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कॉलेज के दिन (भाग-1)

बात उन दिनों की है जब सन्नी ने इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया ही था। बचपन से ही लड़कियों से घुलमिल कर रहने वाला सन्नी अब लड़कियों को कुछ अलग नजर से देखने लगा था। ऊपर से अपने अन्य साथियों से कॉलेज में हो सकने वाली मौज-मस्तियों की कहानियां सुन-सुनकर उसका मन बहुत सी कल्पनाओं से भरा हुआ था।

अंततः वह समय आ चुका था जिसका उसे काफी समय से इंतजार था। उसने फैसला कर लिया था कि अगले चार सालों में वह अपनी सारी कल्पनाएं अंजाम तक पहुंचाकर ही रहेगा। कॉलेज के पहले दिन से ही उसने अपनी क्लास की लड़कियों से घुलना-मिलना शुरू कर दिया था। वह तो बस यह सोच रहा था कि उसकी कल्पनाओं के सच होने की शुरुआत किस लड़की से होने वाली है।

कुछ ही दिनों में उसकी कई लड़कियां दोस्त बन गई थीं। इनमें प्रियंका, सीमा, काजल और सोनल से उसकी काफी अच्छी बनने लगी थी। क्लास में घंटों उनसे बातें करते रहना, बंक मार कर कैंटीन में बैठे रहना, फिर घर जाकर देर रात तक फोन पर बातें करते रहना आम बात हो गई थी। आखिर घर में अपना अलग कमरा होने के भी अलग ही फायदे हैं। लड़कियां तो कॉलेज के हॉस्टल में ही रहती थीं, जहां उन्हें देर रात तक फोन पर लगे रहने में कोई दिक्कत नहीं थी।

सन्नी की गाड़ी सही दिशा में पूरी रफ्तार से दौड़ रही थी। बस एक दिक्कत थी। लड़कियों से बातें करने तक तो सब ठीक था, पर अब इससे आगे कैसे बढ़ना है, यह सन्नी को नहीं पता था। उसने सुन रखा था कि लड़कियां अपनी तारीफ सुनकर बड़ी खुश होती हैं और उस खुशी में वो तारीफ करने वाले को क्या खुशी दे बैठें, इसका तो बस अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

सन्नी ने ठान लिया कि जब भी वह किसी लड़की के साथ अकेले में होता तो उसकी खूबसूरती की तारीफें करनी शुरू कर देता। अकेले में इसलिए ताकि किसी लड़की को ये न लगे कि वह हर लड़की की यूँ ही झूठी तारीफें करता रहता है। कुछ दिनों में उसे महसूस होने लगा कि उसका यह तरीका काम कर रहा है क्योंकि सभी लड़कियां अब उसके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश करतीं, वो भी अकेले में।

खासतौर पर काजल उसमें कुछ ज्यादा ही रुचि लेने लगी थी। वह जब भी कोई नई ड्रेस पहन कर आती तो उससे पूछती कि आज मैं कैसी लग रही हूं और सन्नी हमेशा की तरह उसकी तारीफों के पुल बांध देता। काजल वैसे तो दिखने में ठीक-ठाक ही थी, पर उसकी चूचियां काफी बड़ी-बड़ी थीं। जो भी उसे देखता, उसकी नजर सबसे पहले काजल की चूचियों पर ही जाती।

एक दिन काजल काफी टाइट टी-शर्ट व जीन्स पहन कर आई। सन्नी ने उसे देखा तो देखता ही रह गया। उसमें उसकी गोलाइयां कुछ ज्यादा ही उभर कर आ रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे किसी भी पल उसकी टी-शर्ट उसके बड़े-बड़े स्तनों का दबाव झेलने से मना कर देगी और एकदम से खुलकर उसके स्तनों को अपनी कैद से आजाद कर देगी।

काजल ने भी सन्नी की नजरों में आई चमक को पहचान लिया था और उससे नजरें मिलते ही उसने तुरंत शर्म से नजरें झुका लीं। सन्नी मौका देख कर उसके पास आया और धीरे से उसके कान में बोला- “क्या बात है, आज तो कमाल लग रही हो।” यह सुनते ही काजल के होठों पर मुस्कान आ गई और उसने शर्म से सिर झुका लिया।

रात करीब 11 बजे जब सन्नी अपने कमरे में पहुंचा तो उसने देखा कि काजल की मिस्ड कॉल आई हुई थी। उसने तुरंत काजल को कॉल की।

“हैलो!” सामने से काजल की आवाज आई।

“तुमने कॉल की थी। मैं कमरे में नहीं था, माफ करना उठा नहीं पाया।” सन्नी ने कहा।

काजल- “कोई बात नहीं, मैंने तो वैसे ही कॉल की थी। अपने कमरे में अकेली बैठी बोर हो रही थी तो सोचा थोड़ी देर तुमसे बात कर लूं।”

सन्नी- “अरे, अच्छा किया। वैसे भी मैं तुम्हें कॉल करने ही वाला था। कुछ बात करनी थी।”

काजल- “हां हां, कहो।”

सन्नी- “वो तुम आज वाली ड्रेस में बड़ी अच्छी लग रही थी। मैंने तुम्हें कॉम्प्लिमेंट भी दिया, पर तुम कुछ बोली नहीं। कुछ बुरा लगा क्या?”

काजल- “अरे नहीं, ऐसी कोई बात नहीं। बस वो क्लास में सब होते हैं ना तो इसलिए थोड़ा शरमा गई थी।”

सन्नी- “इसमें शर्माने की क्या बात थी? मैंने तो सिर्फ तारीफ ही की थी।”

काजल- “हां, पर जिस तरह से तुमने मुझे देखा, मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ।”

सन्नी समझ गया था कि काजल को क्या महसूस हो रहा है। उसे लगा कि आज मौका अच्छा है बात को सेक्स की दिशा में मोड़ने के लिए। उसने कहा- “यार ऐसे ना देखता तो और क्या करता? तुम लग ही इतनी सेक्सी रही थी।”

काजल- “क्या? मुझे आज तक किसी लड़के ने इस तरह से नहीं बोला।”

सन्नी- “तो क्या हुआ? जो सच है, वही बोला है। इसमें क्या छिपाने वाली बात है?”

काजल- “अच्छा? पर ये ‘सेक्सी’ लगने का मतलब क्या होता है?”

सन्नी- “तुम्हें इतना भी नहीं पता? सेक्सी लगने का मतलब है जिसे देखते ही प्यार करने का मन करे।”

काजल- “मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा है तुम्हारी बातों से।”

सन्नी- “अच्छा चलो ठीक है, तुम्हें अच्छा नहीं लगता तो कुछ और बात करते हैं।”

काजल- “नहीं, मेरा वो मतलब नहीं था। बस किसी से कहना मत कि हमारे बीच इस तरह की कोई बात हुई है। मुझे और कोई दिक्कत नहीं है।”

सन्नी समझ गया था कि तीर सही निशाने पर लगा है। उसने कहा- “मैं क्यों किसी को बताऊंगा। आखिर तुम मेरी इतनी अच्छी दोस्त जो हो, और दोस्तों के बीच की बात कभी बाहर वालों को नहीं बताते।”

काजल- “हां ये बात तो सही है। अच्छा तो क्या मैं आज तुम्हें सेक्सी लग रही थी?”

सन्नी- “हां यार कसम से। मेरा तो मन कर रहा था कि उसी वक्त तुम्हें अपने आगोश में भर लूं और अपने सभी अरमान पूरे कर लूं।”

काजल पहले तो थोड़ा शर्माई, फिर बाद में हंसते हुए बोली- “और क्या हैं वो अरमान?”

सन्नी- “वो तो मैं तुम्हें समय आने पर ही बताऊंगा, कभी मौका मिला तो।”

काजल- “नहीं, नहीं। अब तो बताना ही पड़ेगा। क्या हैं मेरे लिए तुम्हारे वो अरमान जो पूरे करना चाहते हो?”

सन्नी- “यही कि तुम्हें अपनी बांहों में भर लूं और ढेर सारा प्यार करूं।”

काजल- “कभी मौका मिल भी गया तो कुछ नहीं होने वाला। मुझे ये प्यार-व्यार समझ नहीं आता।”

सन्नी- “कोई बात नहीं, वो सब तो मैं समझा दूंगा। तुम मौका तो दो।”

काजल- “मौका तो पता नहीं कब मिल पाएगा तुम्हें, पर ये प्यार तो तुम मुझे आज सिखा ही दो।”

सन्नी- “वैसे तो तुम सामने होती तो ज्यादा अच्छी तरह सिखा पाता, पर चलो कोशिश करता हूं। पर ध्यान रहे, तुम्हारे जिद करने पर सिखा रहा हूं। बाद में ये मत कहना कि मैंने तुम्हें बिगाड़ दिया।”

काजल- “अच्छा बाबा ठीक है। नहीं कहूंगी, तुम सिखाओ तो सही।”

सन्नी- “चलो ठीक है। कमरे की लाइट बंद करो और आराम से लेट जाओ, फिर शुरू करते हैं।”

काजल सन्नी के कहे अनुसार कमरे की लाइट बंद करके लेट गई और बोली- “हां तो शुरू करो।”

सन्नी- “सबसे पहले मुझे ये बताओ तुम्हें प्यार और सेक्स के बारे में कितना पता है?”

काजल- “कुछ भी तो नहीं। और ये सेक्स कहां से आ गया? बात तो प्यार की चल रही थी ना?”

सन्नी- “वो एक ही बात है। और तुम ज्यादा बनो मत। सच-सच बताओ, कभी फिल्मों में नहीं देखा? प्यार कैसे करते हैं?”

काजल- “हां देखा तो है। पर फिल्मों में कहां कुछ ज्यादा दिखाते हैं?”

सन्नी- “तो जिन फिल्मों में दिखाते हैं, वो फिल्में नहीं देखी क्या?”

काजल- “छी:, कितनी गंदी बातें कर रहे हो आज तुम!”

सन्नी- “मैंने तो पहले ही मना किया था, पर तुम ही नहीं मानी। अच्छा अब नाटक करना बंद करो और सच बताओ, कभी देखी हैं सेक्सी फिल्में?”

काजल- “पहले तो कभी नहीं देखी थी। बस हॉस्टल में आने के बाद ही मेरी रूममेट सीमा ने दिखाई एक दिन।”

सन्नी- “क्या देखा उसमें?”

काजल- “बड़ी ही गंदी फिल्म थी वो। सब बिना कपड़ों के दिखा रखे थे उसमें।”

सन्नी- “अरे पगली, असली प्यार तो होता ही वही है, जो बिना कपड़ों के किया जाता है।”

काजल- “सच? इतना गंदा होता है प्यार?”

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सन्नी- “जब कर लोगी तो कहोगी कि प्यार जैसा अच्छा काम तो दुनिया में दूसरा है ही नहीं। अच्छा, क्या कर रहे थे उसमें लड़का-लड़की नंगे होकर?”

काजल की सांसें अब कुछ तेज होने लगी थीं और सन्नी ने यह भांप लिया था। फिर काजल ने कहा- “उसमें वो लड़का लड़की के साथ चिपका हुआ था और लड़की के साथ कुछ कर रहा था।”

सन्नी- “क्या कर रहा था? जरा खुल कर बताओ ना। ऐसे छुपाओगी तो मैं सिखाऊंगा कैसे?”

काजल- “अच्छा बता रही हूं ना। वो लड़की ने लड़के का वो अपने मुंह में लिया हुआ था और ऐसे चूस रही थी जैसे लड़की को बड़ा अच्छा लग रहा हो।”

सन्नी- “लड़के का ‘वो’ क्या होता है? उसे ‘लंड’ कहते हैं बुद्धू। और क्या-क्या देखा तुमने उसमें?”

काजल- “और फिर लड़के ने अपना वो, मतलब अपना लंड लड़की के आगे घुसा दिया।”

सन्नी- “लड़की के आगे क्या होता है? तुम लड़की हो और तुम्हें उसका नाम तक नहीं पता? क्या है वो जो तुम्हारे आगे है?”

काजल- “पता नहीं, कभी नाम की जरूरत ही नहीं पड़ी। बस इशारों-इशारों में ही सब लड़कियां समझ जाती हैं कि किसके बारे में बात हो रही है।”

सन्नी- “अच्छा चलो कोई बात नहीं, मैं बता देता हूं। उसे ‘चूत’ कहते हैं। और लड़के का लंड जब लड़की की चूत में घुसता है तो दोनों को बड़ा मजा आता है। उसी मजे को प्यार कहते हैं।”

काजल- “क्या सच में इतना मजा आता है? मैंने तो कभी नहीं किया और अभी तो पता नहीं, कब मौका मिलेगा।”

सन्नी- “कोई बात नहीं, अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें उस मजे का थोड़ा सा अनुभव अभी करवा सकता हूं।”

काजल- “सच? वो कैसे?”

सन्नी- “बस मैं तुम्हें जो कहता जाऊं, वो करती जाओ।”

काजल- “ठीक है, बोलो क्या करना है?”

सन्नी- “सबसे पहले तो अपने बदन को कपड़ों की कैद से आजाद कर दो।”

काजल- “मतलब?”

सन्नी- “अरे बुद्धू! मतलब अपने कपड़े उतार दो और बिस्तर पर लेट जाओ, जैसे सचमुच में तुम किसी के साथ सेक्स करने वाली हो।”

काजल- “मुझे थोड़ा अजीब लग रहा है ये सब, पर तुम कहते हो तो ठीक है, उतार देती हूं।”

यह कहकर काजल ने अपना फोन स्पीकर पर करके एक तरफ रख दिया और अपने कपड़े एक-एक करके उतारने शुरू कर दिए। पहले अपना कुर्ता, फिर लोअर उतार कर काजल ने बिस्तर पर एक तरफ रख दिया। फिर उसने अपनी ब्रा के हुक खोले और उसे भी बाकी कपड़ों के साथ ही रख दिया।

जब काजल ने अपनी पैंटी उतारने के लिए उसकी इलास्टिक को हाथ से पकड़ कर नीचे की तरफ खींचा तो उसका हाथ पैंटी के अगले भाग पर लगा। उसने पाया कि उसकी पैंटी उसकी चूत से निकले रस से पूरी तरह भीग चुकी थी। उसने पैंटी को पूरा खींचकर नीचे कर दिया और अपनी टांगों से नीचे की तरफ धकेल दिया।

अब काजल पूरी तरह से निर्वस्त्र हो चुकी थी और उसका बदन ठंडी हवा के एक झोंके से सिहर उठा। फिर उसने अपना फोन उठाया और सन्नी को बताया- “मैंने कपड़े उतार दिए हैं। पर एक दिक्कत हो गई है।”

सन्नी भी अब तक अपने कपड़े उतार कर लेट चुका था और उसके फोन पर आने के इंतजार में अपना लंड सहला रहा था। उसने काजल से पूछा- “क्या दिक्कत हो गई?”

काजल शर्माते हुए बोली- “वो, मेरी पैंटी पूरी तरह से भीग गई है, पता नहीं क्या हुआ एकदम से।”

सन्नी- “चिंता की कोई बात नहीं है। ये तो होता ही है। तुम्हारा शरीर सेक्स करने के लिए तैयार हो रहा है।”

काजल- “मतलब? पैंटी के भीग जाने से शरीर के तैयार होने का क्या मतलब है?”

सन्नी- “मतलब है। तुम्हारी चूत गीली हो रही है ताकि वह अंदर से चिकनी हो जाए और उसमें लंड घुसने में कोई दिक्कत ना हो।”

काजल- “ओह, अच्छा। मैं तो डर ही गई थी क्योंकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। तो क्या अब मेरी चूत तुम्हारे साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो चुकी है?”

सन्नी- “हां, तुम ऐसा कह सकती हो।”

काजल- “अच्छा एक बात बताओ। मेरी चूत जब सेक्स के लिए तैयार होती है तो वह गीली होकर चिकनी हो जाती है। तो क्या तुम्हारा लंड भी मेरी चूत में घुसने के लिए गीला होकर चिकना हो गया है?”

सन्नी- “नहीं, लंड सख्त हो जाता है और उसका आकार भी बड़ा हो जाता है ताकि तुम्हारी चूत में अंदर तक जा सके और तुम्हें पूरा आनन्द आए।”

काजल- “क्या तुमने भी कपड़े उतार दिए हैं?”

सन्नी- “हां, और तुम्हारी चूत की कल्पना करके अपना लंड भी सहला रहा हूं।”

काजल- “क्या तुम्हें अच्छा लग रहा है ऐसा करना?”

सन्नी- “हां। तुम भी मेरे लंड की कल्पना करो और अपनी चूत में अपनी उंगली घुसाओ यह सोचकर कि मैं अपना लंड तुम्हारी चूत में घुसा रहा हूं।”

काजल ने अपनी उंगली अपनी चूत में धीरे-धीरे घुसानी शुरू की। उसे अजीब सा मजा आने लगा। थोड़ी ही देर में उसने अपनी पूरी उंगली चूत में घुसा ली थी और उसकी सांसें तेज हो चुकी थीं।

सन्नी भी फोन पर उसकी वासना भरी सिसकियां सुन रहा था और अपना लंड पकड़ कर तेजी से आगे-पीछे कर रहा था। उसने काजल को और भी मजा दिलाने के मकसद से उसकी वासना भरी कल्पनाओं को हवा देनी शुरू की।

सन्नी ने कहा- “अब तुम कल्पना करो कि मैं तुम्हारे होठों को चूम रहा हूं और चूमते-चूमते तुम्हारी चूचियों को दबा रहा हूं।”

यह सुनते ही काजल की सांसें और भी तेज हो गईं और वो पूरी तरह से गरम हो कर आहें भरने लगी। सन्नी ने उसे और उकसाते हुए कहा- “अब मैं तुम्हारे निप्पल्स को मुंह में लेकर चूस रहा हूं और मेरा लंड तेजी से तुम्हारी चूत में अंदर-बाहर हो रहा है।”

काजल- “आआह्ह्ह, ऐसे तो मैं पागल हो जाऊंगी। कुछ करो प्लीज!!”

सन्नी- “एक काम करो, अपनी चूत में उंगली घुसाने के साथ-साथ अपने चूत के ऊपर वाले दाने को भी रगड़ना शुरू करो।”

काजल ने वैसा ही किया। इससे उसके आनन्द का ठिकाना न रहा। वह जोर-जोर से कामुक सिसकारियां लेने लगी। उसका बिस्तर उसकी चूत से निकल रहे रस से गीला हो चुका था।

दूसरी तरफ सन्नी भी पूरे जोश में था और पूरी गति से हस्तमैथुन कर रहा था। तभी उसे काजल की बड़ी जोर की चीख सुनाई दी- “आआआआह्ह्ह्हहाहाआह्ह्ह!!आह!आह!”

सन्नी समझ गया कि काजल का स्खलन हो गया है। इतना सुनते ही सन्नी के लंड से भी वीर्य की धार छूट पड़ी। उसका इतना वीर्य कभी नहीं निकला था।

काजल की भी सांसें धीरे-धीरे सामान्य हो गईं। कुछ देर तक दोनों में से किसी ने कुछ नहीं कहा। दोनों हाल ही में हुए आनन्दमयी अनुभव से मदहोश हुए पड़े रहे।

थोड़ी देर बाद काजल ने कहा- “मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि किसी काम में इतना मजा भी आ सकता है।”

सन्नी- “अभी तुमने असली काम का मजा लिया ही कहां है? यह तो बस असली आनन्द की एक झलक थी।”

काजल- “सच? इससे ज्यादा मजा भी आ सकता है? क्या हम सचमुच कभी सेक्स करेंगे?”

सन्नी- “क्यों नहीं! जब तुम चाहो, हम तभी सेक्स कर सकते हैं।”

काजल- “ओह, तुम कितने अच्छे हो सन्नी। मुझे कल ही करना है। मुझसे अब इंतजार नहीं होगा।”

सन्नी- “चिंता मत करो। मैं कल ही कुछ व्यवस्था करता हूं ताकि तुम्हें सेक्स का मजा लेने का अवसर कल ही मिल सके।”

तभी काजल को लगा जैसे कमरे में कोई आहट हुई। वह घबरा गई क्योंकि वह तो कमरे में अकेली होने के कारण निश्चिंत होकर निर्वस्त्र हालत में लेटी हुई थी। तभी उसने पाया कि बातों-बातों में वह कमरे का दरवाजा तो ठीक से बंद करना भूल ही गई थी।

उसने एकदम से उठकर चद्दर को अपने बदन पर लपेटा और दरवाजे पर देखने गई तो वहां कोई नहीं था। उसकी जान में जान आई और उसने तुरंत दरवाजा बंद कर दिया और आकर बिस्तर पर लेट गई।

सन्नी ने पूछा- “क्या हुआ?”

काजल- “कुछ नहीं, मुझे लगा दरवाजे पर कोई है। पर शायद हवा के कारण दरवाजा हिलने की आवाज हुई होगी।”

सन्नी- “चलो शुक्र है। तुम्हें दरवाजा पहले ही बंद कर लेना चाहिए था। अच्छा तो कल मिलते हैं और सब ठीक रहा तो कल तुम्हें सेक्स का पहला अनुभव ही जाएगा।”

काजल- “चलो ठीक है। पर ध्यान से, कहीं कॉलेज में हम फंस न जाएं। बेकार में मामला गड़बड़ हो जाएगा।”

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सन्नी- “अरे तुम चिंता मत करो। सब मुझपर छोड़ दो। तुम बस अच्छे से अपनी चूत के बाल साफ करके आना।”

काजल- “उसकी चिंता तुम मत करो। बस जगह का इंतजाम करो, जहां हम बिना किसी चिंता के आराम से सेक्स का आनन्द ले सकें।”

उसके बाद दोनों ने कपड़े पहने और अगले दिन की वासना भरी कल्पनाओं के सागर में गोते लगाते हुए सो गए।

अगले दिन सन्नी अपने दोस्त साधु से मिला और उसे अपने और काजल के हाल ही में शुरू हुए प्रेम-प्रसंग के बारे में विस्तार से बताया और आगे की कार्रवाई को अंजाम देने के लिए जगह का इंतजाम करने को कहा। मगर साधु अपने नाम के मुताबिक सिर्फ उपदेश देने में ही लगा रहा कि किस तरह एक अच्छे इंसान को किसी लड़की का फायदा न उठाते हुए उससे सच्चा प्रेम करना चाहिए।

सन्नी समझ गया कि इसकी बातों पर चला तो पूरी उम्र चूत के दर्शन तक नहीं होंगे और हाथ से ही काम चलाना पड़ेगा। वैसे भी सन्नी के लिए तो सेक्स के बिना प्यार की कल्पना करना ही नामुमकिन था।

अंततः उसने खुद ही काजल के हुस्न का रसास्वादन करने के लिए जगह का इंतजाम किया। थोड़ी छानबीन करने पर पता चला कि कॉलेज के टीचरों के फ्लैटों में से कुछ फ्लैट अभी खाली पड़े हैं। वहां पर एक फ्लैट है, जो खुला रहता है। उसमें कॉलेज के काफी लड़के-लड़कियां रंगरलियां मनाते हैं।

सन्नी ने तुरंत काजल को फ्लैट का नंबर मैसेज किया और खुद भी वहां के लिए चल पड़ा। लेकिन जैसे ही वहां पहुंचा तो उसे बड़ी निराशा हुई। उस फ्लैट पर तो ताला लगा हुआ था। शायद ज्यादा बदनाम हो जाने के कारण सिक्योरिटी गार्ड ने उस फ्लैट पर ताला लगा दिया होगा।

सन्नी वापस चलने के लिए जैसे ही मुड़ा तो उसने देखा कि उसके ठीक सामने वाला फ्लैट खुला पड़ा था। सन्नी को शक हुआ कि कहीं उसे सुनने में गलती तो नहीं हुई? क्या पता यही वह फ्लैट हो।

उसने थोड़ा आगे बढ़कर फ्लैट के अंदर झांका तो अंदर से आवाज आई- “हाय सन्नी! तुम यहां क्या कर रहे हो?” यह तो सीमा की आवाज थी।

सीमा अंदर बैठी लैपटॉप पर कुछ काम कर रही थी। सन्नी ने कहा- “बस ऐसे ही, हमारे एक टीचर का फ्लैट ढूंढ रहा था। कुछ काम था। मैं फ्लैट का नंबर भूल गया।”

“बड़े भुलक्कड़ हो!” सीमा ने कहा। सन्नी ने हंस कर टाल दिया।

बातों-बातों में सीमा ने बताया कि वह उसकी क्लास की एक टीचर का फ्लैट था और सीमा उस टीचर के निर्देशन में किसी प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी। आज उस टीचर को अचानक कहीं जाना पड़ गया तो सीमा को इंतजार करने को कह गया।

वहीं सामने एक सुंदर-सी औरत का फोटो लगा हुआ था, उसकी तरफ इशारा करते हुए सन्नी ने कहा- “तो ये है तुम्हारी टीचर?”

सीमा- “अरे नहीं! ये तो उसकी बीवी है। ये भी टीचर है पर हमें नहीं पढ़ाती।”

फिर थोड़ी देर इधर-उधर की बातें करने के बाद सीमा ने सन्नी से पूछा- “वैसे तुम इस समय कहां घूम रहे हो? तुम्हारी तो क्लास है ना?”

सन्नी- “हां, है तो। पर मैं आज कॉलेज आने में जरा लेट हो गया। रात को देर से सोया था तो सुबह उठ नहीं पाया।”

सीमा- “क्यों? रात को ऐसा क्या कर रहे थे?”

सन्नी को एकदम से इस प्रश्न की उम्मीद नहीं थी। उसने चौंक कर सीमा की ओर देखा तो उसे सीमा के होठों पर एक शरारत भरी मुस्कुराहट दिखाई दी।

फिर उसे लगा कि हो सकता है सीमा वैसे ही उसे छेड़ रही हो। क्योंकि काजल खुद क्यों सीमा को उन दोनों का रात का कारनामा बताएगी और उसके अलावा कोई और इस बारे में जानता ही नहीं था।

सन्नी ने बात को संभालते हुए सीमा को मजाक में कहा- “बस तुम्हारी याद में नींद कहां आती है आजकल? तुम रात भर सपनों में आकर मुझे तंग जो करती रहती हो।”

सीमा- “मैं तंग करती हूं या कोई और? कल रात तो मुझे तुम्हारे सेक्सी सपनों की रानी कोई और ही लगी।”

अब तो सन्नी को यकीन हो गया कि सीमा कुछ न कुछ तो जरूर जानती है। फिर भी उसने अनजान बने रहने में ही भलाई समझी और कहा- “मतलब?”

सीमा- “बस बस, इतने भोले भी मत बनो। मैंने कल रात काजल और तुम्हारे फोन सेक्स की फिल्म का पूरा लुत्फ उठाया।”

सन्नी- “पर काजल तो अकेली थी ना? तुम कहां से???”

सीमा- “मैं अपनी एक दोस्त के कमरे में गई हुई थी। जब वापस आई तो देखा कि कमरे की लाइट बंद है, लेकिन किसी ने गलती से दरवाजा खुला छोड़ दिया था। कमरे के अंदर झांका तो देखा काजल मैडम बिना कुछ पहने अपनी टांगें खोलकर लेटी हुई हैं और उधर से आप उसे ट्रेनिंग दिए जा रहे हैं।”

सन्नी- “पर तुम्हें ये कैसे पता कि फोन पर मैं था?”

सीमा- “फोन स्पीकर पर जो था। तुम्हारी बातें सुनकर तो मैं भी खुद को रोक नहीं पाई और बिना काजल को भनक लगे मैंने भी तुम्हारे फोन सेक्स का मजा ले लिया।”

सन्नी- “तो कमरे में जब काजल को वो आहट सुनाई दी थी, तब वो तुम थी?”

सीमा- “हां। वो मैंने पहले तो हस्तमैथुन करते-करते पता ही नहीं चला कि कब मैंने अपनी शॉर्ट्स उतार दी, पर जब सारा काम कर लिया तो अंधेरे में ढूंढने में बड़ी मुश्किल हुई। बस जल्दबाजी में शॉर्ट्स पहन कर कमरे से बाहर निकली तो दरवाजा जरा जोर से बंद कर दिया।”

सीमा की पूरी बात सुनते-सुनते ही सन्नी के लंड में तनाव आ चुका था। सीमा की बातों का अर्थ था कि जब काजल के साथ सन्नी फोन सेक्स कर रहा था तब सीमा भी अपनी उंगली से अपनी चूत की आग शांत करने में जुटी थी।

सन्नी ने सीमा की तरफ देखा तो उसकी नजर सन्नी की जीन्स में आए उठाव पर ही थी। सन्नी सोच ही रहा था कि अब आगे क्या कहे कि तभी सीमा बोल उठी- “फोन पर तो तुमने मेरे तन-बदन में आग लगा दी, अब इस आग को कब बुझाओगे? कब शांत करोगे मेरी चूत की प्यास को?”

सन्नी ने सीमा की ओर देखा तो उसकी आंखों में हवस साफ झलक रही थी। वह समझ गया कि एक और चूत उसके लंड के लिए तड़प रही है।

सन्नी ने सोचा जब बात यहां तक आ ही गई है तो सीधे-सीधे बात कर लेना ही सही है। उसने सीमा से कहा- “यार मेरा बस चले तो अभी बुझा दूं, पर कोई जगह तो मिले जहां हम अपने अरमान पूरे कर सकें।”

सीमा- “जगह? जहां हम बैठे हैं ये क्या है? मेरा टीचर थोड़ी देर पहले ही गया है। वह कम से कम एक घंटे तक वापस नहीं आने वाला। मौका अच्छा है। फायदा उठा लो।”

सन्नी को तो जैसे मुंहमांगी मुराद मिल गई। एक ही बार में चूत और कमरा- दोनों का इंतजाम हो गया था।

तभी उसके फोन पर काजल की कॉल आने लगी। उसने सोचा पहले जो मिल रहा है उसका स्वाद चख लूं, काजल को फिर कभी चख लूंगा और फोन स्विच ऑफ कर दिया।

उसने सीमा के हाथ से लैपटॉप लेकर एक तरफ रख दिया। सीमा के चेहरे पर बेचैनी दिखाई दे रही थी। सन्नी सीमा के पास आकर उससे एकदम सटकर बैठ गया और उसकी कमर पर धीरे-धीरे हाथ फिराने लगा।

सीमा ने एक गहरी सांस ली और सन्नी की ओर झुकी। सन्नी ने सीमा के होठों पर होंठ रख दिए और धीरे-धीरे उनकी मिठास चूसने लगा। सीमा एक बार तो हिचकिचाई पर फिर सन्नी का साथ देने लगी।

सीमा गरम होती जा रही थी और उसे अपनी जांघों के बीच नमी महसूस होने लगी थी। सन्नी का लंड भी पूरे तनाव में आ चुका था।

उसने अपना हाथ सीमा की कमर पर फिराते हुए उसकी टी-शर्ट के अंदर डाल दिया। उसकी चिकनी कमर को छूते ही जैसे सन्नी को करंट सा लगा। सीमा का बदन बहुत ही कोमल था।

सीमा भी सन्नी के छूने से सिहर उठी और उसकी सांसें तेज हो गईं। सन्नी ने सीमा के होठों को चूसना जारी रखा और अपना हाथ धीरे-धीरे उसकी कमर पर फिराते हुए उसकी ब्रा का हुक खोल दिया।

फिर सन्नी अपना हाथ आगे की तरफ सीमा की चूचियों पर ले आया। उसने सीमा की ब्रा खींचकर उसकी चूचियों से अलग कर दी और उसकी एक चूची पर अपना हाथ रख दिया।

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सीमा के मुंह से छोटी सी सिसकी निकली और उसके निप्पल सख्त हो गए। सन्नी ने उसकी चूची को मसलना जारी रखा और उसके होठों से उसकी गर्दन और फिर उसके कंधे को चूमना शुरू कर दिया।

फिर सन्नी ने सीमा की टी-शर्ट को ऊपर खींचकर निकालना चाहा तो सीमा ने उसे रोका- “एक मिनट! मैं काजल वाली गलती नहीं करना चाहती” कह कर सीमा उठी और उसने दरवाजा अच्छे से बंद कर दिया।

फिर उसने अपनी टी-शर्ट उतार कर बिस्तर पर फेंक दी और सन्नी की गोद में आकर बैठ गई और सन्नी के बालों में हाथ फिराते हुए अपना एक निप्पल सन्नी के मुंह की ओर कर दिया।

सन्नी ने तुरंत उसे मुंह में लिया और चूसने लगा, साथ ही वह सीमा की दूसरी चूची को सहला रहा था। सीमा के निप्पल को चूसते-चूसते सन्नी ने अपनी शर्ट के बटन खोले और उतार दी।

फिर उसने सीमा को धीरे से बिस्तर पर लेटाया और उसकी जीन्स का बटन खोलने लगा। सीमा चुपचाप लेटकर उसे देखती रही।

सन्नी ने बटन खोलकर उसकी जीन्स को नीचे की तरफ खींचा और उतार दिया। सीमा की दूध सी गोरी टांगें देखकर सन्नी की हवस कई गुना बढ़ गई।

उसने सीमा की टांगों को ऊपर से नीचे तक चूमा और सीमा तेज सांसें लेते हुए उसका साथ देती रही। फिर सन्नी ने अपनी जीन्स और अंडरवियर भी उतार फेंके और सीमा के ऊपर लेट गया और उसकी चूचियों को मसलते हुए उसे चूमने लगा।

अब सीमा का उतावलापन भी बढ़ता ही जा रहा था। सीमा धीरे से अपना हाथ नीचे ले गई और सन्नी का लंड कसकर पकड़ लिया। फिर वह उसे मसलने लगी।

सन्नी समझ गया था कि सीमा उसके लंड के लिए तड़प रही है, पर वह अभी उसे थोड़ा और तड़पाने के मूड में था।

सन्नी उठा और सीमा की टांगों के बीच में उसकी पैंटी के ऊपर हाथ फेरने लगा। उसकी पैंटी बुरी तरह से भीग चुकी थी और उसकी चूत का रस उसकी जांघों के पास से नीचे की ओर बहने लगा था।

सन्नी ने धीरे से सीमा की पैंटी उतारनी शुरू की तो उसने पाया कि वह गीली होने के कारण उसकी चूत से चिपक रही थी। सीमा की चूत पर एक भी बाल नहीं था, वो गीली होने की वजह से चमक रही थी।

अब सीमा के बदन पर कोई कपड़ा नहीं था। सन्नी ने कुछ क्षणों तक उसके गोरे बदन को ऊपर से नीचे तक निहारा तो सीमा ने कहा- “बहुत हो गया, प्लीज अब करो ना!”

सन्नी सीमा की तड़प देखकर मुस्कुरा उठा। उसने अपने लंड का ऊपरी हिस्सा सीमा की गीली चूत पर धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया तो सीमा की वासना भरी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज उठीं।

थोड़ी देर बाद सन्नी ने अपना लंड सीमा की चूत के मुहाने पर लगाया और धीरे से जोर लगाया तो उसके लंड का ऊपरी हिस्सा सीमा की चूत में घुस गया।

सीमा को हल्का सा दर्द हुआ, पर वह तो हवस से पागल हुई जा रही थी। उसकी चूत थोड़ी तंग थी इसलिए सन्नी ने धीरे-धीरे आगे बढ़ना ही ठीक समझा।

सीमा के मुंह से “आह आह आआह्ह” की आवाजें आनी शुरू हो गई थीं। सन्नी ने थोड़ा और जोर लगाया और धीरे से धक्का लगाते हुए अपना पूरा लंड सीमा की प्यासी चूत में घुसा दिया।

यह अपने आप में एक अद्भुत अनुभव था क्योंकि सीमा की चूत बहुत ज्यादा गीली हो चुकी थी और अंदर से काफी गरम भी थी।

सन्नी ने धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर करना शुरू किया तो सीमा की चूचियां भी साथ-साथ उछलने लगीं। सीमा को भी बेहद मजा आ रहा था जिसके कारण उसकी चूत से लगातार रस बह रहा था। उसके टीचर का बिस्तर बुरी तरह से भीग जाने वाला था।

सन्नी ने अब झटकों की गति बढ़ा दी थी क्योंकि सीमा की चूत अब तक उसके लंड की आदी हो चुकी थी और बड़ी आराम से लंड अंदर-बाहर हो रहा था। कमरे में सीमा की चूत से आने वाली छप-छप की आवाजें गूंजने लगी थीं।

फिर सन्नी ने सीमा को उसकी चूत का स्वाद चखाने की सोची। उसने अपना लंड बाहर निकाला और आगे होकर सीमा के मुंह के पास कर दिया। पहले तो सीमा ने मना कर दिया पर फिर थोड़ा जोर देकर कहने पर उसने सन्नी का लंड मुंह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।

सन्नी ने अपनी एक उंगली सीमा की चूत में डाल दी और अंगूठे से सीमा की चूत के दाने को मसलने लगा, जिसकी वजह से सीमा के पूरे बदन में आनंद की लहर सी दौड़ गई।

फिर सन्नी ने सीमा के मुंह से अपना लंड निकाला और बिस्तर पर लेट गया। वह चाहता था कि सीमा के साथ हर तरह की पोजीशन में सेक्स करे इसलिए उसने सीमा को अपने ऊपर आने को कहा।

सीमा उठकर सन्नी के ऊपर आ गई और अपने हाथ से उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुंह पर लगा दिया और धीरे से नीचे बैठने लगी जिससे कि सन्नी का लंड उसकी चूत में घुसने लगा।

जब लंड पूरा अंदर चला गया तो सीमा धीरे-धीरे उछलने लगी और उसकी चूत में सन्नी का लंड अंदर-बाहर होने लगा। सीमा के बाल सन्नी के चेहरे पर आ रहे थे।

सीमा के मुंह से “आह आह आआह्ह” की आवाजें आए जा रही थीं और सीमा के उछलने की गति भी तेज होती जा रही थी। सन्नी समझ गया कि ऐसे ही चलता रहा तो जल्दी ही दोनों अपने चरम पर होंगे।

वह अभी थोड़ा और मजा लेने के मूड में था। उसने सीमा को रुकने को कहा तो सीमा अनमने मन से रुक गई और बोली- “सन्नी प्लीज! अब बस भी करो ना। बाकी सब फिर कभी कर लेना, अभी मुझे स्खलित हो जाने दो।”

सन्नी- “बस थोड़ी देर और। अब तुम घोड़ी बन जाओ।”

सीमा तो जल्द से जल्द चरमानन्द पा लेना चाहती थी, इसलिए एक बार कहते ही वह घोड़ी बन गई। सन्नी ने सीमा के पीछे होकर अपना लंड उसकी चूत की सीध में रखा और आगे की ओर झटका लगाया।

सन्नी का पूरा लंड एक ही झटके में सीमा की चूत में जा घुसा। सीमा के मुंह से “सस्स्स्स्स्सी” की आवाज आई और तभी सन्नी ने पूरी गति से झटके लगाने शुरू कर दिए।

सीमा के गदराए नितंबों से सन्नी की जांघें टकरा रही थीं जिससे “टप-टप” की आवाज आने शुरू हो गई थी। सन्नी ने पूरा जोर लगाकर पूरी गति से झटके मारना जारी रखा।

तभी सीमा के मुंह से एक लंबी कामुक चींख निकली “ओओओह्ह्ह्ह्ह्ह्…” और वह स्खलित हो गई। जिस कारण उसकी चूत ने सन्नी के लंड को निचोड़ना शुरू कर दिया।

लंड पर इतना दबाव सन्नी को चरम पर पहुंचाने के लिए काफी था। अचानक उसके लंड से वीर्य की पिचकारी छूटी और सीमा की चूत में भर गई।

सीमा बिस्तर पर निढाल होकर गिर गई और सन्नी भी उसके ऊपर ही लेट गया। दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे और सांसें तेज चल रही थीं।

थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहने के बाद दोनों सामान्य हुए और सन्नी का लंड भी सीमा की चूत से बाहर फिसल आया। कुछ देर एक-दूसरे की बांहों में लेटे रहने के बाद सन्नी ने कहा- “तो दोबारा मौके का फायदा कब उठा रहे हैं हम?”

सीमा मुस्कुरा कर बोली- “बहुत जल्द!”

सन्नी- “आज का अनुभव कैसा रहा।”

सीमा- “शब्दों में बयान करना मुश्किल है। इतना मजा आएगा मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। चलो अब काफी देर हो गई है, मेरे खयाल से हमें चलना चाहिए।”

सन्नी- “हां, ठीक है।” इतना कहकर सन्नी ने सीमा के होंठों को एक बार फिर से चूम लिया।

फिर दोनों ने कपड़े पहने और फ्लैट से बाहर आने लगे तो सीमा ने सन्नी से कहा- “पहले तुम जाओ। मैं पीछे आती हूं। कोई साथ में देखेगा तो शक करेगा।”

सन्नी वापस आने लगा तो रास्ते में उसे हॉस्टल की तरफ से आती हुई प्रियंका मिली, उसने कहा- “अरे सन्नी, तुम कहां से आ रहे हो? वो काजल तुम्हें ढूंढ रही थी।”

सन्नी- “हां, मैं बस काजल के ही पास जा रहा था।” कहकर सन्नी वापस क्लास की ओर चल पड़ा।

वापस आते हुए वह मन में एक ही बात सोच रहा था- “अभी तो काजल भी बाकी है!”

कहानी का अगला भाग: कॉलेज के दिन (भाग-2)

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