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अकेली बहु ने घर के सभी लंड संभाले 1

“मेरा पर्स कहाँ है पायल?” पराग ने सुबह-सुबह अपनी पत्नी से पूछा, अलमारी के पास खड़े होकर अपनी टाई ठीक करते हुए। उसका चेहरा थोड़ा जल्दबाजी में था, ऑफिस जाने की तैयारी में।

“एक साल दो महीने हो गए हमारी शादी को… आपको अब तक मेरी आदत छूट जानी चाहिए थी,” पायल ने बेडरूम के कोने से मुस्कुराते हुए जवाब दिया। वो बिस्तर पर बैठी थी, अपने बालों को कंघी से सुलझा रही थी। फिर उठकर पराग के पास आई, उसका पर्स अलमारी के ऊपर से उठाया और उसे देते हुए उसके कंधे पर हल्के से हाथ रखकर बोली, “ये लो, हर बार भूल जाते हो।”

“एक साल तीन महीने…” पराग ने हँसते हुए उसकी गलती सुधारी। “और हाँ, आदत छूटी नहीं, तुम्हारी आदत पड़ गई है, पायल।” उसने पायल की आँखों में देखते हुए कहा, उसकी आवाज में प्यार और शरारत थी।

“इतना रोमांस लाते कहाँ से हो?” पायल ने हँसकर जवाब दिया, उसकी आँखें चमक रही थीं। “अच्छा सुनो, शाम को ऑफिस से जल्दी आ रहे हो ना?”

“इतना मिस करोगी मुझे सारा दिन?” पराग ने शरारती अंदाज में पूछा, अपनी जैकेट पहनते हुए।

“मिस नहीं… आज आप मेरी ज्वेलरी लाने वाले हो,” पायल ने तपाक से कहा, उसका चेहरा थोड़ा गंभीर हो गया।

“अरे हाँ… बिल्कुल!” पराग ने जल्दी से कहा, जैसे उसे अभी याद आया हो।

“याद नहीं था ना आपको… मैं जानती हूँ,” पायल ने आँखें तरेरते हुए कहा, लेकिन उसकी मुस्कान बता रही थी कि वो मज़ाक कर रही थी।

पराग ने जवाब में पायल के गाल पर एक हल्का सा चुम्मा लिया, उसकी कमर को हल्के से छुआ और कमरे से बाहर निकल गया। पायल खिड़की के पास गई, पर्दा हटाकर बाहर देखने लगी। पराग घर से बाहर निकला, अपनी कार में बैठा, और उसने उसे हाथ हिलाकर बाय किया। पायल ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया और फिर वापस कमरे में आकर बिस्तर ठीक करने लगी। उसकी चाल में एक अजीब सी बेचैनी थी, जैसे वो कुछ सोच रही हो।

“बीवी जी…” तभी घर की बाई मालती अंदर आई, उसका चेहरा थोड़ा थका हुआ था।

“बोल मालती,” पायल ने बिना उसकी ओर देखे, बिस्तर की चादर समेटते हुए कहा।

“मैं जा रही हूँ बीवी जी। नाश्ता बना दिया, लंच भी तैयार है, घर साफ कर दिया। बस कपड़े धोने बाकी हैं,” मालती ने जल्दी-जल्दी बताया।

“कपड़े आज छोड़ दे। शाम को आ जाना। चल जा,” पायल ने काम में व्यस्त रहते हुए कहा।

मालती चली गई। पायल ने कुछ देर बाद बेडरूम से निकलकर ड्रॉइंग रूम की ओर कदम बढ़ाए। वहाँ खाने की मेज पर पहले से ही उसके ससुर जी, जेठ जी नीरज, और छोटा देवर रोहित बैठे थे। तीनों की नजरें पायल की ओर उठीं, लेकिन कोई कुछ बोला नहीं। पायल ने पहले घर का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद किया, फिर वापस लौटते हुए सबसे पूछा, “नाश्ता लगा दूँ क्या आप सबको?”

“हाँ भाभी, बहुत भूख लगी है,” रोहित ने तुरंत जवाब दिया, उसकी आवाज में उत्साह था। नीरज और ससुर जी चुप रहे, लेकिन उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।

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पायल बिना कुछ कहे वापस अपने बेडरूम में गई। उसने अपनी हल्की नीली नाइटी उतार दी, जो फर्श पर गिर पड़ी। अंदर उसने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहनी थी, जो उसके गोरे बदन पर आग की तरह चमक रही थी। उसने ब्रा भी खोल दी, लेकिन पैंटी पहने रही। अपने बंधे हुए काले बालों को खोलकर कंधों पर फैलाया, जिससे वो और भी मदमस्त लगने लगी। फिर उसी हालत में, सिर्फ लाल पैंटी में, वो किचन की ओर चली गई।

किचन में उसने देखा कि मालती ने नाश्ते में ऑमलेट और टोस्ट बनाए थे। पायल ने अपने और घर के बाकी मर्दों के लिए नाश्ता एक बड़े ट्रे में सजाया और ड्रॉइंग रूम में ले आई। वो अधनंगी अवस्था में, रोहित और नीरज के बीच खड़ी होकर खाने की मेज पर नाश्ता लगाने लगी। उसकी हरकतें इतनी स्वाभाविक थीं, जैसे ये रोज का रुटीन हो।

“ये पैंटी कब खरीदी भाभी?” रोहित ने पायल की गाँड़ पर हल्के से हाथ फेरते हुए पूछा, उसकी उंगलियाँ पैंटी के किनारे पर रुक गईं।

“मेरी पैंटी के बारे में पूछ रहे हो, तो मेरी गाँड़ क्यूँ छू रहे हो, देवर जी?” पायल ने बिना उसकी ओर देखे, मुस्कुराते हुए जवाब दिया। उसकी आवाज में शरारत थी, लेकिन एक अजीब सी गर्मी भी।

“खाने के वक्त नहीं, रोहित,” ससुर जी ने अपने छोटे बेटे को डाँटते हुए कहा। फिर पायल को ऊपर से नीचे तक घूरते हुए बोले, “वैसे, रेड पैंटी में बहुत जँच रही हो, बहु।”

पायल ने अपनी हँसी मुँह में दबा ली, लेकिन नीरज और रोहित खुलकर हँस पड़े।

“इतना भी मज़ाक उड़ाने की ज़रूरत नहीं। आजकल ऐसी पैंटी का फैशन है,” पायल ने हल्के नाराज़ अंदाज़ में कहा। फिर उसने अपनी पैंटी को कमर से नीचे सरकाया और उसे उतारकर खाने की मेज पर, सबकी प्लेटों के बीच में रख दिया। इसके बाद वो पूरी नंगी होकर ससुर जी के बगल में बैठ गई और नाश्ता शुरू कर दिया, जैसे कुछ हुआ ही न हो।

नीरज ने पायल की पैंटी उठाई, उसे अपनी नाक के पास ले जाकर सूँघा और बोला, “हम्म… खुशबू तो मस्त है। रात को पहनकर सोई थी क्या, भाभी?”

“छी… आप लोग दिन-ब-दिन गंदे और बेशर्म होते जा रहे हो,” पायल ने नकली गुस्से में कहा। फिर ससुर जी की ओर मुँह करके बोली, “और बाबू जी, आप भी!”

“मैंने क्या किया, बहु?” ससुर जी हँसते हुए बोले, उनकी आँखों में शरारत थी।

चारों फिर इधर-उधर की बातें करते हुए नाश्ता करने लगे। माहौल हल्का था, लेकिन हवा में एक अजीब सी तपिश थी, जैसे सबको पता था कि नाश्ता खत्म होने के बाद क्या होने वाला है।

“अच्छा, आज पहले कौन चोदेगा?” कुछ देर बाद पायल ने नाश्ता खाते-खाते पूछा, उसकी आवाज में बेफिक्री थी। “आज पराग शाम को जल्दी घर आ जाएँगे।”

“मुझे कॉलेज जाना है, भाभी। पहले मुझे करने दो ना,” रोहित ने तुरंत कहा, उसकी आवाज में बेताबी थी।

“वैसे, मैं आज कुछ और सोच रही थी…” पायल ने धीरे से कहा, जैसे कुछ बड़ा प्लान हो।

“क्या?” नीरज ने उत्सुकता से पूछा।

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“देखती हूँ… बताती हूँ,” पायल ने रहस्यमयी अंदाज़ में जवाब दिया, उसकी आँखें चमक रही थीं।

“भाभी, एक बात पूछूँ?” रोहित ने हिचकते हुए कहा।

“बोलो ना, देवर जी,” पायल ने मुस्कुराकर जवाब दिया।

“आपको बुरा नहीं लगता?” रोहित ने धीरे से पूछा।

“क्या, देवर जी?” पायल ने भौंहें उठाईं।

“वही… पराग भैया के बारे में,” रोहित ने हल्के से कहा, जैसे डर रहा हो कि कहीं पायल को बुरा न लगे।

पायल एकदम चुप हो गई। उसका चेहरा गंभीर हो गया, और वो प्लेट में बचे ऑमलेट को देखने लगी।

“बहु, तुमने फिर कभी ट्राई किया था क्या?” इस बार ससुर जी ने धीरे से पूछा, उनकी आवाज में चिंता थी।

“रोज़ करती हूँ, बाबू जी,” पायल ने उदास स्वर में कहा, खाना छोड़कर। “पर उनमें कोई हरकत ही नहीं होती। कोई उत्तेजना नहीं आती। मैंने हर तरह से कोशिश की, पर…” उसकी आवाज भर्रा गई।

“मन छोटा मत करो, पायल,” नीरज ने सांत्वना देते हुए कहा। “पराग बहुत अच्छा इंसान है।”

“पराग भैया का लंड थोड़ा सा भी खड़ा नहीं होता क्या?” रोहित ने बिना सोचे पूछ लिया, फिर तुरंत संभलकर बोला, “सॉरी भाभी… मेरा मतलब, आप इतनी सुंदर हो, फिर भी…”

“अगर होता, तो आज मैं इस तरह से…” पायल ने कहना शुरू किया, लेकिन रुक गई। फिर मुस्कुराकर बोली, “मगर वो मुझे बहुत प्यार करते हैं। मेरे लिए इतना काफी है।”

ससुर जी ने पायल के कंधे को सहलाते हुए उसे ढांढस बंधाया। माहौल थोड़ा भारी हो गया था, लेकिन पायल ने जल्दी ही खुद को संभाला।

नाश्ता खत्म हुआ। पायल ने सारी प्लेटें उठाईं, लेकिन अपनी पैंटी मेज पर ही छोड़ दी। वो किचन में प्लेटें रखने चली गई।

“वैसे भाभी, आप कुछ बताने वाली थीं,” रोहित ने पीछे से आवाज़ लगाई।

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“आकर बताती हूँ,” पायल ने किचन से जवाब दिया, उसकी आवाज में फिर से शरारत लौट आई थी। रोहित, नीरज, और ससुर जी उसकी नंगी गाँड़ को थिरकते हुए देखते रहे, जैसे मंत्रमुग्ध हो गए हों।

पायल कुछ देर बाद वापस ड्रॉइंग रूम में आई। उसने देखा कि तीनों मर्द अभी भी खाने की मेज पर बैठे थे, जैसे उनकी टाँगों में जान ही न हो।

“कितने आलसी हो गए हो आप तीनों,” पायल ने तंज कसते हुए कहा। वो अपनी पैंटी लेने आई थी, लेकिन मेज पर वो नहीं थी। “मेरी कच्छी कहाँ है?” उसने गुस्से में पूछा और बिना जवाब का इंतज़ार किए रोहित का कान पकड़कर मरोड़ दिया। “तुमने लिया ना, शैतान!”

“भाभी, मैंने नहीं लिया… मैं कसम खाता हूँ!” रोहित ने गर्दन टेढ़ी करके कहा, उसकी आवाज में मासूमियत थी।

पायल को इन मर्दों की आदतों का अच्छा खासा अनुभव था। वो रोहित को छोड़कर ससुर जी के पास गई और देखा कि उनकी लुंगी में उसकी लाल पैंटी दबी हुई थी। पायल ने नकली गुस्से में ससुर जी को घूरा और पैंटी उठा ली।

“अभी मत लीजिए, बाबू जी। एकदम नई है ना। पिछले रविवार को ही पराग लाए थे,” पायल ने ससुर जी का मायूस चेहरा देखकर हँसते हुए कहा। “एक-दो महीने पहन लूँ, फिर दे दूँगी।”

“दे दीजिए, पापा। पैंटी थोड़ी पुरानी हो, तो मज़ा आता है। शरीर की गंध उसमें समा जाती है,” नीरज ने गंभीर चेहरा बनाकर कहा। “जैसे पायल की ब्लैक वाली पैंटी से अभी तक कितनी मादक महक आती है।”

“भाभी? आपने नीरज भैया को अपनी पैंटी दे रखी है? और मुझे?” रोहित ने नाराज़गी भरे लहजे में पूछा।

“हर बात में अपने पापा और भैया से कॉम्पिटिशन मत किया करो, देवर जी। वो तुमसे बड़े हैं ना,” पायल ने डाँटते हुए कहा। फिर गंभीर होकर बोली, “और कॉलेज क्यों नहीं गए तुम आज?”

रोहित के पास कोई जवाब नहीं था। उसने सिर झुका लिया।

“ऐसा मत करो, देवर जी। मैं कहाँ भागी जा रही हूँ?” पायल ने नरम स्वर में कहा। फिर नीरज की ओर मुड़कर बोली, “और आपका क्या बहाना है, शोरूम नहीं जाने का?”

“अरे, मार्केट में एक दुकानदार की मौत हो गई है। दो दिन तक दुकानें बंद रहेंगी,” नीरज ने सफाई दी। उसका कपड़ों का बड़ा शोरूम था, और वो इस बहाने घर पर ही था।

पायल ने सिर हिलाया, जैसे कह रही हो, “तुम लोग कभी नहीं सुधरोगे।” फिर अपनी पैंटी लेकर चली गई।

पायल घर में नंगी घूम रही थी, लेकिन ससुर जी, नीरज, और रोहित का व्यवहार इतना सामान्य था, जैसे ये रोज़ की बात हो। इसका मतलब ये नहीं था कि पायल सेक्सी नहीं थी। 30 साल की पायल की खूबसूरती और बदन दोनों लाजवाब थे। उसकी बड़ी-बड़ी चुचियाँ टाइट और ऊपर की ओर उठी हुई थीं, जो गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देती थीं। वो अपनी काँख के बाल नियमित रूप से शेव करती थी, लेकिन चूत के झांटों को छीलना उसे पसंद नहीं था। उसके घने झांटों को वो कैंची से ट्रिम करती थी, ताकि वो उसकी चूत को आधा ढकें और उसकी फूली हुई चूत की फाँकों को हल्का सा दिखाएँ। उसका हल्का उभरा हुआ पेट सेक्सी लगता था, जो नीचे उसकी चूत में जाकर गायब हो जाता था और पीछे उसकी भारी गाँड़ में तब्दील हो जाता था। उसकी मोटी जाँघें आपस में सटी रहती थीं, जिससे नंगी खड़े होने पर भी उसकी चूत पूरी तरह छुप जाती थी।

कुछ देर बाद पायल फिर ड्रॉइंग रूम में आई। इस बार उसने फ्रिज खोला और उसे साफ करने लगी। उसका नंगा बदन झुकने से और भी उत्तेजक लग रहा था।

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“तुम्हारा काम खत्म नहीं हुआ, बहु?” ससुर जी की आवाज़ में अब बेचैनी थी।

“घर में तीन-तीन मर्द अगर काम में हाथ न बटाएँ, तो काम कभी खत्म होगा क्या, बाबू जी?” पायल ने तपाक से जवाब दिया, जैसे उसका जवाब तैयार था।

तीनों की बोलती बंद हो गई। वो एक-दूसरे को देखने लगे। तभी नीरज ने कुछ नोटिस किया।

“पायल, आज तुम कुछ अलग लग रही हो,” उसने कहा, उसकी नज़रें पायल के बदन पर टिकी थीं।

“जैसे कि?” पायल ने बिना पीछे मुड़े पूछा, फ्रिज में सामान समेटते हुए।

“कुछ तो है… रुको,” नीरज ने सोचते हुए कहा। रोहित और ससुर जी ने ध्यान नहीं दिया, उन्हें लगा नीरज फ्लर्ट कर रहा है।

“पकड़ा!” नीरज ने अचानक कहा। “आज तुमने पायल पहन रखी है।”

“और?” पायल ने मन ही मन मुस्कुराते हुए पूछा।

नीरज उठकर पायल के पीछे गया। उसने पायल को अपनी ओर घुमाया और बोला, “और ये करधनी।”

रोहित और ससुर जी अब पायल को गौर से देखने लगे। नीरज ने सही पकड़ा था। पायल ने आज एक पतली सी धागे की करधनी पहनी थी, जो उसके नंगे बदन पर चार चाँद लगा रही थी। करधनी उसकी कमर से थोड़ा ऊपर, नाभी के पास बँधी थी। सामने दो छोटे-छोटे मोती नाभी के ठीक ऊपर झूल रहे थे, जैसे उसकी नाभी की शोभा बढ़ा रहे हों।

“भाभी, इस करधनी में एकदम रति की देवी लग रही हो,” रोहित ने अपने पिता की ओर देखकर कहा।

“रात को पराग को रिझाने के लिए पहनी थी क्या?” नीरज ने मज़ाक किया।

“ये सेक्स या स्टाइल के लिए नहीं है, जेठ जी। इसकी ताबीज़ सुख-समृद्धि के लिए है। मेरी मम्मी ने शादी के वक्त दी थी,” पायल ने गंभीरता से कहा।

“ताबीज़ तो दिख नहीं रही,” नीरज ने पायल की कमर को निहारते हुए कहा।

“इस तरफ है,” पायल ने घूमकर अपनी गाँड़ नीरज को दिखाई। करधनी से पीछे की ओर एक छोटा सा ताबीज़ लटक रहा था, जो उसकी गाँड़ के उभार पर हल्के से हिल रहा था।

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“ताबीज़ पीछे क्यों कर रखा?” नीरज ने उत्सुकता से पूछा।

“चूत वाली साइड में रखने से अपशकुन होता है,” पायल ने सहजता से जवाब दिया।

“जो भी हो, बहुत अच्छी लग रही हो। हमेशा पहनकर क्यों नहीं रहती?” नीरज की नज़रें अब भी नीचे थीं।

“बहुत टाइट है, जेठ जी। देखिए ना। इसीलिए कभी-कभार ही पहनती हूँ,” पायल ने मुँह बनाकर अपनी करधनी की ओर इशारा किया।

“अभी ठीक किए देता हूँ,” नीरज ने कहा। उसने देखा कि करधनी वाकई टाइट थी। उसने पायल की कमर पर बंधी गाँठ को ढीला किया। करधनी सरककर पायल की कमर से नीचे, उसके चूतड़ों के उभार पर आ टिकी। अब ढीली करधनी इतनी नीचे थी कि सामने के दो मोती उसकी चूत के ठीक ऊपर झूल रहे थे, जैसे उसकी चूत की रखवाली कर रहे हों।

“अब ठीक है?” नीरज ने पूछा, उसकी साँसें थोड़ी भारी हो रही थीं।

“बेहतर है, जेठ जी। थैंक यू!” पायल की खुशी का ठिकाना न रहा।

करधनी अब पायल की चूत के ऊपर से गुजर रही थी, जिससे वो और भी सेक्सी लग रही थी। रोहित की आँखें फटी की फटी रह गईं, और ससुर जी का मुँह खुला रह गया। पायल ने नोटिस किया कि नीरज का लंड पजामे में आधा खड़ा हो गया था। उसने नीरज की आँखों में देखा, और दोनों के बीच एक चुपके का इशारा हुआ।

पायल ने फ्रिज का दरवाज़ा बंद किया। उसने अपना दायाँ हाथ नीरज के पजामे के ऊपर से उनके लंड पर रखा और उसे पकड़कर हल्के से खींचते हुए बेडरूम की ओर चल पड़ी। नीरज, जैसे मंत्रमुग्ध हो, उसके पीछे-पीछे चला गया। रोहित और ससुर जी मायूस होकर उनकी ओर देखते रहे।

“देखा, पापा। आज भी नीरज भैया पहले भाभी को चोदेंगे,” रोहित ने शिकायती लहजे में कहा। “मुझे तो दो दिन से मौका नहीं मिला।”

“मैंने भी बहु को तीन-चार दिन से नहीं चोदा, बेटे। तो क्या?” ससुर जी ने थोड़ा सख्ती से कहा। “औरतों की भी अपनी पसंद होती है। शायद उसे नीरज ज़्यादा पसंद हो। और ये मत भूल कि वो तुम्हारी भाभी है, मेरे बेटे पराग की पत्नी। फिर भी वो हम तीनों के साथ… सिर्फ इसलिए क्योंकि उसे शादीशुदा औरत का सुख नहीं मिलता।”

“सब मुझे ही ज्ञान दे रहे हैं,” रोहित ने धीरे से बुदबुदाया।

“क्या कहा?” ससुर जी गुस्से में कुछ बोलने ही वाले थे कि नीरज वापस आ गया।

“पापा, रोहित, चलो। पायल बुला रही है,” नीरज ने कहा और बिना रुके वापस चला गया। रोहित और ससुर जी ने एक-दूसरे को सवालिया नज़रों से देखा और उसके पीछे चल पड़े।

बेडरूम में पायल पलंग के किनारे बैठी थी, उसकी टाँगें एक-दूसरे के ऊपर चढ़ी थीं। उसकी करधनी अब भी उसकी चूत के ऊपर टिकी थी, और उसका नंगा बदन किसी अप्सरा की तरह चमक रहा था।

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“किसको चोदना है मुझे आज?” पायल ने तीनों मर्दों की आँखों में बारी-बारी देखते हुए पूछा, उसकी आवाज में चुनौती थी।

“ऐसी बात नहीं, बहु। तुम्हारा जिसके साथ मन हो…” ससुर जी ने नरम स्वर में कहा।

“हम्म… मैंने सुबह कहा था ना कि मैं कुछ सोच रही हूँ,” पायल ने धीरे से बोलना शुरू किया। “तो ऐसा है कि मैं चाहती हूँ कि आप तीनों मेरा बदन एक साथ भोगें।”

“यू मीन… गैंगबैंग, भाभी?” रोहित ने हैरानी से पूछा।

“अरे, गैंगबैंग तो तुम्हारी जेनरेशन का नाम है, देवर जी। हमें कोई पॉर्न फिल्म थोड़े बनानी है,” पायल ने हँसते हुए कहा। “मैं बस इतना कह रही हूँ कि मैं एक औरत हूँ, जो तीन मर्दों के साथ एक साथ चुदाई का मज़ा लेना चाहती है।”

“आइडिया बुरा नहीं है,” ससुर जी ने मुस्कुराते हुए कहा।

“क्या आइडिया, पापा? ऐसा थोड़े होता है,” नीरज ने आपत्ति जताई। “हमारी प्राइवेसी का क्या? मैं जब पायल के साथ अकेले होता हूँ, तो ढेर सारी गंदी बातें करता हूँ, गंदी हरकतें करता हूँ। ग्रुप सेक्स में खुलकर मज़ा नहीं आएगा।”

“जब लंड खड़ा होता है ना, जेठ जी, तो सारी प्राइवेसी निकल जाती है,” पायल ने शरारती अंदाज़ में कहा। “चलो ना, कुछ नया ट्राई करते हैं। और फिर देवर जी की शिकायत भी दूर हो जाएगी कि मैं भेदभाव करती हूँ।”

“सॉरी, भाभी। मेरा वो मतलब नहीं था,” रोहित ने सिर झुकाकर कहा। उसे लगा कि पायल ने उसकी बात सुन ली थी। “मैं पापा से सहमत हूँ।” फिर नीरज की ओर देखकर बोला, “चलो ना, नीरज भैया। हम तो एक ही परिवार हैं। इसमें क्या शरमाना?”

“हाँ, जेठ जी। आप तीनों में देवर जी का लौड़ा सबसे छोटा है। जब उन्हें शर्म नहीं, तो आप क्यों हिचक रहे हैं?” पायल ने माहौल हल्का करने के लिए मज़ाक किया। फिर बोली, “चलो, पहले अपने-अपने कपड़े तो उतारो।”

तीनों ने बिना एक-दूसरे को देखे अपने कपड़े उतार दिए और पूरी तरह नंगे हो गए। शर्म की वजह से तीनों अपने लंड को हाथों से ढककर खड़े रहे।

“ऐसे नहीं चलेगा। लंड पर से हाथ हटाओ!” पायल ने हुक्म दिया।

तीनों ने धीरे-धीरे हाथ हटाए और सिर झुकाकर खड़े रहे। नीरज का लंड, जो पहले करधनी ठीक करते वक्त खड़ा था, अब ढीला लटक रहा था। 35 साल के नीरज का लंड 7 इंच लंबा और 2 इंच मोटा था, उसका सुपाड़ा आधा बाहर झाँक रहा था। 21 साल के रोहित का लंड 6 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा था, उसका सुपाड़ा पूरी तरह चमड़े से ढका था। 54 साल के ससुर जी का लंड, उनकी उम्र के बावजूद, 9 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था, गुलाबी सुपाड़ा पूरा खुला हुआ।

“एक-दूसरे को देखने की ज़रूरत नहीं। मुझ पर ध्यान दो,” पायल ने कहा, जब उसने देखा कि शर्म की वजह से तीनों के लंड ढीले पड़े थे। “इधर आओ, मेरे पास।”

तीनों पायल के सामने खड़े हो गए। रोहित बीच में था, नीरज दाएँ और ससुर जी बाएँ। पायल ने अपने दोनों हाथों में नीरज और ससुर जी के लंड पकड़े और आगे बढ़कर रोहित के लंड को चूम लिया। नीरज और ससुर जी के लंड को कुछ देर हिलाने के बाद, वो उन्हें अपने गालों पर रगड़ने लगी। रोहित ने भी अपना लंड भाभी के होंठों और नाक पर रगड़ा। तीनों के लंड में हल्का तनाव आने लगा, लेकिन वो अभी पूरी तरह खड़े नहीं थे।

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पायल अब पलंग से उठी और तीनों के बीच खड़ी हो गई। एक नंगी, सुडौल औरत तीन नंगे मर्दों के बीच खड़ी थी, और कमरे में गर्मी बढ़ रही थी। पायल ने अपने होंठ रोहित के होंठों से सटा दिए। रोहित ने आँखें बंद करके उसे चूमना शुरू किया। पायल ने उसके लंड को अपनी नाभी पर चुभता महसूस किया और समझ गई कि वो उत्तेजित हो रहा है।

नीरज ने पायल की एक चूची पकड़कर दबाना शुरू किया और अपना लंड उसकी गाँड़ पर रगड़ने लगा। ससुर जी ने दूसरी चूची मसलते हुए पायल की गर्दन और कंधों को चूमना शुरू किया, उनका लंड उसकी कमर की करधनी में फंसकर घिस रहा था। पायल बीच-बीच में तीनों के लंड को बारी-बारी पकड़कर हिलाती, फिर उन्हें अपने बदन के साथ खेलने के लिए छोड़ देती। तीनों मर्द पायल को चूमते, सहलाते, और मसलते रहे।

रोहित थोड़ा झुका और भाभी की चुचियों को चूमने लगा, उसका लंड पायल की जाँघ पर रगड़ रहा था। पायल ने अपनी एक चूची पकड़कर रोहित के मुँह में दी और उसे दूध पिलाने लगी। ससुर जी ने अपनी उंगलियाँ पायल की चूत में डालीं, फिर निकालकर सूँघने लगे। नीरज ने पायल की गाँड़ की दरार में उंगलियाँ घुसाईं, उसकी गुदा को सहलाया, और फिर उंगलियाँ सूँघकर उसकी मादक महक का मज़ा लिया।

रोहित अब पायल के सामने घुटनों पर बैठ गया। उसने करधनी हटाकर भाभी की चूत की गंध सूँघी और मुँह डालकर चाटने लगा। नीरज और ससुर जी पायल की एक-एक चूची मुँह में लेकर चूसने लगे। कुछ देर बाद रोहित पीछे चला गया, और ससुर जी ने पायल की चूत चाटनी शुरू की। रोहित ने भाभी की पीठ चूमनी शुरू की। फिर ससुर जी उठे, और नीरज पायल की जाँघों के बीच घुसकर उसकी चूत चाटने लगा। ससुर जी अब पायल को बेतहाशा चूमने लगे।

करीब 45 मिनट तक तीनों मर्द बारी-बारी पायल की चुचियाँ चूसते, चूत चाटते, गाँड़ मसलते, और उसे चूमते रहे। पायल का बदन गर्मी से तप रहा था, उसकी साँसें तेज़ थीं।

“आह्ह… बस करो!” पायल ने सिसकारते हुए कहा, जब रोहित उसकी चूत चाट रहा था। उसने रोहित के बाल पकड़कर उसे खींचा। रोहित उठ खड़ा हुआ। तीनों ने देखा कि पायल का बदन काँप रहा था। वो समझ गए कि बहु अब झड़ने वाली है।

तीनों ने पायल को पकड़ लिया, ताकि वो चरमोत्कर्ष में गिर न जाए। पायल ने अपनी टाँगें फैलाईं, उसकी चूत खुल गई, और उसका पानी ज़मीन पर टपकने लगा। करीब दस मिनट तक पायल नंगी खड़ी-खड़ी झड़ती रही, और तीनों उसे थामे रहे। उसका चेहरा सुकून और थकान से भरा था।

जब पायल थोड़ी शांत हुई, उसने तीनों को मुस्कुराकर एक-एक चुम्मा दिया। उसने देखा कि अब तीनों के लंड पूरी तरह खड़े थे। उनकी शर्म गायब हो चुकी थी। अब उनकी बारी थी।

पायल ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गई, ठीक वहाँ जहाँ उसका चूत रस गिरा था। तीनों मर्दों के लंड उसके चेहरे के सामने थे। उसने बारी-बारी तीनों के लंड पकड़े, हिलाए, और चूसने लगी। हर लंड को वो 10-15 सेकंड तक चूसती, फिर अगले की बारी आती। तीनों चुपचाप खड़े अपना लौड़ा चुसवाते रहे।

तीसरे राउंड के बाद पायल ने देखा कि तीनों के लंड सख्त हो गए थे। वो समझ गई कि अब इनके लौड़ों का माल निकलने वाला है। सबसे पहले ससुर जी झड़े। उन्होंने अपना लंड हिलाकर वीर्य पायल के चूत रस के ऊपर ज़मीन पर गिराया। दो सेकंड बाद रोहित और नीरज एक साथ झड़े, उनका गाढ़ा वीर्य भी उसी जगह गिरा। पायल बैठे-बैठे उनके पेट और जाँघें सहलाती रही, फिर उठकर तीनों को प्यार से चूमा।

ज़मीन पर चूत और लंड के पानी का छोटा सा गड्ढा बन गया था। पायल का रस पानी जैसा था, और मर्दों का वीर्य गाढ़ा, जैसे पानी पर दही तैर रहा हो। पायल ने बिस्तर से अपनी नाइटी उठाई, उसे उस गड्ढे पर रखा, और पैर से दबाकर पानी सोख लिया।

“ये क्या कर रही हो, बहु?” ससुर जी ने अपना लंड मसलते हुए पूछा। “नाइटी गंदी हो जाएगी।”

“बाद में धो लूँगी, बाबू जी। अभी ऐसे छोड़ दिया, तो दाग पड़ जाएगा,” पायल ने सहजता से जवाब दिया।

पायल फ्रिज से ठंडे पानी की बोतल लाई। सबने पानी पिया। उसने एसी चालू किया और तीनों के साथ पलंग पर लेट गई। नीरज और ससुर जी उसकी बगल में लेटे। नीरज ने उसकी चूची में मुँह सटाया, और ससुर जी ने उसकी काँख में चेहरा छुपाया। रोहित पायल के पेट पर सिर रखकर लेट गया।

“मज़ा आया ना? आप लोग बेकार में हिचक रहे थे,” पायल ने गहरी साँस लेते हुए कहा।

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“पता है, भाभी। जब मैं आपके और पराग भैया के बिस्तर पर आपको चोदता हूँ, तो मुझे ग्लानि होती है,” रोहित ने पायल की करधनी से खेलते हुए कहा। “हम सबके अपने कमरे हैं। फिर आपके शादी वाले बेडरूम में ये सब करना अजीब लगता है।”

“मैं एक शादीशुदा पतिव्रता औरत हूँ, देवर जी,” पायल ने नीरज और ससुर जी का सिर सहलाते हुए कहा। “मेरे लिए ये घर, ये बेडरूम, और ये बिस्तर ही मेरी दुनिया है। मुझे जो करना है, यहीं करना है, चाहे पति के साथ हो या आप लोगों के साथ। अगर मैं आपके, जेठ जी, या ससुर जी के कमरे में जाकर चुदवाऊँ, तो मुझमें और उन रंडियों में क्या फर्क रहेगा, जो मस्ती के लिए अपने पतियों को धोखा देती हैं?”

ससुर जी का दिल भर आया। उन्होंने पायल के होंठ चूमे और बोले, “मेरे नालायक बेटे पराग को एहसास होना चाहिए कि उसे कितनी सुशील बीवी मिली है। बहुत लकी है वो।”

“मैंने कहा ना, बाबू जी, वो मुझे बहुत चाहते हैं,” पायल ने मुस्कुराकर कहा और ससुर जी के होंठों में अपने होंठ मिलाकर चूमने लगी।

नीरज और ससुर जी पायल की जाँघों से अपनी टाँगें रगड़ने लगे। रोहित समझ गया कि दोनों फिर गरम हो रहे हैं। वो पायल के ऊपर से उठकर बिस्तर पर एक तरफ बैठ गया। पायल ने अपने बदन में दो लंडों का घर्षण महसूस किया और समझ गई कि ससुर जी और नीरज का लौड़ा फिर खड़ा हो गया है।

“वाह, जेठ जी। बड़ी जल्दी आपके लंड में जान आ गई। ससुर जी की तरह आप भी वियाग्रा लेने लगे हैं क्या?” पायल ने मज़ाक किया। नीरज ने हँसकर उसकी चूची पर प्यार से थप्पड़ मारा।

पायल ने बाईं करवट ली और अपनी दायीं टाँग ससुर जी की कमर पर चढ़ा दी। ससुर जी समझ गए। उन्होंने अपना 9 इंच का मोटा लंड पकड़ा और पायल की गीली चूत में धीरे-धीरे घुसेड़ दिया। पायल की सिसकारी निकल गई। उसकी पीठ और गाँड़ अब नीरज की ओर थी।

नीरज ने भी समझा कि पायल एक साथ दो लंड लेना चाहती है। उसने पीछे से पायल की गाँड़ की छेद पर अपना लंड सेट किया और धीरे से अंदर डाला। पायल को गाँड़ मरवाने की आदत थी। जब वो पीरियड्स में होती थी, तो ये मर्द उसकी गाँड़ ही चोदा करते थे। उसकी गाँड़ टाइट थी, लेकिन लंड आसानी से अंदर चला गया।

पायल और ससुर जी एक गर्मागर्म फ्रेंच किस में डूब गए। ससुर जी सामने से उसकी चूत में धीमे-धीमे धक्के मार रहे थे। पीछे से नीरज उसकी पीठ और गर्दन चूमते हुए उसकी गाँड़ में लंड पेल रहा था। पायल बीच में सैंडविच बनी चुद रही थी। उसकी करधनी धक्कों से खिसककर उसके पेट तक चढ़ गई थी, और उसके पायल छन-छन बज रहे थे।

रोहित एक तरफ बैठा ये सब देख रहा था। उसका लंड अभी ढीला था। वो अपने लंड का चमड़ा ऊपर-नीचे कर रहा था, लेकिन सुपाड़ा नहीं खोल रहा था। ससुर जी और नीरज पायल को ताबड़तोड़ चोद रहे थे। वो एक लय में चुदाई कर रहे थे—जब ससुर जी का लंड चूत में अंदर जाता, नीरज का लंड गाँड़ से बाहर आता, और फिर उल्टा।

कुछ देर बाद दोनों ने लय बदली। अब दोनों लंड एक साथ चूत और गाँड़ में अंदर-बाहर होने लगे। पायल की सिसकारियाँ तेज़ हो गईं।

“आह्ह… ससुर जी, धीरे… उफ्फ, मम्मी!” पायल चिल्लाई। “जेठ जी… आह्ह… कम से कम आप तो धीरे चोदो!”

पायल को चूत और गाँड़ में चुदाई का अनुभव था, लेकिन एक साथ दोनों में इतनी तेज़ पेलाई पहली बार थी।

“अब पता चला, बहु। ये वियाग्रा का लौड़ा नहीं है,” ससुर जी ने हँसते हुए कहा, और ज़ोर से धक्का मारा।

पायल की चूत और गाँड़ में लगातार धक्के पड़ रहे थे। उसकी साँसें उखड़ रही थीं। रोहित के लिए अब और सहना मुश्किल था। वो पायल के सिरहाने घुटनों पर बैठ गया और अपना लंड पकड़कर मूठ मारने लगा। पायल ने ऊपर देखा, उसकी शैतानी नज़रों से आँख मारी, और उसकी बेचैनी पर मुस्कुराई।

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रोहित का लंड अभी खड़ा भी नहीं हुआ था कि उत्तेजना में उसका वीर्य निकल गया। उसने अपना माल पायल के गालों, चेहरे, और बालों पर छिड़क दिया। पायल ने हँसते हुए उसे देखा।

नीरज अब झड़ने के करीब था। उसने अपना लंड पायल की गाँड़ से निकाला और उसकी गाँड़ पर रगड़ने लगा। ससुर जी ने आखिरी चार ज़ोरदार धक्के मारे और अपना लंड बाहर खींचकर पायल के पेट, चूत, और जाँघों पर गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया। नीरज का लंड भी जवाब दे गया। उसने पायल की कमर पकड़ी और उसकी गाँड़ पर 8-10 धारें छोड़ दीं।

पायल अभी संभल ही रही थी कि नीरज ने अपना झड़ा हुआ लंड फिर से उसकी गाँड़ में डाल दिया और चोदने लगा।

“माल तो गिर गया ना, जेठ जी? अब भी मन नहीं भरा?” पायल ने रोहित का वीर्य अपने चेहरे से पोंछते हुए परेशान होकर कहा। “छोड़ो ना… और कितना पेलोगे?”

नीरज ने जैसे सुना ही नहीं। दो मिनट तक चोदने के बाद उसका लंड ढीला पड़ गया और अपने आप पायल की गाँड़ से बाहर निकल आया। नीरज पायल से अलग होकर बिस्तर पर पस्त होकर लेट गया। दोस्तों, पायल की चुदाई अभी बाकी है, आगे की कहानी अगले भाग में…

कहानी का अगला भाग: अकेली बहु ने घर के सभी लंड संभाले – 2 

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।