Ghar mein chudai sex story: हाय मेरा नाम रिया है। मैं यूपी के गोंडा से हूँ। मेरी उम्र 24 साल है। चार साल हो गए मेरी शादी को। अभी हम लोग पुणे में रहते हैं। मेरे पति का नाम रमेश है। देखने में खूबसूरत हैं, नौजवान हैं। उनका बिजनेस टूर एंड ट्रेवल्स का है। मैं उनके साथ बहुत खुश थी।
मुझे अपने काम से गोंडा जाना पड़ा। वहाँ मेरे भाई की शादी थी। हम दो बहन एक भाई हैं। रमेश मेरे साथ नहीं गए। उन्होंने कहा जब शादी का दिन होगा तब मैं एक दिन पहले चला आऊंगा। मैं गोंडा के लिए निकल गई। जब मैं वहाँ घर पहुँची तो पता लगा कि शादी में अभी एक महीना बाकी है। मैं अपने भाई से मिली जो मुझसे छोटा था। उसका नाम शेखर था। शेखर ने मुझे देखा और कहा, “दीदी तुम आ गई, अच्छा हुआ।” माँ ने भी देखा। सब मुझे देखकर खुश हुए।
हमारे यहाँ तीन कमरे थे। पहला कमरा भाई का था, दूसरा माँ-बाप का और तीसरा एक्स्ट्रा कमरा। जब रात हुई तो हम लोगों ने खाना खाया और खाना खाकर बातें करने लगे। शेखर मुझसे बहुत हँसी-मजाक करता था। पर मेरी नजरों में वह बहुत अच्छा लड़का था। मैं उसे इस नजर से नहीं देखती थी। शेखर और मैं कमरे में ही थे। कुछ पिक्चर टीवी पर चल रही थीं। उसमें एक सीन आया तो शेखर उसे गौर से देखने लगा। मैंने देखा कि शेखर उसे ध्यान से देख रहा है। मैं कुछ न बोली और वहाँ से उठकर अपने कमरे में चली आई। फिर हम लोग सोने चले गए।
रात को तीन बजे जब मुझे प्यास लगी तो पानी पीने गई। तब शेखर का दरवाजा खुला था। मैं दरवाजे के पास जाकर देखने लगी तो शेखर गंदी मूवी लगा कर देख रहा था। और अपने पैंट के ऊपर से अपने लिंग को हिला रहा था। मैं देखकर शॉक हो गई। फिर अपने कमरे में चली आई और सो गई।
फिर सुबह जब मैं नहाने के लिए गई तो मैंने देखा मेरी ब्रा नहीं मिल रही थी। तब मैं आगे वाले कमरे में गई तो मेरी ब्रा शेखर के कपड़ों के साथ मिली। मैंने उस समय भी कुछ नहीं कहा। फिर मैं नहाने चली गई। मैंने देखा कि शेखर मुझे खिड़की से देख रहा है। मैं जानकर अनजान बन गई।
फिर मैं बाहर आई तो देखा मेरे कपड़े नहीं हैं। मैंने सिर्फ पूछा तो उसने बताया कि अम्मा ने अंदर रखे हैं। मैंने दूसरे कपड़े पहन लिए। फिर मैंने नोट किया कि शेखर मेरी फोटो को एक कमरे में मुट्ठ मार रहा था। उसके पास गई और पीछे से देखा। मेरी फोटो उसके हाथ में थी। मैंने उसे कहा, “शेखर यह क्या कर रहे हो?” वह चौंक गया और पसीने-पसीने हो गया। उसने कहा, “दीदी माँ को मत बताना प्लीज।” रोने लगा और बोलने लगा।
मैंने पहली बार शेखर का लंड देखा। इतना बड़ा, मानो कम से कम आठ या नौ इंच का होगा। उसका लंड बाहर झूल रहा था। तब मेरे मन में सेक्स की इच्छा जागी।
मैंने उससे कहा, “शेखर जब से मैं आई हूँ तुझे ही देख रही हूँ। कभी तो मुझे बाथरूम में जाकर देखता है तो कभी बेडरूम में। तो कभी मेरी ब्रा छुपा देता है और आज इस हाल में मिला है।”
शेखर एकदम घबरा गया था। उसने कहा, “दीदी सॉरी। आज के बाद आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा।”
पर मेरे अंदर सेक्स की भावना जाग चुकी थी। अब वो मुझे नहीं, मैं उसे पाना चाहती थी।
फिर एक रोज मैं नहाकर निकली और मैंने अपनी ब्रा छुपाई और शेखर को आवाज देकर बुलाया। मैंने शेखर से कहा, “शेखर मेरी ब्रा कहाँ है बता दो।” उसने कहा, “दीदी मुझे नहीं मालूम कसम से।” मैंने कहा, “नाटक मत करो नहीं तो मैं माँ से जाकर कह दूंगी।” उसने कहा, “कसम से दीदी मुझे नहीं मालूम। आप यकीन करो।”
फिर मैंने उससे कहा, “तुम यहाँ खड़े रहो कहीं माँ न आ जाए। मैं कपड़े बदल लेती हूँ।” अब मैं कपड़े बदलते-बदलते उससे बात कर रही थी। मैंने उसे पूछा, “शेखर तुम मेरी ब्रा क्यों छुपाई थी? सच बताओ।” तब वह हड़बड़ाकर कहा, “दीदी मैंने नहीं छुपाई।” मैंने कहा, “झूठ मत बोलो।” मैंने अपनी ब्रा को बेड के नीचे रख दिया।
इधर देखो जब शेखर मुझे देखने लगा तब मैंने अपनी ब्रा बेड के नीचे से निकाल कर उसे दिखाई। “यह क्या है?” उसका चेहरा लाल-पीला हो गया। “पता नहीं दीदी यह यहाँ कैसे आई। मुझे नहीं मालूम।”
मैंने कहा, “मेरे और भी कपड़े गायब हैं। पता नहीं तुम कहाँ-कहाँ छुपाए हो। सुबह से मैं अपनी पैंटी ढूँढ रही हूँ वह भी नहीं मिल रही।”
मैंने देखा शेखर मुझे ही देख रहा है और मैंने उसके लंड को देखा। पैंट के ऊपर से फूला हुआ था। मैं उसी हालत में शेखर के पास गई और कहा, “शेखर तुम अपनी जेब में छुपाए हो।” मैं शेखर की जेब की तलाशी लेने लगी।
जब मैं शेखर की जेब में हाथ डाला और हाथ घुमाने लगी तभी मेरा हाथ शेखर के लंड को छू गया। शेखर तिलमिला गया। तभी मैंने उसका लंड दबा दिया।
शेखर ने कहा, “दीदी यह क्या कर रही हो?” मैंने कहा, “मैं जानती हूँ तुम क्या चाहते हो।”
फिर मैंने अपने भाई का लंड पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया। वह नशे में आने लगा। मैंने कहा, “शादी से पहले तुम्हें बता दूँ भाभी के साथ कैसा रहना है।” उसका एक हाथ पकड़कर मैंने अपने सीने पर रखा और कहा, “इसे दबाओ।”
वह मेरे सीने को दबाता रहा और मैं नशे में होने लगी। मेरे को नशा चढ़ने लगा। मैंने शेखर का लंड जोर से दबा दिया। उसके मुंह से आह निकल गई।
अब शेखर भी गर्म हो चुका था। उसने मेरा तो लिया खींचकर निकाल दिया और मुझे बेड पर धक्का दे दिया। फिर उसने कहा, “दीदी अब मैं तुमको हकीकत बताता हूँ। मैं तुम्हारी ब्रा को देखकर मुट्ठ मारता था।”
तब मैंने कहा, “मैं सब जानती हूँ।” तब मेरे भाई ने मुझे बेड पर लिटा कर मेरे स्तनों को इतनी जोर से दबाया कि मेरे मुंह से सिसकारियाँ निकलने लगी। उसके मोटे, गरम हाथ मेरी नरम, भारी चूचियों को जकड़कर मलने लगे, उंगलियाँ गद्दीदार मांस में धंसती जा रही थीं। मेरी चूचियाँ लाल हो गईं, निप्पल सख्त होकर खड़े हो गए और हर दबाव के साथ तीखी सी सनसनी मेरी रीढ़ में उतर रही थी। मैं तिलमिला उठी, मेरी कमर खुद-ब-खुद ऊपर को उठने लगी। उसने कहा, “अब तक तो तेरे कपड़ों से खेलता रहा अब तुझसे खेलूँगा।”
तब मैं भी नशे में आ गई और कहा, “भाई क्यों न आज रात में तेरी बीवी बन जाऊँ और जब तक तेरी शादी न हो जाए तब तक मैं तेरी बीवी बनकर यहाँ रहूँ। लेकिन माँ के सामने मुझे बहन ही बोलना।” मेरी आवाज़ में ललक और वासना घुली हुई थी, मेरी साँसें तेज़ हो चुकी थीं। फिर उसने अपने सारे कपड़े उतारे और मेरे से आकर लिपट गया। उसका नंगा, गरम शरीर मेरे ऊपर चिपक गया। पहले तो उसने मेरा स्तन दबाया, अपनी हथेली से पूरी चूची को निचोड़ते हुए, फिर मेरे होंठों पर किस करने लगा। उसके मोटे, गीले होंठ मेरे होंठों को चूसने लगे, जीभ मेरे मुंह के अंदर घुसकर मेरी जीभ से लिपट गई। उसका एक हाथ मेरी चूत पर गया और मेरी चूत को दबाने लगा। उसकी उँगलियाँ मेरी गीली, फूली हुई फुद्दी की लकीरों को सहलाती, बीच में अंगूठा मेरी चुटकी पर दबा रहा था। मेरी चूत से रस टपकने लगा, गीली आवाज़ें आने लगीं।
तब मैंने उसका लंड पकड़ा और जोर से दबा दिया। उसका मोटा, नसों वाला लंड मेरी हथेली में फड़क रहा था, सुपाड़ा पहले से ही चिपचिपा था। मैंने कहा, “अपनी बीवी को चोदोगे नहीं?” उसने कहा, “हाँ जान अभी तुझे चोदता हूँ।” उसकी साँसें गरम और तेज़ थीं। फिर उसने अपना लंड का सुपाड़ा मेरी चूत पर रखा। मेरी फुद्दी की गरम, चिपचिपी होंठों को चीरते हुए सुपाड़ा दबाने लगा। एक जोरदार धक्का दिया जिससे मेरी सिसकारियाँ निकलने लगीं। “भाई निकाल लो बहुत दर्द हो रहा है। मैं मर जाऊंगी भाई प्लीज इसे निकाल दो।” मेरी चूत की दीवारें पहली बार इतने मोटे लंड से फट रही थीं, जलन और दर्द के साथ अंदर तक खिंचाव महसूस हो रहा था। भाई ने और जोर लगाया, धीरे-धीरे लेकिन रुकते हुए अपना मोटा लंड मेरी तंग चूत में धंसाता गया।
“आह आ आआआआआआ ईईईईईई ओफ भाईईईईईई मर गई रे आआआआह ओह उउउउउउऊऊऊऊऊऊ ममममममममम आआआआआह।” मेरी आँखें बंद हो गईं, मुँह खुला रह गया, शरीर पसीने से तर हो रहा था। तब मैंने पहली बार भाई के मुंह से ऐसी गंदी-गंदी गालियाँ सुनीं। “शाली आज तो तुझे ऐसा चोद दूँगा जैसे रंडी की तरह। आज तेरी चूत का भोसड़ा बना दूँगा।” उसकी आवाज़ भारी और कामुक थी।
तब मैंने भी कहा, “देखना है तेरे लंड में कितनी ताकत है। तू कहाँ तक मुझे चोद सकता है।” मेरी चूत अब दर्द के साथ-साथ गर्मी और खुजली महसूस करने लगी थी। तब उसने एक और करारा झटका मारा और पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में उतर चुका था। मार डालेगा। उसके सीने से मेरा सीना चिपका हुआ, उसके होंठों से मेरे होंठ चिपके हुए और मेरी चूत में मेरे भाई का लंड घुसा हुआ। उसके घने बाल मेरी चूत के ऊपर रगड़ खा रहे थे। वह धनाधन मुझे झटके मार रहा था। हर झटके के साथ उसका मोटा लंड मेरी चूत की गहराई तक टकरा रहा था, अंदर की नरम दीवारों को रगड़ता, मेरी गर्भनली तक पहुँचता। मैंने भी कहा, “भाई और जोर से और जोर से झटका दे। मेरी चूत को बना ले अपनी रंडी। देखना है तेरे लंड में कितनी ताकत है।”
उसने अचानक अपनी स्पीड बढ़ा दी। उसका लंड जैसे ही मेरी चूत के अंदर जाता मुझे बहुत मजा आता। वह हर बार जोर-जोर से झटके मारता और मुझे गालियाँ देता। क्या मालूम मुझे उसकी गालियों में क्यों मजा आ रहा था। मेरी चूत का रस उसके लंड पर लगकर सफेद झाग बना रहा था, हर धक्के के साथ ‘पच-पच’ की आवाज़ गूंज रही थी। मेरी चूचियाँ उसके सीने से रगड़ खा रही थीं, निप्पल सख्त होकर चुभ रहे थे। फिर उसने अपना लंड बाहर निकाला और कहा, “मेरी जान में ठंडा होने जा रहा हूँ।”
तब मैंने उसका लंड अपने मुंह में लिया और चूसने लगी। उसका लंड गरम था, मेरी चूत का रस चखते हुए मैंने जोर-जोर से चूसा, जीभ से सुपाड़े को घुमाया, गले तक ले जाकर निगलने लगी। फिर वह मेरे मुंह में ठंडा हो गया। उसके गाढ़े, गरम वीर्य की धार मेरे गले में उतरी, नमकीन और थोड़ी कड़वी स्वाद थी। उसके बाद वह साइड में बैठ गया।
फिर मैं उठी और अपने कपड़े पहने। मेरे शरीर पर अभी भी पिछली रात की चुदाई का हल्का पसीना और खुशबू बाकी थी, जिसे मैंने जल्दी से साफ किया। तब उसने कहा, “दीदी कल तुम वही दुल्हन वाले कपड़े पहनना। जब तुम जीजा जी के साथ जा रही थीं।” तब मैंने कहा, “ठीक है मेरे राजा। कल मैं दुल्हन की तरह तैयार रहूंगी। रात को बारह बजे तुम मेरे कमरे में आ जाना। कल तुम्हें तुम्हारी बहन नहीं तुम्हारी बीवी मिलेगी जिसके साथ तुम सुहागरात मनाओगे।” मेरी आवाज़ में शरारत, प्यार और वासना का मिश्रण था, मेरी आँखें उसकी आँखों में गड़ गई थीं।
और इतना कहकर वह चली गई। फिर मेरी बहन मेरा कपड़ा धोने लगी। फिर घर का और काम किया। रात का खाना बनाया। माँ कहने लगी, “अच्छा हुआ बेटी तू आ गई। मुझे काम से फुर्सत मिली। रमेश जी नहीं आए।” मैंने कहा, “उन्हें काम ज्यादा है। वो शादी के एक दिन पहले आ जाएंगे।” मेरी आवाज़ सामान्य थी लेकिन अंदर से मेरी चूत अभी भी भाई के लंड की याद में सिहर रही थी।
सब खाना खा चुके थे। मैं बर्तन उठाई और किचन में चली गई। रात ग्यारह बज चुके थे। माँ ने कहा, “आज मेरे साथ सो जाओ।” मैं माँ के साथ सोने चली गई। माँ के बगल में लेटे हुए भी मेरे मन में सिर्फ शेखर की छवि घूम रही थी, मेरी चूचियाँ हल्के-हल्के सख्त हो रही थीं।
वहाँ मेरा भाई मेरा इंतजार कर रहा था। वह दो-तीन बार हमारे कमरे के पास आया और चला गया। उसके कदमों की आहट सुनकर मेरी साँसें तेज़ हो जातीं, लेकिन मैं चुपचाप माँ के पास लेटी रही। सुबह मैंने देखा भाई का मूड खराब था। न वह मुझसे बात कर रहा था न वो मेरी तरफ देख रहा था। उसका चेहरा उदास और अधीर था, शायद रात भर इंतजार करने की सजा।
अभी मेरी माँ से कहा, “तुम छुटकी के ससुराल जाओ और उसे लेकर आओ।” माँ ने कहा, “मैं शाम वाली गाड़ी से जाकर उसे ले आती हूँ।” फिर माँ शाम को चली गई। उसका ससुराल तीन सौ किलोमीटर दूर था। माँ ने कहा था, “मुझे दो-तीन दिन लगेंगे। तुम अपनी बहन के पास रहना।” फिर माँ चली गई। घर में अब सिर्फ मैं और शेखर रह गए थे, हवा में गुप्त उत्तेजना भर गई थी।
रात हुई। हमने साथ में खाना खाया। फिर मैं मेरे भाई के रूम में गई। वहाँ वो टीवी देख रहा था। तब मैंने टीवी बंद किया और कहा, “भाई तुम्हें कुछ याद है?” मेरी आँखों में शरारत झलक रही थी। उसने कहा, “हाँ।” फिर मैंने उसे कहा, “मैं आती हूँ तुम बैठो।” पहले तो मैं नहाई। गर्म पानी मेरे नंगे शरीर पर बह रहा था, मेरी चूचियों को सहलाते हुए, मेरी चूत को छूते हुए मैं कल्पना कर रही थी कि जल्द ही शेखर के हाथ वहाँ होंगे। फिर उसके बाद मैंने दुल्हन वाले कपड़े पहने। लाल साड़ी जो मेरी कमर को कसकर लपेट रही थी, ब्लाउज इतना टाइट कि मेरी भरी हुई चूचियाँ उभरकर बाहर आने को बेताब थीं, घूंघट और मांग में सिंदूर, महँदी लगी हथेलियाँ। इसके बाद मैंने श्रृंगार किया। काजल, लिपस्टिक, हार, कर्णफूल, पायल — मैं ऐसे तैयार हुई जैसे मानो मेरी शादी फिर से हुई हो। मेरी चाल में नखरा था, मेरी चूत पहले से ही हल्की गीली हो चुकी थी।
मैंने शेखर को आवाज लगाई। रूम में आ गया। दुल्हन की तरह बैठी हुई थी। उसने रूम बंद किया और मेरे पास आकर बैठ गया।
हम दोनों में बातें होने लगीं। फिर उसने मेरा घूँघट उठाया। उसने कहा, “दीदी तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।”
तब मैंने उसे कहा, “अभी दीदी कहोगे?” “सॉरी भूल गया था।” तब मैंने कहा, “जान कहो।” शेखर ने कहा, “जान बहुत खूबसूरत लग रही हो।” उसकी आँखों में भूख साफ झलक रही थी, उसकी नजर मेरी लाल साड़ी में छिपी चूचियों और कमर पर बार-बार अटक रही थी।
और वह मुझसे चिपक गया। तब मैंने उसे कहा, “अभी तो पूरी रात बाकी है।” मेरी साँसें गरम हो चुकी थीं, मेरी चूत में हल्की-हल्की सिहरन दौड़ रही थी। फिर मैंने शेखर से पूछा, “अच्छा एक बात बताओ। तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या तुमने किसी को चोदा है?” मेरे भाई ने कहा, “मैं तीन-चार लड़कियों को चोद चुका हूँ।” उसकी बात सुनकर मेरी चूत और गीली हो गई।
मैंने शेखर से कहा, “पति-पत्नी कैसे रहते हैं तुम्हें मालूम है?” शेखर ने कहा, “नहीं।” तब मैंने कहा, “सुनते हो जी बोलना। जब तक मैं तुम्हारी पत्नी बनी हूँ।” शेखर ने कहा, “ठीक है।” एक रात में मैंने उसे बहुत कुछ सिखाया। मैंने उसे चूमते हुए, छूते हुए, अपनी चूचियाँ उसके हाथों में थमाते हुए पति-पत्नी की सुहागरात की सारी बातें बताईं।
फिर शेखर मुझे पीछे से आकर पकड़ लिया। उसकी मजबूत बाहें मेरी कमर को जकड़कर खींचने लगीं, उसका सख्त लंड मेरी साड़ी के ऊपर से मेरी गांड पर रगड़ खाने लगा। फिर वो धीरे-धीरे मेरे कपड़े निकालने लगा। पहले साड़ी का पल्लू खींचकर गिराया, फिर ब्लाउज के हुक खोलते हुए मेरी भारी चूचियों को आजाद किया। मुझे अपनी बाहों में कसकर पकड़ लिया। मैंने शेखर से कहा, “मैं आपकी पत्नी हूँ आराम से।” मेरी आवाज़ नखरेवाली थी। फिर शेखर ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। मुझे पूरा नंगा कर दिया। मेरी चूचियाँ, चूत और गांड सब खुलकर उसके सामने थे। फिर मैंने शेखर के पूरे कपड़े उतार दिए। उसका मोटा, नसों भरा लंड तना हुआ खड़ा था, सुपाड़ा चमक रहा था।
अब शेखर मुझे किस करने लगा। उसके गर्म होंठ मेरे होंठों को चूसने लगे, जीभ मेरे मुंह में घुसकर लिपट गई। अपने हाथ में मेरा हाथ दबाने लगा और मेरे दोनों हाथों को मेरे पीछे करके कसकर पकड़ लिया। मेरा सीना और आगे निकल चुका। शेखर मेरी गांड पर हाथ रखने लगा और दबाने लगा। उसकी उँगलियाँ मेरी नरम, गोल गांड के बीच में सरक रही थीं। मैंने भी शेखर के लंड को दबाना शुरू कर दिया। उसका गरम, फड़कता लंड मेरी हथेली में कसकर पकड़ा, मैं ऊपर-नीचे हिलाने लगी।
उसने मुझे बेड पर धक्का दिया। फिर मेरे ऊपर आ गया। उसने अपने हाथों से मेरे हाथों को दबाया। मेरे पैरों को अपने पैरों से दबाया। फिर उसने अपना लंड मेरी चूत पर रखकर जोर से दबाया। मेरा सुपाड़ा मेरी गीली चूत की फांकों को चीरता हुआ अंदर घुसने लगा। मैं चिल्लाई। “आह्ह्ह… शेखर धीरे…!”
मगर उसने मेरा मुंह बंद कर दिया। उसे अपना लंड मेरी चूत में उतार दिया। पूरा का पूरा मोटा लंड एक जोरदार धक्के में मेरी तंग चूत में समा गया। मैं चिल्लाती रही। मगर वो नहीं सुन रहा था। न जाने आज उससे क्या मिल गया था। वह मुझे चोदता चला जा रहा था। उसके तेज़-तेज़ झटके मेरी चूत को फाड़ रहे थे, हर धक्के पर ‘पच-पच’ की आवाज़ गूंज रही थी।
हम दोनों पसीने में भर चुके थे। अचानक उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी। मुझे दर्द हो रहा था। “शेखर अब मुझे छोड़ दो।” उसने कहा, “आगे तो बहुत रात बाकी है।” फिर वो मुझे चोदता चला गया। कभी वह मेरे होंठ को काटता तो कभी मेरे स्तनों को काटता। उसके दाँत मेरी चूचियों पर गड़ते, निप्पल चूसते और काटते। उसने एक घंटे में मेरी हालत खराब कर दी। मेरी चूत लाल हो गई थी, रस और पसीने से तर, लेकिन मजा भी बहुत आ रहा था।
अभी तो पूरी रात बाकी थी। ऐसा तो रमेश ने भी नहीं किया था। आज मुझे बहुत मजा आ रहा था। पंद्रह-बीस मिनट बाद वह ठंडा हुआ। मेरी जान में जान आई। मैंने कहा, “अब यह कुछ शांत रहेगा।” मगर दस मिनट बाद वह फिर आ गया। मैं नंगी थी। मेरी चूत अभी भी फड़क रही थी, उसका वीर्य मेरी जांघों पर बह रहा था।
उसने मुझे पलटा किया। मेरी गांड पर लंड रखकर धक्का दिया। उसका मोटा, चिपचिपा सुपाड़ा मेरी कसी हुई गांड की सुराख पर दबने लगा, धीरे-धीरे फैलाता हुआ अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था। मैं जोर से चिल्लाई, “शेखर मुझे छोड़ दो बहुत दर्द हो रहा है। मर गई।” पर वह मेरी कहाँ सुनने वाला था। आज तक कभी रमेश ने मेरी गांड नहीं मारी।
आज पहली बार मेरा भाई मेरी गांड मार रहा था। फिर शेखर और जोर से झटका दिया। उसका पूरा लंड मेरी गांड में उतर गया। मेरी गांड की दीवारें फटने जैसा दर्द दे रही थीं, लेकिन अंदर तक भराव का अजीब सा सुख भी महसूस हो रहा था। मैं रोने लगी और शेखर से विनती करने लगी, “मुझे छोड़ दो।” पर शेखर कहाँ मानने वाला था। उसने अपनी स्पीड और बढ़ा दी। हर झटके के साथ उसके कड़े लंड की नसें मेरी गांड के अंदर रगड़ खातीं, पसीना टपकता, ‘थप-थप’ की आवाज़ कमरे में गूंजती।
मैं निढाल हो चुकी थी। शेखर जैसे ही धक्का मारता मेरे मुंह से आवाजें निकल जातीं। शेखर ने मुझे कसकर पकड़ा और जोर का धक्का दिया। उसके बाद मेरी गांड में ही अपना पानी छोड़ दिया। गाढ़ा, गरम वीर्य मेरी गांड के अंदर भर गया, कुछ बाहर निकलकर जांघों पर बहने लगा। मैं रो रही थी।
और शेखर मुझे देखकर बोला, “आज तुम मेरी बीवी हो और अभी रात बाकी है।”
तब मैंने कहा गुस्से से, “शेखर तुम क्या मुझे रंडी समझते हो जो चोदते चले जा रहे हो। अब मुझसे सहन नहीं होता है।” मेरी आवाज़ थकी हुई लेकिन कामुक थी।
उसने मेरा हाथ पकड़ा और बेड पर पटक दिया। और कहा, “आज तुझे जो समझना है समझ। आज की रात मेरी रात है।” फिर उसने कसकर मुझे अपने ऊपर लिटा दिया। मेरी चूचियाँ उसके सीने से दब रही थीं, मेरी चूत उसके पेट पर रगड़ खा रही थी।
मैं मन ही मन सोच रही थी कि आज कहाँ फंस गई। मैंने शेखर से कहा, “अब कल करेंगे प्लीज मुझे जाने दो।”
शेखर ने कहा, “आज तुम मेरी पत्नी हो। आज मेरे जो जी में आएगा वह करूँगा।” मैंने कहा, “मैं कोई रंडी नहीं जो तुम रात भर करते रहो। तुम्हारी बहन हूँ।” फिर उसने पकड़ा और रात भर मेरे साथ जबरदस्ती करता रहा। मैं मना करती रही। और वह करता रहा। कभी मेरे स्तनों को दबाता, कभी मेरे बदन पर अपने दाँत काटता। कभी मेरे हाथों को काटता। उसके झटके कभी चूत में, कभी गांड में, कभी मुंह में पड़ रहे थे। मेरी चूचियाँ लाल निशानों से भर गईं, मेरी चूत और गांड सूज गईं, लेकिन हर धक्के के साथ अनचाहा सुख भी शरीर को झनझना रहा था।
अब मुझे वह भाई नहीं शैतान दिखने लगा। सुबह तक उसने मेरी हालत इतनी खराब कर दी कि मैं क्या बताऊँ। पता नहीं यह शादी के बाद अपनी औरत का क्या हाल करेगा। मुझे तरस आ रहा है इसकी औरत पर जो इससे शादी करेगी।
आगे की कहानी अगले भाग में बताऊंगी। आप लोगों को कैसी लगी मेरी यह स्टोरी? आप मुझे कमेंट करके बताना।