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पापा जी का लौड़ा तो मेरे पति से लंबा है

“आप भी तो तैयार हैं।”

मेरे कहते ही उन्होंने फिर मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया। मुझे होंठों पर जलन महसूस होने लगी थी। पता नहीं मेरे होंठों का रस उन्हें कितना अच्छा लग रहा था, बार-बार चूसने लगते थे – एक गहरा, भूखा चूषण।

मैंने उनका लिंग पकड़कर पूरी ताकत से दबाया तो वे उठते हुए बोले, “तुम बताओ तुम्हें कौन सा आसन पसंद है।”

“पहले तो वे (मेरे पति) इसी तरह चित लिटाकर जांघों के बीच बैठते थे, लेकिन अब अक्सर वे चित लेटकर मुझे अपने ऊपर बैठाते हैं। उस तरह थकान जरूर मुझे परेशान करती है लेकिन आनंद बहुत आता है। फिलहाल आपको जो आसन पसंद हो उसी को आजमाइए! मम्मी जी को कौन सा आसन पसंद था, वही बताइए।”

उन्होंने मुझे पेट के बल लिटाकर घुटनों को मोड़ने का निर्देश दिया। घुटनों को मोड़ा तो मेरा पिछला हिस्सा ऊपर उठ गया, जबकि मेरा वक्ष और चेहरा तकिए से चिपका हुआ था। उन्होंने बताया, “इसे धेनु आसन कहते हैं। इस आसन से गर्भ आसानी से ठहर जाता है। तुम्हें पसंद न हो तो चित्त लेट जाओ।”

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“नहीं यही आसन ठीक है, पता तो चले कि इस आसन से कितना आनंद आता है।”

वे मेरे पीछे घुटनों के पास ही बैठे थे। मेरी स्वीकृति मिलते ही वे भी अपने घुटनों पर खड़े हो गए। तब उनका लिंग मेरे गुदाद्वार से आ टकराया – गर्म और कठोर।

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मैं डर गई। तभी उन्होंने हाथ लगाकर लिंग मुंड को योनिद्वार पर पहुंचा दिया, फिर मेरे गुदाद्वार पर अंगुली रखकर पूछा, “इसके मैथुन का आनंद कभी उठाया है?”

मैंने कहा, “बहुत दर्द होता है, एक बार इन्होंने प्रयास किया था, मेरी जान निकलने लगी तो छोड़ दिया।”

“ज्यादा जोश के कारण बेरहमी कर बैठा होगा, वरना गुदा-मैथुन में भी बहुत आनंद प्राप्त होता है। कभी मैं करके दिखाऊंगा, पीड़ा हो तो बताना,” कहकर वे अपना लिंग योनिद्वार में प्रवेश कराने लगे। लिंग मुंड का प्रवेश तो सामान्य ही लगा, लेकिन मुंड प्रवेश के बाद दो पल को वे रुके फिर एक ऐसा तेज झटका दिया कि संपूर्ण लिंग प्रवेश करके अंतड़ियों में चुभने लगा। मैं कराहकर थोड़ा आगे हो गई। तब उन्होंने मेरी कमर पकड़कर वापस ही नहीं बल्कि खुद भी आगे सरक आए, जिससे मुझे तकलीफ होने लगी। उनके लिंग की लंबाई ज्यादा जो थी, वह मेरी योनि की गहराई को छू रहा था, एक गर्म दबाव।

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