झड़ने के बाद वह मुझसे कहा, “तुम मजा लेने या देने आए हो..।” आज मैं धन्य हो गया। तुम बहुत अच्छा चोदते हो!
मैंने कहा, “अब मेरी बारी है।”
किसने मना किया है, आओ, वह तुरंत बोली।
मैंने उसको बिस्तर से थोड़ा ऊपर किया और टांगों को बिस्तर के किनारे में फंसाकर चूत में लंबे धक्के देने लगा।
बबीता मचलने लगी।
उसकी बच्चेदानी मेरा हर धक्का महसूस करती थी।
राजा, मैं धीरे-धीरे मर गया।साथ ही, गीली चूत में “फच फच…” की आवाजों से चुदाई मज़ा आने लगी।
घड़ी में अब नौ बज गए थे।
नतीजतन, मैंने धक्कों की गति बढ़ा दी।
मैं और बबीता ने एक साथ अपना स्खलन पूर्ण किया।
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मैं फिर से उसके होंठों को चूसने लगा, और हम दोनों ने फिर से एक पैग लगाया।
उसने इठलाते हुए पूछा, “अभी भी मन नहीं भरा क्या?”
मैंने कहा कि तुम एक बार में मन नहीं भर सकते।
मेरा भी मन नहीं भरा, उसने कहा।
मैंने पूछा: तुम्हारी पत्नी क्यों नहीं लेती?
“उसकी शक्ति खत्म हो चुकी है, तभी बाहर मुँह मारना पड़ रहा है,” उसने जरा उदास स्वर में कहा।
मैंने इस विषय पर अधिक चर्चा नहीं की और उसके दूध को चूमने लगा।
अब कितनी देर में मुझे फारिग करना चाहते हो? उसने पूछा।
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मैंने पूछा कि क्यों इतनी जल्दी हो रही है? पति देव घर पर इंतजार कर रहे हैं क्या?
नहीं, मैं तभी आपके साथ आया हूँ क्योंकि आज वह घर पर नहीं है।

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