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ननद के आशिक से चुद गई बन्नो !

अब मैं अंतरवासना की पक्की पाठक बन चुकी हूँ। जबसे इस वेबसाइट से नाता जोड़ा है, मेरी जवानी की प्यास और बढ़ने लगी है। हर कहानी पढ़ते समय मेरे शरीर में एक अनजानी गर्माहट फैल जाती है। दिल की धड़कन तेज हो जाती है और नीचे की जगह नम होने लगती है। जब लोग अपनी बिस्तर की हरकत हकीकत में अन्तर्वासना पर ले आते हैं तो सोचा, मैं भी अपनी एक ऐसी चुदाई सबके सामने लाऊँ जो मुझे कभी नहीं भूलेगी।

दोस्तों, मैं एक बहुत ही चुदासी औरत हूँ। स्कूल से लेकर कॉलेज के समय तक मैंने बहुत नाम कमाया। लड़कों के साथ मेरे किस्से जुड़ना आम बात थी। कॉलेज के अच्छे से अच्छे लड़के के साथ मेरा नाम जुड़ता रहता था। कम उम्र के उन लड़कों की ताजगी भरी हवस मुझे देखते ही मेरे अंदर आग सुलगा देती थी। उनकी नजरों में छिपी भूख मेरी चुदासी प्रवृत्ति को और उत्तेजित कर देती।

तभी मेरे कॉलेज के किस्से जब घर तक पहुंचने लगे तो माँ ने लड़का ढूंढ़ लिया और मेरी शादी का फैसला ले लिया। मैंने इसका बहुत विरोध किया। माँ को कई खरी खोटी सुनाईं। आखिर उनके ही बनाए गए माहौल में जो देख देख कर बड़ी हुई थी। उन दिनों की आजादी अब याद आकर मन को तरसाती है।

खैर, छोड़ो इस बात को।

आखिर मुझे हां करनी ही पड़ी और मैंने एक लड़के के लिए हां कर दी। शादी करवा के ससुराल आ गई। यहां मेरा ज्यादा वक्त घरेलू काम काज में निकल जाता है। अपनी सारी शौकीनी अब इन कामों में लगने लगी है। टाइट सूट डाल कर लड़कों को बहकाना और फिर उनसे चुदवाना सब कुछ अब पीछे रह गया।

अपनी ननद के साथ मेरी बहुत पटती थी और मैं उसको उसके आशिकों से मिलने में उसकी मदद करती रहती। मेरे पति का लौड़ा इतना बड़ा नहीं था, ऊपर से मेरी रांड ननद सुन्दर-सुन्दर लड़कों से मिलती। उसका एक आशिक उसे आधी रात को मिलने आता था और कभी-कभी उसको चोद भी लेता था। सब मिलना-जुलना मेरे राह से निकलकर जाता था। मैंने जल्दी ससुराल में पकड़ बना ली। मैं किसी से डरती नहीं थी। अब कोई काम-काज किससे कैसे करवाना है, यह जान गई थी।

उसके आशिक ने जिस रात मिलने आना होता, वो मेरे मोबाइल पर ही कॉल करता और पूछ लेता कि आज गीता कहाँ सोयेगी, उसको कहना चौकन्नी रहना।

एक दिन मेरे दिमाग ने पलटी खाई। मैंने सोचा कि अब जब उसका फोन आएगा तो मैं कुछ नया करके देखूंगी। वैसा ही हुआ। शाम को उसकी कॉल आई। उस दिन मेरे पति घर पर नहीं थे। मैंने फोन उठाया और उसे बताते हुए कहा कि आज गीता मेरे कमरे में सोएगी क्योंकि मैं आज सासू माँ के कमरे में सो जाऊंगी। तू आराम से मिलना, पिछली खिड़की खुली होगी।

वो बोला, ठीक है भाभी। मैंने गीता को कुछ नहीं बताया और आराम से अपने कमरे में चली गई। कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और अंदर से कुंडी लगा दी। मैंने हल्की बत्ती भी बंद कर दी। रात के करीब बारह बजे दरवाजे पर हल्की दस्तक हुई। कमरे में अंधेरा था। उसने टॉर्च जलाकर बेड की ओर बढ़ना शुरू किया।

मैंने उस रात सिर्फ एक बारीक सी कुर्ती पहनी थी जो मेरे शरीर से चिपकी हुई थी। वो मेरी चादर में घुस गया। मैं भी तुरंत उसके गर्म शरीर से लिपट गई। उसकी छाती मेरी छाती से सट गई और उसकी तेज सांसों की गर्माहट मेरे गालों पर पड़ने लगी। उसने अपने गर्म और नम होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। पहले तो हल्का सा चुंबन लिया फिर जोर-जोर से चूसने लगा।

मैं गीता की जगह उसकी बाहों में थी। मेरे शरीर में आग सी लग गई। मैं भी गरम होकर उसका साथ देने लगी। मेरी सांसें तेज हो गईं और हल्की-हल्की आहें निकलने लगीं। उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाली और उसे घुमाने लगा। हमारी जीभें एक-दूसरे से उलझ गईं। उसके मुंह का स्वाद मीठा और उत्तेजक था। उसने अपनी मजबूत उंगलियों को मेरी कुर्ती के अंदर डाला और मेरे मम्मों को दबाने शुरू कर दिए।

उसके हाथों की पकड़ इतनी मजबूत थी कि मेरे निप्पल तुरंत सख्त होकर खड़े हो गए। मेरे मम्मे उसकी हथेलियों में भर गए। वह उन्हें धीरे-धीरे मल रहा था और बीच-बीच में निप्पलों को अपनी उंगलियों से दबा रहा था। इससे मेरे पूरे शरीर में झुर्रियां सी दौड़ गईं। मेरी कमर खुद-ब-खुद उसके शरीर की ओर उठने लगी।

वहां से उसे शक हुआ। मेरे मम्मे गीता से कहीं ज्यादा सेक्सी, गोल और भरे हुए थे। उसने टॉर्च मेरे चेहरे पर की।

मैंने आंख मारते हुए कहा, हाय राकेश। और मसल न। भाभी………. आप?? हां मैं। क्यों क्या हुआ??

वो खुशी से पागल हो गया। वाह भाभी। जिसके बारे में सोचते हुए गीता को चोदता हूँ, मुठ मारता हूँ, वो आज मेरे नीचे लेटी है।

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मैंने अपनी कुर्ती उतार फेंकी और उसे नंगा करते हुए उसका मोटा लौड़ा निकाल लिया। हाय, क्या शानदार लौड़ा था उसका। कितना मोटा, लंबा और खड़ा। उसकी नसें फूली हुई थीं और गर्मी से तप रहा था।

वो मेरे मम्मे को चूसने लगा। मैं हाय हाय करने लगी। उसके होंठ मेरे निप्पल को जोर से चूस रहे थे, जिससे पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ रही थी। मैंने भी उसे पीछे लिटाकर उसका लौड़ा मुंह में डाल कर चूसना शुरू किया। मेरी जीभ उसके मोटे सिरे पर घूम रही थी और मैं गहरी सांस लेते हुए जोर से चूस रही थी।

ओह मेरे राजा, चोद मुझे। हाय बहुत दमदार है। कब से तेरा मूसल अपनी चूत में डलवाना चाहती थी।

अभी ले, मेरी कमीनी कुतिया। भाभी, तेरा यह देवर है न तुझे रौंदने के लिए। हाय रानी, तू तो साली गीता से भी ज्यादा बढ़िया माल है। तजुर्बा है, लल्ला जी। हाय…….

उसने मुझे 69 मुद्रा में लाकर मेरी चूत पर अपने तपते होंठ रखे। मैं सी सी सी करने लगी। उसकी गर्म जुबान मेरी फूली हुई चूत को चाटने और अंदर घुसने लगी। उसकी सांसों की गर्माहट और जीभ की चपलता से मेरी कमर अपने आप उठने लगी। बोला, अब चोद दूं। सब जाग जाएंगे।

हट साले, मेरे कमरे में कौन आएगा।

यह कहकर मैंने अपनी टांगें पूरी तरह खोल दीं और उसे बीच में बुलाया।

उसने अपना मोटा मूसल लौड़ा मेरी भीगी चूत पर रखकर एक जोरदार घस्सा मारा। पहले झटके में ही आधा लौड़ा अंदर चला गया और मैं कराह उठी।

हाय और घस्से मार ना कस कस के। हाय साईं, तेरी दीवानी रांड भाभी तुझसे चुदाना चाहती है। कम ओन, फाड़ डाल। हाय। और और और।

वो भी जबरदस्त प्रहार करने लगा और मेरे बालों को नोंचते हुए कहा, चल बहिन की लौड़ी, बन जा घोड़ी। यह ले, यह ले।

मैंने घोड़ी बनकर अपनी गांड ऊपर उठा ली।

उसने तेज तेज धक्के मारे। हर जोरदार घस्से के साथ उसका मोटा लौड़ा मेरी चूत की गहराई तक पहुंच रहा था। मेरी देह हिल रही थी, सांसें फूल गई थीं और मीठी सी कराह निकल रही थी। मैं झड़ गई। मैंने उसे कहा, मैं झड़ गई। हाय।

अरे राकेश, और जोर से चोदो अपनी भाभी की चूत को। फाड़ दो इस प्यासी रांड की बुर को। हाय हाय, कितना मोटा है तेरा लौड़ा, पूरी चूत भर दी है।

उसने लौड़ा बाहर निकाला और थूक लगा कर मेरी गांड में डालते हुए करीब पांच मिनट तक लगातार चुदाई की। ले भाभी, अब तेरी गांड चोदता हूं। कितनी टाइट है तेरी गांड, कस कस के पकड़ मेरी लौड़ी। हाय रानी, तू तो साली गीता से भी ज्यादा चुदने वाली माल है। चुद, मेरी कमीनी भाभी, पूरी रात तेरी चूत और गांड दोनों निचोड़ूंगा। आखिर में सारा गर्म माल मेरी गांड के अंदर छोड़ते हुए वो मुझसे लिपट गया। मैं भी बेल की तरह उसके पसीने से तर बदन से चिपक गई।

ले देवर जी, और चूसो मेरे मम्मे। तेरी भाभी की चूत अभी भी प्यासी है। फिर से डाल दो अपना मूसल। हाय, कितना गर्म है तेरा वीर्य। पूरी गांड भर दी।

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पूरी रात में मैंने उस नौजवान पट्ठे को निचोड़ दिया।

“वो ठहरा था गीता की कभी कभी लेने वाला और मैं थी जन्म जन्म से प्यासी चुदाई की हसीना।”

उसका बुरा हाल हो गया। उसने सोचा नहीं होगा कि सारी रात दम लगाना पड़ेगा।

खैर। अपनी ननद के आशिक से चुद गई आपकी बन्नो।

मेरे प्यारे पाठकों, अब आपके लौड़ों का इंतजार रहेगा कमेंट के जरिये।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।