बात आज सोनू के कॉलेज में पहले दिन की है। यह अलग बात थी कि कॉलेज खुले हुए लगभग एक महीना बीत चुका था, पर सोनू कुछ अन्य व्यस्तताओं के कारण कॉलेज शुरू होने के बाद भी नहीं आ पाया था।
कहानी का पिछला भाग: कॉलेज के दिन (भाग-1)
वह कॉलेज में गया तो उसे अपनी क्लास का माहौल बड़ा अलग सा लगा। क्लास के बाकी विद्यार्थियों को देखकर ऐसा लग रहा था कि पता नहीं सब कितने दिनों से एक-दूसरे को जानते हैं और सिर्फ सोनू ही उन सबमें अनजान है। खैर, इसका कारण सोनू का देर से कॉलेज आना शुरू करना था। अतः अब सोनू इस बारे में कुछ नहीं कर सकता था।
वह क्लास की सबसे आखिरी सीट पर कुछ अनजान चेहरों के साथ बैठ गया। फिर उसका ध्यान क्लास की लड़कियों की ओर गया तो उसने पाया कि कोई भी लड़की ऐसी बला की खूबसूरत नहीं लग रही थी कि जिसे देखते ही बात करने को जी चाहे। सोनू निराश होकर बैठा रहा।
धीरे-धीरे दिन बीतते गए। सोनू का घर भी कॉलेज से काफी दूर था, जिस कारण उसका आधा समय तो आने-जाने में ही निकल जाता था। कुल मिलाकर कॉलेज में होने के बावजूद भी उसकी जिंदगी में कुछ भी ऐसा नहीं हो रहा था जिसकी उसे पहले उम्मीद थी।
उसे लगता था कॉलेज जाते ही मौज-मस्ती शुरू हो जाएगी और जल्द ही वह कोई अच्छी सी लड़की को अपनी गर्लफ्रेंड बना लेगा। पर अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। उसकी तो किसी लड़की से बातचीत तक शुरू नहीं हुई थी। कॉलेज से ज्यादा अच्छा समय तो उसका घर पर बीतता था।
वह रोज शाम को घर आता और पड़ोस की पूनम भाभी को देख-देखकर उनके हुस्न का मजा लेता रहता। इसके अलावा अनीता आंटी से बात करने में भी उसे बड़ा आनंद आता। वह चाहे कॉलेज से कितना भी थका-हारा आता, पर अनीता आंटी की एक मुस्कान उसे एकदम तरोताजा कर देती।
अनीता आंटी सोनू की किरायेदार थी। उनका बात करने का तरीका और खुशमिजाजी सोनू को प्रफुल्लित कर देती। जब भी सोनू उनसे बातें करता, उसे अपने पहले वाले किरायेदार याद आ जाते।
सोनू के पहले वाले किरायेदार 4 लोगों का एक परिवार था, जिसमें बेबी आंटी, उनके पति, उनका एक बेटा और एक बेटी थी, जिसका नाम था नेहा। नेहा दिखने में ठीक-ठाक थी। उसका रंग सांवला था। पहले दिन से ही सोनू नेहा की टांगों का दीवाना था।
नेहा भी अपनी टांगों का प्रदर्शन करने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी। वह अक्सर स्कर्ट पहनती थी। कई बार तो सोनू को नेहा की स्कर्ट के अंदर का दृश्य भी देखने को मिल जाता था। सोनू को उस समय सेक्स का ज्ञान नहीं था, पर इस तरह के दृश्य उसे एक अजीब सा मजा देते थे।
धीरे-धीरे सोनू नेहा के साथ काफी घुलमिल गया था। उसका ज्यादातर खाली समय नेहा के साथ ही बीतता था। एक बार तो सोनू ने खेल-खेल में नेहा की स्कर्ट ऊपर उठा दी, पर नेहा ने कुछ नहीं कहा। इससे सोनू की हिम्मत थोड़ी बढ़ी और उसने नेहा के साथ थोड़ी और छेड़छाड़ करने की सोची।
एक दिन सोनू जब उसके घर में घुसा तो उसने नेहा को आवाज दी। पर अंदर से कोई जवाब नहीं आया। सोनू को लगा शायद घर में कोई नहीं है। फिर भी उसने एक बार दूसरे कमरे में भी देखने की सोची।
वह दूसरे कमरे में गया तो देखा नेहा कपड़े बदल रही थी। उसने सिर्फ पैंटी पहनी हुई थी और कुर्ता पहनने लगी ही थी कि सोनू आ गया और नेहा घबरा कर एकदम से पलट गई। सोनू सिर्फ उसकी निर्वस्त्र पीठ ही देख पाया था कि नेहा ने उसे बाहर जाने को कहा।
सोनू दूसरे कमरे में आकर इंतजार करने लगा। उसके मन में अभी-अभी हुई घटना के दृश्य घूम रहे थे। थोड़ी देर में नेहा आई तो वो सोनू से नजरें मिलाने में शरमा रही थी। पर थोड़ी देर यहां-वहां की बात करने के बाद वह सामान्य हो गई।
तभी बेबी आंटी, जो कि पड़ोस में किसी के घर गई हुई थी, आ गई। उन्होंने सोनू से हालचाल पूछा और रसोई में जाकर कुछ काम करने लगी। सोनू थोड़ी देर बाद वापस अपने घर आ गया।
अगले दिन सोनू के स्कूल की छुट्टी थी पर नेहा स्कूल चली गई थी। सोनू घर में बैठा बोर हो रहा था कि तभी बेबी आंटी ने उसे आवाज लगाई। सोनू उनके घर गया तो आंटी ने कहा कि उन्हें सोनू से कुछ काम है।
सोनू तो वैसे भी खाली बैठा बोर ही हो रहा था तो सोचा चलो इस बहाने कुछ करने को मिल जाएगा। उसने आंटी से पूछा- “क्या काम है आंटी?”
आंटी- “मुझे एक पार्टी में जाना है। उसके लिए साड़ी पहननी पड़ेगी। पर दिक्कत ये है कि खुद मैं ब्लाउज के हुक बंद नहीं कर पाऊंगी। घर में कोई है नहीं तो सोचा तुमसे करवा लूं।”
सोनू ने कहा- “वैसे तो मैंने कभी ये काम नहीं किया। पर आप बता देंगी कि कैसे करना है तो मैं जरूर कर दूंगा।”
आंटी हंसकर बोली- “ठीक है! मैं सिखा दूंगी। थोड़ी देर रुको, मैं जरा कपड़े बदलना शुरू कर लूं। जब ब्लाउज पहनने लगूंगी तब तुम्हें बुला लूंगी।”
सोनू- “ठीक है आंटी।”
फिर आंटी दूसरे कमरे में जाकर कपड़े बदलने लगी। थोड़ी देर में आंटी ने सोनू को आवाज दी तो सोनू दूसरे कमरे में गया। सोनू ने देखा कि आंटी सिर्फ ब्रा और पेटीकोट पहने खड़ी थी।
सोनू को देखकर आंटी मुस्कुराई और सोनू को पास आने को कहा। सोनू पास गया तो आंटी ने ब्लाउज उठाकर पहन लिया और सोनू को हुक बंद करने का तरीका बताने लगी।
सोनू ने बड़ी आसानी से हुक बंद कर दिए। आंटी ने सोनू का धन्यवाद किया और सोनू वापस अपने घर आ गया। वापस आते ही उसे अपने लंड में तनाव सा महसूस हुआ। पर वह ये नहीं समझ पा रहा था कि ऐसा क्या हुआ।
लेकिन इस घटना के बाद से सोनू की दिलचस्पी नेहा से ज्यादा आंटी में बढ़ गई। वह अब जब भी नेहा से मिलने जाता तो आंटी को निहारता रहता। उस दिन के बाद से बेबी आंटी का व्यवहार भी सोनू के साथ काफी बदल गया था।
वह अब सोनू से काफी बातें करती रहती थी और जब भी सोनू को देखती, उनके चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान आ जाती थी। वह भी अक्सर आंटी को एकदम निर्वस्त्र होकर कपड़े पहनते हुए देखने की कल्पना करता रहता।
लेकिन एक दिन उसकी कल्पनाओं के सच होने की उम्मीद ही खत्म हो गई जब उसे पता चला कि आंटी के पति ने कहीं और घर लेने का फैसला लिया है। असल में अंकल को उसका और नेहा का ज्यादा घुलमिल कर रहना पसंद नहीं था। उन्हें सोनू पर हमेशा शक रहता था।
ऊपर से एक दिन अंकल ने सोनू और बेबी आंटी को हंस-हंसकर बातें करते हुए देख लिया था, जिससे अंकल सिर्फ नेहा ही नहीं, अपनी बीवी को लेकर भी चिंतित रहने लगे। अंततः अंकल ने वहां से जाने का फैसला कर लिया और कुछ ही दिन में बेबी आंटी और उनका परिवार वहां से चले गए।
सोनू को बस एक ही बात का मलाल था कि बेबी आंटी का परिवार कुछ दिन और रुकते तो शायद उसके और आंटी के बीच कुछ और हो पाता, या फिर नेहा की टांगों और पैंटी के अलावा कुछ और दिखाई देता। खैर अब उस बारे में सोनू कुछ नहीं कर सकता था।
अनीता आंटी के परिवार में भी 4 ही लोग थे- पति-पत्नी और उनके 2 बच्चे। उनमें अनीता आंटी सोनू को पहले दिन से ही व्यवहार में काफी पसंद आई। उनकी उम्र कोई 40 साल थी।
उनके पति उसी शहर में एक फैक्टरी में काम करते थे और ज्यादातर उनकी नाइट शिफ्ट ही होती थी, जिस कारण दिन में अक्सर वो घर में ही रहते थे। अनीता आंटी काफी खुशमिजाज और मित्रतापूर्ण प्रवृत्ति वाली औरत थी।
उनके साथ सोनू को बात करने में कभी हिचकिचाहट नहीं हुई, अन्यथा सोनू जल्दी से किसी भी अनजान व्यक्ति से घुलता-मिलता नहीं था। पर अनीता आंटी की तो बात ही अलग थी।
सोनू और अनीता आंटी जब भी खाली होते तो अक्सर अपनी रोजमर्रा की बातें एक-दूसरे को बताते। अनीता आंटी को सोनू की कॉलेज की बातें सुनने में बड़ा आनंद आता था। वह सोनू से अक्सर कहती थी कि जिंदगी के सबसे अच्छे दिन यही होते हैं, उसके बाद जीवन में कुछ भी मजेदार नहीं बचता। सोनू भी अनीता आंटी की बातें पूरी रुचि लेकर सुनता।
फिर एक दिन जब सोनू कॉलेज गया तो उसका दोस्त साधु उसी की क्लास के एक लड़के सन्नी से बात कर रहा था। सोनू भी वहां जाकर साधु और सन्नी से मिला तो सन्नी ने अपनी आपबीती बतानी शुरू की कि कैसे उसने उसी की क्लास की लड़की काजल के साथ फोन सेक्स किया और फिर फ्लैट में सीमा के साथ भी सेक्स का पूरा आनंद लिया।
साधु उसे हमेशा की तरह सच्चे प्यार की परिभाषा समझाने लगा तो सन्नी ने उसे यही सलाह दी कि उपदेश देने की जगह अगर वह भी किसी लड़की की चूत का मजा पाने का प्रयास करे तो उसके लिए ज्यादा अच्छा रहेगा, अन्यथा सारी उम्र उपदेश ही देने में निकल जाएगी और हस्तमैथुन करते-करते पूरी जवानी बर्बाद हो जाएगी।
यह सब सुनकर सोनू को काफी प्रेरणा मिली। वह जोश से भर गया और सोचने लगा कि चाहे जो भी हो, अब तो उसे भी कुछ ना कुछ करना ही पड़ेगा, अन्यथा उसे सारी उम्र पछतावा रहेगा कि सारी जवानी बिना कुछ किए बर्बाद कर दी।
सोनू उन दिनों पड़ोस में रहने वाली पूनम भाभी की ओर काफी आकर्षित था और उसका बड़ा मन था कि किसी तरह भाभी पट जाए तो उसका जीवन सफल हो जाए। सोनू को लगा कि जब सन्नी इतने कम समय में कॉलेज में ऐसे कारनामे कर सकता है तो अगर कोशिश की जाए तो वह भी जल्द ही पूनम भाभी के हुस्न का स्वाद चख लेगा।
वैसे भी पूनम भाभी तो कई सालों से उसके पड़ोस में रह रही थी। अब वक्त आ गया था कि कुछ भी करके उनसे बातचीत बढ़ाई जाए।
उस दिन कॉलेज से घर जाते हुए वह रास्ते में पड़ोस की पूनम भाभी के बारे में सोचता हुआ जा रहा था। सन्नी की बताई हुई बातें उसके दिमाग में घूम रही थीं। कॉलेज से घर के रास्ते में सोनू की आंखों के सामने पूनम भाभी ही घूम रही थी।
वैसे तो भाभी काफी सालों से सोनू के पड़ोस में रह रही थी, पर अब सोनू जवान हो चुका था, इसलिए उसका देखने का नजरिया बदल चुका था। भाभी दिखने में माल लगती थी और हाव-भाव से चालू। इसलिए सोनू को लगता था कि शायद अगर वह कभी कोशिश करे तो बात आगे बढ़ पाए।
पर दिक्कत यही थी कि सोनू से शुरुआत ही नहीं हो पा रही थी। ऊपर से सोनू की कभी भाभी से ज्यादा बातचीत भी नहीं हो पाई थी। सोनू कॉलेज से घर आते ही कपड़े बदलता और घर की छत पर अपने कुत्ते टॉमी के साथ घूमने लगता।
घूमना तो एक बहाना था। वह तो पूनम भाभी को देखने के चक्कर में छत पर आता था। यह सोनू का रोज का काम हो गया था। वह कॉलेज से आते ही छत पर आ जाता और भाभी को देखता रहता।
भाभी दिखने में बहुत ज्यादा सुंदर तो नहीं थी पर उनकी चूचियां काफी बड़ी थी और भाभी को गहरे गले वाले सूट पहनने की आदत थी जिस कारण अक्सर सोनू को भाभी की क्लीवेज साफ दिखाई दे जाती थी।
घर जाते हुए सोनू को बचपन की भी कुछ घटनाएं याद आ रही थीं। बचपन में भी सोनू छुप-छुप कर भाभी की क्लीवेज के दर्शन करने का शौकीन तो था, पर उसे यह नहीं पता था कि उसे भाभी की चूचियां देखने की इतनी लालसा क्यों होती थी।
शाम के समय वह अक्सर बालकनी में खड़े होकर फोन पर लगी रहती थीं या पौधों को पानी देती रहती थी। रोज इसी समय सोनू भी छत पर आ जाता था और भाभी के थोड़ा सा झुकने का इंतजार करता रहता था ताकि उसे भाभी की चूचियों के दर्शन हो सकें।
एक दिन भाभी वाइपर से फर्श साफ कर रही थी। ऐसा करते-करते भाभी को काफी ज्यादा झुकना पड़ गया। सोनू बड़े ध्यान से नजरें गड़ाए यह सब देख रहा था। तभी इतना ज्यादा झुकने के कारण अचानक भाभी की एक चूची कुर्ते के गले से लगभग बाहर आ गई और सोनू को भाभी का निप्पल साफ दिखाई दे गया।
कुछ क्षणों तक तो भाभी को इसका आभास नहीं था। इस वजह से सोनू चुपचाप खड़ा भाभी के निप्पल को निहारता रहा। जैसे ही भाभी को इसका पता चला भाभी ने तुरंत ऊपर उठकर देखा कि कहीं किसी ने देखा तो नहीं।
तभी उनकी नजर सामने की छत पर खड़े सोनू पर पड़ी जो कि अभी तक भाभी को ही देख रहा था। भाभी की नजरें सोनू की नजरों से मिली तो सोनू के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई। यह देखकर भाभी ने सोनू को गुस्से से घूरा और पलट कर घर के अंदर चली गई।
सोनू फिर से छत पर घूमने लगा, पर भाभी उस दिन दोबारा बाहर नहीं आई। उसके बाद कई दिन तक भाभी ने शाम के समय बालकनी में आते हुए यह ध्यान रखा कि कहीं सोनू को कुछ दिख तो नहीं रहा। वह ज्यादा गहरे गले के कुर्ते नहीं पहन रही थी।
पर सोनू अभी भी रोजाना छत पर आता था। कई बार भाभी की नजरें सोनू पर पड़ती, पर अब भाभी की आंखों में गुस्सा दिखाई नहीं देता था। इससे सोनू को लगा कि अब सब सामान्य हो गया है।
पूरे रास्ते वह पूनम भाभी के साथ सेक्स करने की कल्पनाओं में डूबा हुआ था। घर पहुंचने तक वह भाभी के बारे में सोच-सोचकर इतना उत्तेजित हो चुका था कि वह जाते ही बाथरूम में घुसा और भाभी की कल्पना करते हुए हस्तमैथुन करने लगा।
अपनी कल्पना में वह भाभी के घर गया और उन्हें अकेला पाकर उनकी चूचियां दबाने लगा। पहले तो भाभी मना करती रही, पर थोड़ी देर बाद वो भी गरम हो गई और सोनू का साथ देने लगी। सोनू ने भाभी के सारे कपड़े उतार दिए और अपना लंड भाभी की तंग चूत में घुसा दिया।
फिर वह पूरी गति के साथ लंड को अंदर-बाहर करने लगा। बस यही कल्पना करते-करते सोनू के लंड से वीर्य की धार छूट पड़ी। पता नहीं यह सन्नी की बताई हुई बातों का असर था या भाभी की चूचियों की झलक का, पर आज सोनू का वीर्य पहले से कहीं ज्यादा मात्रा में निकला।
सोनू ने अब पक्का निश्चय कर लिया था कि उसे कोई कदम तो उठाना ही पड़ेगा, वरना उसकी कल्पनाएं कभी हकीकत में नहीं बदल पाएंगी।
फिर सोनू ने कपड़े बदले और यह सोचकर तुरंत छत पर आ गया कि आज जैसे ही भाभी बाहर आएगी वह उनसे बात जरूर करेगा। वैसे भी आज सोनू घर पर एकदम अकेला था क्योंकि उसके घर में बाकी सब लोग गांव गए हुए थे, इसलिए उसे भाभी से बात करते हुए देख लिए जाने का कोई डर भी नहीं था।
वह करीब एक घंटे तक भाभी के बाहर आने का इंतजार करता रहा, पर भाभी बाहर नहीं आई। अब तो अंधेरा होने लगा था, सर्दी बढ़ गई थी। पर आज अभी तक पूनम भाभी के दर्शन भी नहीं हुए थे।
तभी सोनू को किरायेदार अंकल के गाड़ी निकालने की आवाज आई। उनकी नाइट शिफ्ट थी तो वो काम पर जा रहे थे।
सोनू भी अब तक भाभी के बाहर आने का इंतजार करते-करते थक चुका था। रात का समय होने के कारण सर्दी भी काफी बढ़ गई थी, इसलिए अब तो पूनम भाभी के बाहर निकलने की कोई उम्मीद नहीं बची थी।
सोनू नीचे आ गया और बालकनी में घूमने लगा। थोड़ी देर तक वहीं घूमने के बाद सोनू अपने घर के अंदर जाने ही लगा था कि तभी अनीता आंटी अपने घर से बाहर निकली।
सोनू को वहां खड़ा देखकर आंटी बोली- “अरे सोनू, इस समय यहां क्या कर रहे हो?”
सोनू- “बस आंटी वैसे ही घर में अकेला बैठा बोर हो रहा था तो सोचा थोड़ी देर बाहर घूम लूं।”
आंटी- “ओह, अच्छा। आज तो तुम्हारे घर पर कोई नहीं है। मैं भी यही सोचकर आई थी कि तुम काफी देर से बाहर हो, चलो थोड़ी देर तुमसे बातें कर लूं। तुम्हारे अंकल तो काम पर चले गए हैं और बच्चे 3 दिन के स्कूल टूर पर गए हुए हैं। मैं अकेली अंदर बैठी बोर हो रही थी।”
सोनू- “मतलब आप भी आज घर पर अकेली हैं? फिर तो आप भी मेरी तरह बोर ही होने वाली हैं।”
सोनू अभी तक पूनम भाभी के बाहर ना आने की वजह से निराश था।
अनीता आंटी बोली- “अरे नहीं नहीं, तुम्हारे होते हुए मैं कैसे बोर हो सकती हूं?”
यह सुनकर सोनू भी मुस्कुरा दिया। फिर दोनों में यहां-वहां की बातें होने लगीं। आंटी सोनू से उसके कॉलेज के बारे में पूछने लगी तो सोनू ने बताया कि कुछ भी मजेदार नहीं हो रहा है कॉलेज में।
आंटी समझ गई कि सोनू कोई गर्लफ्रेंड ना होने की वजह से निराश है। फिर भी उन्होंने पूछ ही लिया- “अच्छा सोनू तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है?”
सोनू आंटी द्वारा अचानक पूछे गए इस सवाल से थोड़ा आश्चर्यचकित हो गया क्योंकि आज से पहले आंटी ने कभी भी इस तरह का सवाल नहीं पूछा था। सोनू ने ‘ना’ में सिर हिला दिया।
आंटी ने सोनू को समझाना शुरू किया कि अब तुम कॉलेज में हो गए हो। अब गर्लफ्रेंड नहीं बनाओगे तो कब बनाओगे? सोनू पहले ही इस विषय को लेकर काफी निराश था, आंटी के ऐसा कहने पर सोनू उदास हो गया।
पर फिर आंटी ने सोनू का हौसला बढ़ाया और समझाया कि उसे कम से कम लड़कियों से बातचीत तो शुरू करनी ही चाहिए, ताकि बात कुछ आगे बढ़ सके।
तभी सोनू ने भी आंटी से पूछ ही लिया- “अच्छा आंटी क्या आपका कॉलेज में कोई बॉयफ्रेंड था?”
आंटी पहले तो शरमा गई और कुछ सोचने लगी। पर फिर कहने लगी- “कभी किसी से कहना मत कि हमारी इस बारे में कोई बात हुई है।”
सोनू झट से मान गया तो आंटी बताने लगी- “मेरे कॉलेज में कई बॉयफ्रेंड रहे और मैंने तो कॉलेज में खूब मजे लूटे।”
सोनू को समझ नहीं आ रहा था कि आंटी किस तरह के मजे के बारे में बात कर रही थी, पर एक बात तय थी कि सोनू थोड़ा-थोड़ा उत्तेजित होने लग गया था।
तभी आंटी ने कहा- “तुम्हें सर्दी नहीं लग रही? चलो ना अंदर बैठकर बात करते हैं। मुझे लगता है हमारी बातें काफी लंबी चलने वाली हैं।”
सोनू भी राजी हो गया क्योंकि सर्दी सच में काफी हो चुकी थी और उसे आंटी की बातें सुनने में बड़ा आनंद आ रहा था।
आंटी ने सोनू को सोफे पर बैठने को कहा और खुद भी उसके साथ ही बैठ गई। फिर सोनू से कहने लगी- “अच्छा तुम मेरी छोड़ो, अपनी बताओ। मेरे कॉलेज की बातों में क्या रखा है। तुम्हें कोई लड़की पसंद है कॉलेज में?”
सोनू ने बताया कि कॉलेज में तो कोई भी लड़की उसे कुछ खास पसंद नहीं थी। तभी आंटी ने झट से कहा- “तो आस-पड़ोस में कोई?”
सोनू ने हैरानी से आंटी की तरफ देखा तो आंटी की आंखों में शरारत साफ नजर आ रही थी। सोनू को हैरान हुआ देखकर आंटी खिलखिलाकर हंस पड़ी।
फिर कहने लगी- “घबराओ मत मुझे पता है तुम पड़ोस में रहने वाली पूनम को कितना पसंद करते हो।”
सोनू हिचकिचाने लगा- “पर आपको कैसे…”
आंटी- “मैं सब जानती हूं। उसी को देखने के लिए तुम छत पर घूम रहे थे ना? वैसे पसंद तो अच्छी है तुम्हारी।”
कहकर आंटी फिर से हंसने लगी। सोनू समझ गया था कि अब नाटक करने से कोई फायदा नहीं है। उसने चुपचाप सच्चाई मान ली।
फिर आंटी पूछने लगी- “और कोई भी पसंद आई क्या तुम्हें?” इस पर सोनू ने अपने पहले वाले किरायेदार और नेहा के बारे में आंटी को बता दिया।
सोनू भी अब अनीता आंटी के साथ बातें करने में काफी सहज महसूस कर रहा था, इसलिए उसने आंटी को नेहा को निर्वस्त्र देखने और बेबी आंटी के साथ हुई घटना के बारे में भी बता दिया।
आंटी भी पूरी रुचि के साथ सोनू की बातें सुन रही थी। पहले वाले किरायेदार के घर में हुई घटना सुनने के बाद अनीता आंटी सोनू से बोली- “तुम मेरे घर में तो कभी नहीं आते। क्या बात मैं तुम्हें बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती क्या?”
इसपर सोनू बोला- “नहीं आंटी वो बात नहीं है। आप तो मुझे बहुत अच्छे लगते हो। बस कॉलेज से आने में ही इतनी देर हो जाती है कि कभी समय ही नहीं बचता।”
आंटी बोली- “चलो, आज तुम्हारे और मेरे पास समय ही समय है। आज जी भर कर बातें करेंगे।”
इसपर सोनू ने भी मुस्कुरा कर कहा- “जी जरूर आंटी।”
फिर आंटी ने सोनू से पूछा- “अच्छा पूनम तुम्हें कब से पसंद है?” इसपर सोनू ने बचपन में छुप-छुप कर पूनम भाभी को देखने से लेकर अब तक की सारी बातें बताई।
आंटी बोली- “अरे वाह! मैं तो तुम्हें नादान समझती थी। तुम तो बचपन से ही सही दिशा में जा रहे हो।”
इस पर सोनू ने कहा- “अरे कहां की सही दिशा आंटी। आज तक एक भी गर्लफ्रेंड नहीं बनी।”
आंटी बोली- “मतलब आज तक सेक्स भी नहीं किया होगा?”
सोनू ने एकदम से आए इस प्रश्न से हैरान होकर आंटी की तरफ देखा तो आंटी बोली- “अरे अब मुझसे शरमाना छोड़ भी दो। तुम इतने बड़े हो चुके हो। ऐसा तो हो नहीं सकता कि तुम्हें कुछ भी ना पता हो, तो फिर इस बारे में बात करने में शरमाना कैसा?”
सोनू को भी आंटी की बात सही लगी और उसने कहा- “बस आंटी, कभी मौका ही नहीं मिला।”
“कोई बात नहीं, मिल जाएगा।” आंटी ने शरारती अंदाज में कहा। फिर कहने लगी- “अच्छा आज इतनी देर तक छत पर क्या कर रहे थे?”
सोनू ने आंटी को पूरी बात सच-सच बताई कि उसने कॉलेज में उसकी क्लास के लड़के सन्नी से क्या सुना और किस तरह आज पूनम भाभी से बात करने का पक्का इरादा करके वह छत पर इंतजार करता रहा, पर वो नहीं आई।
इस पर आंटी सोनू को समझाने लगी- “कोई बात नहीं निराश होने की जरूरत नहीं है। तुम्हें भी जल्द ही सन्नी की तरह सेक्स का सुख लेने का मौका मिलेगा।”
यह सुनकर सोनू को अच्छा तो लगा पर एक दिक्कत हो गई थी। आंटी के मुंह से सेक्स का जिक्र सुन-सुनकर उसके लंड में तनाव आने लगा था और उसे पूरा भरोसा था कि जल्दी ही अनीता आंटी का ध्यान उसके पायजामे के उठाव की ओर चला जाएगा।
तभी आंटी बोली- “रात काफी हो गई है और बातें हैं कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। तुम एक काम करो। आज रात यहीं सो जाओ। ऐसे बैठे-बैठे कब तक बातें करेंगे। तुम अपने घर का ताला लगा आओ और मैं तब तक कपड़े बदल लेती हूं। फिर आराम से रजाई में लेटकर बातें करेंगे।”
सोनू को भी आंटी की बात ठीक लगी। वह उठकर गया और अपने घर का ताला लगाकर आ गया। इससे एक फायदा यह भी हुआ कि इतनी देर में उसका लंड सामान्य रूप में आ चुका था।
सोनू वहीं सोफे पर बैठकर अनीता आंटी के कपड़े बदल कर बाहर आने का इंतजार करने लगा।
तभी अंदर से आंटी की आवाज आई- “सोनू, जरा यहां आना।”
सोनू आंटी के बाथरूम के दरवाजे के बाहर पहुंचा तो आंटी ने कहा- “मैं अपनी नाइटी ले जाना भूल गई हूं। क्या तुम मेरी अलमारी से निकाल कर मुझे दे दोगे।”
सोनू ने कहा- “जी आंटी, अभी ला देता हूं।” कहकर सोनू बेडरूम में जाकर आंटी की अलमारी में से उनकी नाइटी निकाल लाया।
जैसे ही वह बाथरूम के बाहर पहुंचा आंटी ने बाथरूम का दरवाजा खोलकर हाथ बाहर निकाला ताकि सोनू उन्हें उनकी नाइटी पकड़ा दे। पर जैसे ही सोनू ने उन्हें नाइटी दी, वह उनके हाथ से छुटकर नीचे गिर गई और जल्दबाजी में वो एकदम से उसे उठाने के लिए झुकी।
परन्तु ऐसा करते हुए उनके बाथरूम का दरवाजा ज्यादा खुल गया। हड़बड़ाहट में आंटी के हाथ से उनकी नाइटी नीचे गिर गई और सोनू को एक झलक में आंटी का पूरा बदन निर्वस्त्र दिखाई दे गया।
आंटी की चूचियां काफी बड़ी-बड़ी थीं और उनके निप्पल गहरे भूरे रंग के थे। आंटी नाइटी उठा कर जैसे ही उठी सोनू का ध्यान आंटी की चूत की ओर गया और उसे वहां पर घने बाल दिखाई दिए और घने बालों के बीच में थोड़ी सी झलक आंटी की गुलाबी चूत की भी दिखाई दे गई।
सोनू का लंड पहले ही बड़ी मुश्किल से सामान्य हुआ था, आंटी का रूप देखकर तो कुछ ही क्षणों में सोनू का लंड पूरी तरह उत्तेजित होकर अपने पूरे आकार में आ गया।
आंटी भी सोनू पर पड़े अपने हुस्न के प्रभाव को भांप चुकी थी। उन्होंने देख लिया था कि सोनू अपने लंड के उभार को छुपाने की कोशिश कर रहा था।
आंटी ने सोनू से कहा- “सॉरी, एकदम से जल्दी में ध्यान नहीं रहा। तुम चलो मैं आती हूं।”
आंटी ने इस घटना को सोनू की उम्मीद के विपरीत बड़ी ही सहजता से लिया था। सोनू वापस कमरे में आ गया और आंटी का इंतजार करने लगा। उसकी आंखों के सामने आंटी का नंगा बदन अभी भी घूम रहा था और वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रहा था।
थोड़ी देर में अनीता आंटी बाहर आई तो सोनू उन्हें देखता ही रह गया। अनीता आंटी ने गुलाबी रंग की नाइटी पहनी हुई थी और वो उसमें गजब की सेक्सी लग रही थी।
साफ दिख रहा था कि आंटी ने नाइटी के नीचे कुछ नहीं पहना था क्योंकि नाइटी उनके बदन से चिपक रही थी और उनके बदन का हर कटाव दिखाई दे रहा था। यहां तक कि सोनू को आंटी के निप्पलों का आकार भी दिखाई दे रहा था।
आंटी ने सोनू को अपने बेडरूम में चलने को कहा तो सोनू आंटी के पीछे-पीछे चल दिया। बेड पर दो रजाइयां रखी हुई थी। उनमें से एक ओढ़कर आंटी लेट गई और दूसरी तरफ सोनू को लेटने का इशारा किया।
सोनू फटाफट आकर लेट गया। वह नहीं चाहता था कि आंटी को दिखाई दे कि उसका लंड पूरा ताव में आ चुका है, अन्यथा पता नहीं आंटी उसके बारे में क्या सोचती।
लेटते ही आंटी ने सोनू से कहा- “बाथरूम में जो दिखा पसंद आया?”
सोनू ने शरमा कर सिर झुका लिया तो आंटी बोली- “छोड़ो भी अब ज्यादा बनो मत। बच्चे थोड़े हो तुम। जवान हो, मुझे पता है इस उम्र में लड़के क्या सोचते हैं, क्या करते हैं।”
सोनू चुपचाप आंटी की बातें सुने जा रहा था। तभी आंटी बोली- “अच्छा हस्तमैथुन करते हो?”
सोनू समझ गया कि आंटी ऐसे आसानी से पीछा छोड़ने वाली नहीं है, इसलिए चुप रहने से कोई फायदा नहीं होने वाला। सोनू ने कहा- “हां आंटी, करता हूं…कभी-कभी।”
आंटी शरारती ढंग से मुस्कुराई और बोली- “हस्तमैथुन करते हुए किसके बारे में सोचते हो?”
इसपर सोनू कुछ नहीं बोला तो आंटी बोली- “अरे बता भी दो। पूनम के बारे में ही सोचते होगे। है ना?”
सोनू ने “हां” में सिर हिला दिया। फिर सोनू ने आंटी से पूछा- “आंटी आप और अंकल रोजाना सेक्स करते हो?”
आंटी पहले थोड़ी हिचकिचाई फिर बोली- “अरे कहां, जब से तुम्हारे अंकल की नाइट शिफ्ट हुई है तब से तो समय ही नहीं मिलता। वैसे भी उनकी सेक्स में बहुत ज्यादा रुचि नहीं बची है। शादी के इतने साल बाद वो बात नहीं रहती।”
फिर आंटी बोली- “अच्छा मेरी छोड़ो, तुम अपनी बताओ। और किस-किस के बारे में सोचते हो हस्तमैथुन करते हुए?”
सोनू ने सोचा अब ज्यादा शराफत दिखाने का कोई फायदा नहीं, आंटी से खुलकर बात कर लेना ही ठीक है। सोनू ने कहा- “वो सेक्सी फिल्मों वाली लड़कियों के बारे में।”
आंटी- “सेक्सी फिल्में भी देखते हो? कहां से लेकर आते हो?”
“दुकान से सी.डी. मिलती है।” सोनू ने कहा।
“अभी है तुम्हारे पास कोई सी.डी.?” आंटी ने पूछा तो सोनू ने हामी भर दी।
“तो ठीक है, लेकर आओ। मुझे भी देखनी है। मैंने कभी नहीं देखी।”
सोनू को आंटी की बात पर भरोसा नहीं हुआ तो उसने पूछ ही लिया- “क्या सच में? आपने कभी नहीं देखी?”
“देखी होती तो तुमसे झूठ क्यों बोलती? जब कॉलेज जाती थी तब ऐसे कुछ सी.डी. वगैरह मिलती ही नहीं थी। फिर शादी हो गई, पर तुम्हारे अंकल ने कभी दिखाई नहीं।”
यह सुनकर सोनू मुस्कुराने लगा और बोला- “चलो मैं दिखाता हूं फिर तो आज आपको।”
कहकर सोनू अपने घर गया और अपनी किताबों में छुपाई हुई एक सेक्सी फिल्म की सी.डी. ले आया।
आंटी ने सोनू से सी.डी. लेकर सी.डी. प्लेयर में डाल दी और बेड पर आकर सोनू के साथ लेट गई। फिल्म चलने लगी।
उसमें एक लड़की दिखाई दी। उसने पहले तो धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने शुरू किए, फिर वो बेड पर लेटकर अपनी चूत से खेलने लगी और अपनी चूचियां दबाने लगी।
तभी एक लड़का आया और उसके मुंह में अपना लंड घुसा दिया, जिसे वह लड़की बड़े मजे से चूसने लगी।
वैसे तो सोनू ने यह फिल्म कई बार देख रखी थी, पर आज आंटी के साथ देखने के कारण उसे यह फिल्म बहुत उत्तेजित कर रही थी।
उसके बाद उस लड़के ने अपना लंड लड़की की चूत में घुसा दिया और पूरे जोश के साथ उसकी चुदाई करने लगा। लड़की लगातार चीखे जा रही थी, जैसे उसे बहुत दर्द हो रहा हो।
सोनू ने आंटी की ओर देखा तो आंटी पूरे ध्यान से फिल्म देख रही थी और उनके चेहरे से साफ लग रहा था कि वो उत्तेजित हो रही हैं।
फिर फिल्म खत्म हो गई तो सोनू ने आंटी से पूछा- “आंटी, कैसी लगी फिल्म?”
आंटी बोली- “बाकी सब तो ठीक था, पर लड़की की चीखें बड़ी बनावटी लग रही थी। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि उसे इतना दर्द हो रहा हो। और वैसे भी इतना दर्द होता भी कहां है?”
यह बोलते ही आंटी समझ गई कि उन्होंने कुछ ज्यादा ही बोल दिया है। उन्होंने सोनू की ओर देखा तो वह हंस रहा था।
फिर सोनू बोला- “क्या सच में इतना दर्द नहीं होता आंटी?”
“सिर्फ पहली बार होता है, उसके बाद तो केवल मजा ही मजा है।” आंटी ने जवाब दिया तो सोनू ने वही सवाल पूछ लिया जिसका आंटी को पहले ही अंदाजा हो गया था- “क्या आपको भी पहली बार बहुत दर्द हुआ था?”
इस पर आंटी शरमा गई और बोली- “बस अब बहुत हो गया। बाकी बातें फिर कभी करेंगे। अब सो जाते हैं।”
सोनू को थोड़ी निराशा हुई क्योंकि उसे आंटी से इस तरह की बातें करने में बड़ा ही आनंद आ रहा था और उसके लंड में बुरी तरह तनाव आ चुका था।
वह समझ गया था कि अब हस्तमैथुन किए बिना काम नहीं चलेगा। उसने आंटी से कहा- “मुझे एक बार बाथरूम जाना है।”
फिर वो बाथरूम में घुस गया और आंटी के साथ सेक्स की कल्पनाएं करते हुए हस्तमैथुन करने लगा। उसके दिमाग में आज आंटी के साथ हुई बातें ही चल रही थीं।
सोनू को अंदाजा नहीं हुआ पर उसे बाथरूम में काफी देर हो चुकी थी। तभी बाहर से आंटी की आवाज आई- “सोनू, तुम क्या कर रहे हो अंदर? इतनी देर हो चुकी है। सो तो नहीं गए?”
सोनू एकदम से घबरा गया और फटाफट बाहर आ गया। सोनू के बाहर आते ही आंटी ने देख लिया कि उसका लंड खड़ा हुआ है, उन्हें यह समझने में ज्यादा देर नहीं लगी कि सोनू अंदर क्या कर रहा था।
तभी उन्होंने सोनू से कहा- “हस्तमैथुन कर रहे थे ना? फिल्म देखकर उत्तेजित हो गए थे या मेरी बातें सुनकर?”
सोनू समझ गया कि आंटी से अब इस बारे में झूठ नहीं बोला जा सकता। उसने कहा- “आपकी बातें सुनकर ही उत्तेजित हो गया था और इससे पहले कि आप पूछें मैं पहले ही बता दूं कि आपकी ही कल्पना करके हस्तमैथुन कर रहा था।”
आंटी यह सुनकर थोड़ी हैरान हुई और खुश भी। वह सोनू से बोली- “क्या? मेरे नाम का हस्तमैथुन कर रहे थे? मुझे बता देते पहले ही तो मैं वैसे ही तुम्हारा स्खलन करवा देती।”
तभी आंटी ने सोनू के लंड के उभार की ओर देखा और कहा- “वैसे मुझे लग रहा है कि काम अभी पूरा नहीं हुआ था। मैंने बीच में विघ्न डाल दिया। सॉरी! एक काम करती हूं। मैंने सारा काम बिगाड़ा है तो पूरा भी मैं ही कर देती हूं। चलो बेडरूम में।”
एक बार तो सोनू को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ कि क्या सच में आंटी उसका हस्तमैथुन करने की बात कर रही है? वह आगे होने वाली घटना को लेकर बहुत ही रोमांचित हो रहा था।
वह आंटी के साथ बेडरूम में आ गया। बेड पर बैठते ही आंटी ने उसे पायजामा उतार देने को कहा। सोनू ने वैसा ही किया।
फिर आंटी ने धीरे से उसका अंडरवियर खींच कर नीचे कर दिया और सोनू का लंड बाहर निकाल लिया। फिर आंटी सोनू का लंड हाथ में लेकर धीरे-धीरे सहलाने लगी।
सोनू का लंड आंटी के छूते ही पूरे तनाव में आ गया और सोनू को एक बार तो लगा वह उसी पल स्खलित हो जाएगा। पर ऐसा नहीं हुआ।
आंटी ने सोनू का लंड कस कर पकड़ लिया और उसे ऊपर से नीचे तक बड़े ध्यान से देखने लगी। फिर आंटी ने धीरे-धीरे सोनू का लंड ऊपर-नीचे करते हुए हस्तमैथुन शुरू कर दिया।
सोनू को असीम आनंद की प्राप्ति हो रही थी। सोनू आराम से लेटा रहा और आंखें बंद करके हस्तमैथुन का मजा लेने लगा।
तभी उसे एक और अद्भुत आनंद का अनुभव हुआ। उसका लंड किसी गरम और गीली जगह में घुस गया था। उसने एकदम से आंखें खोलकर देखा तो आंटी ने सोनू का लंड अपने मुंह में ले रखा था और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसे जा रही थी।
सोनू ने कभी ऐसे आनंद की कल्पना भी नहीं की थी। अनीता आंटी के लंड चूसने के तरीके से साफ लग रहा था कि उन्हें ऐसा करने का काफी अनुभव था और होता भी क्यों ना, आखिर वो एक शादीशुदा औरत थीं।
आंटी कभी तो सोनू का पूरा लंड अपने मुंह में ले लेती और कभी पूरा बाहर निकाल देती। धीरे-धीरे आंटी ने ऐसा करने की गति बढ़ा दी।
सोनू की उत्तेजना अपने चरम पर थी। उसे पता चल चुका था कि वह जल्दी ही स्खलित हो जाएगा। उसकी सांसें तेजी से चल रही थीं।
उसने आंटी को आगाह करने की कोशिश भी की पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसके लंड से फव्वारे की तरह वीर्य निकला और आंटी के मुंह में जा गिरा।
आंटी जरा भी विचलित नहीं हुई और बड़ी आसानी से सोनू का सारा वीर्य पी गई। फिर आंटी ने अच्छे से चाट कर सोनू का लंड साफ कर दिया और आराम से लेट गई।
सोनू की सांसें जब सामान्य हुई तो उसे आभास हुआ कि अभी-अभी क्या हुआ है। उसे तो यह सब सपने जैसा लग रहा था।
उसने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे कभी ऐसा अनुभव होगा और वो भी अनीता आंटी के साथ, जिनके साथ सेक्स से संबंधित बात तक करने की उसने कभी कल्पना तक नहीं की थी।
पर अब सोनू यह मौका अपने हाथ से गवाना नहीं चाहता था। उसने आंटी से कहा- “आंटी, आपने तो मेरे लंड देख लिया।”
आंटी- “हां…तो?”
सोनू- “पर मैंने तो आपका कुछ भी नहीं देखा अभी तक। यह तो नाइंसाफी हुई ना?”
तभी आंटी मुस्कुराते हुए बोली- “अच्छा जी, तुम्हारा शैतानी दिमाग काम करना शुरू हो गया है! अभी थोड़ी देर पहले तक तो बड़े शरमा रहे थे। क्यों?”
सोनू- “आपने बेशरम बना दिया।”
आंटी खिलखिलाकर हंस पड़ी और बोली- “तुम बेशरम ही नहीं एक नंबर के झूठे भी हो। जब बाथरूम में मेरी नाइटी नीचे गिर गई थी तब तुमने मेरा सबकुछ देख तो लिया।”
सोनू को भी ध्यान आया, पर वह एकदम से बोला- “पर वो तो मुश्किल से एक सेकंड के लिए दिखा होगा और बालों की वजह से आपकी चूत तो दिखी ही नहीं।”
इसपर आंटी बोली- “तुम तो सच में बड़े बेशरम हो गए हो। अब तुम्हें आंटी की चूत भी देखनी है?”
सोनू ने आंटी की ओर देखा तो आंटी यह सब कहते हुए मुस्कुराए जा रही थी। सोनू ने ‘हां’ में सिर हिला दिया।
आंटी ने सोनू का हाथ अपने हाथ में लिया और अपनी नाइटी के नीचे से अपनी टांगों के बीच तक ले गई। सोनू को यह जानकर बड़ी हैरानी हुई कि आंटी ने नाइटी के नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा था, पैंटी भी नहीं।
सोनू का हाथ आंटी की चूत के बालों पर लगा जो कि वह पहले ही देख चुका था कि काफी घने थे। पर हाथ लगाने पर सोनू ने पाया कि वो आंटी की चूत से निकले रस से भीगे हुए थे।
सोनू ने थोड़ी सी कोशिश की तो उसका हाथ आंटी की चूत को छूने में कामयाब हो गया। आंटी की चूत बड़ी ही चिकनी और गरम हो चुकी थी।
सोनू को कमाल का एहसास हो रहा था और उसका लंड फिर से खड़ा होने लगा था। आंटी को भी मजा आ रहा था क्योंकि वो हल्की-हल्की सिसकियां ले रही थीं।
तभी सोनू ने अपनी उंगली आंटी की चूत में घुसा दी और धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। वह आंटी को भी वही आनंद देना चाहता था जो आंटी ने उसे दिया था।
आंटी की सांसें तेज हो चुकी थी और आंटी आंखें बंद करके सोनू को अपनी चूत से खेलने का पूरा मौका दे रही थी। आंटी ने अपनी टांगें चौड़ी कर ली थी ताकि सोनू को कोई दिक्कत ना हो।
सोनू का लंड फिर से पूरी तरह उत्तेजित हो गया था और वह फैसला कर चुका था कि आज तो आंटी को चोदकर ही दम लेगा।
उसने आंटी की नाइटी को पूरा ऊपर उठा दिया और सिर के ऊपर से निकाल कर आंटी को एकदम निर्वस्त्र कर दिया क्योंकि आंटी ने उस नाइटी के सिवा और कुछ भी नहीं पहना था।
आंटी ने सोनू की इस हरकत का जरा भी विरोध नहीं किया। यह साफ था कि आंटी अपना बदन पूरी तरह से सोनू को सौंप चुकी थी।
सोनू ने आंटी को नंगा करते ही आंटी का एक निप्पल अपने मुंह में ले लिया और दूसरी चूची को जोर से मसलने लगा। आंटी के मुंह से “आह..आह्ह..” की आवाजें आए जा रही थी जिनका अर्थ था कि आंटी को पूरा मजा आ रहा था।
सोनू ने बारी-बारी से आंटी के दोनों निप्पल चूसे और चूचियां दबाई, फिर वह आंटी की टांगें चौड़ी करके उनके बीच में आ गया।
आंटी आराम से लेटकर सोनू की अगली हरकत का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। सोनू ने एक तकिया उठाया और आंटी के चूतड़ों के नीचे रख दिया, आंटी ने भी धीरे से अपने चूतड़ उठा कर सोनू का ऐसा करने में पूरा सहयोग किया।
फिर सोनू ने आंटी की चूत को ध्यान से देखा तो वह गीली होने के कारण चमक रही थी। सोनू ने आंटी की चूत के दाने को धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया तो आंटी सिहर उठी, पर अभी भी उन्होंने सोनू को रोका नहीं।
वो किसी तरह उस चरम आनंद को झेलने का प्रयास कर रही थी और उनके मुंह से कामुक सिसकारियां निकले जा रही थीं जो सोनू को और भी उत्तेजित कर रही थीं।
जब सोनू को लगा कि आंटी अब उत्तेजना से पागल हो चुकी हैं तो उसने आंटी की चुदाई शुरू करने के मकसद से अपना लंड अपने हाथ में पकड़कर आंटी की चूत के मुंह पर लगाया और पूरा जोर लगाकर अंदर की ओर धकेल दिया।
आंटी की दर्द के मारे चीख निकल गई। सोनू को उम्मीद नहीं थी कि शादी के इतने साल बाद आंटी की चूत इतनी तंग होगी।
उसने आंटी से कहा- “सॉरी आंटी। मुझे नहीं पता था कि आपको इतना दर्द होगा। आपने ही कहा था कि दर्द सिर्फ पहली बार होता है।”
आंटी के दर्द के मारे आंसू निकल आए थे। उन्होंने सोनू को रोकने का इशारा किया। थोड़ी देर में सामान्य होने के बाद बोली- “पहली बार के बाद से दर्द इसलिए नहीं होता क्योंकि लगातार सेक्स करते रहने के कारण चूत खुली रहती है। पर मुझे सेक्स किए हुए बहुत दिन हो गए हैं। असल में गलती मेरी ही है। मुझे तुम्हें पहले ही आगाह कर देना चाहिए था। चलो कोई बात नहीं। अब धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू करो।”
सोनू ने वैसा ही किया। वह धीरे-धीरे आंटी की चुदाई करने लगा। उसे आंटी की गीली हो चुकी चूत में लंड घुसाते हुए बड़ा ही आनंदमयी अनुभव हो रहा था।
ऊपर से आंटी की चूत तंग थी इसलिए ऐसा लग रहा था जैसे वो सोनू के लंड को निचोड़ लेने की कोशिश कर रही है और इसी कारण सोनू के लंड में जो एहसास हो रहा था वो उसे उत्तेजना से पागल किए जा रहा था।
वह आंटी के ऊपर ही लेट गया और धीरे-धीरे उन्हें काफी देर तक चोदता रहा। फिर सोनू ने पलट कर आंटी को अपने ऊपर कर लिया, पर सोनू का लंड इस दौरान आंटी की चूत में ही घुसा रहा।
तभी आंटी ने कहा- “मुझे ऊपर क्यों कर दिया? अब मुझे भी मेहनत करनी पड़ेगी।”
सोनू ने कहा- “मेहनत का फल बहुत मीठा होता है आंटी।”
आंटी मुस्कुरा उठी और धीरे-धीरे सोनू के लंड पर ऊपर-नीचे होने लगी। इस अवस्था में सोनू को पहले से भी ज्यादा मजा आ रहा था क्योंकि वो आराम से लेटकर आंटी को ऊपर-नीचे होते हुए देख रहा था और उसे आंटी की उछलती हुई चूचियों के दर्शन भी हो रहे थे।
सोनू ने अपने दोनों हाथ आंटी के चूतड़ों पर रख लिए और आंटी को हल्के-हल्के धक्के लगते हुए अपनी गति बढ़ाने के लिए प्रेरित करने लगा।
आंटी भी स्खलित होने ही वाली थी इसलिए सोनू का इशारा समझ कर उन्होंने तेजी से ऊपर-नीचे होना शुरू कर दिया। सोनू भी चरम पर पहुंचने लगा था इसलिए उसने आंटी के चूतड़ों के नीचे दोनों हाथ लगाकर आंटी को रोक दिया और खुद तेजी से ऊपर की ओर धक्के लगाकर आंटी को पूरी गति से चोदने लगा।
वह जानता था कि आंटी इतनी तेज गति से ऊपर-नीचे नहीं हो पाएगी। पूरे कमरे में आंटी की गीली चूत से निकल रही “फच-फच” की आवाजें गूंज रही थीं।
सोनू ने पूरा दम लगाकर तूफानी गति से आंटी को चोदना जारी रखा और कुछ ही क्षणों में उसके लंड से वीर्य की पिचकारी छूटकर आंटी की चूत की गहराई में जा लगी।
आंटी भी सोनू के गरमागरम वीर्य के अपनी चूत में भर जाने के अद्भुत एहसास से तुरंत स्खलित होने लगी और वासना भरी सिसकारियां लेते हुए सोनू के ऊपर ही लेट गई।
सोनू ने भी आंटी को कसकर अपनी बांहों में जकड़ लिया। दोनों पसीने से तर हो चुके थे और बुरी तरह हांफ रहे थे।
आंटी ने सोनू के होठों पर एक चुम्बन दिया और बोली- “थैंक्स सोनू! कब से ऐसे अनुभव के लिए तड़प रही थी।”
सोनू- “सब आपकी वजह से हुआ है आंटी। अगर आप मौका ना देतीं तो हम दोनों ही इस अनोखे अनुभव से वंचित रह जाते।”
आंटी हल्के से मुस्कुराई और सोनू की बांहों में लेटे-लेटे ही सो गई। थोड़ी देर में सोनू को भी नींद आ गई।
रात को नींद में न जाने कब सोनू का लंड आंटी की चूत से बाहर निकल गया और आंटी की चूत से सोनू का वीर्य बहकर निकल गया।
सुबह करीब 5 बजे आंटी ने सोनू को उठाया और अपने घर जाने को कहा क्योंकि उनके पति के आने का समय होने वाला था।
सोनू ने उठकर कपड़े पहने और आंटी के होंठों को चूम लिया। आंटी ने भी सोनू का पूरा साथ दिया और कहा- “कोशिश करेंगे कि अगला मौका जल्दी ही मिले।”
फिर आंटी ने सबसे पहले तो बेड की चद्दर बदल दी क्योंकि उसकी हालत देखकर साफ पता लग रहा था कि रात को उस पर क्या कारनामा हुआ है।
सोनू अपने घर आ गया और सोचने लगा कि अगली बार कॉलेज जाते ही सबसे पहले सन्नी का धन्यवाद करेगा, जिसके उत्साहवर्धन की वजह से उसे आखिरकार सेक्स का स्वाद चखने को मिला।
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