मेरा नाम परितोष है और मेरी मामा की बेटी का नाम रेखा है। ये सब कुछ दिनों पहले ही शुरू हुआ था। हमने अपने मामा के घर के पास ही घर खरीद लिया था, 5 साल पहले और ये कहानी गांव की है। मेरा वहां आना-जाना लगा रहता था और मैं पोर्न भी बहुत देखता था।
वैसे पहले रेखा के प्रति ऐसा कुछ नहीं था क्योंकि वो सवाली और पतली थी, एकदम लकड़ी जैसी। लेकिन धीरे-धीरे मुझे उसका वही पतला हड्डी का ढांचा पसंद आने लगा। जब उसकी पतली कलाई और लंबी उंगलियां मेरे हाथ में आतीं तो मेरे अंदर कुछ जाग उठता था। मेरी उम्र 21 साल है और उसकी 18 साल।
वैसे मैं बहुत बार उसे कपड़े बदलते हुए देख चुका था, चोरी-छुपे। दरवाजे की दरार से उसकी पतली पीठ और छोटी सी गांड देखकर मेरे लंड में खिंचाव आ जाता था। लेकिन अब इरादा उसे चोदने का था। मैंने पहले किसी को चोदा नहीं था, सो ये मेरा पहला टाइम था। पूरी प्लानिंग करनी पड़ी और उसे भी मनाना था।

मैंने मामा के घर डेली जाने लगा। जब कोई नहीं होता तो मैं उससे मजाक-मजाक में कभी उसकी दूध दबा देता। उसकी छोटी सी चूचियों पर उंगलियां फेरता तो वो थोड़ी सिकुड़ जाती, लेकिन कुछ नहीं कहती। कभी उसकी गांड पर थप्पड़ मार देता। उसकी पतली गांड पर हाथ पड़ते ही वो चौंकती, लेकिन मुंह से आवाज नहीं निकालती। वो कुछ नहीं बोलती। कभी लिप किस कर देता। उसके पतले होंठ मेरे होंठों से चिपकते तो मुझे उसका हल्का सा स्वाद महसूस होता।
एक दिन दिन में मामा के घर पर कोई नहीं था, तो मैंने हिम्मत करी और उससे पूछा सेक्स वगैरा के बारे में। उसके चेहरे पर हल्की लाली आ गई। उसने बोला, थोड़ा-बहुत पता है। मैंने पूछा, बीएफ है? उसने कहा, नहीं है। कोई इस हड्डी के ढांचे को पसंद नहीं करता। उसकी आवाज में थोड़ी उदासी थी।
मैंने बोला, एक तरीका है इस हड्डी के ढांचे को ठीक करने का। हम बहुत सेक्स करना होगा, मैं दबा-दबा के सब ठीक कर दूंगा। उसकी आंखों में हिचकिचाहट साफ दिख रही थी। पहले उसने मना करा, लेकिन फिर वो मान गई। धीरे-धीरे उसके होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई।

फिर एक दिन जब मेरे घर पर कोई नहीं था, मैंने मामी को बोला कि आज इसे मेरे घर भेज देना रुकने के लिए। मामी ने भेज दिया। मैंने दिन में ही चॉकलेट, तेल और कंडोम का जुगाड़ कर लिया था। चॉकलेट का डिब्बा और तेल की शीशी सावधानी से छुपा रखी थी। वो शाम को ही आ गई। उसकी साड़ी में उसकी पतली कमर और भी साफ दिख रही थी।
रात को खाना खा के हमने स्टार्ट करना सही समझा। दोनों का पहला टाइम था। पहले हमने किस की और एक-दूसरे को 30 मिनट तक सहलाया। मैंने उसके गालों पर होंठ रगड़े तो उसकी सांसें तेज हो गईं। उसकी पतली उंगलियां मेरे सीने पर फिसल रही थीं। मैंने उसकी कमर पकड़ कर खींचा तो उसका हड्डी वाला शरीर मेरे से चिपक गया। उसकी त्वचा ठंडी और चिकनी लग रही थी। उसके पेट की हड्डियां मेरे पेट से टकरा रही थीं।
मैंने उसके कान के पास फुसफुसाया कि आज रात भर तेरी ये पतली चूत को भर दूंगा। वो शर्माकर मुस्कुराने लगी और उसके होंठ मेरे होंठों में और गहरे घुस गए। उसके मुंह से हल्की आह निकली।
फिर मैंने उसके कपड़े खोले। उसने मेरे। वो एकदम स्किनी थी ना, न चूची अच्छी थी न गांड। पर मेरे को चूत तो मिल रही थी। उसकी चूत पर हल्के बाल थे और वो पहले से ही गीली लग रही थी।

मैंने उसके पूरे शरीर को चाटा। उसकी पतली जांघों से लेकर गर्दन तक जीभ फिराई। उसकी त्वचा का स्वाद नमकीन था। फिर उसकी चूत चाटी। उसकी चूत का रस मेरे मुंह में घुल गया।
फिर मैंने अपना लंड उसे मुंह में लेने को कहा। कंडोम लगा के उसने लिया। उसका मुंह छोटा था, इसलिए उसे थोड़ी मुश्किल हो रही थी। मेरा पहला टाइम था तो 5 मिनट में ही झड़ गया। मैंने उसके सिर को पकड़ रखा था। उसने कंडोम हटाया और चाट के माल साफ किया। उसके होंठों पर मेरा माल चिपका हुआ था।
उसके थोड़ी देरी बाद हमने पोर्न देखा, एक्सपीरियंस के लिए। फोन पर वीडियो चलते हुए हम दोनों सांसें रोककर देख रहे थे।

फिर मैं उसकी चूत में डाला। पहले उसे बहुत दर्द हुआ। उसकी आंखें बंद हो गईं और उसने मेरे कंधे को जोर से पकड़ लिया। मैंने उसके मुंह पर मुंह रख लिया और पूरा जोर लगा के एक ही बार में अपना 7 इंच लंबा और 2 इंच मोटा लंड उसकी चूत में डाल दिया। उसकी चूत बहुत टाइट थी।
थोड़े झटके देने के बाद उसकी चूत फट गई। ब्लड आया और चादर पर खून के धब्बे पड़ गए। लेकिन हम रुके नहीं, करते रहे। उसकी पतली कमर मेरे हाथों में कांप रही थी। जब मेरा होने वाला था तो मैंने लंड निकाल लिया और माल उसके फेस पर गिरा दिया। उसके माथे और गालों पर मेरा गाढ़ा माल फैल गया।
उसके बाद थोड़ी देर हमने चुमा। मैंने उसकी गांड चाटी, उसकी छोटी चूचियों को दबाया और उंगलियों से खींचा। ऐसे ही थोड़ी देरी बाद उसको एनल ट्राई करना था।
हमने करने के लिए रेडी हुए। तेल लगाकर उसकी गांड के छेद पर उंगली घुमाई। एनल में मुझे और उसे दोनों को बहुत दर्द हुआ, उसकी टाइट गांड में। लेकिन मजा बहुत आया। उसकी गांड इतनी टाइट थी कि मुझे भी जोर लगाना पड़ा।

उसके बाद मैंने उसकी गांड के अंदर ही झाड़ दिया। फिर थोड़ी देरी बाद मैंने उसकी चाटी और उसे भी झाड़ दिया। उसके बाद सो गया। उसकी पतली पीठ मेरे सीने से लगी हुई थी।
ऐसे ही जब भी चांस मिलता हम करते, कभी मामा के घर पर और कभी मेरे घर पर। लेकिन एक दिन मेरी मामी ने मुझे और उसे पकड़ लिया। क्योंकि अब रेखा का शरीर भी उभर रहा था। उसकी चूची बड़ी हो रही थी, गांड भी बड़ी हो रही थी और चेहरा भी खिल गया था। मामी को शक हो गया।
एक दिन जब मामा के घर पर कोई नहीं था, हमने फिर से किया। लेकिन पता नहीं मामी कैसे चुप-चाप अंदर घर में घुसी और हमें पकड़ लिया। उस टाइम रेखा मेरा लंड चूस रही थी। उसका सिर मेरे लंड पर झुका हुआ था। मामी ने बहुत गुस्सा किया। हम डर गए और उसके बाद हमने नहीं किया।
लेकिन मेरी मामी का नाम था अनिता। उनका मन डोला और उन्होंने मुझे एक दिन अकेले में बुलाया। उन्होंने पूछा कि ये सब क्यों किया तुम दोनों ने। फिर बोलीं, मैं किसी को नहीं बताऊंगी, लेकिन तुझे मेरे साथ भी करना होगा।
मैंने कहा, मामा को पता चला तो? वो बोलीं, उन्होंने पिछले 3 साल से हाथ नहीं लगाया। मेरी मामी की उम्र 39 साल होगी। एकदम मोटी गांड और मोटी चूचे वाली थीं, सफेद रंग की। मैं हिचकिचाया, लेकिन मान गया। रेखा के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, उसे भूल जा, मेरे साथ कर। उनकी आवाज में हल्की कांप थी।
दिन में कोई नहीं था। मामा काम पर थे और रेखा कॉलेज में। मामी ने साड़ी का पल्लू गिराया और मुझे सेड्यूस करने लगीं। उनकी बड़ी चूचियां साड़ी के अंदर से उभर आईं। मैंने भी धीरे-धीरे स्टार्ट कर दिया। दोनों नंगे हुए। उनकी मोटी जांघें और बड़ा पेट साफ दिख रहा था। उनकी सफेद त्वचा मेरे हाथों के नीचे नरम और गर्म लग रही थी।
मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और अपने लंड को उनके मुंह में दिया। फिर 69 पोज में उनकी चूत चाटने लगा। टाइम ज्यादा नहीं था क्योंकि रेखा कॉलेज से आने वाली थी, लेकिन मैं जल्दी नहीं कर रहा था। उनकी चूत में पूरे लंबे बाल थे। मैंने उन्हें साफ करने को कहा और उन्होंने साफ कर दिए। अब उनकी चूत चिकनी और गीली हो गई थी।
मैंने धीरे-धीरे उनकी बगल चाटी, उनकी गर्दन पर किस किया और उनकी बड़ी चूचियों को मुंह में लेकर दूध पिया। उनकी चूचियां मुलायम और भारी थीं। दूध जैसा हल्का स्वाद मेरे मुंह में घुल गया। फिर मैंने उनके ऊपर आकर उनको चोदना शुरू किया। उनकी चूत ढीली थी, इसलिए आसानी से अंदर चला गया। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाए, उनकी मोटी कमर को पकड़कर। वे हल्की-हल्की आहें भर रही थीं।
कुछ देर तक धीरे-धीरे करने के बाद मैंने गति बढ़ाई और माल उनके अंदर ही झाड़ दिया। मामी मोटी थीं तो उनकी हालत इतनी खराब नहीं हुई। टाइम के चलते सब जल्दी हो गया था, फिर भी मैंने पूरा मजा लिया।
उसके बाद मैंने उनकी गांड का छेद चाटा। एकदम मजा आया। वो टाइट थी और मेरे जीभ से सिकुड़ रही थी। मैंने गांड के लिए पूछा तो उन्होंने कहा बाद में। बाकी की कहानी पार्ट 2 में बताऊंगा।
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