उसकी परेशानी देखते हुए मैंने उसका हाथ छोड़ दिया. थोड़ी देर बाद जब सब लोग सो गए तो वंदिता ने मुझे इशारा किया और मैं झट से उसकी चादर में आ गया. हम दोनों करवट लेकर लेटे हुए थे. मैंने वंदिता को जोरदार हग किया हुआ था. उसका कोमल बदन पहली बार मेरी बांहों में था.
थोड़ी देर उसके बदन से खेलने के बाद मैं उसके होंठों को चूमने लगा. बड़े ही मुलायम और रसीले होंठ थे, एकदम गुलाब के पंखुड़ी के जैसे होंठ थे. वंदिता मेरा पूरा साथ दे रही थी. हम लोग ज़्यादा हलचल बिल्कुल भी नहीं कर रहे थे. हम दोनों के हाथ एक-दूसरे के बदन को पूरी तरह से नापतौल रहे थे.
कुछ देर बाद वंदिता गर्म होने लगी और कामुक सिसकारियां भरने लगी. बुआजी के पास में सोए होने की वजह से वह अपनी सिसकारियों और अपनी साँसों को दबाने की कोशिश करने लगी. लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिल पा रही थी. उसके मुँह से ‘आअहह उम्म्म्म आअहह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आऊहह हहोहह..’ की आवाजें निकल रही थीं.
अब वंदिता मेरे लंड से खेलने लगी और मैं उसकी पैंटी को खोल कर उसकी चूत में उंगली करने लगा. जैसे ही मैंने उसकी चूत को छुआ, तो देखा कि उत्तेजना की वजह से उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी है. मेरी उंगली उसकी चूत में आसानी से जाने लगी. मुझे एहसास हो गया कि वंदिता पहले भी सेक्स कर चुकी है.
जब मैंने इशारे से उससे पूछा तो उसने बाद में बताने की बात कहकर बात को टाल दिया.
मैं वंदिता की चूत में उंगली को तेज़ी से करने लगा. अब वंदिता की सिसकारियां बढ़ती जा रही थीं. वंदिता ने मेरा लंड अपने हाथ से पकड़ कर अपनी चूत पर रखवा लिया. मैं समझ गया कि वंदिता अब लंड लेने के लिए तैयार है.
अब मैंने हल्का सा धक्का दिया और चूत के चिकनी होने की वजह से लंड आसानी से वंदिता की चूत में चला गया.
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वंदिता के मुँह से एक जोरदार ‘आहह..’ निकल गई जैसे की उसे असीम आनन्द मिला हो. वह धीरे-धीरे अपनी गांड को हिलाने लगी. मैं धीरे-धीरे उसकी चूत में लंड को पेलने लगा. वंदिता मस्त होने लगी. चूत के चिकनी होने की वजह से मुझे भी मस्ती ज़्यादा ही आने लगी. हम दोनों के मुँह से ‘आअहह हमम्म्म आहह् म्म्म्म ..’ की आवाजें आने लगीं.
अब वंदिता मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदने की कहने लगी. कुछ देर के बाद मैंने अपने धक्कों की स्पीड को बढ़ा दिया और अपने लंड से वंदिता की प्यारी सी चूत को तेज स्पीड में चोदने लगा.
कुछ देर के बाद हम दोनों का शरीर अकड़ने लगा और हम दोनों का पानी छूट गया. लगभग 20 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों पूरी तरह से पसीने में हो गए थे.
अब हम अपनी साँसों को संभालने में लग गए. वंदिता और मेरी नजरें मिलीं और हम मुस्कुरा दिए. फिर वंदिता ने मेरे गाल पर प्यारा सा चुम्बन किया, बदले में मैंने भी उसे चूम लिया. मैंने अपने मोबाइल में टाइम देखा तो रात के 2 बज रहे थे.
इसके बाद हमने एक और बार चुदाई की. फिर मैं अपने बिस्तर पर आकर सो गया. दो दिन में बुआजी के घर रुका और इन 2 दिनों में मैंने अपनी जिंदगी को बहुत ही खूबसूरत तरीके से जिया.
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वंदिता आज भी मेरी जिंदगी में मेरी प्रेमिका है और इस जनवरी में हमारी रिलेशनशिप को 2 साल पूरे हो जाएँगे. इन 2 सालों में मैंने वंदिता के साथ कई रातें गुलाबी की हैं, लेकिन उस पहली रात का मजा ही कुछ और था.
तो दोस्तो, यह थी मेरे दोस्त रजत की अपनी प्रेमिका की चूत चुदाई की कहानी उसी की जुबानी. मुझे उम्मीद है आप सभी लोगों को कहानी बहुत पसंद आई होगी और आप सभी दोस्त मेरा हौसला बढ़ाते रहेंगे. मुझे आप सभी के comments का बेसब्री से इंतजार रहेगा.
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