मेरे घर के पास एक शर्मा परिवार रहता है। उसमें पति, पत्नी और पत्नी की ननद रहती है। ननद अभी कॉलेज की पढ़ाई कर रही है। उसका यह अंतिम वर्ष है। इसके बाद उसकी शादी हो जाएगी।
जब ननद ने मुझे यह कहानी सुनाई, तो मैंने उसकी यह मस्त कहानी आप सभी के लिए लिखने का सोचा। अब आप पढ़ें उसी की जुबानी चूत चुदाई की कहानी।
भाभी ने मुझसे कहा कि अगले वर्ष मेरा ब्याह हो जाएगा, इसलिए जितना पढ़ाई करना है कर लो। मैंने कुछ नहीं कहा।
एक दिन मैंने भाभी की डायरी देखी। पहले तो मैंने उसे सरसरी निगाह से देखा। बात कुछ मजेदार सी लगी, तो मैं डायरी को चुपचाप अपने कमरे में ले जाकर पढ़ने लगी।
मैंने देखा कि भाभी का संबंध एक लड़के से था, जिसका नाम अरुण लिखा था। भाभी की पहली चुदाई का वर्णन भी इसी डायरी में मिल गया। अब मैं उसे ध्यान से पढ़ने लगी।
उसमें लिखा था कि अरुण मेरे मकान मालिक का बड़ा लड़का था। वह सुंदर नौजवान था। साथ ही अरुण मुझसे कुछ वर्ष छोटा था।
एक बार मैं उसके घर गई तो वह खाट पर लेटकर चादर के अंदर अपना लंड हिला रहा था। कमरे में हल्की धूप थी और चादर उसके कमर के नीचे हिल रही थी। हाथ की रफ्तार से कपड़ा ऊपर-नीचे हो रहा था। मैं खाट के नजदीक जाकर चादर खींच दी। चादर हटते ही अरुण का खड़ा लंड दिखाई देने लगा। गोरा लंड सीधा तना हुआ था, सुपारा गुलाबी और थोड़ा गीला था, और उसकी मुट्ठी अभी भी जड़ के पास रुकी हुई थी।
मैंने कहा, “यह तुम क्या कर रहे हो, बताऊं तुम्हारे माता-पिता को?” वह शर्म के मारे कुछ नहीं कह सका। उसके गाल लाल हो गए, नजर नीचे झुक गई और हाथ चादर की तरफ बढ़ा, पर मैंने चादर छोड़ नहीं दी। मैंने भी वह बात छिपा दी।
जब मैं घर आई तो उसका लंड मेरी नजरों में बार-बार घूमने लगा। गोरा लंबा लंड था, जिसका सुपारा गुलाबी था। वह अपने लौड़े को इतना घोंट चुका था कि वीर्य लंड से बाहर आ चुका था। सफेद गर्म बूंद सुपारे पर चमकी थी और मेरी आंखों से हट नहीं रही थी। बिस्तर पर करवट बदलती रही, पर वह तस्वीर मन से नहीं गई।
मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैंने उसे अपने घर बुलाने का सोच लिया। इसके लिए मैंने अरुण की मां से कहा कि मेरे घर पर कोई नहीं है और मुझे अकेले सोने में डर लगता है। आवाज में हल्का डर मिलाया, ताकि बात सच लगे।
उसकी मां ने कहा, “अरुण को अपने साथ ले जाओ। यह वहीं पढ़ भी लेगा और तुम्हारे घर सो जाएगा।” मैंने उसे सोने के लिए बुला लिया।
मैं तब पच्चीस साल की थी और वह मात्र अठारह साल का था। मैंने उसे खाना खिलाया और खुद खाकर सोने के लिए अपने पलंग पर ही सुला लिया। वह किताब की तरफ देखता रहा, पर नजर बार-बार मेरी तरफ उठ जाती थी।
रात को मैंने देखा कि वह अपना पैंट उतारकर अंडरवियर और बनियान में सोने गया था। उसके अंडरवियर में फूले हुए लंड पर मेरी नजर पड़ गई। कपड़ा आगे से तना हुआ था और सांस के साथ हल्की हलचल हो रही थी।
मैंने उसकी चड्डी निकाल दी। नींद में होने के कारण उसे पता नहीं चला। गर्म लंड हाथ लगते ही मेरी उंगलियां रुक गईं। मैंने अपने कपड़े भी उतार फेंके। नंगे स्तन उसकी जांघ से छू गए। उसके लंड से मैं अपने स्तनों को छुआने लगी। नरम निप्पल सुपारे पर रगड़े तो वह धीरे-धीरे उस दिन जैसा कड़ा हो गया। नसें उभर आईं और लंड मेरी हथेली में धड़कने लगा।
मैं अब उसके पैरों की तरफ मुंह करके लेट गई और उसके लंड को चूसने लगी। जीभ सुपारे पर फेरी, फिर होंठ कसकर जड़ की तरफ ले गई। वह गहरी नींद में था। जैसे ही पूरा लंड मेरे मुंह के अंदर गया, उसके शरीर में हलचल होने लगी। पेट की मांसपेशियां खिंच गईं और एक दबी हुई सिसकी निकली, “आह…”
मैंने और जोर से अंदर चूसा तो लंड गीला हो गया। लार सुपारे से जड़ तक बहने लगी और मुंह में नमकीन स्वाद भर गया। मैंने फिर भी नहीं छोड़ा और लौड़े को चूसती रही। कुछ देर में मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरी चूत को जीभ से चाटने लगा। गर्म जीभ फांक पर ऊपर से नीचे तक फिर रही थी और मेरी कमर अपने आप उठ गई।
मैंने देखा कि वह अरुण ही था। मैं जान गई कि वह सोया नहीं था। उसकी आंखें खुली थीं और सांस तेज चल रही थी। मैंने अपनी चूत उसके मुंह से लगा दी और एक पैर फैला दिया, ताकि वह चूत आसानी से चूस सके। गीली गर्मी उसके होंठों पर चिपक गई।
वह चूत की एक फली को अपने होंठों से दबाते हुए चूसने लगा। चूसने की आवाज कमरे में हल्की गूंज रही थी और मैंने दबी सिसकी छोड़ी, “उउह… अह…” साथ ही उसने अपनी एक उंगली मेरी चूत में डाल दी। उंगली धीरे-धीरे अंदर फिसली, दीवारें भींच गईं और मैं गर्म होती गई।
जैसे-जैसे मैं लंड पी रही थी, वह उंगली डाल-डाल कर मेरी चूत की चुदाई करने लगा। सुपारा मेरे होंठों में धड़क रहा था और उसकी उंगली अंदर-बाहर होकर गीली आवाज कर रही थी। अब मेरी चूत एकदम भीग गई थी। रस उसकी उंगली और मेरे होंठों तक बह आया। मैंने उसे पकड़कर अपने ऊपर ले लिया और उसके लंड को चूत में घुसाने लगी। सुपारा फांक पर रगड़ा, फिर धीरे से अंदर धकेला।
लंड घुसते ही वह ओह करने लगा, “ओहह… आह…” शायद यह उसका पहली बार का मामला था। उसकी कमर कांप गई और हाथ मेरी कमर पर कस गए। मैंने अब उसे अपने बगल में लिटा लिया और खुद लंड के ऊपर चढ़कर चुदाई का आनंद लेने लगी। चूत ने लंड को जड़ तक समेट लिया और मैं हल्की सिसकी के साथ झुक गई, “आह… उम्म…”
मैं जैसे-जैसे लंड पर चूत का भार डालती, वह मुझे नीचे से अपने चूतड़ उठा-उठाकर चोदने लगता। हर ठोकर पर सुपारा अंदर टकराता और दोनों की सांसें एक साथ टूटतीं। कुछ देर बाद मुझे अरुण का वीर्य अपनी चूत के अंदर महसूस होने लगा। गर्म धार अंदर फूटती रही और उसका शरीर पलंग पर कस गया।
मैं और जल्दी-जल्दी चूत को लौड़े के ऊपर-नीचे करने लगी। उसके गर्म माल की गर्मी से मेरा भी पानी झड़ गया। जांघें कांप गईं, चूत भींचकर लंड को दबाती रही और मुंह से टूटी आवाज निकली, “आह… हो गया…” मैं अब शांत हो गई थी।
दोस्तो, मैं अपनी भाभी की डायरी में उनके सेक्स संबंधों की दास्तान पढ़ ही रही थी कि उसी समय भाभी ने मुझे आवाज लगाई। आवाज सुनकर डायरी घुटनों पर रुक गई। मैंने अंत में देखा कि कोई मोबाइल नंबर लिखा था। उसको मैंने नोट कर लिया। अब मैं भाभी के पास चली गई।
मैंने खाली समय पर फोन किया तो वह अरुण का ही नंबर था। घंटी जाते ही उसी की आवाज कान में पड़ी और मैंने बिना कुछ कहे काट दिया। मैंने सोचा, आज तक वह नंबर क्यों रखा हुआ है। क्या अब भी भाभी अरुण से चुदती है।
मैं खोजबीन करने लगी। एक दिन भाभी का मोबाइल खोला तो एक बिना नाम का नंबर फीड था। मैं कॉल हिस्ट्री में गई तो देखा कि भाभी ने उसे दो दिन पहले ही रात के दो बजे फोन किया था। बात लंबी चली थी और स्क्रीन पर वही नंबर बार-बार चमक रहा था।
मैं समझ गई कि ये मुझे जल्दी क्यों भगाना चाहती है। एक दिन मेरे भाई को कंपनी के काम से हफ्ता भर के लिए टूर पर जाना था। वह निकल गए। घर में अब मैं और भाभी ही थीं।
मैंने कहा, “मेरी तबियत ठीक नहीं लग रही है, मुझे मत उठाना, सोने देना।” मैं अपने कमरे में आ गई।
मैंने ध्यान से सुना कि मेरे जाने के कुछ पल बाद भाभी किसी से मोबाइल पर बात कर रही थीं। वह कह रही थीं, “वह हफ्ते भर के लिए गए हैं, आज आ जाओ। ननद की तबियत भी ठीक नहीं है, वह सो रही है।” इतनी बात के बाद उन्होंने मोबाइल बंद कर दिया।
मैंने सोने का बहाना बनाकर लाइट बंद कर दी। अंधेरे में कान दरवाजे पर लगे रहे। ठीक रात बारह बजे भाभी के कमरे से ओह और आह की आवाज सुनाई देने लगी। पलंग की हल्की चरमराहट भी साथ आ रही थी।
मैं चुपचाप उनके कमरे की तरफ गई और छिपकर देखा तो दंग रह गई। वह एक आदमी के साथ पीछे से लंड डलवा रही थीं। वह आदमी उनकी गांड के पीछे खड़े होकर उनकी चूत की चुदाई कर रहा था। हर ठोकर पर भाभी की कमर आगे को झुक जाती और मुंह से टूटी आवाज निकलती, “आह… और जोर…”
भाभी भी मस्त होकर उसका लंड चूत में ले रही थीं। गीली आवाज कमरे में साफ गूंज रही थी। फिर भाभी ने उस आदमी को सोफे पर बैठा दिया। छाती से छाती मिलाते हुए बैठकर उसके लंड के ऊपर चूत रखकर जोर-जोर से चुदने लगीं।
वह आदमी अपने हाथों से भाभी के मम्मों को दबाए जा रहा था। उंगलियां निप्पल पर कसतीं और भाभी की सांस टूटकर निकलती, “उउह… दबाओ…” भाभी भी उस आदमी के मुंह में अपना चूचा देकर पिलाते हुए उसका लंड चूत में लेने लगीं। चूत ऊपर-नीचे होती और सोफे पर दोनों की जांघें टकराती रहतीं।
कुछ देर बाद आदमी पलंग पर लेट गया और भाभी उसके लंड के ऊपर बैठकर खुद को शांत करने की कोशिश करने लगीं। वह आदमी भाभी के चूतड़ों को अपने हाथों से उठाकर नीचे से लंड की ठोकर मारते हुए भाभी की चूत को चोद रहा था। हर ठोकर पर भाभी झुककर कराहतीं, “आह… अंदर तक… आह…”
मैंने देखा कि यह सब देखते हुए मेरी चूत में भी पानी आ गया है। चूत में हाथ जाते ही मेरा माल बाहर आने लगा। उंगली फांक पर फिसली और मैं खुद को उंगली से चोदकर अपनी आग शांत करने लगी। दबी सिसकी होंठों में रह गई, “उम्म… आह…”
उधर कुछ देर बाद वह आदमी भाभी की चुदाई करके कमरे से बाहर आ गया और घर से जाने लगा। कपड़े ठीक करते हुए उसकी चाल गलियारे में सुनाई दी। मैंने उसे देख लिया था कि वह कौन आदमी है।
कौन था वह आदमी, इसकी खोज करके मैं आपको अगले भाग में लिखूंगी। साथ ही क्या मेरी चूत के लिए भी कुछ इंतजाम हो पाया, इसका विवरण भी लिखूंगी।
कहानी का अगला भाग: भाभी को यार से चूत चुदाते देखा-2
Related Posts