाज दी- सुनीता.
उस पर उनके लड़के छोटू की आवाज आई- मम्मी पार्लर गई हैं. इधर हम सब हैं.

फिर उन्होंने पूछा- तुम लोग क्या कर रहे हो?
वो चारों एक साथ बोले- हम सब लूडो खेल रहे हैं.

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चाचा जी ने तुरंत अन्दर आकर कुंडी बंद कर ली और मुझे गोद में बिठा लिया.
मुझे गोद में बिठाए बिठाए धीरे से अपनी अंडरवियर उतार दी.

क्योंकि वो सिर्फ उतना ही पहने थे.
उन्होंने फिर अपनी उंगली मेरी फटी चूत में डाल दी और मुझसे बातें करने लगे.

चाचा बोले- अच्छा बताओ मेरी आयुषी आज क्या खाएगी?
मैंने कहा- ब्रेड बटर.
वो बोले- अच्छा तो बेटा को ब्रेड बटर अच्छा लगता है.

तो मैंने कहा- हां.
चाचा बोले- अच्छा बटर कैसा होता है मालूम है?

मैंने कहा- हां मालूम है. बटर नमकीन नमकीन होता है.
चाचा बोले- अच्छा तो आपके अन्दर भी तो बटर है.

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मैंने कहा- वो कैसे?
चाचा बोले- जैसे मेरे सूसू से मलाई निकलती है, वैसे ही आपकी सूसू से बटर निकलता है.

मैं ये सुनकर एकदम से खुश हो गई.
मैंने कहा- मैंने तो कभी नहीं देखा?

उन्होंने बताया कि उसे निकालने के स्पेशल तरीके होते हैं, तब बटर निकलता है. तुम बोलो तो दिखाऊं?
मैंने कहा- हां दिखाओ.

वो उंगली तो मेरी बुर में पहले से ही कर रहे थे, फिर उन्होंने जोर जोर से उंगली से मेरी बुर चोदना शुरू कर दिया.
फिर थोड़ी देर बाद जब मेरी बुर थोड़ी थोड़ी गीली होने लगी तो उन्होंने वो उंगली मेरे मुँह में डाल दी और बोले- देखो इसका टेस्ट कैसा है?

मैंने कहा- हां थोड़ा थोड़ा सा नमकीन है.
वो बोले- जब तुम बड़ी हो जाओगी, तब तुम्हारा बटर और ज्यादा नमकीन हो जाएगा.

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फिर उन्होंने मुझसे कहा- चलो बेटा, एक बार अभी तुम्हार सूसू साफ कर देते हैं, दोबारा फिर किसी टाइम कर देंगे.

वो मेरी फ्रॉक उतारने लगे तो मैंने कहा- चाचा जी, मेरी सूसू तो खुली है, फ्रॉक क्यों उतार रहे हो?
तो वो बोले- तुम्हारी मसाज भी कर देंगे, उससे जब तुम खेलोगी तो थकोगी नहीं.

मैंने हाथ ऊपर कर दिए और उन्होंने मेरी फ्रॉक निकाल दी.

फिर उन्होंने कहा- बेटा, मेरी सूसू को अपने थूक से गीला कर दो, जिससे तुम्हारी सूसू अच्छे से साफ हो जाएगी.
मैं उनके लंड के टोपे पर मुँह से थूक निकाल कर रगड़ने लगी.

वो बोले- अरे नहीं बेटा, ऐसे नहीं, लॉलीपॉप की तरफ लगाओ.

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मैंने उनका लंड अपने मुँह में रख लिया. उन्होंने धीरे धीरे अपना लंड मेरे गले तक पहुंचा दिया.
मुझे खांसी आने लगी.

उन्होंने लंड बाहर कर लिया और मुझे होंठों पर किस करके मुझे लिटा दिया.
अब चाचा मेरे ऊपर चढ़ गए और अपने लंड का टोपा मेरी बुर पर फिर से सैट कर दिया.

इस बार चाचा जी ने एक ही झटके में पूरा लंड मेरी चूत में ठांस दिया.
मेरी बहुत जोर से चीख निकली.
पर उन्हें पता था कि ऐसा कुछ होगा इसलिए उन्होंने मेरा मुँह पहले से बंद कर रखा था.

अब उन्होंने धक्के देना शुरू किया.
मुझे दर्द हो रहा था.

कुछ 25-30 धक्के लगने के बाद मुझे मजा आने लगा.
दर्द तो अभी भी हो रहा था, पर मजा भी आ रहा था.

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उनके धक्कों की स्पीड तेज होनी लगी.
अब वो फुल स्पीड में मेरी नाजुक सी चूत में धक्के मार रहे थे.

मेरी चूत इतनी टाइट थी कि उनका लंड आगे पीछे कम जा रहा था. ज्यादातर स्किन ही जा रही थी. लंड तो अन्दर ही फंसा था.
फिर जब मेरी चूत खूब गीली हो चुकी थी तब उनका लंड घचाघच अन्दर बाहर जा रहा था और वो फुल स्पीड से मुझे चोद रहे थे.

फिर कुछ देर बाद मुझे अपने अन्दर कुछ गर्म गर्म महसूस हुआ.
चाचा ने अपना सारा लंड रस मेरी चूत में भर दिया था.

मैंने चाचा से पूछा- चाचा जी, मेरे सूसू के अन्दर गर्म गर्म लग रहा है.
वो- वो मैंने मलाई अन्दर डाल दी है, अब यहां से खाओगी तो और मजा आएगा.

मैं उठकर बैठी और अपनी चूत से टपकते लंड रस को अपनी उंगली में लेकर चाटने लगी.
इतने में चाचा अपना लंड मेरे मुँह के पास लाकर बोले- अरे देखो, इसमें भी तो रह गई है, ये भी पी लो जल्दी से.

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मैंने खुश होकर लपक कर उनका लंड मुँह में रख लिया और चूस चूस कर सारा माल निकाल लिया.
फिर चाचा जी बाथरूम में चले गए और मैं फ्रॉक पहन कर नीचे चली गई.

कुछ देर बाद चाचा जी आए तो उन्होंने मुझे नाश्ता बना कर दिया.
चारों बच्चे अभी भी लूडो खेल रहे थे.
फिर कुछ देर बाद हम सब बाहर खेलने चले गए.

दोपहर हुई तो चाचा जी ने आवाज दी- आयुषी यहां आओ, आज हम लोग लंच बनाएंगे.
मैं दौड़ कर अन्दर आ गई.

बाकी बच्चे अभी भी बाहर खेल रहे थे.

चाचा अपनी ठरक मिटाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे थे.
मुझे कुछ न मालूम होने का चाचा पूरा फायदा उठाने में लगे थे.

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मैं अन्दर आई तो चाचा किचन में थे. मुझे देखा तो बोले- आ गई तुम … अच्छा बताओ आज क्या खाओगी?
मैंने कहा- कुछ भी बना लीजिए.

उन्होंने कहा- तो फिर तुम मेरी क्या क्या मदद कर सकती हो?
मैंने कहा- आप बता दीजिए, मैं सब कर दूंगी.

वो बोले- मेरी सूसू में फिर से दर्द हो रहा है … क्यों ना तुम इसे सहला दो, तब तक मैं खाना बना देता हूँ.
मैंने कहा- ठीक है.

वो टॉवल लपेटे हुए थे और उन्होंने अन्दर कुछ नहीं पहना था.
मुझे उन्होंने घुटनों पर बैठने को कहा और अपना टॉवल निकाल दिया.

अब उनका लंड मेरे मुँह के सामने था.

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उन्होंने मेरा सिर पकड़ा और अपना लंड मेरे मुँह में अन्दर तक घुसाने लगे.
मैंने पूछा- चाचा जी, पहले तो सहलाने से दर्द ठीक हो गया था न!

वो बोले- हां बेटा, तो तुम सहलाती भी रहना और मुँह से चूसती भी रहना. इससे दर्द जल्दी ठीक होता है.
मैंने कहा- ठीक है.

मैं उनके लंड को मुँह में लेकर अपने छोटे छोटे हाथों से उनके मोटे से लंड को मुठ्ठी मार रही थी.
कोई दस मिनट बाद उनके मुँह से मादक आवाजों के साथ उनका लंड रस सारा मेरे मुँह में भर गया.

मैंने सारा पीकर पूछा- चाचा जी, अब आपका दर्द ठीक हो गया है?
वो बोले- नहीं बेटा, अभी नहीं … तुम 5 मिनट रुक कर फिर से मालिश कर दो उसकी.

मैं वहीं खड़ी होकर देखने लगी कि क्या बन रहा है.
सब्जी गैस पर चढ़ चुकी थी और अब चाचा जी आटा गूंथने जा रहे थे.

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फिर उन्होंने मुझे किचन टॉप पर बिठा लिया और बोले- तुम्हें यहां अच्छा लगता है बेटा?
मैंने कहा- हां.

ये बात करते हुए उनकी उंगली मेरी चूत में जा चुकी थी क्योंकि मैंने अभी भी फ्रॉक के नीचे अपनी पैंटी नहीं पहनी थी.

वो बोले- तो तुम्हारा एडमिशन यहीं करवा दूँ और तुम्हारे पापा से बात भी कर लेता हूँ. वैसे भी यहां तेरे तीन भाई हैं, उनकी कोई बहन नहीं है.
मैंने खुश होकर कहा- हां, मुझे यहीं पढ़ना है. आप पापा से बात कर लो.

मुझे अपने घर पर ज्यादा अच्छा इसलिए नहीं लगता था क्योंकि वहां पर मैं दिन भर खेल कूद नहीं सकती थी और दिन भर पापा और मम्मी की डांट सुननी पड़ती थी.

चाचा मेरी मेरी चूत में अब अपनी दो उंगलियां घुसा कर मेरी चूत को चौड़ा करने में लगे थे.

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फिर उन्होंने मुझसे कहा- बेटा, तुम मेरी सूसू को मसाज कर दो, तब तक मैं आटा गूंथ लेता हूँ.
वो आटा गूंथने लगे और मैं उनका लंड लेकर अपने काम पर लग गई.

वो बीच बीच में मेरा मुँह अपने गोटों पर ले जाते और कहते- बेटा, इन्हें भी मसाज करो, इनमें भी दर्द है.
वे मेरे पूरे मजे ले रहे थे और मैं इन सब चीज से अनजान, जैसा वो कह रहे थे, करती जा रही थी.

पांच मिनट में आटा लग गया.
उन्होंने मुझे किचन टॉप पर फिर से बैठाया और मेरी चूत में फिर से उंगली डाल कर पूछने लगे- बेटा, जब तुम्हारी सूसू की मैं उंगली से या अपनी सूसू से सफाई करता हूँ, तो तुम्हें अच्छा लगता है न?

मैंने कहा- हां, मुझे अच्छा तो लगता है. पर जब आप अपनी सूसू मेरी सूसू में घुसाते हैं, तो दर्द होता है.
वो बोले- हां, अभी शुरुआत में होगा, फिर नहीं हुआ करेगा. और दर्द से पहले ही देखो, अभी हम दवा लगाए दे रहे हैं.

ये कहकर वो झुके और मेरी चूत पर अपना मुँह रख कर उसे अपनी जीभ से जोर जोर से चाटने लगे.
फिर 5 मिनट बाद वो उठे और मेरी चूत में घी लगा कर अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया.

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अब दर्द पहले से कम हो रहा था.
वो मुझे अपनी गोद में उठाकर चोद रहे थे.

फिर मुझे चोदते चोदते ही ड्राइंग रूम में पहुंच गए और बीन बैग पर बैठ गए.
वो जैसे ही बैठे उनका पूरा लंड मेरी चूत में समा गया.

अब वो मुझे उठा उठा कर चोद रहे थे और मेरी गांड के छेद में अपनी उंगली घुसाने की कोशिश कर रहे थे.
पर वो इतना टाइट था कि उनकी उंगली घुस नहीं रही थी.
वो थूक लगाकर भी कोशिश कर रहे थे, पर फिर भी नहीं जा रही थी.

उनका लंड मेरी चूत की दीवारों को जोर जोर रगड़ रहा था.
अब मुझे पहले से ज्यादा मजा आ रहा था.

मैंने अपने मम्मों पर हाथ रख कर कहा- चाचा, वो जैसे कल आपने मेरे इधर चूस कर दर्द कम किया था न … वैसे करो.
चाचा ने मेरे एक मम्मे को मुँह में दबा लिया और मेरी चूत को भोसड़ा बनाने की कोशिश करने लगे.

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मुझे दूध चुसवाते हुए चूत चुदवाने में अपार आनन्द आ रहा था.
मेरी गांड खुद ब खुद चाचा के लंड पर रगड़ खाने के लिए हिलने लगी थी.

इससे चाचा भी समझ गए थे कि पोर्न स्कूल गर्ल चुदाई का मजा लेने लगी है.
वो मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी से चूस कर मुझे मजा दे रहे थे.

आधा घंटा चोदने के बाद वो मेरे अन्दर ही झड़ गए.
फिर वो मुझसे बोले- अब जाओ बेटा तुम खेलो, मैं रोटी बनाकर सबको आवाज देता हूँ.

एक घंटे बाद चाचा जी ने सबको आवाज दी.
हम सब अन्दर आए, हाथ मुँह धोकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गए.

मैं जब भी चाचा जी के पास होती थी तो वो मेरी चूत में उंगली डाल देते थे क्योंकि अब मुझे भी अच्छा लग रहा था तो मैं भी जानबूझ कर ज्यादातर उनके पास ही रहती थी.
सारे बच्चे खाने की टेबल पर आ गए.

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मैं जानबूझ कर चाचा जी के पास बैठ गई.

उन्होंने अभी भी टॉवल ही पहना था. उन्होंने मुझे उठाया और अपनी गोद में बिठा लिया.
वो मेरे गाल चूम कर बोले- आज मेरा बेटा, मेरे साथ खाना खाएगा.

जब वो मुझे अपनी गोद में बिठा रहे थे, तो उन्होंने मुझे इस तरह से बिठाया कि मेरी फ्रॉक ऊपर को हो जाए.
फिर उन्होंने एडजस्ट होने के बहाने टॉवल में से अपना लंड बाहर निकाल लिया और उनका लंड मेरी चूत और टांगों के बीच में आ गया.

फिर वो बोले- आज हम अपने हाथ से खिलाएंगे अपने बेटे को खाना.
ये कहकर वो मुझे खाना खिलाने लगे. दूसरे हाथ से मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर ले गए और लंड ऊपर नीचे करवाने लगे.

वो एक हाथ से मुझे खाना खिला रहे थे और दूसरे से मेरी चूत में उंगली कर रहे थे.
सामने टीवी चल रहा था, तो सारे बच्चे टीवी पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे. इसका फायदा उठाकर वो मेरे कान में धीरे से बोले- चिल्लाना नहीं, मैं अपनी सूसू को तुम्हारी सूसू में डाल रहा हूँ.

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मैं खुश हो गई और ‘ठीक है …’ कह कर सिर हिला दिया. मुझे खुद चूत में लंड लेने का मन कर रहा था.

उन्होंने मुझे धीरे से उठाया और अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया.
क्योंकि मेरी चूत पहले से ही गीली थी और अभी थोड़ी देर पहले ही चुद चुकी थी, इसलिए लंड को जाने में इतनी दिक्कत नहीं हुई.

फिर हम लोगों ने खाना खत्म किया और टीवी देखने लगे.
चाचा मेरे पास में ही बैठकर मेरी चूत में उंगली करने में लगे थे.
मेरे लिए सब इतना नया था कि मैं चाहती ही नहीं थी कि चाचा मेरी चूत से अपनी उंगली निकालें.

मेरे ठरकी चाचा जी को तो एकदम कोरी चूत का मजा मिल रहा था तो वो क्यों निकालते मेरी चूत से उंगली.
खैर … रात हुई, तो चाचा चाची अपने कमरे में चले गए और हम बच्चे अपने कमरे में.

रात में 2 बजे मेरा फिर से मन कर रहा था कि मेरी चूत में उंगली या लंड कुछ भी जाए.

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मैंने सोचा कि चलो चाचा के रूम में चलती हूँ.
धीरे से मैंने गेट खोला तो देखकर हैरान रह गई.

चाचा चाची दोनों नंगे एक दूसरे से लिपटे हुए थे.
चाची चाचा के ऊपर बैठकर अपनी गांड उछाल उछाल कर चुद रही थीं और चाची के मुँह से ‘आआहह आआहह …’ की आवाजें पूरे कमरे को भर रही थीं.

मैं काफी देर तक देखती रही.
कभी चाची ऊपर तो कभी चाचा.

कुछ देर बाद चाची नंगी ही दूसरी तरफ करवट लेकर सो गईं और चाचा भी.

फिर जब मुझे लगा कि चाची पूरी तरह से सो गईं, तो मैं चाचा के पास गई और उनका लंड पकड़ कर बोली- चाचा जी, सूसू की सफाई करवानी है.
उन्होंने मुस्कुरा कर मुझे गोद में उठा लिया.

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चाचा ने मुझे ऐसे उठाया कि उनकी उंगलियां मेरी चूत में चली जाएं.

वो बोले- आ जाओ मेरा बेटा, अभी कर देता हूँ सुसु साफ.
वो मुझे लेकर गेस्ट रूम में चले गए.

चाचा ने मुझे काफी देर तक चोदा.
फिर वो अपने रूम में चले गए और मैं अपने!

चार दिन तक ऐसे ही चलने के बाद एक शाम चाचा पापा से बात कर रहे थे और उन्होंने ऐसे ही मुझे अपने पास रखने को पूछ लिया.

मुझे पता था कि पापा मना नहीं करेंगे क्योंकि पापा को सिर्फ लड़का ही चाहिए था, उन्हें लड़की से कोई मतलब नहीं था.
वो थोड़े ज्यादा पुराने ख्यालात के थे.

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फिर चाचा ने अपनी बात पापा से खत्म करके मुझे और चाची को एक साथ बताया कि आयुषी अब हमारे साथ रहेगी, भैया मान गए हैं.

मेरी चाची भी खुश हो गईं.
क्योंकि मेरे पापा के विचारों की बजाए उन्हें हमेशा से एक लड़की चाहिए थी और उनके तीन लड़के थे.

ये सब सुनकर जितना मैं खुश थी, उतनी ही मेरी चाची.
पर चाचा अलग ही खुश थे.

उस टाइम उनकी खुशी का रीजन मुझे उनका प्यार लग रहा था, पर रीजन क्या था … वो तो अब आप सबको पता ही है.
चाची ने खुश होकर कहा- चलो, इसी बात पर हम सब लोग पिकनिक पर चलते हैं.
चाचा मान गए.

फिर तय होने लगा कि कहां जाना है?
बहुत सोच विचार के बाद यह तय हुआ कि ऊटी चलते है. वहीं पर पिकनिक कैंपिंग सब करेंगे क्योंकि गर्मी का माहौल है. थोड़ी ठंडी जगह ही अच्छी रहेगी.

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अगले हफ्ते निकलने का प्लान रेडी हुआ. ट्रेन की टिकटें बुक की गईं और अगले हफ्ते का इंतजार जोरों से चलने लगा.
फाइनली वो दिन आया, जिस दिन हम लोगों को ऊटी के लिए निकलना था.

ट्रेन रात के 11 बजे की थी, तो हम सब लोगों को खाना खाकर ही स्टेशन के लिए निकलना था.
हम सबने खाना खाया और सब तैयार होने लगे.

मैंने नई नई फ्रॉक पहनी थी.
चाचा मेरे पास आए और धीरे से कान में बोले- तुम अपनी पैंटी मत पहनना ताकि मैं तुम्हारी सूसू रात को साफ कर सकूँ.

मैंने खुश होकर कहा- ठीक है चाचा जी.
चाची मुझे खुश होते देख के बोलीं- अरे क्या बातें हो रही चाचा भतीजी में … जो इतना खुश हो?

चाचा जी बोले- कुछ नहीं, मैं कह रहा था कि मेरे पास रहना तो मैं तुम्हें लॉलीपॉप दूंगा.
तो चाची बोलीं- बिगाड़ो मत मेरी बेटी को … उसके दांत खराब हो जाएंगे.

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फिर मैं जल्दी से बाथरूम गई और अपनी पैंटी उतार कर वहीं उतार कर डाल दी.
अब मैं नीचे से नंगी थी, मेरी जवान चूत में ठंडी हवा मुझे अजीब सा सुकून दे रही थी.

समय पर हम लोग स्टेशन के लिए निकले.

हम लोगों ने सिर्फ तीन सीट्स ही बुक की थीं क्योंकि ज्यादातर बच्चे ही थे.
हमारी सीट्स एक ही लाइन में थी.

सबसे नीचे वाली बीच वाली और सबसे ऊपर वाली.
चाची ऊपर चढ़ना नहीं चाह रही थीं तो सबसे नीचे वाली सीट पर चाची और उनका बेटा, बीच वाली पर मेरा भाई और चाचा के दो बेटे … और सबसे ऊपर वाली पर मैं और चाचा. क्योंकि मैंने पहले ही कह दिया था कि मुझे सबसे ऊपर सोना है.

फिर चाचा ने चाची से कहा- बैग से मेरा हाफ लोअर निकाल दो, जींस में नींद नहीं आएगी.
चाची ने लोअर निकाल कर चाचा को दे दिया.

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वो चेंज करने वाशरूम चले गए.
फिर लौट कर थोड़ी देर में आए.
शायद उन्होंने सिगरेट पीने में टाइम लगा दिया होगा.

तब तक चाची लेट गई थीं, तो उन्होंने खुद ही जींस बैग में रख दी और अंडरवियर भी.
क्योंकि जब वो जींस रख रहे थे तो उनकी अंडरवियर की इलास्टिक दिख रही थी.

अब वो ऊपर आ गए.
मैं पहले से ही ऊपर थी.

ट्रेन की लाइट बंद हो चुकी थी.
ऊपर चढ़ते ही चाचा जी ने मुझे अपने पास लिटाया और एक चादर ओढ़ ली.
उनका हाथ तुरंत मेरी चूत के ऊपर आ गया और वो मेरी चूत सहलाने लगे.

फिर उन्होंने थोड़ा सा थूक मेरी चूत रगड़ना शुरू किया.
मेरी चूत का दाना अभी खिल नहीं पाया था, वो एकदम सपाट थी.

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उनकी गीली उंगली मेरी चूत के ऊपर से शुरू होती और सरकती हुई मेरी चूत में घुस जाती.
मैंने चाचा से पूछा- चाचा, आपका सूसू जब मेरी सूसू में जाता है, तो आपको दर्द नहीं होता?

वो बोले- होता तो है, पर तुम्हारी सूसू साफ करना भी तो जरूरी है.
मैं बहुत खुश हो गई कि मेरे चाचा जी मेरा कितना ख्याल रखते हैं.

मैंने करवट लेकर उनके होंठों पर किस कर लिया क्योंकि चाचा जी ने बताया था, जब बहुत खुश होते हैं तो होंठ पर किस करते हैं.

फिर चाचा जी ने मेरा सिर पीछे से पकड़ा और मेरे होंठ पीने लगे.
मैंने पूछा- चाचा जी, क्या आप भी बहुत खुश हैं?

वो बोले- हां, मैं भी बहुत खुश हूं और बहुत ज्यादा खुशी में एक दूसरे की जीभ भी चूसी जाती है.
ये कहकर उन्होंने अपनी जीभ मेरे मुँह डाल दी.
मैं उनकी जीभ चूसने लगी और वो मेरी.

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उनके दोनों हाथ मेरी गांड फैलाए हुए थे क्योंकि उन्होंने मुझे अपने ऊपर लिटा लिया था.
वो दोनों हाथों मेरी गांड जोर जोर फैला रहे थे और हिला रहे थे.

बीच बीच में वो अपनी उंगली मेरी चूत में घुसा देते थे.
वो उंगली गांड में भी घुसाने की कोशिश कर रहे थे, पर वो नहीं घुस पा रही थी.
चाचा मुझसे धीरे से बोले- तुमको पॉटी साफ होती है?

मैंने कहा- हां चाचा जी, पर कभी कभी नहीं होती.
वो बोले- मैं तुम्हारी गांड के छेद के लिए दवा लाया हूँ.

मैंने पूछा- इसे गांड कहते हैं क्या?
तो वो एकदम से सकपका गए, शायद उनके मुँह से गांड गलती से निकल गया था.
वो बोले- हां बेटा, पर ये सिर्फ तुम मेरे सामने बोलना, किसी और के सामने बोलोगी तो लोग तुम्हें गंदा कहेंगे.

मैंने कहा- ठीक है.
मैंने चाचा जी से कहा- चाचा जी, मेरी गांड के छेद में कभी कभी खुजली होने लगती है.

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वो बोले- हां क्योंकि वो भी साफ नहीं है इसलिए खुजली होती है.
मैंने पूछा- क्या उसको भी आप अपनी सूसू से साफ करेंगे?

चाचा जी बोले- हां बेटा, पर आज नहीं … वो किसी और दिन.
मैंने कहा- ठीक है, चाचा जी थैंक्यू.

फिर चाचा ने मुझे थोड़ा ऊपर उठाया और अपना लंड मेरी चूत पर सैट करके पूरा अन्दर पेल दिया.
मेरी चीख निकलती, उससे पहले उन्होंने मेरे मुँह पर अपना मुँह रख कर किस कर लिया.

चाचा मुझे ऐसे ही आधे घंटे तक चोदते रहे और फिर मेरी चूत के अन्दर ही झड़ गए.
फिर बिना लंड निकाले ही ऐसे ही सो गए.
मैं भी सो गई.

फिर शायद 4 घंटा बाद मेरी आंख खुली तो सुबह सी लग रही थी.
शायद 4 बजा होगा क्योंकि उस टाइम बहुत कम उजाला था.

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चाचा का लंड मेरी चूत के अन्दर तना हुआ था.
मुझे उनके लंड से मजा आ रहा था. मैं वैसे ही नीचे ऊपर करने लगी.

इससे चाचा की आंख खुल गई.
उन्होंने मुझे थोड़ा सा सीधा किया और मेरी चूची कसके दबाई और नीचे से जोर से धक्का दे मारा.

फिर उन्होंने मुझे खुद से चिपका लिया और नीचे से धक्के मारने लगे.
वो मेरी चूत की सफाई के नाम पर मुझे कैसे भी उठाकर कैसे भी चोदने लगते थे.

फिर उन्होंने मुझे उल्टा करके अपने ऊपर लिटा लिया और मेरी चूत में लंड डाल कर घपा घप चोदने लगे, दोनों हाथों से मेरी चूची मसलने लगे.
कोई 30 मिनट चोदने के बाद हर बार की तरह उन्होंने अपना सारा माल मेरी चूत में भर दिया.

हम सब अगले दिन ऊटी पहुंच गए.
हमने एक होटल में रूम बुक किया हुआ था. ज्यादातर बच्चे होने की वजह से एक बड़ा बेडरूम ही काफी था. होटल बहुत अच्छा था, नीचे रेस्टोरेंट थिएटर सब था.

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हम सब कमरे में पहुंचे.
चाची ने पहले चेंज करने और फ्रेश होने का सोचा और वो वाशरूम चली गईं.

हम सब अपने फेवरेट काम में लग गए, टीवी ऑन हो गया और कार्टून चालू.

दो बेड लगे थे तो हम सब पूरे बेड पर उछल कूद कर रहे थे.

चाचा जी बोले- शांत होकर बैठकर देखो.
हम सब बैठ गए.

फिर उन्होंने पूछा- क्या खाओगे तुम सब?
सबने अपना अपना कुछ बोला.

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चाचा जी बोले- पिज्जा कैसा रहेगा?
हम सब चिल्ला पड़े- हां हां.

चाचा जी ने रिसेप्शन पर कॉल लगाकर कहा- 2 पिज्जा और एक रॉयल स्टैग की बॉटल और साथ में आइस बकेट.

कुछ देर बाद चाची वाशरूम से आईं और चाचा अन्दर चले गए.
थोड़ी देर में रूम की घंटी बजी.

रूम सर्विस वाला सब सामान लेकर आया था.
हम सब बच्चे पिज्जा पर टूट पड़े.

चाचा जी बाहर आए.
चाची ने उनकी तरफ देखा और फिर दारू की बॉटल की तरफ.
फिर वो मुस्कुरा दीं.

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उन दोनों ने भी पिज्जा का एक एक स्लाइस उठा कर खाने लगे और टीवी देखने लगे.
इतने में चाची बोलीं- कल से घूमना शुरू करते हैं. ट्रेन में बहुत थकान हो गई है इसलिए आज आराम कर लेते हैं.

हम सब बच्चों का मुँह उतर गया.

इस पर चाचा जी बोले- अरे तुम लोग टेंशन नहीं लो, अभी हम सब आइसक्रीम खाएंगे और ढेर सारी मस्ती भी करेंगे.
चाची मुस्कुराकर बोलीं- पता नहीं कितनी एनर्जी है इनके पास?

चाचा चाची के कान में कुछ बोले.
जिस पर चाची ने मुस्कुराते हुए उनकी पीठ एक धौल जमाया और बोलीं- तुम चुप रहो.

फिर चाचा ने दारू की बॉटल उठाई और 2 पैग बनाए.
एक चाची को पकड़ा दिया और एक खुद पीने लगे.

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मुझे नहीं पता था कि लड़कियां भी दारू पीती हैं. मैंने पहली बार किसी लड़की को दारू पीते देखा था.
फिर वो दोनों काफी देर तक पीते रहे और पिज्जा खाते रहे.

हम सारे बच्चे टीवी देख रहे थे.
फिर चाची बोलीं- अब मैं थोड़ी देर सोने जा रही हूँ, कोई चिल्लाना नहीं और शैतानी नहीं करना.

वो चाचा की तरफ देख कर बोलीं- और तुम भी नहीं.
चाचा बोले- जी मैडम.

चाची ने कम्बल ओढ़ा और लेट गईं.

क्योंकि एसी फुल पर चल रहा था तो ठंड तो लग रही थी. वैसे भी ऊटी का मौसम ठंडा होता है.
चाचा जी भी बेड पर आ गए और उन्होंने भी कम्बल ओढ़ लिया.

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मैं पहले से ही बैठी थी तो मुझे खींच कर अपने पास को करते हुए बोले- तुम कहां चुप चुप बैठी हो.

मैं उनके आगे उनके पैरों के बीच में बैठ गई और कम्बल ओढ़ लिया.
वो अपना हाफ वाला लोअर पहने थे इसलिए उनका लंड उनके लोअर के थोड़ा ऊपर होते ही एक तरफ से झांकने लगा.

उन्होंने मेरा हाथ अपने लंड पर रख दिया.
अब आगे मुझे पता चल चुका था कि क्या करना होता है.

मैं उनके लंड की मुट्ठी मारने लगी और मेरे पैंटी न पहने होने की वजह से उनका हाथ सीधे मेरी चूत पर आ गया.

वो मेरी चूत में धीरे धीरे उंगली कर रहे थे.

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बहुत देर तक वो मेरी चूत में उंगली करते रहे और मैं उनके लंड की मालिश करती रही.
मुझे उत्तेजना काफी ज्यादा चढ़ गई थी और मुझे अपनी चूत में लंड की खासी जरूरत महसूस होने लगी थी.
बाकी बच्चे धीरे धीरे सोने लगे थे.

चाचा ने उन्हें भी कम्बल उढ़ाया और लाइट्स और टीवी ऑफ कर दिया.
फिर मुझे धीरे से उठाकर अपने लंड पर बैठा लिया. चाची दारू के नशे में थीं तो गहरी नींद में सो गई थीं.

दस मिनट तक चोदने के बाद वो मुझे बाथरूम ले गए और बैग से कुछ दो पाऊच जैसे निकाल कर लाए थे, जिसमें पानी जैसा कुछ था.

फिर उन्होंने बाथरूम बंद करके मुझसे कान में कहा- इससे तुम्हारी गांड थोड़ी साफ हो जाएगी, बाकी मैं अपनी सूसू से कर दूंगा.

उन्होंने उस पाऊच का पाइप मेरी गांड में डाला और पूरा पाऊच मेरी गांड में खाली कर दिया.
फिर मुझसे कहा- इसे अपनी गांड में 10 मिनट तक रहने दो. तब तक मेरे पास बैठो.

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वो कमोड पर बैठकर मेरी चूत में उंगली करते रहे और अपने लंड में मुट्ठी मरवाते रहे.
फिर दस मिनट बाद उन्होंने मुझसे कहा- अब तुम पॉटी कर लो.

मैं जैसे ही बैठी और थोड़ा प्रेशर लगाया मेरी गांड एकदम खाली हो गई.
दूसरे पाऊच की जरूरत भी नहीं पड़ी.

फिर मैंने अपनी गांड धोई और चाचा के साथ बाहर आ गई.
सब गहरी नींद में सोए हुए थे.

चाचा ने अब मुझे गोद में बिठाकर अपना लंड मेरी चूत में डाला और अपनी उंगली पर वैसलीन लगाकर मेरी गांड में डालने की कोशिश करने लगे.
इस बार उनकी उंगली मेरी गांड में बड़ी आराम से जा रही थी और जब उनकी उंगली मेरी गांड में जा रही थी तो मुझे चूत से भी ज्यादा मजा आ रहा था.

फिर उन्होंने दो उंगलियां डालना शुरू किया. मुझे अब और मजा आ रहा था.
हां थोड़ा सा दर्द था, पर जितना चूत में हुआ था … उससे बहुत कम.

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एक तरफ चाचा मेरी चूत को अपने मोटे लौड़े से चोद रहे थे और दूसरी तरफ उनकी उंगलियां मेरी गांड चोद रही थीं.

चाची नशे में एकदम धुत पड़ी थीं और उनका पति अपनी कमसिन भतीजी को चोदने में लगा था.

फिर चाचा ने मुझे घोड़ी बनाते हुए धीरे से कान में कहा- अब मैं तुम्हारी गांड का छेद साफ करने जा रहा हूँ. ऐसे ही रहना और कम्बल को मुँह में जोर से दबा लो ताकि तुम चीखो नहीं. क्योंकि इसमें भी शुरू शुरू में दर्द होगा. फिर 2-4 बार के बाद नहीं होगा.

मैंने ‘ठीक है …’ में सर हिलाया और घोड़ी बन गई.

चाचा ने ढेर सारी वैसलीन अपने लंड पर लगाई और ढेर सारी मेरी गांड के छेद में भर दी, गांड के आसपास भी लगाई और अपना लंड मेरी गांड के छेद पर टिका कर धक्का दे दिया.

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उनके लंड का टोपा मेरी गांड में जाकर सैट हो गया.
और सच कहूं तो चूत के मुकाबले इसमें न के बराबर दर्द हुआ.

वैसे मुझे अब भी गांड में लेना ही ज्यादा पसंद है, शायद शुरू से ही ऐसा था.

उन्होंने एक और धक्का दिया, उनका लंड गांड के अन्दर जाकर कहीं टकराया.
शायद उनका लंड मेरी पूरी गांड भर चुका था. उससे बड़ा लंड शायद उस टाइम मेरी गांड में नहीं जा सकता था.

उन्होंने शुरूआत में धीरे धीरे मेरी गांड चोदना शुरू की, फिर उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ा ली.
उनकी उंगलियां अब मेरी चूत में थीं और लंड मेरी गांड में घुसा हुआ था.

वो मुझे दबा कर चोद रहे थे और मुझसे कान में कह रहे थे कि अब तुम्हारे दोनों छेद मैं रोज साफ करूंगा.
मैंने उनसे धीरे पूछा- एक दिन मैंने देखा था कि आप चाची के छेद साफ कर रहे थे तो चाची आह आह की आवाज कर रही थीं. उनको बहुत दर्द हो रहा था क्या?

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तो उन्होंने बोला- अरे नहीं पगली … वो तो जब उनको छेद साफ करवाते हुए बहुत ज्यादा अच्छा लगता है, तो उनके मुँह से ऐसी आवाजें निकलने लगती हैं.
मैंने कहा- मुझे भी अच्छा लगता है तो क्या मैं भी वैसे ही करूं?

वो बोले- हां, मगर जब हम अकेले होंगे, तब करना.
मैंने कहा- ठीक है.

फिर वो मेरी गांड में और जोर जोर से धक्के मारने लगे और कुछ देर बाद मेरी गांड में ही झड़ गए.

उन्होंने मुझे किस किया और बोले- तुम चुपचाप लेटी रहना और सोने का नाटक करती रहना, फिर तुम देखना मैं तुम्हारी चाची की सूसू और गांड कैसे साफ करता और वो क्या क्या करती हैं. फिर तुम भी वैसे ही किया करना.

मैंने खुश होकर कहा- ठीक है.
मैं चुपचाप आंख बंद करके लेट गई.

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चाचा ने चाची की चूचियों को पीछे से पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगे.

चाची ने कुछ देर बाद अंगड़ाई ली और चाचा से धीरे से बोलीं- बच्चे हैं यार, जग जाएंगे.

चाचा अपना हाथ उनकी शायद चूत पर ले गए क्योंकि चाची की तुरंत एक मादक सी आह निकली.
फिर चाची चाचा को अपने ऊपर खींच कर उन्हें किस करने लगीं, चाचा ने उनका गाउन खोल दिया.

चाची के नर्म नर्म चूचे लटक रहे थे क्योंकि उनकी चूचियां बहुत बड़ी थीं.

चाचा ने झट उनकी एक चूची को पकड़ा और उसको मुँह में भर कर जोर जोर से चूसने लगे.
चाची की फिर से ‘आहह आहह …’ निकलने लगी.

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इस बार चाची की आहह आहह ज्यादा लंबी और जोर से निकल रही थी.

शायद लंड को जहां पहुंचना था, वो पहुंच चुका था.
चाचा ने धक्के मारना शुरू कर दिया.

चाची आह आहह की आवाज़ के साथ मजे से लौड़ा खा रही थीं.
फिर चाचा नीचे आ गए और चाची ऊपर … अब चाची अपनी गांड उछाल उछाल कर लंड अपनी चूत के अन्दर बाहर कर रही थीं और चाचा उनकी चूचियां मसलने में लगे थे.

फिर दोनों बैठ गए और चाची अपनी गांड से और जोर से धक्के मारने लगीं.
चाचा अपनी तरफ से धक्के मार रहे थे.
कमरे में फच फच की आवाजें गूंजने लगी थीं.

फिर चाची घूम गईं और लंड अपनी गांड में लेकर उस पर ही बैठ गईं.
वो अपनी गांड गोल गोल घुमाने लगीं.
फिर जैसे चूत चुदवा रही थीं, वैसे ही गांड उठा उठा कर मरवाने लगीं.

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ये कार्यक्रम बीस मिनट तक चलने के बाद चाचा चाची के ऊपर लेट गए और उनके एक मम्मे को दबा कर पीने लगे.
चाची उन्हें बड़े प्यार से देख रही थीं और ओने हाथ से अपना दूध उन्हें पिला रही थीं.

कुछ देर बाद चाचा सीधे लेट गए.
चाची उनका लंड हाथ में लेकर बोलीं- इसको बाहर क्यों निकालते हो तुम, मेरी चूत में ही पेले रहा करो.

ये कहकर चाची उठीं और चाचा का लंड अपने मुँह में भर कर जबरदस्त ब्लोजॉब देने लगीं.

वो चाचा का लंड आखिरी इंच तक अपने मुँह में घुसा ले रही थीं.
बहुत देर तक उन्होंने चाचा के लंड के हर एक इंच को चखा, उनके गोटे चूस कर गोटों से खेलीं, लंड से खेलीं, कभी वो अपने मुँह पर रगड़तीं तो कभी होंठों पर.

जबरदस्त ब्लोजॉब के बाद उन्हें उनकी मेहनत का फल मिल गया और चाचा जैसे ही झड़ने वाले थे, उन्होंने चाची के मुँह में रस डाल दिया.
चाची को जैसे अमृत मिल गया, वो लंड को अपने मुँह में डाल कर हाथ से इतनी सिर से हिलाने में लगी थीं कि मानो एक भी बूंद आज अन्दर नहीं रहने देंगी.

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शायद चाचा चाची के इतने जबरदस्त ब्लोजॉब के चलते एक बार में दो बार झड़ गए थे.
फाइनली चाची उनका पूरा लंड अपने मुँह के अन्दर लेकर गईं और फिर से चूसते हुए उसे बाहर निकाल दिया.

फिर चाची लंड को किस करके मुस्कुराने लगीं.
चुदाई खत्म हुई तो चाची ने अपने कपड़े पहने और चाचा ने अपना लोअर.

चाची फ्रेश होने चली गईं.

चाचा मेरे कान बोले- मजा आया देख कर?
तो मैंने कहा- बहुत ज्यादा. ये मुझे रोज देखना है.

चाचा मेरे दूध मसलते हुए बोले- ठीक है. अच्छा क्या क्या सीखा?
मैंने कहा- बहुत कुछ, वो मैं आपको बाद में दिखाऊंगी.

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चाचा ने मेरी चूची दबाते हुए मुझे किस कर लिया.
अब मुझे अपनी चूची दबाने में भी मजा आने लगा था.

खैर रात हुई, सबने खाना खाया.
उसी बीच चाचा ने मौका ढूंढ कर रात में एक राउंड मुझे फिर से चोदा.

मगर मुझे मलाई नहीं मिल रही थी तो मैंने चाचा के कान में कहा- मुझे आप मलाई क्यों नहीं देते?
वो बोले- अच्छा सुबह दूंगा.
मैंने कहा- ठीक है.

फिर हम सब सो गए.
अगले दिन हम लोग दिन भर ऊटी घूमे और कैंपिंग का सामान खरीदा.

फिर चाचा पास के ही छोटे सी आउटिंग के जंगल के गार्ड से बात कर आए कि हम लोग वहां कैंप लगा सकते हैं.
हम सब शाम को रूम में आए.

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हमने अपना सारा कैंपिंग का सामान पैक किया और बाकी सामान रूम में छोड़ कर हम लोग कैंपिंग के लिए निकल गए.
शाम और ढल चुकी थी.

हमने दो कैंप लगाए.
हम सब बच्चों ने ढेर सारी लकड़ियां इकट्ठा की, फिर चाचा ने बोन फायर जलाया.

हम सब उसके आसपास बैठकर काफी देर तक अंताक्षरी खेलते रहे.
फिर हम सबने वहीं पर बैठ कर खाना खाया. खाने के बाद हम सब यहां वहां की बातें और खेलना कूदना करते रहे.

रात में 11 बजे चाचा जी ने कहा- चलो अब सोने का टाइम. सब लोग अपनी अपनी आइसक्रीम खत्म करो और अपने अपने कैंप में पहुंचो.
चाची और उनके दो बच्चे एक कैंप में चले गए.

मैं, मेरा भाई और चाची का छोटा बेटा, चाचा के साथ दूसरे में चले गए.

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चाचा छोटे बेटे को सुलाने लगे.
कुछ देर में वो सो गया और भाई के दोस्त दूसरे कैंप में थे, तो वो भी तुरंत ही सो गया.

चाचा ने लाइट ऑफ कर दी और कैंप की चैन बंद कर ली. मुझे झट से अपनी गोद में उठा कर मेरी फ्रॉक निकाल कर फैंक दी.

क्योंकि मैंने पैंटी नहीं पहनी थी तो उन्होंने मुझे खड़ी किया और खुद बैठे रहे.
चाचा ने मेरी चूत में अपना मुँह घुसा दिया और अपनी जीभ से मेरी चूत खोलकर चाटने लगे.
मैंने धीरे से पूछा- चाचा जी, मैं अब वो आवाजें निकाल सकती हूँ.

वो बोले- हां, पर अभी धीरे से निकालना, अभी हो सकता है कि तेरी चाची जागी हुई हों.

चाचा मेरी चूत चाटने लगे और मैं आआह आआह उम्मम्म की आवाजें निकालने लगी क्योंकि मुझे चूत चटवाने में बहुत मजा आ रहा था.

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फिर उन्होंने मुझे अपनी गोद में बिठाया और जोर जोर से किस करने लगे.
मैं भी उन्हें किस करने लगी.

वो मेरी चूचियां मसल रहे थे और मेरे निप्पल मींज रहे थे.
फिर वो मेरी चूत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगे.
कुछ बार वो यही काम गांड में उंगली डाल कर करने लगे.

तभी मैंने पूछा- चाची, सूसू को चूत क्यों कह रही थीं?
वो बोले- वो उनकी सूसू का नाम है, तुम चाहो तो तुम भी रख लो.

मैंने कहा- तो मेरी सूसू का नाम भी चूत और आपकी सूसू का क्या नाम है?
वो बोले- लंड.

इतना कहते ही उन्होंने मुझे लिटाया और खुद मेरे ऊपर आकर अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया.

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मेरी टाइट चूत के पूरे मजे चाचा जी सफाई के नाम पर ले रहे थे, पर अब मुझे भी मजा आ रहा था.
सफाई कहो या चुदाई, मुझे खूब मजे आ रहे थे.
अब तो चाचा का लंड छोड़ कर मेरा घर जाने का बिल्कुल मन नहीं था.

दस मिनट चोदने के बाद चाचा उठे, मुझे अपनी गोद में उठा कर उल्टा कर दिया और मेरी चूत चाटने लगे.
उनका लंड मेरे मुँह के सामने था तो मैंने उनका लंड पकड़ा और चूसने लगी.

कुछ पांच मिनट तक चाटने चूसने के बाद उन्होंने मुझे वैसे ही गोद में उठाया और खड़े खड़े चोदने लगे.
मैं उनके गले में हाथ डाले हुई लटकी थी और कमर में टांगें फंसाए हुई थी.

वो मेरी कमर और गांड पकड़ कर मुझे आगे पीछे करके मेरी चूत में अपना लंड घचाघच पेल रहे थे.
उनका लंड मेरी चूत के आखिर तक जा रहा था.

फिर वो बोले- चलो बाहर चलते हैं.
मैंने कहा- चाचा जी, बहुत अंधेरा है.
वो बोले- मैं हूँ ना … तुम क्यों डर रही हो?

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मुझे दोबारा से अपनी गोद में उठाकर चोदते हुए टेंट से बाहर निकल गए.

वो टेंट से लगभग 400 मीटर दूर जाकर बोले- अब तुम यहां जैसी चाहो, जितनी चाहो और जितनी जोर से चाहो, आवाजें निकाल सकती हो.

मैंने खुश होकर उन्हें किस किया.
अब उनके धक्के और जोर से हो रहे थे.

मैं चिल्ला रही थी- आआहह आआह चाचा जी और जोर से साफ करिए.
चाचा ने मुझे अब घोड़ी बनाया और लंड को गांड में घुसा दिया.

मैं चीख पड़ी- आआह्ह … मैं मर गई.
चाचा ने कुछ नहीं सुना, वो धक्के मारने में लगे हुए थे.

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कुछ देर बाद मुझे फिर से मजा आने लगा.
फिर चाचा ने मेरी एक टांग उठाई.
मैं पेड़ पकड़कर खड़ी हुई और चाचा मुझे चोदने लगे.

कुछ देर बाद उन्होंने मुझे अपनी तरफ घुमाया और मेरे मम्मे पीने लगे और मम्मे पीते हुए ही उन्होंने मुझे उठाया और लंड मेरी चूत में फिर से भर दिया.
वो मुझे बहुत जोर जोर से चोद रहे थे और मैं यही सब चिल्लाने में लगी थी- आआह आह आआह चाचा … आज मेरी चूत की अच्छे से सफाई कर दीजिए. पूरा अन्दर तक पेल दीजिए अपना लंड.

फिर उन्होंने मुझे घुटनों पर बैठने को कहा और अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया.

अब जैसे चाची ब्लोजॉब दे रही थीं, मैंने भी वैसे ही चाचा का लंड मुँह में रख कर जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया.
चाचा ने मेरा मुँह अपनी मलाई से भर दिया और बिल्कुल चाची की तरह मैं उनके लंड रस की एक एक बूंद चूस गई.

चुदाई के बाद हम दोनों कैंप में आ गए.
तीस मिनट बाद चाचा ने मेरी गांड में थूक लगाया और अपना लंड फिर से मेरी गांड में घुसा दिया.

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कुछ देर लेट कर चुदने के बाद मैं उनके ऊपर बैठ गई और अपनी गांड उठा उठा कर चुदवाने लगी.
चाचा को Xxx गर्ल गांड चुदाई में मजा आ रहा था. उन्हें फ्री का सेक्स मिल रहा था. वो एकदम नई चूत का भोग लगा रहे थे जिसका लंड पूजन भी उन्होंने ही किया था.

चाचा ने कैंप में मुझे 5 बार चोदा. मेरी चूत एकदम सूज गई थी.

हम अगले सुबह उठे और फ्रेश होकर ऊटी के नजर देखने निकल पड़े.

मैं रात की चुदाई के बाद बहुत खुश थी.
मुझे लग रहा था कि चूत की सफाई से बढ़िया चीज इस दुनिया में है ही नहीं.

मैं मन में ये सोच रही थी कि चाचा को तो पता भी नहीं होगा सफाई करवाने में मुझे कितना मजा आता है.
वो बेचारे मेरी इतनी फ़िक्र करते हैं कि मेरी सफाई करते रहते हैं ताकि मुझे कुछ हो न जाए और मेरी सूसू में कीड़े न लगें.

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अब ये सब सोचती हूँ तो लगता है मुझसे बड़ा बेवकूफ कोई था ही नहीं.
चुदाई को सफाई समझ कर चाचा जी भोला भाला समझ रही थी. वो मेरी टाइट चूत और गांड के मजे लेने में लगे थे.

खैर … चाचा ने ऐसा चुदाई का चस्का चढ़ाया कि आज भी नहीं उतर पाया है.
चलिए कहानी की तरफ बढ़ते हैं.

हम सब अपनी कैंपिंग और घूमना फिरना करके एक हफ्ते बाद वापस आ गए.

फिर धीरे धीरे गर्मियों की छुट्टियां खत्म हो गईं.
भाई को चाचा घर छोड़ आए और मेरे कपड़े और किताबें वगैरह ले आए.

मेरा एडमिशन चाचा ने शाहजहांपुर में ही करवा दिया.

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अब मुझे दो बात की खुशी थी. एक तो मेरी डांट नहीं पड़ेगी और दूसरा मेरी सफाई चाचा रोज करेंगे.
मैं रोज सुबह स्कूल जाती, दोपहर में लौट कर आती और शाम को चाचा के आ जाने पर उनके लंड से अपनी चूत ठंडी करवाती.

इस तरह से 3 साल बीत गए.
मेरा और चाचा का चुदाई का सिलसिला ऐसे ही चलता रहा.

मुझे पीरियड्स भी आते थे और अब मुझे ये भी पता चल चुका था कि ये सफाई नहीं चुदाई है क्योंकि चाचा ने एक दिन नशे बोल दिया था.

एक दिन की बात है. चाची की मम्मी की तबियत बहुत खराब हो गई तो चाची को अपने मायके जाना था.
उनके बच्चे अभी छोटे ही थे तो वो उनको भी साथ ले जा रही थीं.

चाचा जी चाची को ट्रेन में बिठाने मुझे लेकर गए.

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चाची अपने मायके चली गईं.
हम दोनों बहुत खुश हो गए.
मैं और चाचा अब एकदम फ्रैंक हो चुके थे क्योंकि 3 साल हम दोनों चुदाई कर रहे थे.

मैंने चाचा से वापस आते हुए पूछा- अब तो आपकी हर रात सुहागरात होगी!

चाचा मुस्कुराते हुए मुझे किस करने लगे. क्योंकि हम लोग चाची को छोड़ने आए थे इसलिए जानबूझ कर मैंने स्कर्ट पहनी थी और अन्दर पैंटी भी नहीं पहनी थी ताकि रास्ते में चाचा को गाड़ी में छेड़ सकूं.
चाचा जैसे ही मुझे किस करके हटे, मैंने अपनी स्कर्ट ऊपर की और एक टांग सीट के ऊपर रख कर अपनी चूत अपने हाथ से खोल दी.

चाचा चूत देख कर पागल हो रहे थे वो उनके एक्सप्रेशन से पता चल रहा था.
उन्होंने अपने एक हाथ से मेरी चूत में उंगलियां घुसा दीं और एक्सिलेरेटर पर जोर से पैर दबा दिया.
वो फुल स्पीड में गाड़ी भगा रहे थे.

हम घर पहुंचे, उन्होंने तुरंत दरवाजा बंद करके मुझे किस करना शुरू कर दिया और मेरा स्कर्ट टॉप निकल कर फैंक दिया.
मैंने भी जल्दी जल्दी उनके कपड़े निकाल कर फैंक दिए.

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हम दोनों अब नंगे थे.
वो मेरे मम्मे पीने में लग गए और मेरी गांड जोर जोर से दबा रहे थे.

मैं उनके लंड से खेल रही थी.
फिर उन्होंने मुझे गोद में उठाया और सोफे पर पटक कर मेरी चूत का रस पीने में लग गए.

मैंने कहा- मुझे भी कुछ चाहिए मेरा भी ख्याल रखो.
फिर हम दोनों 69 पोजीशन में आ गए.

चाचा मेरी चूत चाटने में लगे थे जिसे उन्होंने अपनी उंगलियों सी पूरी फैला रखी थी और मैं उनका लंड चूसने में लगी थी.

दस मिनट चूसने चाटने के बाद उन्होंने मेरी चूत में अपना लंड डाला और घर में कोई न होने की वजह से मैं जोर से ‘आआह आआह और जोर से और जोर कसके चोदो …’ चिल्लाने में लगी थी.

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चाचा फुल स्पीड में मुझे चोदने में लगे थे.

फिर वो 10 मिनट बाद उठे और अपना लंड मेरे मुँह में अन्दर तक घुसा दिया.
अब मैं लंड चूसने में एक्सपर्ट हो गई थी, चाची की तरह अब मैं चाचा का लंड आखिरी इंच तक अपने मुँह में घुसा लेती थी.
चाचा को मजा आ जाता था.

मैंने इतना डीप ब्लोजॉब दिया कि उनका पूरा लंड अपने थूक से भिगो दिया.
फिर उन्होंने कुशन मेरी गांड के नीचे लगाया और मेरी गांड के छेद पर थूक लगाया और लंड एक झटके में मेरी गांड में पूरा घुसा दिया.

पिछले 3 साल में मैंने लंड अपनी गांड में इतनी बार लिया था कि मेरी चूत से ढीली मेरी गांड हो गई थी.
चाचा पीरियड में मेरी गांड ही मारते थे और बाकी टाइम तो मैं खुद ही लंड गांड में डाल लेती थी.

अब चाचा मेरी गांड मारने में लगे हुए थे, एक हाथ से चूत में उंगलियां और दूसरे से मम्मे मसलने में लगे थे.
चुदाई का ये सेशन खत्म होने के बाद चाचा और मैं फ्रेश होने चले गए.

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फिर वो किसी काम से बाहर चले गए.

शाम को मैं खाना बनाने लगी.
मैंने चाची नाइट गाउन पहना और ब्रा पैंटी की तो जरूरत वैसे भी नहीं थी.

आधा खाना बन चुका था, तब तक चाचा आ गए.
वो सीधे किचन में आए और मुझे किस करके पूछने लगे- आज क्या बनाया है?

मैंने बताया- पनीर की सब्जी है ग्रेवी के साथ … और मिक्स वेज.
ये दोनों उनके फेवरेट थे तो खुश होकर बोले- क्या बात है आज तो पार्टी चल रही है.

उन्होंने मेरा गाउन उठाया और मेरी गांड में अपनी दो उंगली डाल कर ऊपर उठाने लगे, जिससे मेरी गांड का छेद बिल्कुल खुला जा रहा था.

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मैंने कहा- पार्टी तो आपकी भी चल रही है, मेरी चूत और गांड से हाथ ही कहां हट रहा है आपका?

मैं ये बोल रही थी और वो मेरी गांड में उंगलियां अन्दर बाहर करने में लगे हुए थे.
मैं रोटियां बना रही थी.

मैंने उनसे कहा- देखें तो लंड बाबू को … रात भर टिक पाएंगे कि नहीं.
चाचा ने सेक्स की टैबलेट निकाल कर किचन टॉप पर रख दी और अपनी पैंट खोल कर लंड बाहर निकाल दिया.

मैंने लंड देख कर कहा- हां, अब तो लग रहा है कि आज पार्टी कुछ अच्छे से ही होगी.
चाचा नीचे झुके और मुझे आगे की तरफ झुका कर मेरी गांड चाटने लगे.

एक मिनट बाद वो खड़े हुए और लंड मेरी गांड में घुसा दिया.
मैं रोटी बना रही थी और वो मुझे चोदने में लगे थे.

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इससे अच्छा खाना क्या ही बन सकता था.
मेरी रोटियां बन गईं तो मैंने चाचा लंड गांड से निकाल कर अपनी चूत में डाल लिया और चाचा को किस करने लगी.

कुछ 15 मिनट बाद मैं उनका सारा लंड रस पी गई.

फिर हम दोनों ने खाना खाया और मैं चाचा के रूम में चली गई.

चाचा नीचे ही थे क्योंकि वो दारू लाना भूल गए थे तो उन्हें जाना था.
वो दारू लेकर वापस आए, घर लॉक किया और रूम में आ गए.

मैं उनका इंतजार कर रही थी. मैं उनके बेड पर लॉन्जरी पहने लेटी हुई थी, उस लॉन्जरी से मेरी चूत भी बाहर थी और मम्मे भी, बस नाम के कपड़े थे, थी मैं पूरी नंगी ही.

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चाचा मेरा पास खड़े होकर पैग बनाने लगे.
मैं उन्हें नंगा कर रही थी.

चाचा ने एक पैग अपना बनाया और एक मेरे लिए भी क्योंकि मैं चाची से छुप कर कभी कभी चाचा के साथ पैग मार लेती थी.

हम दोनों ने एक एक पैग मारा. फिर चाचा मेरी चूत से खेलने लगे और मैं उनके लंड से.

हम दोनों ने 3-3 पैग ले लिए. इसके बाद मुझे नशा होने लगा और चाचा को भी मस्ती चढ़ने लगी.
चाचा मेरी चूत में घपाघप उंगलियां घुसा रहे थे, इस वजह से चूत पूरी गीली हो चुकी थी.

वो मेरी चूत से उंगलियां निकाल कर मेरे मुँह में रख देते और फिर से चूत रगड़ने लगते.
फिर शुरू हुआ हमारा चुदाई का कार्यक्रम. हम दोनों रात भर नहीं सोए.

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चाचा ने गोली खाकर मुझे कई बार झाड़ कर चोदा.

फिर अगले दिन दोपहर में हम दोनों उठे, नहा धो कर खाना खाया.
अगले 4 दिन दिन तक ऐसे ही दिन रात चुदाई चलती रही.

फिर चाची आ गईं.
चाची के आ जाने के बाद भी हम दोनों का 4 दिन चुदाई का चस्का उतर नहीं रहा था.

मैंने चाचा से कहा- मैं घर में ज्यादातर छोटी वाली स्कर्ट पहना करूंगी और आप अपना हाफ वाला लोअर पहना करना या फिर सिर्फ टॉवल.
हमारी Xxx फॅमिली में खुली चुदाई की कहानी सैट हो गई.

जब हम पहली बार ऐसे करने जा रहे थे, तो ब्रैजर मूवी की कहानी को तरह लग रहा था.
चाची अपने पार्लर से वापस आतीं, तो वो अपने कमरे में फ्रेश होने और चेंज करने चली जातीं, उसी समय चाचा मेरी स्कर्ट उठाते और टॉवल से अपना लंड निकाल के शुरू हो जाते.

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जैसे ही चाची की पायल की आवाज आती, चाचा का लंड टॉवल के अन्दर और मेरी स्कर्ट नीचे हो जाती.
हम दोनों को ऐसे करने में बहुत मजा आने लगा.

चाची फ्रेश होने के बाद चाय पीती थीं और टीवी पर न्यूज देखती थीं.
उस वक्त चाची जैसे ही ड्राइंग रूम में टीवी ऑन करती थीं जो कि किचन से थोड़ा राइट में था सामने की तरफ़, मैं चाय बनाने किचन में आ जाती, चाचा पीछे से आ जाते.

और फिर वही खेल शुरू हो जाता.
कभी वो स्कर्ट उठा डायरेक्ट शुरू जाते, तो जमीन में बैठ कर मेरी टांगों में घुसकर मेरी चूत चाटने लगते.

चाची को चाय देने के बाद मैं उन्हें पढ़ाई का बोलकर रूम में चली जाती.
चाचा अपना काम बताकर अपने रूम में जाने का बहाना कर देते.

फिर आधी सीढ़ियां चढ़ने के बाद दूसरी तरफ की सीढ़ियां जहां से शुरू होती थीं, वहीं पर चाचा अपने नाग देवता को मेरी गहरी गुफा में भेज देते.
रोज चुदाई ऐसे ही होती थी.

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दोस्तो, चाचा के लंड से चुदने में मेरा मन कभी भी नहीं अघाता था. बस ऐसा लगता था कि हर वक्त अपने चाचा का लंड अपनी चूत या गांड में लिए ही घूमती रहूँ. मुझे कभी भी ऐसा नहीं लगा कि दुनिया में चाचा के अलावा और भी मर्द हैं और उनके पास भी लंड हैं.

ये तो मुझे अब जाकर मालूम पड़ा है कि दुनिया में लंड के कितने आकार प्रकार होते हैं और अलग अलग लंड से चुदाई का क्या मजा आता है.

चाची के आने बाद उनके बच्चे कभी अपने रूम से ही नहीं निकलते थे.
रात को मैं चाचा को बोल देती थी कि वो अपना रूम बंद न करें.

रोज चाचा चाची को लाइव चुदाई देखने का मजा ही कुछ और था.
फिर चाची के सो जाने के बाद मैं उनके रूम में जाती और चाचा का लंड अपने मुँह में भर लेती.

चाचा मुझे चाची के पास में ही रोज चोदते थे.
अब हमने गेस्ट रूम में जाना बंद कर दिया था क्योंकि चाची के पास में चुदाई करने में एडवेंचर लगता था.

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पर मुझे अपनी ‘आहह उह …’ पर कंट्रोल करना पड़ता था.
कई बार मैंने अपनी चूत चुदवाते हुए चाची के मम्मे भी पिए, चाची को लगता था कि चाचा चूस रहे हैं.

चाची की चूत इतनी चुदने के बाद भी एकदम नई लगती थी, बहुत मेंटेन करके रखती थीं. कभी कोई बाल नहीं और एकदम मुलायम चूत देख कर मुझे अपनी चाची की चूत से मुहब्बत सी हो गई थी.

मैंने चाचा से कहा- मुझे चाची की चूत चाटनी है.
पहले तो चाचा ने मना किया, पर बाद में वो मान गए.

फिर एक दिन मैंने और चाचा ने प्लान बनाया कि चाची को नींद की दवा देकर चाची के मजे लिए जाएं.
क्योंकि मुझे चाची की चूत पीना थी.
ये बात चाचा समझ रहे थे.

अब चाची को कोल्ड ड्रिंक में मिलाकर चाचा ने 3 गोलियां खिला दीं.
मैंने पूछा- कुछ होगा तो नहीं इतनी सारी गोली से?

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चाचा बोले- कुछ नहीं होगा, हां पर 3 गोलियों से अब ये जागेगी नहीं.
चाची 11 बजे सोने चली गईं.

चाचा मेरे रूम में एक बजे आए.

वो पूरे नंगे थे.
मैं भी नंगी लेटी उनका इंतजार कर रही थी.

वो बोले- चलो.
मैं झट से उठी और उनके साथ उनके रूम में चली गई.

चाची रोज की तरह ही नंगी सो रही थीं, शायद चाचा चाची के सोने पहले एक राउंड लगा चुके होंगे.

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मैंने पूछा- एक राउंड लग चुका है क्या?
चाचा बोले- बिना चूत में लिए इसे नींद कहां आती है.

मैं मुस्कुरा दी.
वो बोले- पी लो आज अपनी चाची की चूत, जितनी पीनी है और हो सकता है अन्दर तुम्हें तुम्हारी फेवरेट मलाई भी मिल जाए.

मैं चाची के चेहरे के पास गई, उन्हें थोड़ा हिलाया, पर उन्होंने बिल्कुल रिस्पॉन्स नहीं दिया.
मेरी चाची बला की खूबसूरत हैं. मेरा लड़की होकर उन्हें देखकर मन मचल जाता है … और चुदने में तो वो एक्सपर्ट रांड जैसी हैं.

चाचा उन्हें हर तरह से चोदते हैं, जैसे कि अब वो मुझे हर तरह से चोदते हैं.
मैंने चाची के हाथ पर किस किया और जीभ उनके होंठों पर चलाई.

फिर मैंने चाची के दोनों दूध पकड़ कर धीरे धीरे दबाने शुरू किए और उनके मम्मे पीने लगी.
चाचा पीछे से मेरी चूत चाटने में लगे हुए थे. फिर थोड़ी बाद मैं बेड पर गई और चाची की दोनों टांगें खोल कर उनकी चूत पर अपना मुँह रख दिया.

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आह क्या मादक खुशबू थी. उनकी चूत बहुत अच्छी महक रही थी.

मैं चाची की चूत पूरी फैलाकर चाट रही थी, पीछे से चाचा ने मेरी गांड में लंड डाल दिया था और वो मुझे चोदने में लगे थे.
फिर कुछ देर चूत चाटने के बाद में उनकी चूत में उंगलियां करने लगी.

मेरी उंगलियां पतली होने की वजह से उनकी चूत मेरी 3 उंगलियां आराम से अन्दर बाहर जा रही थीं.
उनकी चूत गीली होने लगी.

मैं फिर मुँह लगा कर उनकी चूत चाटने लगी.

चाचा मेरी गांड के पूरे मजे ले रहे थे, जैसा कि वो हमेशा करते हैं.
फिर थोड़ी देर में ही मेरा मन उनकी चूत चाट कर भर गया.

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मैंने कहा- बस चाचा इतना ही करना था.
वो बोले- पहले तो बड़ी मचल रही थी, अब इतनी जल्दी हो गया.

मैंने कहा- चाची बहुत सुंदर हैं, तो मुझे लगा उनके साथ ये सब करने में बहुत मजा आएगा, पर ज्यादा नहीं आ रहा.
फिर चाचा ने मुझे उठाकर अपनी गोद में बिठाया और चोदने लगे.

मेरे मम्मे अब काफी बड़े हो चुके थे तो चाचा उनसे भी खूब खेलते थे और पीते थे.
उस रात उन्होंने मुझे घर के हर कोने में ले जाकर चोदा. उन्हें ऐसा करना बहुत अच्छा लगता था.

Xxx मस्त सेक्स करते हुए टाइम ऐसे ही बीत रहा था.
फिर गर्मियां खत्म होकर सर्दियां आ गईं. हमारा टॉवल और स्कर्ट वाला फॉर्मूला नहीं चलना था.

अब हम नए नए तरीके ढूंढने लगे.
सर्दियों की वजह से जब भी कोई बैठता था, तो अपने ऊपर कम्बल डाल लेता था.
हम दोनों ने कम्बल का फायदा उठाना शुरू कर दिया.

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टीवी देखते हुए मैं चाचा के पास बैठ जाती थी और उनके पास बैठने से पहले मैं पैंटी निकाल कर सिर्फ लोअर पहन लेती थी.
जैसे ही मैं कम्बल में बैठती थी तो अपना लोअर नीचे खिसका देती थी.

कम्बल में होने की वजह से बाहर से किसी को पता नहीं चलता था कि अन्दर मैं नंगी बैठी हूँ.
चाचा मेरी चूत से आराम से अपने हाथ गर्म करते थे, पर चुदाई के मौके बहुत कम मिल पाते थे.

या तो रात को मैं चुपके चाचा की रजाई में घुस जाती थी … या चाची के पार्लर जाने के बाद चाचा के साथ बाथरूम में घुस कर चूत रगड़वा लेती थी.

रजाई में चुदने में चाचा अपनी सारी मलाई मेरी चूत में ही डाल देते थे.
मैंने भी ध्यान नहीं दिया और चाचा ने भी नहीं, मेरे 4 पीरियड मिस हो गए.

मैंने चाचा को बताया, वो टेस्ट स्ट्रिप लेकर आए. मैंने चैक किया तो मैं प्रेगनेंट हो गई थी.
फिर चाचा किसी लेडी डॉक्टर से कॉन्टैक्ट करके कुछ दवाइयां लेकर आए.

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उस लेडी डॉक्टर ने कहा- आप लड़की को ले आइए, फिर मैं दवा बताती हूँ कि काफी होंगी या नहीं.
उन्होंने कुछ टेस्ट करवाए और बताया कि बच्चा तो गिर जाएगा मगर इस स्टेज तक बच्चा आ चुका है कि कुछ हार्मोनल चेंज आएंगे, तो तैयार रहिएगा.

मैंने कहा- ठीक है.
फिर हम दोनों घर आ गए और डॉक्टर की बात सुनकर रिलीफ भी मिल गया.

मैं अगले दिन से फिर रात में चाचा के लंड के नीचे.
एक हफ्ते बाद जब चाचा मुझे जोरों से चोदने में लगे थे, मेरे मम्मे मसल रहे थे और दबा रहे थे, तो उससे दूध आने लगा.

मैंने पूछा कि चाचा डॉक्टर ने तो कहा था बच्चा गिर जाएगा, फिर दूध क्यों आ रहा है?
वो बोले- डॉक्टर ने बोला था हार्मोनल चेंज आएंगे, शायद उस वजह से हो रहा होगा. कल हम डॉक्टर से पूछ लेंगे.

ये कहकर उन्होंने मम्मे में मुँह लगा दिया और जोर जोर से चूसने लगे.
चाचा मेरे एक मम्मे से दूध पीने में लगे थे और दूसरे को दबा दबा कर उसे निचोड़ रहे थे.

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उसका दूध उनके सीने पे पिचकारी मार रहा था.

अब चाचा को जैसे ही मौका मिलता वो मेरी चूची निकाल कर चूस लेते.
उन्हें मेरा दूध पीने में बहुत मजा आने लगा था.

अब वो मुझे चोदते हुए आधे टाइम तो दूध ही पीते रहते थे और मुझसे कहते- तुम्हारा दूध बहुत मीठा है.
तो मैं उनसे कहती- तो आप सारा दूध पी लीजिए.

ऐसे ही मेरी चूत और गांड की चुदाई चलती रही.

एक दिन मेरी मम्मी मुझसे मिलने आईं.
अक्सर वही आती थीं, पापा नहीं आते थे.

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वो वही सब सवाल पूछती थीं- तुमको अच्छा तो लगता है … यहां कोई दिक्कत तो नहीं, पढ़ाई बढ़ाई सही हो रही है या नहीं. मतलब वही सब फिजूल की बातें.
मैं भी उन्हें बता देती कि सब अच्छा है, आप टेंशन मत लो.

जिस दिन मम्मी उस दिन चाची अपने पार्लर नहीं गई और चाचा तो वैसे भी अपनी मर्जी से जाते थे, वर्ना नहीं जाते थे.
मैं भी स्कूल नहीं गई बाकी बच्चे स्कूल चले गए थे.

घर पर हम चार ही लोग थे.
मम्मी चाची ड्राइंग रूम में बैठ कर बात करने लगीं.

मैं दोनों के लिए चाय बनाने किचन में आ गई.
चाचा किचन में पहले से ही थे क्योंकि उन्हें पता था कि मैं अभी आऊंगी.

उनका हाथ मेरी सलवार में गया और उनकी उंगलियां मेरी गांड के छेद में!

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जब गांड में उंगलियां डाल कर ऊपर की तरफ करते हैं और मेरी गांड की गुफा पूरी खुल जाती है, तो कसम से बड़ा मजा आता है.
वो उंगलियों से मेरी गांड चोद रहे थे, मैंने जल्दी से चाय चढ़ा दी और उनका लोअर नीचे करके उनका लंड मुँह में भर लिया.

बाहर से चाची की आवाज आई- बेटू चाय बन गई क्या?
मैंने लंड मुँह से निकाल कर कहा- बस चाची अभी चढ़ाई है, आप बातें करो. मैं 5 मिनट में लेकर आई.

मैंने जल्दी से चाचा के लंड को डीप थ्रोट ब्लोजॉब दिया ताकि वो पूरा गीला हो जाए और सलवार खोल कर जल्दी से अपनी गांड में लंड डलवा लिया जाए.
चाचा ने लंड गीला होते ही मेरी गांड में ठांस दिया और मौके की नजाकत को देख कर शुरू से ही फुल स्पीड में लग गए.

मैंने अपना कुर्ता ऊपर कर दिया ताकि चाचा जब चूचे दबाएं तो दूध मेरी ब्रा में न लगे.
उन्हें इतनी जल्दी में भी मजे सूझ रहे थे. मेरे मम्मे दबा कर कप में मेरा दूध निकालने लगे.

मैं अपनी गांड आगे पीछे करके उनके लंड के मजे ले रही थी.
जब आधा कप दूध निकल आया तो उन्होंने वो चाय में डाल दिया और मुझसे कान में बोले- तुम्हारी मम्मी और चाची भी आज तुम्हारे दूध का स्वाद चख लेंगी. हम तो तुम्हारी चूत और दूध का स्वाद रोज ही चखते हैं.

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मैंने चाचा से कहा- अच्छा आप जल्दी से मलाई निकालिए, मुझे चाय देने जाना है.

वो बोले- जाओ चाय दे आओ, मैं यही इंतजार कर रहा हूँ. कोई पूछे तो कह देना टॉयलेट जा रहे हैं.
मैं जल्दी से चाय देकर आई लंड वापस अपनी गांड में घुसा लिया और चाचा ने उंगलियां मेरी चूत में डाल दीं. वो जोर जोर से मुझे चोदने लगे.

मुझे उनका चूत में झड़ना बहुत अच्छा लगता है, वो गर्म फीलिंग मजा देती है. इसलिए मैंने गांड से निकाल कर चाचा का लंड अपनी चूत में डाल लिया.
अब वो किचन टॉप पर बिठा कर मुझे चोद रहे थे.

पीछे मम्मी चाची बैठी चाय पी रही थीं.
मैं उनके कान में धीरे धीरे कह रही थी- चाचा जी, जोर से और जोर से चोदो.

वो मेरी चूत में ही झड़ गए.
इससे आगे की Xxx मस्त सेक्स घटनाएँ किसी और दिन!
तब तक के बाय.

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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