रूचि मेरे दोस्त की सेक्सी पत्नी – भाग 1

यह तब की बात है, जब एक दिन मेरा दोस्त अनिल अपनी पत्नी के साथ मेरे घर आया। अनिल और मैं साथ साथ काम करते हैं, अनिल की पत्नी रूचि टीचर है।

उस दिन अनिल ने बताया कि उसका प्रिंटर और यू पी एस खराब हो गया है और रूचि को स्कूल के कुछ पेपर सेट करके स्कूल में जमा करने हैं। इसलिये वो मेरी मदद चाहता था, मेरे पास प्रिंटर और पी सी दोनों हैं।

वह जब शाम को करीब 8:00 बजे आया, तो मैं थोड़ा घबरा गया था कि अचानक दोनों कैसे आ गये।

अनिल को थोड़ा ड्रिंक लेने की आदत है और उस दिन शायद शनिवार था, तो उस समय वह थोड़ा ड्रिंक किये हुये था।

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उससे मैंने कहा – कोई बात नहीं, मैं टाइप कर देता हूँ, तुम बोलती रहो!

तो रूचि ने कहा – कोई बात नहीं, मैं बोल देती हूं। यह मैंने ही बनाया है, तो गल्तियाँ नहीं होंगी!

उसने बताया कि उसको अच्छी टाइपिंग नहीं आती, तो वह टाइप नहीं कर पायेगी।

रूचि मेरे बगल में कुरसी लगाकर बैठ गई, वह इतना नज़दीक थी कि मैं उसकी सांसें महसूस कर सकता था।

कई बार उसके बोडी से मेरी बोडी छू रही थी और उसके लिप्स बिल्कुल मेरे करीब थे। उसके गोरा रंग और स्लिम फिगर मुझे डिस्टर्ब कर रहा था।

अनिल भी पीछे बैठा था और मैं अपने पर किसी तरह कंट्रोल किये हुये था। पर रूचि एकदम नोर्मल थी, उसे शायद ही, मेरे बुरे इरादों का अहसास हो रहा हो।

मैं थोड़ा नर्वस सा भी हो रहा था। मन तो कर रहा था कि उसकी एक पप्पी ले लूं और उसकी थाईस पर हाथ फ़ेरूं। उसके मीडियम साइज़ के टाइट बूब्स पर अपने लिप्स से चूमूं।

पर ये सब उस समय सम्भव नहीं था। इस चक्कर में, मैं एक दो बार टाइपिंग करना ही भूल गया। कभी कभी मैं उसके पूरे बदन को ही देखते रह जाता।

थोड़ी देर में अनिल को फ़िर ड्रिंक की जरूरत महसूस हुई, तो वह बोला – रूचि मैं 10 मिनट में आया।

हम दोनों समझ गये थे कि वह कहाँ जा रहा है। दोनों ही उसकी आदत जानते थे। अनिल के जाने के बाद रूचि और मैं अपना काम करते रहे और मैं बीच बीच में रूचि के पूरे बदन पर नज़र मार लेता। तो रूचि भी मुझे देखकर मुस्करा देती।

फ़िर जब पेपर पूरा हो गया, तो मैंने एक प्रिंट आउट चेकिंग के लिये रूचि को दे दिया। रूचि ने कुछ कोर्रेक्शन के बाद मुझे प्रिंट आउट दिया, तो मैं कोररेक्शन करके दुबारा फ़ेयर प्रिंट आउट निकालकर रूचि को दे दिया।

इस तरह हमारा टाइपिंग का काम पूरा हो गया, तो मैंने रूचि को बोला कि काम तो पूरा हो गया पर अनिल नहीं आया। मैं ऐसा करता हूं थोड़ी चाय बनाता हूं, तब तक शायद अनिल आ जाये फ़िर तीनो चाय पीयेंगे।

रूचि बोली – नहीं चाय में बनाऊँगी, मुझे कल भी तुमको तकलीफ़ देनी है। यह तो एक ही पेपर हुआ है, अभी तीन पेपर और हैं, प्रिंटर और यु पी एस शायद दो-तीन दिन में ठीक होंगे और मुझे पेपर परसों तक जमा करना है।

मैं कुछ कहता इससे पहले ही रूचि किचन में चली गई, मैं मना नहीं कर पाया। उसे किचन में कोई परेशानी नहीं हुई और उसने चाय बनाने को भी रख दी। पाँच मिनट के बाद रूचि दो कप में चाय लेकर आ गई, तो मैंने कहा कि अनिल को भी आने दो।

तो वह बोली – राज, तुम क्या बात कर रहे हो, इस टाइम वह चाय पीने की हालत में होंगे कहाँ। उनके लिये चाय मैंने नहीं बनाई है, उनको जो चाहिये वो उसके लिये ही गये हैं।

मैं तो अनिल के ड्रिंक के बारे में जानता था, पर किसी की बुराई और वह भी उसकी बीवी से करना बड़ी बेवकूफ़ी होती है, आखिर पति परमेश्वर जो होता है।

फ़िर अचानक वह मुझसे बोली, राज तुम भी अब शादी कर ही लो, ऐसे कब तक चलेगा?

तो मैंने कहा हाँ अनिल को देखकर मेरा भी मन करता है और उसके मज़े देखकर कभी जलन भी होती है।

रूचि बोली – क्यों? जलन किस बात की, अरे वह तो तुम्हारी बचोलर लाइफ को अच्छा बताते हैं और कहते है कि वह गलत फ़ंस गये।

मैंने कहा – मैं सच कहूं तो एक बात की जलन बड़ी होती है कि उसकी (अनिल) की बीवी बड़ी खूबसूरत है।

मेरा ऐसा कहने पर रूचि पहले तो शरमा सा गई फ़िर बोली – अच्छा जी तो तुम मुंह में जबान भी रखते हो। मैं तो तुमको बड़ा सीधा साधा समझती थी, पर तुम भी कम नहीं हो बातें बनाने में। दूसरे की हरी हरी दिखती है, मेरी भी कुछ परेशानियाँ हैं।

मैंने कहा – क्यों आपका एक अच्छा परिवार है बच्चा है। ऐसी कोई प्रोब्लम तो नहीं लगती आप दोनों ठीक ठाक कमाते हो।

रूचि मायूस होकर बोली हाँ वह सब तो है पर। बहुत कुछ मिस करती हूं, फ़िर भी ठीक ही है।

अनिल अभी तक भी नहीं आया तो मैंने कहा पता नहीं क्या बात है?

तो रूचि बोली – यही तो बात है अगर ड्रिंक कर लिया, तो इन्हे किसी बात का कोई ध्यान नहीं रहता। अब घर जाकर न ढंग से खायेंगे न कुछ करेंगे और सो जायेंगे, कभी कभी तो रोज़ ही ऐसा होता है। मुझे ऐसे पियक्कड़ से नफ़रत होती है और फ़िर हम दोनों कई दिनो तक एक कमरे में भी अलग अलग रहते हैं। बच्चा तो बस इस बात का सबूत है कि हम पति पत्नि हैं, पर शायद एक पति पत्नि की तरह प्यार किये हमें सालों गुजर गये।

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रूचि एकदम इमोशनल हो गई थी, मैंने उसके हाथ पर हाथ रखकर कहा – सब ठीक हो जायेगा। तुम उसे प्यार से समझाओ वह समझेगा। वह तुमसे डरता तो है, पर शायद अपनी आदत भी नहीं छोड़ पाता और इसका कारण भी शायद उसकी कम आमदनी है, तुम उस से ज्यादा मांगें ना किया करो।

रूचि ने अपना कंधा मेरी गोद में रख दिया और बोली – राजू, तुम्हारी भी तो प्रोब्लम्स होंगी, तो क्या ड्रिंक में ही सब प्रोब्लम का हल है?

वह मेरी गोद में आ गई थी, मैं उसकी बाहों पर हाथ फ़ेरने लगा। वैसे मैं ये कन्सोल करने के लिये कर रहा था, पर मेरा सेक्सी मन पूरा मज़ा ले रहा था।

रूचि को भी मेरा टच पसंद आया था और वह कुछ नहीं बोली। तो मैंने उसे और ऊपर खींच कर अपनी बाहों में ले लिया। रूचि ने कुछ नहीं कहा और अपना सर मेरे कंधों पर रख दिया।

मैं उसे कमर से पकड़ कर सोफ़े की तरफ़ ले गया, तो वह मेरे साथ चल दी।

रूचि दिखने में एकदम पटाखा है, गोरा रंग और चमकदार चिकनी त्वचा, पतली कमर, कद 5’3″ उसका फ़िगर 34-26-36 होगा। रूचि शायद चाहती थी कि मैं उससे खूब बातें करूं और उसकी तारीफ़ करूं पर में ऐसा नहीं कर पाया।

मैं अब तक रूचि के बदन को देखकर मस्त हो चुका था और मैंने सोचा बेटा इससे बढ़िया मौका किसी औरत के बदन से खेलने का मिलना मुश्किल है। इसलिये मैं भी मौके का फ़ायदा उठाना चाहता था।

रूचि को क्या फ़र्क पड़ता, अगर मैं वहाँ नहीं होता तो अनिल तो उसके साथ रोज़ ही ऐसा करता। मैं उमर में बड़ा और उसको अपनी बाहों में लेकर बोला, सब ठीक हो जायेगा तुम चिंता मत करो। बस मस्त रहो, अभी तो मैं तुमको निराश नहीं करुंगा, अनिल से ज्यादा मज़ा दूंगा!

इतना कह कर मैंने उसके लिप्स पर अपने लिप्स रखकर, उसके लिप्स को बंद कर दिया। रूचि सकपका गई और कुछ बोल नहीं पाई, मैंने उसके लिप्स जो बंद कर दिये थे। जैसे ही मैं अपने लिप्स हटाये वह बोली, राज आप बहुत गंदे हो, आप ने ऐसी गंदी बात कैसे सोची।

मैंने कहा, जो अनिल नहीं करता वह मैं करता हूं तो तुम क्यों परेशान हो? मैं कौन हूं भूल जाओ थोड़ी देर के लिये। मैं भी तुम्हारा नज़दीक का हूं और सोचो मैं वह सब तुमको दे रहा हूं, जो तुम अनिल से इस समय चाहती हो, फ़िर मैं ड्रिंक भी नहीं करता।

मेरी इस बात का रूचि पर असर हुआ, वह बोली – पर मुझे डर लग रहा है, मैं उनके साथ कोई गलत तो नहीं कर रही।

मैंने कहा – सोच लो यह तुम्हारे ऊपर है और मैं उसे चूमता और उसके जांघों और बैक पर मसाज भी करता रहा।

रूचि बोली – प्लीज़ जैसा तुम चाहो पर प्लीज़ मेरे कपड़े मत उतारना आप बाहर से जो चाहे कर लो मुझे बड़ी शरम आ रही है।

मेरा तीर सही निशाने पर लग गया था और मैंने रूचि को अपनी बाहों में ले लिया। फ़िर मैंने बिना समय गवा किये हुए रूचि के बूब्स पर उसकी कमीज़ के बाहर से ही हल्का हाथ फ़ेरना शुरु कर दिया।

दोस्तो ये सब कैसे हो रहा था मुझे नहीं मालूम, मैं इतना हिम्मत वाला नहीं हूं। रूचि मेरे छूने से मस्त हो रही थी, इसी बीच मैंने मौका देखकर रूचि की सलवार का नाड़ा चुपके से खोल दिया और उसे पता नहीं चला।

मैं उसकी चिकनी जांघों पर हाथ फ़ेरना चाहता था, पर जैसे मेरा हाथ उसकी पैंटी पर टच हुआ। वह एकदम से नाराज़ होते हुए बोली – राज, नो चीटिंग!

उसने अपनी सलवार एक हाथ से पकड़ ली, पर ऊपर से वह मस्त हो चुकी थी। पर अभी भी मुझसे चुदवाने में वह संकोच कर रही थी। पर मेरे टच से उसे मज़ा आ रहा था। उसकी सलवार अभी तक खुली हुई थी, जिसको उसने एक हाथ से पकड़ रखा था।

जैसे ही मैंने उसे अपनी बाहों में लिया, तो उसके हाथों से उसकी सलवार नीचे सरक गई और मैंने ऊपर से उसकी कमीज़ की ज़िप पीछे से खोल दी और उसने अंदर से काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी। मैं तो उसके गोरे बदन पर काली ब्रा देखकर मस्त हो गया।

वैसे तो मैं तो आराम से मस्ती के साथ मज़ा लेने वाला हूं, पर सोफ़े में कम्फर्टेबल न होने के कारण ऐसा नहीं कर पाया।

मैंने जल्दी से रूचि की कमीज़ उतार दी और अब वह सोफ़े के बीच काली ब्रा और लाल पैंटी में आधी नंगी खड़ी थी।

फ़िर मैंने उसे कमर से पकड़ कर उसकी ब्रा के बाहर से ही उसके बूब्स पर किस करना शुरु कर दिया। वह चिल्लाने वाली थी। पर मैंने उसे डराते हुए कहा की किसी ने सुन लिया, तो तुम्हारी बहुत बे-इज़्ज़ती होगी इसलिये जैसे मैं करता हूं मुझे करने दो।

मैं तो उसकी सारे शरीर पर मस्ती से मसलना, दबाना, रब करना और किस करना जारी रखा।

फ़िर मैंने उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और उसके बूब्स को रब करने लगा।

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अब रूचि मस्ती में आने लगी और उसको मेरा ऐसा करना अच्छा लगने लगा। वो मुझे बीच में प्यार से मना करती और कभी कभी चूमने लगती। पर उसे इस बात का डर लगता था कि कहीं अनिल आ न जाये।

थोड़ी देर के बाद मैंने उसकी पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया, तो वह परेशान हो गयी और उसने जल्दी में अपनी पैंटी अपने आप उतार दी।

वाह, उसकी चूत बड़ी मस्त थी। एकदम गुलाबी और उसके चारों ओर छोटे छोटे से भूरे बाल, मुझे लगता है उसने अपनी चूत एक दो दिन पहले ही साफ़ की थी।

उसकी चूत के बाल एकदम नर्म नर्म थे। शायद उनको कल परसों ही काटा गया था, वह ज्यादा लम्बे भी नहीं थे, ज्यादा से ज्यादा 1-2 मिलीमीटर तक होंगे।

उसकी चूत देखकर तो वह 18-20 साल की सी लगती थी, उसे बूब्स भी एकदम टाइट और छोटे छोटे थे।

पर जहाँ तक चूत की बात थी शायद अनिल तो कभी कभी ही उसकी चूत तक हाथ फ़ेर पाता था। उसकी चूत देखकर लगता नहीं था कि वह अभी तक एक बच्चा निकाल चुकी थी और कई बार एक 6 फुटे मर्द के लंड की मार झेलती थी।

वह एकदम नर्म गुलाबी मस्त गुदगुदी मक्खन जैसी थी।

उसकी ऐसी अनछुई चूत देखकर, मैं अपने आप को रोके नहीं सका और मैं समझ गया कि ऐसी चूत दुबारा चोदने को शायद कब मिल पाये।

फ़िर मैंने उसे सोफ़े पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। मैंने अपने कपड़े नहीं उतारे केवल पैंट की ज़िप खोलकर पैंट नीचे कर दी और अपना लंड बाहर निकाल कर रूचि के ऊपर चढ़ गया।

मेरे लंड के टच से तो रूचि पागल हो गयी और उसकी बोडी के टच से मेरा लंड भी टाइट होता चला गया। मैं अपने लंड से उसकी पूरी बोडी पर रब करने लगा और वह शरमाते हुए चीखने लगी पर वह मस्ती में ये सब कर रही थी।

अचानक मुझे एक मस्ती सूझी और मैंने उसके दोनों बूब्स को दोनों हाथों में लेकर उसके बीच अपना लंड रख दिया।

मेरा लंड देखकर शरमाते हुए रूचि ने अपनी आंखें बंद कर ली। फ़िर मैं उसके दोनों बूब्स के बीच लंड को फ़िट कर के चुदाई वाली स्टाइल में उसके बूब्स से लंड को रगड़ने लगा।

इससे मेरा लंड और रूचि के बूब्स टाइट होते चले गये और दोनों इसे एन्जॉय करने लगे।

रूचि तो मेरे इस एक्शन से मचल उठी थी। वह 27-28 साल की औरत थी, उसके मुकाबले मेरा चुदाई का कोई ज्यादा अनुभव नहीं था। थोड़ी देर में मेरा लंड इतना टाइट हो गया कि उसे हिलाना भी मुश्किल लग रहा था। अब मुझे लगा कि यह रूचि की चूत में जाने के लिये बिल्कुल फ़िट है।

रूचि ने अपनी आंखें अभी भी बंद किये हुई थी। वह मेरा लंड देखकर घबराने का बहाना कर रही थी। जबकि उसका पति पूरे 6′ का था और उसका लंड तो कम से कम 7-8′ का होगा।

फ़िर मैंने बिना देर किये रूचि की दोनों टांगों को फ़ैलाया और एक धक्के के साथ रूचि की चूत को दोनों ओर से फ़ैलाकर, अपना खड़ा लंड उसकी चूत में ठोंक दिया और एक झटके में ही पूरा अंदर तक घुसेड़ दिया।

रूचि की चूत बड़ी टाइट थी, किसी 18 साल की लड़की जितनी टाइट और अनछूई थी। मुझे उसकी चुदाई की शुरुआत में ही इतनी मेहनत करनी पड़ रही थी।

रूचि तो मेरे एक्शन से मस्त होती जा रही थी और उसकी भूख बढ़ती जा रही थी। वह मुझे और अंदर डालने के लिये कह रही थी।

मैंने भी फ़िर और एक धक्का लगाया, तो मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया। रूचि अपनी गांड उठाकर और अपनी तरफ़ से धक्का लगा कर चुदवाने को बेताब थी। इससे मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, पर रूचि के धक्के से मैं पूरा ही हिल रहा था और मेरा लंड उसकी चूत में फ़ंस गया था।

क्योंकि मेरी चुदायी का अनुभव भी ज्यादा नहीं था। पर मैंने अपनी मर्दानगी दिखाने के लिये रूचि को पकड़ लिया और एक जोर का धक्का आगे पीछे लगाया। तो रूचि तो मस्ती में उछल पड़ी और दर्द के बावजूद मुझसे बोली राज, दिस इस वाट आइ वांट अह्ह्ह! बस ऐसे ही आगे पीछे करो, दर्द की परवाह मत करो चाहे मैं कितना चिल्लाऊँ। चाहे फाड़ ही डालो पर यार बड़ा मज़ा आ रहा है, ऐसा पहली बार है जब दर्द में भी मज़ा आ रहा है।

मेरी हालत भी खराब हो गयी थी और मैंने उसका मुंह बंद कर दिया था, जिससे वह चीख न पड़े।

पर लंड के अंदर जाते ही रूचि की मस्ती बढ़ गयी। अब मुझे दर्द हो रहा था पर वह दर्द के साथ मस्ती में मोअन कर रही थी और मुझे धक्का लगाने को कह रही थी।

एक तरफ़ वह चिल्ला रही थी और दूसरी तरफ़ मुझसे धक्का लगाने को कह रही थी – राज जोर से धक्का लगाओ न आअह्हह तेज़, और जूर्रर सीए प्पहफाड़ दो इसे आज मज़ा आ रहा है। दर्द की परवाह नहीं पर धक्का लगाओ जल्दी। राज प्लीज़ तेजी से धक्के लगाओ न म्मम्म। आआह्हह्ह औअर जूओर र्र सीए आउरुर तेज़ म्मम्मम म्ममाज़्ज़ा आअ रहाअ हैई।

मैं लंड की रफ़्तार से रूचि की चूत में पेलने लगा और वह भी चूतड़ उठा उठा कर चुदवा रही थी।

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मैं उसके बूब्स को भी मसलता जाता था, कभी कभी तो जोश में मैंने उसके चूचियों को पूरी ताकत से दबा कर मसल दिया। पर उसके बूब्स उत्तेजना में इतने टाइट हो गये थे कि एकदम पत्थर से लगते थे पर मैंने भी उनको ऐसा मसला कि साली की हालत खराब हो गयी।

एक तो उसकी चूत वैसे ही फ़ट रही थी और ऊपर से मैंने उसके निप्पल भी पूरे जोर से मसल दिये, तो रूचि की मस्ती के साथ दर्द के मारे इतनी जोर से चीख निकली। मैं डर गया कि कहीं पड़ोस में किसी को पता न चल जाये। अगर कोई और वहाँ होता तो वह भी समझ गया होगा कि उसकी जबरदस्त ठुकाई चल रही है।

पर रूचि की ये चुदायी ज्यादा देर न चल सकी, मेरी थकान से हालत खराब होने लगी और मैंने अपनी रफ़्तार थोड़ा कम कर दी।

इसी बीच मेरे लंड में लंड का प्रेसर लेवल से ऊपर पहुंच गया और उसमे सरसराहट सी होने लगी। मैं समझ गया कि अब मैं झड़ने वाला हूं। तो मैंने रूचि के दोनों चूतड़ पकड़ कर अपने लंड को उसकी चूत के अंदर पूरा घुसाकर रोका, तो रूचि भी समझ गयी कि मैं झड़ने वाला हूं।

रूचि बोली – राज प्लीज़ पुल इट आउट जल्दी से!

मैंने वैसा ही किया और जैसे ही मैंने लंड को बाहर निकाला, रूचि ने झपट कर उसे अपने मुंह के अंदर ले लिया।

फ़िर मेरे लंड का सारा माल रूचि के मुंह में चला गया और एक ही झटके में उसने पूरा माल पी लिया और मेरे लंड को ऐसे चूसने लगी, जैसे मैं उसके निप्पल को कर रहा था।

मेरे लंड को पूरी तरह से चूसने और चाटने के बाद रूचि अपने कपड़े पहन लिये। पर जब लास्त में वह अपनी सलवार पहन रही थी, तो एकदम से फ़टाफ़ट अपने कपड़े ठीक करने लगी वह बड़ा घबरायी हुई थी।

मैंने भी जल्दी से अपनी पैंट और कमीज़ ठीक की, मैं समझ गया था कि अब वह एम्बरास फील कर रही थी।

उसने कुछ बोला पर जैसी उसकी हालत थी, उसमे उसका इतनी बेरुखी सा दिखना मुझसे समझ नहीं आया।

रूचि ने मुझे दूर की तरफ़ इशारा सा किया और वह जल्दी से अपनी सलवार का नाड़ा बांधते हुए फ़टाफ़ट अपने कपड़े ठीक करके दूर की तरफ़ चली गयी। तभी बेल बजी और रूचि ने नोर्मल होकर दरवाजा खोल दिया, तो बाहर अनिल था।

अब मेरी समझ में रूचि की घबराहट का मतलब समझ में आया। अनिल कुछ ज्यादा पिये लग रहा था, पर वह बोला देर हो गयी है घर पर सब इंतज़ार कर रहे होंगे।

मैं एक बार अनिल की हालत देखकर उनको घर तक छोड़ना चाहता था। पर में जानता था कि अनिल के लिये ऐसे में ड्राइव करना कोई मुश्किल नहीं था।

रात भर मैं इस घटना के बारे में सोचता रहा कि क्या ये ठीक हुआ? क्या ये गलत तो नहीं? और काफ़ी देर बाद मुझे नींद आयी।

सुबह तक मैं पहले शाम वाली बात भूल गया और फ़िर मुझे रूचि के बदन के बारे में सोचकर उत्तेजना होने लगी और मैं सोचने लगा कि रूचि को अब और चोदने का मौका कैसे मिलेगा?

दिन में ओफ़िस में रूचि का फोन आया, तो मैंने सोचा शायद वह अनिल से बात करना चाहती है। पर वह मुझसे ही बात करने लगी, तो मैंने रूचि को सोरी बोला पहली शाम के लिये।

वह बोली – राज, मैंने कल वाली बात के बारे में सोचा तो ऐसा लगता है कि इसमे हमारी कोई गलती नहीं। तुम इस बारे में परेशान मत होना, मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूं। अरे मुझे तो तुम्हारा शुक्रिया करना चाहिये कि इतने दिनो बाद मुझे सचमुच प्यार और सेक्स का एक साथ अनुभव हुआ।

रूचि कह रही थी – यह एक भूख की तरह है और भूख लगने पर हर कोई जो उसे मिलता हो, उसका ही मज़ा लेता है। मैं तो चाहती हूं कि ये मौका मुझे और मिले! वैसे मैंने फोन इसलिये भी किया है कि आज तुम घर पर ही रहना, मुझे आज तुमसे 3 पेपर टाइप करवाने हैं। अनिल का तो पता नहीं, वह कुछ मदद करें या न पर तुमसे उम्मीद है।

मैं अब काफ़ी नोर्मल हो गया था और मैंने मज़ाक में कहा – एक पेपर की ट्रीट तो तुमको पता ही है, तो तीन के बारे में सोच लो तुमको मुझे तीन ट्रीट देनी होंगी।

रूचि बोली – राज इसे मज़ाक समझो या सीरियसली लो पर मुझे भी तुम्हारी ट्रीट से उतना ही मज़ा आया जितना तुमको। इसलिये ट्रीट के लिये जगह का इंतज़ाम होना चाहिये और मेरे को मौका मिले तो मैं तो और ज्यादा ट्रीट लेना चाहुंगी।

मैंने कहा – आशा है तुम अपने शब्द याद रखोगी।

शेष अगले भाग, में और यह भी जानें कि अगली बार कैसे चुदाई और ट्रीट कैसे मिली।

अगला भाग: रूचि मेरे दोस्त की सेक्सी पत्नी – भाग 2

 

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मैं रिया आपके कमेंट का इंतजार कर रही हूँ, कमेंट में स्टोरी कैसी लगी जरूर बताये।

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