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दोस्त की माँ को गोवा ले जाकर दिन-रात पेला

Roommate mom sex story – Widow aunty sex story – mature indian milf sex story: मैं विक्रम राय, 24 साल का जवान लड़का, मुंबई में अपने रूममेट रोहन के साथ रहता हूँ। दो महीने पहले रोहन की मम्मी आकांक्षा आंटी मुंबई घूमने आई थीं। उनकी उम्र 42-44 के करीब थी, पर दिखने में 32-33 से ज्यादा नहीं लगती थीं। फिगर 34-30-36 का था, एकदम कातिलाना, गोरा रंग, लहराते बाल, भरी हुई गांड और सख्त मम्मे। विधवा थीं, पति को गए पांच साल हो चुके थे, मांग सूनी थी, पर रहन-सहन बिल्कुल मॉडर्न।

पहली नजर में ही मेरा लंड खड़ा हो गया था। आंटी ने भी मेरी पैंट पर उभरी हुई पहाड़ी को देखकर मुस्कुराते हुए अपने बाल संवारे और जानबूझकर मम्मों को हिलाया। उनकी आँखों में वासना साफ झलक रही थी। दो दिन हम तीनों मुंबई घूमे, पर तीसरे दिन रोहन को ऑफिस के काम से बाहर जाना पड़ा। उसने मुझसे कहा, “मम्मी का ख्याल रखना यार।” मुझे भी छुट्टी थी, मैंने हँसते हुए हाँ कहा, पर मन में तो कुछ और ही चल रहा था।

उस दिन हम शॉपिंग गए। आंटी ने ब्रा-पैंटी, नाइटीज और बिकिनी खरीदी। एक ट्रांसपेरेंट बेबी डॉल नाइटी देखकर मुझसे पूछा, “कैसी लग रही है?” मैंने कहा, “आंटी, आप इसमें तो किसी हॉट मॉडल से कम नहीं लगेंगी।” वो शरमाईं, फिर बोलीं, “अभी तो रोहन नहीं है, दो दिन अपनी मर्जी से जी लूँ?” मैंने हँसकर कहा, “बिल्कुल आंटी, मुझे अपना दोस्त समझो, जो मन करे करो, मैं साथ हूँ।” वो इठलाकर बोलीं, “समझ जाओगे तुम।”

घर आकर आंटी ने पहले टाइट जीन्स-टॉप पहना, गांड और बूब्स एकदम उभरे हुए। फिर गुलाबी बेबी डॉल नाइटी पहनकर आईं, आधे मम्मे और गांड साफ दिख रहे थे। मेरे सामने आकर बोलीं, “ये सब तुम्हारे लिए ही लिया है विक्रम।” और सीधे मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मैंने उन्हें कमर से पकड़कर खींचा और गहरा किस करने लगा। वो सिसकारीं, “आह्ह्ह… पांच साल से किसी मर्द के स्पर्श को तरस रही हूँ बेटा… आज मुझे अपना बना लो।”

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मैंने उनकी नाइटी ऊपर सरकाई, हॉट लाल ब्रा-पैंटी में वो किसी रंडी से कम नहीं लग रही थीं। ब्रा के हुक खोले, दोनों भारी-भरकम मम्मे बाहर आए, गुलाबी निप्पल एकदम टाइट। मैंने एक मम्मा मुँह में लिया, जोर-जोर से चूसा, दूसरा हाथ से मसलने लगा। आंटी की सिसकारियाँ तेज हो गईं, “उफ्फ्फ विक्रम… आह्ह्ह ह्ह्हीईई… चूसो मेरे दूध… जोर से…” मैंने निप्पल को दाँतों से काटा तो वो चिहुँक उठीं, “आअह्ह्ह्ह… मार डालोगे क्या…”

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फिर मैंने उन्हें बेड पर पटका, खुद नंगा हो गया। मेरा 7 इंच का मोटा लंड देखकर आंटी की आँखें चमक उठीं। वो घुटनों पर बैठ गईं, लंड को हाथ में लेकर प्यार से चूमा, फिर जीभ से चाटने लगीं। मैंने उनके बाल पकड़े और पूरा लंड मुँह में ठूँस दिया। वो ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गों गों गोग की आवाजें निकालते हुए गले तक लेने लगीं। उनका गला फूल गया, आँखों से पानी छूटने लगा, पर वो नहीं रुकीं। मैंने उनके सिर को पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदा, “ले आंटी… पूरा लंड ले… रंडी की तरह चूस…”

फिर मैंने उनकी पैंटी उतारी। चूत एकदम चिकनी, गुलाबी, रस से भरी हुई। मैं नीचे झुका, जीभ से चूत के दाने को रगड़ने लगा। आंटी तड़प उठीं, “आह्ह्ह विक्रम… चाटो… जोर से… ओह्ह्ह्ह ऊईईई… मेरी चूत फाड़ दो…” मैंने दो उँगलियाँ अंदर डालीं, तेजी से अंदर-बाहर करने लगा, साथ में चूत चाटता रहा। वो कमर उछाल-उछाल कर चिल्लाने लगीं, “ह्ह्हीईई… आह्ह्ह ह ह ह… बस… मैं झड़ने वाली हूँ…”

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मैं ऊपर आया, लंड को चूत पर रगड़ा। वो बेतहाशा चिल्लाईं, “डालो विक्रम… जल्दी… पांच साल से भूखी हूँ…” मैंने एक जोरदार झटका मारा, पूरा लंड जड़ तक अंदर चला गया। आंटी चीखीं, “आआह्ह्ह्ह मार डाला… धीरे… बहुत मोटा है तेरा…” पर मैंने नहीं सुनी, कमर पकड़कर तेज-तेज ठोकने लगा। चूत से चुप-चुप की आवाजें आने लगीं। वो रोने लगीं पर मजे भी ले रही थीं, “आह्ह्ह… ह्ह्ह… चोदो मुझे… जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…”

फिर मैं चित लेट गया, आंटी को ऊपर बिठाया। वो खुद ही लंड पर बैठीं, पूरा अंदर लेते ही दर्द से चिल्लाईं, “ओह्ह्ह्ह माँ… बहुत गहरा जा रहा है…” पर फिर खुद ही उछलने लगीं, मम्मे हवा में लहराने लगे। मैंने नीचे से ठोकना शुरू किया, “ले रंडी आंटी… घोड़ी बन… चुदाई कर अपनी…” वो पागलों की तरह चिल्ला रही थीं, “हाँ विक्रम… मैं तेरी रंडी हूँ… आह्ह्ह्ह ऊईईई… फाड़ दो…”

15 मिनट बाद वो झड़ने लगीं, चूत से रस की बौछार छूटने लगी। मैंने उन्हें फिर से नीचे लिटाया, दोनों टाँगें कंधों पर रखीं और मिशनरी में जोर-जोर से पेलने लगा। वो बार-बार झड़ रही थीं, “आह्ह्ह मैं गई… फिर गई… बस करो…” मैंने कहा, “अभी नहीं आंटी… माल पीना है क्या?” वो हाँफते हुए बोलीं, “मुँह में डालो…” मैंने लंड निकाला, उनके मुँह में ठूँसा और पूरा माल उनके मुँह, गाल और मम्मों पर गिरा दिया। आंटी ने जीभ से सारा माल चाटकर साफ कर दिया।

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उसके बाद हम नहाने गए। शावर के नीचे मैंने फिर उन्हें गोद में उठाया, दीवार से सटा कर लंड अंदर ठूँसा और उछाल-उछाल कर चोदा। वो चीख रही थीं, “आह्ह्ह्ह विक्रम… यहाँ भी… ओह्ह्ह्ह…” फिर मैंने उनकी गांड पर उंगली फिराई। वो पहले डरीं, “नहीं विक्रम… वो कभी नहीं हुआ…” मैंने धीरे-धीरे उंगली डाली, फिर लंड सटाया। वो दर्द से रोने लगीं, पर मैंने एक झटका मारा, आधा लंड गांड में घुस गया। वो चीखीं, “आआह्ह्ह्ह्ह मार डाला… निकालो…” पर मैंने पीछे से पकड़कर पूरा अंदर ठूँस दिया और गांड मारनी शुरू की। कुछ देर बाद दर्द मजे में बदल गया, वो खुद गांड हिलाने लगीं, “आह्ह्ह… अब मजा आ रहा है… चोदो मेरी गांड भी…” मैंने पूरी ताकत से ठोका और सारा माल उनकी गांड में ही छोड़ दिया।

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दो दिन तक हम लिव-इन कपल की तरह रहे। हर कोने में, हर पोज़ में चुदाई की। रोहन के आने के बाद भी जब भी मौका मिला, हमने चोदना जारी रखा। गोवा, मनाली घूमने गए तो वहाँ भी आंटी ने होटल में घंटों चुदवाई। आज भी कभी-कभी वो मुंबई आती हैं और मेरे लंड की भूख मिटाती हैं।

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